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आईपीसी की धारा 474 | धारा 466 या 467 में वर्णित दस्तावेज को, उसे कूटरचित जानते हुये और उसे असली के रूप में उपयोग में लाने का आशय रखते हुये, कब्जे में रखना | IPC Section- 474 in hindi| Having possession of document described in Section 466 or 467, knowing it to be forged and intending to use it as genuine.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 474 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 474 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 474 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 474 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई धारा 466 या 467 में वर्णित दस्तावेज को, उसे कूटरचित जानते हुये और उसे असली के रूप में उपयोग में लाने का आशय रखते हुये, कब्जे में रखेगा, तो वह धारा 474 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 474 के अनुसार

धारा 466 या 467 में वर्णित दस्तावेज को, उसे कूटरचित जानते हुये और उसे असली के रूप में उपयोग में लाने का आशय रखते हुये, कब्जे में रखना-

जो कोई किसी दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख को, उसे कूटरचित जानते हुये और यह आशय रखते हुये कि वह कपटपूर्वक या बेईमानी से असली रूप में उपयोग में लाया जाएगा, अपने कब्जे में रखेगा, यदि वह दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख इस संहिता की धारा 466 में वर्णित भांति का हो, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, तथा यदि वह दस्तावेज धारा 467 में वर्णित भांति की हो तो वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Having possession of document described in Section 466 or 467, knowing it to be forged and intending to use it as genuine-
Whoever has in his possession any document or electronic record knowing the same to be forged, and intending that the same shall fraudulently or dishonestly be used as genuine, shall, if the document or electronic record is one of the description mentioned in Section 466 of this Code,] be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine; and if the document is one of the description mentioned in Section 467, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description, for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

किसी दस्तावेज को, उसे कूटरचित जानते हुए इस आशय से कि उसे असली के रूप में उपयोग में लाया जाए अपने कब्जे में रखना, यदि वह दस्तावेज भारतीय दण्ड संहिता की धारा 466 में वर्णित भांति की हो।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
यदि वह दस्तावेज भारतीय दण्ड संहिता की धारा 467 में वर्णित भांति की हो ।
सजा- आजीवन कारावास या सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 474 के अंतर्गत जो कोई किसी दस्तावेज को, उसे कूटरचित जानते हुए इस आशय से कि उसे असली के रूप में उपयोग में लाया जाए अपने कब्जे में रखना, यदि वह दस्तावेज भारतीय दण्ड संहिता की धारा 466 में वर्णित भांति की हो, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा। यदि वह दस्तावेज भारतीय दण्ड संहिता की धारा 467 में वर्णित भांति की हो, तो वह आजीवन कारावास या सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माने से दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 474 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी दस्तावेज को, उसे कूटरचित जानते हुए इस आशय से कि उसे असली के रूप में उपयोग में लाया जाए अपने कब्जे में रखना, यदि वह दस्तावेज भारतीय दण्ड संहिता की धारा 466 में वर्णित भांति की हो।सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा
यदि वह दस्तावेज भारतीय दण्ड संहिता की धारा 467 में वर्णित भांति की हो।आजीवन कारावास या सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 474 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 473 | अन्यथा दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से कूटकृत मुद्रा, आदि का बनाना या कब्जे में रखना | IPC Section- 473 in hindi| Making or possessing counterfeit seal, etc., with intent to commit forgery punishable otherwise.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 473 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 473 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 473 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 473 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी मुद्रा, पट्टी या छाप लगाने के अन्य उपकरण को इस आशय से बनायेगा, या उसकी कूटकृति करेगा कि उसे कोई ऐसी कूटरचना करने के प्रयोजन के लिये उपयोग में लाया जाये, जो धारा 467 से भिन्न इस अध्याय की किसी धारा के अधीन दण्डनीय है, या इस आशय से किसी ऐसी मुद्रा, पट्टी या अन्य उपकरण को, उसे कूटकृत जानते हुये अपने कब्जे में रखेगा, तो वह धारा 473 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 473 के अनुसार

अन्यथा दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से कूटकृत मुद्रा, आदि का बनाना या कब्जे में रखना-

जो कोई किसी मुद्रा, पट्टी या छाप लगाने के अन्य उपकरण को इस आशय से बनायेगा, या उसकी कूटकृति करेगा कि उसे कोई ऐसी कूटरचना करने के प्रयोजन के लिये उपयोग में लाया जाये, जो धारा 467 से भिन्न इस अध्याय की किसी धारा के अधीन दण्डनीय है, या इस आशय से किसी ऐसी मुद्रा, पट्टी या अन्य उपकरण को, उसे कूटकृत जानते हुये अपने कब्जे में रखेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Making or possessing counterfeit seal, etc., with intent to commit forgery punishable otherwise-
Whoever makes or counterfeits any seal, plate or other instrument for making an impression, intending that the same shall be used for the purpose of committing any forgery which would be punishable under any section of this Chapter other than Section 467, or, with such intent, has in his possession any such seal, plate or other instrument, knowing the same to be counterfeit, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 467 के अधीन दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से मुद्रा, पट्टी, आदि बनाना या उनकी कूटकृति तैयार करना अथवा किसी ऐसी मुद्रा, पट्टी आदि को, उसे कूटकृत जानते हुए, वैसे आशय से अपने कब्जे में रखना ।।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 473 के अंतर्गत जो कोई किसी मुद्रा, पट्टी या छाप लगाने के अन्य उपकरण को इस आशय से बनायेगा, या उसकी कूटकृति करेगा कि उसे कोई ऐसी कूटरचना करने के प्रयोजन के लिये उपयोग में लाया जाये, जो धारा 467 से भिन्न इस अध्याय की किसी धारा के अधीन दण्डनीय है, या इस आशय से किसी ऐसी मुद्रा, पट्टी या अन्य उपकरण को, उसे कूटकृत जानते हुये अपने कब्जे में रखेगा, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 473 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
भारतीय दण्ड संहिता की धारा 467 के अधीन दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से मुद्रा, पट्टी, आदि बनाना या उनकी कूटकृति तैयार करना अथवा किसी ऐसी मुद्रा, पट्टी आदि को, उसे कूटकृत जानते हुए, वैसे आशय से अपने कब्जे में रखना।सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 473 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 472 | धारा 467 के अधीन दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से कूटकृत मुद्रा, आदि का बनाना या कब्जे में रखना | IPC Section- 472 in hindi| Making or possessing counterfeit seal, etc., with intent to commit forgery punishable under Section 467.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 472 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 472 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 472 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 472 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी मुद्रा, पट्टी या छाप लगाने के अन्य उपकरण को इस आशय से – बनायेगा या उसकी कूटकृति तैयार करेगा कि उसे कोई ऐसी कूटरचना करने के प्रयोजन के लिये उपयोग में लाया जाये जो, इस संहिता की धारा 467 के अधीन दण्डनीय है, या इस आशय से, किसी ऐसी मुद्रा, पट्टी या अन्य उपकरण को, उसे कूटकृत जानते हुये अपने कब्जे में रखेगा, तो वह धारा 472 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 472 के अनुसार

धारा 467 के अधीन दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से कूटकृत मुद्रा, आदि का बनाना या कब्जे में रखना-

जो कोई किसी मुद्रा, पट्टी या छाप लगाने के अन्य उपकरण को इस आशय से बनायेगा या उसकी कूटकृति तैयार करेगा कि उसे कोई ऐसी कूटरचना करने के प्रयोजन के लिये उपयोग में लाया जाये जो, इस संहिता की धारा 467 के अधीन दण्डनीय है, या इस आशय से, किसी ऐसी मुद्रा, पट्टी या अन्य उपकरण को, उसे कूटकृत जानते हुये अपने कब्जे में रखेगा, वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Making or possessing counterfeit seal, etc., with intent to commit forgery punishable under Section 467-
Whoever makes or counterfeits any seal, plate or other instrument for making an impression, intending that, the same shall be used for the purpose of committing any forgery which would be punishable under Section 467 of this Code, or, with such intent, has in his possession any such seal, plate or other instrument, knowing the same to be counterfeit, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 467 के अधीन दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से मुद्रा, पट्टी, आदि बनाना या उनकी कूटकृति तैयार करना अथवा किसी ऐसी मुद्रा, पट्टी आदि को, उसे कूटकृत जानते हुए, वैसे आशय से अपने कब्जे में रखना।
सजा- आजीवन कारावास या सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 472 के अंतर्गत जो कोई किसी मुद्रा, पट्टी या छाप लगाने के अन्य उपकरण को इस आशय से बनायेगा या उसकी कूटकृति तैयार करेगा कि उसे कोई ऐसी कूटरचना करने के प्रयोजन के लिये उपयोग में लाया जाये जो, इस संहिता की धारा 467 के अधीन दण्डनीय है, या इस आशय से, किसी ऐसी मुद्रा, पट्टी या अन्य उपकरण को, उसे कूटकृत जानते हुये अपने कब्जे में रखेगा, तो वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 472 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
भारतीय दण्ड संहिता की धारा 467 के अधीन दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से मुद्रा, पट्टी, आदि बनाना या उनकी कूटकृति तैयार करना अथवा किसी ऐसी मुद्रा, पट्टी आदि को, उसे कूटकृत जानते हुए, वैसे आशय से अपने कब्जे में रखना।आजीवन कारावास या सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 472 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 471 | कूटरचित दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख का असली के रूप में उपयोग में लाना | IPC Section- 471 in hindi| Using as genuine a forged document or electronic record.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 471 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 471 (IPC Section- 471 in hindi) के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 471 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 471 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई झूठे या कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग इस उद्देश्य से करता है, कि वह वित्तीय लेन-देन, गैर-क़ानूनी व्यवहार, जमीन खरीदने, नौकरी पाने, पासपोर्ट बनवाने, या अन्य किसी भी लाभ के लिये कूटरचना करता है, तो वह धारा 471 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

जो कोई व्यक्ति झूठे दस्तावेजों का उपयोग किसी लाभ के उद्देश्य से करता है, तो वह इस IPC Section- 471 in hindi के अन्तर्गत दोषी होगा।

आईपीसी की धारा 471 के अनुसार

कूटरचित दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख का असली के रूप में उपयोग में लाना-

जो कोई किसी ऐसी दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख को, जिसके बारे में वह यह जानता या विश्वास करने का कारण रखता हो कि वह कूटरचित दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख है, कपटपूर्वक या बेईमानी से असली के रूप में उपयोग में लाएगा, वह उसी प्रकार दण्डित किया जायेगा मानो उसने ऐसी दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख की कूटरचना की हो।

Using as genuine a forged document or electronic record-

Whoever fraudulently or dishonestly uses as genuine any document or electronic record which he knows or has reason to believe to be a forged document or electronic record, shall be punished in the same manner as if he had forged such document or electronic record.

लागू अपराध

कूटरचित दस्तावेज को, जिसके बारे में ज्ञात है कि वह कूटरचित है, असली के रूप में उपयोग में लाना।
सजा- ऐसी दस्तावेज की कूटरचना के लिए दंड।
जब कूटरचित दस्तावेज केंद्रीय सरकार का वचनपत्र हैं।
सजा- ऐसी दस्तावेज की कूटरचना के लिए दंड।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 471 के अंतर्गत जो कोई किसी ऐसी दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख को, जिसके बारे में वह यह जानता या विश्वास करने का कारण रखता हो कि वह कूटरचित दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख है, कपटपूर्वक या बेईमानी से असली के रूप में उपयोग में लाएगा, तो वह उसी प्रकार दण्डित किया जायेगा मानो उसने ऐसी दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख की कूटरचना की हो।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 471 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
कूटरचित दस्तावेज को, जिसके बारे में ज्ञात है कि वह कूटरचित है, असली के रूप में उपयोग में लाना।ऐसी दस्तावेज की कूटरचना के लिए दंड।संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा
जब कूटरचित दस्तावेज केंद्रीय सरकार का वचनपत्र हैं।ऐसी दस्तावेज की कूटरचना के लिए दंड।संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 471 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 470 | कूटरचित दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख | IPC Section- 470 in hindi | Forged document or electronic record.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 470 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 470? साथ ही हम आपको IPC की धारा 470, क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 470 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 470 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय दंड संहिता की धारा 470 कूटरचित दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख (Forged document or electronic record) को परिभाषित किया गया है, इस लेख के माध्यम से समझने का प्रयास करेंगे।

आईपीसी की धारा 470 के अनुसार

कूटरचित दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख-

वह मिथ्या दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख जो पूर्णतः या भागतः कूटरचना द्वारा रची गयी है, “कूटरचित दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख” कहलाती है।

Forged document or electronic record-
A false document or electronic record made wholly or in part by forgery is designated “a forged document or electronic record”.

कूटरचित दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख क्या है?

साधारण भाषा में कूटरचित दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख (Forged document or electronic record), वह झूठे दस्तावेज या झूठे इलैक्ट्रानिक अभिलेख अथवा दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख जो कपटपूर्वक छल हेतु रची जाती है, इसे ही कूटरचित दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख (Forged document or electronic record) कहते है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 470 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
धन्यवाद

आईपीसी की धारा 489 | क्षति कारित करने के आशय से सम्पत्ति-चिन्ह को बिगाड़ना | IPC Section- 489 in hindi| Tampering with property mark with intent to cause injury.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 489 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 489 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 489 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 489 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी सम्पत्ति-चिन्ह को, यह आशय रखते हुए, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह तद्द्वारा किसी व्यक्ति को क्षति करे, किसी सम्पत्ति-चिन्ह को अपसारित करेगा, नष्ट करेगा, विरूपित करेगा या उसमें कुछ जोड़ेगा, तो वह धारा 489 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 489 के अनुसार

क्षति कारित करने के आशय से सम्पत्ति-चिन्ह को बिगाड़ना-

जो कोई किसी सम्पत्ति-चिन्ह को, यह आशय रखते हुए, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह तद्द्वारा किसी व्यक्ति को क्षति करे, किसी सम्पत्ति-चिन्ह को अपसारित करेगा, नष्ट करेगा, विरूपित करेगा या उसमें कुछ जोड़ेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Tampering with property mark with intent to cause injury-
Whoever removes, destroys, defaces or adds to any property mark, intending or knowing it to be likely that he may thereby cause injury to any person, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to one year, or with fine, or with both.

लागू अपराध

क्षति कारित करने के आशय से किसी सम्पत्ति चिह्न को मिटाना, नष्ट करना या विरूपित करना।
सजा- एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 489 के अंतर्गत जो कोई किसी सम्पत्ति-चिन्ह को, यह आशय रखते हुए, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह तद्द्वारा किसी व्यक्ति को क्षति करे, किसी सम्पत्ति-चिन्ह को अपसारित करेगा, नष्ट करेगा, विरूपित करेगा या उसमें कुछ जोड़ेगा, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा या जुर्माने से या दोनो से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 489 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
क्षति कारित करने के आशय से किसी सम्पत्ति चिह्न को मिटाना, नष्ट करना या विरूपित करना।एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 489 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।