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आईपीसी की धारा 469 | ख्याति को अपहानि पहुँचाने के आशय से कूटरचना | IPC Section- 469 in hindi| Forgery for purpose of harming reputation.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 469 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 469 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 469 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 469 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई कूटरचना इस आशय से करेगा कि वह दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख जिसकी कूटरचना की जाती है, किसी पक्षकार की ख्याति की अपहानि करेगा, तो वह धारा 469 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 469 के अनुसार

ख्याति को अपहानि पहुँचाने के आशय से कूटरचना-

जो कोई कूटरचना इस आशय से करेगा कि वह दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख जिसकी कूटरचना की जाती है, किसी पक्षकार की ख्याति की अपहानि करेगा, या यह सम्भाव्य जानते हुये करेगा कि इस प्रयोजन से उसका उपयोग किया जाये, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Forgery for purpose of harming reputation-
Whoever commits forgery, intending that the document or electronic record forged shall harm the reputation of any party, or knowing that it is likely to be used for that purpose, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

किसी व्यक्ति की ख्याति को अपहानि पहुंचाने के प्रयोजन से या यह संभाव्य जानते हुए कि इस प्रयोजन से उसका उपयोग किया जाएगा, की गई कूटरचना।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 469 के अंतर्गत जो कोई कूटरचना इस आशय से करेगा कि वह दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख जिसकी कूटरचना की जाती है, किसी पक्षकार की ख्याति की अपहानि करेगा, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 469 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी व्यक्ति की ख्याति को अपहानि पहुंचाने के प्रयोजन से या यह संभाव्य जानते हुए कि इस प्रयोजन से उसका उपयोग किया जाएगा, की गई कूटरचना।तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 469 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 467 | मूल्यवान प्रतिभूति, विल इत्यादि की कूटरचना | IPC Section- 467 in hindi| Forgery of valuable security, will, etc.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 467 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 467 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 467 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 467 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी मूल्यवान प्रतिभूति, विल या विल या पुत्र के दत्तकग्रहण का प्राधिकार होना तात्पर्यित हो अथवा जिसका किसी मूल्यवान् प्रतिभूति की रचना या अन्तरण का, या उस पर के मूलधन, ब्याज या लाभांश को प्राप्त करने का, या किसी धन, जंगम सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति इत्यादि की कूटरचना करेगा, तो वह धारा 467 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 467 के अनुसार

मूल्यवान प्रतिभूति, विल इत्यादि की कूटरचना-

जो कोई किसी ऐसे दस्तावेज की, जिसका कोई मूल्यवान प्रतिभूति या विल या पुत्र के दत्तकग्रहण का प्राधिकार होना तात्पर्यित हो अथवा जिसका किसी मूल्यवान् प्रतिभूति की रचना या अन्तरण का, या उस पर के मूलधन, ब्याज या लाभांश को प्राप्त करने का, या किसी धन, जंगम सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति को प्राप्त करने या परिदत्त करने का प्राधिकार होना तात्पर्यित हो, अथवा किसी दस्तावेज को, जिसका धन दिये जाने की अभिस्वीकृति करने वाला निस्तारणपत्र या रसीद होना या किसी जंगम सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति के परिदान के लिए निस्तारण पत्र या रसीद होना तात्पर्यित हो, कूटरचना करेगा, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Forgery of valuable security, will, etc-
Whoever forges a document which purports to be a valuable security, or a will, or an authority to adopt a son, or which purports to give authority to any person to make or transfer any valuable security, or to receive the principal, interest or dividends thereon, or to receive or deliver any money, movable property, or valuable security, or any document purporting to be an acquittance or receipt acknowledging the payment of money, or an acquittance or receipt for the delivery of any movable property or valuable security, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

मूल्यवान प्रतिभूति, विल या किसी मूल्यवान प्रतिभूति की रचना या अंतरण के प्राधिकार, अथवा किसी धन आदि को प्राप्त करने के लिए प्राधिकार की कूटरचना।
सजा- आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
जब मूल्यवान प्रतिभूति केंद्रीय सरकार का वचनपत्र है।
सजा- आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 467 के अंतर्गत जो कोई किसी मूल्यवान प्रतिभूति, विल या विल या पुत्र के दत्तकग्रहण का प्राधिकार होना तात्पर्यित हो अथवा जिसका किसी मूल्यवान् प्रतिभूति की रचना या अन्तरण का, या उस पर के मूलधन, ब्याज या लाभांश को प्राप्त करने का, या किसी धन, जंगम सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति इत्यादि की कूटरचना करेगा, तो वह आजीवन कारावास से या दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा। यदि किसी व्यक्ति व्दारा ने मूल्यवान प्रतिभूति केंद्रीय सरकार का वचनपत्र मे कूटरचना की है तो वह भी आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना से दण्डित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 467 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
मूल्यवान प्रतिभूति, विल या किसी मूल्यवान प्रतिभूति की रचना या अंतरण के प्राधिकार, अथवा किसी धन आदि को प्राप्त करने के लिए प्राधिकार की कूटरचना।आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।गैर-संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा
जब मूल्यवान प्रतिभूति केंद्रीय सरकार का वचनपत्र है।आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 467 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 466 | न्यायालय के अभलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना | IPC Section- 466 in hindi| Forgery of record of Court or of public register, etc.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 466 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 466 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 466 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 466 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई ऐसे दस्तावेज की या ऐसे इलैक्ट्रानिक अभिलेख की जिसका कि किसी न्यायालय का या न्यायालय में अभिलेख या कार्यवाही होना है, कूटरचना करेगा, तो वह धारा 466 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 466 के अनुसार

न्यायालय के अभलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना –

जो कोई ऐसे दस्तावेज की या ऐसे इलैक्ट्रानिक अभिलेख की जिसका कि किसी न्यायालय का या न्यायालय में अभिलेख या कार्यवाही होना या जन्म, बपतिस्मा, विवाह या अन्त्येष्टि का रजिस्टर, या लोक-सेवक द्वारा लोक सेवक के नाते रखा गया रजिस्टर होना तात्पर्यित हो, अथवा किसी प्रमाणपत्र की या ऐसी दस्तावेज की, जिसके बारे में यह तात्पर्यित हो कि वह किसी लोक सेवक द्वारा उसकी पदीय हैसियत में रची गई हैं, या जो किसी वाद को संस्थित करने या वाद में प्रतिरक्षा करने का, उसमें कोई कार्यवाही करने का, या दावा संस्वीकृत कर लेने का, प्राधिकार हो या कोई मुख्तारनामा हो, कूटरचना करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “रजिस्टर” के अंतर्गत सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (द) में परिभाषित इलैक्ट्रानिक रूप में रखी गई कोई सूची, डाटा या किसी प्रविष्टि का अभिलेख भी है।

Forgery of record of Court or of public register, etc-
Whoever forges a document, or an electronic record], purporting to be a record or proceeding of or in a Court of Justice, or a register of birth, baptism, marriage or burial, or a register kept by public servant as such, or a certificate or document purporting to be made by a public servant in his official capacity, or an authority to institute or defend a suit, or to take any proceedings therein, or to confess judgement, or a power of attorney, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.
Explanation- For the purposes of this section, “register” includes any list, data or record of any entries maintained in the electronic form as defined in clause (r) of sub-section (1) of Section 2 of the Information Technology Act, 2000.

लागू अपराध

न्यायालय के अभिलेख या जन्मों के रजिस्टर आदि की, जो लोक सेवक द्वारा रखा जाता है, कूटरचना।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 466 के अंतर्गत जो कोई ऐसे दस्तावेज की या ऐसे इलैक्ट्रानिक अभिलेख की जिसका कि किसी न्यायालय का या न्यायालय में अभिलेख या कार्यवाही होना है, कूटरचना करेगा, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 466 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
न्यायालय के अभिलेख या जन्मों के रजिस्टर आदि की, जो लोक सेवक द्वारा रखा जाता है, कूटरचना।सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।गैर-संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 466 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 465 | कूटरचना के लिये दण्ड | IPC Section- 465 in hindi| Punishment for forgery.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 465 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 465 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 465 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 465 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई कूटरचना करेगा, तो वह धारा 465 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 465 के अनुसार

कूटरचना के लिये दण्ड-

जो कोई कूटरचना करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Punishment for forgery-
Whoever commits forgery shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

कूटरचना।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 465 के अंतर्गत जो कोई कूटरचना करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 465 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
कूटरचना।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 465 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 464 | मिथ्या दस्तावेज रचना| IPC Section- 464 in hindi | Making a false document.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 464 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 464? साथ ही हम आपको IPC की धारा 464, क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 464 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 464 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय दंड संहिता की धारा 464 मिथ्या दस्तावेज रचना (Making a false document) को परिभाषित किया गया है, इस लेख के माध्यम से समझने का प्रयास करेंगे।

आईपीसी की धारा 464 के अनुसार

मिथ्या दस्तावेज रचना-

उस व्यक्ति के बारे में यह कहा जाता है कि वह व्यक्ति मिथ्या दस्तावेज या मिथ्या इलेक्ट्रानिक अभिलेख रचता है:
पहला- जो बेईमानी से या कपटपूर्वक इस आशय से –
(क) किसी दस्तावेज को या दस्तावेज के भाग को रचित, हस्ताक्षरित, मुद्रांकित या निष्पादित करता है;
(ख) किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख को या किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख के भाग को रचित या पारेषित करता है;
(ग) किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख पर कोई [इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर] लगाता है;
(घ) किसी दस्तावेज के निष्पादन का या ऐसे व्यक्ति या 4 [इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर] को अधिप्रमाणिकता का द्योतन करने वाला कोई चिह्न लगाता है,
कि यह विश्वास किया जाए कि ऐसा दस्तावेज या दस्तावेज के भाग, इलैक्ट्रानिक अभिलेख या 5 इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर की रचना, हस्ताक्षरण, मुद्रांकन, निष्पादन, पारेषण या लगाना ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा या ऐसे व्यक्ति के प्राधिकार द्वारा किया गया था, जिसके द्वारा या जिसके प्राधिकारी द्वारा उसकी रचना, हस्ताक्षरण, मुद्रांकन या निष्पादन, लगाए जाने या पारेषित न होने की बात वह जानता है; या
दूसरा- जो किसी दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख के किसी तात्विक भाग में परिवर्तन, उसके द्वारा या ऐसे किसी अन्य व्यक्ति द्वारा, चाहे ऐसा व्यक्ति, ऐसे परिवर्तन के समय जीवित हो या नहीं, उस दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख के रचित या निष्पादित किए जाने या इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर लगाए जाने के पश्चात्, रद्द करके या अन्यथा, विधिपूर्वक प्राधिकार के बिना, बेईमानी से या कपटपूर्ण करता है; अथवा
तीसरा- जो किसी व्यक्ति द्वारा, यह जानते हुए कि ऐसा व्यक्ति किसी दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख की विषयवस्तु को या परिवर्तन के रूप को, विकृत्तचित्त या मत्तता की हालत में होने के कारण जान नहीं सकता था या उस प्रवंचना के कारण, जो उससे की गई है, जानता नहीं है, उस दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख को बेईमानी से या कपटपूर्वक हस्ताक्षरित, मुद्रांकित, निष्पादित या परिवर्तित किया जाना या किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख पर अपने इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर लगाया जाना कारित करता है।
दृष्टान्त
(क) क के पास य द्वारा ख पर लिखा हुआ 10,000 रुपये का एक प्रत्ययपत्र है। ख से कपट करने के लिए क 10,000 रुपये में एक शून्य बढ़ा देता है और उस राशि को 1,00,000 रु० इस आशय से बना देता है कि ख यह विश्वास कर ले कि य ने वह पत्र ऐसा ही लिखा था। क ने कूटरचना की है।
(ख) क, इस आशय से कि वह य की सम्पदा ख को बेच दे और उसके द्वारा ख से क्रय धन अभिप्राप्त कर ले, य के प्राधिकार के बिना य की मुद्रा एक ऐसी दस्तावेज पर लगाता है, जो कि य की ओर से क की सम्पदा का हस्तान्तर-पत्र होना तात्पर्यित है; क ने कूटरचना की है।
(ग) एक बैंकर पर लिखे हुए और वाहक को देय चेक को क उठा लेता है। चेक ख द्वारा हस्ताक्षरित है, किन्तु उस चेक में कोई राशि अंकित नहीं है। क 10,000 रुपए की राशि अंकित करके चेक को कप्टपूर्वक भर लेता है। क कूटरचना करता है।

Making a false document-
A person is said to make a false document or false electronic record-
First- Who dishonestly or fraudulently-
(a) makes, signs, seals or executes a document or part of a document;
(b) makes or transmits any electronic record or part of any electronic record:
(c) affixes any electronic signature on any electronic record;
(d) makes any mark denoting the execution of a document or the authenticity of the electronic signature,
with the intention of causing it to be believed that such document or part of a document, electronic record or electronic signature was made, signed, sealed, executed, transmited or affixed by or by the authority of a person by whom or by whose authority he knows that it was not made, signed, sealed, executed or affixed; or
Secondly- Who, without lawful authority, dishonestly or fraudulently, by cancellation or otherwise, alters a document or an electronic record in any material part thereof, after it has been made, executed or affixed with electronic signature either by himself or by any other person, whether such person be living or dead at the time of such alteration; or
Thirdly- Who dishonestly or fraudulently causes any person to sign, seal, execute or alter a document or an electronic record or to affix his [electronic signature] on any electronic record knowing that such person by reason of unsoundness of mind or intoxication cannot, or that by reason of deception practised upon him, he does not know the contents of the document or electronic record or the nature of the alteration.
Illustrations
(a) A has a letter of credit upon B for rupees 10,000 written by Z. A, in order to defraud B, adds a cipher to the 10,000 and makes the sum 1,00,000 intending that it may be believed by B that Z so wrote the letter. A has committed forgery.
(b) A, without Z’s authority, affixes Zs seal to a document purporting to be a conveyance of an estate from Z to A, with the intention of selling the estate to B and thereby of obtaining from B the purchase-money. A has committed forgery.
(c) A picks up a cheque on a banker signed by B, payable to bearer, but without any sum having been inserted in the cheque. A fraudulently fills up the cheque by inserting the sum of ten thousand rupees. A commits forgery.

मिथ्या दस्तावेज रचना क्या है?

साधारण भाषा में मिथ्या दस्तावेज रचना (Making a false document), जो कोई व्यक्ति किसी संपत्ति अथवा मूल्यवान वस्तु अथवा किसी साक्ष्य स्वरूप किसी न्यायिक प्रकिया मे या किसी लोक सेवक अधिकारी के समक्ष झूठे दस्तावेज बनाकर प्रस्तुत करता है अथवा झूठे इलेक्ट्रानिक अभिलेख या कोई महत्वपूर्ण अभिलेख बनाकर प्रस्तुत करता है अथवा किसी भी झूठे दस्तावेजो पर हस्ताक्षर या इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर करता है। तो वह सभी मिथ्या दस्तावेज रचना (Making a false document) का अपराध करते है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 464 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
धन्यवाद

आईपीसी की धारा 463 | कूटरचना| IPC Section- 463 in hindi | Forgery.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 463 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 463? साथ ही हम आपको IPC की धारा 463, क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 463 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 463 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय दंड संहिता की धारा 463 कूटरचना (Forgery) को परिभाषित किया गया है, इस लेख के माध्यम से समझने का प्रयास करेंगे।

आईपीसी की धारा 463 के अनुसार

कूटरचना–

जो कोई, किसी मिथ्या दस्तावेज या मिथ्या इलैक्ट्रानिक अभिलेख अथवा दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख के किसी भाग को इस आशय से रचता है कि लोक को या किसी व्यक्ति को नुकसान या क्षति कारित की जाये, या किसी दावे या हक का समर्थन किया जाए, या यह कारित किया जाए कि कोई व्यक्ति, सम्पत्ति अलग करे या कोई अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा करे या इस आशय से रचता है कि कपट करे, या कपट किया जा सके, वह कूट-रचना करता है।

Forgery-
Whoever makes any false documents or false electronic record or part of a document or electronic record, with intent to cause damage or injury], to the public or to any person, or to support any claim or title, or to cause any person to part with property, or to enter into any express or implied contract, or with intent to commit fraud or that fraud may be committed, commits forgery.

कूटरचना क्या है?

साधारण भाषा में कूटरचना (Forgery), जो कोई व्यक्ति किसी झूठे दस्तावेज या झूठे इलैक्ट्रानिक अभिलेख अथवा दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख, इस आशय से अपने फायदे हेतु रचता है कि किसी व्यक्ति को नुकसान या क्षति पहुचां सके या किसी दावे या हक का समर्थन कर सके। इस कपटपूर्वक आशय से रचता है, या कपट किया जा सके, वह कूट-रचना करता है। इसे ही कूटरचना (Forgery) कहते है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 463 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
धन्यवाद