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पॉक्सो एक्ट की धारा 27 | बालक की चिकित्सीय परीक्षा | Pocso Act Section- 27 by in hindi | Medical examination of a child.

POCSO Section-27

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 27 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 27? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 27 क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 27 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 27 के अंतर्गत जो किसी बालक पर किए गए अपराध को लेकर बालक की चिकित्सीय परीक्षा प्रकिया को पूर्ण करने को बतलाती है, तो यह पॉक्सो एक्ट की धारा 23 बालक की चिकित्सीय परीक्षा प्रक्रिया को परिभाषित करती है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 27 के अनुसार

बालक की चिकित्सीय परीक्षा-

(1) उस बालक की चिकित्सीय परीक्षा, जिसके संबंध में इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किया गया है, इस बात के होते हुए भी कि इस अधिनियम के अधीन अपराधों के लिए कोई प्रथम सूचना रिपोर्ट या परिवाद रजिस्ट्रीकृत नहीं किया गया है, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 164क के अनुसार की जाएगी।
(2) यदि पीड़ित कोई बालिका है तो चिकित्सीय परीक्षा किसी महिला डॉक्टर द्वारा की जाएगी।
(3) चिकित्सीय परीक्षा बालक के माता-पिता या किसी ऐसे अन्य व्यक्ति की उपस्थिति में की जाएगी जिसमें बालक भरोसा या विश्वास रखता हो।
(4) जहां उपधारा (3) में निर्दिष्ट बालक के माता-पिता या ऐसा अन्य व्यक्ति, बालक की चिकित्सीय परीक्षा के दौरान किसी कारण से उपस्थित नहीं हो सकता है तो चिकित्सीय परीक्षा, चिकित्सा संस्था के प्रमुख द्वारा नामनिर्दिष्ट किसी महिला की उपस्थिति में की जाएगी।

Medical examination of a child-
(1) The medical examination of a child in respect of whom any offence has been committed under this Act, shall, notwithstanding that a First Information Report or complaint has not been registered for the offences under this Act, be conducted in accordance with Section 164A of the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974).
(2) In case the victim is a girl child, the medical examination shall be conducted by a woman doctor.
(3) The medical examination shall be conducted in the presence of the parent of the child or any other person in whom the child reposes trust or confidence.
(4) Where, in case the parent of the child or other person referred to in sub section (3) cannot be present, for any reason, during the medical examination of the child, the medical examination shall be conducted in the presence of a woman nominated by the head of the medical institution.

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 27 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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पॉक्सो एक्ट की धारा 26 | अभिलिखित किए जाने वाले कथन के संबंध में अतिरिक्त उपबंध | Pocso Act Section- 26 by in hindi | Additional provisions regarding statement to be recorded.

POCSO Section- 126

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 26 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 26? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 26 क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 26 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 26 के अंतर्गत जो कोई मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी, बालक के माता-पिता या ऐसे किसी अन्य व्यक्ति की, जिसमें बालक का भरोसा या विश्वास है, उपस्थिति में बालक द्वारा बोले गए अनुसार कथन अभिलिखित करेगा, तो यह पॉक्सो एक्ट की धारा 26 अभिलिखित किए जाने वाले कथन के संबंध में अतिरिक्त उपबंध प्रक्रिया को परिभाषित करता है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 26 के अनुसार

अभिलिखित किए जाने वाले कथन के संबंध में अतिरिक्त उपबंध-

(1) यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी, बालक के माता-पिता या ऐसे किसी अन्य व्यक्ति की, जिसमें बालक का भरोसा या विश्वास है, उपस्थिति में बालक द्वारा बोले गए अनुसार कथन अभिलिखित करेगा।
(2) जहां आवश्यक है, वहां, यथस्थिति, मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी, बालक का कथन अभिलिखित करते समय किसी अनुवादक या किसी दुभाषिए की, जो ऐसी अर्हताएं, अनुभव रखता हो और ऐसी फीस के संदाय पर जो विहित की जाए की सहायता ले सकेगा।
(3) यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी किसी बालक का कथन अभिलिखित करने के लिए मानसिक या शारीरिक निःशक्तता वाले बालक के मामले में किसी विशेष शिक्षक या बालक से संपर्क की रीति से सुपरिचित किसी व्यक्ति या उस क्षेत्र में किसी विशेषज्ञ की, जो ऐसी अर्हताएं, अनुभव रखता हो और ऐसी फीस के संदाय पर जो विहित की जाए की सहायता ले सकेगा।
(4) जहां संभव है, वहां यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि बालक का कथन श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रानिक माध्यमों से भी अभिलिखित किया जाए।

Additional provisions regarding statement to be recorded-
(1) The Magistrate or the police officer, as the case may be, shall record the statement as spoken by the child in the presence of the parents of the child or any other person in whom the child has trust or confidence.
(2) Wherever necessary, the Magistrate or the police officer, as the case may be, may take the assistance of a translator or an interpreter, having such qualifications, experience and on payment of such fees as may be prescribed, while recording the statement of the child.
(3) The Magistrate or the police officer, as the case may be, may, in the case of a child having a mental or physical disability, seek the assistance of a special educator or any person familiar with the manner of communication of the child or an expert in that field, having such qualifications, experience and on payment of such fees as may be prescribed, to record the statement of the child.
(4) Wherever possible, the Magistrate or the police officer, as the case may be, shall ensure that the statement of the child is also recorded by audio-video electronic means.

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 26 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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पॉक्सो एक्ट की धारा 25 | मजिस्ट्रेट द्वारा बालक के कथन का अभिलेखन | Pocso Act Section- 25 by in hindi | Recording of statement of a child by Magistrate.

POCSO Section-25

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 25 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 25? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 25 क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 25 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 25 के अंतर्गत किसी बालक पर हुए अपराध को ऐसे कथन को अभिलिखित करने वाला मजिस्ट्रेट, बालक द्वारा बोले गए अनुसार कथन को अभिलिखित करेगा, तो यह पॉक्सो एक्ट की धारा 25 मजिस्ट्रेट द्वारा बालक के कथन का अभिलेखन प्रक्रिया को परिभाषित करता है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 25 के अनुसार

मजिस्ट्रेट द्वारा बालक के कथन का अभिलेखन-

(1) यदि बालक का कथन, दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (जिसे इसमें इसके पश्चात् संहिता कहा गया है) की धारा 164 के अधीन अभिलिखित किया जाता है तो उसमें अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसे कथन को अभिलिखित करने वाला मजिस्ट्रेट, बालक द्वारा बोले गए अनुसार कथन को अभिलिखित करेगा :
परंतु संहिता की धारा 164 की उपधारा (1) के प्रथम परंतुक में अंतर्विष्ट उपबंध, जहां तक वह अभियुक्त के अधिवक्ता की उपस्थिति अनुज्ञात करता है, इस मामले में लागू नहीं होगा।
(2) मजिस्ट्रेट, उस संहिता की धारा 173 के अधीन पुलिस द्वारा अंतिम रिपोर्ट फाइल किए जाने पर, बालक और उसके माता-पिता या उसके प्रतिनिधि को संहिता की धारा 207 के अधीन विनिर्दिष्ट दस्तावेजकी एक प्रति प्रदान करेगा।

Recording of statement of a child by Magistrate-
(1) If the statement of the child is being recorded under Section 164 of the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974) (herein referred to as the Code), the Magistrate recording such statement shall, notwithstanding anything contained therein, record the statement as spoken by the child:
Provided that the provisions contained in the first proviso to sub-section (1) of Section 164 of the Code shall, so far it permits the presence of the advocate of the accused shall not apply in this case.
(2) The Magistrate shall provide to the child and his parents or his representative, a copy of the document specified under Section 207 of the Code, upon the final report being filed by the police under Section 173 of that Code.

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 25 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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पॉक्सो एक्ट की धारा 24 | बालक के कथन को अभिलिखित किया जाना | Pocso Act Section- 24 by in hindi | Recording of statement of a child.

POCSO Section- 24

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 24 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 24? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 24 क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 24 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 24 के अंतर्गत बालक के कथन को, बालक के निवास पर या ऐसे स्थान पर जहां वह साधारणतया निवास करता है या उसकी पसंद के स्थान पर और यथासाध्य, उप निरीक्षक की पंक्ति से अन्यून किसी महिला पुलिस अधिकारी द्वारा अभिलिखित किया जाएगा, तो यह पॉक्सो एक्ट की धारा 24 बालक के कथन को अभिलिखित किये जाने प्रक्रिया को परिभाषित करती है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 24 के अनुसार

बालक के कथन को अभिलिखित किया जाना—

(1) बालक के कथन को, बालक के निवास पर या ऐसे स्थान पर जहां वह साधारणतया निवास करता है या उसकी पसंद के स्थान पर और यथासाध्य, उप निरीक्षक की पंक्ति से अन्यून किसी महिला पुलिस अधिकारी द्वारा अभिलिखित किया जाएगा।
(2) बालक के कथन को अभिलिखित किए जाते समय पुलिस अधिकारी वर्दी में नहीं होगा।
(3) अन्वेषण करने वाला पुलिस अधिकारी, बालक की परीक्षा करते समय यह सुनिश्चित करेगा कि बालक किसी भी समय पर अभियुक्त के किसी भी प्रकार से संपर्क में न आए।
(4) किसी बालक को किसी भी कारण से रात्रि में किसी पुलिस स्टेशन में निरूद्ध नहीं किया जाएगा।
(5) पुलिस अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि बालक की पहचान पब्लिक मीडिया से तब तक संरक्षित की है जब तक कि बालक के हित में विशेष न्यायालय द्वारा अन्यथा निदेशित न किया गया हो।

Recording of statement of a child-
(1) The statement of the child shall be recorded at the residence of the child or at a place where he usually resides or at the place of his choice and as far as practicable by a woman police officer not below the rank of sub-inspector.
(2) The police officer while recording the statement of the child shall not be in uniform.
(3) The police officer making the investigation, shall, while examining the child, ensure that at no point of time the child come in the contact in any way with the accused.
(4) No child shall be detained in the police station in the night for any reason.
(5) The police officer shall ensure that the identity of the child is protected from the public media, unless otherwise directed by the Special Court in the interest of the child.

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 24 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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पॉक्सो एक्ट की धारा 23 | मीडिया के लिए प्रक्रिया | Pocso Act Section- 23 by in hindi | Procedure for media.

POCSO Section- 23

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 23 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 23? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 23 क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 23 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 23 के अंतर्गत जो कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार के मीडिया या स्टूडियो या फोटो चित्रण संबंधी सुविधाओं से, कोई पूर्ण या अधिप्रमाणित सूचना रखे बिना, किसी बालक के संबंध में कोई रिपोर्ट नहीं करेगा या उस पर कोई टीका-टिप्पणी नहीं करेगा, तो यह पॉक्सो एक्ट की धारा 23 मीडिया के लिए प्रक्रिया को परिभाषित करता है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 23 के अनुसार

मीडिया के लिए प्रक्रिया-

(1) कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार के मीडिया या स्टूडियो या फोटो चित्रण संबंधी सुविधाओं से, कोई पूर्ण या अधिप्रमाणित सूचना रखे बिना, किसी बालक के संबंध में कोई रिपोर्ट नहीं करेगा या उस पर कोई टीका-टिप्पणी नहीं करेगा जिससे उसकी ख्याति का हनन या उसकी निजता का अतिलंघन होना प्रभावित होता हो।
(2) किसी मीडिया से कोई रिपोर्ट, बालक की पहचान को, जिसके अंतर्गत उसका नाम, पता, फोटोचित्र, परिवार के ब्यौरे, विद्यालय, पड़ोस या कोई ऐसी अन्य विशिष्टियां भी हैं, जिनसे बालक की पहचान का प्रकटन होता हो, प्रकट नहीं करेगी :
परन्तु ऐसे कारणों से जो अभिलिखित किए जाएंगे, अधिनियम के अधीन मामले का विचारण करने के लिए सक्षम विशेष न्यायालय ऐसे प्रकटन के लिए अनुज्ञात कर सकेगा यदि उसकी राय में ऐसा प्रकटन, बालक के हित में है।
(3) मीडिया या स्टूडियो या फोटो चित्रण संबंधी सुविधाओं का कोई प्रकाशक या स्वामी, संयुक्त रूप और पृथक् रूप से अपने कर्मचारी के किसी कार्यों और लोपों के लिए दायित्वाधीन होगा।
(4) कोई व्यक्ति जो उपधारा (1) या उपधारा (2) के उपबंधों का उल्लंघन करेगा, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगा किन्तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से, दंडित किए जाने के लिए दायी होगा।

Procedure for media-
(1) No person shall make any report or present comments on any child from any form of media or studio or photographic facilities without having complete and authentic information, which may have the effect of lowering his reputation or infringing upon his privacy.
(2) No reports in any media shall disclose, the identity of a child including his name, address, photograph, family details, school, neighbourhood or any other particulars which may lead to disclosure of identity of the child:
Provided that for reasons to be recorded in writing, the Special Court, competent to try the case under the Act, may permit such disclosure, if in its opinion such disclosure is in the interest of the child.
(3) The publisher or owner of the media or studio or photographic facilities shall be jointly and severally liable for the acts and omissions of his employee.
(4) Any person who contravenes the provisions of sub-section (1) or sub section (2) shall be liable to be punished with imprisonment of either description for a period which shall not be less than six months but which may extend to one year or with fine or with both.

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 23 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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पॉक्सो एक्ट की धारा 22 | मिथ्या परिवाद या मिथ्या सूचना के लिए दंड | Pocso Act Section- 22 by in hindi | Punishment for false complaint or false information.

POCSO section 22

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 22 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 22? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 22 क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 22 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 22 के अंतर्गत जो कोई किसी व्यक्ति के विरुद्ध उसको अपमानित करने, उद्दापित करने या धमकाने या उसकी मानहानि करने के एकमात्र आशय से मिथ्या परिवाद करेगा या मिथ्या सूचना उपलब्ध कराएगा, तो वह पॉक्सो एक्ट की धारा 22 ऐसे मामलो को दंडित किया जाएगा है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 22 के अनुसार

मिथ्या परिवाद या मिथ्या सूचना के लिए दंड-

(1) कोई व्यक्ति जो धारा 3, धारा 5, धारा 7 और धारा 9 के अधीन किए गए किसी अपराध के संबंध में किसी व्यक्ति के विरुद्ध उसको अपमानित करने, उद्दापित करने या धमकाने या उसकी मानहानि करने के एकमात्र आशय से मिथ्या परिवाद करेगा या मिथ्या सूचना उपलब्ध कराएगा, वह ऐसे कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से या दोनों से, दंडित किया जाएगा।
(2) जहां किसी बालक द्वारा कोई मिथ्या परिवाद किया गया है या मिथ्या सूचना उपलब्ध कराई गई है, ऐसे बालक पर कोई दंड अधिरोपित नहीं किया जाएगा।
(3) जो कोई, बालक नहीं होते हुए, किसी बालक के विरुद्ध कोई मिथ्या परिवाद करेगा या मिथ्या सूचना उसको मिथ्या जानते हुए उपलब्ध कराएगा जिसके द्वारा ऐसा बालक इस अधिनियम के अधीन किन्हीं अपराधों के लिए उत्पीड़ित हो, वह ऐसे कारावास से, जो एक वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा।

Punishment for false complaint or false information-
(1) Any person, who makes false complaint or provides false information against any person, in respect of an offence committed under Sections 3, 5, 7 and Section 9, solely with the intention to humiliate, extort or threaten or defame him, shall be punished with imprisonment for a term which may extend to six months or with fine or with both.
(2) Where a false complaint has been made or false information has been provided by a child, no punishment shall be imposed on such child.
(3) Whoever, not being a child, makes a false complaint or provides false information against a child, knowing it to be false, thereby victimising such child in any of the offences under this Act, shall be punished with imprisonment which may extend to one year or with fine or with both.

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 22 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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