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कंपनी अधिनियम की धारा 25| Companies Act Section 25

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-25 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 25 के अनुसार कोई कंपनी, कंपनी में किन्हीं प्रतिभूतियों को, उन सभी या किन्हीं प्रतिभूतियों को जनता के लिए विक्रय की प्रस्थापना करने की दृष्टि से आबंटित या आबंटित करने का करार करती है, वहां ऐसा कोई दस्तावेज, जिसके द्वारा जनता के लिए विक्रय की प्रस्थापना की जाती है, जिसे Companies Act Section-25 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 25 (Companies Act Section-25) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 25 Companies Act Section-25 के अनुसार कोई कंपनी, कंपनी में किन्हीं प्रतिभूतियों को, उन सभी या किन्हीं प्रतिभूतियों को जनता के लिए विक्रय की प्रस्थापना करने की दृष्टि से आबंटित या आबंटित करने का करार करती है, वहां ऐसा कोई दस्तावेज, जिसके द्वारा जनता के लिए विक्रय की प्रस्थापना की जाती है।

कंपनी अधिनियम की धारा 25 (Companies Act Section-25 in Hindi)

विक्रय के लिए प्रतिभूतियों की प्रतिस्थापना वाले दस्तावेजों को प्रास्पेक्टस समझा जाना

(1) जहां कोई कंपनी, कंपनी में किन्हीं प्रतिभूतियों को, उन सभी या किन्हीं प्रतिभूतियों को जनता के लिए विक्रय की प्रस्थापना करने की दृष्टि से आबंटित या आबंटित करने का करार करती है, वहां ऐसा कोई दस्तावेज, जिसके द्वारा जनता के लिए विक्रय की प्रस्थापना की जाती है, सभी प्रयोजनों के लिए, कंपनी द्वारा जारी किया गया प्रास्पेक्टस समझा जाएगा और प्रास्पेक्टस की अंतर्वस्तुओं के बारे में तथा प्रास्पेक्टस में के अशुद्ध कथनों और उससे लोपों की बाबत या अन्यथा प्रास्पेक्टस से संबंधित दायित्व के बारे में सभी अधिनियमितियां और विधि के नियम, उपधारा (3) और उपधारा (4) में विनिर्दिष्ट उपांतरणों सहित लागू होंगे और तदनुसार, इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो प्रतिभूतियां अभिदाय के लिए जनता को प्रस्थापित की गई थीं और मानो किन्हीं प्रतिभूतियों की बाबत प्रस्थापना स्वीकार करने वाले व्यक्ति, उन प्रतिभूतियों के लिए अभिदायी थे, किंतु उन व्यक्तियों के दायित्व पर, यदि कोई हो, प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जिनके द्वारा दस्तावेज में अंतर्विष्ट अशुद्ध कथनों के संबंध में या उसकी बाबत अन्यथा प्रस्थापना की जाती है।

(2) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, जब तक प्रतिकूल साबित न किया गया हो, यह इस बात का साक्ष्य होगा कि प्रतिभूतियों का कोई आबंटन या आबंटन करने का करार प्रतिभूतियों को जनता के लिए विक्रय हेतु प्रस्थापित करने की दृष्टि से किया गया था, यदि यह दर्शित किया जाता है कि,

(क) प्रतिभूतियों की या उनमें से किसी की जनता के लिए विक्रय की प्रस्थापना, आबंटन या आबंटन करने के करार के पश्चात् छह मास के भीतर की गई थी: या

(ख) उस तारीख को, जब प्रस्थापना की गई थी, प्रतिभूतियों के संबंध में कंपनी द्वारा प्राप्त किया जाने वाला संपूर्ण प्रतिफल उसके द्वारा प्राप्त नहीं किया गया था। (3) इस धारा द्वारा यथा लागू की गई धारा 26 इस प्रकार प्रभावी होगी, मानो

(i) किसी प्रास्पेक्टस से, किसी प्रास्पेक्टस में कथित किए जाने के लिए उस धारा द्वारा अपेक्षित विषयों के अतिरिक्त,

(क) ऐसी प्रतिभूतियों के संबंध में, जिससे प्रस्थापना संबंधित है, कंपनी द्वारा प्राप्त या प्राप्त किए जाने वाले प्रतिफल की शुद्ध रकम; और

(ख) वह समय और स्थान, जहां पर उस संविदा का, जिसके अधीन उक्त प्रतिभूतियां आबंटित की गई हैं या आंबटित की जानी हैं, निरीक्षण किया जा सकेगा, कथित करने की अपेक्षा की गई है।

(ii) प्रस्थापना करने वाले व्यक्ति, प्रास्पेक्टस में कंपनी के निदेशकों के रूप में नामित व्यक्ति थे।

(4) जहां ऐसी प्रस्थापना करने वाला कोई व्यक्ति, जिससे यह धारा संबंधित है, कोई कंपनी या फर्म है वहां यह पर्याप्त होगा, यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट दस्तावेज, यथास्थिति, कंपनी या फर्म की ओर से कंपनी के दो निदेशकों द्वारा या फर्म में भागीदार आधे से अन्यून भागीदारों द्वारा हस्ताक्षरित किया गया हो।

Companies Act Section-25 (Company Act Section-25 in English)

Document containing offer of securities for sale to be deemed prospectus

(1) Where a  company allots or agrees to allot any securities of the company with a view to all or any of those securities being offered for sale to the public, any document by which the offer for sale to the public is made shall, for all purposes, be deemed to be a prospectus issued by the company; and all enactments and rules of law as to the contents of prospectus and as to liability in respect of misstatements, in and omissions from, prospectus, or otherwise relating to the prospectus, shall apply with the modifications specified in subsections (3) and (4) and shall have effect accordingly, as if the securities had been offered to the public for subscription and as if persons accepting the offer in respect of any securities were subscribers for those securities, but without prejudice to the liability, if any, of the persons by whom the offer is made in respect of misstatements contained in the document or otherwise in respect thereof. 

(2) For the purposes of this Act, it shall, unless the contrary is proved, be evidence that an allotment  of, or an agreement to allot, securities was made with a view to the securities being offered for sale to the  public if it is shown— 

(a) that an offer of the securities or of any of them for sale to the public was made within six  months after the allotment or agreement to allot; or 

(b) that at the date when the offer was made, the whole consideration to be received by the company in respect of the securities had not been received by it. 

(3) Section 26 as applied by this section shall have effect as if — 

(i) it required a prospectus to state in addition to the matters required by that section to be stated  in a prospectus— 

(a) the net amount of the consideration received or to be received by the company in respect  of the securities to which the offer relates; and 

(b) the time and place at which the contract where under the said securities have been or are  to be allotted may be inspected; 

(ii) the persons making the offer were persons named in a prospectus as directors of a company. 

(4) Where a person making an offer to which this section relates is a company or a firm, it shall be  sufficient if the document referred to in sub-section (1) is signed on behalf of the company or firm by two  directors of the company or by not less than one-half of the partners in the firm, as the case may be.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 25 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 24| Companies Act Section 24

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-24 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 24 के अनुसार कोई कंपनी जहां तक उनका संबंध सूचीबद्ध कंपनियों या उन कंपनियों द्वारा, जिनका आशय भारत में किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में अपनी प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध कराना है, जिसे Companies Act Section-24 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 24 (Companies Act Section-24) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 24 Companies Act Section-24 के अनुसार कोई कंपनी जहां तक उनका संबंध सूचीबद्ध कंपनियों या उन कंपनियों द्वारा, जिनका आशय भारत में किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में अपनी प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध कराना है।

कंपनी अधिनियम की धारा 24 (Companies Act Section-24 in Hindi)

प्रतिभूतियों आदि के निर्गम और अंतरण को विनियमित करने की प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड की शक्ति

(1) इस अध्याय, अध्याय 4 और धारा 127 में अंतर्विष्ट उपबंधों को,

(क) जहां तक उनका संबंध सूचीबद्ध कंपनियों या उन कंपनियों द्वारा, जिनका आशय भारत में किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में अपनी प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध कराना है,

(i) प्रतिभूतियों के निर्गमन और अंतरण; और

(ii) लाभांश के असंदाय, से है. इस अधिनियम के अधीन यथा उपबंधित के सिवाय, प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा इस निमित्त विनियम बनाकर प्रशासित किया जाएगा;

(ख) किसी अन्य मामले में, केंद्रीय सरकार द्वारा प्रशासित किया जाएगा ।

स्पष्टीकरण– शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि, प्रास्पेक्टस, आबंटन की विवरणी, अधिमानी शेयरों के मोचन से संबंधित सभी अन्य मामलों और इस अधिनियम में विनिर्दिष्ट रूप से उपबंधित किसी अन्य मामले से संबंधित सभी शक्तियों का प्रयोग, यथास्थिति, केंद्रीय सरकार, अधिकरण या रजिस्ट्रार द्वारा किया जाएगा।

(2) प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, धारा 458 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट मामलों और उपधारा (1) के परन्तुक के अधीन उसे प्रत्यायोजित मामलों की बाबत भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 की धारा 11 की उपधारा (1). उपधारा (2क), उपधारा (3) और उपधारा (4), धारा 11क, धारा 11ख और धारा 11घ के अधीन उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करेगा।

Companies Act Section-24 (Company Act Section-24 in English)

Power of Securities and Exchange Board to regulate issue and transfer of securities, etc

 (1) The provisions contained in this Chapter, Chapter IV, and in section 127 shall,— 

(a) in so far as they relate to — 

(i) issue and transfer of securities; and 

(ii) non-payment of dividends, 

by listed companies or those companies which intend to get their securities listed on any recognized stock exchange in India, except as provided under this Act, be administered by the Securities and  Exchange Board by making regulations in this behalf; 

(b) in any other case, be administered by the Central Government. 

Explanation.—For the removal of doubts, it is hereby declared that all powers relating to all other matters relating to prospectus, return of allotment, redemption of preference shares, and any other matter specifically provided in this Act, shall be exercised by the Central Government, the Tribunal or the  Registrar, as the case may be. 

(2) The Securities and Exchange Board shall, in respect of matters specified in subsection (1) and the matters delegated to it under proviso to sub-section (1) of section 458, exercise the powers conferred upon it under sub-sections (1), (2A), (3) and (4) of section 11, sections 11A, 11B and 11D of the Securities and  Exchange Board of India Act, 1992 (15 of 1992).

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 24 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 23| Companies Act Section 23

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-23 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 23 के अनुसार कोई कंपनी या ऐसी कंपनी की दशा में जो अपनी प्रतिभूतियां सूचीबद्ध कराने का आशय रखती है, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के उपबंधों तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों के अनुसार भी राइट्स इश्यू या बोनस इश्यू के माध्यम से। (2) कोई प्राइवेट कंपनी, निम्नलिखित को प्रतिभूतियों का निर्गमन कर सकेगी, जिसे Companies Act Section-23 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 23 (Companies Act Section-23) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 23 Companies Act Section-23 के अनुसार कोई कंपनी या ऐसी कंपनी की दशा में जो अपनी प्रतिभूतियां सूचीबद्ध कराने का आशय रखती है, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के उपबंधों तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों के अनुसार भी राइट्स इश्यू या बोनस इश्यू के माध्यम से। (2) कोई प्राइवेट कंपनी, निम्नलिखित को प्रतिभूतियों का निर्गमन कर सकेगी।

कंपनी अधिनियम की धारा 23 (Companies Act Section-23 in Hindi)

लोक प्रस्थापना और प्राइवेट नियोजन

(1) कोई पब्लिक कंपनी, निम्नलिखित को प्रतिभूतियों का निर्गमन कर सकेगी।

(क) जनता को इस भाग के उपबंधों का अनुपालन करके प्रास्पेक्टस के माध्यम से (जिसे इसमें इसके पश्चात् “लोक प्रस्थापना” कहा गया है); या

(ख) इस अध्याय के भाग 2 के उपबंधों का अनुपालन करके प्राइवेट नियोजन के माध्यम से; या

(ग) इस अधिनियम के उपबंधों और किसी सूचीबद्ध कंपनी या ऐसी कंपनी की दशा में जो अपनी प्रतिभूतियां सूचीबद्ध कराने का आशय रखती है, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के उपबंधों तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों के अनुसार भी राइट्स इश्यू या बोनस इश्यू के माध्यम से। (2) कोई प्राइवेट कंपनी, निम्नलिखित को प्रतिभूतियों का निर्गमन कर सकेगी।

(क) इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार राइट्स इश्यू या बोनस इश्यू के द्वारा; या

(ख) इस अध्याय के भाग 2 के उपबंधों का अनुपालन करके प्राइवेट नियोजन के माध्यम से

स्पष्टीकरण—इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, “लोक प्रस्थापना” के अंतर्गत किसी कंपनी द्वारा जनता को प्रतिभूतियों की प्रारंभिक लोक प्रस्थापना या अतिरिक्त लोक प्रस्थापना या किसी विद्यमान शेयर धारक द्वारा जनता को प्रतिभूति के विक्रय के लिए प्रास्पेक्टस जारी करने माध्यम से कोई प्रस्थापना भी है।

Companies Act Section-23 (Company Act Section-23 in English)

Public offer and private placement

(1) A public company may issue securities— 

(a) to the public through a prospectus (herein referred to as “public offer”) by complying with the  provisions of this Part; or 

(b) through private placement by complying with the provisions of Part II of this Chapter; or (c) through a rights issue or a bonus issue in accordance with the provisions of this Act and in case of a listed company or a company that intends to get its securities listed also with the provisions of the Securities and Exchange Board of India Act, 1992 (15 of 1992) and the rules and regulations made thereunder. 

(2) A private company may issue securities— 

(a) by way of rights issue or bonus issue in accordance with the provisions of this Act; or (b) through private placement by complying with the provisions of Part II of this Chapter. 

Explanation.—For the purposes of this Chapter, “public offer” includes an initial public offer or further public offer of securities to the public by a company, or an offer for the sale of securities to the public by an existing shareholder, through issue of a prospectus.

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कंपनी अधिनियम की धारा 22| Companies Act Section 22

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-22 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 22 के अनुसार कोई विनिमय-पत्र, हुंडी या वचन-पत्र, कंपनी की ओर से किया गया, स्वीकार किया गया, आहरण किया गया या पृष्ठांकित किया गया समझा जाएगा, यदि उसे कंपनी के नाम से या उसकी ओर से या उसके संबंध में, किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो उसके अभिव्यक्त या विवक्षित प्राधिकार के अधीन कार्य कर रहा हो, किया गया, स्वीकार किया गया, आहरण किया गया या पृष्ठांकित किया जाता है, जिसे Companies Act Section-22 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 22 (Companies Act Section-22) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 22 Companies Act Section-22 के अनुसार कोई विनिमय-पत्र, हुंडी या वचन-पत्र, कंपनी की ओर से किया गया, स्वीकार किया गया, आहरण किया गया या पृष्ठांकित किया गया समझा जाएगा, यदि उसे कंपनी के नाम से या उसकी ओर से या उसके संबंध में, किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो उसके अभिव्यक्त या विवक्षित प्राधिकार के अधीन कार्य कर रहा हो, किया गया, स्वीकार किया गया, आहरण किया गया या पृष्ठांकित किया जाता है।

कंपनी अधिनियम की धारा 22 (Companies Act Section-22 in Hindi)

विनिमय-पत्रों आदि का निष्पादन

(1) कोई विनिमय-पत्र, हुंडी या वचन-पत्र, कंपनी की ओर से किया गया, स्वीकार किया गया, आहरण किया गया या पृष्ठांकित किया गया समझा जाएगा, यदि उसे कंपनी के नाम से या उसकी ओर से या उसके संबंध में, किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो उसके अभिव्यक्त या विवक्षित प्राधिकार के अधीन कार्य कर रहा हो, किया गया, स्वीकार किया गया, आहरण किया गया या पृष्ठांकित किया जाता है।

(2) कोई कंपनी, अपनी सामान्य मुद्रा के अधीन लिखित में किसी व्यक्ति को या तो साधारणतया या किसी विनिर्दिष्ट विषय की बाबत, भारत में या भारत के बाहर किसी स्थान में उसकी ओर से अन्य विलेखों के निष्पादन के लिए अपने अटर्नी के रूप में प्राधिकृत कर सकेगी।

(3) ऐसे किसी अटर्नी द्वारा कंपनी की ओर से और उसकी मुद्रा के अधीन हस्ताक्षरित कोई विलेख, कंपनी पर आबद्धकर होगा और उसका वही प्रभाव होगा, मानो वह उसकी सामान्य मुद्रा के अधीन किया गया हो।

Companies Act Section-22 (Company Act Section-22 in English)

Execution of bills of exchange, etc

(1) A bill of exchange, hundi, or promissory note shall be deemed to have been made, accepted, drawn or endorsed on behalf of a company if made, accepted,  drawn, or endorsed in the name of, or on behalf of or on account of, the company by any person acting under its authority, express or implied. 

(2) A company may, by writing 1[under its common seal, if any,] authorize any person, either generally or in respect of any specified matters, as its attorney to execute other deeds on its behalf in any  place either in or outside India: 

2[Provided that in case a company does not have a common seal, the authorization under this sub section shall be made by two directors or by a director and the Company Secretary, wherever the  company has appointed a Company Secretary.] 

(3) A deed signed by such an attorney on behalf of the company and under his seal shall bind the  company

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 22 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 21| Companies Act Section 21

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-21 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 21 के अनुसार किसी कंपनी द्वारा या उसकी ओर से की गई संविदाएं, कंपनी के किसी मुख्य प्रबंधकीय कार्मिक या ऐसे किसी अधिकारी द्वारा जिसे इस निमित्त बोर्ड द्वारा सम्यक रूप से प्राधिकृत किया गया हो, हस्ताक्षरित की जा सकेंगी, जिसे Companies Act Section-21 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 21 (Companies Act Section-21) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 21 Companies Act Section-21 के अनुसार किसी कंपनी द्वारा या उसकी ओर से की गई संविदाएं, कंपनी के किसी मुख्य प्रबंधकीय कार्मिक या ऐसे किसी अधिकारी द्वारा जिसे इस निमित्त बोर्ड द्वारा सम्यक रूप से प्राधिकृत किया गया हो, हस्ताक्षरित की जा सकेंगी।

कंपनी अधिनियम की धारा 21 (Companies Act Section-21 in Hindi)

दस्तावेजी कार्यवाहियों और संविदाओं का अधिप्रमाणन

 इस अधिनियम में अन्यथा यथा उपबंधित के सिवाय,

(क) कोई दस्तावेज या कार्यवाही, जिसका किसी कंपनी द्वारा अधिप्रमाणन अपेक्षित है; या

(ख) किसी कंपनी द्वारा या उसकी ओर से की गई संविदाएं, कंपनी के किसी मुख्य प्रबंधकीय कार्मिक या ऐसे किसी अधिकारी द्वारा जिसे इस निमित्त बोर्ड द्वारा सम्यक रूप से प्राधिकृत किया गया हो, हस्ताक्षरित की जा सकेंगी।

Companies Act Section-21 (Company Act Section-21 in English)

Authentication of documents, proceedings, and contracts

Save as otherwise provided in this  Act,— 

(a) a document or proceeding requiring authentication by a company; or 

(b) contracts made by or on behalf of a company,  may be signed by any key managerial personnel or an officer of the company duly authorised by the  Board in this behalf.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 21 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 20| Companies Act Section 20

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-20 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 20 के अनुसार किसी कंपनी या उसके अधिकारी पर किसी दस्तावेज की तामील, कंपनी के रजिस्ट्रीकृत कार्यालय पर कंपनी या अधिकारी को रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा या स्पीड पोस्ट या कुरियर सेवा द्वारा भेजकर या उसके रजिस्ट्रीकृत कार्यालय पर उसे डालकर या ऐसे इलैक्ट्रानिक साधनों या अन्य पद्धति से, जो विहित की जाए, की जा सकेगी, जिसे Companies Act Section-20 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 20 (Companies Act Section-20) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 20 Companies Act Section-20 के अनुसार किसी कंपनी या उसके अधिकारी पर किसी दस्तावेज की तामील, कंपनी के रजिस्ट्रीकृत कार्यालय पर कंपनी या अधिकारी को रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा या स्पीड पोस्ट या कुरियर सेवा द्वारा भेजकर या उसके रजिस्ट्रीकृत कार्यालय पर उसे डालकर या ऐसे इलैक्ट्रानिक साधनों या अन्य पद्धति से, जो विहित की जाए, की जा सकेगी।

कंपनी अधिनियम की धारा 20 (Companies Act Section-20 in Hindi)

दस्तावेजों की तामील

(1) किसी कंपनी या उसके अधिकारी पर किसी दस्तावेज की तामील, कंपनी के रजिस्ट्रीकृत कार्यालय पर कंपनी या अधिकारी को रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा या स्पीड पोस्ट या कुरियर सेवा द्वारा भेजकर या उसके रजिस्ट्रीकृत कार्यालय पर उसे डालकर या ऐसे इलैक्ट्रानिक साधनों या अन्य पद्धति से, जो विहित की जाए, की जा सकेगी:

परंतु जहां प्रतिभूतियां, किसी निक्षेपकर्ता के पास धारित हैं, वहां हिताधिकारी स्वामित्व के अभिलेखों की तामील ऐसे निक्षेपकर्ता द्वारा कंपनी पर इलैक्ट्रानिक साधनों या अन्य पद्धति द्वारा की जा सकेगी।

(2) इलैक्ट्रानिक पद्धति से रजिस्ट्रार के पास दस्तावेज फाइल करने के लिए इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों में यथा उपबंधित के सिवाय, रजिस्ट्रार या किसी सदस्य पर किसी दस्तावेज की तामील उसे डाक द्वारा या रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा या स्पीड पोस्ट या कुरियर सेवाओं द्वारा भेजकर या उसके कार्यालय या पते पर परिदान करके या ऐसी इलैक्ट्रानिक या अन्य पद्धति द्वारा की जा सकेगी, जो विहित की जाए:

परंतु कोई सदस्य, ऐसी विशिष्ट पद्धति के माध्यम से किसी दस्तावेज के परिदान के लिए अनुरोध कर सकेगा, जिसके लिए वह ऐसी फीस का संदाय करेगा, जो कंपनी द्वारा अपने वार्षिक साधारण अधिवेशन में अवधारित की जाए।

स्पष्टीकरण -इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “कुरियर” पद से ऐसा कोई व्यक्ति या अभिकरण अभिप्रेत है, जो दस्तावेज का परिदान करता है और उसके परिदान का सबूत उपलब्ध कराता है।

Companies Act Section-20 (Company Act Section-20 in English)

Service of documents

(1) A document may be served on a company or an officer thereof by  sending it to the company or the officer at the registered office of the company by registered post or by speed post or by courier service or by leaving it at its registered office or by means of such electronic or  other mode as may be prescribed: 

Provided that where securities are held with a depository, the records of the beneficial ownership may be served by such depository on the company by means of electronic or other mode.

(2) Save as provided in this Act or the rules made thereunder for filing of documents with the  Registrar in electronic mode, a document may be served on Registrar or any member by sending it to him  by post or by registered post or by speed post or by courier or by delivering at his office or address, or by  such electronic or other mode as may be prescribed: 

Provided that a member may request for delivery of any document through a particular mode, for which he shall pay such fees as may be determined by the company in its annual general meeting. 

Explanation.—For the purposes of this section, the term courier‘‘ means a person or agency which delivers the document and provides proof of its delivery. 

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 20 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।