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आईपीसी की धारा 506, आपराधिक अभित्रास (धमकाना) के लिए दण्ड | IPC Section-506 in hindi | Punishment for Criminal Intimidation.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 506? साथ ही हम आपको IPC की धारा 506 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 506 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम आपको महत्वपूर्ण धारा के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। हम में बहुत से लोगो को नहीं पता होता हैं कि धमकी देना एक तरह का गंभीर अपराध माना गया है । जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को किसी भी तरह से अपराधिक धमकी देता है जैसे- किसी कार्य को करने के लिए, अपनी बात मनवाने के लिए, या अपमानित करने के उद्देश्य से धमकाता है तो, भारतीय दण्ड संहिता की धारा 506 उपयोग होता है । हम इस लेख के माध्यम से आपको पूर्ण जानकारी, कैसे क्या सजा, अर्थदंड, और जमानत कैसे मिलेगी इत्यादि सब बताएंगे ।

आईपीसी की धारा 506 के अनुसार-

अपराधिक अभित्रास (धमकाना) के लिए दण्ड –

जो कोई आपराधिक धमकाना जैसा अपराध करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।

Punishment for criminal intimidation-

Whoever commits the offence of criminal intimidation shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

अपराधिक धमकाना क्या है-

अपराधिक धमकाना मतलब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को धमकी देता है कि ऐसा नहीं करोगे, तो ऐसा होगा। इसी तरह से कई प्रकार से धमकाना ही अपराधिक धमकाना की श्रेणी में आते है । आइए जानते हैं IPC की धारा 506 में किन किन कारणों से धमकाना, की बात की गई है ।

IPC की धारा 506 के अनुसार- यदि कोई व्यक्ति, किसी दूसरे व्यक्ति को कोई आपराधिक धमकी देगा, आपको बता दें धमकी का अर्थ जैसे कि किसी व्यक्ति को जान से मारने की धमकी देना या किसी को आग से जलाना या किसी की प्रॉपर्टी को आग से जला कर खत्म करने की धमकी देना, या किसी का रेप करने की धमकी देना, या किसी व्यक्ति से अपनी बात मनवाने के लिए किसी आपराधिक तरीके से धमकी देना ये सब बातें धमकी की श्रेणी में आएँगी  इस प्रकार की धमकी अपराधिक धमकी मानी जाती है । इसके साथ यदि किसी स्त्री के चरित्र पर लांछन लगाता है तो भी यह धारा 506 अप्लाई होती है ।

इस प्रकार की धमकियों के लिए IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा 506 के अनुसार दंड का प्रावधान किया गया है। आपको यह भी जानना बहुत जरूरी है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 506 में गवाहों की ज्यादा जरूरत नहीं होती है, अगर पीड़ित यानी जिस व्यक्ति को धमकी दी गई है, वह न्यायालय में यह साबित कर दे कि उसको इस बात के लिए धमकी दी गई है।

यदि कोई व्यक्ति, किसी अन्य व्यक्ति को मृत्यु या कोई और बड़ा अपराध करने की धमकी देता है, या किसी महिला की इज्जत पर बिना बात के लांछन लगाने की धमकी देगा या आग से जला कर नुकसान पहुंचाने की, या फिर किसी संपत्ति को आग से जलाकर खत्म करने की धमकी देता  है, तो ऐसे व्यक्ति को कठोर सजा का भी प्रवधान जैसे मृत्युदंड या कम से कम 7 बर्ष तक के कारावास की सजा दी जा सकती है, जिसे अपराध की गंभीरता को देखते हुए आजीवन कारावास तक की सजा में बदला जा सकता है साथ–साथ आर्थिक दंड से दण्डित किया जा सकता है।

लागू अपराध

1.किसी व्यक्ति को धमकाना।
सजा– दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकते है ।
2.यदि धमकी, मृत्यु जैसे घोर अपराध जैसे करने की दी गई हो।
सजा– सात वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकते है ।
यह एक जमानती, असंज्ञेय अपराध है साधारण आपराधिक धमकी देता है, तो यह किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय होता है। यदि मृत्यु या गंभीर चोट की धमकी दी जाती है, तो यह केवल और केवल प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय होता है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

जो कोई किसी व्यक्ति को साधारण आपराधिक धमकी देता है, तो वह दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकते है एवम् यदि मृत्यु या गंभीर चोट की धमकी दी जाती है तो सात वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकते है। यह धारा 506 दोनों प्रकार के अपराधों में लागू होता है ।

जमानत (Bail) का प्रावधान

जो कोई किसी व्यक्ति को साधारण आपराधिक धमकी देता है एवम् यदि मृत्यु या गंभीर चोट की धमकी दी जाती है, तो वह भी दंडनीय होगा।  IPC भारतीय दंड संहिता की धारा 506 में जिस भी अपराध के बारे में बताया गया है यह एक  असंज्ञेय अपराध है। इस अपराध में किसी भी आरोपी को जमानत दी जा सकती है। इसके अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को साधारण आपराधिक धमकी देता है, तो यह किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय होता है, और यदि मृत्यु या गंभीर चोट की धमकी दी जाती है, तो यह केवल प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय होता है। इस अपराध में यदि पीड़ित व्यक्ति चाहे तो आरोपी के साथ समझौता कर सकता है |

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी व्यक्ति को धमकाना।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनोंगैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट
यदि धमकी, मृत्यु जैसे घोर अपराध जैसे करने की दी गई हो।सात वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनोंगैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास धारा 506 की पूर्ण जानकारी आप तक प्रदान करने का है, अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।

आईपीसी की धारा 504, लोक शांति भंग कराने को प्रकोपित करने के आशय से साशय अपमान | IPC Section-504 in hindi | Intentional insult with intent to provoke breach of peace.

धारा 504 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम आपको महत्वपूर्ण धारा के विषय में पूर्ण जानकारी आपको देंगे। इस धारा में कैसे सजा मिलती है, कैसे बचाव किया जा सकता है इत्यादि । जो कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को जानबूझकर अपमानित करता है, वह व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत अपराधी होगा ।

धारा- 504 जानबूझकर अपमानित करना

IPC Section-504

आईपीसी की धारा 504 के अनुसार –

लोक शांति भंग कराने को प्रकोपित करने के आशय से साशय अपमान-

जो कोई किसी व्यक्ति को साशय अपमानित करेगा और तद्द्वरा उस व्यक्ति को इस आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए, प्रकोपित करेगा कि ऐसे प्रकोपन से वह लोक शांति भंग या कोई अन्य अपराध कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा ।
Intentional insult with intent to provoke breach of peace.-
Whoever intentionally insults, and thereby gives provocation to any person, intending or knowing it to be likely that such provocation will cause him to break the public peace, or commit any other offence, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

आईपीसी की धारा 504 क्या कहती है साधारण भाषा में

हम में से बहुत लोगो को नहीं पता कि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को जानबूझकर अपमानित नहीं कर सकता है, ऐसा करना भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत अपराध की श्रेणी मे आएगा, साथ ही ऐसे अपराध कारित करने पर लोक शांति भंग होने का डर बना रहता है ।

लागू अपराध

किसी को उकसा कर लोकशांति भंग करने के इरादा रखते हुए जानबूझकर अपमान करना ।
सजा – 2 वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं ।
यह एक जमानती, गैर संज्ञेय अपराध है और किसी भी वर्ग के न्यायाधीश द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता करने योग्य है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को उकसा कर लोकशांति भंग करने के इरादा रखते हुए जानबूझकर अपमान करता है तो वह व्यक्ति जो ऐसा कर रहा है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 504 में “किसी को उकसा कर लोकशांति भंग करने के इरादा रखते हुए जानबूझकर अपमान करना।“ इस अपराध के लिए सजा को निर्धारित किया गया हैं | इसके लिए उस व्यक्ति को जिसके द्वारा ऐसा अपराध किया गया है उसको – दो वर्ष का कारावास एवम् जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं ।

जमानत (Bail) का प्रावधान

इस धारा के अंतर्गत कोई व्यक्ति किसी को उकसा कर लोकशांति भंग करने के इरादा रखते हुए जानबूझकर अपमान करता है तो वह दंडनीय होगा। यह एक गैर संज्ञेय अपराध है, और साथ ही इस अपराध की प्रकृति जमानती है।
यह अपराध पीड़ित व्यक्ति के साथ समझौता करने योग्य है।

हमारा प्रयास धारा 504 की पूर्ण जानकारी आप तक प्रदान करने का है, अगर आप कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।
धन्यवाद

आईपीसी की धारा 498A किसी स्त्री के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करना | IPC Section-498A in hindi | husband or relative of husband of a woman subjecting her to cruelty.

धारा 498A का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम आपको महत्वपूर्ण धारा के विषय में पूर्ण जानकारी आपको देंगे, यह धारा जानना बहुत जरूरी हम सभी पुरुषों को। इस धारा में कैसे सजा मिलती है, कैसे बचाव किया जा सकता है इत्यादि । यह धारा कहती है जो कोई स्त्री का पति या पति के परिवार वाले, ऐसी स्त्री के प्रति क्रूरता करते है, जिससे स्त्री आत्महत्या के लिए प्रेरित होती है, तो धारा 498A लागू होगी ।

धारा 498A, का आज हमारे समाज में बहुत ही गलत उपयोग किया जा रहा है, कुछ स्त्रियां अपनी बात मनवाने के लिए इस धारा का दुरुपयोग कर रही है, जिसके चलते बहुत से लोग गलत शिकार हो जाते है। (मेरा कथन उन स्त्रियों को है, जो किसी निर्दोष व्यक्ति को ऐसे झूठे अपराध में फंसा देती है।आइए जानते हैं, आईपीसी क्या कहती है।)

आईपीसी की धारा 498A के अनुसार –

किसी स्त्री के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करना-

जो कोई, किसी स्त्री का पति या पति का नातेदार होते हुए, ऐसी स्त्री के प्रति क्रूरता करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि 3 वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जमाने से भी दंडनीय होगा।
Husband of relative of husband of a woman subjecting her to cruelty-
Whoever, being the husband or relative of the husband of a woman subjects such women to cruelty shall be punished with imprisonment for a term which may extend to three years and shall also be liable to fine.

स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए “क्रूरता” से निम्नलिखित अभिप्रेत है-

1. जानबूझ कर किया गया कोई आचरण जो ऐसी प्रकृति का है जिससे उस स्त्री को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करने की या उस स्त्री के जीवन, अंग या स्वास्थ्य को (जो चाहे मानसिक हो या शारीरिक) गंभीर क्षति या खतरा कारित करने की संभावना है; या
2. किसी स्त्री को तंग करना, जहां उसे या उससे संबंधित किसी व्यक्ति को किसी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति के लिए किसी भी जरूरत मांग करने के लिए प्रताड़ित करने की दृष्टि से या उसके अथवा उसे समझ किसी विशेष की मांग पूरी करने में असफल रहने के कारण इस प्रकार तंग किया जा रहा है।

क्रूरता (Cruelty) क्या है?

धारा 498A में क्रूरता किसी स्त्री को तंग करना या उससे संबंधित किसी व्यक्ति को किसी संपत्ति या मूल्यवान वस्तु के प्रति विधिविरुद्ध मांग पूरी करने के लिए प्रताड़ित करना अथवा मांग पूरी न होने पर प्रताड़ित किया जा रहा है, तो यह क्रूरता की श्रेणी में आएगा ।

लागू अपराध

किसी विवाहित स्त्री के प्रति क्रूरता करना।
सजा – 3 वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं ।
यह एक अजमानती, संज्ञेय अपराध है और प्रथम वर्ग के न्यायाधीश द्वारा विचारणीय है।
संज्ञेय, यदि अपराध किए जाने से संबंधित सूचना पुलिस थाने के भार साधक अधिकारी को अपराध से व्यथित व्यक्ति द्वारा या रक्त, विवाह अथवा दत्तक ग्रहण द्वारा उससे संबंधित किसी व्यक्ति द्वारा या यदि कोई ऐसा नातेदार नहीं है तो ऐसे वर्ग या प्रवर्ग के किसी लोक सेवक द्वारा जो राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए, दी गई है।
यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

किसी स्त्री को तंग करना या उससे संबंधित किसी व्यक्ति को किसी संपत्ति या मूल्यवान वस्तु के प्रति विधिविरुद्ध मांग पूरी करने के लिए प्रताड़ित करना अथवा मांग पूरी न होने पर प्रताड़ित किया जा रहा है तो वह व्यक्ति जो ऐसा कर रहा है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A में “किसी विवाहित स्त्री के प्रति क्रूरता का व्यवहार करना” इस अपराध के लिए सजा को निर्धारित किया गया हैं| इसके लिए उस व्यक्ति को जिसके द्वारा ऐसा अपराध किया गया है उसको – तीन वर्ष का कारावास एवम् जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं ।

जमानत (Bail) का प्रावधान

इस धारा में किसी विवाहित स्त्री के प्रति क्रूरता का व्यवहार करता है, जिससे कल को वह स्त्री आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करता है तो वह दंडनीय होगा। यह एक संज्ञेय अपराध है, और साथ ही इस अपराध की प्रकृति जमानती नहीं है। मुख्य बात यह है कि इस अपराध में सबसे पहले आप अच्छे वकील से सलाह लें, डरने की जरूरत नहीं है ।
नोट- ऐसे मामलों में सुप्रीमकोर्ट के गाइडलाइन के अनुसार अरेस्टिंग रोकने के लिए Anticipatory bail ले सकते है।

धारा 498A तथ्य (Fact) और बचाव (Rescue) की बात करते –

धारा 498A के वाद आज हमारे भारत में सबसे ज्यादा है, साथ 100 में से 90 मामले फर्जी होने के कारण रद्द हो जाते है । इसलिए अगर कोई भी मित्र अथवा सगा संबंधी ऐसे मामलो मे फंसा है, तो यह जान लें, इससे डरना बिल्कुल भी नहीं है, अगर आपने कोई अपराध नहीं किया है ।

जब किसी व्यक्ति के ऊपर ऐसे आरोप की शिकायत होती है, तब जांच अधिकारी/पुलिस अधिकारी आपसे संपर्क करता है। (सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के अनुसार पुलिस अधिकारी द्वारा ऐसे अपराधो को दर्ज करने से पहले दोनों पक्षों को बुलाकर, समझौता कराने का पहला कार्य पुलिस अधिकारी को दिया, इसके पश्चात् अगर मामला नहीं संभलता तो ही FIR दर्ज करेंगे।) लेकिन जब आप पर FIR दर्ज हो ही गई है, तो डरने की कोई जरूरत नहीं, जब आपने ऐसा कोई अपराध किया ही नहीं है । FIR दर्ज होने के लगभग 1 सप्ताह के अंदर आपको उसकी सूचना देंगे। (सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के अनुसार पुलिस अधिकारी द्वारा ऐसे अपराधो में किसी व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार नहीं करेंगे, यदि कोई ऐसा गंभीर अपराध नहीं हुआ है) इसके पश्चात् आपको धारा 41A के नोटिस जारी करायेंगे, यह नोटिस एक तरह से यह कहलाती हैं कि हम आपकी इस मामले में मदद करेंगे, कही नहीं जाएंगे, जब भी आप बुलाएंगे, हम आएंगे, इन बीच हम Anticipatory bail हाईकोर्ट से ले सकते, यह जमानत जांच पूरी होने तक मान्य होती है, उसके उपरांत जब कोर्ट में चार्ज शीट दाखिल हो जाने पर ट्रायल शुरू होगा। उसके उपरान्त ही आपका निर्णय होगा । क्राइम रिपोर्ट के अनुसार आज कल सबसे अधिक वाद इसी धारा में आते है ।

हमारा प्रयास धारा 498A की पूर्ण जानकारी आप तक प्रदान करने का है, अगर आप कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।
धन्यवाद

आईपीसी की धारा-339 सदोष अवरोध| IPC Section-339 in hindi| Wrongful restraint.

धारा 339 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम आपको महत्वपूर्ण धारा के विषय में पूर्ण जानकारी आपको देंगे, इस धारा में कैसे सजा मिलती है, कैसे बचाव किया जा सकता है इत्यादि । जो कोई किसी व्यक्ति को स्वेच्छया से ऐसे बाधा डालता है, जब कि उस व्यक्ति को उस दिशा में जाने का पूर्ण अधिकार है, तो उस दशा में धारा 339 लागू होती है, किंतु ऐसे अपराध के लिए धारा-341 से दंडित किया जाता है। जानिए IPC क्या कहती है ।

आईपीसी की धारा 339 के अनुसार –

सदोष अवरोध

जो कोई किसी व्यक्ति को स्वेच्छया ऐसे बाधा डालता है कि उस व्यक्ति को उस दिशा में, जिसमें उस व्यक्ति को जाने का अधिकार है जाने से निवारित कर दें, वह उस व्यक्ति का सदोष अवरोध करता है, यह कहां जाता है।
Wrongful restraint-
Whoever voluntarily obstructs any person so as to prevent that person from proceeding in any direction in which that person has a right to proceed, is said wrongfully to restraint that person.

अपवाद- भूमि के या जल के किसी प्राइवेट मार्ग में बाधा डालना जिस के संबंध में किसी व्यक्ति को सद्भाव पूर्वक विश्वास है कि वहां बाधा डालने का उसे विधि पूर्ण अधिकार है इस धारा के अर्थ के अंतर्गत अपराध नहीं है।

दृष्टांत- क व्यक्ति एक मार्ग में, जिससे होकर जाने का य व्यक्ति का अधिकार है, सद्भावपूर्वक यह विश्वास न रखते हुए कि उसको मार्ग रोकने का अधिकार प्राप्त है, बाधा डालता है । य व्यक्ति जाने से तद्द्वारा रोक दिया जाता है। क व्यक्ति, य व्यक्ति का सदोष अवरोध करता है।

सदोष अवरोध का अर्थ

सदोष अवरोध (बाधा) का अर्थ स्पष्ट भाषा में किसी व्यक्ति को स्वेच्छया से बाधा डालना, अर्थात् कोई व्यक्ति, किसी व्यक्ति को किसी बात को लेकर, किसी तरह में बाधा उत्पन्न करता, जबकि उसको बाधा डालने का कोई अधिकार नहीं। इसे ही सदोष अवरोध कहते है ।

लागू अपराध

किसी व्यक्ति को सदोष अवरोध (गलत तरीके से बाधित) करना ।
सजा – 1 माह सादा कारावास या पांच सौ रुपए का जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं ।
यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी न्यायाधीश द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध पीड़ित व्यक्ति द्वारा समझौता करने योग्य है।
नोट – सदोष अवरोध अपराध के लिए IPC की धारा-341 से दंडित किया जाता है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

किसी व्यक्ति को गलत तरीके से बाधित करेगा या सदोष अवरोध करेगा तब उसके लिए दंड का निर्धारण भारतीय दंड संहिता में धारा 341 के तहत किया गया है । भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 341 में “गलत तरीके से अवरोध (बाधा डालना) करने पर” इस अपराध के लिए सजा को निर्धारित किया गया हैं| इसके लिए उस व्यक्ति को जिसके द्वारा ऐसा अंजाम दिया गया है उसको – एक माह का सादा कारावास या पांच सौ रुपए जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं ।

जमानत (Bail) का प्रावधान

इस धारा में सदोष अवरोध (गलत तरीके से बाधा डालना) करना, अर्थात् कोई व्यक्ति स्वेच्छया से ऐसे बाधा डालता है, जब कि उसे उस कार्य को करने का अधिकार है, बल्कि वह व्यक्ति को बाधा डालने का कोई अधिकार नहीं है। यह एक संज्ञेय अपराध है, और साथ ही इस अपराध की प्रकृति जमानती है, यह अपराध पीड़ित व्यक्ति द्वारा समझौता करने योग्य है।

हमारा प्रयास धारा 339 की पूर्ण जानकारी आप तक प्रदान करने का है, अगर आप कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।
धन्यवाद

आईपीसी की धारा-345 ऐसे व्यक्ति का सदोष परिरोध, जिसके छोड़ने के लिए रिट निकल चुका है | IPC Section 345 in hindi | Wrongful confinement of person for whose liberation writ has been issued.

धारा 345 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम आपको महत्वपूर्ण धारा के विषय में पूर्ण जानकारी आपको देंगे, इस धारा में कैसे सजा मिलती है, कैसे बचाव किया जा सकता है इत्यादि । जो कोई व्यक्ति, किसी भी व्यक्ति को गलत तरीके से कारावास में रखते हुए, यह जानते हुए कि उसकी मुक्ति के लिए एक रिट जारी की गई है, तो ऐसे अपराध को दूसरे व्यक्ति पर डालने वाले व्यक्ति पर धारा 345 के अंतर्गत अपराधी कहा जाएगा । जानिए IPC क्या कहती है ।

आईपीसी की धारा 345 के अनुसार –

ऐसे व्यक्ति का सदोष परिरोध, जिसके छोड़ने के लिए रिट निकल चुका है –

जो कोई यह जानते हुए किसी व्यक्ति को सदोष प्रतिरोध में रखेगा की उस व्यक्ति को छोड़ने के लिए रिट सम्यक् रूप से निकल चुका है, वह किसी अवधि के उस कारावास के अतिरिक्त, जिससे कि वह इस अध्याय की किसी अन्य धारा के आधीन दंडनीय हो, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा।

Wrongful confinement of person for whose liberation writ has been issued.-

Whoever keeps any person is wrongful confinement, knowing that a writ for the liberation of that person has been duly issued, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, in addition to any term of imprisonment to which he may be liable under any other section of this chapter.

सदोष परिरोध का अर्थ एवम् धारा 345 का साधारण भाषा में अर्थ क्या है-

कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को गलत तरीके से किसी अपराध के लिए, किसी और को लिप्त (जोड़ता) है, अर्थात् परिभाषित करता है कि इस अपराध के लिए वास्तव में वह नहीं, कोई अन्य व्यक्ति  है, तो इसे ही सदोष परिरोध कहते है । इसी तरह से किसी सदोष परिरोध व्यक्ति, जिसको छोड़ने के लिए न्यायालय में रिट दाखिल की जा चुकी है, जब की वह यह जानते हुए ऐसा करता है, तो वह दूसरा व्यक्ति, जिसने ऐसा किया, तो वह अपराधी होगा ।

लागू अपराध

ऐसे व्यक्ति का सदोष परिरोध, जिसके छोड़ने के लिए रिट निकल चुका है ।
सजा – किसी अन्य धारा के आधीन कारावास के अतिरिक्त 2 वर्ष तक का कारावास
यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता करने योग्य है।

किसी व्यक्ति को गलत तरीके से प्रतिबंधित करेगा या सदोष परिरोध करेगा, जबकि उसे ज्ञात है कि उसे छोड़ने हेतु रिट दायर की जा चुकी है, ऐसा अपराध जानते हुए भी करता है, तब उसके लिए दंड का निर्धारण भारतीय दंड संहिता में धारा 345 के तहत किया गया है । भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 345 में “गलत तरीके से प्रतिबंधित करेगा या सदोष परिरोध करेगा, जबकि उसे ज्ञात है कि उसे छोड़ने हेतु रिट दायर की जा चुकी है”, इस अपराध के लिए सजा को निर्धारित किया गया हैं | इसके लिए उस व्यक्ति को जिसके द्वारा ऐसा अंजाम दिया गया है उसको – किसी अन्य धारा के आधीन कारावास के अतिरिक्त दो वर्ष का कारावास की सजा हो सकती हैं।

सजा (Punishment) का प्रावधान

जमानत (Bail) का प्रावधान

इस धारा में गलत तरीके से प्रतिबंधित करेगा या सदोष परिरोध करेगा, जबकि उसे ज्ञात है कि उसे छोड़ने हेतु रिट दायर की जा चुकी है, अर्थात् किसी अन्य व्यक्ति को दोषी ठहराना, एक संज्ञेय अपराध है, और साथ ही इस अपराध की प्रकृति जमानती है, यह अपराध समझौता करने योग्य है।

हमारा प्रयास धारा 345 की पूर्ण जानकारी आप तक प्रदान करने का है, अगर आप कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।

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आईपीसी की धारा-342 सदोष परिरोध के लिए दण्ड | IPC Section 342 in hindi | Punishment for wrongful confinement.

धारा 342 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम आपको महत्वपूर्ण धारा के विषय में पूर्ण जानकारी आपको देंगे, इस धारा में कैसे सजा मिलती है, कैसे बचाव किया जा सकता है इत्यादि । जो भी कोई व्यक्ति किसी को सदोष परिरोध (गलत तरीके से प्रतिबंधित) करेगा, तो वह धारा 342 के अंतर्गत अपराधी होगा । जानिए IPC क्या कहती है ।

आईपीसी की धारा 342 के अनुसार –

सदोष परिरोध के लिए दण्ड –

जो कोई किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से दंडित किया जाएगा ।

Punishment for wrongful confinement.-

Whoever wrongfully confines any person, shall be punished with imprisonment of either description for a terms which may extend to one year, or with fine which may extend to one thousand rupees, or with both.

सदोष परिरोध का अर्थ क्या है-

कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को गलत तरीके से किसी अपराध के लिए, किसी और को लिप्त (जोड़ता) है, अर्थात् परिभाषित करता है कि इस अपराध के लिए वास्तव में वह नहीं, कोई अन्य व्यक्ति है, तो इसे ही, सदोष परिरोध कहते है ।

लागू अपराध

किसी व्यक्ति को सदोष परिरोध (गलत तरीके से प्रतिबंधित) कर देना ।
सजा – 1 वर्ष कारावास या 1 हजार रुपए जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं ।
यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी न्यायाधीश द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध पीड़ित व्यक्ति (जिसे परिरुद्ध किया गया है) द्वारा समझौता करने योग्य है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

किसी व्यक्ति को गलत तरीके से प्रतिबंधित करेगा या सदोष परिरोध करेगा तब उसके लिए दंड का निर्धारण भारतीय दंड संहिता में धारा 342 के तहत किया गया है |भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 342 में “ग़लत तरीके से परिरोध करने पर “इस अपराध के लिए सजा को निर्धारित किया गया हैं | इसके लिए उस व्यक्ति को जिसके द्वारा ऐसा अंजाम दिया गया है उसको – 1 वर्ष कारावास या 1 हजार रुपए जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं ।

जमानत (Bail) का प्रावधान

इस धारा में सदोष परिरोध (गलत तरीके से प्रतिबंधित) करना, अर्थात् किसी अन्य व्यक्ति को दोषी ठहराना, एक संज्ञेय अपराध है, और साथ ही इस अपराध की प्रकृति जमानती है, यह अपराध पीड़ित व्यक्ति (जिसे परिरुद्ध किया गया है) द्वारा समझौता करने योग्य है।

हमारा प्रयास धारा 342 की पूर्ण जानकारी आप तक प्रदान करने का है, अगर आप कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।
धन्यवाद