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आईपीसी की धारा-107 किसी बात का दुष्प्रेरण (IPC Section 107 Abetment of a thing) in Hindi

IPC-107

धारा- 107 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता में आज हम आपको बहुत ही महत्वपूर्ण धारा के के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कि भविष्य में आपके बहुत काम आने वाली है। हम में बहुत लोग यह नहीं जानते हैं कि कि अगर हम किसी व्यक्ति को किसी बात को लेकर उकसाते हैं, तो भी हम एक तरह से अपराध करते है, इसी विषय में हम आपको पूर्ण जानकारी, सजा, और किस तरह का अपराध है और क्या जुर्माना भरना भी पड़ सकता है।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा-107 के अनुसार-

वह व्यक्ति किसी बात के किए जाने का दुषप्रेरण (Abetment) करता है, जो-
पहली- उस बात को करने के लिए किसी व्यक्ति को उकसाता है, अथवा
दूसरी- उस बात को करने के लिए किसी षड्यंत्र में एक या अधिक अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों के साथ मिलकर सम्मिलित होता है, यदि उस षड्यंत्र के अनुसरण में, और उस बात को करने के उद्देश्य कोई कार्य अवैध रूप घटित हो जाए, अथवा
तीसरी- बात के लिए किया जाना मैं किसी कार्य या अवैध लोप व्दारा साशय सहायता करता है।

स्पष्टीकरण

1-कोई व्यक्ति जानबूझकर, गलत उद्देश्य या तात्विक तथ्य, जिसे प्रकट करने के लिए आबद्ध (Bound) है, जानबूझकर छिपाने द्वारा, स्वेच्छया किसी बात का किया जाना कार्य किया जाना कारित या कारित करने का प्रयत्न करता है, वह उस बात का किया जाना उकसाता है या कहा जाता है।

साधारण भाषा में दुष्प्रेरण का अर्थ (Abetment) को समझते है-

भारतीय संविधान में हमे यह भी जानकारी होना आवश्यक है कि अगर हम किसी व्यक्ति को किसी बात या किसी निजी स्वार्थ के लिए उकसाते है, तो वह हमारे लिए भारी पड़ सकता है, क्यों कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 107 के अंतर्गत यदि हम किसी व्यक्ति को किसी बात को करने के लिए उकसाते है अथवा किसी निजी स्वार्थ के लिए किसी बात को लेकर, उसके खिलाफ एक या अधिक व्यक्तियों के साथ मिलकर षडयंत्र करते अथवा शामिल होते है तो भी यह एक प्रकार का अपराध होगा ।

दुष्प्रेरण के लिए आवश्यक तत्व-

भारतीय दंड संहिता कि धारा 107 में (Abetment) दुष्प्रेरण के अपराध के लिए कुछ आवश्यक तत्त्व निम्न हैं-

1) किसी व्यक्ति को उकसाना

उकसाना का अर्थ है, किसी व्यक्ति को कोई कार्य करने के लिए उत्तेजित करना, किसी बात का दबाव डालकर किसी कार्य को करने के लिए कोई सुझाव देना, इसके आलावा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संकेत व्दारा प्रेरित करना, फुसलाना, प्रार्थना करना, विनती करना, किसी कार्य को करने या करने से रोकने के लिए उत्साहित करना। परन्तु कोई कार्य दुष्प्रेरण की श्रेणी में केवल तभी आएगा जब वह कार्य स्वयं अपराध हो। दुष्प्रेरण मौन स्वीकृति देने से भी किया जा सकता है।

2)षडयंत्र

कोई व्यक्ति कुछ अन्य व्यक्तियों के साथ मिल कर षडयंत्र द्वारा भी दुष्प्रेरण कर सकता है, जब

दो या दो से अधिक व्यक्ति एकत्र हों ,और

वे किसी कार्य के लिए एकत्र हों,

ऐसा कार्य षडयंत्र करके किया गया हो

ऐसा कोई कार्य करने से कोई अवैध या गैर क़ानूनी कार्य हो गया हो

3)सहायता व्दारा दुष्प्रेरण

सहायता करने से दुष्प्रेरण तीन प्रकार से किया जा सकता है-

कोई कार्य करके

कोई व्यक्ति किसी प्रकार का कार्य करके किसी अपराध के घटित होने में सहायता करता है, तो उस अपराध को कार्य करके सहायता द्वारा दुष्प्रेरण कहा जाता है। उदहारण के लिए कोई व्यक्ति जानते हुए अपना मकान किराये पर दे देता है, कि उसका मकान का उपयोग अवैध कार्यो के लिए किया जायेगा।

अवैध क्रिया करके

किसी व्यक्ति का कोई कार्य क़ानूनी ढंग से करने का दायित्व होता है, और वह जान बूझकर वह कार्य गैर क़ानूनी ढंग से करता है, तो ऐसी स्तिथि में वह व्यक्ति दुष्प्रेरण का अपराध करता है।

कार्य को आसान बनाकर

दंड संहिता की धारा 107 में वर्णित स्पष्टीकरण 2 इस बात की पुष्टि करता है, कि किसी कार्य को सुगम बनाकर भी दुष्प्रेरण किया जा सकता है।

सजा का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 109 में दुष्प्रेरण के लिए दंड के प्रावधान का स्पष्टीकरण दिया गया है, जिसके अनुसार जो कोई व्यक्ति किसी अपराध का दुष्प्रेरण करता है, और यदि दुष्प्रेरित व्यक्ति उस दुष्प्रेरित कार्य को दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप करता है, तो ऐसे व्यक्ति को न्यायालय उस अपराध की सजा से दण्डित किया जाता है, जिस अपराध का उस व्यक्ति ने दुष्प्रेरण किया है।

जमानत (Bail) का प्रावधान

धारा 107 एक उकसाने अथवा किसी कार्य को किसी गलत ढंग से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कराने के उद्देश्य से किया जाता है । अपराध कराए गए कृत्य के अनुसार ही संज्ञेय अथवा असंज्ञेय का अनुमान किया जा सकेगा, अगर उकसाने का कार्य संज्ञेय अपराध के लिए करता है, तो अजमानतीय अपराध की श्रेणी में आएगा, अगर उकसाने का प्रयोजन असंज्ञेय अपराध को करता है, तो जमानतीय अपराध की श्रेणी में आयेगा। हमारा प्रयास धारा 107 की पूर्ण जानकारी आप तक प्रदान करने का है, अगर आप कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।

धन्यवाद

प्राइवेट प्रतिरक्षा क्या है संपूर्ण जानकारी ? जानिए अपने अधिकार राइट टू डिफेंस के तहत? (What is Self Defence or Private Defence?)

प्राइवेट प्रतिरक्षा क्या है संपूर्ण जानकारी ? जानिए अपने अधिकार राइट टू डिफेंस के तहत? (What is Self Defence or Private Defence?)

प्रतिरक्षा अर्थ का हम समझ सकते है कि समाज मे रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अपने और अपने परिवार व अपने संपत्ति की रक्षा करना Right to self Defence कहलाता है । हम सभी जानते है प्रतिरक्षा करना कोई अपराध नहीं है, लेकिन हमारे संविधान में इसे साबित करना भी अभियुक्त की जिम्मेदारी होती है ।

आज हम आपको सेल्फ डिफेंस यानी प्राइवेट डिफेंस के बारे में बताने जा रहे है । हम में से बहुत लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि भारतीय कानून जिस तरह से आत्मसुरक्षा का अधिकार मुहैया कराता है, उसका उपयोग किस तरीके से किया जा सकता है।

Private diffence
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आत्मरक्षा (Self Defence or private Defence)

हमारे समाज में रह रहे प्रत्येक व्यक्ति अपनी अथवा अपने परिवार व अपनी संपत्ति की रक्षा करना मौलिक अधिकार होता है, कोई भी व्यक्ति अपनी जान, माल की रक्षा के लिए किसी को रोके, धमकी दे या किसी भी अन्य साधन का उपयोग करके अपनी रक्षा करे, आत्मरक्षा कहलाता है ।आत्मरक्षा के अधिकार के तहत सामने वाले व्यक्ति को उतनी ही चोट या नुकसान पहुंचा सकते हैं, जितनी वह आप को पहुंचाना चाहता है। उदाहरार्थ-अगर कोई आप पर डंडे से हमला करता है, तो आप भी आत्मरक्षा में डंडे का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन उस पर आप गोली नहीं चला सकते। यदि सामने वाले के हाथ में पिस्तौल है और वह गोली चलाने वाला है, तो ही आप आत्मरक्षा में गोली चला सकते हैं। यह आपका आत्मरक्षा का अधिकार माना जाएगा।

Right to Self Defence को हमारे संविधान में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 96 से 106 तक की धारा में वर्णन किया गया है ।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा -96 के अंतर्गत, यह कानून हमे प्राइवेट प्रतिरक्षा में किए गए बातो के बारे में बताता है कि राइट टू सेल्फ डिफेंस के अंतर्गत प्रयोग किए जाने वाली कोई बात अपराध नहीं होती है, साथ ही राइट टू सेल्फ डिफेंस साबित करने के लिए अभियुक्त को न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करना होता है। इसके साथ ही अभियुक्त व्दारा पहले हमला नहीं होना चाहिए, तब ही सेल्फ डिफेंस माना जाएगा ।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा -97 के अंतर्गत, हर व्यक्ति को हमारे संविधान में यह अधिकार दिया गया है कि वह अपने शरीर पर प्रभाव डालने वाले किसी अपराध के विरुद्ध अपने शरीर या किसी अन्य व्यक्ति के शरीर की प्रतिरक्षा करे साथ ही ऐसे कार्य के विरुद्ध, जो चोरी, लूट या अपराधिक अतिचार के अंतर्गत आने वाला अपराध हो, अथवा अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की चाहे जंगम संपत्ति, या स्थावर संपत्ति की प्रतिरक्षा करे।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा -98 के अंतर्गत, जब कोई कार्य या कोई अपराध, उस कार्य को करने वाला व्यक्ति, बलाकपन, समझ का आभाव, चित्तविकृत या उस व्यक्ति के किसी भ्रम के कारण वह अपराध नहीं है, तब हर वह व्यक्ति उस कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का वही अधिकार रखता है, जो वह उस कार्य के वैसा अपराध होने की दशा में रखता ।

दृष्टांत

1- क व्यक्ति, पागलपन के असर में, ख व्यक्ति को जान से मारने का प्रयत्न करता है। क व्यक्ति किसी अपराध का दोषी नहीं है,किंतु ख व्यक्ति को प्राइवेट प्रतिरक्षा का वहीं अधिकार है, जो वह क व्यक्ति के स्वस्थचित होने की दशा में रखता ।

2- ख व्यक्ति, रात्रि में ऐसे घर में प्रवेश करता है, जिसमे प्रवेश करने के लिए वैध हकदार है। क व्यक्ति सद्भावपूर्वक, ख व्यक्ति को गृह भेदक समझकर ख व्यक्ति पर हमला करता है। यहां क व्यक्ति इस भ्रम के कारण ख व्यक्ति पर आक्रमण करके कोई अपराध नहीं करता है, किंतु ख व्यक्ति, क व्यक्ति के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का वही अधिकार रखता है, जो वह तब रखता, जब क व्यक्ति उस भ्रम के आधीन कार्य न करता ।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा -99 के अंतर्गत, कोई व्यक्ति कोई ऐसा कार्य, जिससे मृत्यु या घोर उपहति की आशंका युक्तियुक्त रूप से कारित नहीं होती, सद्भावपूर्वक पदाभास में कार्य करते हुए लोक सेवक द्वारा किया जाता है या किए जाने का प्रयत्न किया जाता है, तो उस कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं देता है चाहे वह कार्य विधि अनुसार सर्वथा न्यायानुमत न भी हो ।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा-100 के अंतर्गत, सेल्फ डिफेंस में अगर किसी अपराधी की मौत भी हो जाए तो भी बचाव हो सकता है बशर्ते कानूनी प्रावधान के तहत ऐसा अपराध किया गया हो। अगर गंभीर चोट पहुंचने का खतरा हो, रेप या फिर दुराचार का खतरा हो, अपराधी अगर अपहरण की कोशिश में हो तो ऐसी सूरत में सेल्फ डिफेंस में किए गए अटैक में अगर अपराधी की मौत भी हो जाए तो अपना बचाव किया जा सकता है। लेकिन यह साबित करना होगा कि उक्त कारणों से अटैक किया गया था ।

यदि आप पर कोई एसिड अटैक करता है तो आपकी जवाबी कार्यवाही को आत्मरक्षा के अधिकार तहत कार्यवाही मानी जाएगी। चाहे अभियुक्त व्दारा जान से क्यों न मारा हो।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा-101 के अंतर्गत, यदि अपराध पुर्व में किसी भी भांती का नहीं है तो शरीर के प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार हमलावर की मृत्यु स्वेच्छया कारित करने तक नहीं होता ।

अभियुक्त को न तो कोई रक्तस्त्राव की न ही प्रत्यक्ष उपहति हुई और न ही उपहतियो की प्रकृति को साबित करने के लिए किसी चिकित्सक की परीक्षा की गई।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा-102 के अंतर्गत, किसी व्यक्ति के शरीर की प्राइवेट परीक्षा का अधिकार उसी क्षण प्रारंभ हो जाता है, जब आप प्राप्त करने के प्रयत्न यह धमकी से शरीर के संकट की युक्तियुक्त की आशंका पैदा हो जाती है चाहे वह अपराध न किया गया हो और वह तब तक बना रहता है जब तक सभी के संकट की कोई ऐसी आशंका बनी रहती है।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा-103 के अंतर्गत, कोई अपराधी रात में घर में सेंध लगने, लूटपाट होने, आगजनी और चोरी होने जैसी परिस्थितियों में अगर आपको अपनी जान का खतरा है, तो आपको आत्मरक्षा का अधिकार है। अगर किसी महिला को लगता है कि कोई व्यक्ति उसके घर में उस पर हमला करने वाला है या रेप करने की कोशिश करता है, तो वह अपनी सुरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई कर सकती है और यह उसका आत्मरक्षा का अधिकार होगा।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा-104 के अंतर्गत, यदि वह अपराध, जिसके किए जाने या किए जाने के प्रयत्न से निजी प्रतिरक्षा के अधिकार के प्रयोग का अवसर आता है, ऐसी चोरी, कुचेष्टा या आपराधिक अतिचार है, जो पूर्वगामी धारा में प्रगणित भांतियों में से किसी भांति का न हो, तो उस अधिकार का विस्तार स्वेच्छया मृत्यु कारित करने का नहीं होता किन्तु उसका विस्तार धारा 99 में वर्णित निर्बंधनों के अध्यधीन दोषकर्ता की मृत्यु से भिन्न कोई क्षति स्वेच्छया कारित करने तक का होता है।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा-105 के अंतर्गत, सम्पत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार तब प्रारंभ होता है, जब सम्पत्ति के संकट की युक्तियुक्त आशंका प्रारंभ होती है ।

संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार, चोरी के विरुद्ध अपराधी के संपत्ति सहित पहुंच से बाहर हो जाने तक अथवा या तो लोक प्राधिकारियों की सहायता अभिप्राप्त कर लेने या संपत्ति प्रत्युद्धत हो जाने तक बना रहता है ।

संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार लूट के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक अपराधी किसी व्यक्ति की मॄत्यु या उपहाति, या सदोष अवरोध कारित करता रहता या कारित करने का प्रयत्न करता रहता है, अथवा जब तक तत्काल मृत्यु का, या तत्काल उपहति का, या तत्काल वैयक्तिक अवरोध का, भय बना रहता है ।

संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार आपराधिक अतिचार या रिष्टि के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक अपराधी आपराधिक अतिचार या रिष्टि करता रहता है ।
संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार रात्रौ गृह-भेदन के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक ऐसे गृहभेदन से आरंभ हुआ गृह-अतिचार होता रहता है ।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा-106 के अंतर्गत, जिस हमले से मृत्यु की आशंका युक्तियुक्त रूप से कारित होती है उसके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रयोग करने में यदि प्रतिरक्षक ऐसी स्थिति में हो कि निर्दोष व्यक्ति की अपहानि की जोखिम के बिना वह उस अधिकार का प्रयोग कार्यसाधक रूप से न कर सकता हो तो उसके प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार वह जोखिम उठाने तक का है ।

दृष्टांत

क पर एक भीड़ व्दारा आक्रमण किया जाता है, जो उसकी हत्या करने का प्रयत्न करती है । वह उस भीड़ पर गोली चलाए बिना प्राइवेट प्रतिरक्षा के अपने अधिकार का प्रयोग कार्यसाधक रूप से नहीं कर सकता, और वह भीड़ में मिले हुए छोटे-छोटे शिशुओं की अपहानि करने की जोखिम उठाए बिना गोली नहीं चला सकता । यदि वह इस प्रकार गोली चलाने से उन शिशुओं में से किसी शिशु को अपहानि करे तो क कोई अपराध नहीं करता।

दण्ड क्या है, कितने प्रकार से दण्ड हमारे संविधान में दिया जाता है आइये जानते है?

नमस्कार दोस्तों, आज हम दण्ड के विषय मे पूर्ण जानकारी देंगे। क्या आप जानते है दण्ड क्या है और हमारे संविधान मे दण्ड कितने प्रकार से दिया जाता है, आज हम इस लेख मे जानेंगे दण्ड किसे कहते है और कितने प्रकार से हमारे संविधान मे दिया जाता है।

दण्ड (Punishments)

हमारे समाज के विकास एवंम् वृद्धि हेतु थोडी शक्ति होना बहुत आवश्यक है राज्य और छत्र की शक्ति और संप्रभुता का द्योतक और किसी अपराधी को उसके अपराध के निमित्त दी गयी सजा को दण्ड कहते हैं।  भारतीय संविधान मे दंड कितने प्रकार दिया जाना होगा।

दण्ड का अर्थ

जब से मनुष्य का जन्म पृथ्वी पर हुआ है, तब से दण्ड की व्यावस्था हमारे समाज मे रही है, केवल समय बदलते हुये, दण्ड का स्वारूप भी बदला गया है, अर्थात् हमारे समाज मे दण्ड का महत्वपूर्ण बताया गया है, क्योकि समाज मे यदि कोई व्यक्ति अपराध करता है, तो वह दण़्ड का भागीदार होगा । अपराध रोकने व भय उत्पन्न करने के लिये दण्ड का प्रवाधान हमारे भारतीय संविधान मे दिया गया है ।

अपराधी के अपराध की मात्रा, प्रकृति व गम्भीरता पर निर्भर करता है कि व्यक्ति को कौन सा अपराध करता है और उस पर कौन सा दण्ड मिलेगा । हम में से बहुत लोगो के मन में सवाल उठता होगा, कि कोई अपराधी, अगर अपराध करता है, तो कोर्ट उसे किस किस तरह से दंडित कर सकती है और हमारे संविधान में दण्ड कितने प्रकार से मिलता है ।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 53 में दण्ड के प्रकारों को परिभाषित किया गया है । दण्ड अपराधी के अपराध की गम्भीरता के आधार पर ही हमारे संविधान प्रावधान करती है ।

दण्ड के प्रकार

किसी अपराधी को भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत अपराध के आधार पर ही दण्ड निर्भर करता है, जो निम्न प्रकार है –

हला – मृत्यु

दूसरा – आजीवन कारावास

तीसरा – [अधिनियम सं0 17 सन् 1949 द्वारा निकाला गया]

चौथा – कारावास, जो दो भांति का है, अर्थात्

1- कठिन, मतलब कठोर श्रम कें साथ

2- सादा कारावास

पांचवा – संपत्ति का समपहरण (सम्पत्ति की कुर्की)

छठा – जुर्माना

साधारण कारावास- का अर्थ किसी व्यक्ति से, जिसे साधारण कारावास को दंडित किया गया है, कारागार में कार्य करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती, जब तक कि वह व्यक्ति स्वयं कार्य करने की इच्छा नहीं करता अर्थात् वह व्यक्ति कारागार मे मन चाहा कार्य कर सकता है।।

कठिन कारावास– का अर्थ किसी व्यक्ति से, जिसे जिसे साधारण कारावास को दंडित किया गया है, कारागार में विधि व्दारा कठोर श्रम करने की अपेक्षा की जाती, अर्थात् उस व्यक्ति को कारागार में कार्य करने के लिए बाध्य होगा, वह व्यक्ति स्वयं कार्य का चुनाव नही कर सकेगा, जो न्यायालय व्दारा दण्ड के तहत ही कार्य करेगा । ।

साधारण कारावास एवंम् कठिन कारावास मे अन्तर- जो व्यक्ति कारागार मे साधारण कारावास की सजा भुगत रहा है, वह व्यक्ति को कार्य का चुनाव स्वंय मिलता है, लेकिन जिसे कठिन कारावास की सजा प्राप्त हुयी है, वह व्यक्ति न्यायालय से प्राप्त कार्य के अनुसार ही कार्य कर सकेगा, जबकि मजदूरी दोनो को सजा पूर्ण होने पर मिलेगी।

हम में से बहुत से लोगों के मन में एक सवाल आता होगा, कि जब कोई व्यक्ति कारावास में लंबे समय के लिए जाता है, तो वहां क्या काम भी कराया जाता है ? क्या मजदूरी मिलती है ?

सत्यता में किसी व्यक्ति को कारागार में लंबे समय के लिए दंडित किया जाता है, तब व्यक्ति के अपराध के ही अनुसार न्यायालय में उपरोक्त दण्ड के प्रकारों में से दंडित किया जाएगा, उसके उपरान्त अगर व्यक्ति को सादा कारावास दिया गया है, तो भी व्यक्ति अपनी इच्छानुसार कार्य करके पैसा कमा सकता है और दण्ड पूर्ण हो जाने पर उसे, उसकी मजदूरी मिलेगी । कठोर कारावास से दंडित व्यक्ति न्यायालय से प्राप्त कार्य के अनुसार ही कार्य कर सकेगा, कारागार में अभिरक्षा के दौरान, उनके व्दारा किए गए कार्यों के लिए मजदूरी के लिए हकदार होगा । साथ ही सजा पूर्ण होने पर ही वह अपनी मजदूरी पाने का अधिकारी भी होगा ।

भारतीय दंड संहिता की धारा-125 (IPC Section 125) भारत सरकार से मैत्री संबंध रखने वाली किसी एशियाई शक्ति के विरुद्ध युद्ध करना

धारा 125 का विवरण

भारतीय दंड संहिता की धारा 125 के अनुसार-

जो कोई 7[भारत सरकार] से मैत्री का या शांति का संबंध रखने वाली किसी एशियाई शक्ति की सरकार के विरुद्ध युद्ध करेगा या ऐसा युद्ध करने का प्रयत्न करेगा, या ऐसा युद्ध करने के लिए दुष्प्रेरण करेगा, वह 8[आजीवन कारावास] से, जिसमें जुर्माना जोड़ा जा सकेगा या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, जिसमें जुर्माना जोड़ा जा सकेगा या जुर्माने से दंडित किया जाएगा ।इस धारा के अन्तर्गत मुख्य उद्देश्य भारत देश की सरकार के साथ किसी अन्य देश की सरकार के मैत्री संबंधों को और अधिक गहरा बनाने के लिए ऐसे अपराधियों को उचित कारावास का दंड देने के साथ – साथ आर्थिक दंड का प्रावधान करना है। यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसे देश के खिलाफ युद्ध करने का प्रयत्न कर रहा है, या युद्ध करने का दुष्प्रेरण कर रहा है, या युद्ध कर रहा है, जो एशिया में आता है, और उसके भारत देश की सरकार के साथ मैत्री सम्बन्ध हैं।

धारा 125 के लिए सजा का प्रावधान

कोई व्यक्ति भारतीय दंड संहिता की धारा-125 के तहत अपराध करता है, तो वह कारावास की सजा का प्रावधान, जिसकी समय सीमा को 7 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और इस अपराध में आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है, जो कि न्यायालय आरोप की गंभीरता और आरोपी के इतिहास के अनुसार निर्धारित करता है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 125 के अन्तर्गत बचाव

भारतीय दंड संहिता की धारा-125 का अपराध बहुत ही गम्भीर अपराध होता है , क्योंकि इस धारा के अंतर्गत अपने देश के अन्य देशों के साथ मैत्री संबंधों को बिगाड़ने की बात आती है, जिसमें इस अपराध के दोषी को धारा 125 के अनुसार उस अपराध की सजा दी जाती है, जो अपराधी देश के मैत्री संबंधों को खराब करने का अपराध करता है। ऐसे अपराध से किसी भी आरोपी का बच निकलना बहुत ही मुश्किल हो जाता है, इसमें आरोपी को निर्दोष साबित कर पाना बहुत ही कठिन हो जाता है। इसलिये धारा-125 से बचने के लिये सबसे पहले जरूरी है कि किसी अच्छे वकील से सलाह ले वह ही आपके लिये बेहतर होगा । अगर वकील आपका तजुर्बेदार होगा तो उसे उसके आरोपो से मुक्त करा लेगा । इसलिये अच्छा वकील ऐसे मामलो मे चुने । ऐसे मामलो मे कोई व्यक्ति अगर ऐसे अपराध मे लिप्त होने के आरोपो ग्रसित है तो उसे बेहतर वकील से सलाह लेना ही लाभकारी सिद्ध होगा, अन्यथा वह दंड का भागीदार होगा ।

धारा-124A राजद्रोह,(IPC Section 124A Insurrection)

धारा 124A का विवरण

भारतीय दंड संहिता की धारा 124A के अनुसार-

अगर कोई भी व्यक्ति सरकार के खिलाफ कुछ लिखता है या बोलता है या लिखने बोलने वाले का समर्थन करता है, या अपने लिखे गए या बोले गए शब्दों, या फिर चिन्हों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर नफरत फैलाता है या असंतोष जाहिर करता है, तो वह राजद्रोह का अपराधी है।

अगर कोई व्यक्ति देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधि को सार्वजनिक रूप से अंजाम देता है तो वह 124 ए के अधीन आता है।हम मे से बहुत लोग जानते होगे, राजद्रोह क्या है, वास्तव मे राजद्रोह कोई व्यक्ति अपने राज्य के प्रति कोई ऐसा कृत्य करता है, जिससे समाज मे एकता व अखण्डता को हानि पहुचातां है । आइये जानते है क्या क्या है राजद्रोह-

  • यदि कोई व्यक्ति सरकार के प्रति विरोधी समाग्री लिखता है या बोलता है या ऐसी समाग्री का इस्तेमाल करता है ।
  • राष्ट्रीय चिन्हो का अपमान अथवा संविधान को नीचा दिखाता है ।
  • कोई व्यक्ति अपने लिखे गए या बोले गए शब्दों, या फिर चिन्हों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर नफरत फैलाता है या असंतोष जाहिर करता है ।

यह धारा हम सभी के लिए चर्चित विषय में है क्यों कि इस धारा को ब्रिटिश सरकार ने अपने फायदे के लिए 1860 में बनाई थी, जिसे 1870 में भारतीय संविधान के IPC में जोड़ दिया गया । वैसे यह धारा उतनी ही आवश्यक है, लेकिन गलत उपयोग भी बहुत किया जाता है । जब की भारतीय संविधान हम सभी को अपनी बात बोलने की आजादी 19(1A) में देता है। इस धारा के अंतर्गत जब सरकार किसी के ऊपर राजद्रोह का केस करती है, तो अधिकतर फर्जी होने के कारण निरस्त हो जाते है ।

सजा का प्रावधान

इस कानून के अंतर्गत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को कम से कम 3 वर्ष का कारावास अथवा उम्र कैद तक की सजा हो सकती है ।

धारा-124 (IPC Section 124),किसी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश करने या उसका प्रयोग अवरोधित करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला करना

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 124 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 124, साथ ही इस धारा के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 124 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 124 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई भारत के राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल को ऐसे राष्ट्रपति या राज्यपाल की विधिपूर्ण शक्तियों में से किसी शक्ति का किसी प्रकार प्रयोग करने के लिए या प्रयोग करने से विरत रहने के लिए उत्प्रेरित करने या विवश करने के आशय से, ऐसे राष्ट्रपति या राज्यपाल पर हमला करेगा या उसका सदोष अवरोध करेगा, या सदोष अवरोध करने का प्रयत्न करेगा या उसे आपराधिक बल द्वारा या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा आतंकित करेगा या ऐसे आतंकित करने का प्रयत्न करेगा, तो वह धारा 124 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 124 के अनुसार

किसी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश करने या उसका प्रयोग अवरोधित करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला करना-

जो कोई भारत के राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल को ऐसे राष्ट्रपति या राज्यपाल की विधिपूर्ण शक्तियों में से किसी शक्ति का किसी प्रकार प्रयोग करने के लिए या प्रयोग करने से विरत रहने के लिए उत्प्रेरित करने या विवश करने के आशय से, ऐसे राष्ट्रपति या राज्यपाल पर हमला करेगा या उसका सदोष अवरोध करेगा, या सदोष अवरोध करने का प्रयत्न करेगा या उसे आपराधिक बल द्वारा या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा आतंकित करेगा या ऐसे आतंकित करने का प्रयत्न करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी, दण्डनीय होगा।

Assaulting President, Governor, etc., with intent to compel or restrain the exercise of any lawful power-
Whoever, with the intention of inducing or compelling the President of India, or the Governor of any State, to exercise or refrain from exercising in any manner any of the lawful powers of such President or Governor, assaults or wrongfully restrains, or attempts wrongfully to restrain, or overawes, by means of criminal force or the show of criminal force, or attempts so to overawe, such President or Governor, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

किसी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश करने या उसका प्रयोग अवरोधित करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला करना।
सजा-
सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
यह अपराध सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 124 के अंतर्गत जो कोई किसी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश करने या उसका प्रयोग अवरोधित करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला करेगा, तो वह सात वर्ष के लिये कारावास और जुर्माने दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 124 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश करने या उसका प्रयोग अवरोधित करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला करना।सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 124 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।