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धारा-302 हत्या के लिये दण्ड (IPC-302 Punishment for Murder)

जो भी कोई किसी व्यक्ति की हत्या करता है, तो उसे मृत्यु दंड या आजीवन कारावास और साथ ही आर्थिक दंड से दंडित किया जाएगा।

धारा 302 के तहत सजा का प्रावधान

जो व्यक्ति हत्या जैसे कृत्यो को अंजाम देते है, हममे बहुत से लोगो ने पढा एवंम् सुना होगा कि हत्या के मामले में न्यायालय ने किसी व्यक्ति को भारतीय दण्ड संहिता यानी IPC की धारा 302 के तहत आरोपी को हत्या करने का दोषी पाया है, ऐसी स्तिथि में दोषी को सज़ा-ए-मौत या फिर आजीवन कारावास की सजा तक सुनाई जाती है।
IPC की धारा 302 हत्या जैसा घृणित कृत्य को अंजाम देने वाले व्यक्तियों पर लगाई जाती है। अगर किसी व्यक्ति पर किसी अन्य व्यक्ति की हत्या का दोष साबित हो जाता है, तो न्यायालय व्दारा उसे आजीवन कारावास या फांसी की सजा के साथ-साथ जुर्माना की सजा भी हो सकती है। न्यायालय में हत्या के मामलों में मुख्यतः हत्या करने के इरादे और उसके मकसद पर अधिक ध्यान दिया जाता है। इस तरह के मामलों में पुलिस को सबूतों के साथ ये साबित करना होता है, कि हत्या आरोपी ने ही की है, इसके साथ ही आरोपी के पास हत्या का मकसद भी होना चाहिए, और हत्या करने का कोई इरादा भी होना चाहिए।

लागू अपराध

ऐसे अपराध संज्ञेय अपराध की श्रेणी मे आते है । ऐसे अपराधों मे जमानत सत्र न्यायालयों व्दारा विचारणीय है एवंम् हत्या साबित होने पर मौत या आजीवन कारावास या जुर्माना ।

धारा-307, हत्या करने का प्रयत्न (IPC Section-307 Attempt to Murder)

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 307, साथ ही इस धारा के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 307 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 307 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई व्यक्ति, ऐसे किसी इरादे से या जान बूझकर विभिन्न परिस्थितियों में कोई ऐसा कार्य करता है, जो किसी की मृत्यु का कारण बन जाए, तो वह हत्या का दोषी होगा, जिसे हत्या करने का प्रयत्न कहा जायेगा, तो वह धारा 307 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 307 के अनुसार

हत्या करने का प्रयत्न-

जो कोई किसी कार्य को ऐसे आशय या ज्ञान और ऐसी परिस्थितियों में करेगा कि यदि वह उस कार्य द्वारा मृत्यु कारित कर देता तो वह हत्या का दोषी होता, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, और यदि ऐसे कार्य द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित हो जाए, तो वह अपराधी या तो आजीवन कारावास से या ऐसे दण्ड से दण्डनीय होगा, जैसा एतस्मिन्पूर्व वर्णित है।

Attempt to murder-
Whoever does any act with such intention or knowledge, and under such circumstances that, if he by that act caused death, he would be guilty of murder, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine; and if hurt is caused to any person by such act, the offender shall be liable either to imprisonment for life, or to such punishment as is hereinbefore mentioned.

आजीवन सिद्धदोष द्वारा प्रयत्न- जब कि इस धारा में वर्णित अपराध करने वाला कोई व्यक्ति आजीवन कारावास के दण्डादेश के अधीन हो, तब यदि उपहति कारित हुई हो, तो वह मृत्यु से दण्डित किया जा सकेगा।

दृष्टान्त
(क) य का वध करने के आशय से क उस पर ऐसी परिस्थितियों में गोली चलाता है कि यदि मृत्यु हो जाती तो क हत्या का दोषी होता। क इस धारा के अधीन दण्डनीय है।
(ख) क कोमल वयस के शिशु की मृत्यु करने के आशय से उसे एक निर्जन स्थान में अरक्षित छोड़ देता है। क ने इस धारा द्वारा परिभाषित अपराध किया है, यद्यपि परिणामस्वरूप उस शिशु की मृत्यु नहीं होती।
(ग) य की हत्या का आशय रखते हुए क एक बन्दूक खरीदता है और उसको भरता है। कने अभी तक अपराध नहीं किया है। य पर क बन्दूक चलाता है। उसने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है, और यदि इस प्रकार गोली मार कर वह य को घायल कर देता है, तो वह इस धारा के प्रथम पैरे के पिछले भाग द्वारा उपबन्धित दण्ड से दण्डनीय है।

लागू अपराध

हत्या करने का प्रयत्न
सजा-
दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यदि ऐसे कार्य से किसी व्यक्ति को उपहति कारित हो जाये।
सजा-
आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
यह अपराध सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के अंतर्गत जो कोई किसी कार्य को ऐसे आशय या ज्ञान और ऐसी परिस्थितियों में करेगा कि यदि वह उस कार्य द्वारा मृत्यु कारित कर देता तो वह हत्या का दोषी होता, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, और यदि ऐसे कार्य द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित हो जाए, तो वह अपराधी या तो आजीवन कारावास से दण्डित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 307 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
हत्या करने का प्रयत्नदस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय
यदि ऐसे कार्य से किसी व्यक्ति को उपहति कारित हो जायेआजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 307 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किसान क्रेडिट कार्ड योजना 2020

किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)

यह योजना सबसे पहले अपने भारत में वर्ष 1998 राष्ट्रीय कृषि एवम ग्रामीण विकास बैंक, योजना के तहत तैयार किया गया । जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि विकास को बढ़ावा देना है। साथ ही इसका उद्देश्य किसानों को वित्तीय सहायता और पशुपालन, मछली पालन तक को भी पूरा करने उद्देश्य है ।इस योजना के तहत किसानों एवम उनकी फसलों के जोखिम तक की कवर किया जाता है । किसानों को प्रीमियम 5 वर्ष के अंतराल तक लोन व ब्याज देयता पूर्ण करना होता है ।

किसान क्रेडिट कार्ड योजना

इस योजना के भारत देश के प्रत्येक किसानों के लिए सरकार व्दारा Kisan Credit Card Scheme के तहत, उन जरूरत मंद किसानों, जो वित्तीय अभाव होने के कारण खेती एवम् अपने फसल की देखभाल नही कर पा रहे है तो वह किसान इस योजना के तहत 1 लाख 60 हजार रुपए तक का किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लोन बिना किसी गारंटी के ले सकते है और साथ ही इस लोन की ब्याज देयता 7% प्रतिवर्ष होगी ।किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत किसान लाभार्थियों द्वारा अगर लोन की राशि 1 वर्ष के भीतर चुका देता है तो उसे 3% की छूट और साथ ही 2% की सब्सिडी , यानी कुल उसे पूरे वर्ष में 2% ब्याज देयता होगी । इस योजना में 1 वर्ष के अंतराल भुगतान समय से करने पर आपके किसान क्रेडिट कार्ड में 10% लिमिट की बढ़ोत्तरी भी, अर्थात् प्रतिवर्ष उन किसान लाभार्थियों को अच्छा लाभ उठाएंगे, जो समय से लोन का भुगतान चुका रहे है ।इस योजना को धीरे धीरे सभी किसान भाइयों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि अब तक पूरे देश में लगभग 10 करोड़ किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके है, जब की लगभग 8.50 करोड़ किसानों व्दारा इस योजना का लाभ लिया जा रहा है । यह योजना जिले के प्रत्येक सरकारी बैंक में उपलब्ध है ।
Active KCC List

किसान क्रेडिट कार्ड के लिए पात्रता

  • सभी किसान – व्यक्ति / संयुक्त कृषक मालिक
  • किरायेदार किसान, मौखिक कम और शेयर फसलें आदि।
  • किरायेदार किसानों सहित SHG या संयुक्त देयता समूह।

विशेषतायें एवं फायदे

  • केसीसी खाते में क्रेडिट बैलेंस पर बैंक दर को बचाने के लिए ब्याज प्राप्त करें।
  • सभी केसीसी उधारकर्ताओं के लिए नि: शुल्क एटीएम सह डेबिट कार्ड 
  • ब्याज उपकर @ 2% P.A. रुपये तक की ऋण राशि के लिए उपलब्ध है। 3 लाख
  • शीघ्र पुनर्भुगतान के लिए अतिरिक्त ब्याज सबवेंशन @ 3% प्रति वर्ष
  • सभी केसीसी ऋणों के लिए अधिसूचित फसलें / अधिसूचित क्षेत्र फसल बीमा के अंतर्गत आते हैं
  • 1 वर्ष के लिए ऋण की मात्रा का मूल्यांकन खेती की लागत, फसल के बाद के खर्च और खेत के रखरखाव की लागत के आधार पर किया जाएगा ।
  • बाद के 5 वर्षों के लिए वित्त के पैमाने में वृद्धि के आधार पर ऋण को मंजूरी दी जाएगी ।
  • साधारण ब्याज @ 7% प्रति वर्ष एक वर्ष के लिए या देय तिथि तक का शुल्क लिया जाएगा, जो पहले था।
  • नियत तारीखों के भीतर पुनर्भुगतान न करने की स्थिति में कार्ड दर पर ब्याज लगाया जाता है।
  • नियत तारीख से अधिक ब्याज अर्धवार्षिक रूप से लिया जाएगा।
  • जिन फसलों के लिए ऋण दिया गया है, उनके लिए प्रत्याशित कटाई और विपणन की अवधि के अनुसार पुनर्भुगतान अवधि तय की जा सकती है।

आवश्यक दस्तावेज-

  • आवेदन पत्र में विधिवत् भरा हुआ है
  • पहचान प्रमाण- मतदाता पहचान पत्र / पैन कार्ड / पासपोर्ट / आधार कार्ड / ड्राइविंग लाइसेंस आदि
  • एड्रेस प्रूफ: वोटर आईडी कार्ड / पासपोर्ट / आधार कार्ड / ड्राइविंग लाइसेंस आदि

Apply Online


किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत जो भी किसान इस योजना का लाभ लेने से छूट रहा है वह जल्द से जल्द इस योजना का लाभ, उठाए। सरकार द्वारा किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत किसान लोन पोर्टल भी खोल रखा है, जो किसान भाई बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ नही ले पा रहा है, वह ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर इस योजना के अंतर्गत लाभ ले सकता है ।किसान क्रेडिट कार्ड योजना (किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल) पर जाकर अपना आधार नम्बर डालकर रजिस्टर्ड करे । इसके बाद बाद अपनी खेती का पूर्ण विवरण देते हुये, लगभग् 14 दिन की प्रकिया पूर्ण होने के पश्चात् आपके नजदीकी सरकारी बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड प्राप्त किया जा सकता है ।

RFID क्या है पूर्ण जानकारी ले ? जी0एस0टी मे RFID टैग को क्यों बढावा दिया जा रहा है और कहा से मिलेगा ?

RFID क्या है ?


RFID का Full Name अंग्रेजी में (Radio Frequency Identification) और में पूरा नाम हिंदी रेडियो आवृति है। इसका मुख्य कार्य ट्रेकिंग करना होता है। इसलिए हम इसे आम भाषा में ट्रैकिंग डिवाइस भी बोल सकते है ।
यह डिवाइस एक तरह से Electro magnatic की बनी हुई data Trasreader के लिए स्वचालित रूप से पहचाने एवम् track करने के लिए डिवाइस है । एक तरह से ATM के पीछे वाली पट्टी, जो सिल्वर रंग की है, उस तरह से इस डिवाइस में स्कैनिंग पट्टी होती है । RFID डिवाइस में एक तरफ से Radio Reciver और दूसरी तरफ से Radio Sender का डिवाइस लगा होता है । जो डाटा एक दूसरे signal को ट्रांसफर करता रहता है ।
यह रेडियो चलित Signal है, जो radio Reciver को अपना डाटा trasfer करता है अगर इस डिवाइस के Electro Magnetic वाले भाग को स्कैन करेगा, इसकी स्कैन क्षमता बहुत ही तीव्र है । Electro Magnatic होने के कारण कुछ सेकैंडो में ही स्कैन कर सकता है ।

आरएफआईडी टैग क्या है ?

RFID टैग, इसी data Sender डिवाइस को कहते है ।
इस डिवाइस का मुख्य कार्य किसी जरूरी सामान अथवा अब व्यवसायिक वाहनों में आवागमन की स्थिति जानने के लिए लगाए जा रहे है ।इस टैग की सहायता से हम जरूरी सामानों अथवा वाहनों की location ट्रैक करके पता लगाया जा सकता है की यह अभी किस location पर है ।अब पूरे देश मे इनके radio frequency Singal रिसीव करने के लिए टॉवर लग रहे है ।

आरएफआईडी टैग दो प्रकार के होते हैं

Active टैग रेडियो तरंगों वा बैटरी द्वारा भी संचालित किया जाएगा, जिनकी क्षमता Passive टैग से काफी अधिक होगी। सैकड़ों मीटर तक इन्हें रीड किया जा सकेगा ।जिससे ट्रैकिंग करने में मदद मिलेगी ।Passive टैग रेडियो तरंगों व्दारा संचालित किया जाता है। यह टैग केवल Active टैग से (बैटरी संचलित, केवल संचरित से रेडियों Singal प्राप्त करता है । साथ ही System रीडर की रिसेप्शन रेंज को (1-2000) फीट से समायोजित कर सकता है । इन रेडियो टैग का उपयोग Tool Plaza में Fast Tag की ही भांति RFID Tag उपयोग होगा, जिसमे एक ही बार (या 1-2 वर्ष या उससे अधिक) tag लेने पर शुल्क लगेगा, बार बार देय नही होगा, इस टैग स्कैनिंग के लिए Tool Plaza पर स्वतः कुछ छणो में स्कैन किया जा सकेगा ।RFID frequency bands
RFID tag Freq.

जी0एस0टी मे RFID टैग को किस लिये बढावा दिया जा रहा है?

जीएसटी से व्यवसायिक वाहनो की स्थिति जानने हेतु भारत सरकार व्दारा UHF: 433 MHz (Ultra High Frequency 433) आरएफआईडी टैग का इस्तेमाल किया जायेगा । जिसकी क्षमता अधिक है । 

यह टैग सबसे पहले भारत मे उत्तर प्रदेश, सरकार व्दारा जी0एस0टी0 के ई-वे बिल मे 01 नवम्बर 2018 को अध्यादेश जारी किया गया था, जिसमे कहा गया कि वाहन के Wind Screen पर RFID टैग लगा होना जरूरी साथ ही ई-वे बिल भी मैपिंग करना होगा, RFID टैग मे। अगर नही RFID टैग नही माल के साथ मैप नही होगा तो उन वाहनो पर, पेनाल्टी लगेगी ।
आरएफआईडी टैग जी0एस0टी0 चोरी रोकने के लिये, भारत सरकार व्दारा प्रत्येक जिले मे धीरे-धीरे अनिवार्य कर दिया है । कोई व्यवसायिक वाहन RFID टैग अगर नही लगाता है तो जांच अधिकारी उस वाहन अथवा माल पाने या भेजने वाले व्यक्ति पर पेनाल्टी लगा सकता है ।जीएसटी मे उत्तर प्रदेश सरकार व्दारा प्रत्येक ई-वे बिल मे माल की चाेरी रोकने हेतु RFID टैग मैपिगं ई-वे बिल मे उपयोग करना अनिवार्य कर दिया है, किन्तु कुछ रियायत देते हुये कहा गया कि संवेदनशील वस्तुओ पर लगना पूर्ण रूप से अनिवार्य है, उन वाहनो एवंम् वस्तु भेजने एवंम् पाने वाले व्यक्ति पर पेनाल्टी लगायी जायेगी ।

आरएफआईडी टैग कहां से मिलेगा ?

RFID टैग लेने के लिये अपनी जिले की टैक्स डिपार्टमेन्ट साइट पर जाकर पूरी जानकारी ले सकते है ।
उत्तर प्रदेश मे RFID टैग लेने के लिये उत्तर प्रदेश टैक्स डिपार्टमेन्ट की साइट पर जाकर देखा जा सकता है, उत्तर प्रदेश के लिये RFID_Tag_Distribution_List यह है, जिसमे सभी अपने-अपने जिले के अनुसार जा कर सम्पर्क कर सकते है ।

High Security Registration Number Plate Rules (हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन से जुडे नियम)

नमस्कार दोस्तो, आज हम हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट के बारे मे सम्पूर्ण जानकारी आपके साथ साझा करेंगे। HSRP Registration कब तक लेना होगा, क्या हम HSRP Online ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे और किस साइट से हम यह आवेदन कर सकेंगे। यह भी लेख के माध्यम से समझने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा HSRP वाहनो मे क्या फायदे होगे और क्या समस्या होगी, सभी बिन्दुओ पर चर्चा करेगे।

हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन क्या है ?

आये दिन सुनने मे आ रहा है कि भारत के प्रत्येक RTO से रजिस्टर्ड वाहनों मे हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन लेना अनिवार्य हो गया है । इसके चलते प्रत्येक जिलों के RTO कार्यालयों मे भीड़ की भरमार लगी हुयी है । क्या आपको पता है यह हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन का क्या मतलब है-

हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन से तात्पर्य मोटर वाहन, मोटरसाइकिल, कारे, बसें एवंम् वह सभी वाहन जो सड़क पर रोज चलते है और RTO मे रजिस्टर्ड है, उन सभी वाहनो पर नम्बर प्लेट तो देखी ही होगी । उन नम्बर प्लेटों मे ही बदलाव किया जा रहा है । ये वह नम्बर प्लेटों को उपयोग मे लाया जा रहा है कि कोई वाहन 100 मीटर की दूरी से ही उस वाहन के नम्बर प्लेटों को कम्प्यूटर व्दारा पढ़ लिया जायेगा और उन पर वाहनो व्दारा अगर ट्राफिक नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो वाहन स्वामित्वों को दण्डित एवंम् जुर्माना दोनोेें किया जाएगा ।

कहा जा रहा है हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट के रूप मे उपयोग लाया जायेगा । इससे सबसे अधिक लाभ ट्राफिक पुलिस को होगा । वह किसी मोटर वाहन के पीछे नही दौड़ कर जाना पड़ेगा । क्योकि हम सभी लोग जानते है कि हमारे भारत देश मे ट्राफिक नियमों का उल्लंघन बहुत होता है और ट्राफिक नियमों मे शक्ति लाने के लिये सरकार ने यह हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन का नया नियम बनाया है । इसके चलते सभी मोटर वाहन स्वामित्वों को अब हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा । जो भविष्य मे हम सभी के लिये लाभदायी भी होगा । हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट भारत के प्रत्येक वाहन स्वामित्वो को लेना पड़ेगा और साथ ही कलर कोडेड स्टीकर्स का इस्तेमाल करना होगा । हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट प्रत्येक वाहन के दोनो तरफ लगायी जायेगी, जो कलर कोडे़ड होगी । इसमें पेट्रोल और सीएनजी चलित गाड़ियों के लिए हल्के नीले रंग, डीजल से चलने वाली गाड़ियों को नारंगी और अन्य प्रकार के ईंधन से चलने वाले वाहनों को ग्रे रंग का स्टीकर लगाना होगा। वहीं जिन वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाई जा चुकी है उन्हें अनिवार्य तौर पर होलोग्राम बेस्ड कलर कोड स्टीकर लगाना होगा।

क्या क्या बदलाव किये जायेंगे ट्राफिक नियमो मे ?

Trafic Rule Change After HSRP Registration हाई-सिक्योरिटी नंम्बर प्लेट वाहनों मे इस वक्त बहुत जोर दिया जा रहा है, यह हम सभी जान रहे है कि हाई-सिक्योरिटी नम्बर प्लेट आने वाले दिनों मे अच्छी युक्ति सरकार व्दारा लायी गयी है, यह युक्ति हम आम नागरिको के लिये भी ठीक रहेगा या नही यह थोड़ा जानना बहुत जरूरी है क्यों कि आये दिन RTO कार्यालय व्दारा ट्राफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले पर जुर्माना किया जा रहा है जिसके चलते कुछ लोग आपत्ति जताते है जिसको लेकर सरकार व्दारा यह High Security Number Plate का नया नियम लागू करने पर जोर दी जा रही है । ट्राफिक नियमो का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों पर ट्राफिक पुलिस व्दारा पहली बार उल्लंघन करने पर कम से कम 5000/ पांच हजार एवंम् दूसरी बार ट्राफिक नियमो को तोड़ने पर 10000/ दस हजार रूपये तक का चालान किया जायेगा । अब ट्राफिक नियमो का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों को ट्राफिक नियम के अनुसार उसका चालान उसके घर पर फोटो के साथ आयेगा एवंम् हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन के अनुसार अब किसी वाहन 100 मीटर की दूरी से ही वाहन की स्थिति भांपी जा सकेगी ।

अनुक्रम

हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन के अनुसार अब वाहनो मे अगर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नही होगा, तो आपको बीमा भी नही करा सकेगा, और साथ ही इन रजिस्ट्रेशनों के माध्यम से वाहक की स्थिति जैसे प्रदूषण, बीमा जैसे, अगर कोई भी कमी के साथ वाहन सड़क पर चल रहा है तो RTO वाहन स्वामित्व पर भी जुर्माना व्दारा दण्ड़ित कर सकेंगा ।रजिस्टर्ड वाहनो मे हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट होने पर वाहन की प्रत्येक स्थिति को RTO कार्यालय व्दारा देखा जा सकेगा, कि किस वाहन मे क्या कमी है और कौन सा वाहन ट्राफिक नियमो का उल्लंघन कर रहा है । ट्रैफिक कैमरों व्दारा इन नम्बर प्लेटों की स्कैनिंग स्वतः की जा सकेगी । इसके साथ ही सभी जिलों के परिवहन आयुक्त 15 अक्टूबर से प्रदेश के समस्त उप परिवहन आयुक्त परिक्षेत्र, समस्त संभागीय परिवहन अधिकारी एवं समस्त उप संभागीय परिवहन अधिकारियों को निर्देशित किया है कि किसी भी वाहन का स्वामित्व स्थानांतरण, पता परिवर्तन, फि टनेस, परमिट जारी अथवा नवीनीकरण व अन्य कार्य, जो कि परिवहन विभाग के विभिन्न कार्यालयों में किए जाते हैं। तब तक नहीं किए जाएंगे जब तक मोटर वाहन पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट ना लगा दी जाएं। ट्रैफिक नियमों को पालन न करने वाले स्वामित्वो पर पहली बार अगर नियमो का पालन नही करता है तो कम से कम 5000/ पांच हजार एवंम् दूसरी बार मे 10000/ दस हजार का जुर्माना वाहन स्वामित्व को भरना पडेंगा । साथ ही साथ जो लोग पहले गाड़ी चोरी करके नम्बर प्लेट बदल देते थे, अब स्वतः ही ट्राफिक कैमरों व्दारा उन्हे खोज लिया जायेगा । जिससे गाड़ी चोरी को भी कम किया जा सकेगा । आरटीओ व्दारा बताया कि वाहन चोर वाहनों की चोरी के समय नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करते हैं। एल्युमिनियम की बनी नई हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट बदली नहीं जा सकेगी। बदलने की कोशिश करने पर यह टूट जाती है। ऐसे में गाड़ी पर नई नंबर प्लेट वही लगवा सकता है जिसके पास वाहन के पूरे कागजात हों क्योंकि नई नंबर प्लेट रजिस्टर्ड जगहों से ही लगवाई जा सकेगी । इसके साथ साथ पुरानी नम्बर प्लेट की जानकारी वाहन स्वामित्व को आरटीओ कार्यालय को देनी होगी, जिसके उपरान्त आरटीओ कार्यालय व्दारा वाहन स्वामित्व को प्रमाण पत्र मिलेगा ।

कहां से हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे ?

हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट रजिस्ट्रेशन अब हर किसी वाहन स्वामित्व के लिये जरूरी हो गया है । इसके चलते आरटीओ व्दारा (HSRP) के नाम से Online Registration Portal पर जाकर अपने वाहन को जल्द से जल्द रजिस्टर्ड कराकर हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट लेना होगा । भले ही वाहन चाहे दो पहिया हो या चार पहिया वाहन हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट भारत के प्रत्येक वाहन स्वामित्वो को लेना पड़ेगा और साथ ही कलर कोडेड स्टीकर्स का इस्तेमाल करना होगा, जो सरकार व्दारा निर्धारित किये गये है और साथ ही हर जिले के ऑटोमोबाइल रजिस्टर्ड डीलरो व्दारा भी लगाया जा सकेगा, जिन्हे राज्य सरकारों व्दारा एवंम् आरटीओ व्दारा परमिशन दिया गया है ।

हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन कैसे करे ?

हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट रजिस्ट्रेशन के लिये सबसे पहले आपको (HSRP) bookmyhsrp.com पोर्टल पर जाना होगा । HSRP पोर्टल पर जाने के उपरान्त आपको High Security Registration with Color Sticker लिंक को खोले ।

Books HSRP Portal

इसके बाद अपने वाहन की स्थिति डालें कि आपके पास कौन सा वाहन है वाहन सलेक्ट करने के पश्चात् आप अपना वाहन संख्या डालकर अपनी पूरी डिटेल दर्ज करके HSRP Appointment Slot करके तारीख सिलेक्ट करके बुकिंग कर सकते है, बुकिंग करने के पश्चात् पेमेन्ट करके, हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट अपने घर भी मंगा सकते है ।

पेमेन्ट लगभग् दोपहिया वाहन का 400 चार सौ रूपये से लेकर 1100/ ग्यारह सौ रूपये तक हो सकता है साथ ही होम डिलेवरी सेवा UP एवंम् Delhi मे अभी चालू है, जल्द ही अन्य जिलो मे चालू की जायेगी ।

सरकार व्दारा हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट की क्या समय सीमा दी गयी है ?

हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट, सरकार व्दारा पुराने वाहनो मे 1 जनवरी 2021 से पहले HSRP रजिस्ट्रेशन (व्यवसायिक वाहनो) को लेना अनिवार्य कर दिया गया है । 1 जनवरी 2021 से इन्हे हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट के लिये दण्ड़ित भी किया जायेगा ।

भारत में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट को लेकर सरकार सख्त हो गई है। जिसके चलते लोगों को 30 नवंबर तक वाहन पर HSRP लगवाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने लोगों को राहत देते हुए HSRP लगवाने की अंतिम तारीख 30 नवंबर की बजाय 28 फरवरी 2021 कर दी है।हालांकि इसमें यह शर्त रखी गई है, कि तारीख को आगे बढ़ाने का लाभ उन्हीं लोगों को मिलेगा जिनका वाहन अप्रैल 2019 से पहले खरीदा गया है, और वाहन का वजन 8500 किलोग्राम या इससे अधिक है।

ऐसे में जिन लोगों ने मार्च-अप्रैल 2019 से पहले गैर व्यावसायिक वाहन (कार, बाइक, स्कूटर आदि) खरीदा है, और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लिया है तो वे 28 फरवरी 2021 तक लगवा सकते हैं।

CrPC- 41A (दण्ड प्रकिया संहिता-41A)

CrPc- 41A क्या है ?

दण्ड प्रकिया संहिता के अन्तर्गत धारा- 41A एक तरह से पुलिस अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के लिये एक नोटिस है । पुलिस अधिकारी व्दारा वह व्यक्ति जिस पर शिकायत दर्ज करायी गयी है, पुलिस अधिकारी व्दारा उसे बुलाकर जांच हेतु नो़टिस प्राप्त कराता या सुनिश्चित कराता है कि वह पुलिस अधिकारी के साथ मिलकर शिकायत के आधार पर उचित जांच कराये । किसी व्यक्ति के ऊपर लगे हुये संज्ञेय अपराधो को पुलिस अधिकारी व्दारा आपको सूचना प्राप्त कराने पर आधारित है कि आपने उचित संदेह के आधार पर आपने यह संज्ञेय अपराध किया है एवंम् इस-इस धारा के अन्तर्गत आप पर यह आरोप लगाये गये है ।

जहां किसी व्यक्ति को इस तरह का नोटिस जारी किया जाता है, उस व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वह नोटिस की शर्तों का पालन करे। इस नोटिस मुख्य रूप यही है । अगर कोई व्यक्ति नोटिस प्राप्त करने के बावजूद उपस्थित नही हो रहा तो पुलिस अधिकारी उस व्यक्ति को तत्काल प्रभाव से गिरफ्तार कर सकता है । 

जो व्यक्ति जिसे 41A की नोटिस प्राप्त हुयी एवंम् सही ढंग से नोटिस का अनुपालन करता है और जारी रखता है, उसे नोटिस में उल्लिखित अपराध के संबंध में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जब तक कि रिकॉर्ड किए जाने वाले कारणों के लिए, पुलिस अधिकारी की जांचोपरान्त यह सिद्ध नही हो जाता है कि वह होना गिरफ्तार योग्य है अथवा गायब हो सकता है, अगर ऐसा पुलिस अधिकारी को लगता है तो तत्काल प्रभाव से गिरफ्तार अपने न्याय विवेक के आधार पर कर सकता है ।

जहां ऐसा व्यक्ति किसी भी समय, नोटिस की शर्तों का पालन करने में विफल रहता है या खुद को पहचानने के लिए तैयार नहीं है, पुलिस अधिकारी ऐसे आदेशों के अधीन हो सकता है, जो इस संबंध में एक सक्षम न्यायालय व्दारा पारित किया गया हो, नोटिस में उल्लेखित अपराध के लिए उसे गिरफ्तार कर लें।
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उच्च न्यायालय एवं सत्र न्यायालय व्दारा दण्डादेश

दण्ड प्रकिया संहिता मे गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकार  

संज्ञेय अपराधो के निवारण हेतु पुलिस की शक्तियां

फरार व्यक्ति से क्या तात्पर्य है । 

41A के अन्तर्गत पुलिस अधिकारी कब तक आपको अरेस्ट नही कर सकती है-

41A की नोटिस प्राप्त होने के पश्चात् अपराध कारित व्यक्ति को पुलिस अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के उपरान्त, जांच अधिकारी व्दारा आपसे उन शर्तो को पालन कराने हेतु बुलाया जाता है, अगर वह व्यक्ति 41A की नोटिस का पुलिस अधिकारी एवंम् जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होकर पूर्ण पालन करता है तो अपराध की जांच पूर्ण हो जाने के उपरान्त, अपराध व्यक्ति पर सिद्द नही हो जाता है । तब तक उसे अरेस्ट नही किया जा सकता है ।

41A की नोटिस की शर्ते अपराध कारित व्यक्ति पर इन आधारो पर गिरफ्तार नही किया जाता है कि वर्ष 2014 जुलाई माह मे अरनेश कुमार बनाम बिहार स्टेट 498A के अन्तर्गत वादी के ऊपर संज्ञेय अपराध के अन्तर्गत तत्काल गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यह मत दिया था कि संज्ञेय अपराधों मे वादी को अंतरिम जमानत प्रदान की गयी और कहा गया कि 7 वर्ष से कम गिरफ्तारी वाले मामलो मे अन्तरिम जमानत जांचोपरान्त तक दी जा सकती है।

Arnesh Kumar v. the State of Bihar is a landmark judgment, which was pronounced by the Apex Court as it imposed further checks and balances on the powers of the police before an arrest under section 498-A of Cr.P.C can be done which deals with dowry cases. iv The court held that:

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अब 41A की नोटिस के अनुरूप, पुलिस अधिकारी उस व्यक्ति को अपराध सिद्ध होने तक अपराध कारित व्यक्ति को गिरफ्तार नही कर सकते है, अगर व्यक्ति 41A नोटिस के अन्तर्गत सही ढंग से अनुपालन कर रहा है, तो उस व्यक्ति को गिरफ्तार नही किया जा सकता है, जब तक कि जांच पूर्ण न हो जाये ।

ऐसे संज्ञेय मामलो मे अपराध कारित व्यक्ति हाईकोर्ट व्दारा अन्तरिम जमानत हेतु अपील करके, सुनवाई पूर्ण होने तक  हाईकोर्ट व्दारा स्टे आर्डर भी लिया जा सकता है ।