Home Blog Page 34

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 227 | Indian Contract Act Section 227

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-227) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 227 के अनुसार जबकि कोई अभिकर्ता उससे अधिक करता है जितना करने के लिए वह् प्राधिकृत है और जबकि जो कुछ वह करता है उसका वह भाग, जो उसके प्राधिकार के भीतर है, उस भाग से, जो उसके प्राधिकार के परे है, पृथक् किया जा सकता है तो जो कुछ वह करता है उसका केवल उतना ही भाग, जितना उसके प्राधिकार के भीतर है, उसके और उसके मालिक के बीच आबद्धकर है, जिसे IC Act Section-227 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 227 (Indian Contract Act Section-227) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 227 IC Act Section-227 के अनुसार जबकि कोई अभिकर्ता उससे अधिक करता है जितना करने के लिए वह् प्राधिकृत है और जबकि जो कुछ वह करता है उसका वह भाग, जो उसके प्राधिकार के भीतर है, उस भाग से, जो उसके प्राधिकार के परे है, पृथक् किया जा सकता है तो जो कुछ वह करता है उसका केवल उतना ही भाग, जितना उसके प्राधिकार के भीतर है, उसके और उसके मालिक के बीच आबद्धकर है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 227 (IC Act Section-227 in Hindi)

मालिक कहां तक आबद्ध है जबकि अभिकर्ता प्राधिकार से आगे बढ़ जाता है –

जबकि कोई अभिकर्ता उससे अधिक करता है जितना करने के लिए वह् प्राधिकृत है और जबकि जो कुछ वह करता है उसका वह भाग, जो उसके प्राधिकार के भीतर है, उस भाग से, जो उसके प्राधिकार के परे है, पृथक् किया जा सकता है तो जो कुछ वह करता है उसका केवल उतना ही भाग, जितना उसके प्राधिकार के भीतर है, उसके और उसके मालिक के बीच आबद्धकर है।
दृष्टांत
क, जो एक पोत और स्थोरा का स्वामी है, ख को उस पोत का 4,000 रुपए का बीमा उपाप्त करने के लिए प्राधिकृत करता है । ख पोत का 4,000 रुपए का एक बीमा और स्थोरा का समान राशि का दूसरा बीमा उपाप्त करता है। क पोत के बीमे के लिए प्रीमियम देने को आबद्ध है किन्तु स्थोरा के बीमे के लिए प्रीमियम देने को नहीं।

Indian Contract Act Section-227 (IC Act Section-227 in English)

Principal how far bound, when agent exceeds authority-

When an agent does more than he is authorized to do, and when the part of what he does, which is within his authority, can be separated from the part which is beyond his authority, so much only of what he does as is within his authority is binding as between him and his principal.
Illustration
A, being owner of a ship and cargo, authorizes B to procure an insurance for 4,000 rupees on the ship. B procures a policy for 4,000 rupees on the ship, and another for the like sum on the cargo. A is bound to pay the premium for the policy on the ship, but not the premium for the policy on the cargo.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 227 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 226 | Indian Contract Act Section 226

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-226) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 226 के अनुसार अभिकर्ता के माध्यम से की गई संविदाएं और अभिकर्ता द्वारा किए गए कार्यों से उद्भूत बाध्यताएं उसी प्रकार प्रवर्तित कराई जा सकेंगी और उनके वे ही विधिक परिणाम होंगे मानो वे संविदाएं और कार्य स्वयं मालिक द्वारा किए गए हों, जिसे IC Act Section-226 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 226 (Indian Contract Act Section-226) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 226 IC Act Section-226 के अनुसार अभिकर्ता के माध्यम से की गई संविदाएं और अभिकर्ता द्वारा किए गए कार्यों से उद्भूत बाध्यताएं उसी प्रकार प्रवर्तित कराई जा सकेंगी और उनके वे ही विधिक परिणाम होंगे मानो वे संविदाएं और कार्य स्वयं मालिक द्वारा किए गए हों।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 226 (IC Act Section-226 in Hindi)

अभिकर्ता की संविदाओं का प्रवर्तन और उनके परिणाम–

अभिकर्ता के माध्यम से की गई संविदाएं और अभिकर्ता द्वारा किए गए कार्यों से उद्भूत बाध्यताएं उसी प्रकार प्रवर्तित कराई जा सकेंगी और उनके वे ही विधिक परिणाम होंगे मानो वे संविदाएं और कार्य स्वयं मालिक द्वारा किए गए हों।
दृष्टांत
(क) ख से माल क यह जानते हुए कि ख उनके विक्रय के लिए अभिकर्ता है, किन्तु यह न जानते हुए कि मालिक कौन है, खरीदता है । ख का मालिक क से उस माल की कीमत का दावा करने का हकदार है और मालिक द्वारा लाए गए वाद में मालिक के दावे के विरुद्ध के वह ऋण, जो उसे ख को शोध्य हो, मुजरा नहीं करा सकता।
(ख) ख का अभिकर्ता क जिसे उसकी ओर से धन प्राप्त करने का प्राधिकार है, ग से ख को शोध्य कुछ धनराशि प्राप्त करता है। उक्त धन ख देने को बाध्यता से ग उन्मोचित हो जाता है।

Indian Contract Act Section-226 (IC Act Section-226 in English)

Enforcement and consequences of agent’s contracts-

Contracts entered into through an agent, and obligations arising from acts done by an agent, may be enforced in the same manner, and will have the same legal consequences, as if the contracts had been entered into and the acts done by the principal in person.
Illustrations
(a) A buys goods from B, knowing that he is an agent for their sale, but not knowing who is the principal. B‟s principal is the person entitled to claim from A the price of the goods, and A cannot, in a. suit by the principal, set-off against that claim a debt due to himself from B.
(b) A, being B‟s agent with authority to receive money on his behalf, receives from C a sum of money due to B. C is discharged of his obligation to pay the sum in question to B.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 226 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 225 | Indian Contract Act Section 225

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-225) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 225 के अनुसार जहां कि एक व्यक्ति किसी दूसरे को कोई कार्य करने के लिए नियोजित करता है और वह अभिकर्ता उस कार्य को सद्भाव से करता है वहां वह नियोजक उस कार्य के परिमणामों के लिए अभिकर्ता की क्षतिपूर्ति करने का दायी है यद्यपि वह कार्य पर-व्यक्तियों के अधिकारों को क्षति करता हो, जिसे IC Act Section-225 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 225 (Indian Contract Act Section-225) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 225 IC Act Section-225 के अनुसार जहां कि एक व्यक्ति किसी दूसरे को कोई कार्य करने के लिए नियोजित करता है और वह अभिकर्ता उस कार्य को सद्भाव से करता है वहां वह नियोजक उस कार्य के परिमणामों के लिए अभिकर्ता की क्षतिपूर्ति करने का दायी है यद्यपि वह कार्य पर-व्यक्तियों के अधिकारों को क्षति करता हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 225 (IC Act Section-225 in Hindi)

मालिक की उपेक्षा से कारित क्षति के लिए अभिकर्ता को प्रतिकर-

मालिक की उपेक्षा से या कौशल के अभाव से उसके अभिकर्ता को कारित क्षति के लिए मालिक अभिकर्ता को प्रतिकर देगा।
दृष्टांत
क एक गृह बनाने के लिए ख को राज के तौर पर नियोजित करता है और पाड़ स्वयं ही लगाता है। पाड़ कौशलहीनता से लगाई गई है और परिणामतः ख उपह्त होता है । ख को क प्रतिकर देगा।

Indian Contract Act Section-225 (IC Act Section-225 in English)

Compensation to agent for injury caused by principal’s neglecta-

The principal must make compensation to his agent in respect of injury2 caused to such agent by the principal‟s neglect or want of skill.
Illustration
A employs B as a bricklayer in building a house, and puts up the scaffolding himself. The scaffolding is unskilfully put up, and B is in consequence hurt. A must make compensation to B.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 225 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 224 | Indian Contract Act Section 224

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-224) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 224 के अनुसार जहां कि एक व्यक्ति किसी दूसरे को कोई कार्य करने के लिए नियोजित करता है और वह अभिकर्ता उस कार्य को सद्भाव से करता है वहां वह नियोजक उस कार्य के परिमणामों के लिए अभिकर्ता की क्षतिपूर्ति करने का दायी है यद्यपि वह कार्य पर-व्यक्तियों के अधिकारों को क्षति करता हो, जिसे IC Act Section-224 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 224 (Indian Contract Act Section-224) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 224 IC Act Section-224 के अनुसार जहां कि एक व्यक्ति किसी दूसरे को कोई कार्य करने के लिए नियोजित करता है और वह अभिकर्ता उस कार्य को सद्भाव से करता है वहां वह नियोजक उस कार्य के परिमणामों के लिए अभिकर्ता की क्षतिपूर्ति करने का दायी है यद्यपि वह कार्य पर-व्यक्तियों के अधिकारों को क्षति करता हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 224 (IC Act Section-224 in Hindi)

आपराधिक कार्य करने के लिए अभिकर्ता के नियोजक का अदायित्व-

जहां कि एक व्यक्ति किसी दूसरे को ऐसा करने के लिए नियोजित करता है, जो आपराधिक हो, वहां नियोजक उस कार्य के परिणामों के लिए अभिकर्ता की क्षतिपूर्ति न तो अभिव्यक्त और न विवक्षित वचन के आधार पर करने का दायी है।
दृष्टांत
(क) ग को पीटने के लिए ख को क नियोजित करता है और उस कार्य के सब परिणामों के लिए उसकी क्षतिपूर्ति करने का करार करता है । ख तदुपरि ग को पीटता है और वैसा करने के लिए उसे ग को नुकसानी देनी पड़ती है। क उस नुकसानी के लिए ख की क्षतिपूर्ति करने का दायी नहीं है।
(ख) ख, एक समाचारपत्र का स्वत्वधारी, क की प्रार्थना पर उस पत्र में ग के विरुद्ध एक अपमानलेख प्रकाशित करता है और क उस प्रकाशन के परिणामों और उसके संबंध में जो भी अनुयोजन हो उसके सब खर्चों और नुकसानी के लिए ख की क्षतिपूर्ति करने करार करता है । ख पर ग द्वारा वाद लाया जाता है और उसे नुकसानी देनी पड़ती है और व्यय भी उठाना पड़ता है। उक्त क्षतिपूर्ति वचन के आधार पर ख के प्रति क दायी नहीं है।

Indian Contract Act Section-224 (IC Act Section-224 in English)

Non-liability of employer of agent to do a criminal act-

Where one person employs another to do an act which is criminal, the employer is not liable to the agent, either upon an express or an implied promise, to indemnify him against the consequences of that Act.
Illustrations
(a) A employs B to beat C, and agrees to indemnify him against all consequences of the act. B thereupon beats C, and has to pay damages to C for so doing. A is not liable to indemnify B for those damages.
(b) B, the proprietor of a newspaper, publishes, at A‟s request, a libel upon C in the paper, and A agrees to indemnify B against the consequences of the publication, and all costs and damages of any action in respect thereof. B is sued by C and has to pay damages, and also incurs expenses. A is not liable to B upon the indemnity.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 224 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 223 | Indian Contract Act Section 223

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-223) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 223 के अनुसार जहां कि एक व्यक्ति किसी दूसरे को कोई कार्य करने के लिए नियोजित करता है और वह अभिकर्ता उस कार्य को सद्भाव से करता है वहां वह नियोजक उस कार्य के परिमणामों के लिए अभिकर्ता की क्षतिपूर्ति करने का दायी है यद्यपि वह कार्य पर-व्यक्तियों के अधिकारों को क्षति करता हो, जिसे IC Act Section-223 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 223 (Indian Contract Act Section-223) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 223 IC Act Section-223 के अनुसार जहां कि एक व्यक्ति किसी दूसरे को कोई कार्य करने के लिए नियोजित करता है और वह अभिकर्ता उस कार्य को सद्भाव से करता है वहां वह नियोजक उस कार्य के परिमणामों के लिए अभिकर्ता की क्षतिपूर्ति करने का दायी है यद्यपि वह कार्य पर-व्यक्तियों के अधिकारों को क्षति करता हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 223 (IC Act Section-223 in Hindi)

सद्भाव से किए गए कार्यों के परिणामों के लिए अभिकर्ता की क्षतिपूर्ति की जाएगी–

जहां कि एक व्यक्ति किसी दूसरे को कोई कार्य करने के लिए नियोजित करता है और वह अभिकर्ता उस कार्य को सद्भाव से करता है वहां वह नियोजक उस कार्य के परिमणामों के लिए अभिकर्ता की क्षतिपूर्ति करने का दायी है यद्यपि वह कार्य पर-व्यक्तियों के अधिकारों को क्षति करता हो।
दृष्टांत
(क) क, एक डिक्रीदार, जो ख के माल के विरुद्ध उस डिक्री का निष्पादन कराने का हकदार है, कुछ माल को ख का माल व्यपदिष्ट करके न्यायालय के आफिसर से अपेक्षा करता है कि वह उस माल को अभिगृहीत कर ले । आफिसर उस माल का अभिग्रहण करता है और उस पर माल के वास्तविक स्वामी ग द्वारा वाद लाया जाता है। क उस राशि के लिए उस आफिसर की क्षतिपूर्ति करने का दायी है जिसे वह क के निदेशों के पालन के परिणामस्वरूप ग को देने के लिए विवश किया जाता है।
(ख) क की प्रार्थना पर ख उस माल को बेचता है जो क के कब्जे में तो है किन्तु जिसके ब्ययन का क को कोई अधिकार नहीं था। ख यह बात नहीं जानता और विक्रय के आगम क को दे देता है। तत्पश्चात् ख पर उस माल का वास्तविक स्वामी ग वाद लाता है और माल का मूल्य और खर्चा वसूल कर लेता है । ग को जो कुछ देने के लिए ख विवश किया गया है उसकी और ख के अपने व्ययों की क्षतिपूर्ति करने के लिए ख के प्रति क दायी है।

Indian Contract Act Section-223 (IC Act Section-223 in English)

Agent to be indemnified against consequences of acts done in good faith-

Where one person employs another to do an act, and the agent does the act in good faith, the employer is liable to indemnify the agent against the consequences of that act, though it cause an injury to the rights of third persons.
Illustrations
(a) A, a decree-holder and entitled to execution of B‟s goods, requires the officer of the Court to seize certain goods, representing them to be the goods of B. The officer seizes the goods, and is sued by C, the true owner of the goods. A is liable to indemnify the officer for the sum which he is compelled to pay to C, in consequence of obeying A‟s directions.
(b) B, at the request of A, sells goods in the possession of A, but which A had no right to dispose of, B does not know this, and hands over the proceeds of the sale to A. Afterwards C, the true owner of the goods, sues B and recovers the value of the goods and costs. A is liable to indemnify B for what he has been compelled to pay to C, and for B‟s own expenses.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 223 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 222 | Indian Contract Act Section 222

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-222) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 222 के अनुसार तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में अभिकर्ता को यह हक है कि उसे प्राप्त मालिक का माल, कागज-पत्र और अन्य सम्पत्ति, चाहे वह जंगम हो या स्थावर, तब तक प्रतिधारित किए रहे जब तक उसे तत्संबंधी कमीशन, संवितरणों और सेवाओं की बाबत शोध्य रकम दे न दी जाए या उसका लेखा समझा न दिया जाए, जिसे IC Act Section-222 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 222 (Indian Contract Act Section-222) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 222 IC Act Section-222 के अनुसार तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में अभिकर्ता को यह हक है कि उसे प्राप्त मालिक का माल, कागज-पत्र और अन्य सम्पत्ति, चाहे वह जंगम हो या स्थावर, तब तक प्रतिधारित किए रहे जब तक उसे तत्संबंधी कमीशन, संवितरणों और सेवाओं की बाबत शोध्य रकम दे न दी जाए या उसका लेखा समझा न दिया जाए।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 222 (IC Act Section-222 in Hindi)

विधिपूर्ण कार्यों के परिणामों के लिए अभिकर्ता की क्षतिपूर्ण की जाएगी-

अभिकर्ता का नियोजक उन सब विधिपूर्ण कार्यों के परिणामों के लिए अभिकर्ता की क्षतिपूर्ति करने के लिए आबद्ध है जो उस अभिकर्ता ने उसे प्रदत्त प्राधिकार के प्रयोग में किए हों।
दृष्टांत
(क) कलकत्ते के क के अनुदेशों के अधीन ग को कुछ माल परिदान करने के लिए ग से ख सिगांपुर में संविदा करता है । ख को कमाल नहीं भेजता और ग संविदा भंग के लिए ख पर वाद लाता है। क को ख वाद की इत्तिला देता है और क उसे बाद में प्रतिरक्षा करने के लिए प्राधिकृत करता है । ख वाद में प्रतिरक्षा करता है और नुकसानी तथा खर्च देने के लिए विवश किया जाता है और वह व्यय उपगत करता है। क ऐसी नुकसानी, खर्चों और व्ययों के लिए ख के प्रति दायी है।
(ख) कलकत्ते का एक दलाल ख वहाँ के एक वणिक क के आदेशों के अनुसार ग से क के लिए दस पीपे तेल खरीदने की संविदा करता है। तत्पश्चात् क वह तेल लेने से इन्कार कर देता है और ख पर ग वाद लाता है। क को ख इत्तिला देता है। क संविदा का पूर्णतः निराकरण कर देता है । ख प्रतिरक्षा करता है किन्तु असफल रहता है और उसे नुकसानी और खर्चे देने पड़ते हैं और व्यय उठाने पड़ते हैं। क ऐसी नुकसानी, खर्चों और व्ययों के लिए ख के प्रति दायी है।

Indian Contract Act Section-222 (IC Act Section-222 in English)

Agent to be indemnified against consequences of lawful acts-

The employer of an agent is bound to indemnify him against the consequences of all lawful acts done by such agent in exercise of the authority conferred upon him.
Illustrations
(a) B, at Singapur, under instructions from A of Calcutta, contracts with C to deliver certain goods to him. A does not send the goods to B, and C sues B for breach of contract. B informs A of the suit, and A authorizes him to defend the suit. B defends the suit, and is compelled to pay damages and costs, and incurs expenses. A is liable to B for such damages, costs and expenses.
(b) B, a broker at Calcutta, by the orders of A, a merchant there, contracts with C for the purchase of 10 casks of oil for A. Afterwards A refuses to receive the oil, and C sues B. B informs A, who repudiates the contract altogether. B defends, but unsuccessfully, and has to pay damages and costs and incurs expenses. A is liable to B for such damages, costs and expenses.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 222 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।