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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 185 | Indian Contract Act Section 185

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-185) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 185 के अनुसार अभिकरण के सृजन के लिए कोई प्रतिफल आवश्यक नहीं है, जिसे IC Act Section-185 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 185 (Indian Contract Act Section-185) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 185 IC Act Section-185 के अनुसार अभिकरण के सृजन के लिए कोई प्रतिफल आवश्यक नहीं है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 185 (IC Act Section-185 in Hindi)

प्रतिफल आवश्यक नहीं है-

अभिकरण के सृजन के लिए कोई प्रतिफल आवश्यक नहीं है।

Indian Contract Act Section-185 (IC Act Section-185 in English)

Consideration not necessary-

No consideration is necessary to create an agency.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 185 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 184 | Indian Contract Act Section 184

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-184) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 184 के अनुसार जहां तक कि मालिक और पर-व्यक्तियों के बीच का सम्बन्ध है कोई भी व्यक्ति अभिकर्ता हो सकेगा, किन्तु कोई भी व्यक्ति, जो प्राप्तवय और स्वस्थ-चित्त न हो, अभिकर्ता ऐसे न हो सकेगा कि वह अपने मालिक के प्रति तन्निमित्त एतस्मिन् अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार उत्तरदायी हो, जिसे IC Act Section-184 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 184 (Indian Contract Act Section-184) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 184 IC Act Section-184 के अनुसार जहां तक कि मालिक और पर-व्यक्तियों के बीच का सम्बन्ध है कोई भी व्यक्ति अभिकर्ता हो सकेगा, किन्तु कोई भी व्यक्ति, जो प्राप्तवय और स्वस्थ-चित्त न हो, अभिकर्ता ऐसे न हो सकेगा कि वह अपने मालिक के प्रति तन्निमित्त एतस्मिन् अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार उत्तरदायी हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 184 (IC Act Section-184 in Hindi)

अभिकर्ता कौन हो सकेगा-

जहां तक कि मालिक और पर-व्यक्तियों के बीच का सम्बन्ध है कोई भी व्यक्ति अभिकर्ता हो सकेगा, किन्तु कोई भी व्यक्ति, जो प्राप्तवय और स्वस्थ-चित्त न हो, अभिकर्ता ऐसे न हो सकेगा कि वह अपने मालिक के प्रति तन्निमित्त एतस्मिन् अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार उत्तरदायी हो।

Indian Contract Act Section-184 (IC Act Section-184 in English)

Who may be an agent-

As between the principal and third persons, any person may become an agent, but no person who is not of the age of majority and of sound mind can become an agent, so as to be responsible to his principal according to the provisions in that behalf herein contained.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 184 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 183 | Indian Contract Act Section 183

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-183) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 183 के अनुसार वह व्यक्ति, जो उस विधि के अनुसार, जिसके वह अध्यधीन है. प्राप्तवय हो और स्वस्थ-चित्त हो, अभिकर्ता नियोजित कर सकेगा, जिसे IC Act Section-183 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 183 (Indian Contract Act Section-183) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 183 IC Act Section-183 के अनुसार वह व्यक्ति, जो उस विधि के अनुसार, जिसके वह अध्यधीन है. प्राप्तवय हो और स्वस्थ-चित्त हो, अभिकर्ता नियोजित कर सकेगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 183 (IC Act Section-183 in Hindi)

अभिकर्ता कौन नियोजित कर सकेगा-

वह व्यक्ति, जो उस विधि के अनुसार, जिसके वह अध्यधीन है. प्राप्तवय हो और स्वस्थ-चित्त हो, अभिकर्ता नियोजित कर सकेगा।

Indian Contract Act Section-183 (IC Act Section-183 in English)

Who may employ agent-

Any person who is of the age of majority according to the law to which he is subject, and who is of sound mind, may employ an agent.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 183 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 182 | Indian Contract Act Section 182

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-182) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 182 के अनुसार अभिकर्ता वह व्यक्ति है जो किसी अन्य की ओर से कोई कार्य करने के लिए या पर-व्यक्तियों से व्यवहारों में किसी अन्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए, नियोजित है। वह व्यक्ति जिसके लिए ऐसा कार्य किया जाता है या जिसका इस प्रकार प्रतिनिधित्व किया जाता है “मालिक” कहलाता है, जिसे IC Act Section-182 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 182 (Indian Contract Act Section-182) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 182 IC Act Section-182 के अनुसार अभिकर्ता वह व्यक्ति है जो किसी अन्य की ओर से कोई कार्य करने के लिए या पर-व्यक्तियों से व्यवहारों में किसी अन्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए, नियोजित है। वह व्यक्ति जिसके लिए ऐसा कार्य किया जाता है या जिसका इस प्रकार प्रतिनिधित्व किया जाता है “मालिक” कहलाता है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 182 (IC Act Section-182 in Hindi)

“अभिकर्ता” और “मालिक की परिभाषा-

अभिकर्ता वह व्यक्ति है जो किसी अन्य की ओर से कोई कार्य करने के लिए या पर-व्यक्तियों से व्यवहारों में किसी अन्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए, नियोजित है। वह व्यक्ति जिसके लिए ऐसा कार्य किया जाता है या जिसका इस प्रकार प्रतिनिधित्व किया जाता है “मालिक” कहलाता है।

Indian Contract Act Section-182 (IC Act Section-182 in English)

“Agent” and “principal” defined”-

An “agent” is a person employed to do any act for another, or to represent another in dealings with third persons. The person for whom such act is done, or who is so represented, is called the “principal”.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 182 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 181 | Indian Contract Act Section 181

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-181) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 181 के अनुसार ऐसे किसी बाद में अनुतोष या प्रतिकर के तौर पर जो कुछ भी अभिप्राप्त किया जाए, वह्, जहाँ पर कि उपनिधाता और उपनिहिती के बीच का सम्बन्ध है, उनके अपने-अपने हितों के अनुसार बरता जाएगा, जिसे IC Act Section-181 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 181 (Indian Contract Act Section-181) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 181 IC Act Section-181 के अनुसार ऐसे किसी बाद में अनुतोष या प्रतिकर के तौर पर जो कुछ भी अभिप्राप्त किया जाए, वह्, जहाँ पर कि उपनिधाता और उपनिहिती के बीच का सम्बन्ध है, उनके अपने-अपने हितों के अनुसार बरता जाएगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 181 (IC Act Section-181 in Hindi)

ऐसे वादों से अभिप्राप्त अनुतोष या प्रतिकर का प्रभाजन-

ऐसे किसी बाद में अनुतोष या प्रतिकर के तौर पर जो कुछ भी अभिप्राप्त किया जाए, वह्, जहाँ पर कि उपनिधाता और उपनिहिती के बीच का सम्बन्ध है, उनके अपने-अपने हितों के अनुसार बरता जाएगा।

Indian Contract Act Section-181 (IC Act Section-181 in English)

Apportionment of relief or compensation obtained by such suits-

Whatever is obtained by way of relief or compensation in any such suit shall, as between the bailor and the bailee, be dealt with according to their respective interests.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 181 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 180 | Indian Contract Act Section 180

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-180) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 180 के अनुसार यदि कोई पर-व्यक्ति उपनिहिती को उपनिहित माल के उपयोग या उस पर कब्जे से दोषपूर्वक वंचित करे या माल को कोई क्षति करे तो उपनिहिती ऐसे उपचारों का उपयोग करने का हकदार है जिनका वैसी दशा में स्वामी उपयोग कर सकता यदि उपनिधान नहीं किया गया होगा, और या तो उपनिधाता या उपनिहिती ऐसे वंचित किए जाने या ऐसी क्षति के लिए पर-व्यक्ति के विरुद्ध वाद ला सकेगा, जिसे IC Act Section-180 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 180 (Indian Contract Act Section-180) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 180 IC Act Section-180 के अनुसार यदि कोई पर-व्यक्ति उपनिहिती को उपनिहित माल के उपयोग या उस पर कब्जे से दोषपूर्वक वंचित करे या माल को कोई क्षति करे तो उपनिहिती ऐसे उपचारों का उपयोग करने का हकदार है जिनका वैसी दशा में स्वामी उपयोग कर सकता यदि उपनिधान नहीं किया गया होगा, और या तो उपनिधाता या उपनिहिती ऐसे वंचित किए जाने या ऐसी क्षति के लिए पर-व्यक्ति के विरुद्ध वाद ला सकेगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 180 (IC Act Section-180 in Hindi)

उपनिधाता या उपनिहिती द्वारा दोषकर्ता के विरुद्ध वाद-

यदि कोई पर-व्यक्ति उपनिहिती को उपनिहित माल के उपयोग या उस पर कब्जे से दोषपूर्वक वंचित करे या माल को कोई क्षति करे तो उपनिहिती ऐसे उपचारों का उपयोग करने का हकदार है जिनका वैसी दशा में स्वामी उपयोग कर सकता यदि उपनिधान नहीं किया गया होगा, और या तो उपनिधाता या उपनिहिती ऐसे वंचित किए जाने या ऐसी क्षति के लिए पर-व्यक्ति के विरुद्ध वाद ला सकेगा।

Indian Contract Act Section-180 (IC Act Section-180 in English)

Suit by bailor or bailee against wrong-doer-

If a third person wrongfully deprives the bailee of the use or possession of the goods bailed, or does them any injury, the bailee is entitled to use such remedies as the owner might have used in the like case if no bailment had been made; and either the bailor or the bailee may bring a suit against a third person for such deprivation or injury

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 180 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।