Home Blog Page 43

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 174 | Indian Contract Act Section 174

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-174) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 174 के अनुसार पणयमदार उस ऋण या वचन से भिन्न किसी ऋण या वचन के लिए, जिसके लिए माल गिरवी रखा गया है, उस माल का प्रतिधारण उस प्रभाव की संविदा के अभाव में न करेगा, किन्तु तत्प्रतिकूल किसी बात के अभाव में ऐसी संविदा की उपधारणा पणयमदार द्वारा दिए गए पश्चात्वर्ती उधारों के बारे में कर ली जाएगी, जिसे IC Act Section-174 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 174 (Indian Contract Act Section-174) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 174 IC Act Section-174 के अनुसार पणयमदार उस ऋण या वचन से भिन्न किसी ऋण या वचन के लिए, जिसके लिए माल गिरवी रखा गया है, उस माल का प्रतिधारण उस प्रभाव की संविदा के अभाव में न करेगा, किन्तु तत्प्रतिकूल किसी बात के अभाव में ऐसी संविदा की उपधारणा पणयमदार द्वारा दिए गए पश्चात्वर्ती उधारों के बारे में कर ली जाएगी।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 174 (IC Act Section-174 in Hindi)

जिस ऋण या वचन के लिए माल गिरवी रखा गया है, पणयमदार उससे भिन्न ऋण या वचन के लिए उसका प्रतिधारण नहीं करेगा। पश्चात्वर्ती उधारों के बारे में उपधारणा-

पणयमदार उस ऋण या वचन से भिन्न किसी ऋण या वचन के लिए, जिसके लिए माल गिरवी रखा गया है, उस माल का प्रतिधारण उस प्रभाव की संविदा के अभाव में न करेगा, किन्तु तत्प्रतिकूल किसी बात के अभाव में ऐसी संविदा की उपधारणा पणयमदार द्वारा दिए गए पश्चात्वर्ती उधारों के बारे में कर ली जाएगी।

Indian Contract Act Section-174 (IC Act Section-174 in English)

Pawnee not to retain for debt or promise other than that for which goods pledged. Presumption in case of subsequent advances-

The pawnee shall not, in the absence of a contract to that effect, retain the goods pledged for any debt or promise other than the debt or promise for which they are pledged; but such contract, in the absence of anything to the contrary, shall be presumed in regard to subsequent advances made by the pawnee.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 174 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 173 | Indian Contract Act Section 173

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-173) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 173 के अनुसार पणयमदार गिरवी माल का प्रतिधारण न केवल ऋण के संदाय के लिए या वचन के पालन के लिए कर सकेगा वरन् ऋण के व्याज और गिरवी माल के कब्जे के बारे में या परीक्षण के लिए अपने द्वारा उपगत सारे आवश्यक व्ययों के लिए भी कर सकेगा, जिसे IC Act Section-173 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 173 (Indian Contract Act Section-173) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 173 IC Act Section-173 के अनुसार पणयमदार गिरवी माल का प्रतिधारण न केवल ऋण के संदाय के लिए या वचन के पालन के लिए कर सकेगा वरन् ऋण के व्याज और गिरवी माल के कब्जे के बारे में या परीक्षण के लिए अपने द्वारा उपगत सारे आवश्यक व्ययों के लिए भी कर सकेगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 173 (IC Act Section-173 in Hindi)

पणयमदार का प्रतिधारण का अधिकार-

पणयमदार गिरवी माल का प्रतिधारण न केवल ऋण के संदाय के लिए या वचन के पालन के लिए कर सकेगा वरन् ऋण के व्याज और गिरवी माल के कब्जे के बारे में या परीक्षण के लिए अपने द्वारा उपगत सारे आवश्यक व्ययों के लिए भी कर सकेगा।

Indian Contract Act Section-173 (IC Act Section-173 in English)

Pawnee’s right of retainer-

The pawnee may retain the goods pledged, not only for payment of the debt or the performance of the promise, but for the interest of the debt, and all necessary expenses incurred by him in respect of the possession or for the preservation of the goods pledged.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 173 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 172 | Indian Contract Act Section 172

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-172) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 172 के अनुसार किसी ऋण के संदाय के लिए या किसी वचन के पालन के लिए प्रतिभूति के तौर पर माल का उपनिधान “गिरवी कहलाता है। उस दशा में उपनिधाता “पणयमकार कहलाता है। उपनिहिती “पणयमदार” कहलाता है, जिसे IC Act Section-172 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 172 (Indian Contract Act Section-172) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 172 IC Act Section-172 के अनुसार किसी ऋण के संदाय के लिए या किसी वचन के पालन के लिए प्रतिभूति के तौर पर माल का उपनिधान “गिरवी कहलाता है। उस दशा में उपनिधाता “पणयमकार कहलाता है। उपनिहिती “पणयमदार” कहलाता है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 172 (IC Act Section-172 in Hindi)

“गिरवी”, “पणयमकार” और “पणयमदार” की परिभाषा-

किसी ऋण के संदाय के लिए या किसी वचन के पालन के लिए प्रतिभूति के तौर पर माल का उपनिधान “गिरवी कहलाता है। उस दशा में उपनिधाता “पणयमकार कहलाता है। उपनिहिती “पणयमदार” कहलाता है।

Indian Contract Act Section-172 (IC Act Section-172 in English)

“Pledge” “pawnor”, and “pawnee” defined”-

The bailment of goods as security for payment of a debt or performance of a promise is called “pledge”. The bailor is in this case called the “pawnor”. The bailee is called the “pawnee”.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 172 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 171 | Indian Contract Act Section 171

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-171) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 171 के अनुसार बैंकार, फैक्टर, घाटवाल, उच्च न्यायालय के अटर्नी और बीमा-दलाल अपने को उपनिहित किसी माल को, तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में समस्त लेखाओं की बाकी के लिए प्रतिभूति के रूप में प्रतिधृत रख सकेंगे, किन्तु अन्य किन्हीं भी व्यक्तियों को यह अधिकार नहीं है कि वे अपने को उपनिहित माल ऐसी बाकी के लिए प्रतिभूति के रूप में प्रतिधृत रखें जब तक कि उस प्रभाव की कोई अभिव्यक्त संविदा न हो, जिसे IC Act Section-171 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 171 (Indian Contract Act Section-171) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 171 IC Act Section-171 के अनुसार बैंकार, फैक्टर, घाटवाल, उच्च न्यायालय के अटर्नी और बीमा-दलाल अपने को उपनिहित किसी माल को, तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में समस्त लेखाओं की बाकी के लिए प्रतिभूति के रूप में प्रतिधृत रख सकेंगे, किन्तु अन्य किन्हीं भी व्यक्तियों को यह अधिकार नहीं है कि वे अपने को उपनिहित माल ऐसी बाकी के लिए प्रतिभूति के रूप में प्रतिधृत रखें जब तक कि उस प्रभाव की कोई अभिव्यक्त संविदा न हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 171 (IC Act Section-171 in Hindi)

बैंकारों, फैक्टरों, घाटवालों, अटर्नियों और बीमा-दलालों का साधारण धारणाधिकार-

बैंकार, फैक्टर, घाटवाल, उच्च न्यायालय के अटर्नी और बीमा-दलाल अपने को उपनिहित किसी माल को, तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में समस्त लेखाओं की बाकी के लिए प्रतिभूति के रूप में प्रतिधृत रख सकेंगे, किन्तु अन्य किन्हीं भी व्यक्तियों को यह अधिकार नहीं है कि वे अपने को उपनिहित माल ऐसी बाकी के लिए प्रतिभूति के रूप में प्रतिधृत रखें जब तक कि उस प्रभाव की कोई अभिव्यक्त संविदा न हो।

Indian Contract Act Section-171 (IC Act Section-171 in English)

General lien of bankers, factors, wharfingers, attorneys and policy-brokers-

Bankers, factors, wharfingers, attorneys of a High Court and policy-brokers may, in the absence of a contract to the contrary, retain as a security for a general balance of account, any goods bailed to them; but no other persons have a right to retain, as a security for such balance, goods bailed to them, unless there is an express contract to that effect.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 171 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 170 | Indian Contract Act Section 170

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-170) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 170 के अनुसार जहां कि उपनिहिती ने, उपनिहित माल के बारे में उपनिधान के प्रयोजन के अनुसार कोई ऐसी सेवा की हो, जिसमें श्रम या कौशल का प्रयोग अंतर्वलित हो, वहाँ तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में, उसे ऐसे माल के तब तक प्रतिधारण का अधिकार है जब तक वह उन सेवाओं के लिए जो उसने उसके बारे में की हों, सम्यक् पारिश्रमिक नहीं पा लेता, जिसे IC Act Section-170 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 170 (Indian Contract Act Section-170) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 170 IC Act Section-170 के अनुसार जहां कि उपनिहिती ने, उपनिहित माल के बारे में उपनिधान के प्रयोजन के अनुसार कोई ऐसी सेवा की हो, जिसमें श्रम या कौशल का प्रयोग अंतर्वलित हो, वहाँ तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में, उसे ऐसे माल के तब तक प्रतिधारण का अधिकार है जब तक वह उन सेवाओं के लिए जो उसने उसके बारे में की हों, सम्यक् पारिश्रमिक नहीं पा लेता।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 170 (IC Act Section-170 in Hindi)

उपनिहिती का विशिष्ट धारणाधिकार-

जहां कि उपनिहिती ने, उपनिहित माल के बारे में उपनिधान के प्रयोजन के अनुसार कोई ऐसी सेवा की हो, जिसमें श्रम या कौशल का प्रयोग अंतर्वलित हो, वहाँ तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में, उसे ऐसे माल के तब तक प्रतिधारण का अधिकार है जब तक वह उन सेवाओं के लिए जो उसने उसके बारे में की हों, सम्यक् पारिश्रमिक नहीं पा लेता।
दृष्टांत
(क) क एक जोहरी ख को अनगढ़ हीरा काटने और पालिश किए जाने के लिए परिदत्त करता है। तदनुसार वैसा कर दिया जाता है । ख उस हीरे के प्रतिधारण का तब तक हकदार है जब तक उसे उन सेवाओं के लिए जो उसने की हैं संदाय न कर दिया जाए।
(ख) क एक दर्जी ख को कोट बनाने के लिए कपड़ा देता है। ख यह वचन देता है कि कोट ज्यों ही पूरा हो जाएगा वह उसे क को परिदत्त कर देगा और पारिश्रमिक के लिए तीन मास का प्रत्यय देगा। कोट के लिए संदाय किए जाने तक ख उसे प्रतिधृत रखने का हकदार नहीं है।

Indian Contract Act Section-170 (IC Act Section-170 in English)

Bailee’s particular lien-

Where the bailee has, in accordance with the purpose of the bailment, rendered any service involving the exercise of labour or skill in respect of the goods bailed, he has, in the absence of a contract to the contrary, a right to retain such goods until he receives due remuneration for the services he has rendered in respect of them.
Illustrations
(a) A delivers a rough diamond to B, a jeweller, to be cut and polished, which is accordingly done. B is entitled to retain the stone till he is paid for the services he has rendered.
(b) A gives, cloth to B, a tailor, to make into a coat. B promises A to deliver the coat as soon as it is finished, and to give a three months‟ credit for the price. B is not entitled to retain the coat until he is paid.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 170 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 169 | Indian Contract Act Section 169

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-169) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 169 के अनुसार जबकि कोई चीज, जो सामान्यतया विक्रय का विषय हो, खो जाए तब यदि स्वामी का युक्तियुक्त तत्परता से पता नहीं लगाया जा सके या यदि वह पड़ा पाने वाले के विधिपूर्ण प्रभारों का मांगे जाने पर संदाय करने से इंकार करे तो पड़ा पाने वाला उसको बेच सकेगा, जिसे IC Act Section-169 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 169 (Indian Contract Act Section-169) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 169 IC Act Section-169 के अनुसार जबकि कोई चीज, जो सामान्यतया विक्रय का विषय हो, खो जाए तब यदि स्वामी का युक्तियुक्त तत्परता से पता नहीं लगाया जा सके या यदि वह पड़ा पाने वाले के विधिपूर्ण प्रभारों का मांगे जाने पर संदाय करने से इंकार करे तो पड़ा पाने वाला उसको बेच सकेगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 169 (IC Act Section-169 in Hindi)

सामान्यतया विक्रय होने वाली चीज को पड़ी पाने वाला उसे कब बेच सकेगा-

जबकि कोई चीज, जो सामान्यतया विक्रय का विषय हो, खो जाए तब यदि स्वामी का युक्तियुक्त तत्परता से पता नहीं लगाया जा सके या यदि वह पड़ा पाने वाले के विधिपूर्ण प्रभारों का मांगे जाने पर संदाय करने से इंकार करे तो पड़ा पाने वाला उसको बेच सकेगा :
(1) जबकि उस चीज के नष्ट हो जाने या उसके मूल्य का अधिकांश जाते रहने का खतरा हो, अथवा
(2) जबकि पाई गई चीज के बारे में पड़े पाने वाले के विधिपूर्ण प्रभार उसके मूल्य के दो तिहाई तक पहुंच जाए।

Indian Contract Act Section-169 (IC Act Section-169 in English)

When finder of thing commonly on sale may sell it-

When a thing which is commonly the subject of sale is lost, if the owner cannot with reasonable diligence be found, or if he refuses, upon demand, to pay the lawful charges of the finder, the finder may sell it—
(1) when the thing is in danger of perishing or of losing the greater part of its value, or,
(2) when the lawful charges of the finder, in respect of the thing found, amount to two-thirds of its value.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 169 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।