भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 170 | Indian Contract Act Section 170

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-170) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 170 के अनुसार जहां कि उपनिहिती ने, उपनिहित माल के बारे में उपनिधान के प्रयोजन के अनुसार कोई ऐसी सेवा की हो, जिसमें श्रम या कौशल का प्रयोग अंतर्वलित हो, वहाँ तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में, उसे ऐसे माल के तब तक प्रतिधारण का अधिकार है जब तक वह उन सेवाओं के लिए जो उसने उसके बारे में की हों, सम्यक् पारिश्रमिक नहीं पा लेता, जिसे IC Act Section-170 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 170 (Indian Contract Act Section-170) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 170 IC Act Section-170 के अनुसार जहां कि उपनिहिती ने, उपनिहित माल के बारे में उपनिधान के प्रयोजन के अनुसार कोई ऐसी सेवा की हो, जिसमें श्रम या कौशल का प्रयोग अंतर्वलित हो, वहाँ तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में, उसे ऐसे माल के तब तक प्रतिधारण का अधिकार है जब तक वह उन सेवाओं के लिए जो उसने उसके बारे में की हों, सम्यक् पारिश्रमिक नहीं पा लेता।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 170 (IC Act Section-170 in Hindi)

उपनिहिती का विशिष्ट धारणाधिकार-

जहां कि उपनिहिती ने, उपनिहित माल के बारे में उपनिधान के प्रयोजन के अनुसार कोई ऐसी सेवा की हो, जिसमें श्रम या कौशल का प्रयोग अंतर्वलित हो, वहाँ तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में, उसे ऐसे माल के तब तक प्रतिधारण का अधिकार है जब तक वह उन सेवाओं के लिए जो उसने उसके बारे में की हों, सम्यक् पारिश्रमिक नहीं पा लेता।
दृष्टांत
(क) क एक जोहरी ख को अनगढ़ हीरा काटने और पालिश किए जाने के लिए परिदत्त करता है। तदनुसार वैसा कर दिया जाता है । ख उस हीरे के प्रतिधारण का तब तक हकदार है जब तक उसे उन सेवाओं के लिए जो उसने की हैं संदाय न कर दिया जाए।
(ख) क एक दर्जी ख को कोट बनाने के लिए कपड़ा देता है। ख यह वचन देता है कि कोट ज्यों ही पूरा हो जाएगा वह उसे क को परिदत्त कर देगा और पारिश्रमिक के लिए तीन मास का प्रत्यय देगा। कोट के लिए संदाय किए जाने तक ख उसे प्रतिधृत रखने का हकदार नहीं है।

Indian Contract Act Section-170 (IC Act Section-170 in English)

Bailee’s particular lien-

Where the bailee has, in accordance with the purpose of the bailment, rendered any service involving the exercise of labour or skill in respect of the goods bailed, he has, in the absence of a contract to the contrary, a right to retain such goods until he receives due remuneration for the services he has rendered in respect of them.
Illustrations
(a) A delivers a rough diamond to B, a jeweller, to be cut and polished, which is accordingly done. B is entitled to retain the stone till he is paid for the services he has rendered.
(b) A gives, cloth to B, a tailor, to make into a coat. B promises A to deliver the coat as soon as it is finished, and to give a three months‟ credit for the price. B is not entitled to retain the coat until he is paid.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 170 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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