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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 18 | Indian Contract Act Section 18

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-18) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 18 के अनुसार गलत या अनुचित उपयोग करना” यह शब्द विशेष रूप से न्यायशास्त्र और व्यवहारिक संदर्भों में प्रयोग होता है। इसका उपयोग किसी विधि, नियम, नीति, या संगठन के गलत या अनुचित अनुपालन को संकेतित करने के लिए किया जाता है। जहां अवैध और न्याय विरुद्ध कार्रवाई को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, यह शब्द अनुचित उपयोग, दुर्व्यवहार या किसी नियम की लापरवाही को भी संकेतित करने के लिए उपयोग होता है, जिसे IC Act Section-18 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 18 (Indian Contract Act Section-18) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 18 IC Act Section-18 के अनुसार गलत या अनुचित उपयोग करना”। यह शब्द विशेष रूप से न्यायशास्त्र और व्यवहारिक संदर्भों में प्रयोग होता है। इसका उपयोग किसी विधि, नियम, नीति, या संगठन के गलत या अनुचित अनुपालन को संकेतित करने के लिए किया जाता है। जहां अवैध और न्याय विरुद्ध कार्रवाई को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, यह शब्द अनुचित उपयोग, दुर्व्यवहार या किसी नियम की लापरवाही को भी संकेतित करने के लिए उपयोग होता है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 18 (IC Act Section-18 in Hindi)

दुर्व्यपदेशन” की परिभाषा-

“दुर्व्यपदेशन” से अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत आते हैं—
(1) उस बात को, जो सत्य नहीं है, ऐसे प्रकार से किया गया निश्चयात्मक प्राख्यान जो उस व्यक्ति की जो उसे करता है, जानकारी से समर्थित न हो, यद्यपि वह उस बात के सत्य होने का विश्वास करता हो;
(2) कोई ऐसा कर्तव्य-भंग, जो प्रवंचना करने के आशय के बिना उस व्यक्ति को, जो उसे करता है, या उससे व्युत्पन्न अधिकार के अधीन दावा करने वाले किसी व्यक्ति को कोई फायदा किसी अन्य को ऐसा भुलावा देकर पहुँचाए, जिससे उस अन्य पर या उससे व्युत्पन्न अधिकार के अधीन दावा करने वाले किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े;
(3) चाहे कितने ही सरल भाव से क्यों न हो, करार के किसी पक्षकार से उस बात के पदार्थ के बारे में, जो उस करार का विषय हो, कोई भूल कराना।

Indian Contract Act Section-18 (IC Act Section-18 in English)

“Misrepresentation” defined-

“Misrepresentation” means and includes
(1) the positive assertion, in a manner not warranted by the information of the person making it, of that which is not true, though he believes it to be true;
(2) any breach of duty which, without an intent to deceive, gains an advantage of the person committing it, or any one claiming under him, by misleading another to his prejudice, or to the prejudice of any one claiming under him;
(3) causing, however innocently, a party to an agreement, to make a mistake as to the substance of the thing which is the subject of the agreement.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 18 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 17 | Indian Contract Act Section 17

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-17) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 17 के अनुसार कपट व्यक्ति या स्थिति में छल, धोखा या कूटनीति का उपयोग करता है। कपट का उपयोग विभिन्न संदर्भों में किया जा सकता है। यह शब्द विशेष रूप से नकली, मिथ्या, और चालाकी से जुड़े स्थितियों या व्यक्तियों को संकेतित करने के लिए प्रयोग होता है। यह व्यक्ति या स्थिति अप्रत्याशित या निराशाजनक रूप से कार्य करता है, जिससे दूसरों को धोखा मिलता है या उनके सामर्थ्य का लाभ उठाया जाना, जिसे IC Act Section-17 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 17 (Indian Contract Act Section-17) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 17 IC Act Section-17 के अनुसार कपट व्यक्ति या स्थिति में छल, धोखा या कूटनीति का उपयोग करता है। कपट का उपयोग विभिन्न संदर्भों में किया जा सकता है। यह शब्द विशेष रूप से नकली, मिथ्या, और चालाकी से जुड़े स्थितियों या व्यक्तियों को संकेतित करने के लिए प्रयोग होता है। यह व्यक्ति या स्थिति अप्रत्याशित या निराशाजनक रूप से कार्य करता है, जिससे दूसरों को धोखा मिलता है या उनके सामर्थ्य का लाभ उठाया जाना।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 17 (IC Act Section-17 in Hindi)

“कपट” की परिभाषा-

“कपट” से अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत आता है निम्नलिखित कार्यों में से कोई भी ऐसा कार्य संविदा के एक पक्षकार द्वारा, या उसकी मौनानुकूलता से या उसके अभिकर्ता द्वारा, संविदा के किसी अन्य पक्षकार की या उसके अभिकर्ता की प्रवंचना करने के आशय से या उसे संविदा करने के लिए उत्प्रेरित करने के आशय से किया गया हो —
(1) जो बात सत्य नहीं है उसका तथ्य के रूप में उस व्यक्ति द्वारा सुझाया जाना जो यह विश्वास नहीं करता कि वह सत्य है;
(2) किसी तथ्य का ज्ञान या विश्वास रखने वाले व्यक्ति द्वारा उस तथ्य का सक्रिय छिपाया जाना;
(3) कोई वचन जो उसका पालन करने के आशय के बिना दिया गया हो;
(4) प्रवंचना करने योग्य कोई अन्य कार्य;
(5) कोई ऐसा कार्य या लोप जिसका कपटपूर्ण होना विधि विशेषतः घोषित करे।
स्पष्टीकरण — संविदा करने के लिए व्यक्ति की रजामन्दी पर जिन तथ्यों का प्रभाव पड़ना सम्भाव्य हो, उनके बारे में केवल मौन रहना कपट नहीं है जब तक कि मामले की परिस्थितियाँ ऐसी न हों जिन्हें ध्यान में रखते हुए मौन रहने वाले व्यक्ति का यह कर्त्तव्य हो जाता हो कि वह बोले या जब तक कि उसका मौन स्वत: ही बोलने के तुल्य न हो।।
दृष्टान्त
(क) ‘क’ नीलाम द्वारा ‘ख’ को एक घोड़ा बेचता है जिसके बारे में ‘क’ जानता है कि वह ऐबदार है। ‘क’ घोड़े के ऐब के बारे में ‘ख’ को कुछ नहीं कहता। यह ‘क’ की ओर से कपट नहीं है।
(ख) ‘क’ की ‘ख’ पुत्री है और अभी ही प्राप्तवय हुई है। पक्षकारों के बीच के सम्बन्ध के कारण ‘क’ का यह कर्तव्य हो जाता है कि यदि घोड़ा ऐबदार है तो ‘ख’ को वह बात बता दे।
(ग) ‘क’ से ‘ख’ कहता है कि यदि आप इस बात का प्रत्याख्यान न करे तो मैं मान लूंगा कि घोड़ा बेऐब है। ‘क’ कुछ नहीं कहता है। यहाँ ‘क’ का मौन बोलने के तुल्य है।
(घ) ‘क’ और ‘ख’, जो व्यापारी हैं, एक संविदा करते हैं। ‘क’ को कीमतों में ऐसे परिवर्तन की निजी जानकारी है। जिससे संविदा करने के लिए अग्रसर होने की ‘ख’ की रजामन्दी पर प्रभाव पड़ेगा। ‘ख’ को यह जानकारी देने के लिए ‘क’ आबद्ध नहीं है।

Indian Contract Act Section-17 (IC Act Section-17 in English)

Fraud’ defined-

means and includes any of the following acts committed by a party to a contract, or with his connivance, or by his agent, with intent to deceive another party thereto or his agent, or to induce him to enter into the contracts
(1) the suggestion, as a fact, of that which is not true, by one who does not believe it to be true;
(2) the active concealment of a fact by one having knowledge or belief of the fact;
(3) a promise made without any intention of performing it;
(4) any other act fitted to deceive;
(5) any such act or omission as the law specially declares to be fraudulent.
Explanation – Mere silence as to facts likely to affect the willingness of a person to enter into a contract is not fraud, unless the circumstances of the case are such that, regard being had to them, it is the duty of the person keeping silence to speak, or unless his silence, is, in itself, equivalent to speech.
Illustrations
(a). A sells, by auction, to B, a horse which A knows to be unsound. A says nothing to B about the horse’s unsoundness. This is not fraud in A.
(b) Bis A’s daughter and has just come of age. Here the relation between the parties would make it A’s duty to tell B if the horse is unsound.
(c) B says to A – “If you do not deny it, I shall assume that the horse is sound”. A says nothing. Here, A’s silence is equivalent to speech.
(d) A and B, being traders, enter upon a contract. A has private information of a change in prices which would affect B’s willingness to proceed with the contract. A is not bound to inform B.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 17 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 16 | Indian Contract Act Section 16

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-16) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 16 के अनुसार अनुचित प्रभाव” या “गलत प्रभाव” यह शब्द विशेष रूप से संदिग्धता, अस्पष्टता और गलत या हानिकारक प्रभाव को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त होता है। जब किसी क्रिया, निर्णय, व्यवहार, योजना या सामरिक प्रयास का प्रभाव अनुचित या गलत होता है और इससे नकारात्मक परिणाम होता है, तो हम इसे “असम्यक् असर” कहते हैं। इसे विशेष रूप से समझौते, नियम, नीतियों, निर्देशों, अधिनियमों, संविधान आदि के प्रभाव को व्यक्त करने के लिए उपयोग किया जाता है, जिसे IC Act Section-16 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 16 (Indian Contract Act Section-16) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 16 IC Act Section-16 के अनुसार अनुचित प्रभाव” या “गलत प्रभाव” यह शब्द विशेष रूप से संदिग्धता, अस्पष्टता और गलत या हानिकारक प्रभाव को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त होता है। जब किसी क्रिया, निर्णय, व्यवहार, योजना या सामरिक प्रयास का प्रभाव अनुचित या गलत होता है और इससे नकारात्मक परिणाम होता है, तो हम इसे “असम्यक् असर” कहते हैं। इसे विशेष रूप से समझौते, नियम, नीतियों, निर्देशों, अधिनियमों, संविधान आदि के प्रभाव को व्यक्त करने के लिए उपयोग किया जाता है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 16 (IC Act Section-16 in Hindi)

असम्यक् असर” की परिभाषा-

(1) संविदा असम्यक् असर द्वारा उत्प्रेरित कही जाती है जहाँ कि पक्षकारों के बीच विद्यमान सम्बन्ध ऐसे हैं कि उनमें से एक पक्षकार दूसरे पक्षकार की इच्छा को अधिशासित करने की स्थिति में है और उस स्थिति का उपयोग उस दूसरे पक्षकार से अऋजु फायदा अभिप्राप्त करने के लिए करता है।
(2) विशिष्टतया और पूर्ववर्ती सिद्धान्त की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना यह है कि कोई व्यक्ति किसी अन्य की इच्छा को अधिशासित करने की स्थिति में समझा जाता है जबकि वह —
(क) उस अन्य पर वास्तविक या दृश्यमान प्राधिकार रखता है, या उस अन्य के साथ वैश्वासिक सम्बन्ध की स्थिति में है; अथवा
(ख) ऐसे व्यक्ति के साथ संविदा करता है जिसकी मानसिक सामर्थ्य पर आयु, रुग्णता या मानसिक या शारीरिक कष्ट के कारण अस्थायी या स्थायी रूप से प्रभाव पड़ा है।
(3) जहाँ कि कोई व्यक्ति, जो किसी अन्य की इच्छा को अधिशासित करने की स्थिति में हो, उसके साथ संविदा करता है; और वह संव्यवहार देखने से ही या दिए गए साक्ष्य के आधार पर लोकात्माविरुद्ध प्रतीत होता है वहाँ यह साबित करने का भार कि ऐसी संविदा असम्यक् असर से उत्प्रेरित नहीं की गई थी, उस व्यक्ति पर होगा जो उस अन्य की इच्छा को अधिशासित करने की स्थिति में था।
इस उपधारा की कोई भी बात भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की धारा 111 के उपबन्धों पर प्रभाव नहीं डालेगी।
दृष्टान्त
(क) ‘क’, जिसने अपने पुत्र को उसकी अप्राप्तवयता के दौरान धन उधार दिया था, ‘ख’ के प्राप्तवय होने पर अपने पैत्रिक असर के दुरुपयोग द्वारा उससे उस उधार धन की बाबत् शोध्य राशि से अधिक रकम के लिए एक बन्धपत्र अभिप्राप्त कर लेता है। ‘क’ असम्यक् असर का प्रयोग करता है।
(ख) रोग या आयु के क्षीण हुए मनुष्य ‘क’ पर ‘ख’ का, जो असर उसके चिकित्सीय परिचारक के नाते है, उस असर से ‘ख’ को उसकी वृत्तिक सेवाओं के लिए एक अयुक्तियुक्त राशि देने का करार करने के लिए ‘क’ उत्प्रेरित किया जाता है। ‘ख’ असम्यक् असर का प्रयोग करता है।
(ग) ‘क’ अपने ग्राम के साहूकार ‘ख’ का ऋणी होते हुए एक नई संविदा करके ऐसे निबन्धनों पर धन उधार लेता है जो लोकात्माविरुद्ध होते हैं। यह साबित करने का भार कि संविदा असम्यक् असर में उत्प्रेरित नहीं की गई थी, ‘ख’ पर है।
(घ) ‘क’ एक बैंककार से उधार के लिए ऐसे समय में आवेदन करता है, जब धन के बाजार में तंगी है। बैंककार ब्याज की अप्रायिक ऊँची दर पर देने के सिवाय उधार देने से इन्कार कर देता है, ‘क’ उन निबन्धनों पर उधार प्रतिगृहीत करता है। यह संव्यवहार कारबार के मामूली अनुक्रम में हुआ है, और यह संविदा असम्यक् असर से उत्प्रेरित नहीं है।

Indian Contract Act Section-16 (IC Act Section-16 in English)

“Undue influence’ defined-

(1) A contract is said to be induced by ‘undue influence where the relations subsisting between the parties are such that one of the parties is in a position to dominate the will of the other and uses that position to obtain an unfair advantage over the other.
(2) In particular and without prejudice to the generality of the foregoing principle, a person is deemed to be in a position to dominate the will of another
(a) where he holds a real or apparent authority over the other, or where he stands in a fiduciary relation to the other; or
(b) where he makes a contract with a person whose mental capacity is temporarily or permanently affected by reason of age, illness, or mental or bodily distress.
(3) Where a person who is in a position to dominate the will of another, enters into a contract with him, and the transaction appears, on the face of it or on the evidence adduced, to be unconscionable, the burden of proving that such contract was not induced by undue influence shall be upon the person in a position to dominate the will of the other.
Nothing in the sub-section shall affect the provisions of section 111 of the Indian Evidence Act, 1872 (1 of 1872),
Illustrations
(a) A having advanced money to his son, B, during his minority, upon B’s coming of age obtains, by misuse of parental influence, a bond from B for a greater amount than the sum due in respect of the advance. A employs undue influence.
(b) A, a man enfeebled by disease or age, is induced, by B’s influence over him as his medical attendant, to agree to pay B an unreasonable sum for his professional services, B employes undue influence.
(C) A, being in debt to B, the money-lender of his village, contracts a fresh loan on terms which appear to be unconscionable. It lies on B to prove that the contract was not induced by undue influence.
(d) A applies to a banker for a loan at a time when there is stringency in the money market. The banker declines to make the loan except at an unusually high rate of interest. A accepts the loan on these terms. This is a transaction in the ordinary course of business, and the contract is not induced by undue influence.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 16 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 15 | Indian Contract Act Section 15

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-15) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 15 के अनुसार एक व्यक्ति या संगठन दूसरे व्यक्ति या संगठन के प्रति द्विरूपण, धमकाना, अश्लील भाषा का प्रयोग, अवैध हमला, या किसी अन्य अनुचित व्यवहार का प्रयोग करता है। इसके तहत आने वाले व्यवहारों में शामिल हो सकते हैं भारी वाणिज्यिक या निजी हमले, चोट, छेड़छाड़, आपत्तिजनक संदेह, या उत्पीड़न करना, जिसे IC Act Section-15 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 15 (Indian Contract Act Section-15) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 15 IC Act Section-15 के अनुसारएक व्यक्ति या संगठन दूसरे व्यक्ति या संगठन के प्रति द्विरूपण, धमकाना, अश्लील भाषा का प्रयोग, अवैध हमला, या किसी अन्य अनुचित व्यवहार का प्रयोग करता है। इसके तहत आने वाले व्यवहारों में शामिल हो सकते हैं भारी वाणिज्यिक या निजी हमले, चोट, छेड़छाड़, आपत्तिजनक संदेह, या उत्पीड़न, चाहे वह कोई हो, प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए किसी सम्पत्ति का विधिविरुद्ध निरोध करना या निरोध करने की धमकी देना है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 15 (IC Act Section-15 in Hindi)

प्रपीड़न की परिभाषा-

“प्रपीड़न” इस आशय से कि किसी व्यक्ति से कोई करार कराया जाए, कोई ऐसा कार्य करने की धमकी देना है, जो भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) द्वारा निषिद्ध है, अथवा किसी व्यक्ति पर, चाहे वह कोई हो, प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए किसी सम्पत्ति का विधिविरुद्ध निरोध करना या निरोध करने की धमकी देना है।
स्पष्टीकरण — यह तत्वहीन है कि जिस स्थान पर प्रपीड़न का प्रयोग किया जाता है, वहाँ भारतीय दण्ड संहिता प्रवृत्त है या नहीं।
दृष्टान्त
‘क’ खुले समुद्र में एक अंग्रेजी पोत पर, ऐसे कार्य द्वारा, जो भारतीय दण्ड संहिता के अधीन आपराधिक अभित्रास की कोटि में आता है, ‘ख’ से ‘क’ एक करार कराता है। तत्पश्चात् ‘क’ संविदा-भंग के लिए कलकत्ते में ‘ख’ पर वाद लाता है।
‘क’ ने प्रपीड़न का प्रयोग किया है यद्यपि उसका कार्य इंग्लैण्ड की विधि के अनुसार अपराध नहीं है, और यद्यपि उस समय जब और उस स्थान पर जहाँ वह कार्य किया गया था, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 506 प्रवृत्त नहीं थी।

Indian Contract Act Section-15 (IC Act Section-15 in English)

“Coercion” defined-

Coercion’ is the committing, or threatening to commit, any act forbidden by the Indian Penal Code (45 of 1860) or the unlawful detaining, or threatening to detain, any property, to the prejudice of any person whatever, with the intention of causing any person to enter into an agreement.
Explanation – It is immaterial whether the Indian Penal Code (45 of 1860) is or is not in force in the place where the coercion is employed.
Illustrations
A, on board an English ship on the high seas, causes B to enter into an agreement by an act amounting to criminal intimidation under the Indian Penal Code (45 of 1860). A afterwards sues B for breach of contract at Calcutta.
A has employed coercion, although his act is not an offence by the law of England, and although section 506 of the Indian Penal Code (45 of 1860) was not in force at the time when or place where the act was done.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 15 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 14 | Indian Contract Act Section 14

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-14) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 14 के अनुसार प्रत्येक पक्षकार अपने योग्य स्वरूप में संविदा की शर्तों, नियमों और प्रावधानों को स्वीकार करता है और उनकी पूर्णता और अस्तित्व को स्वीकार करता है। इसका मतलब है कि हर एक पक्षकार आज्ञाप्ति या दण्ड के डर या दबाव के बिना स्वतंत्र रूप से और आज्ञाप्ति के प्रभाव से अपनी सहमति देता है। सम्मति स्वतन्त्र तब कही जाती है, जिसे IC Act Section-14 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 14 (Indian Contract Act Section-14) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 14 IC Act Section-14 के अनुसार प्रत्येक पक्षकार अपने योग्य स्वरूप में संविदा की शर्तों, नियमों और प्रावधानों को स्वीकार करता है और उनकी पूर्णता और अस्तित्व को स्वीकार करता है। इसका मतलब है कि हर एक पक्षकार आज्ञाप्ति या दण्ड के डर या दबाव के बिना स्वतंत्र रूप से और आज्ञाप्ति के प्रभाव से अपनी सहमति देता है। सम्मति स्वतन्त्र तब कही जाती है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 14 (IC Act Section-14 in Hindi)

स्वतंत्र सम्मति” की परिभाषा-

सम्मति स्वतन्त्र तब कही जाती है, जब कि वह —
(1) न तो धारा 15 में यथापरिभाषित प्रपीड़न द्वारा कारित हो;
(2) न धारा 16 में यथापरिभाषित असम्यक् असर द्वारा कारित हो;
(3) न धारा 17 में यथापरिभाषित कपट द्वारा कारित हो;
(4) न धारा 18 में यथापरिभाषित दुर्व्यपदेशन द्वारा कारित हो;
(5) न भूल द्वारा कारित हो, किन्तु यह बात धाराओं 20, 21 और 22 के उपबन्धों के अध्यधीन है।
सम्मति ऐसे कारित तब कही जाती है जबकि वह ऐसा प्रपीड़न, असम्यक् असर, कपट, दुर्व्यपदेशन या भूल न होती तो न दी जाती।

Indian Contract Act Section-14 (IC Act Section-14 in English)

Free consent’ defined-

Consent is said to be free when it is not caused by
(1) coercion, as defined in section 15, or
(2) undue influence, as defined in section 16, or
(3) fraud, as defined in section 17, or
(4) misrepresentation, as defined in section 18, or
(5) mistake, subject to the provisions of sections 20, 21 and 22.
Consent is said to be so caused when it would not have been given but for the existence of such coercion, undue influence, fraud, misrepresentation or mistake.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 14 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 13 | Indian Contract Act Section 13

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-13) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 13 के अनुसार दो या अधिक व्यक्ति सम्मत हुए तब कहे जाते हैं, जब कि वे किसी एक बात पर एक ही भाव में सहमत होते हैं, जिसे IC Act Section13 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 13 (Indian Contract Act Section-13) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 13 IC Act Section-13 के अनुसार दो या अधिक व्यक्ति सम्मत हुए तब कहे जाते हैं, जब कि वे किसी एक बात पर एक ही भाव में सहमत होते हैं। सम्मति व्यापारिक संबंधों में संविदा की वैधता और प्रभाव को सुनिश्चित करने का माध्यम है। यह संविदा के द्वारा तर्किक और न्यायिक समाधान की प्राप्ति की सुविधा प्रदान करता है। सम्मति द्वारा, पक्षकारों के बीच संविदा की स्थिति स्पष्ट होती है और उन्हें संविदा के अधिकार और कर्तव्यों की जानकारी होती है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 13 (IC Act Section-13 in Hindi)

सम्मति की परिभाषा-

दो या अधिक व्यक्ति सम्मत हुए तब कहे जाते हैं, जब कि वे किसी एक बात पर एक ही भाव में सहमत होते हैं।

Indian Contract Act Section-13 (IC Act Section-13 in English)

Consent defined-

Two or more persons are said to consent when they agree upon the same thing in the same sense.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 13 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।