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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 12 | Indian Contract Act Section 12

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-12) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 12 के अनुसार कोई व्यक्ति, संविदा करने के प्रयोजन के लिए स्वस्थचित्त कहा जाता है, यदि वह उस समय, जब वह संविदा करता है, उस संविदा को समझने में और अपने हितों पर उसके प्रभाव के बारे में युक्तिसंगत निर्णय लेने में समर्थ है, जिसे IC Act Section-12 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 12 (Indian Contract Act Section-12) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 12 IC Act Section-12 के अनुसार कोई व्यक्ति, संविदा करने के प्रयोजन के लिए स्वस्थचित्त कहा जाता है, यदि वह उस समय, जब वह संविदा करता है, उस संविदा को समझने में और अपने हितों पर उसके प्रभाव के बारे में युक्तिसंगत निर्णय लेने में समर्थ है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 12 (IC Act Section-12 in Hindi)

संविदा करने के प्रयोजनों के लिए स्वस्थचित्त क्या है-

कोई व्यक्ति, संविदा करने के प्रयोजन के लिए स्वस्थचित्त कहा जाता है, यदि वह उस समय, जब वह संविदा करता है, उस संविदा को समझने में और अपने हितों पर उसके प्रभाव के बारे में युक्तिसंगत निर्णय लेने में समर्थ है।
जो व्यक्ति प्रायः विकृतचित्त रहता है किन्तु कभी-कभी स्वस्थचित्त हो जाता है, वह जब स्वस्थचित्त हो तब संविदा कर सकेगा।
जो व्यक्ति प्रायः स्वस्थचित्त रहता है किन्तु कभी-कभी विकृचित्त हो जाता है, वह जब विकृतचित्त हो, तब संविदा नहीं कर सकेगा।
दृष्टान्त
(क) पागलखाने का एक रोगी, जो कि अन्तरालों में स्वस्थचित्त हो जाता है, उन अन्तरालों के दौरान में संविदा कर सकेगा।
(ख) वह स्वस्थचित मनुष्य, जो ज्वर से चित्तविपर्यस्त है या जो इतना मत्त है कि वह संविदा के निबन्धनों को नहीं समझ सकता या अपने हितों पर उसके प्रभाव के बारे में युक्तिसंगत निर्णय नहीं ले सकता तब तक संविदा नहीं कर सकता जब तक ऐसी चित्तविपर्यस्तता या मत्तता बनी रहे।

Indian Contract Act Section-12 (IC Act Section-12 in English)

What is a sound mind for the purposes of contracting-

A person is said to be of sound mind for the purpose of making a contract, if, at the time when he makes it, he is capable of understanding it and of forming a rational judgment as to its effect upon his interests.
A person who is usually of unsound mind, but occasionally of sound mind, may make a contract when he is of sound mind.
A person who is usually of sound mind, but occasionally of unsound mind, may not make a contract when he is of unsound mind.
Illustrations
(a) A patient in a lunatic asylum, who is, at intervals, of sound mind, may contract during those intervals.
(b) A sane man, who is delirious from fever, or who is so drunk that he cannot understand the terms of a contract, or form a rational judgment as to its effect on his interests, cannot contract whilst such delirium or drunkenness lasts.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 12 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 11 | Indian Contract Act Section 11

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-11) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 11 के अनुसार हर ऐसा व्यक्ति संविदा करने के लिए सक्षम है जो उस विधि के अनुसार, जिसके वह अध्यधीन है, प्राप्तवय हो, और जो स्वस्थचित्त हो, और किसी विधि द्वारा जिसके वह अध्यधीन है, संविदा करने से निर्हित न हो, जिसे IC Act Section-11 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 11 (Indian Contract Act Section-11) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 11 IC Act Section-11 के अनुसार हर ऐसा व्यक्ति संविदा करने के लिए सक्षम है जो उस विधि के अनुसार, जिसके वह अध्यधीन है, प्राप्तवय हो, और जो स्वस्थचित्त हो, और किसी विधि द्वारा जिसके वह अध्यधीन है, संविदा करने से निर्हित न हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 11 (IC Act Section-11 in Hindi)

संविदा करने के लिए कौन सक्षम है-

हर ऐसा व्यक्ति संविदा करने के लिए सक्षम है जो उस विधि के अनुसार, जिसके वह अध्यधीन है, प्राप्तवय हो, और जो स्वस्थचित्त हो, और किसी विधि द्वारा जिसके वह अध्यधीन है, संविदा करने से निर्हित न हो।

Indian Contract Act Section-11 (IC Act Section-11 in English)

Who are competent to contract-

Every person is competent to contract who is of the age of majority according to the law to which he is subject, and who is of sound mind and is not disqualified from contracting by any law to which he is subject.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 11 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 10 | Indian Contract Act Section 10

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-10) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 10 के अनुसार सब करार संविदाएँ हैं, यदि वे संविदा करने के लिए सक्षम पक्षकारों की स्वतन्त्र सम्मति से किसी विधिपूर्ण प्रतिफल के लिए और किसी विधिपूर्ण उद्देश्य से किए गए हैं और एतद्द्वारा अभिव्यक्तत: शून्य घोषित नहीं किए गए हैं, जिसे IC Act Section-10 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 10 (Indian Contract Act Section-10) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 10 IC Act Section-10 के अनुसार सब करार संविदाएँ हैं, यदि वे संविदा करने के लिए सक्षम पक्षकारों की स्वतन्त्र सम्मति से किसी विधिपूर्ण प्रतिफल के लिए और किसी विधिपूर्ण उद्देश्य से किए गए हैं और एतद्द्वारा अभिव्यक्तत: शून्य घोषित नहीं किए गए हैं।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 10 (IC Act Section-10 in Hindi)

कौन से करार संविदाएँ हैं-

सब करार संविदाएँ हैं, यदि वे संविदा करने के लिए सक्षम पक्षकारों की स्वतन्त्र सम्मति से किसी विधिपूर्ण प्रतिफल के लिए और किसी विधिपूर्ण उद्देश्य से किए गए हैं और एतद्द्वारा अभिव्यक्तत: शून्य घोषित नहीं किए गए हैं। 
इसमें अन्तर्विष्ट कोई भी बात भारत में प्रवृत्त और एतद्द्वारा अभिव्यक्तत: निरसित न की गई किसी ऐसी विधि पर, जिसके द्वारा किसी संविदा का लिखित रूप में या साक्षियों की उपस्थिति में किया जाना अपेक्षित हो, या किसी ऐसी विधि पर जो दस्तावेजों के रजिस्ट्रीकरण से सम्बन्धित हो, प्रभाव न डालेगी।

Indian Contract Act Section-10 (IC Act Section-10 in English)

What agreements are contracts-

All agreements are contracts if they are made by the free consent of parties competent to contract, for a lawful consideration and with a lawful object, and are not hereby expressly declared to be void. 
Nothing herein contained shall affect any law in force in India, and not hereby expressly repealed, by which any contract is required to be made in writing or in the presence of witnesses, or any law relating to the registration of documents.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 10 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 9 | Indian Contract Act Section 9

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-9) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 9 के अनुसार जहाँ तक कि किसी वचन की प्रस्थापना या उसका प्रतिग्रहण शब्दों में किया जाता है, वह वचन अभिव्यक्त कहलाता है। जहाँ तक कि ऐसी प्रस्थापना या प्रतिग्रहण शब्दों से अन्यथा किया जाता है, वह वचन विवक्षित कहलाता है, जिसे IC Act Section-9 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 9 (Indian Contract Act Section-9) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 9 IC Act Section-9 के अनुसार जहाँ तक कि किसी वचन की प्रस्थापना या उसका प्रतिग्रहण शब्दों में किया जाता है, वह वचन अभिव्यक्त कहलाता है। जहाँ तक कि ऐसी प्रस्थापना या प्रतिग्रहण शब्दों से अन्यथा किया जाता है, वह वचन विवक्षित कहलाता है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 9 (IC Act Section-9 in Hindi)

वचन, अभिव्यक्त और विवक्षित-

जहाँ तक कि किसी वचन की प्रस्थापना या उसका प्रतिग्रहण शब्दों में किया जाता है, वह वचन अभिव्यक्त कहलाता है। जहाँ तक कि ऐसी प्रस्थापना या प्रतिग्रहण शब्दों से अन्यथा किया जाता है, वह वचन विवक्षित कहलाता है।

Indian Contract Act Section-9 (IC Act Section-9 in English)

Promises, express and implied-

In so far as the proposal or acceptance of any promise is made in words, the promise is said to be express. In so far as such proposal or acceptance is made otherwise than in words, the promise is said to be implied.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 9 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 8 | Indian Contract Act Section 8

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-8) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 8 के अनुसार किसी प्रस्थापना की शर्तों का पालन, या व्यतिकारी वचन के लिए, जो प्रतिफल किसी प्रस्थापना के साथ पेश किया गया हो, उसका प्रतिग्रहण उस प्रस्थापना का प्रतिग्रहण है, जिसे IC Act Section-8 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 8 (Indian Contract Act Section-8) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 8 IC Act Section-8 के अनुसार किसी प्रस्थापना की शर्तों का पालन, या व्यतिकारी वचन के लिए, जो प्रतिफल किसी प्रस्थापना के साथ पेश किया गया हो, उसका प्रतिग्रहण उस प्रस्थापना का प्रतिग्रहण है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 8 (IC Act Section-8 in Hindi)

 शर्तों के पालन या प्रतिफल की प्राप्ति द्वारा प्रतिग्रहण-

किसी प्रस्थापना की शर्तों का पालन, या व्यतिकारी वचन के लिए, जो प्रतिफल किसी प्रस्थापना के साथ पेश किया गया हो, उसका प्रतिग्रहण उस प्रस्थापना का प्रतिग्रहण है।

Indian Contract Act Section-8 (IC Act Section-8 in English)

Acceptance by performing conditions, or receiving consideration-

Performance of the conditions of a proposal, or the acceptance of any consideration for a reciprocal promise which may be offered with a proposal, is an acceptance of the proposal.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 8 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 7 | Indian Contract Act Section 7

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-7) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 7 के अनुसार किसी प्रायिक और युक्तियुक्त प्रकार से अभिव्यक्त होना ही चाहिए, जब तक कि प्रस्थापना विहित न करती हो कि उसे किस प्रकार प्रतिगृहीत किया जाना है। यदि प्रस्थापना विहित करती हो कि उसे किस प्रकार प्रतिगृहीत किया जाना है और प्रतिग्रहण उस प्रकार से न किया जाए, तो प्रस्थापक, उसे प्रतिग्रहण संसूचित किए जाने के पश्चात् युक्तियुक्त समय के भीतर आग्रह कर सकेगा, जिसे IC Act Section-7 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 7 (Indian Contract Act Section-7) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 7 IC Act Section-7 के अनुसार किसी प्रायिक और युक्तियुक्त प्रकार से अभिव्यक्त होना ही चाहिए, जब तक कि प्रस्थापना विहित न करती हो कि उसे किस प्रकार प्रतिगृहीत किया जाना है। यदि प्रस्थापना विहित करती हो कि उसे किस प्रकार प्रतिगृहीत किया जाना है और प्रतिग्रहण उस प्रकार से न किया जाए, तो प्रस्थापक, उसे प्रतिग्रहण संसूचित किए जाने के पश्चात् युक्तियुक्त समय के भीतर आग्रह कर सकेगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 7 (IC Act Section-7 in Hindi)

प्रतिग्रहण आत्यन्तिक होना ही चाहिए-

 प्रस्थापना को वचन में संपरिवर्तित करने के लिए प्रतिग्रहण
(1) आत्यन्तिक और अविशेषित होना ही चाहिए:
(2) किसी प्रायिक और युक्तियुक्त प्रकार से अभिव्यक्त होना ही चाहिए, जब तक कि प्रस्थापना विहित न करती हो कि उसे किस प्रकार प्रतिगृहीत किया जाना है। यदि प्रस्थापना विहित करती हो कि उसे किस प्रकार प्रतिगृहीत किया जाना है और प्रतिग्रहण उस प्रकार से न किया जाए, तो प्रस्थापक, उसे प्रतिग्रहण संसूचित किए जाने के पश्चात् युक्तियुक्त समय के भीतर आग्रह कर सकेगा कि उसकी प्रस्थापना विहित प्रकार से ही प्रतिगृहीत की जाए, अन्यथा नहीं। किन्तु यदि वह ऐसा करने में असफल रहता है तो वह उस प्रतिग्रहण को प्रतिगृहीत करता है।

Indian Contract Act Section-7 (IC Act Section-7 in English)

Acceptance must be absolute-

In order to convert a proposal into a promise, the acceptance must—
(1) be absolute and unqualified;
(2) be expressed in some usual and reasonable manner, unless the proposal prescribes the manner in which it is to be accepted. If the proposal prescribes a manner in which it is to be accepted, and the acceptance is not made in such manner, the proposer may, within a reasonable time after the acceptance is communicated to him, insist that his proposal shall be accepted in the prescribed manner, and not otherwise; but if he fails to do so, he accepts the acceptance.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 7 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।