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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 213 | मोटर यान अधिकारियों की नियुक्ति | MV Act, Section- 213 in hindi | Appointment of motor vehicles officers.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 213 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 213, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 213 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -213 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। राज्य सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए एक मोटर यान विभाग स्थापित कर सकेगी तथा ऐसे व्यक्तियों को उसके अधिकारी नियुक्त कर सकेगी जिन्हें वह ठीक समझे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 213 के अनुसार

मोटर यान अधिकारियों की नियुक्ति-

(1) राज्य सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए एक मोटर यान विभाग स्थापित कर सकेगी तथा ऐसे व्यक्तियों को उसके अधिकारी नियुक्त कर सकेगी जिन्हें वह ठीक समझे ।
(2) ऐसा प्रत्येक अधिकारी भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा।
(3) राज्य सरकार, मोटर यान विभाग के अधिकारियों द्वारा उनके कृत्यों का निर्वहन विनियमित करने के लिए तथा विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उन वर्दियों को जो उन्हें पहननी है, उन प्राधिकारियों को, जिनके अधीनस्थ वे रहेंगे, उन कर्तव्यों को, जिनका उन्हें पालन करना है, उन शक्तियों को (जिनके अंतर्गत इस अधिनियम के अधीन पुलिस अधिकारियों द्वारा प्रयोक्तव्य शक्तियां भी हैं) जिनका उन्हें प्रयोग करना है तथा उन शर्तों को, जो ऐसी शक्तियों के प्रयोग पर लागू होनी हैं, विहित करने के लिए नियम बना सकेगी।
(4) केन्द्रीय सरकार, अधिनियम के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा वे न्यूनतम अर्हताएं विहित कर सकेगी जो इस रूप में नियुक्ति किए जाने के लिए उक्त अधिकारियों या उनमें से किसी वर्ग के अधिकारियों के पास होना चाहिए।
(5) उन शक्तियों के अतिरिक्त जो मोटर यान विभाग के किसी अधिकारी जो उपधारा (3) के अधीन प्रदान की जाए, ऐसे अधिकारी को जिसे राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त सशक्त किया जाए, यह शक्ति होगी कि वह-
(क) यह अभिनिश्चित करने की दृष्टि से कि इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों का अनुपालन किया जा रहा है या नहीं, ऐसी परीक्षा और जांच करे जो वह ठीक समझता है;
(ख) ऐसी सहायता सहित यदि कोई हो, जिसे वह ठीक समझता है, ऐसे किसी परिसर में प्रवेश करे, उसका निरीक्षण करे और उसकी सलाह ले जो ऐसे व्यक्ति के अधिभोगाधीन जिसकी बाबत उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि उसने इस अधिनियम के अधीन अपराध किया है अथवा जिसमें ऐसा कोई मोटर यान जिसकी बाबत ऐसा अपराध किया है, रखा हुआ है:
परन्तु-
(i) वारंट के बिना ऐसी कोई तलाशी राजपत्रित अधिकारी की पंक्ति के अधिकारी द्वारा ही की जाएगी;
(ii) जहां कोई अपराध केवल जुर्माने से दंडनीय है वहां तलाशी सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय के पूर्व नहीं की जाएगी;
(iii) जहां तलाशी बिना वारंट के की जाती है, वहां संबंधित राजपत्रित अधिकारी वारंट अभिप्राप्त न करने के आधार को लेखबद्ध करेगा और अपने ठीक ऊपर के वरिष्ठ अधिकारी को रिपोर्ट करेगा कि ऐसी तलाशी ली गई है।
(ग) किसी व्यक्ति की परीक्षा करे और ऐसा कोई रजिस्टर या अन्य दस्तावेज, जो इस अधिनियम के अनुसरण में रखा जाता या रखी जाती है, पेश करने की अपेक्षा करे और मौके पर या अन्यथा, किसी व्यक्ति के कथन ले जो वह इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक समझे;
(घ) ऐसे किन्हीं रजिस्टरों या दस्तावेजों को अभिगृहीत करे या उनके भागों की प्रतिलिपियां ले जिन्हें वह इस अधिनियम के अधीन उस अपराध की बाबत सुसंगत समझे जिसके किए जाने का विश्वास करने का उसके पास कारण है;
(ङ) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध की बाबत अभियोजन प्रारंभ करे और किसी न्यायालय के समक्ष अपराधी की हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए बंध-पत्र ले;
(च) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करे जो विहित की जाएं :
परन्तु इस उपधारा के अधीन किसी भी व्यक्ति को ऐसे किसी प्रश्न का उत्तर देने या ऐसा कोई कथन करने के लिए विवश नहीं किया जाएगा जिसकी प्रवृत्ति उसको ही अपराध में फंसाने की हो।
(6) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंध इस धारा के अधीन किसी तलाशी या अभिग्रहण के संबंध में यावत्शक्य ऐसे लागू होंगे जैसे वे उस संहिता की धारा 94 के अधीन

Appointment of motor vehicles officers-
(1) The State Government may, for the purpose of carrying into effect the provision of this Act, establish a Motor Vehicles Department and appoint as officers thereof such persons as it thinks fit.
(2) Every such officer shall be deemed to be a public servant within the meaning of the Indian Penal Code (45 of 1860).
(3) The State Government may make rules to regulate the discharge by officers of the Motor Vehicles Department of their functions and in particular and without prejudice to the generality of the foregoing power to prescribe the uniform to be worn by them, the authorities to which they shall be subordinate, the duties to be performed by them, the powers (including the powers exercisable by police officers under this Act) to be exercised by them, and the conditions governing the exercise of such powers.
(4) The Central Government may, having regard to the objects of the Act, by notification in the Official Gazette prescribe the minimum qualifications which the said officers or any class thereof shall possess for being appointed as such.
(5) In addition to the powers that may be conferred on any officer of the Motor Vehicles Department under sub-section (3), such officer as may be empowered by the State Government in this behalf shall also have the power to-
(a) make such examination and inquiry as he thinks fit in order to ascertain whether the provisions of this Act and the rules made thereunder are being observed;
(b) with such assistance, if any, as he thinks fit, enter, inspect and search any premises which is in the occupation of a person who, he has reason to believe, has committed an offence under this Act or in which a motor vehicle in respect of which such offence has been committed is kept :
Provided that,-
(i) any such search without a warrant shall be made only by an officer of the rank of a gazetted officer;
(ii) where the offence is punishable with fine only the search shall not be made after sunset and before sunrise;
(iii) where the search is made without a warrant, the gazetted officer concerned shall record in writing the grounds for not obtaining a warrant and report to his immediate superior that such search has been made;
(c) examine any person and require the production of any register or other document maintained in pursuance of this Act, and take on the spot or otherwise statements of any person which he may consider necessary for carrying out the purposes of this Act;
(d) seize or take copies of any registers or documents or portions thereof as he may consider relevant in respect of an offence under this Act which he has reason to believe has been committed;
(e) launch prosecutions in respect of any offence under this Act and to take a bond for ensuring the attendance of the offender before any court;
(f) exercise such other powers as may be prescribed :
Provided that no person shall be compelled under this sub-section to answer any question or make any statement tending to incriminate himself.
(6) The provisions of the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974) shall, so far as may be apply to any search or seizure under this section as they apply to any search or seizure under the authority of any warrant issued under section 94 of that Code.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 213 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 212 | नियमों और अधिसूचनाओं का प्रकाशन, प्रारंभ और रखा जाना | MV Act, Section- 212 in hindi | Publication, commencement and laying of rules and notifications.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 212 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 212, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 212 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -212 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन नियम बनाने की शक्ति इस शर्त के अधीन है कि नियम पूर्व प्रकाशन के पश्चात् बनाए जाएंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 212 के अनुसार

नियमों और अधिसूचनाओं का प्रकाशन, प्रारंभ और रखा जाना-

(1) इस अधिनियम के अधीन नियम बनाने की शक्ति इस शर्त के अधीन है कि नियम पूर्व प्रकाशन के पश्चात् बनाए जाएंगे।
(2) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए सभी नियम राजपत्र में प्रकाशित किए जाएंगे और जब तक कि कोई पश्चात्वर्ती तारीख नियत न की गई हो, ऐसे प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त हो जाएंगे।
(3) किसी राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात यथासंभव शीघ्र राज्य विधान-मण्डल के समक्ष रखा जाएगा।
(4) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, धारा 75 की उपधारा (1) और धारा 163 की उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाई गई प्रत्येक स्कीम और धारा 41 की उपधारा (4), धारा 58 की उपधारा (1), धारा 59 की उपधारा (1), धारा 112 की उपधारा (1) के परन्तुक [धारा 178 ] [धारा 163क की उपधारा (4)] [धारा 164, धारा 177क] और धारा 213 की उपधारा (4) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा निकाली गई प्रत्येक अधिसूचना बनाए जाने या निकाली जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम, स्कीम, या अधिसूचना में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा या होगी । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए या वह स्कीम नहीं बनाई जानी चाहिए या वह अधिसूचना नहीं निकाली जानी चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा या हो जाएगी। किन्तु नियम, स्कीम या अधिसूचना के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
(5) धारा 210क के अधीन राज्य सरकार द्वारा जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष इसके बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र रखी जाएगी जहां यह राज्य विधानमंडल दो सदनों से मिलकर बना है या जहां ऐसा विधानमंडल एक सदन से मिलकर बना है वहां उस सदन के समक्ष जब वह सत्र में हो तीस दिन की कुल अवधि के लिए, रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व यथास्थिति सदन या दोनों सदन उस अधिसूचना में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो वह अधिसूचना का तत्पश्चात यथास्थिति ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभाव होगा या प्रभावहीन हो जाएगी, यथास्थिति ऐसा उपांतरण या बातिलीकरण इस अधिसूचना के अधीन पूर्व में की गई किसी बात की विधिमान्यता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।

Publication, commencement and laying of rules and notifications-
(1) The power to make rules under this Act is subject to the condition of the rules being made after previous publication.
(2) All rules made under this Act shall be published in the Official Gazette, and shall unless some later date is appointed, come into force on the date of such publication.
(3) Every rule made by any State Government shall be laid, as soon as may be after it is made before the State Legislature.
(4) Every rule made by the Central Government under this Act, every scheme made by the Central Government under sub-section (1) of section 75 and sub-section (1) of section 163 and every notification issued by the Central Government under sub-section (4) of section 41, sub-section (1) of section 58, sub-section (1) of section 59, the proviso to sub-section (1) of section 112 [section 118] [sub-section (4) of section 163A] [section 164, section 117A] and sub-section (4) of section 213 shall be laid, as soon as may be after it is made, before each House of Parliament while it is in session for a total period of thirty days which may be comprised in one session or in two or more successive sessions, and if, before the expiry of the session immediately following the session or the successive sessions aforesaid, both Houses agree in making any modification in the rule, scheme or notification or both Houses agree that the rule or scheme should not be made or the notification should not be issued, the rule, scheme or notification shall thereafter have effect only in such modified form or be of no effect, as the case may be; so, however, that any such modification or annulment shall be without prejudice to the validity of anything previously done under that rule, scheme or notification.
(5) Every notification issued by the State Government under section 210A shall be laid, as soon as may be after it is made, before each House of the State Legislature where it consists of two Houses, or where such Legislature consists of one House, before that House, while it is in session for a total period of thirty days which may be comprised in one session or in two or more successive sessions, and if, before the expiry of the session immediately following the session or the successive sessions aforesaid, the House agrees or both Houses agree, as the case may be, in making any modification in the notification or the House agrees or both Houses agree, as the case may be, that the notification should not be issued, the notification shall thereafter have effect only in such modified form or be of no effect as the case may be; so, however, that any such modification or annulment shall be without prejudice to the validity of anything previously done under that notification.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 212 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 211A | दस्तावेजों और प्ररूपों का इलैक्ट्रानिक उपयोग | MV Act, Section- 211A in hindi | Use of electronic forms and documents.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 211A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 211A, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 211A का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -211A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन वहां केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में किसी कार्यालय, प्राधिकारी निकाय या अधिकरण के पास किसी भी रूप में आवेदन या कोई अन्य दस्तावेज ऐसी रीति में फाइल किया जाना।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 211A के अनुसार

दस्तावेजों और प्ररूपों का इलैक्ट्रानिक उपयोग-

(1) जहां इस अधिनियम के या तद्धीन बनाए गए नियमों और विनियमों का कोई उपबंध निम्नलिखित के लिए उपबंध करता है,-
(क) वहां केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में किसी कार्यालय, प्राधिकारी निकाय या अधिकरण के पास किसी भी रूप में आवेदन या कोई अन्य दस्तावेज ऐसी रीति में फाइल किया जाना;
(ख) किसी अनुज्ञप्ति, परमिट, मंजूरी, अनुमोदन या पृष्ठांकन चाहे वह किसी भी नाम से विशिष्ट रीति में ज्ञात हो; या
(ग) किसी विशिष्ट रीति में धन की प्राप्ति या उसका संदाय,
तब ऐसे परंतुक में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए, ऐसी अपेक्षा को तब पूरा किया गया समझा जाएगा जब यथास्थिति ऐसा फाइल किया जाना, जारी किया जाना, अनुदत्त करना, प्राप्ति या संदाय ऐसे इलैक्ट्रानिक प्ररूप, जो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए, के माध्यम से किया जाता है।
(2) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार उपधारा (1) के प्रयोजन के लिए,-
(क) ऐसी रीति या रूप विधान, जिसमें ऐसी इलैक्ट्रानिक प्ररूप या दस्तोवेज फाइल किए जाएंगे, सृजित किए जाएंगे या जारी किए जाएंगे; और
(ख) खंड (क) के अधीन किसी इलैक्ट्रानिक दस्तावेज के फाइल करने, सृजित करने या जारी करने के लिए किसी फीस या प्रभारों के संदाय की रीति या पद्धति।

Use of electronic forms and documents-
(1) Where any provision of this Act or the rules and regulations made thereunder provide for-
(a) the filing of any form, application or any other document with any office, authority, body or agency owned or controlled by the Central Government or the State Government in a particular manner;
(b) the issue or grant of any licence, permit, sanction, approval or endorsement, by whatever name called in a particular manner; or
(c) the receipt or payment of money in a particular manner, then notwithstanding anything contained in such provision, such requirement shall be deemed to have been satisfied if such filing, issue, grant, receipt or payment, as the case may be, is effected by means of such electronic form as may be prescribed by the Central Government or the State Government, as the case may be.
(2) The Central Government or the State Government shall, for the purpose of sub-section (1), prescribe,-
(a) the manner and format in which such electronic forms and documents shall be filed, created or issued; and
(b) the manner or method of payment of any fee or charges for filing, creation or issue of any electronic document under clause (a).

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 211A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 211 | फीस उद्गृहीत करने की शक्ति | MV Act, Section- 211 in hindi | Power to levy fee.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 211 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 211, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 211 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -211 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार इस अधिनियम के अधीन बनाने के लिए सशक्त है, आवेदनों, दस्तावेजों के संशोधन, प्रमाणपत्र, अनुज्ञप्ति, परमिट दिए जाने, परीक्षणों, पृष्ठांकन, बैजों, प्लेटों, प्रतिहस्ताक्षरों, प्राधिकरण, आंकड़ों अथवा दस्तावेजों या आदेशों की प्रतियां दिए जाने के संबंध में तथा ऐसे किसी अन्य प्रयोजन या बात के लिए, जिसके लिए अधिकारियों या प्राधिकारियों द्वारा इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन कोई सेवाएं की जानी है, ऐसी फीसों के, जो आवश्यक समझी जाएं।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 211 के अनुसार

फीस उद्गृहीत करने की शक्ति-

ऐसे किसी नियम में, जिसे केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार इस अधिनियम के अधीन बनाने के लिए सशक्त है, आवेदनों, दस्तावेजों के संशोधन, प्रमाणपत्र, अनुज्ञप्ति, परमिट दिए जाने, परीक्षणों, पृष्ठांकन, बैजों, प्लेटों, प्रतिहस्ताक्षरों, प्राधिकरण, आंकड़ों अथवा दस्तावेजों या आदेशों की प्रतियां दिए जाने के संबंध में तथा ऐसे किसी अन्य प्रयोजन या बात के लिए, जिसके लिए अधिकारियों या प्राधिकारियों द्वारा इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन कोई सेवाएं की जानी है, ऐसी फीसों के, जो आवश्यक समझी जाएं, उद्ग्रहण के लिए उपबंध, इस आशय के किसी अभिव्यक्त उपबंध के न होते हुए भी, हो सकेगा:
परन्तु यदि सरकार, लोक हित में ऐसा करना आवश्यक समझे तो वह साधारण या विशेष आदेश द्वारा, व्यक्तियों के किसी वर्ग को कोई ऐसी फीस देने से या तो भागतः या पूर्णतः छूट दे सकेगी।

Power to levy fee-
Any rule which the Central Government or the State Government is empowered to make under this Act may, notwithstanding the absence of any express provision to that effect, provide for the levy of such fees in respect of applications, amendment of documents, issue of certificates, licences; permits, tests, endorsements, badges, plates, countersignatures, authorisation, supply of statistics or copies of documents or order and for any other purpose or matter involving the rendering of any service by the officers or authorities under this Act or any rule made thereunder as may be considered necessary :
Provided that the Government may, if it considers necessary so to do, in the public interest, by general or special order, exempt any class of persons from the payment of any such fee either in part or in full.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 211 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 210D | राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति | MV Act, Section- 210D in hindi | Power of State Government to make rules.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 210D के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 210D, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 210D का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -210D के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन राज्य सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों से भिन्न सड़कों के डिजाइन, संनिर्माण और अनुरक्षण के मानकों के लिए और ऐसे किसी अन्य विषय, जो राज्य सरकार द्वारा विहित किया गया है या किया जाए, के लिए नियम बना सकेगी।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 210D के अनुसार

राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति-

राज्य सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों से भिन्न सड़कों के डिजाइन, संनिर्माण और अनुरक्षण के मानकों के लिए और ऐसे किसी अन्य विषय, जो राज्य सरकार द्वारा विहित किया गया है या किया जाए, के लिए नियम बना सकेगी।

Power of State Government to make rules-
The State Government may make rules for design, construction and maintenance standards for roads other than national highways, and for any other matter which is, or may be, prescribed by the State Government.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 210D की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 210C | प्रवर्तनकारी प्राधिकरण द्वारा किए गए अपराध के लिए शास्ति | MV Act, Section- 210C in hindi | Penalty for offence committed by an enforcing authority.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 210C के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 210C, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 210C का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -210C के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन केन्द्रीय सरकार की नियम जैसे- राष्ट्रीय राजमार्गों के डिजाइन, संनिर्माण और अनुरक्षण के मानकों आदि बनाने की शक्ति होती है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 210C के अनुसार

केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-

केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित के लिए नियम बना सकेगी-
(क) राष्ट्रीय राजमार्गों के डिजाइन, संनिर्माण और अनुरक्षण के मानकों;
(ख) ऐसे अन्य कारकों, जिन पर न्यायालय द्वारा धारा 198क की उपधारा (3) के अधीन विचार किया जाए;
(ग) ऐसे किसी अन्य विषय, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किया गया है या किया जाए।

Power of Central Government to make rules-
The Central Government may make rules for-
(a) design, construction and maintenance standards for National highways;
(b) such other factors as may be taken into account by the Court under sub section (3) of section 198A;
(c) any other matter which is, or has to be, prescribed by the Central Government.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 210C की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।