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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 215D | राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति | MV Act, Section- 215D in hindi | Power of State Government to make rules.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 215D के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 215D, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 215D का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -215D के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। राज्य सरकार, इस अधिनियम के आधीन राज्य सरकार उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजनों के लिए नियम बना सकती है, जिन्हें वह आवश्यक समझे और उसका गठन ऐसे निबंधनों और शर्तों पर किया जा सकता है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 215D के अनुसार

राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति-

(1) राज्य सरकार धारा 215ख में, विनिर्दिष्ट विषयों से भिन्न, इस अध्याय के उपबंधों को क्रियान्वित करने के प्रयोजनों के लिए नियम बना सकेगी।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित के लिए उपबंध हो सकेगा-
(क) धारा 211क में यथा निर्दिष्ट दस्तावेजों को फाइल करने, अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा, मंजूरी, अनुमोदन, पृष्ठांकन और धन की प्राप्ति या संदाय के लिए इलैक्ट्रॉनिक प्ररूपों और साधनों का उपयोग;
(ख) मोटर यान विभाग के अधिकारियों के कर्तव्यों और कृत्य और उनका निवर्हन, ऐसे अधिकारी द्वारा प्रयोग की जाने वाली शक्तियां (इस अधिनियम के अधीन पुलिस अधिकारियों द्वारा प्रयोक्तव्य शक्तियां भी हैं) और ऐसी शक्तियों के प्रयोग को शासित करने वाली शर्ते, उनके द्वारा पहने जाने वाली वर्दी, धारा 213 की उपधारा (3) में यथा निर्दिष्ट वे प्राधिकारी, जिनके प्रति वे अधीनस्थ होंगे; और
(ग) ऐसी अन्य शक्तियां जो धारा 213 की उपधारा (5) में खंड (च) में यथा विनिर्दिष्ट मोटर यान विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रयोग की जा सकेंगी।
(घ) कोई ऐसा अन्य विषय, जो विहित किया जाना है, जिसके संबंध में राज्य सरकार द्वारा नियम बनाया जाना है।

Power of State Government to make rules-
(1) The State Government may make rules for the purposes of carrying into effect, the provisions of this Chapter, other than the matters specified in section 215C.
(2) Without prejudice to the generality of the foregoing power, such rules may provide for-
(a) the use of electronic forms and means for the filing of documents, issue or grant of licence, permit, sanction, approval or endorsements and the receipt or payment of money as referred to in section 211A;
(b) the duties and functions of the officers of the Motor Vehicle Department, the powers to be exercised by such officers (including the powers exercisable by police officers under this Act) and the conditions governing the exercise of such powers, the uniform to be worn by them, the authorities to which they shall be subordinate as referred to in sub-section (3) of section 213;
(c) such other powers as may be exercised by officers of the Motor Vehicles Department as referred to in clause (f) in sub-section (5) of section 213; and
(d) any other matter which is to be, or may be, prescribed, or in respect of which provision is to be made by rules by the State Government.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 215D की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 215C | केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति | MV Act, Section- 215C in hindi | Power of Central Government to make rules.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 215C के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 215C, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 215C का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -215C के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। राज्य सरकार, इस अधिनियम के आधीन केन्द्रीय सरकार उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजनों के लिए नियम बना सकती है, जिन्हें वह आवश्यक समझे और उसका गठन ऐसे निबंधनों और शर्तों पर किया जा सकता है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 215C के अनुसार

केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-

(1) केन्द्रीय सरकार इस अध्याय के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजनों के लिए नियम बना सकेगी।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियमों में निम्नलिखित के लिए उपबंध हो सकेगा-
(क) धारा 211क में यथा निर्दिष्ट दस्तावेजों को फाइल करने, अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा, मंजूरी, अनुमोदन, पृष्ठांकन और धन की प्राप्ति का संदाय के लिए इलैक्ट्रॉनिक प्ररूपों और साधनों का उपयोग;
(ख) न्यूनतम अर्हताएं जिन्हें मोटर यान विभाग के अधिकारी या उनका कोई वर्ग धारा 213 की उपधारा (4) में यथा निर्दिष्ट उस रूप में नियुक्ति के लिए रखने की अपेक्षा करेंगे;
(ग) धारा 215ख की उपधारा (1) के अधीन राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के निबंधन और शर्ते;
(घ) धारा 215ख की उपधारा (2) के अधीन राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के अन्य कृत्य;
(ङ) कोई ऐसा अन्य विषय, जो विहित किया जाना है या विहित किया जाए जिसके संबंध में केन्द्रीय सरकार द्वारा नियमों द्वारा उपबंध किया जाना है।

Power of Central Government to make rules-
(1) The Central Government may make rules for the purposes of carrying into effect the provisions of this Chapter.
(2) Without prejudice to the generality of the foregoing power, such rules may provide for-
(a) the use of electronic forms and means for the filing of documents, issue or grant of licence, permit, sanction, approval or endorsements and the receipt or payment of money as referred to in section 211A;
(b) the minimum qualifications which the Motor Vehicles Department officers or any class thereof shall be required to possess for appointment as such, as referred to in sub-section (4) of section 213;
(c) the terms and conditions of appointment of Chairman and Members of the National Road Safety Board under sub-section (1) of section 215B;
(d) the other functions of the National Road Safety Board under sub-section (2) of section 215B;
(e) and any other matter which is to be, or may be, prescribed, or in respect of which provision is to be made by rules by the Central Government.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 215C की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 215B | राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड | MV Act, Section- 215B in hindi | National Road Safety Baord.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 215B के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 215B, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 215B का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -215B के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। राज्य सरकार, इस अधिनियम के आधीन केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा एक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का गठन करेगी, जो एक अध्यक्ष, राज्य सरकारों से उतनी संख्या में प्रतिनिधियों और ऐसे अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा, जिन्हें वह आवश्यक समझे और उसका गठन ऐसे निबंधनों और शर्तों पर किया जाता है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 215B के अनुसार

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड-

(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा एक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का गठन करेगी, जो एक अध्यक्ष, राज्य सरकारों से उतनी संख्या में प्रतिनिधियों और ऐसे अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा, जिन्हें वह आवश्यक समझे और उसका गठन ऐसे निबंधनों और शर्तों पर किया जाएगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएं।
(2) राष्ट्रीय बोर्ड, सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंध से संबंधित सभी पहलुओं पर, यथास्थिति केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को सलाह देगा, जिसके अंतर्गत निम्नलिखित है, किंतु यह उन तक ही सीमित नहीं होगी,-
(क) मोटर यानों और सुरक्षा उपस्कर के डिजाइन, वजन, संनिर्माण, विनिर्माण प्रक्रिया, प्रचालन और अनुरक्षण के मानक;
(ख) मोटर यानों का रजिस्ट्रीकरण और अनुज्ञापन;
(ग) सड़क सुरक्षा, सड़क अवसंरचना और यातायात के नियंत्रण के लिए मानकों की विरचना;
(घ) सड़क परिवहन पारिस्थितिकी प्रणाली के सुरक्षित और संधारणीय उपयोग को सुकर बनाना;
(ङ) नई यान प्रौद्योगिकी का सवर्धन;
(च) असुरक्षित सड़क उपयोक्ताओं की सुरक्षा;
(छ) चालकों और अन्य सड़क उपयोक्ताओं को शिक्षित करने और संवेदनशील बनाने के लिए कार्यक्रम; और
(ज) ऐसे अन्य कृत्य, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर विहित किए जाएं।

National Road Safety Baord-
(1) The Central Government shall, by notification in the Official Gazette, constitute a National Road Safety Board consisting of a Chairman, such number of representatives from the State Governments, and such other members as it may consider necessary and on such terms and conditions as may be prescribed by the Central Government.
(2) The National Board shall render advice to the Central Government or State Government, as the case may be, on all aspects pertaining to road safety and traffic management including, but not limited to, —
(a) the standards of design, weight, construction, manufacturing process, les operation and maintenance of motor vehicles and of safety equipment;
(b) the registration and licensing of motor vehicles;
(c) the formulation of standards for road safety, road infrastructure and control the of traffic;
(d) the facilitation of safe and sustainable utilisation of road transport ecosystem;
(e) the promotion of new vehicle technology;
(f) the safety of vulnerable road users;
(g) programmes for educating and sensitising drivers and other road users; and
(h) such other functions as may be prescribed by the Central Government from time to time.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 215B की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 215A | सड़क सुरक्षा परिषदें और समितियां | MV Act, Section- 215A in hindi | Road Safety Councils and Committees.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 215A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 215A, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 215A का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -215A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। राज्य सरकार, इस अधिनियम के आधीन केन्द्रीय सरकार को ऐसी किसी शक्ति या कृत्यों को प्रत्यायोजित करने की शक्ति होगी जो किसी लोक सेवक या लोक प्राधिकारी को प्रदत्त किए गए हैं और इस अधिनियम के अधीन अपनी किन्हीं शक्तियों, कृत्यों तथा कर्तव्यों के निर्वहन के लिए लोक सेवक या लोक प्राधिकारी को प्राधिकृत करने की शक्ति होगी।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 215A के अनुसार

केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकार द्वारा शक्तियों के प्रत्यायोजित किए जाने की शक्ति-

इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी,-
(क) केन्द्रीय सरकार को ऐसी किसी शक्ति या कृत्यों को प्रत्यायोजित करने की शक्ति होगी जो किसी लोक सेवक या लोक प्राधिकारी को प्रदत्त किए गए हैं और इस अधिनियम के अधीन अपनी किन्हीं शक्तियों, कृत्यों तथा कर्तव्यों के निर्वहन के लिए लोक सेवक या लोक प्राधिकारी को प्राधिकृत करने की शक्ति होगी ।
(ख) राज्य सरकार को ऐसी किसी शक्ति या कृत्यों को प्रत्यायोजित करने की शक्ति होगी जो इस अधिनियम द्वारा किसी लोक सेवक या लोक प्राधिकारी को प्रदत्त किए गए हैं और इस अधिनियम के अधीन अपनी किन्हीं शक्तियों, कृत्यों तथा कर्तव्यों के निर्वहन के लिए लोक सेवक या लोक प्राधिकारी को प्राधिकृत करने की शक्ति होगी।

Power of Central government and State Government to delegate-
Notwithstanding anything contained in this Act,-
(a) the Central Government shall have the power to delegate any power or functions that have been conferred upon it by the Act to any public servant or public authority and authorise such public servant or public authority to discharge any of its powers, functions and duties under this Act;
(b) the State Government shall have the power to delegate any power or functions that have been conferred upon it by the Act to any public servant or public authority and authorise such public servant or public authority to discharge any of its powers, functions and duties under this Act.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 215A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 215 | सड़क सुरक्षा परिषदें और समितियां | MV Act, Section- 215 in hindi | Road Safety Councils and Committees.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 215 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 215, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 215 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -215 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। राज्य सरकार, इस अधिनियम के आधीन केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, देश के लिए एक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद गठित कर सकेगी जिसमें एक अध्यक्ष और उतने अन्य सदस्य होंगे जितने वह सरकार आवश्यक समझती है और वे ऐसे निबंधनों और शर्तों पर नियुक्त किए जाएंगे जो वह सरकार अवधारित करे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 215 के अनुसार

सड़क सुरक्षा परिषदें और समितियां-

(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, देश के लिए एक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद गठित कर सकेगी जिसमें एक अध्यक्ष और उतने अन्य सदस्य होंगे जितने वह सरकार आवश्यक समझती है और वे ऐसे निबंधनों और शर्तों पर नियुक्त किए जाएंगे जो वह सरकार अवधारित करे।
(2) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, राज्य के लिए एक राज्य सड़क सुरक्षा परिषद गठित कर सकेगी जिसमें एक अध्यक्ष और उतने अन्य सदस्य होंगे जितने वह सरकार आवश्यक समझती है और वे ऐसे निबंधनों और शर्तों पर नियुक्त किए जाएंगे जो वह सरकार अवधारित करे ।
(3) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, राज्य में प्रत्येक जिले के लिए एक जिला सड़क सुरक्षा समिति गठित कर सकेगी जिसमें एक अध्यक्ष और उतने अन्य सदस्य होंगे जितने वह सरकार आवश्यक समझती है और वे ऐसे निबंधनों और शर्तों पर नियुक्त किए जाएंगे जो वह सरकार अवधारित करे।
(4) इस धारा में निर्दिष्ट परिषदें और समितियां सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों से संबंधित ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेंगी जो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार, अधिनियम के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए, विनिर्दिष्ट करे।

Road Safety Councils and Committees-
(1) The Central Government may, by notification in the Official Gazette, constitute for the country a National Road Safety Council consisting of a Chairman and such other members as that Government considers necessary and on such terms and conditions as that Government may determine.
(2) A State Government may, by notification in the Official Gazette, constitute for the State a State Road Safety Council consisting of a Chairman and such other members as that Government considers necessary and on such terms and conditions as that Government may determine.
(3) A State Government may, by notification in the Official Gazette, constitute District Road Safety Committee for each district in the State consisting of a Chairman and such other members as that Government considers necessary and on such terms and conditions as that Government may determine.
(4) The Councils and Committees referred to in this section shall discharge such functions relating to the road safety programmes as the Central Government or the State Government, as the case may be, may, having regard to the objects of the Act, specify.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 215 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 214 | आरंभिक प्राधिकारी द्वारा पारित आदेशों पर अपील और पुनरीक्षण का प्रभाव | MV Act, Section- 214 in hindi | Effect of appeal and revision on orders passed by original authority.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 214 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 214, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 214 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -214 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। राज्य सरकार, इस अधिनियम के आधीन आरंभिक प्राधिकारी द्वारा पारित किसी आदेश के विरुद्ध अपील की गई है या पुनरीक्षण का आवेदन किया गया है, वहां ऐसी अपील या पुनरीक्षण का आवेदन ऐसे प्र न होगा जिससे वह आदेश रुक जाए जिसे आरंभिक प्राधिकारी ने पारित किया था और ऐसा आदेश, यथास्थिति, उस अपील या पुनरीक्षण के आवेदन का निपटारा लंबित रहने तक प्रवृत्त बना रहेगा, जब तक कि विहित अपील प्राधिकारी या पुनरीक्षण प्राधिकारी अन्यथा निदेश न दे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 214 के अनुसार

आरंभिक प्राधिकारी द्वारा पारित आदेशों पर अपील और पुनरीक्षण का प्रभाव-

(1) जहां इस अधिनियम के अधीन आरंभिक प्राधिकारी द्वारा पारित किसी आदेश के विरुद्ध अपील की गई है या पुनरीक्षण का आवेदन किया गया है, वहां ऐसी अपील या पुनरीक्षण का आवेदन ऐसे प्र न होगा जिससे वह आदेश रुक जाए जिसे आरंभिक प्राधिकारी ने पारित किया था और ऐसा आदेश, यथास्थिति, उस अपील या पुनरीक्षण के आवेदन का निपटारा लंबित रहने तक प्रवृत्त बना रहेगा, जब तक कि विहित अपील प्राधिकारी या पुनरीक्षण प्राधिकारी अन्यथा निदेश न दे।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, यदि परमिट के नवीकरण के लिए किसी व्यक्ति द्वारा किया गया आवेदन आरंभिक प्राधिकारी द्वारा नामंजूर कर दिया गया है और ऐसे व्यक्ति ने ऐसी नामंजूरी के विरुद्ध इस अधिनियम में के अधीन अपील की है या पुनरीक्षण का आवेदन किया है तो, यथास्थिति, अपील प्राधिकारी या पुनरीक्षण प्राधिकारी आदेश द्वारा यह निदेश दे सकेगा कि वह परमिट उसमें विनिर्दिष्ट अवधि के समाप्त हो जाने पर भी तब तक के लिए विधिमान्य बना रहेगा जब तक अपील या पुनरीक्षण के आवेदन का निपटारा नहीं हो जाता है।
(3) सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस अधिनियम के अधीन दिया गया कोई भी आदेश, कार्यवाहियों में किसी गलती, लोप या अनियमितता के कारण अपील या पुनरीक्षण में केवल तभी उल्टा जाएगा या परिवर्तित किया जाएगा जब, यथास्थिति, विहित अपील प्राधिकारी या पुनरीक्षण प्राधिकारी को यह प्रतीत हो कि ऐसी गलती, लोप या अनियमितता से वास्तव में न्याय नहीं हो पाया है, अन्यथा नहीं।

Effect of appeal and revision on orders passed by original authority-
(1) Where an appeal has been preferred or an application for revision has been made against any order passed by an original authority under this Act, the appeal or the application for revision shall not operate as a stay of the order passed by the original authority and such order shall remain in force pending the disposal of the appeal or the application for revision, as the case may be, unless the prescribed appellate authority or revisional authority otherwise directs.
(2) Notwithstanding anything contained in sub-section (1), if an application made by a person for the renewal of permit has been rejected by the original authority and such person has preferred an appeal or made an application for revision under this Act against such rejection, the appellate authority or, as the case may be, the revisional authority may by order direct that the permit shall, notwithstanding the expiration of the term specified therein, continue to be valid until the appeal or application for revision is disposed of.
(3) No order made by a competent authority under this Act shall be reversed or altered on appeal or revision on account of any error, omission or irregularity in the proceedings, unless it appears to the prescribed appellate authority or revisional authority, as the case may be, that such error, omission or irregularity has in fact, occasioned a failure of justice.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 214 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।