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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 186 | मोटर यान चलाने के लिए मानसिक या शारीरिक रूप से अयोग्य होते हुए यान चलाना | MV Act, Section- 186 in hindi | Driving when mentally or physically unfit to drive.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 186 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 186, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 186 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -186 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन जो कोई किसी सार्वजनिक स्थान में उस समय मोटर यान चलाएगा जब उसे इस बात का ज्ञान है कि वह किसी ऐसे रोग या निःशक्तता से ग्रस्त है जिसके परिणामस्वरूप यान का उसके द्वारा चलाया जाना साधारण जनता के लिए खतरे का कारण हो सकता है, वह प्रथम अपराध के लिए जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 186 के अनुसार

मोटर यान चलाने के लिए मानसिक या शारीरिक रूप से अयोग्य होते हुए यान चलाना-

जो कोई किसी सार्वजनिक स्थान में उस समय मोटर यान चलाएगा जब उसे इस बात का ज्ञान है कि वह किसी ऐसे रोग या निःशक्तता से ग्रस्त है जिसके परिणामस्वरूप यान का उसके द्वारा चलाया जाना साधारण जनता के लिए खतरे का कारण हो सकता है, वह प्रथम अपराध के लिए जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा।

Driving when mentally or physically unfit to drive-
Whoever drives a motor vehicle in any public place when he is to his knowledge suffering from any disease or disability calculated to cause his driving of the vehicle to be a source of danger to the public, shall be punishable for the first offence with fine which may extend to one thousnad rupees and for a second or subsequent offence with fine which may extend to two thousnad rupees.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 186 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 | किसी मत्त व्यक्ति द्वारा या मादक द्रव्यों के असर में होते हुए किसी व्यक्ति द्वारा मोटर यान चलाया जाना | MV Act, Section- 185 in hindi | Driving by a drunken person or by a person under the influence of drugs.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 185, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 185 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -185 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन जो कोई मोटर यान को चलाते समय या चलाने का प्रयत्न करते समय जिस किसी के रक्त में किसी श्वास विश्लेषक [या किसी अन्य परीक्षण जिसके अंतर्गत प्रयोगशाला परीक्षण भी है], द्वारा परीक्षण किए जाने पर रक्त के प्रति 100 मिली लीटर में 30 मिली ग्राम से अधिक एल्कोहल पाया जाता है, तो वह इस अपराध के लिए कारावास से दंण्डित किया जायेगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 185 के अनुसार

किसी मत्त व्यक्ति द्वारा या मादक द्रव्यों के असर में होते हुए किसी व्यक्ति द्वारा मोटर यान चलाया जाना-

मोटर यान को चलाते समय या चलाने का प्रयत्न करते समय-
(क) जिस किसी के रक्त में किसी श्वास विश्लेषक [या किसी अन्य परीक्षण जिसके अंतर्गत प्रयोगशाला परीक्षण भी है], द्वारा परीक्षण किए जाने पर रक्त के प्रति 100 मिली लीटर में 30 मिली ग्राम से अधिक एल्कोहल पाया जाता है, या
(ख) जो कोई मादक द्रव्य के असर में इस सीमा तक है कि वह मोटर यान पर समुचित नियंत्रण रखने में असमर्थ है,
वह प्रथम अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या [दस हजार रुपए के जुर्माने से, अथवा दोनों से तथा पश्चात्वर्ती अपराध के लिए [***], कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या [पन्द्रह हजार रुपए] के जुर्माने से, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “मादक द्रव्य” पद से “अल्कोहल, प्राकृतिक या कृत्रिम से भिन्न कोई मद्य या कोई अन्य प्राकृतिक सामग्री या कोई लवण या ऐसे पदार्थ या सामग्री की निर्मिति अभिप्रेत है जो इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए और इसके अंतर्गत स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का 61) की धारा 2 के खंड (xiv) और खंड (xxiii) में यथा परिभाषित स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ भी हैं।

Driving by a drunken person or by a person under the influence of drugs-
Whoever, while driving, or attempting to drive, a motor vehicle-
(a) has, in his blood, alcohol exceeding 30 mg. per 100 ml. of blood to detected in a test by a breath analyser, [or in any other test including a laboratory test], or
(b) is under the influence of a drug to such an extent as to be incapable of exercising proper control over the vehicle,
shall be punishable for the first offence with imprisoninent for a term which may extend to six months, or with fine [of ten thousand rupees], or with both; and for a second or subsequent offence, [***], with imprisonment for a term which may extend to two years, or with fine [of fifteen thousand rupees], or with both.
Explanation- For the purposes of this section, the expression “drug“ means any intoxicant other than alcohol, natural or synthetic, or any natural material or any salt, or preparation of such substance or material as may be notified by the Central Government under this Act and includes a narcotic drug and psychotropic substance as defined in clause (xiv) and clause (xxiii) of section 2 of the Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 (61 of 1985).

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 185 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 | अत्यधिक गति आदि से चलाना | MV Act, Section- 184 in hindi | Driving at excessive speed, etc.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 184, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 184 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -184 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन जो कोई मोटर यान को ऐसी गति से या ऐसे तरीके से चलाएगा जो मामले की उन सब परिस्थितियों को, जिनके अन्तर्गत उस स्थान का स्वरूप, हालत और उपयोग भी है, जहां वह यान चलाया जा रहा है तथा उस स्थान में यातायात के परिमाण को जो वास्तव में उस समय है या जिसके होने की युक्तियुक्त रूप से प्रत्याशा की जा सकती है, ध्यान में रखते हुए साधारण जनता के लिए खतरनाक है [या जो यान के अधिभोगियों, अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं और सड़कों के निकट व्यक्तियों को चेतावनी या करस्थम का बोध कराता है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 184 के अनुसार

खतरनाक तरीके से मोटर यान चलाना-

जो कोई मोटर यान को ऐसी गति से या ऐसे तरीके से चलाएगा जो मामले की उन सब परिस्थितियों को, जिनके अन्तर्गत उस स्थान का स्वरूप, हालत और उपयोग भी है, जहां वह यान चलाया जा रहा है तथा उस स्थान में यातायात के परिमाण को जो वास्तव में उस समय है या जिसके होने की युक्तियुक्त रूप से प्रत्याशा की जा सकती है, ध्यान में रखते हुए साधारण जनता के लिए खतरनाक है [या जो यान के अधिभोगियों, अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं और सड़कों के निकट व्यक्तियों को चेतावनी या करस्थम का बोध कराता है], वह प्रथम अपराध पर कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी किंतु जो छह मास से कम की नहीं होगी या ऐसे जुर्माने से, जो एक हजार रुपए से कम नहीं होगा किन्तु पांच हजार रुपए तक हो सकेगा या दोनों से], और द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए उस दशा में, जिसमें कि वैसे ही पूर्ववर्ती अपराध के किए जाने के तीन वर्ष के अन्दर किया गया है, कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या दस हजार रुपए के जुर्माने से, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए :-
(क) लाल बत्ती को पार करना;
(ख) स्टॉप साइन का उल्लंघन करना;
(ग) गाड़ी चलाते समय हाथ में रखी संसूचना युक्तियों का प्रयोग;
(घ) विधि के विरुद्ध किसी रीति में अन्य यानों के पास से गुजरना या उनसे आगे निकलना;
(ङ) यातायात के प्राधिकृत प्रवाह के विरुद्ध चालन करना;
(च) किसी ऐसी रीति में गाड़ी चलाना, जो उससे बहुत कम है जिसकी किसी सक्षम और सावधान चालक से अपेक्षा की जाएगी और जहां किसी सक्षम और सावधान चालक को यह स्पष्ट होगा कि उस रीति में गाड़ी चलाना खतरनाक होगा, से ऐसी रीति में चलाना, जो पब्लिक के लिए खतरनाक हैं, अभिप्रेत होगा।

Driving dangerously-
Whoever drives a motor vehicle at a speed or in a manner which is dangerous to the public [or which causes a sense of alarm or distress to the occupants of the vehicle, other road users, and persons near roads], having regard to all the circumstances of the case including the nature, condition and use of the place where the vehicle is driven and the amount of traffic which actually is at the time or which might reasonably be expected to be in the place, shall be punishable for the first offence with imprisonment for a term [which may extend to one year but shall not be less than six months or with fine which shall not be less than one thousand rupees but may extend to five thousand rupees, or with both], and for any second or subsequent offence if committed within three years of the commission of a previous similar offence with imprisonment for a term which may extend to two years, or with fine [of ten thousand rupees], or with both.
Explanation- For the purpose of this section,-
(a) jumping a red light;
(b) violating a stop sign;
(c) use of handheld communications devices while driving;
(d) passing or overtaking other vehicles in a manner contrary to law;
(e) driving against the authorised flow of traffic; or
(f) driving in any manner that falls far below what would be expected of a competent and careful driver and where it would be obvious to a competent and careful driver that driving in that manner would be dangerous.
shall amount to driving in such manner which is dangerous to the public.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 184 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 183 | अत्यधिक गति आदि से चलाना | MV Act, Section- 183 in hindi | Driving at excessive speed, etc.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 183 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 183, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 183 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -183 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन जो कोई धारा 112 में निर्दिष्ट गति-सीमा का उल्लंघन करके मोटर यान चलाएगा [या किसी ऐसे व्यक्ति से, जो उसके द्वारा नियोजित है या उसके नियंत्रण के अधीन किसी व्यक्ति से उसे चलवाएगा], वह जुर्माने से, [निम्नलिखित रीति में दण्डनीय होगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 183 के अनुसार

अत्यधिक गति आदि से चलाना-

(1) जो कोई धारा 112 में निर्दिष्ट गति-सीमा का उल्लंघन करके मोटर यान चलाएगा [या किसी ऐसे व्यक्ति से, जो उसके द्वारा नियोजित है या उसके नियंत्रण के अधीन किसी व्यक्ति से उसे चलवाएगा], वह जुर्माने से, [निम्नलिखित रीति में दण्डनीय होगा, अर्थात्:-
(i) जहां कोई ऐसा मोटर यान हल्का मोटर यान है वहां ऐसे जुर्माने से, जो एक हजार रुपए से कम नहीं होगा किन्तु दो हजार रुपए तक हो सकेगा;
(ii) जहां ऐसा मोटर यान मध्यम माल यान या मध्यम यात्री यान या भारी माल यान कि या भारी यात्री यान है वहां ऐसे जुर्माने से, जो दो हजार रुपए से कम नहीं होगा किन्तु चार हजार रुपए तक का हो सकेगा; और
(iii) इस उपधारा के अधीन दूसरे या किसी पश्चातवर्ती अपराध के लिए ऐसे चालक की चालन अनुज्ञप्ति धारा 206 की उपधारा (4) के उपबंधों के अनुसार परिबद्ध कर ली जाएगी ।]
(2) [***]
(3) कोई व्यक्ति केवल एक साक्षी के इस आशय के साक्ष्य पर ही कि उस साक्षी की राय में ऐसा व्यक्ति ऐसी गति से यान को चला रहा था जो विधिविरुद्ध है, तब तक दोषसिद्ध नहीं किया जाएगा जब तक उस राय की बाबत यह दर्शित नहीं कर दिया जाता है कि वह किसी यांत्रिक [या इलेक्ट्रॉनिक] युक्ति के उपयोग से अभिप्राप्त प्राक्कलन पर आधारित है।
(4) ऐसी समय सारणी का प्रकाशन जिसके अधीन ऐसे किसी निदेश का दिया जाना जिसके अनुसार कोई यात्रा या यात्रा का भाग विनिर्दिष्ट समय के अन्दर पूरा कर लिया जाना है, उस दशा में, जिसमें न्यायालय की यह राय है कि मामले की परिस्थितियों में यह साक्ष्य नहीं है कि वह यात्रा या यात्रा का भाग धारा 122 में निर्दिष्ट गति-सीमा का उल्लंघन किए बिना विनिर्दिष्ट समय के अन्दर पूरा कर लिया जाए, इस बात का प्रथमदृष्टया साक्ष्य होगा कि जिस व्यक्ति ने वह समय सारणी प्रकाशित की है या वह निदेश दिया है उसने [उपधारा (1)] के अधीन दण्डनीय अपराध किया है।

Driving at excessive speed, etc-
(1) Whoever drives [or causes any person who is employed by him or subjects someone under his control to drive] a motor vehicle in contravention of the speed limits referred to in section 112 shall be punishable [in the following manner, namely:-
(i) where such motor vehicle is a light motor vehicle with fine which shall not be less than one thousand rupees but may extend to two thousand rupees;
(ii) where such motor vehicle is a medium goods vehicle or a mediurn passenger vehicle or a heavy goods vehicle or a heavy passenger vehicle with fine which shall not be less than two thousand rupees, but may extend to four thousand rupees; and
(iii) for the second or any subsequent offence under this sub-section the driving licence of such driver shall be impounded as per the provisions of the sub-section (4) of section 206.]
(2) [***]
(3) No person shall be convicted of any offence punishable under sub-section (1) solely on the evidence of one witness to the effect that in the opinion of the witness such person was driving at a speed which was unlawful, unless that opinion is shown to be based on an estimate obtained by the use of some mechanical [or electronic] device.
(4) The publication of a time table under which or the giving of any direction that, any journey or part of a journey is to be completed within a specified time shall, if in the opinion of the Court it is not practicable in the circumstances of the case for that journey or part of a journey to be completed in the specified time without contravening the speed limits referred to in section 112 be prima facie evidence that the person who published the time table or gave the direction has committed an offence punishable under [sub-section (1)].

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 183 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 182B | धारा 62क के उल्लंघन के लिए दंड | MV Act, Section- 182B in hindi | Punishment for contravention of section 62A.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 182B के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 182B, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 182B का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -182B के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन जो कोई धारा 62क के उपबंधों का उल्लंघन करता है ऐसे जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए से कम का नहीं होगा किंतु दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, से दंडनीय होगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 182B के अनुसार

धारा 62क के उल्लंघन के लिए दंड-

जो कोई धारा 62क के उपबंधों का उल्लंघन करता है ऐसे जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए से कम का नहीं होगा किंतु दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, से दंडनीय होगा।

Punishment for contravention of section 62A-
Whoever contravenes the provisions of section 62A, shall be punishable with fine which shall not be less than five thousand rupees, but may extend to ten thousand rupees.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 182B की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 182A | मोटर यानों और उनके संघटकों के संनिर्माण, रखरखाव, विक्रय और परिवर्तन से संबंधित अपराधों के लिए दंड | MV Act, Section- 182A in hindi | Punishment for offences relating to construction, maintenance, sale and alteration of motor vehicles and components.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 182A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 182A, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 182A का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -182A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन जो कोई मोटर यानों का विनिर्माता, आयातकर्ता या ब्यौहारी होने के कारण, मोटर यान का विक्रय करता है या परिदान करता है या उसका परिवर्तन करता है या विक्रय करने या परिदान करने या परिवर्तन करने की प्रस्थापना करता है जो अध्याय सात या उसके अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों के उपबंधों के उल्लंघन में है, ऐसी अवधि के कारावास से जो एक वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसे जुर्माने से जो ऐसे प्रत्येक मोटर यान के लिए एक लाख रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से दंडनीय होगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 182A के अनुसार

मोटर यानों और उनके संघटकों के संनिर्माण, रखरखाव, विक्रय और परिवर्तन से संबंधित अपराधों के लिए दंड-

(1) जो कोई मोटर यानों का विनिर्माता, आयातकर्ता या ब्यौहारी होने के कारण, मोटर यान का विक्रय करता है या परिदान करता है या उसका परिवर्तन करता है या विक्रय करने या परिदान करने या परिवर्तन करने की प्रस्थापना करता है जो अध्याय सात या उसके अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों के उपबंधों के उल्लंघन में है, ऐसी अवधि के कारावास से जो एक वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसे जुर्माने से जो ऐसे प्रत्येक मोटर यान के लिए एक लाख रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से दंडनीय होगा :
परंतु कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन सिद्धदोष नहीं ठहराया जाएगा यदि वह यह साबित कर देता है कि ऐसे मोटर यान के विक्रय या परिदान या परिवर्तन के समय उसने उस रीति, जिसमें ऐसा मोटर यान अध्याय 7 या उसके अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों के उपबंधों के उल्लंघन में था, के अन्य पक्षकारों को प्रकट किया था ।
(2) जो कोई, मोटर यान का विनिर्माता होते हुए, अध्याय 7 या उसके अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों का अनुपालन करने में असफल रहता है तो ऐसी अवधि के कारावास से जो एक वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसे जुर्माने से जो एक अरब रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से दंडनीय होगा।
(3) जो कोई, किसी मोटर यान के किसी संघटक का विक्रय करता है या विक्रय करने की प्रस्थापना करता है या उसके विक्रय को अनुज्ञात करता है, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा नाजुक सुरक्षा संघटक के रूप में अधिसचित किया है और जो अध्याय 7 या उसके अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों का अनुपालन नहीं करता है ऐसी अवधि के कारावास से जो एक वर्ष तक की हो सकेगी या ऐसे जुर्माने से जो ऐसे प्रत्येक संघटक के लिए एक लाख रुपए का हो सकेगा या दोनों से दंडनीय होगा।
(4) जो कोई मोटर यान का स्वामी होते हुए, मोटर यान, किसी मोटर यान, जिसके अंतर्गत, किसी ऐसी रीति में, मोटर यान के पुों का पश्च फिटिंग करने के माध्यम भी है, का परिवर्तन करता है जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए अधिनियमों या नियमों और विनियमों के अधीन अनुज्ञात नहीं है, ऐसी अवधि के कारावास से, जो छह मास तक की हो सकेगी या ऐसे प्रत्येक परिवर्तन के लिए पांच हजार रुपए तक के जुर्माने या दोनों से दंडनीय होगा।

Punishment for offences relating to construction, maintenance, sale and alteration of motor vehicles and components-
(1) Whoever, being a manufacturer, importer or dealer of motor vehicles, sells or delivers or alters or offers to sell or deliver or alter, a motor vehicle that is in contravention of the provisions of Chapter VII or the rules and regulations made thereunder, shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to one year, or with fine of one lakh rupees per such motor vehicle or with both:
Provided that no person shall be convicted under this section if he proves that, at the time of sale or delivery or alteration or offer of sale or delivery or alteration of such motor vehicle, he had disclosed to the other party the manner in which such motor vehicle was in contravention of the provisions of Chapter VII or the rules and regulations made thereunder.
(2) Whoever, being a manufacturer of motor vehicles, fails to comply with the provisions of Chapter VII or the rules and regulations made thereunder, shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to one year or with fine which may extend to one hundred crore rupees or with both.
(3) Whoever, sells or offers to sell, or permits the sale of any component of a motor vehicle which has been notified as a critical safety component by the Central Government and which does not comply with Chapter VII or the rules and regulations made thereunder shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to one year or with fine of one lakh rupees per such component or with both.
(4) Whoever, being the owner of a motor vehicle, alters a motor vehicle, including by way of retrofitting of motor vehicle parts, in a manner not permitted under the Act or the rules and regulations made thereunder shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to six months, or with fine of five thousand rupees per such alteration or with both.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 182A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।