Home Blog Page 125

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 26 | राज्य चालन-अनुज्ञप्ति रजिस्टरों का रखा जाना | MV Act, Section- 26 in hindi | Maintenance of State Registers of Driving Licences.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 26 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 26, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 26 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -26 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन प्रत्येक राज्य सरकार ऐसे प्ररूप में, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए, राज्य सरकार के अनुज्ञप्ति प्राधिकारियों द्वारा जारी और नवीकृत चालन-अनुज्ञप्तियों के संबंध में राज्य चालन-अनुज्ञप्ति के नाम से ज्ञात रजिस्टर रखा जाता है, जिस पर अनुज्ञप्ति का चालन की पूर्ण जानकारी उपलब्ध होती है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 26 के अनुसार

राज्य चालन-अनुज्ञप्ति रजिस्टरों का रखा जाना-

प्रत्येक राज्य सरकार ऐसे प्ररूप में, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए, राज्य सरकार के अनुज्ञप्ति प्राधिकारियों द्वारा जारी और नवीकृत चालन-अनुज्ञप्तियों के संबंध में राज्य चालन-अनुज्ञप्ति के नाम से ज्ञात रजिस्टर रखेगी, जिसमें निम्नलिखित विशिष्टियाँ अंतर्विष्ट होंगी, जिसके अंतर्गत-
(क) चालन-अनुज्ञप्ति धारकों के नाम और पते;
(ख) अनुज्ञप्ति संख्या;
(ग) अनुज्ञति जारी करने या नवीकरण करने की तारीख ;
(घ) अनुज्ञप्ति के अवसान की तारीख;
(ङ) चलाए जाने के लिए प्राधिकृत यानों के वर्ग और किस्म; और
(च) ऐसी अन्य विशिष्टियां, जो केंद्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएं।

Maintenance of State Registers of Driving Licences-
Each State Government shall maintain, in such form as may be prescribed by the Central Government, a register to be known as the State Register of Driving Licences, in respect of driving licences issued and renewed by the licensing authorities of the State Government, containing particulars, including-
(a) names and addresses of holders of driving licences;
(b) licence numbers;
(c) dates of issue or renewal of licences;
(d) dates of expiry of licences;
(e) classes and types of vehicles authorised to be driven; and
(f) such other particulars as the Central Government may prescribe.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 26 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 25 | पृष्ठांकन का उतारा जाना और पृष्ठांकन रहित चालन-अनुज्ञप्ति का दिया जाना | MV Act, Section- 25 in hindi | Transfer of endorsement and issue of driving licence free from endorsement.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 25 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 25, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 25 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -25 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन किसी चालन-अनुज्ञप्ति पर किए गए पृष्ठांकन को उसके धारक द्वारा अभिप्राप्त चालन-अनुज्ञप्ति की किसी नई या दूसरी प्रति पर तब तक उतारा जाएगा जब तक कि धारक इस धारा के उपबंधों के अधीन पृष्ठांकन रहित चालन-अनुज्ञप्ति दिए जाने के लिए हकदार नहीं हो जाता है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 25 के अनुसार

पृष्ठांकन का उतारा जाना और पृष्ठांकन रहित चालन-अनुज्ञप्ति का दिया जाना-

(1) किसी चालन-अनुज्ञप्ति पर किए गए पृष्ठांकन को उसके धारक द्वारा अभिप्राप्त चालन-अनुज्ञप्ति की किसी नई या दूसरी प्रति पर तब तक उतारा जाएगा जब तक कि धारक इस धारा के उपबंधों के अधीन पृष्ठांकन रहित चालन-अनुज्ञप्ति दिए जाने के लिए हकदार नहीं हो जाता।
(2) जहां यह अपेक्षित है कि चालन-अनुज्ञप्ति पर पृष्ठांकन किया जाए और वह चालन अनुज्ञप्ति उस न्यायालय या प्राधिकारी के पास नहीं है जिसके द्वारा पृष्ठांकन किया जाना है वहां-
(क) यदि वह व्यक्ति, जिसकी बाबत पृष्ठांकन किया जाना है, उस समय किसी चालन अनुज्ञप्ति का धारक है तो वह उस चालन-अनुज्ञप्ति को न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष पांच दिन के भीतर या इतने अधिक समय के भीतर पेश करेगा जितना न्यायालय या प्राधिकारी नियत करें; या
(ख) यदि उस समय वह चालन-अनुज्ञप्ति का धारक नहीं है किन्तु वह उसके पश्चात् चालन-अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त करता है तो वह उस चालन-अनुज्ञप्ति को अभिप्राप्त करने के पश्चात् पांच दिन के भीतर उसे न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष पेश करेगा,
और यदि विनिर्दिष्ट समय के भीतर चालन-अनुज्ञप्ति पेश नहीं की जाती तो वह उक्त समय की समाप्ति पर तब तक प्रभावहीन रहेगा जब तक वह पृष्ठाकंन के प्रयोजन के लिए पेश नही कर दी जाती।
(3) जिस व्यक्ति की चालन-अनुज्ञप्ति पर पृष्ठाकंन किया गया है, यदि ऐसे पृष्ठांकन के पश्चात् लगातार तीन वर्ष की अवधि के दौरान उसके विरुद्ध कोई अतिरिक्त पृष्ठांकन का आदेश नहीं किया गया है तो वह अपनी चालन-अनुज्ञप्ति का अभ्यर्पण करने पर और पांच रुपए की फीस देने पर ऐसी नई चालन-अनुज्ञप्ति, जिसमें कोई पृष्ठांकन न हो, प्राप्त करने का हकदार होगा :
परन्तु यदि पृष्ठांकन धारा 112 में निर्दिष्ट गतिसीमा का उल्लंघन करने वाले अपराध की बाबत ही है, तो ऐसा व्यक्ति पृष्ठांकन की तारीख से एक वर्ष की समाप्ति पर ऐसी नई चालन-अनुज्ञप्ति जिसमें कोई पृष्ठांकन न हो प्राप्त करने का हकदार होगा :
परन्तु यह और कि क्रमशः तीन वर्ष और एक वर्ष की उक्त अवधि की गणना करने में वह अवधि अपवर्जित की जाएगी जिसके दौरान उक्त व्यक्ति चालन-अनुज्ञप्ति धारण करने या अभिप्राप्त करने के लिए निरर्ह कर दिया गया था।

Transfer of endorsement and issue of driving licence free from endorsement-
(1) An endorsement on any driving licence shall be transferred to any new or duplicate driving licence obtained by the holder thereof until the holder becomes entitled under the provisions of this section to have a driving licence issued to him free from endorsement.
(2) Where a driving licence is required to be endorsed and the driving licence is not in the possession of the Court or authority by which the endorsement is to be made, then —
(a) if the person in respect of whom the endorsement is to be made is at the time the holder of a driving licence, he shall produce the driving licence to the Court or authority within five days, or such longer time as the Court or authority may fix; or
(b) if, not being then the holder of a driving licence, he subsequently obtains a driving licence, he shall within five days after obtaining the driving licence produce it to the Court or authority,
and if the driving licence is not produced within the time specified, it shall, on the expiration of such time, be of no effect until it is produced for the purpose of endorsement.
(3) A person whose driving licence has been endorsed shall, if during a continuous period of three years after such endorsement no further endorsement has been made against him, be entitled on surrendering his driving licence and on payment of a fee of five rupees, to receive a new driving licence free from all endorsements :
Provided that if the endorsement is only in respect of an offence contravening the speed limits referred to in section 112, such person shall be entitled to receive a new driving licence free from such endorsements on the expiration of one year of the date of the endorsement :
Provided further that in reckoning the said period of three years and one year, respectively, any period during which the said person was disqualified for holding or obtaining a driving licence shall be excluded.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 25 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 24 | पृष्ठांकन | MV Act, Section- 24 in hindi | Endorsement.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 24 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 24, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 24 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -24 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन वह न्यायालय या प्राधिकारी, जिसने निरर्हता का आदेश दिया है, निरर्हता के आदेश की तथा उस अपराध के लिए दोषसिद्धि की, जिसके संबंध में निरर्हता का आदेश दिया गया है, विशिष्टियाँ उस चालन-अनुज्ञप्ति पर, यदि कोई हो, पृष्ठांकित करेगा या करवाएगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 24 के अनुसार

पृष्ठांकन-

(1) वह न्यायालय या प्राधिकारी, जिसने निरर्हता का आदेश दिया है, निरर्हता के आदेश की तथा उस अपराध के लिए दोषसिद्धि की, जिसके संबंध में निरर्हता का आदेश दिया गया है, विशिष्टियाँ उस चालन-अनुज्ञप्ति पर, यदि कोई हो, पृष्ठांकित करेगा या करवाएगा जो निरहित व्यक्ति द्वारा धारित है तथा धारा 23 की उपधारा (3) के अधीन दिए गए निरर्हता के आदेश को रद्द करने या उसमें परिवर्तन करने की विशिष्टियां भी उसी प्रकार पृष्ठांकित की जाएंगी।
(2) जिस न्यायालय ने किसी व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन किसी ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध किया है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए, विहित किया जाए, चाहे ऐसी दोषसिद्धि के संबंध में निरर्हता का आदेश दिया गया हो या नहीं, दोषसिद्धि की विशिष्टिया उस चालन-अनुज्ञप्ति पर पृष्ठाकित करेगा या करवाएगा जो दोषसिद्ध किए गए व्यक्ति द्वारा धारित है ।
(3) जो व्यक्ति, उपधारा (2) के अधीन विहित किसी अपराध के लिए अभियुक्त है, वह न्यायालय में हाजिर होते समय अपनी चालन-अनुज्ञप्ति, यदि वह उसके पास हो, अपने साथ लाएगा ।
(4) जहां किसी व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध, और तीन मास से अधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाता है, वहां दंडादेश अधिनिर्णीत करने वाला न्यायालय, संबंधित व्यक्ति की चालन-अनुज्ञप्ति पर ऐसे दंडादेश के तथ्य को पृष्ठांकित करेगा और अभियोजन प्राधिकारी ऐसे पृष्ठांकन के तथ्य की सूचना उस प्राधिकारी को भेजेगा, जिसने चालन-अनुज्ञप्ति दी थी या अंतिम बार नवीकृत की थी।
(5) जब चालन-अनुज्ञप्ति किसी न्यायालय द्वारा पृष्ठांकित की जाती है या पृष्ठांकित कराई जाती है, तब ऐसा न्यायालय पृष्ठांकन की विशिष्टियां उस अनुज्ञापन प्राधिकारी को भेजेगा जिसने चालन-अनुज्ञप्ति दी थी या अंतिम बार नवीकृत की थी ।
(6) जहां किसी न्यायालय द्वारा की गई दोषसिद्धि या आदेश के विरुद्ध, जो चालन-अनुज्ञप्ति पर पृष्ठांकित किया गया है, किसी अपील में अपील न्यायालय दोषसिद्धि या आदेश में परिवर्तन कर देता है या उसे अपास्त कर देता है वहां अपील न्यायालय उस अनुज्ञापन प्राधिकारी को सूचित करेगा जिसने चालन-अनुज्ञप्ति दी थी या अंतिम बार नवीकृत की थी और ऐसा प्राधिकारी पृष्ठांकन में संशोधन करेगा या संशोधन करवाएगा।

Endorsement-
(1) The Court or authority making an order of disqualification shall endorse or cause to be endorsed upon the driving licence if any, held by the person disqualified, particulars of the order of disqualification and of any conviction of an offence in respect of which an order of disqualification is made; and particulars of any cancellation or variation of an order of disqualification made under sub-section (3) of section 23 shall be similarly so endorsed.
(2) A Court by which any person is convicted of an offence under this Act as may be prescribed by the Central Government, having regard to the objects of this Act, shall whether or not a disqualification order is made in respect of such conviction, endorse or cause to be endorsed particulars of such conviction on any driving licence held by the person convicted.
(3) Any person accused of an offence prescribed under sub-section (2) shall when attending the Court bring with him his driving licence if it is in his possession.
(4) Where any person is convicted of any offence under this Act and sentenced to imprisonment for a period exceeding three months, the Court awarding the sentence shall endorse the fact of such sentence upon the driving licence of the person concerned and the prosecuting authority shall intimate the fact of such endorsement to the authority by which the driving licence was granted or last renewed.
(5) When the driving licence is endorsed or caused to be endorsed by any Court, such Court shall send the particulars of the endorsement to the licensing authority by which the driving licence was granted or last renewed.
(6) Where on an appeal against any conviction or order of a Court, which has been endorsed on a driving licence, the appellate court varies or sets aside the conviction or order, the appellate court shall inform the licensing authority by which the driving licence was granted or last renewed and such authority shall amend or cause to be amended the endorsement.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 24 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 23 | निरर्हता आदेश का प्रभाव | MV Act, Section- 23 in hindi | Effect of disqualification order.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 23 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 23, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 23 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -23 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन ऐसा व्यक्ति, जिसकी बाबत धारा 19 या धारा 20 के अधीन कोई निरर्हता आदेश दिया गया है, उस सीमा तक और उतनी अवधि के लिए जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट हो, चालन-अनुज्ञप्ति धारण करने या अभिप्राप्त करने से विवर्जित रहेगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 23 के अनुसार

निरर्हता आदेश का प्रभाव-

(1) ऐसा व्यक्ति, जिसकी बाबत धारा 19 या धारा 20 के अधीन कोई निरर्हता आदेश दिया गया है, उस सीमा तक और उतनी अवधि के लिए जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट हो, चालन-अनुज्ञप्ति धारण करने या अभिप्राप्त करने से विवर्जित रहेगा और आदेश की तारीख को यदि ऐसे व्यक्ति द्वारा कोई चालन-अनुज्ञप्ति धारित है, तो वह उस सीमा तक और उस अवधि के दौरान प्रभावशील न रहेगी ।
(2) धारा 20 के अधीन दिए गए निरर्हता आदेश का प्रवर्तन, उस आदेश के विरुद्ध, अथवा उस दोषसिद्धि के विरुद्ध, जिसके फलस्वरूप वह आदेश दिया गया था, अपील के लम्बित रहने के दौरान तब तक निलंबित या मुल्तवी नहीं किया जाएगा जब तक कि अपील न्यायालय वैसा निदेश न दे।
(3) कोई व्यक्ति, जिसकी बाबत कोई निरर्हता आदेश दिया गया है उस आदेश की तारीख से छह मास की समाप्ति के पश्चात् किसी समय उस न्यायालय या अन्य प्राधिकारी को जिसने आदेश दिया था, निरर्हता हटाने के लिए आवेदन कर सकेगा तथा, यथास्थिति, वह न्यायालय या प्राधिकारी सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए या तो निरर्हता आदेश को रद्द कर सकेगा या उसमें परिवर्तन कर सकेगा :
परन्तु जहां न्यायालय या अन्य प्राधिकारी इस धारा के अधीन निरर्हता के किसी आदेश को रद्द करने या उसमें कोई परिवर्तन करने से इंकार करता है, वहां उसके अधीन दूसरे आवदेन को, ऐसे इंकार किए जाने की तारीख से तीन मास की अवधि की समाप्ति के पूर्व ग्रहण नहीं किया जाएगा।

Effect of disqualification order-
(1) A person in respect of whom any disqualification order is made under section 19 or section 20 shall be debarred to the extent and for the period specified in such order from holding or obtaining a driving licence and the driving licence, if any, held by such person at the date of the order shall cease to be effective to such extent and during such period.
(2) The operation of a disqualification order made under section 20 shall not be suspended or postponed while an appeal is pending against such order or against the conviction as a result of which such order is made unless the appellate court so directs.
(3) Any person in respect of whom any disqualification order has been made may at any time after the expiry of six months from the date of the order apply to the Court or other authority by which the order was made, to remove the disqualification; and the Court or authority, as the case may be, may, having regard to all the circumstances, either cancel or vary the disqualification order :
Provided that where the Court or other authority refuses to cancel or vary any disqualification order under this section, a second application thereunder shall not be entertained before the expiry of a period of three months from the date of such refusal.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 23 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 22 | दोषसिद्धि पर चालान-अनुज्ञप्ति का निलंबन या रद्दकरण | MV Act, Section- 22 in hindi | Suspension or cancellation of driving licence on conviction.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 22 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 22, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 22 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -22 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन दोषसिद्धि पर चालान-अनुज्ञप्ति का निलंबन या रद्दकरण को परिभाषित किया गया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 22 के अनुसार

दोषसिद्धि पर चालान-अनुज्ञप्ति का निलंबन या रद्दकरण-

(1) धारा 20 की उपधारा (3) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जहां धारा 21 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई व्यक्ति, किसी वर्ग या वर्णन के मोटर यान को ऐसे खतरनाक रूप से चलाने के कारण, जैसा कि धारा 184 में निर्दिष्ट है, एक या अधिक व्यक्तियों की मृत्यु या घोर उपहति कारित करने के अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है, वहां ऐसे व्यक्ति को दोषसिद्ध करने वाला न्यायालय ऐसे व्यक्ति द्वारा धारित चालन-अनुज्ञप्ति को, जहां तक वह उस वर्ग या वर्णन के मोटर यान के संबंध में है, ऐसी अवधि के लिए रद्द या निलंबित कर सकेगा, जो वह ठीक समझे।
(2) धारा 20 की उपधारा (2) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यदि कोई व्यक्ति, जो धारा 185 के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए पहले ही दोषसिद्ध किया जा चुका है, उस धारा के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए पुनः दोषसिद्ध किया जाता है तो ऐसी पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि करने वाला न्यायालय ऐसे व्यक्ति द्वारा धारित चालन-अनुज्ञप्ति को, आदेश द्वारा, रद्द करेगा।
(3) यदि कोई चालन-अनुज्ञप्ति इस धारा के अधीन रद्द या निलंबित की जाती है तो न्यायालय चालन-अनुज्ञप्ति को अपनी अभिरक्षा में ले लेगा, उस पर, यथास्थिति, रद्दकरण या निलंबन का पृष्ठांकन करेगा और इस प्रकार पृष्ठांकित चालन-अनज्ञप्ति उस प्राधिकारी को भेजेगा, जिसने अनज्ञप्ति जारी की थी या उसका अंतिम बार नवीकरण किया था, और वह प्राधिकारी अनुज्ञप्ति की प्राप्ति पर अनुज्ञप्ति को अपनी सुरक्षित अभिरक्षा में रखेगा और निलंबित अनुज्ञप्ति की दशा में अनुज्ञप्ति को निलंबन की अवधि समाप्त हो जाने पर, उसके धारक को, ऐसी वापसी के लिए उसके द्वारा किए गए आवेदन पर वापस करेगा :
परन्तु ऐसी कोई अनुज्ञप्ति तब तक वापस नहीं की जाएगी जब तक कि उसका धारक निलंबन की अवधि समाप्त होने के पश्चात् उस अनुज्ञापन प्राधिकारी के, जिसने अनुज्ञप्ति जारी की थी या उसका अंतिम बार नवीकरण किया था, समाधानप्रद रूप में धारा 9 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट यान चलाने की सक्षमता का परीक्षण नए सिरे से नहीं दे देता तथा उसमें उत्तीर्ण नहीं हो जाता और धारा 8 की उपधारा (3) में यथानिर्दिष्ट प्ररूप और रीति में चिकित्सा प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं कर देता ।
(4) यदि किसी विशिष्ट वर्ग या वर्णन के मोटर यान को चलाने के लिए कोई अनुज्ञप्ति इस धारा के अधीन रद्द या निलंबित की जाती है तो ऐसी अनुज्ञप्ति को धारण करने वाला व्यक्ति ऐसे विशिष्ट वर्ग या वर्णन के मोटर यानों को चलाने के लिए कोई अनुज्ञप्ति धारण करने से या उसे अभिप्राप्त करने से तब तक के लिए विवर्जित हो जाएगा जब तक चालन-अनुज्ञप्ति का रद्दकरण या निलंबन प्रवृत्त रहता है।

Suspension or cancellation of driving licence on conviction-
(1) Without prejudice to the provisions of sub-section (3) of section 20 where a person, referred to in sub-section (1) of section 21 is convicted of an offence of causing, by such dangerous driving as is referred to in section 184 of any class or description of motor vehicle the death of, or grievous hurt to, one or more persons, the Court by which such person is convicted may cancel, or suspend for such period as it may think fit, the driving licence held by such person in so far as it relates to that class or description of motor vehicle.
(2) Without prejudice to the provisions of sub-section (2) of section 20, if a person, having been previously convicted of an offence punishable under section 185 is again convicted of an offence punishable under that section, the Court, making such subsequent conviction, shall, by order, cancel the driving licence held by such person.
(3) If a driving licence is cancelled or suspended under this section, the Court shall take the driving licence in its custody, endorse the cancellation or, as the case may be, suspension, thereon and send the driving licence so endorsed to the authority by which the licence was issued or last renewed and such authority shall, on receipt of the licence, keep the licence in its safe custody, and in the case of a suspended licence, return the licence to the holder thereof after the expiry of the period of suspension on an application made by him for such return :
Provided that no such licence shall be returned unless the holder thereof has, after the expiry of the period of suspension, undergone and passed, to the satisfaction of the licensing authority by which the licence was issued or last renewed, a fresh test of competence to drive referred to in sub-section (3) of section 9 and produced a medical certificate in the same form and in same manner as is referred to in subsection (3) of section 8.
(4) If a licence to drive a particular class or description of motor vehicles is cancelled or suspended under this section, the person holding such a licence shall be debarred from holding, or obtaining, any licence to drive such particular class or description of motor vehicles so long as the cancellation or suspension of the driving licence remains in force.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 22 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 21 | कुछ मामलों में चालन-अनुज्ञप्ति का निलंबन | MV Act, Section- 21 in hindi | Suspension of driving licence in certain cases.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 21 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 21, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 21 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -21 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन कुछ मामलों में चालन-अनुज्ञप्ति का निलंबन को परिभाषित किया गया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 21 के अनुसार

कुछ मामलों में चालन-अनुज्ञप्ति का निलंबन-

(1) जहां किसी ऐसे व्यक्ति के संबंध में, जो धारा 184 के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए पहले दोषसिद्ध किया जा चुका है, किसी पुलिस अधिकारी द्वारा इस अभिकथन पर कोई मामला रजिस्टर किया गया है कि ऐसे व्यक्ति ने किसी वर्ग या वर्णन के मोटर यान को ऐसे खतरनाक रूप से चलाने के कारण, जैसा कि उक्त धारा 184 में निर्दिष्ट है, एक या अधिक व्यक्तियों की मृत्यु या उन्हें घोर उपहति कारित की है, वहां ऐसे व्यक्ति द्वारा ऐसे वर्ग या वर्णन के मोटर यान के संबंध में पारित चालन-अनुज्ञप्ति-
(क) उस तारीख से, जिसको मामला रजिस्टर किया जाता है, छह मास की अवधि तक 28 के लिए, या
(ख) यदि ऐसा व्यक्ति पूर्वोक्त अवधि की समाप्ति के पूर्व उन्मोचित या दोषमुक्त किया गया है तो, यथास्थिति, ऐसे उन्मोचन या दोषमुक्ति तक के लिए, निलंबित हो जाएगी।
(2) जहां किसी व्यक्ति द्वारा धारित चालन-अनुज्ञप्ति, उपधारा (1) के उपबंधों के आधार पर निलंबित हो जाती है, वहां वह पुलिस अधिकारी, जिसने उपधारा (1) में निर्दिष्ट मामला रजिस्टर किया है, ऐसे निलंबन की जानकारी उस न्यायालय को देगा जो ऐसे अपराध का संज्ञान करने के लिए सक्षम है और तब ऐसा न्यायालय चालन-अनुज्ञप्ति को कब्जे में ले लेगा, उस पर निलंबन का पृष्ठांकन करेगा और ऐसे पृष्ठांकन के तथ्य की सूचना उस अनुज्ञापन प्राधिकारी को देगा जिसने वह अनुज्ञप्ति दी थी या उसका अंतिम बार नवीकरण किया था ।
(3) जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति दोषमुक्त या उन्मोचित किया जाता है, वहां न्यायालय, चालान-अनुज्ञप्ति के निलम्बन के संबंध में ऐसी चालान-अनुज्ञप्ति पर किए गए पृष्ठांकन को रद्द करेगा।
(4) यदि किसी विशिष्ट वर्ग या वर्णन के मोटर यान के संबंध में कोई चालान-अनुज्ञप्ति उपधारा (1) के अधीन निलंबित की जाती है तो ऐसी अनुज्ञप्ति को धारण करने वाला व्यक्ति ऐसे विशिष्ट वर्ग या वर्णन के मोटर यानों को चलाने के लिए कोई अनुज्ञप्ति धारण करने से या उसे अभिप्राप्त करने से तब तक के लिए विवर्जित किया जाएगा जब तक कि चालन-अनुज्ञप्ति का निलंबन प्रवृत्त रहता है।

Suspension of driving licence in certain cases-
(1) Where, in relation to a person who had been previously convicted of an offence punishable under section 184, a case is registered by a police officer on the allegation that such person has, by such dangerous driving as is referred to in the said section 184, of any class or description of motor vehicle caused the death of, or grievous hurt to, one or more persons, the driving licence held by such person shall in relation to such class or description of motor vehicle become suspended-
(a) for a period of six months from the date on which the case is registered, or
(b) if such person is discharged or acquitted before the expiry of the period aforesaid, until such discharge or acquittal, as the case may be.
(2) Where by virtue of the provisions of sub-section (1), the driving licence held by a person becomes suspended, the police officer, by whom the case referred to in sub-section (1) is registered, shall bring such suspension to the notice of the Court competent to take cognizance of such offence, and thereupon, such Court shall take possession of the driving licence, endorse the suspension thereon and intimate the fact of such endorsement to the licensing authority by which the licence was granted or last renewed.
(3) Where the person referred to in sub-section (1) is acquitted or discharged, the Court shall cancel the endorsement on such driving licence with regard to the suspension thereof.
(4) If a driving licence in relation to a particular class or description of motor vehicles is suspended under sub-section (1), the person holding such licence shall be debarred from holding or obtaining any licence to drive such particular class or description of motor vehicles so long as the suspension of the driving licence remains in force.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 21 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।