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एससी/एसटी अधिनियम की धारा 11 | किसी व्यक्ति द्वारा संबंधित क्षेत्र से हटने में असफल रहने और वहां से हटने के पश्चात् उसमें प्रवेश करने की दशा में प्रक्रिया | SC/ST Act, Section- 11 in hindi | Procedure on failure of person to remove himself from area and enter thereon after removal.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 11 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 11, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 11 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -11 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। यह धारा किसी व्यक्ति द्वारा संबंधित क्षेत्र से हटने में असफल रहने और वहां से हटने के पश्चात् उसमें प्रवेश करने की दशा में प्रक्रिया को बताता है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 11 के अनुसार

किसी व्यक्ति द्वारा संबंधित क्षेत्र से हटने में असफल रहने और वहां से हटने के पश्चात् उसमें प्रवेश करने की दशा में प्रक्रिया-

(1) यदि कोई व्यक्ति जिसको धारा 10 के अधीन किसी क्षेत्र से हट जाने के लिए कोई निदेश जारी किया गया है
(क) निदेश किये गये रूप में हटने में असफल रहता है, या
(ख) इस प्रकार हटने के पश्चात् उपधारा (2) के अधीन विशेष न्यायालय की लिखित अनुज्ञा के बिना उस क्षेत्र में ऐसे स्थान पर, जो विशेष न्यायालय विनिर्दिष्ट करे, पुलिस अभिरक्षा में हटवा सकेगा।
(2) विशेष न्यायालय, लिखित आदेश द्वारा, किसी ऐसे व्यक्ति को जिसके विरुद्ध धारा 10 के अधीन आदेश किया गया है, अनुज्ञा दे सकेगा कि वह उस क्षेत्र में जहां से हट जाने का उसे निदेश दिया गया था ऐसी अस्थायी अवधि के लिए और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, लौट सकता है और अधिरोपित शतों के सम्यक् अनुपालन के लिए उससे अपेक्षा कर सकेगा कि वह प्रतिभू सहित या उसके बिना बंधपत्र निष्पादित करे।
(3) विशेष न्यायालय किसी भी समय ऐसी अनुज्ञा को प्रतिसंहृत कर सकेगा।
(4) ऐसा व्यक्ति, जो ऐसी अनुज्ञा से उस क्षेत्र में वापस आता है, जिससे उसे हटने के लिए निदेश दिया गया था, अधिरोपित शर्तों का पालन करेगा और जिस अस्थायी अवधि के लिए लौटने की उसे अनुज्ञा दी गई थी उसके अवसान पर या ऐसी अस्थाई अवधि के अवसान के पूर्व ऐसी अनुज्ञा के प्रतिसंहृत किए जाने पर ऐसे क्षेत्र से बाहर हट जाएगा और धारा 10 के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि के अनदसित भाग के भीतरनई अनुज्ञा के बिना वहां नहीं लौटेगा।
(5) यदि कोई व्यक्ति अधिरोपित शर्तों में से किसी का पालन करले या तदनुसार स्वयं को हटाने में असफल रहेगा या इस प्रकार हट जाने के पश्चात् ऐसे क्षेत्र में नई अनुज्ञा के बिना प्रवेश करेगा या लौटेगा तो विशेष न्यायालय उसे गिरफ्तार करा सकेगा और उसे उस क्षेत्र के बाहर ऐसे स्थान को, जो विशेष न्यायालय विनिर्दिष्ट करे, पुलिस अभिरक्षा में हटवा सकेगा।

Procedure on failure of person to remove himself from area and enter thereon after removal—
(1) If a person to whom a direction has been issued under section 10 to remove himself from any area—
(a) fails to remove himself as directed; or
(b) having so removed himself enters such area within the period specified in the order, otherwise than with the permission in writing of the Special Court under sub-section (2), the Special Court may cause him to be arrested and removed in police custody to such place outside such area as the Special Court may specify.
(2) The Special Court may, by order in writing, permit any person in respect of whom an order under section 10 has been made, to return to the area from which he was directed to remove himself for such temporary period and subject to such conditions as may be specified in such order and may require him to execute a bond with or without surety for the due observation of the conditions imposed.
(3) The Special Court may at any time revoke any such permission.
(4) Any person who, with such permission, returns to the area from which he was directed to remove himself shall observe the conditions imposed, and at the expiry of the temporary period for which he was permitted to return, or on the revocation of such permission before the expiry of such temporary period, shall remove himself outside such area and shall not return thereto within the unexpired portion specified under section 10 without a fresh permission.
(5) If a person fails to observe any of the conditions imposed or to remove himself accordingly or having so removed himself enters or returns to such area without fresh permission the Special Court may cause him to be arrested and removed in police custody to such place outside such area as the Special Court may specify.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 11 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा 10 | ऐसे व्यक्ति का हटाया जाना जिसके द्वारा अपराध किए जाने की संभावना है | SC/ST Act, Section- 10 in hindi | Removal of person likely to commit offence.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 10 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 10, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है और क्या सजा का प्रावधान है। यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 10 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -10 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जहां विशेष न्यायालय का, परिवाद या पुलिस रिपोर्ट पर, यह समाधान हो जाता है कि संभाव्यता है कि कोई व्यक्ति संविधान के अनुच्छेद 244 में यथानिर्दिष्ट ‘अनुसूचित क्षेत्रों’ या ‘जनजाति क्षेत्रों में सम्मिलित किसी क्षेत्र में इस अधिनियम के अध्याय 2 के अधीन कोई अपराध करेंगा वहां वह, लिखित आदेश द्वाय, ऐसे व्यक्ति को यह निदेश दे सकेगा कि वह ऐसे क्षेत्र की सीमाओं से परे, ऐसे मार्ग से होकर और इतने समय के भीतर हट जाए।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 10 के अनुसार

ऐसे व्यक्ति का हटाया जाना जिसके द्वारा अपराध किए जाने की संभावना है-

(1) जहां विशेष न्यायालय का, परिवाद या पुलिस रिपोर्ट पर, यह समाधान हो जाता है कि संभाव्यता है कि कोई व्यक्ति संविधान के अनुच्छेद 244 में यथानिर्दिष्ट ‘अनुसूचित क्षेत्रों’ या ‘जनजाति क्षेत्रों में सम्मिलित किसी क्षेत्र में इस अधिनियम के अध्याय 2 के अधीन कोई अपराध करेंगा वहां वह, लिखित आदेश द्वाय, ऐसे व्यक्ति को यह निदेश दे सकेगा कि वह ऐसे क्षेत्र की सीमाओं से परे, ऐसे मार्ग से होकर और इतने समय के भीतर हट जाए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, और दो वर्ष से अनधिक ऐसी अवधि के लिए जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, उस क्षेत्र में जिससे हट जाने का उसे निदेश दिया गया था, वापस न लौटे।
(2) विशेष न्यायालय, उपधारा (1) के अधीन आदेश के साथ, उस उपधारा के अधीन निर्दिष्ट व्यक्ति को वे आधार संसूचित करेगा जिन पर वह आदेश किया गया है।
(3) विशेष न्यायालय, उस व्यक्ति द्वारा जिसके विरुद्ध ऐसा आदेश किया गया है, या उसकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर किए गए अभ्यावेदन पर ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे उपधारा (1) के अधीन किए गए आदेश को प्रतिसंहृति या उपांतरित कर सकेगा।

Removal of person likely to commit offence—
(1) Where the Special Court is satisfied, upon a complaint or a police report that a person is likely to commit an offence under Chapter II of this Act in any area included in ‘Scheduled Areas’ or ‘tribal areas’, as referred to in article 244 of the Constitution, 3[or any area identified under the provisions of clause (vii) of sub-section (2) of section 21], it may, by order in writing, direct such person to remove himself beyond the limits of such area, by such route and within such time as may be specified in the order, and not to return to that area from which he was directed to remove himself for such period, not exceeding 4[three years], as may be specified in the order.
(2) The Special Court shall, along with the order under sub-section (1), communicate to the person directed under that sub-section the grounds on which such order has been made.
(3) The Special Court may revoke or modify the order made under sub-section (1), for the reasons to be recorded in writing, on the representation made by the person against whom such order has been made or by any other person on his behalf within thirty days from the date of the order.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 10 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा 9 | शक्तियों का प्रदान किया जाना | SC/ST Act, Section- 9 in hindi | Conferment of powers.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 9 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 9, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 9 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -9 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन किसी मामले या मामलों के वर्ग या समूह के लिए, किसी जिले या उसके किसी भाग में, राज्य सरकार किसी अधिकारी को राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे जिले या उसके भाग में संहिता के अधीन पुलिस अधिकारी द्वारा प्रयोक्तव्य शक्तियां या, यथास्थिति, ऐसे मामले या मामलों के वर्ग या समूह के लिए, और विशिष्टतया किसी विशेष न्यायालय के समक्ष व्यक्तियों की गिरफ्तारी, अन्वेषण और अभियोजन की शक्तियां प्रदान कर सकेगी।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 9 के अनुसार

शक्तियों का प्रदान किया जाना-

(1) संहिता में या इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध में किसी बात के होते हुए भी, यदि राज्य सरकार ऐसा कसा आवश्यक या समीचीन समझती है तो वह-
(क) अधिनियम के अधीन किसी अपराध के निवारण के लिए और उससे निपटने के लिए, या
(ख) इस अधिनियम के अधीन किसी मामले या मामलों के वर्ग या समूह के लिए, किसी जिले या उसके किसी भाग में, राज्य सरकार किसी अधिकारी को राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे जिले या उसके भाग में संहिता के अधीन पुलिस अधिकारी द्वारा प्रयोक्तव्य शक्तियां या, यथास्थिति, ऐसे मामले या मामलों के वर्ग या समूह के लिए, और विशिष्टतया किसी विशेष न्यायालय के समक्ष व्यक्तियों की गिरफ्तारी, अन्वेषण और अभियोजन की शक्तियां प्रदान कर सकेगी।
(2) पुलिस के सभी अधिकारी और सरकार के अन्य सभी अधिकारी इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम, स्कीम या आदेश के उपबंधों के निष्पादन में उपधाय (1) में निर्दिष्ट अधिकारी की सहायता करेंगे।
(3) संहिता के उपबन्ध, जहां तक हो सके, उपधारा (1) के अधीन किसी अधिकारी द्वारा शक्तियों के प्रयोग के संबंध में लागू होंगे।

Conferment of powers—
(1) Notwithstanding anything contained in the Code or in any other provision of this Act, the State Government may, if it considers it necessary or expedient so to do,—
(a) for the prevention of and for coping with any offence under this Act, or
(b) for any case or class or group of cases under this Act, in any district or part thereof, confer, by notification in the Official Gazette, on any officer of the State Government, the powers exercisable by a police officer under the Code in such district or part thereof or, as the case may be, for such case or class or group of cases, and in particular, the powers of arrest, investigation and prosecution of persons before any Special Court.
(2) All officers of police and all other officers of Government shall assist the officer referred to in sub-section (1) in the execution of the provisions of this Act or any rule, scheme or order made thereunder.
(3) The provisions of the Code shall, so far as may be, apply to the exercise of the powers by an officer under sub-section (1).

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 9 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा 8 | अपराधों के बारे में उपधारणा | SC/ST Act, Section- 8 in hindi | Presumption as to offences.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 8 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 8, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 8 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -8 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन अपराध करने के अभियुक्त व्यक्ति की या युक्तियुक्त रूप से संदेहास्पद व्यक्ति की कोई वित्तीय सहायता की है तो विशेष न्यायालय, जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित न किया जाए, यह उपधारणा करेगा कि ऐसे व्यक्ति ने उस अपराध का दुष्प्रेरण किया है या व्यक्तियों के किसी समूह ने इस अध्याय के अधीन अपराध किया है और यह साबित हो जाता है कि किया गया अपराध भूमि या किसी अन्य विषय के बारे में किसी विद्यमान विवाद का फल है तो यह उपधारणा की जाएगी कि यह अपराध सामान्य आशय या सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने के लिए किया गया था।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 8 के अनुसार

अपराधों के बारे में उपधारणा-

इस अध्याय के अधीन किसी अपराध के लिए अभियोजन में, यदि यह साबित हो जाता है कि-
(क) अभियुक्त ने इस अध्याय के अधीन अपराध करने के अभियुक्त व्यक्ति की या युक्तियुक्त रूप से संदेहास्पद व्यक्ति की कोई वित्तीय सहायता की है तो विशेष न्यायालय, जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित न किया जाए, यह उपधारणा करेगा कि ऐसे व्यक्ति ने उस अपराध का दुष्प्रेरण किया है;
(ख) व्यक्तियों के किसी समूह ने इस अध्याय के अधीन अपराध किया है और यह साबित हो जाता है कि किया गया अपराध भूमि या किसी अन्य विषय के बारे में किसी विद्यमान विवाद का फल है तो यह उपधारणा की जाएगी कि यह अपराध सामान्य आशय या सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने के लिए किया गया था।

Presumption as to offences—
In a prosecution for an offence under this Chapter, if it is proved that—
(a) the accused rendered any financial assistance to a person accused of, or reasonably suspected of, committing, an offence under this Chapter, the Special Court shall presume, unless the contrary is proved, that such person had abetted the offence;
(b) a group of persons committed an offence under this Chapter and if it is proved that the offence committed was a sequel to any existing dispute regarding land or any other matter, it shall be presumed that the offence was committed in furtherance of the common intention or in prosecution of the common object.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 8 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा 7 | कतिपय व्यक्तियों की संपत्ति का समपहरण | SC/ST Act, Section- 7 in hindi | Forfeiture of property of certain persons.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 7 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 7, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 7 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -7 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किसी अपराध का अभियुक्त है, वहां उसका विचारण करने वाला विशेष न्यायालय ऐसा आदेश कले के लिए स्वतन्त्र होगा कि उसकी सभी या कोई संपत्ति, स्थावर या जंगम या दोनों, ऐसे विचारण की अवधि के दौरान, कुर्क की जाएंगी और जहां ऐसे विचारण का परिणाम दोषसिद्धि है वहां इस प्रकार कुर्क की गई सम्पत्ति उस सीमा तक समपहरण के दायित्वाधीन होगी

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 7 के अनुसार

कतिपय व्यक्तियों की संपत्ति का समपहरण-

(1) जहां कोई व्यक्ति इस अध्याय के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है वहाँ विशेष न्यायालय, कोई दंड देने के अतिरिक्त, लिखित रूप में आदेश द्वारा, यह घोषित कर सकेगा कि उस व्यक्ति की कोई सम्पत्ति, स्थावर या जंगम या दोनों, जिनका उस अपराध को कले में प्रयोग किया गया है, सरकार को समपहृत हो जाएगी।
(2) जहां कोई व्यक्ति इस अध्याय के अधीन किसी अपराध का अभियुक्त है, वहां उसका विचारण करने वाला विशेष न्यायालय ऐसा आदेश कले के लिए स्वतन्त्र होगा कि उसकी सभी या कोई संपत्ति, स्थावर या जंगम या दोनों, ऐसे विचारण की अवधि के दौरान, कुर्क की जाएंगी और जहां ऐसे विचारण का परिणाम दोषसिद्धि है वहां इस प्रकार कुर्क की गई सम्पत्ति उस सीमा तक समपहरण के दायित्वाधीन होगी जहां तक वह इस अध्याय के अधीन अधिरोपित किसी जुर्माने की वसूली के प्रयोजन के लिए अपेक्षित है।Forfeiture of

property of certain persons—
(1) Where a person has been convicted of any offence punishable under this Chapter, the Special Court may, in addition to awarding any punishment, by order in writing, declare that any property, movable or immovable or both, belonging to the person, which has been used for the commission of that offence, shall stand forfeited to Government.
(2) Where any person is accused of any offence under this Chapter, it shall be open to the Special Court trying him to pass an order that all or any of the properties, movable or immovable or both, belonging to him, shall, during the period of such trial, be attached, and where such trial ends in conviction, the property so attached shall be liable to forfeiture to the extent it is required for the purpose of realisation of any fine imposed under this Chapter.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 7 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा 6 | भारतीय दंड संहिता के कतिपय उपबंधों का लागू होना | SC/ST Act, Section- 6 in hindi | Application of certain provisions of the Indian Penal Code.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 6 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 6, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 6 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -6 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 34, अध्याय 3, अध्याय 4, अध्याय 5, अध्याय 5क, धारा 149 और अध्याय 23 के उपबंध जहां तक हो सके, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, उसी प्रकार लागू होंगे जिस प्रकार वे भारतीय दंड संहिता के प्रयोजनों के लिए लागू होते हैं।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 6 के अनुसार

भारतीय दंड संहिता के कतिपय उपबंधों का लागू होना-

इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 34, अध्याय 3, अध्याय 4, अध्याय 5, अध्याय 5क, धारा 149 और अध्याय 23 के उपबंध जहां तक हो सके, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, उसी प्रकार लागू होंगे जिस प्रकार वे भारतीय दंड संहिता के प्रयोजनों के लिए लागू होते हैं।

Application of certain provisions of the Indian Penal Code—
Subject to the other provisions of this Act, the provisions of section 34, Chapter III, Chapter IV, Chapter V, Chapter VA, section 149 and Chapter XXIII of the Indian Penal Code (45 of 1860), shall, so far as may be, apply for the purposes of this Act as they apply for the purposes of the Indian Penal Code.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 6 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।