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एससी/एसटी अधिनियम की धारा 5 | पश्चातवर्ती दोषसिद्धि के लिए वर्धित दंड | SC/ST Act, Section- 5 in hindi | Enhanced punishment subsequent conviction.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 5 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 5, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है और क्या सजा का प्रावधान है। यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 5 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -5 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस धारा के अन्तर्गत जो कोई व्यक्ति पहले किसी हरिजन अपराध मे दोष सिद्ध हो चुका था, किन्तु वह पुनः वही अपराध दोहराता है और न्यायालय व्दारा उस व्यक्ति पर पुनः दोषसिद्ध करार हो जाता है, तो वह इस धारा के अन्तर्गत दंडनीय होगा।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 5 के अनुसार

पश्चातवर्ती दोषसिद्धि के लिए वर्धित दंड-

कोई व्यक्ति जो, इस अध्याय के अधीन किसी अपराध के लिए पहले ही दोषसिद्ध हो चुका है, दूसरे अपराध या उसके पश्चात्वर्ती किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जाता है, वह कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष से कम नहीं होगी किंतु जो उस अपराध के लिए उपबंधित दंड तक हो सकेगी, दंडनीय होगा।

Enhanced punishment subsequent conviction—
Whoever, having already been convicted of an offence under this Chapter is convicted for the second offence or any offence subsequent to the second offence, shall be punishable with imprisonment for a term which shall not be less than one year but which may extend to the punishment provided for that offence.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 5 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा 4 | कर्तव्यों की उपेक्षा के लिए दंड | SC/ST Act, Section- 4 in hindi | Punishment for neglect of duties.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 4 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 4, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है और क्या सजा का प्रावधान है। यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 4 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -4 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कोई भी लोक सेवक, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा पालन किए जाने के लिए अपेक्षित अपने कर्तव्यों की जानबूझकर उपेक्षा करेगा, वह इस धारा के अन्तर्गत दंडित किया जायेगा।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 4 के अनुसार

कर्तव्यों की उपेक्षा के लिए दंड-

कोई भी लोक सेवक, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा पालन किए जाने के लिए अपेक्षित अपने कर्तव्यों की जानबूझकर उपेक्षा करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किंतु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा।

Punishment for neglect of duties—
Whoever, being a public servant but not being a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe, wilfully neglects his duties required to be performed by him under this Act, shall be punishable with imprisonment for a term which shall not be less than six months but which may extend to one year.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 4 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3 | अत्याचार के अपराधों के लिए दंड | SC/ST Act, Section- 3 in hindi | Punishments for offences atrocities.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 3, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 3 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -3 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस धारा के अन्तर्गत यह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) पर अत्याचार के अपराधों के लिये दंड को परिभाषित किया है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 3 के अनुसार

अत्याचार के अपराधों के लिये दंड-

(1) कोई भी व्यक्ति, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है-
(i) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य को अखाद्य या घृणाजनक पदार्थ पीने या खाने के लिए मजबूर करेगा;
(ii) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के परिसर या पड़ौस में मल-मूत्र, कूड़ा, पशु-शव या कोई अन्य घृणाजनक पदार्थ इकट्ठा करके उसे क्षति पहुँचाने, अपमानित करने या क्षुब्ध करने के आशय से कार्य करेगा;
(iii) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य के शरीर से बलपूर्वक कपड़े उतारेगा या उसे नंगा या उसके चेहरे या शरीर को पोतकर धुमाएगा या इसी प्रकार का कोई अन्य ऐसा कार्य करेगा जो मानव के सम्मान के विरुद्ध है,
(iv) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के स्वामित्वाधीन या उसे आवंटित या किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसे आवंटित किए जाने के लिए अधिसूचित किसी भूमि को सदोष अधिभोग में लेगा या उस पर खेती करेगा या उस आबंटित भूमि को अंतरित करा लेगा;
(v) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को उसकी भूमि या परिसर से सदोष बेकब्जा करेगा या किसी भूमि, परिसर या जल पर उसके अधिकारों के उपभोग में हस्तक्षेप करेगा;
(vi) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को “बेगार” कले के लिए या सरकार द्वारा लोक प्रयोजनों के लिए अधिरोपित किसी अनिवार्य सेवा से भिन्न अन्य समरूप प्रकार के बलात्नम या बंधुआ मजदूरी के लिए विवश करेगा या फुसलाएगा;
(vii) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को मतदान न कले के लिए या किसी विशिष्ट अभ्यर्थी के लिए मतदान करने के लिए या विधि द्वारा उपवन्धित से भिन्न रीति से मतदान करने के लिए मजबूर या अभिवस्त करेगा;
(viii) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के विरुद्ध मिथ्या द्वेषपूर्ण या तंग करने वाला वाद या दाण्डिक या अन्य विधिक कार्यवाही संस्थित करेगा;
(ix) किसी लोकसेवक को कोई मिथ्या या तुच्छ जानकारी देगा और उसके द्वारा अनुसूचित जाति या अनुसूचित जन जाति के किसी सदस्य को क्षति पहुंचाने या क्षुब्ध करने के लिए ऐसे लोक सेवक से उसकी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग कराएगा; .
(x) जनता को दृष्टिगोचर किसी स्थान में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य का अपमान करने के आशय से साशयं उसको अपमानित था अभित्रस्त करेगा;
(xi) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की किसी महिला का अनादर करने या उसकी लज्जा भंग कले के आशय से हमला या बल प्रयोग करेगा;
(xii) अनुसूचित जाति या अनसूचित जनजाति की किसी महिला की इच्छा को अधिशासित करने की स्थिति में होने पर उस स्थिति का प्रयोग उसका लैंगिक शोषण करने के लिए, जिसके लिए वह अन्यथा सहमत नहीं होती, करेगा;
(xiii) किसी सोत, जलाशय या किसी अन्य उद्गम के जल को, जो आम तौर पर अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्यों द्वारा उपयोग में लाया जाता है, दूषित या गंदा करेगा जिससे कि वह उस प्रयोजन के लिए कम उपयुक्त हो जाए जिसके लिए उसका आमतौर पर प्रयोग किया जाता है;
(xiv) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को सार्वजनिक अभिगम के स्थान के मार्ग के किसी रूढिजन्य अधिकार से वंचित करेगा या ऐसे किसी सदस्य को बाधा पहुंचाएगा जिससे कि वह ऐसे सार्वजनिक अभिगम के स्थान का उपयोग करने या वहां पहुंचने से निर्वारित हो जाए जहां जनता के अन्य सदस्यों या उसके किसी भाग को उपयोग कले का या पहुँचने का अधिकार है;
(xv) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को अपना मकान, गांव या अन्य निवास स्थान छोड़ने के लिए मजबूर करेगा या कराएगा वह कारावास से जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किंतु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से दंडनीय होगा।
(2) कोई व्यक्ति, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है,
(i) मिथ्या साक्ष्य देगा या गढ़ेगा, जिससे उसका आशय अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को किसी ऐसे अपराध के लिए, जो तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा मृत्यु दंड से दंडनीय है, दोषसिद्ध कराना है या वह यह जानता है कि इससे उसका दोषसिद्धि होना संभाव्य है, वह आजीवन कारावास से और जुर्माने से दंडनीय होगा, और यदि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी निर्दोष सदस्य को ऐसे मिथ्या या गढ़े हुए साक्ष्य के फलस्वरूप दोषसिद्ध किया जाता है, और फांसी दी जाती है तो वह व्यक्ति, जो ऐसा मिथ्या साक्ष्य देता है या गढ़ता है, मृत्यु दंड से दंडनीय होगा।
(ii) मिथ्या साक्ष्य देगा या गढ़ेगा, जिससे उसका आशय अनुसूचित जाति पा अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को ऐसे अपराध के लिए, जो मृत्यु दंड से दंडनीय नहीं है किंतु सात वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय है, दोषसिद्ध कराना है या वह यह जानता है कि उससे उसका दोषसिद्धि होना संभाव्य है, वह कारावास से जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो सात वर्ष या उससे अधिक की हो सकेगी और जुर्माने से दंडनीय होगा;
(iii) अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि करेगा जिससे उसका आशय अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के.. किसी सदस्य की किसी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाना है या वह यह जानता है कि उससे ऐसा होना संभाव्य है, वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किंतु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से दंडनीय होगा;
(iv) अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि करेगा जिससे उसका आशय किसी ऐसे भवन को जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य द्वारा साधारणतः पूजा के स्थान के रूप में या मानव आवास के स्थान के रूप में या सम्पत्ति की अभिरक्षा के लिए किसी स्थान के रूप में उपयोग किया जाता है, नष्ट करता है या वह यह जानता है कि उससे ऐसा होना संभाव्य है, वह आजीवन कारावास से और जुर्माने से दंडनीय होगा;
(v) भारतीय दंड संहिता (1960 का 45) के अधीन 10 वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय कोई अपराध किसी व्यक्ति या सम्पत्ति के विरुद्ध इस आधार पर करेगा कि ऐसा व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य है या ऐसी संपत्ति ऐसे सदस्य की है, वह आजीवन कारावास से और जुर्माने से दंडनीय होगा।
(vi) यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि इस अध्याय के अधीन कोई अपराध किया गया है, वह अपराध किये जाने के किसी साक्ष्य को, अपराधी को, विधिक दंड से बचाने के आशय से गायब करेगा या उस आशय से अपराध के बारे में कोई ऐसी जानकारी देगा जो वह जानता है या विश्वास करता है कि वह मिथ्या है, वह उस अपराध के लिए उपदन्धित दंड से दंडनीय होगा, या
(vii) लोकसेवक होते हुए इस धारा के अधीन कोई अपराध करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु जो उस अपराध के लिए उपबंधित दंड तक हो सकेगी, दंडनीय होगी।

Punishments for offences atrocities—
(1) Whoever, not being a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe,—
(a) puts any inedible or obnoxious substance into the mouth of a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe or forces such member to drink or eat such inedible or obnoxious substance;
(b) dumps excreta, sewage, carcasses or any other obnoxious substance in premises, or at the entrance of the premises, occupied by a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe;
(c) with intent to cause injury, insult or annoyance to any member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe, dumps excreta, waste matter, carcasses or any other obnoxious substance in his neighbourhood;
(d) garlands with footwear or parades naked or semi-naked a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe;
(e) forcibly commits on a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe any act, such as removing clothes from the person, forcible tonsuring of head, removing moustaches, painting face or body or any other similar act, which is derogatory to human dignity;
(f) wrongfully occupies or cultivates any land, owned by, or in the possession of or allotted to, or notified by any competent authority to be allotted to, a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe, or gets such land transferred;
(g) wrongfully dispossesses a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe from his land or premises or interferes with the enjoyment of his rights, including forest rights, over any land or premises or water or irrigation facilities or destroys the crops or takes away the produce therefrom.
Explanation-
For the purposes of clause (f) and this clause, the expression “wrongfully” includes— (A) against the person’s will;
(B) without the person’s consent;
(C) with the person’s consent, where such consent has been obtained by putting the person, or any other person in whom the person is interested in fear of death or of hurt; or
(D) fabricating records of such land;
(h) makes a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe to do “begar” or other forms of forced or bonded labour other than any compulsory service for public purposes imposed by the Government;
(i) compels a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe to dispose or carry human or animal carcasses, or to dig graves;
(j) makes a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe to do manual scavenging or employs or permits the employment of such member for such purpose;
(k) performs, or promotes dedicating a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe woman to a deity, idol, object of worship, temple, or other religious institution as a deva dasi or any other similar practice or permits aforementioned acts;
(l) forces or intimidates or prevents a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe—
(A) not to vote or to vote for a particular candidate or to vote in a manner other than that provided by law;
(B) not to file a nomination as a candidate or to withdraw such nomination; or
(C) not to propose or second the nomination of a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe as a candidate in any election;
(m) forces or intimidates or obstructs a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe, who is a member or a Chairperson or a holder of any other office of a Panchayat under Part IX of the Constitution or a Municipality under Part IXA of the Constitution, from performing their normal duties and functions;
(n) after the poll, causes hurt or grievous hurt or assault or imposes or threatens to impose social or economic boycott upon a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe or prevents from availing benefits of any public service which is due to him;
(o) commits any offence under this Act against a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe for having voted or not having voted for a particular candidate or for having voted in a manner provided by law;
(p) institutes false, malicious or vexatious suit or criminal or other legal proceedings against a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe;
(q) gives any false or frivolous information to any public servant and thereby causes such public servant to use his lawful power to the injury or annoyance of a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe;
(r) intentionally insults or intimidates with intent to humiliate a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe in any place within public view;
(s) abuses any member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe by caste name in any place within public view;
(t) destroys, damages or defiles any object generally known to be held sacred or in high esteem by members of the Scheduled Castes or the Scheduled Tribes.
Explanation-
For the purposes of this clause, the expression “object” means and includes statue, photograph and portrait;
(u) by words either written or spoken or by signs or by visible representation or otherwise promotes or attempts to promote feelings of enmity, hatred or ill-will against members of the Scheduled Castes or the Scheduled Tribes;
(v) by words either written or spoken or by any other means disrespects any late person held in high esteem by members of the Scheduled Castes or the Scheduled Tribes;
(w) (i) intentionally touches a woman belonging to a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe, knowing that she belongs to a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe, when such act of touching is of a sexual nature and is without the recipient’s consent;
(ii) uses words, acts or gestures of a sexual nature towards a woman belonging to a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe, knowing that she belongs to a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe.
Explanation-
For the purposes of sub-clause (i), the expression “consent” means an unequivocal voluntary agreement when the person by words, gestures, or any form of non-verbal communication, communicates willingness to participate in the specific act:
Provided that a woman belonging to a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe who does not offer physical resistance to any act of a sexual nature is not by reason only of that fact, is to be regarded as consenting to the sexual activity:
Provided further that a woman’s sexual history, including with the offender shall not imply consent or mitigate the offence;
(x) corrupts or fouls the water of any spring, reservoir or any other source ordinarily used by members of the Scheduled Castes or the Scheduled Tribes so as to render it less fit for the purpose for which it is ordinarily used;
(y) denies a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe any customary right of passage to a place of public resort or obstructs such member so as to prevent him from using or having access to a place of public resort to which other members of public or any other section thereof have a right to use or access to;
(z) forces or causes a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe to leave his house, village or other place of residence:
Provided that nothing contained in this clause shall apply to any action taken in discharge of a public duty;
(za) obstructs or prevents a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe in any manner with regard to—
(A) using common property resources of an area, or burial or cremation ground equally with others or using any river, stream, spring, well, tank, cistern, water-tap or other watering place, or any bathing ghat, any public conveyance, any road, or passage;
(B) mounting or riding bicycles or motor cycles or wearing footwear or new clothes in public places or taking out wedding procession, or mounting a horse or any other vehicle during wedding processions;
(C) entering any place of worship which is open to the public or other persons professing the same religion or taking part in, or taking out, any religious, social or cultural processions including jatras;
(D) entering any educational institution, hospital, dispensary, primary health centre, shop or place of public entertainment or any other public place; or using any utensils or articles meant for public use in any place open to the public; or
(E) practicing any profession or the carrying on of any occupation, trade or business or employment in any job which other members of the public, or any section thereof, have a right to use or have access to;
(zb) causes physical harm or mental agony of a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe on the allegation of practicing witchcraft or being a witch; or
(zc) imposes or threatens a social or economic boycott of any person or a family or a group belonging to a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe, shall be punishable with imprisonment for a term which shall not be less than six months but which may extend to five years and with fine.]
(2) Whoever, not being a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe,—
(i) gives or fabricates false evidence intending thereby to cause, or knowing it to be likely that he will thereby cause, any member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe to be convicted of an offence which is capital by the law for the time being in force shall be punished with imprisonment for life and with fine; and if an innocent member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe be convicted and executed in consequence of such false or fabricated evidence, the person who gives or fabricates such false evidence, shall be punished with death;
(ii) gives or fabricates false evidence intending thereby to cause, or knowing it to be likely that he will thereby cause, any member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe to be convicted of an offence which is not capital but punishable with imprisonment for a term of seven years or upwards, shall be punishable with imprisonment for a term which shall not be less than six months but which may extend to seven years or upwards and with fine;
(iii) commits mischief by fire or any explosive substance intending to cause or knowing it to be likely that he will thereby cause damage to any property belonging to a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe, shall be punishable with imprisonment for a term which shall not be less than six months but which may extend to seven years and with fine;
(iv) commits mischief by fire or any explosive substance intending to cause or knowing it to be likely that he will thereby cause destruction of any building which is ordinarily used as a place of worship or as a place for human dwelling or as a place for custody of the property by a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe, shall be punishable with imprisonment for life and with fine;
(v) commits any offence under the Indian Penal Code (45 of 1860) punishable with imprisonment for a term of ten years or more against a person or property 1[knowing that such person is a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe or such property belongs to such member], shall be punishable with imprisonment for life and with fine;
(va) commits any offence specified in the Schedule, against a person or property, knowing that such person is a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe or such property belongs to such member, shall be punishable with such punishment as specified under the Indian Penal Code (45 of 1860) for such offences and shall also be liable to fine;]
(vi) knowingly or having reason to believe that an offence has been committed under this Chapter, causes any evidence of the commission of that offence to disappear with the intention of screening the offender from legal punishment, or with that intention gives any information respecting the offence which he knows or believes to be false, shall be punishable with the punishment provided for that offence; or
(vii) being a public servant, commits any offence under this section, shall be punishable with imprisonment for a term which shall not be less than one year but which may extend to the punishment provided for that offence.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 3 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा 2 | परिभाषाये | SC/ST Act, Section- 2 in hindi | Definitions.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 2 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 2, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 2 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -2 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस धारा के अन्तर्गत यह कानून अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 को परिभाषित किया गया है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 2 के अनुसार

परिभाषाये-

(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से गन्यया अपेक्षित न हो,
(क) “अत्याचार’ से धारा 3 के अधीन दंडनीय अपराध अभिप्रेत है।
(ख) “संहिता” से दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) अभिप्रेत है।
(ग) “अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के वही गर्व जो संविधान के अनुच्छेद 366 के खंड (24) और खंड (25) में है
(घ) “विशेष न्यायालय” से धारा 14 में विशेष न्यायालय के रूप में विनिर्दिष्ट कोई सेशन न्यायालय अभिप्रेत है;
(ङ) “विशेष लोक अभियोजक’ से विशेष लोक अभियोजक के रूप में विनिर्दिष्ट लोक अभियोजक या धारा 15 में निर्दिष्ट अधिवक्ता अभिप्रेत है;
(च) उन शब्दों और पदों के जो इस अधिनियम में प्रयुक्त किये हैं किन्तु परिभाषित नहीं हैं संहिता या भारतीय दंड संहिता में परिभाषित है, वही अर्थ है जो यथास्थिति, संहिता में या भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) में है।
(2) इस अधिनियम में किसी अधिनियमित या उसके किसी उपबंध के प्रति किसी निर्देश का अर्थ, किसी ऐसे क्षेत्र के संबंध में जिसमें ऐसी अधिनियमित था ऐसा उपबंध प्रवृत्त नहीं है, यह लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में प्रवृत्त तत्थानी विधि, यदि कोई हो, के प्रति निर्देश है।

Definitions—
(1) In this Act, unless the context otherwise requires,—
(a) “atrocity” means an offence punishable under section 3;
(b) “Code” means the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974);
(c) “Scheduled Castes and Scheduled Tribes” shall have the meanings assigned to them respectively under clause (24) and clause (25) of article 366 of the Constitution;
(d) “Special Court” means a Court of Session specified as a Special Court in section 14;
(e) “Special Public Prosecutor” means a Public Prosecutor specified as a Special Public Prosecutor or an advocate referred to in section 15;
(f) words and expressions used but not defined in this Act and defined in the Code or the Indian Penal Code (45 of 1860) shall have the meanings assigned to them respectively in the Code, or as the case may be, in the Indian Penal Code.
(2) Any reference in this Act to any enactment or any provision thereof shall, in relation to an area in which such enactment or such provision is not in force, be construed as a reference to the corresponding law, if any, in force in that area.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 2 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा 1 | संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ | SC/ST Act, Section- 1 in hindi | Short title, extent and commencement.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 1 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 1, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 1 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -1 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस धारा के अन्तर्गत यह कानून अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 है। इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 1 के अनुसार

संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-

इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 है।
इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर है।

Short title, extent and commencement—
This Act may be called the Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989.
It extends to the whole of India except the state of Jammu and Kashmir.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 1 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

एससी/एसटी एक्ट क्या है?|SC/ST Act in Hindi|जमानत एवंम् सजा का प्रावधान

SC/ST Act 1989 बनाने का मकसद सिर्फ इतना सा था कि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति का समाज मे जातिवाद के आधार पर कोई किसी का अपमान या उसके अधिकारो का हनन न कर सके। भारत देश की आजादी के बाद समाज मे जातिवाद और ऊंच-नीच और अधिक बढ़ा क्योकि हमारे समाज मे कोई भी वाद उत्पन्न होता है, तो सबसे पहले जाति वाद को ही मुद्धा बनाया जाता है, जिसको लेकर समाज मे जातिवाद का भेद-भाव कभी खत्म ही नही हुआ, जिसके कारण भारत मे यह कानून लाया गया।

SC/ST Act (हरिजन एक्ट) को हिन्दी मे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 कहा जाता है। जब यह कानून लाया गया तो इस कानून के मद मे कहा गया कि आने वाले समय मे जब यह जातिगत् भेद-भाव मे कमी होगी, तो इस कानून को बाधित/ रोक लगा दिया जायेगा, लेकिन समय के साथ इसका दुरूपयोग भी तेजी से होने लगा। हांलाकि आज न्यायपालिका इतनी जागरूक हो गयी है, जिसके झूठे मामलों मे थोड़े सख्त रवाइया अपनाया गया है, जिसके चलते कोई झूठे वाद मे किसी को फसांता है, तो 6 माह या 1 वर्ष तक कारावास या जुर्माने से भी दण्डित किया जायेगा।

HIGHLIGHTS

केन्द्र सरकार व्दारा 2016 में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) SC ST Act in Hindi में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए थे। इन बदलावों का उद्देश्य पीड़ितों को जल्दी न्याय देना, राहत राशि में वृद्धि करना, और जांच प्रक्रिया को और सख्त बनाना था।

केन्द्र सरकार व्दारा 2016 मे महत्वपूर्ण बदलाव

  • अब एससी-एसटी समाज पर अत्याचार के मामलों में पुलिस जांच पूरी कर केस रजिस्टर होने के 60 दिनों के भीतर अदालत में आरोप-पत्र (चार्जशीट) दाखिल करना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों के मामलों में पीड़ित महिलाओं के लिए राहत राशि बढ़ाई गई है और उन्हें जांच पूरी होने की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी।
  • अलग-अलग अपराधों की गंभीरता के अनुसार राहत राशि में भारी वृद्धि की गई; जैसे किसी भी गंभीर मामले में अधिकतम सहायता राशि को 7.5 लाख रुपए तक कर दिया गया
  • प्राथमिकी दर्ज होते ही, 7 दिन के भीतर पीड़ित या उसके परिवार को राहत राशि दी जाएगी, जबकि पहले केवल जांच पूर्ण होने के बाद ही राहत मिलती थी।
  • हर राज्य, जिला और अनुमंडल स्तर पर बनी समितियों से समय-समय पर मामलों की समीक्षा अनिवार्य कर दी गई।
  • महिलाओं से जुड़े अपराधों जैसे छेड़छाड़, इशारे करना या पीछा करने के मामलों की विधिक प्रक्रिया को आसान और त्वरित बनाया गया है।

एससी/एसटी एक्ट को लेकर हम सभी के मन मे काफी सवाल होंगे कि एससी- एसटी एक्ट क्या है (SC ST Act in Hindi)SC-ST कानून कब लगता है ? क्या हरिजन एक्ट के अपराध मे जमानत मिल सकती है, और इस कानून के तहत सजा, धारा, झूटी शिकायत, मुवावजा इत्यादि की पूरी जानकारी आज हम आपके साथ साझा करने वाले है।

भारत का संविधान प्रत्येक व्यक्ति को एक समान जीने का अधिकार देता है लेकिन आजादी के बाद भारत देश मे अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों के सदस्यों के खिलाफ भेदभाव और अत्याचार को रोकने के लिये संसद व्दारा SC/ST Act कानून बनाया गया, अब प्रश्न यह है कि क्या इसका दुरूपयोग हो रहा है या नही, तो हां इस कानून का अधिकांशतः दुरूपयोग किया जा रहा है और कोई न कोई सही व्यक्ति भी इस कानून का शिकार हो रहा है, हांलाकि अब सरकार व्दारा कुछ शक्तियां जरूर बरती जा रही है, लेकिन कॉफी तेजी से इसका दुरूपयोग भी हो रहा है।

SC/ST Act मामलों मे अगर कोई शिकायतकर्ता नीची जाति या हरिजन है, तो वह सबसे पहले हरिजन एक्ट ही लगाया जा रहा है, चाहे मामला कोई और ही क्यो न हो, सबसे पहले वह इसी कानून का सहारा ले रहा है, क्योकि वह जानता है, कि यह कानून हमारे लिये ज्यादा फायदेमंद रहेगा। इसके अलावा उसे यह भी मालूम है, कि इस कानून के तहत सरकार हमे मुआवजा भी देगी। इसलिये भी इस कानून दरूपयोग काफी तेजी से हो रहा है।

आज हम इस पोस्ट के माध्यम से जानेंगे कि What is the SC/ST Act? एससी/एसटी एक्ट क्या है? यह कानून किन-किन मामलो मे लागू होता है और मुआवजा कैसे और कब, तक कितना मिलता है? क्या इस कानूून के तहत हुये अपराध मे जमानत मिल सकती है या नही, और इस कानून के तहत क्या सजा का प्रावधान है, इन सभी अहम बिन्दुओ पर आज हम चर्चा करने वाले है।

एससी/एसटी कानून (SC/ST Act) हिन्दी मे

SC/ST Act सामाजिक एवंम् आर्थिक रूप से अनुसूचित जाति एवंम् अनूसूचित जनजाति पर हो रहे अत्याचार/प्रताड़ना को रोकने के फलस्वरूप इस कानून को संसद ने वर्ष 1989 में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 पारित किया। इसके बाद राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर किये जाने पर 30 जनवरी 1990 को यह कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू कर दिया गया है।

SC ST Act in Hindi को लाने का मुख्य उद्देश्य सिर्फ इतना सा है कि जो कोई (दूसरे वर्ग का व्यक्ति) किसी अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियो को उनकी जाति वर्ग के आधार पर अपमानित या प्रताड़ित करता है, तो वह इस कानून के तहत दण्डित किया जायेगा, साथ ही कोई भी (दूसरे जाति का व्यक्ति) किसी को जानबूझकर उसकी जाति के आधार पर भेद-भाव या उसके अधिकारो का हनन करता है, तो उसके विरूद्ध इस कानून के तहत कठोर कार्यवाही की जायेगी।

संक्षिप्त नाम, कुल कितने अध्याये और कितनी धाराये है?

एससी/एसटी एक्ट (SC ST Atrocities act) को हिन्दी मे [अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून] कहा जाता है और अंग्रेजी मे [Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act] कहा जाता है। इस कानून के अन्तर्गत कुल 5 अध्याय एवंम् 23 धाराये है।

एससी/एसटी कानून (SC/ST Act) कब लागू होता है

SC/ST Act मुख्यताः उन मामलो मे लागू होता है, जहां कोई (दूसरे वर्ग/जाति का व्यक्ति) किसी हरिजन व्यक्ति को इसलिये प्रताड़ित/ अपमानित करता है कि वह अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का है, तो तब यह कानून लागू होता है। जिसका उद्धेश्य कि जाति के अधार पर किसी व्यक्ति के साथ भेद-भांव या प्रताडित करने वाले व्यक्ति को सजा एवंम् जुर्माने का प्रावधान है।

SC/ST Act जम्मू कश्मीर को छोड़कर सम्पूर्ण भारत पर लागू होता है, जो कोई व्यक्ति इस कानून के तहत किसी अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियो को उनकी जाति वर्ग के आधार पर अपमानित या प्रताड़ित करता है, तो वह व्यक्ति कठोर दण्ड का भागीदार होता है। इसके अलावा इस कानून मे जमानत भी इतनी आसानी से नही मिलती है, यह कानून संज्ञेय और गैर-जमानतीय अपराध की श्रेणी मे आता है, लेकिन अब कुछ शर्तो को जोड़ दिया गया है, जिसके आधार पर किसी मासूम, जो इस कानून के तहत फसांया गया है परेशान न किया जाये, जैसा कि एफआईआर दर्ज होते ही गिरफ्तारी मे रोक, बेल मिलने मे असानी, उच्च स्तरीय जांच इत्यादि जैसी शर्तो को जोड़ा गया है।

एससी/एसटी कानून के तहत हरिजन के अधिकारों का हनन

  • अध्ययन, अध्यापन व आम विकास के अवसरों से वंचित।
  • धार्मिक ग्रंथों अध्ययन, वाचन और श्रवण पर निषेध।
  • पूजा पाठ और मंदिर में प्रवेश करने पर निषेध। 
  • रथ व घोड़े की सवारी पर मनाही।
  • सार्वजनिक घाटों, तालाबों और कुओं से पानी लेने पर प्रतिबंध।
  • सार्वजनिक धर्मशालाओं, भोजनालयों आदि में प्रवेश पर प्रतिबंध।
  • सम्पत्ति रखने के अधिकार से वंचित।
  • राजनैतिक शासन सम्बंधी अधिकारों पर प्रतिबंध।
  • अस्त्र-शस्त्र धारण करने और युद्ध कला सीखने पर प्रतिबंध।

जो कोई दूसरे वर्ग का नागरिक किसी अनुसूचित जाति या अनूसूचित जनजाति के वर्ग के लोगो को उनके अधिकारों से वंचित करता है या प्रताड़ित करता है, तो वह एससी/एसटी कानून के तहत दण्डनीय होगा।

एससी/एसटी कानून पर सुप्रीम कोर्ट का मत

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून बहुत लचीला है, जिसके चलते हर कोई इस हरिजन कानून का सहारा लेकर किसी भी दूसरे वर्ग/जाति के व्यक्ति पर प्रताड़ना का आरोप आसानी से लगा देता है, और प्रतिवादी को इस कानून के तहत काफी मुश्किलो का सामना करना पड़ जाता है और तो और अधिकांशतः वादी इस कानून का सहारा मुआवजा/सहायता लेने के उद्देश्य से किसी दूसरे वर्ग के व्यक्ति पर आरोप लगा देता है। जिसको देखते हुये सुप्रीम कोर्ट ऑफ इण्डिया व्दारा कुछ सख्ती एवंम् दिशा-निर्देश दिये गये है, जिसके चलते ऐसे झूठे मामलो मे जांच सही ढंग से की जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इण्डिया का मत-

“सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी और इसके तहत मामलों में तुरंत गिरफ़्तारी की जगह शुरुआती जांच की बात कही थी। जस्टिस एके गोयल और यूयू ललित की बेंच ने कहा था कि सात दिनों के भीतर शुरुआती जांच ज़रूर पूरी हो जानी चाहिए।“
सर्वोच्च न्यायालय का पूर्ववर्ती निर्णय
सर्वोच्च न्यायालय ने 20 मार्च 2018 को सुभाष काशीनाथ बनाम महाराष्ट्र राज्य के वाद में निर्णय देते हुए यह प्रावधान किया कि–
“एससी/एसटी कानून के मामलों की जाँच कम से कम डिप्टी एसपी रैंक के अधिकारी द्वारा की जाएगी। पहले यह कार्य इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी करता था। यदि किसी आम आदमी पर एससी-एसटी कानून के अंतर्गत केस दर्ज होता है, तो उसकी भी गिरफ्तारी तुरंत नहीं होगी बल्कि इसके लिये जिले के SP या SSP से अनुमति लेनी होगी।
किसी व्यक्ति पर केस दर्ज होने के बाद उसे अग्रिम जमानत भी दी जा सकती है।
अग्रिम जमानत देने या न देने का अधिकार दंडाधिकारी के पास होगा। अभी तक अग्रिम जमानत नहीं मिलती थी तथा जमानत भी उच्च न्यायालय द्वारा दी जाती थी।
किसी भी सरकारी कर्मचारी/अधिकारी पर केस दर्ज होने पर उसकी गिरफ्तारी तुरंत नहीं होगी, बल्कि उस सरकारी अधिकारी के विभाग से गिरफ्तारी के लिये अनुमति लेनी होगी।

एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध की श्रेणी

SC/ST Act के अन्तर्गत किये गये सभी अपराध गभ्भीर अपराध की श्रेणी मे आते है, इसलिये इस कानून को संज्ञेय अपराध की श्रेणी मे रखा गया है अब बात कर लेते है जमानत की तो ऐसे मामलो मे पहले इतनी असानी से जमानत नही मिल पाती थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलो को जल्द ही संज्ञान मे लेने के पश्चात् इस कानून को थोड़ा सा बदलाव किया है, क्योकि सुप्रीम कोर्ट को भी यह लगने लगा था कि एससी/एसटी एक्ट अधिकांशतः मामलो मे किसी न किसी को फंसाने के उद्देश्य से लगाया जाता है। इसलिये सुप्रीम कोर्ट व्दारा गाइडलाइन के अनुसार किसी व्यक्ति को शिकायत दर्ज होने तुरन्त पश्चात् गिरफ्तार नही किया जायेगा, मामले की छानबीन करने के पश्चात् ही यदि व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो ही गिरफ्तार किया जायेगा।

एससी/एसटी एक्ट के तहत सजा का प्रावधान

हरिजन एक्ट कानून के तहत जो कोई किसी हरिजन व्यक्ति के अधिकारों का हनन करता है अथवा उसे प्रताड़ित करता है, तो वह कम से कम 6 मास से अधिकत् 7 वर्ष तक के कारावास से दण्ड़ित किया जायेगा।  बलात्कार और हत्या जैसे अधिक गंभीर अपराधों के लिए, सजा में आजीवन कारावास या मृत्युदंड शामिल हो सकता है

एससी/एसटी एक्ट में जमानत कैसे मिलेगी?

भारत में, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत जमानत, इतनी आसानी से नही मिल पाती थी , लेकिन हाइकोर्ट के कई निर्णयों के पश्चात् दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के प्रावधानों के अनुसार अगर आरोपी व्यक्ति निम्न शर्तो को पूरा करता है, तो जमानत असानी से मिल सकती है।

SC/ST Act

SC/ST Act मे जमानत पाने के लिये न्यायालय को यह सुनिश्चित कराना होगा कि आरोपी जमानत के हकदार क्यो है जैसे- आरोपी वास्तव मे बेकसूर है, आरोपी व्यक्ति व्दारा न तो उसे डराया है और उसके साथ कोई गलत बर्ताव किया गया है, केवल उसे फंसाने के उद्देश्य यह आरोप लगाया गया है। न्यायालय जमानत अर्जी पर दोनों पक्षो द्वारा प्रस्तुत सबूतों और तर्कों पर विचार करेगी। अगर न्यायालय को यह उचित आधार मिल जाता है कि आरोपी वास्तव मे बेकसूर है, केवल उसे फंसाया गया है, तो न्यायलाय आरोपी को जमानत दे सकती है।

न्यायालय ज़मानत देते समय कुछ शर्तें जरूर लगा सकती है, जैसे कि आरोपी अपना पासपोर्ट सरेंडर कर दे, नियमित पुलिस रिपोर्टिंग प्रस्तुत करे, या गवाहों या पीड़ितों से संपर्क करने से मनाही करे दे। यदि आरोपी व्यक्ति व्दारा सबूतों और तर्कों के आधार न्यायलय को यह सुनिश्चित करा लेता है, और न्यायलय को यह यकीन हो जाता है कि आरोपी वास्तव मे निर्दोष है, तो आरोपी को अंतरिम जमानत या फाइनल जमानत मिल सकती है। यह न्यायालय के विवेक पर निर्भर करता है, कि किन-किन शर्तो का पालन करना जरूरी है। अन्य सभी मामलो मे अलग-अलग भी हो सकते है।

एससी/एसटी एक्ट के तहत सहायता/मुआवजा राशि कितनी है

हरिजन एक्ट मे सबसे बड़ी और सबसे हानिकारक यह सहायता/मुआवजा राशि है, क्योकि अधिकांशतः मामलो मे मुआवजा लेने के लिये ही फसांया जाता है, मुआवजा लेकर अधिकांशतः समझौता कर लेते है।इसलिये इस कानून का दुरूपयोग भी बहुत तेजी से हो है। इस कानून के तहत अनुसूचित जाति एवंम् अनुसूचित जनजाति को आर्थिक मदद् प्रथम चरण मे ही प्रावधान है, यदि किसी हरिजन वर्ग के व्यक्ति को परेशान अथवा जाति के आधार पर नीचा दिखाया गया है, तो एफआईआर दर्ज होने के पश्चात् ही आर्थिक सहायता पहुचांने का प्रावधान है और यह अपराध सिद्ध होने की स्थिति में उत्पीडित व्यक्ति को रू. 40000/- से रू. 500000/- तक आर्थिक सहायता दिये जाने का प्राविधान है।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण ) अधिनियम| SC/ST Act 1989 Section List

1-संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ

2-परिभाषाएं

3-अत्याचार के अपराधों के लिए दंड

4-कर्तव्यों की उपेक्षा के लिए दंड

5-पश्चातवर्ती दोषसिद्धि के लिए वर्धित दंड

6-भारतीय दंड संहिता के कतिपय उपबंधों का लागू होना

7-कतिपय व्यक्तियों की संपत्ति का समपहरण

8-अपराधों के बारे में उपधारणा

9-शक्तियों का प्रदान किया जाना

10-ऐसे व्यक्ति का हटाया जाना जिसके द्वारा अपराध किए जाने की संभावना है

11-किसी व्यक्ति द्वारा संबंधित क्षेत्र से हटने में असफल रहने और वहां से हटने के पश्चात् उसमें प्रवेश करने की दशा में प्रक्रिया

12-ऐसे व्यक्तियों के, जिनके विरुद्ध धारा 10 के अधीन भावेश किया गया है, माप गौर फोटो आदि लेना

13-धारा 10 के अधीन आदेश के अनुपालन के लिए शास्ति

14-विशेष न्यायालय

15-विशेष लोक अभियोजक

16-राज्य सरकार की सामूहिक जुर्माना अधिरोपित करने की शक्ति

17-विधि और व्यवस्था तंत्र द्वारा निवारक कार्यवाही 

18-अधिनियम के अधीन अपराध करने वाले व्यक्तियों को संहित की धारा 438 का लागू न होना

19-इस अधिनियम के अधीन अपराध के लिए वेषी व्यक्तियों को संहिता की धारा 360 या अपराधी परिवीक्षा अधिनियम के उपबंध का लागू न होना

20-अधिनियम का अन्य विधियों पर अध्यारोही होना

21-अधिनियम का प्रभावी क्रियान्च्यन सुनिश्चित करने का सरकार का कर्तव्य

22-सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण

23-नियम बनाने की शक्ति

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न-

  1. SC ST एक्ट में जमानत कैसे होती है?

    एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों के तहत सिर्फ स्पेशल कोर्ट (SC/ST Court) को ही जमानत पर विचार करने का अधिकार है। एक्ट की धारा 14 के तहत सिर्फ स्पेशल कोर्ट ही एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले पर विचार करने के उपरांत ही निर्णय लेती है, कि जमानत देनी है या नही अथवा अंतरिम जमानत या फाइनल जमानत देनी है यह न्यायालय के विवेक पर ही निर्भर करता है।

  2. एससी एसटी एक्ट में गिरफ्तारी कब होती है?

    पहले की बात करे तो एससी एसटी मामला दर्ज होते ही, गिरफ्तारी कर ली जाती थी, लेकिन नई गाइडलाइन के अनुसार अब पहले जांच होगी, उसके पश्चात् ही ज्ञात किया जायेगा कि गिरफ्तारी की जाये या न अथवा जमानत पर छोड़ दिया जाये। वैसे अब जमानत मिल जायेगी, अगर प्रतिवादी बेकसूर है।

  3. एससी एसटी एक्ट की धारा 3 क्या है?

    यदि कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी भी व्यक्ति के साथ जाति-सूचक अभद्रता ऐसे स्थान पर करता है, जो कि एक सार्वजनिक स्थान है, तो उसे एक दंडनीय अपराध माना जाएगा।

  4. क्या हम एससी एसटी संपत्ति खरीद सकते हैं?

    बिना स्वीकृति के एससी एसटी भूमि की बिक्री पर रोक लगाती है, अर्थात् एससी एसटी अगर कोई भूमि बेंच रहा है, तो डीएम या कलेक्टर से प्राधिकरण प्राप्त करके अनुसूचित जाति की भूमि का अधिग्रहण कर सकते हैं। दाखिल-खारिज मे आपका नाम नही दर्ज कराया जा सकता है।

  5. एससी एसटी कानून मे कुल कितनी धारायें होती है?

    इस कानून के अन्तर्गत कुल 5 अध्याय एवंम् 23 धाराये है।

  6. एससी एसटी एक्ट में कितने दिन की सजा है?

    हरिजन एक्ट कानून के तहत जो कोई किसी हरिजन व्यक्ति के अधिकारों का हनन करता है अथवा उसे प्रताड़ित करता है, तो वह कम से कम 6 मास से अधिकत् 7 वर्ष तक के कारावास से दण्ड़ित किया जायेगा। गम्भीर अपराध जैसी स्थिति मे आजीवन से लेकर मृत्युदंड तक भी हो सकता है।

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।