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एससी/एसटी अधिनियम की धारा 17 | विधि और व्यवस्था तंत्र द्वारा निवारक कार्यवाही | SC/ST Act, Section- 17 in hindi | Preventive action to be taken by the law and order machinery.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 17 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 17, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 17 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -17 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। यदि जिला मजिस्ट्रेट या उपखंड मजिस्ट्रेट या किसी अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट या किसी पुलिस अधिकारी को, जो पुलिस उप अधीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो, इत्तिला प्राप्त होने पर और ऐसी जांच करने के पश्चात् जो वह आवश्यक समझे, यह विश्वास कले का कारण है कि किसी ऐसे व्यक्ति या ऐसे व्यक्तियों के समूह द्वारा, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के नहीं हैं, और जो उसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर किसी स्थान पर निवास करते हैं या बार-बार आते जाते हैं, इस अधिनिमय के अधीन कोई अपराध करने की संभावना है या उन्होंने अपराध करने की धमकी दी है और उसकी यह राय है कि कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार है तो वह उस क्षेत्र को अत्याचार ग्रस्त क्षेत्र घोषित कर सकेगा तथा शांति और सदाचार बनाए रखने तथा लोक व्यवस्था और प्रशांति बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई कर सकेगा।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 17 के अनुसार

विधि और व्यवस्था तंत्र द्वारा निवारक कार्यवाही-

(1) यदि जिला मजिस्ट्रेट या उपखंड मजिस्ट्रेट या किसी अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट या किसी पुलिस अधिकारी को, जो पुलिस उप अधीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो, इत्तिला प्राप्त होने पर और ऐसी जांच करने के पश्चात् जो वह आवश्यक समझे, यह विश्वास कले का कारण है कि किसी ऐसे व्यक्ति या ऐसे व्यक्तियों के समूह द्वारा, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के नहीं हैं, और जो उसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर किसी स्थान पर निवास करते हैं या बार-बार आते जाते हैं, इस अधिनिमय के अधीन कोई अपराध करने की संभावना है या उन्होंने अपराध करने की धमकी दी है और उसकी यह राय है कि कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार है तो वह उस क्षेत्र को अत्याचार ग्रस्त क्षेत्र घोषित कर सकेगा तथा शांति और सदाचार बनाए रखने तथा लोक व्यवस्था और प्रशांति बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई कर सकेगा और निवारक कार्रवाई कर सकेगा।
(2) संहिता के अध्याय 8, 10 और 11 के उपबंध जहां तक हो सके, उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए लागू होंगे
(3) राज्य सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, एक या अधिक स्कीमें वह रीति विनिर्दिष्ट करते हुए बना सकेगी जिसमें उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी अत्याचारों के निवारण के लिए तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों में सुरक्षा की भावना पुनः लाने के लिए ऐसी स्कीम या स्कीमों में विनिर्दिष्ट समुचित कार्रवाई करेंगे।

Preventive action to be taken by the law and order machinery—
(1) A District Magistrate or a Sub-divisional Magistrate or any other Executive Magistrate or any police officer not below the rank of a Deputy Superintendent of Police may, on receiving information and after such inquiry as he may think necessary, has reason to believe that a person or a group of persons not belonging to the Scheduled Castes or the Scheduled Tribes, residing in or frequenting any place within the local limits of his jurisdiction is likely to commit an offence or has threatened to commit any offence under this Act and is of the opinion that there is sufficient ground for proceeding, declare such an area to be an area prone to atrocities and take necessary action for keeping the peace and good behaviour and maintenance of public order and tranquility and may take preventive action.
(2) The provisions of Chapters VIII, X and XI of the Code shall, so far as may be, apply for the purposes of sub-section (1).
(3) The State Government may, by notification in the Official Gazette, make one or more schemes specifying the manner in which the officers referred to in sub-section (1) shall take appropriate action specified in such scheme or schemes to prevent atrocities and to restore the feeling of security amongst the members of the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 17 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा 16 | राज्य सरकार की सामूहिक जुर्माना अधिरोपित करने की शक्ति | SC/ST Act, Section- 16 in hindi | Power of State Government to impose collective fine.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 16 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 16, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 16 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -16 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 (1955 का 22) की धारा 10क के उपबंध, जहां तक हो सके, इस अधिनियम के अधीन सामूहिक जुर्माता अधिरोपित कले और वसूल करने के प्रयोजनों के लिए और उससे संबद्ध सभी अन्य विषयों के लिए लागू होंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 16 के अनुसार

राज्य सरकार की सामूहिक जुर्माना अधिरोपित करने की शक्ति-

सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 (1955 का 22) की धारा 10क के उपबंध, जहां तक हो सके, इस अधिनियम के अधीन सामूहिक जुर्माता अधिरोपित कले और वसूल करने के प्रयोजनों के लिए और उससे संबद्ध सभी अन्य विषयों के लिए लागू होंगे।

Power of State Government to impose collective fine—
The provisions of section 10A of the Protection of Civil Rights Act, 1955 (22 of 1955) shall, so far as may be, apply for the purposes of imposition and realisation of collective fine and for all other matters connected therewith under this Act.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 16 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा 15 | विशेष लोक अभियोजक | SC/ST Act, Section- 15 in hindi | Special Public Prosecutor.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 15 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 15, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 15 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -15 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। राज्य सरकार, प्रत्येक विशेष न्यायालय के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, एक लोक अभियोजक विनिर्दिष्ट करेगी या किसी ऐसे अधिवक्ता को, जिसने कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में विधि व्यवसाय । किया हो, उस न्यायालय में मामलों के संचालन के प्रयोजन के लिए विशेष लोक, अभियोजक के रूप में नियुक्त करेगी।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 15 के अनुसार

विशेष लोक अभियोजक-

राज्य सरकार, प्रत्येक विशेष न्यायालय के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, एक लोक अभियोजक विनिर्दिष्ट करेगी या किसी ऐसे अधिवक्ता को, जिसने कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में विधि व्यवसाय । किया हो, उस न्यायालय में मामलों के संचालन के प्रयोजन के लिए विशेष लोक, अभियोजक के रूप में नियुक्त करेगी।

Special Public Prosecutor—
For every Special Court, the State Government shall, by notification in the Official Gazette, specify a Public Prosecutor or appoint an advocate who has been in practice as an advocate for not less than seven years, as a Special Public Prosecutor for the purpose of conducting cases in that court.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 15 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा 14 | विशेष न्यायालय | SC/ST Act, Section- 14 in hindi | Special Court.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 14 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 14, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 14 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -14 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। राज्य सरकार, शीघ्र विचारण का उपबंध कले के प्रयोजन के लिए, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की सहमति से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन अपराधों का विचारण करने के लिए प्रत्येक जिले के लिए एक सेशन न्यायालय को विशेष न्यायालय के रूप में विनिर्दिष्ट करेगी।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 14 के अनुसार

विशेष न्यायालय-

राज्य सरकार, शीघ्र विचारण का उपबंध कले के प्रयोजन के लिए, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की सहमति से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन अपराधों का विचारण करने के लिए प्रत्येक जिले के लिए एक सेशन न्यायालय को विशेष न्यायालय के रूप में विनिर्दिष्ट करेगी।

Special Court—
For the purpose of providing for speedy trial, the State Government shall, with the concurrence of the Chief Justice of the High Court, by notification in the Official Gazette, specify for each district a Court of Session to be a Special Court to try the offences under this Act.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 14 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा 13 | धारा 10 के अधीन आदेश के अनुपालन के लिए शास्ति | SC/ST Act, Section- 13 in hindi | Penalty for noncompliance of order under section 10.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 13 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 13, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है और क्या सजा का प्रावधान है। यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 13 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -13 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। वह व्यक्ति जो धारा 10 के अधीन किए गए विशेष न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करेगा, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से दंडनीय होगा।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 13 के अनुसार

धारा 10 के अधीन आदेश के अनुपालन के लिए शास्ति-

वह व्यक्ति जो धारा 10 के अधीन किए गए विशेष न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करेगा, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से दंडनीय होगा।
Penalty for noncompliance of order under section 10—
Any person contravening an order of the Special Court made under section 10 shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to one year and with fine.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 13 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा 12 | ऐसे व्यक्तियों के, जिनके विरुद्ध धारा 10 के अधीन आदेश किया गया है, माप और फोटो आदि लेना | SC/ST Act, Section- 12 in hindi | Taking measurements and photographs, etc, of persons against whom order under section 10 is made.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए एससी/एसटी अधिनियम की धारा 12 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है एससी/एसटी की धारा- 12, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 12 का विवरण

एससी/एसटी अधिनियम (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act) की धारा -12 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। यह धारा कोई व्यक्ति जिससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने माप या फोटो लेने दे, इस प्रकार माप या फोटो लिये जाने का प्रतिरोध करता है या उससे इन्कार करता है तो यह विधिपूर्ण होगा कि माप या फोटो लिये जाने को सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाएं।

एससी/एसटी अधिनियम की धारा- 12 के अनुसार

ऐसे व्यक्तियों के, जिनके विरुद्ध धारा 10 के अधीन आदेश किया गया है, माप और फोटो आदि लेना-

(1) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जिसके विरुद्ध धारा 10 के अधीन आदेश किया गया है विशेष न्यायालय द्वारा ऐसी अपेक्षा की जाने पर, किसी पुलिस अधिकारी को अपने माप और फोटो लेने देगा।
(2) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई व्यक्ति जिससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने माप या फोटो लेने दे, इस प्रकार माप या फोटो लिये जाने का प्रतिरोध करता है या उससे इन्कार करता है तो यह विधिपूर्ण होगा कि माप या फोटो लिये जाने को सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाएं।
(3) उपधारा (2) के अधीन लिए जाने वाले माप या फोटो का प्रतिरोध या उससे इंकार करने को भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 186 के अधीन अपराध समझा जाएगा।
(4) जहां धारा 10 के अधीन किया गया आदेश प्रतिसंहृत कर दिया जाता है वहां उपधारा (2) के अधीन लिए गए सभी.. माप और फोटो (जिसके अंतर्गत नेगेटिव भी हैं) नष्ट कर दिए जाएंगे या उस व्यक्ति को सौंप दिए जाएंगे जिसके विरुद्ध आदेश किया गया था।

Taking measurements and photographs, etc., of persons against whom order under section 10 is made—
(1) Every person against whom an order has been made under section 10 shall, if so required by the Special Court, allow his measurements and photographs to be taken by a police officer.
(2) If any person referred to in sub-section (1), when required to allow his measurements or photographs to be taken, resists or refuses to allow the taking of such measurements or photographs, it shall be lawful to use all necessary means to secure the taking thereof.
(3) Resistance to or refusal to allow the taking of measurements or photographs under sub-section (2) shall be deemed to be an offence under section 186 of the Indian Penal Code (45 of 1860).
(4) Where an order under section 10 is revoked, all measurements and photographs (including negatives) taken under sub-section (2) shall be destroyed or made over to the person against whom such order is made.

हमारा प्रयास एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 12 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।