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सीआरपीसी की धारा 315 | अभियुक्त व्यक्ति का सक्षम साक्षी होना | CrPC Section- 315 in hindi| Accused person to be competent witness.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 315 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 315 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 315 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 315 के अन्तर्गत कोई व्यक्ति, जो किसी अपराध के लिए किसी दण्ड न्यायालय के समक्ष अभियुक्त है, प्रतिरक्षा के लिए सक्षम साक्षी होगा और अपने विरुद्ध या उसी विचारण में उसके साथ आरोपित किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को नासाबित करने के लिए शपथ पर साक्ष्य दे सकता है, परन्तु वह स्वयं अपनी लिखित प्रार्थना के बिना साक्षी के रूप में न बुलाया जाएगा अथवा उसका स्वयं साक्ष्य न देना पक्षकारों में से किसी के द्वारा या न्यायालय द्वारा किसी टीका टिप्पणी का विषय न बनाया जायगा और न उसे उसके, या उसी विचारण में उसके साथ आरोपित किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई उपधारणा ही की जाएगी।

सीआरपीसी की धारा 315 के अनुसार

अभियुक्त व्यक्ति का सक्षम साक्षी होना—

(1) कोई व्यक्ति, जो किसी अपराध के लिए किसी दण्ड न्यायालय के समक्ष अभियुक्त है, प्रतिरक्षा के लिए सक्षम साक्षी होगा और अपने विरुद्ध या उसी विचारण में उसके साथ आरोपित किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को नासाबित करने के लिए शपथ पर साक्ष्य दे सकता है:
परन्तु –
(क) वह स्वयं अपनी लिखित प्रार्थना के बिना साक्षी के रूप में न बुलाया जाएगा,
(ख) उसका स्वयं साक्ष्य न देना पक्षकारों में से किसी के द्वारा या न्यायालय द्वारा किसी टीका टिप्पणी का विषय न बनाया जायगा और न उसे उसके, या उसी विचारण में उसके साथ आरोपित किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई उपधारणा ही की जाएगी।
(2) कोई व्यक्ति जिसके विरुद्ध किसी दण्ड न्यायालय धारा 98, या धारा 107, या धारा 108, या धारा 109 या धारा 110 के अधीन या अध्याय 9 के अधीन या अध्याय 10 के भाग ख, भाग ग या भाग घ के अधीन कार्यवाही संस्थित की जाती, ऐसी कार्यवाही में अपने आपको साक्षी के रूप में पेश कर सकता है :
परन्तु धारा 108, धारा 109 या धारा 110 के अधीन कार्यवाही में ऐसे व्यक्ति द्वारा साक्ष्य न देना पक्षकारों में से किसी के द्वारा या न्यायालय द्वारा किसी टीका-टिप्पणी का विषय नहीं बनाया जाएगा और न उसे उसके या किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध जिसके विरुद्ध उसी जांच में ऐसे व्यक्ति के साथ कार्यवाही की गई है, कोई उपधारणा ही की जाएगी।

Accused person to be competent witness-
(1) Any person accused of an offence before a Criminal Court shall be a competent witness for the defence and may give evidence on oath in disproof of the charges made against him or any person charged together with him at the same trial :
Provided that-
(a) he shall not be called as a witness except on his own request in writing ;
(b) his failure to give evidence shall not be made the subject of any comment by any of the parties or the Court or give rise to any presumption against himself or any person charged together with him at the same trial.
(2) Any person against whom proceedings are instituted in any Criminal Court under Section 98, or Section 107, or Section 108, or Section 109, or Section 110, or under Chapter IX or under Part B, Part C or Part D of Chapter X, may offer himself as a witness in such proceedings :
Provided that in proceedings under Section 108, Section 109 or Section 110, the failure of such person to give evidence shall not be made the subject of any comment by any of the parties or the Court or give rise to any presumption against him or any other person proceeded against together with him at the same inquiry.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 315 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 314 | मौखिक बहस और बहस का ज्ञापन | CrPC Section- 314 in hindi| Oral arguments and memorandum of arguments.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 314 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 314 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 314 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 314 के अन्तर्गत कार्यवाही का कोई पक्षकार, अपने साक्ष्य की समाप्ति के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र संक्षिप्त मौखिक बहस कर सकता है और अपनी मौखिक बहस, यदि कोई हो, पूरी करने के पूर्व, न्यायालय को एक ज्ञापन दे सकता है जिसमें उसके पक्ष के समर्थन में तर्क संक्षेप में और सुभिन्न शीर्षकों में दिए जाएंगे, और ऐसा प्रत्येक ज्ञापन अभिलेख का भाग होगा। ऐसे प्रत्येक ज्ञापन की एक प्रतिलिपि उसी समय विरोधी पक्षकार को दी जाएगी। कार्यवाही का कोई स्थगन लिखित बहस फाइल करने के प्रयोजन के लिए तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक न्यायालय ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किये जाएंगे, ऐसा स्थगन मंजूर करना आवश्यक न समझे।यदि न्यायालय की यह राय है कि मौखिक बहस संक्षिप्त या सुसंगत नहीं है तो वह ऐसी बहसों को विनियमित कर सकता है।

सीआरपीसी की धारा 314 के अनुसार

मौखिक बहस और बहस का ज्ञापन-

(1) कार्यवाही का कोई पक्षकार, अपने साक्ष्य की समाप्ति के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र संक्षिप्त मौखिक बहस कर सकता है और अपनी मौखिक बहस, यदि कोई हो, पूरी करने के पूर्व, न्यायालय को एक ज्ञापन दे सकता है जिसमें उसके पक्ष के समर्थन में तर्क संक्षेप में और सुभिन्न शीर्षकों में दिए जाएंगे, और ऐसा प्रत्येक ज्ञापन अभिलेख का भाग होगा।
(2) ऐसे प्रत्येक ज्ञापन की एक प्रतिलिपि उसी समय विरोधी पक्षकार को दी जाएगी।
(3) कार्यवाही का कोई स्थगन लिखित बहस फाइल करने के प्रयोजन के लिए तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक न्यायालय ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किये जाएंगे, ऐसा स्थगन मंजूर करना आवश्यक न समझे।
(4) यदि न्यायालय की यह राय है कि मौखिक बहस संक्षिप्त या सुसंगत नहीं है तो वह ऐसी बहसों को विनियमित कर सकता है।

Oral arguments and memorandum of arguments-
(1) Any party to a proceeding may, as soon as may be, after the close of his evidence, address concise oral arguments, and may, before he concludes the oral arguments, if any, submit a memorandum to the Court setting forth concisely and under distinct headings, the arguments in support of his case and every such memorandum shall form part of the record.
(2) A copy of every such memorandum shall be simultaneously furnished to the opposite party.
(3) No adjournment of the proceedings shall be granted for the purpose of filing the written arguments unless the Court, for reasons to be recorded in writing, considers it necessary to grant such adjournment.
(4) The Court may, if it is of opinion that the oral arguments are not concise or relevant, regulate such arguments.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 314 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 313 | अभियुक्त की परीक्षा करने की शक्ति | CrPC Section- 313 in hindi| Power to examine the accused.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 313 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 313 के अन्तर्गत जब किसी मामले में जाँच या विचारण में, इस प्रयोजन से कि अभियुक्त अपने विरुद्ध साक्ष्य में प्रकट होने वाली किन्हीं परिस्थितियों का स्वयं स्पष्टीकरण कर सके। अभियुक्त की उपधारा (1) के अधीन परीक्षा की जाती है तब उसे कोई शपथ न दिलाई जाएगी। अभियुक्त ऐसे प्रश्नों के उत्तर देने से इन्कार करने से या उनके मिथ्या उत्तर देने से दण्डनीय न हो जाएगा। अभियुक्त द्वारा दिए गए उत्तरों पर उस जांच या विचारण में विचार किया जा सकता है और किसी अन्य ऐसे अपराध की, जिसका उसके द्वारा किया जाना दर्शाने की उन उत्तरों की प्रवृत्ति हो, किसी अन्य जांच या विचारण में ऐसे उत्तरों को उसके पक्ष में या उसके विरुद्ध साक्ष्य के तौर पर रखा जा सकता है।

सीआरपीसी की धारा 313 के अनुसार

अभियुक्त की परीक्षा करने की शक्ति–

(1) प्रत्येक जाँच या विचारण में, इस प्रयोजन से कि अभियुक्त अपने विरुद्ध साक्ष्य में प्रकट होने वाली किन्हीं परिस्थितियों का स्वयं स्पष्टीकरण कर सके, न्यायालय-
(क) किसी प्रक्रम में, अभियुक्त को पहले से चेतावनी दिए बिना, उससे ऐसे प्रश्न कर सकता है। जो न्यायालय आवश्यक समझे ;
(ख) अभियोजन के साक्षियों की परीक्षा किए जाने के पश्चात् और अभियुक्त से अपनी प्रतिरक्षा करने की अपेक्षा किए जाने के पूर्व उस मामले के बारे में उससे साधारणतया प्रश्न करेगा:
परन्तु किसी समन-मामले में, जहां न्यायालय ने अभियुक्त को वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दे दी है, वहां वह खंड (ख) के अधीन उसकी परीक्षा से भी अभिमुक्ति दे सकता है।
(2) जब अभियुक्त की उपधारा (1) के अधीन परीक्षा की जाती है तब उसे कोई शपथ न दिलाई जाएगी।
(3) अभियुक्त ऐसे प्रश्नों के उत्तर देने से इन्कार करने से या उनके मिथ्या उत्तर देने से दण्डनीय न हो जाएगा।
(4) अभियुक्त द्वारा दिए गए उत्तरों पर उस जांच या विचारण में विचार किया जा सकता है और किसी अन्य ऐसे अपराध की, जिसका उसके द्वारा किया जाना दर्शाने की उन उत्तरों की प्रवृत्ति हो, किसी अन्य जांच या विचारण में ऐसे उत्तरों को उसके पक्ष में या उसके विरुद्ध साक्ष्य के तौर पर रखा जा सकता है।
(5) न्यायालय उन सुसंगत प्रश्नों, जो अभियुक्त के समक्ष किये जाने हैं, को तैयार करने में अभियोजक तथा प्रतिरक्षा अधिवक्ता की सहायता ले सकेगा तथा न्यायालय उस धारा के पर्याप्त अनुपालन के रूप में अभियुक्त द्वारा लिखित कथन दाखिल किए जाने की अनुज्ञा दे सकेगा।

Power to examine the accused-
(1) In every inquiry or trial, for the purpose of enabling the accused personally to explain any circumstances appearing in the evidence against him, the Court-
(a) may at any stage, without previously warning the accused, put such questions to him as the Court considers necessary;
(b) shall, after the witnesses for the prosecution have been examined and before he is called on for his defence, question him generally on the case;
Provided that in a summons-case, where the Court has dispensed with the personal attendance of the accused, it may also dispense with his examination under clause (b).
(2) No oath shall be administered to the accused when he is examined under sub section (1).
(3) The accused shall not render himself liable to punishment by refusing to answer such questions, or by giving false answers to them.
(4) The answers given by the accused may be taken into consideration in such inquiry or trial, and put in evidence for or against him in any other inquiry into, or trial for, any other offence, which such answers may tend to show he has committed.
(5) The Court may take help of Prosecutor and Defence Counsel in preparing relevant questions which are to be put to the accused and the Court may permit filing of written statement by the accused as sufficient compliance of this section.

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सीआरपीसी की धारा 312 | परिवादियों और साक्षियों के व्यय | CrPC Section- 312 in hindi| Expenses of complainants and witnesses.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 312 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 312 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 312 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 312 के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, यदि कोई दण्ड न्यायालय ठीक समझता है तो वह ऐसे न्यायालय के समक्ष इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के प्रयोजन से हाजिर होने वाले किसी परिवादी या साक्षी के उचित व्ययों के राज्य सरकार द्वारा दिए जाने के लिए आदेश दे सकता है।

सीआरपीसी की धारा 312 के अनुसार

परिवादियों और साक्षियों के व्यय-

राज्य सरकार द्वारा बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, यदि कोई दण्ड न्यायालय ठीक समझता है तो वह ऐसे न्यायालय के समक्ष इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के प्रयोजन से हाजिर होने वाले किसी परिवादी या साक्षी के उचित व्ययों के राज्य सरकार द्वारा दिए जाने के लिए आदेश दे सकता है।

Expenses of complainants and witnesses-
Subject to any rules made by the State Government, any Criminal Court may, if it thinks fit, order payment, on the part of Government, of the reasonable expenses of any complainant or witness attending for the purposes of any inquiry, trial or other proceeding before such Court under this Code.

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सीआरपीसी की धारा 311A | नमूना हस्ताक्षर या हस्तलेख देने के लिए किसी व्यक्ति को आदेश देने की मजिस्ट्रेट की शक्ति | CrPC Section- 311A in hindi| Power of Magistrate to order person to give specimen signatures or handwriting.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 311A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 311A कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 311A का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 311A के अन्तर्गत यदि प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट का समाधान हो जाता है कि इस संहिता के अधीन किसी अन्वेषण या कार्यवाही के प्रयोजन के लिए नमूना हस्ताक्षर या हस्तलेख देने के लिए किसी व्यक्ति को, जिसके अन्तर्गत अभियुक्त व्यक्ति भी है, निर्देश देना समीचीन है, तो वह उस आशय का आदेश कर सकेगा और उस दशा में, वह व्यक्ति जिससे आदेश संबंधित है, ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट समय और स्थान पर पेश किया जाएगा या वहाँ उपस्थित होगा और अपने नमूना हस्ताक्षर या हस्तलेख देगा, परन्तु इस धारा के अधीन कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि उस व्यक्ति को ऐसे अन्वेषण या कार्यवाही के संबंध में किसी समय गिरफ्तार न किया गया हो।

सीआरपीसी की धारा 311A के अनुसार

नमूना हस्ताक्षर या हस्तलेख देने के लिए किसी व्यक्ति को आदेश देने की मजिस्ट्रेट की शक्ति-

यदि प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट का समाधान हो जाता है कि इस संहिता के अधीन किसी अन्वेषण या कार्यवाही के प्रयोजन के लिए नमूना हस्ताक्षर या हस्तलेख देने के लिए किसी व्यक्ति को, जिसके अन्तर्गत अभियुक्त व्यक्ति भी है, निर्देश देना समीचीन है, तो वह उस आशय का आदेश कर सकेगा और उस दशा में, वह व्यक्ति जिससे आदेश संबंधित है, ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट समय और स्थान पर पेश किया जाएगा या वहाँ उपस्थित होगा और अपने नमूना हस्ताक्षर या हस्तलेख देगा :
परन्तु इस धारा के अधीन कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि उस व्यक्ति को ऐसे अन्वेषण या कार्यवाही के संबंध में किसी समय गिरफ्तार न किया गया हो।

Power of Magistrate to order person to give specimen signatures or handwriting-
If a Magistrate of the first class is satisfied that, for the purposes of any investigation or proceeding under this Code, it is expedient to direct any person, including an accused person, to give specimen signatures or handwriting, he may make an order to that effect and in that case the person to whom the order relates shall be produced or shall attend at the time and place specified in such order and shall give his specimen signatures or handwriting :
Provided that no order shall be made under this section unless the person has at some time been arrested in connection with such investigation or proceeding.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 311A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 311 | आवश्यक साक्षी को समन करने या उपस्थित व्यक्ति की परीक्षा करने की शक्ति | CrPC Section- 311 in hindi| Power to summon material witness, or examine person present.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 311 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 311 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 311 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 311 के अन्तर्गत कोई न्यायालय इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के किसी प्रक्रम में किसी व्यक्ति को साक्षी के तौर पर समन कर सकता है या किसी ऐसे व्यक्ति की, जो हाजिर हो, यद्यपि वह साक्षी के रूप में समन न किया गया हो, परीक्षा कर सकता है, किसी व्यक्ति को, जिसकी पहले परीक्षा की जा चुकी है। पुन: बुला सकता है और उसकी पुनः परीक्षा कर सकता है; और यदि न्यायालय को मामले के न्यायसंगत विनिश्चय के लिए किसी ऐसे व्यक्ति का साक्ष्य आवश्यक प्रतीत होता है तो वह ऐसे व्यक्ति को समन करेगा और उसकी परीक्षा करेगा या उसे पुन:बुलाएगा और उसकी पुन: परीक्षा करेगा।

सीआरपीसी की धारा 311 के अनुसार

आवश्यक साक्षी को समन करने या उपस्थित व्यक्ति की परीक्षा करने की शक्ति–

कोई न्यायालय इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के किसी प्रक्रम में किसी व्यक्ति को साक्षी के तौर पर समन कर सकता है या किसी ऐसे व्यक्ति की, जो हाजिर हो, यद्यपि वह साक्षी के रूप में समन न किया गया हो, परीक्षा कर सकता है, किसी व्यक्ति को, जिसकी पहले परीक्षा की जा चुकी है। पुन: बुला सकता है और उसकी पुनः परीक्षा कर सकता है; और यदि न्यायालय को मामले के न्यायसंगत विनिश्चय के लिए किसी ऐसे व्यक्ति का साक्ष्य आवश्यक प्रतीत होता है तो वह ऐसे व्यक्ति को समन करेगा और उसकी परीक्षा करेगा या उसे पुन:बुलाएगा और उसकी पुन: परीक्षा करेगा।

Power to summon material witness, or examine person present-
Any Court may, at any stage of any inquiry, trial or other proceeding under this Code, summon any person as a witness, or examine any person in attendance, though not summoned as a witness, or recall and re-examine any person already examined; and the Court shall summon and examine or recall and re-examine any such person if his evidence appears to it to be essential to the just decision of the case.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 311 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।