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सीआरपीसी की धारा 181 | कुछ अपराधों की दशा में विचारण का स्थान | CrPC Section- 181 in hindi| Place of trial in case of certain offences.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 181 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 181 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 181 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 181 के अन्तर्गत जब ठग होने के, या ढंग द्वारा हत्या के, डकैती के, हत्या सहित डकैती के, डकैतों की टोली का होना, व्यपहरण या अपहरण अथवा  चोरी, उद्दापन या लूट जैसे अपराधों में विचारण का स्थान ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर अपराध किया गया है या अभियुक्त व्यक्ति मिला है अथवा जिसने उस सम्पत्ति को चुराई हुई सम्पत्ति जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए प्राप्त किया या रखे रखा।

सीआरपीसी की धारा 181 के अनुसार

कुछ अपराधों की दशा में विचारण का स्थान–

(1) ठग होने के, या ढंग द्वारा हत्या के, डकैती के, हत्या सहित डकैती के, डकैतों की टोली का होने के, या अभिरक्षा से निकल भागने के किसी अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर अपराध किया गया है या अभियुक्त व्यक्ति मिला है।
(2) किसी व्यक्ति के व्यपहरण या अपहरण के किसी अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर वह व्यक्ति व्यपहृत या अपहृत किया गया या से जाया गया या छिपाया गया या निरुद्ध किया गया है।
(3) चोरी, उद्दापन या लूट के किसी अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर ऐसा अपराध किया गया है या चुराई हुई सम्पत्ति को जो कि अपराध का विषय है उसे करने वाले व्यक्ति द्वारा या किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा कब्जे में रखी गई है जिसने उस सम्पत्ति को चुराई हुई सम्पत्ति जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए प्राप्त किया या रखे रखा।
(4) आपराधिक दुर्विनियोग या आपराधिक न्यासभंग के किसी अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर अपराध किया गया है या उस सम्पत्ति का, जो अपराध का विषय है, कोई भाग अभियुक्त व्यक्ति द्वारा प्राप्त किया गया या रखा गया है अथवा उसका लौटाया जाना या लेखा दिया जाना अपेक्षित है।
(5) किसी ऐसे अपराध की, जिसमें चुराई हुई सम्पत्ति का कब्जा भी है, जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर ऐसा अपराध किया गया है या चुराई हुई सम्पत्ति किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा कब्जे में रखी गई है, जिसने उसे चुराई हुई जानते हुए या विश्वास करने का कारण होते हुए प्राप्त किया या रखे रखा।

Place of trial in case of certain offences-
(1) Any offence of being a thug, or murder committed by a thug, of dacoity, of dacoity with murder, of belonging to a gang of dacoits, or of escaping from custody, may be inquired into or tried by a Court within whose local jurisdiction the offence was committed or the accused person is found.
(2) Any offence of kidnapping or abduction of a person may be inquired into or tried by a Court within whose local jurisdiction the person was kidnapped or abducted or was conveyed or concealed or detained.
(3) Any offence of theft, extortion or robbery may be inquired into or tried by a Court within whose local jurisdiction the offence was committed or the stolen property which is the subject of the offence was possessed by any person committing it or by any person who received or retained such property knowing or having reason to believe it to be stolen property.
(4) Any offence of criminal misappropriation or of criminal breach of trust may be inquired into or tried by a Court within whose local jurisdiction the offence was committed or any part of the property which is the subject of the offence was received or retained, or was required to be returned or accounted for, by the accused person.
(5) Any offence which includes the possession of stolen property may be inquired into or tried by a Court within whose local jurisdiction the offence was committed or the stolen property was possessed by any person who received or retained it knowing or having reason to believe it to be stolen property.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 181 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 180 | जहां कार्य अन्य अपराध से सम्बन्धित होने के कारण अपराध है वहां विचारण का स्थान | CrPC Section- 180 in hindi| Place of trial where act is an offence by reason of relation to other offence.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 180 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 180 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 180 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 180 के अन्तर्गत जब कोई कार्य किसी ऐसे अन्य कार्य से सम्बन्धित होने के कारण अपराध है, जो स्वयं भी अपराध है या अपराध होता यदि कर्त्ता अपराध करने के लिए समर्थ होता, तब प्रथम वर्णित अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर उन दोनों में से कोई भी कार्य किया गया है। यह धारा 180 ऐसे मामलों में जहां कार्य अन्य अपराध से सम्बन्धित होने के कारण अपराध है वहां विचारण का स्थान की जांच प्रक्रिया को बतलाता है।

सीआरपीसी की धारा 180 के अनुसार

जहां कार्य अन्य अपराध से सम्बन्धित होने के कारण अपराध है वहां विचारण का स्थान-

जब कोई कार्य किसी ऐसे अन्य कार्य से सम्बन्धित होने के कारण अपराध है, जो स्वयं भी अपराध है या अपराध होता यदि कर्त्ता अपराध करने के लिए समर्थ होता, तब प्रथम वर्णित अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर उन दोनों में से कोई भी कार्य किया गया है।

Place of trial where act is an offence by reason of relation to other offence-
When an act is an offence by reason of its relation to any other act which is also an offence or which would be an offence if the doer were capable of committing an offence, the first-mentioned offence may be inquired into or tried by a Court within whose local jurisdiction either act was done.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 180 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 179 | अपराध वहां विचारणीय होगा जहां कार्य किया गया या जहां परिणाम निकला | CrPC Section- 179 in hindi| Offence triable where act is done or consequence ensues.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 179 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 179 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 179 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 179 के अन्तर्गत जब कोई कार्य किसी की गई बात के और किसी निकले हुए परिणाम के कारण अपराध है तब ऐसे अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर ऐसी बात की गई या ऐसा परिणाम निकला। यह धारा 179 ऐसे मामलों में अपराध वहां विचारणीय होगा जहां कार्य किया गया या जहां परिणाम निकला प्रक्रिया को बतलाता है।

सीआरपीसी की धारा 179 के अनुसार

अपराध वहां विचारणीय होगा जहां कार्य किया गया या जहां परिणाम निकला–

जब कोई कार्य किसी की गई बात के और किसी निकले हुए परिणाम के कारण अपराध है तब ऐसे अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर ऐसी बात की गई या ऐसा परिणाम निकला।

Offence triable where act is done or consequence ensues-
When an act is an offence by reason of anything which has been done and of a consequence which has ensued, the offence may be inquired into or tried by a Court within whose local jurisdiction such thing has been done or such consequence has ensued.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 179 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 178 | जांच या विचारणं का स्थान | CrPC Section- 178 in hindi| Place of inquiry or trial.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 178 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 178 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 178 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 178 के अन्तर्गत जब किसी मामले मे पुलिस अधिकारी अथवा भारसाधक अधिकारी जांच करता है तो जांच अधिकारी, अपराध किये गये स्थान निश्चित है अथवा नही या किसी एक से अधिक से स्थानीय क्षेत्रो में किए गए कई कार्यों से मिलकर बनता है, वहां उसकी जांच या विचारण ऐसे स्थानीय क्षेत्रों में से किसी पर अधिकारिता रखने वाले न्यायालय द्वारा किया जा सकता है। यह धारा 178 ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारी व्दारा अन्वेषण के पश्चात् साक्ष्य अपर्याप्त होने के अभियुक्त को छोडा जाना प्रक्रिया को बतलाता है।

सीआरपीसी की धारा 178 के अनुसार

जांच या विचारणं का स्थान-

(क) जहां यह अनिश्चित है कि कई स्थानीय क्षेत्रों में से किसमें अपराध किया गया है, अथवा
(ख) जहां अपराध अंशत: एक स्थानीय क्षेत्र में और अंशत: किसी दूसरे में किया गया है, अथवा
(ग) जहां अपराध चालू रहने वाला है और उसका किया जाना एक से अधिक स्थानीय क्षेत्रों में चालू रहता है, अथवा
(घ) जहां वह विभिन्न स्थानीय क्षेत्रों में किए गए कई कार्यों से मिलकर बनता है, वहां उसकी जांच या विचारण ऐसे स्थानीय क्षेत्रों में से किसी पर अधिकारिता रखने वाले न्यायालय द्वारा किया जा सकता है।

Place of inquiry or trial-
(a) when it is uncertain in which of several local areas an offence was committed, or
(b) where an offence is committed partly in one local area and partly in another, or
(c) where an offence is continuing one, and continues to be committed in more local areas than one, or
(d) where it consists of several acts done in different local areas, it may be inquired into or tried by a Court having jurisdiction over any of such local areas.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 178 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 177 | जांच और विचारण का मामूली स्थान | CrPC Section- 177 in hindi| Ordinary place of inquiry and trial.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 177 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 177 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 177 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 177 के अन्तर्गत प्रत्येक अपराध की जांच और विचारण मामूली तौर पर ऐसे न्यायालय द्वारा किया जाएगा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर वह अपराध किया गया है। यह धारा 177 ऐसे मामलों की जांच एवंम् अपराधिक स्थान की प्रक्रिया को बतलाता है।

सीआरपीसी की धारा 177 के अनुसार

जांच और विचारण का मामूली स्थान-

प्रत्येक अपराध की जांच और विचारण मामूली तौर पर ऐसे न्यायालय द्वारा किया जाएगा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर वह अपराध किया गया है।

Ordinary place of inquiry and trial-
Every offence shall ordinarily be inquired into and tried by a Court within whose local jurisdiction it was committed.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 177 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 175 | व्यक्तियों को समन करने की शक्ति | CrPC Section- 175 in hindi| Power to summon persons.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 175 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 175 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 175 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 175 के अन्तर्गत जब किसी मामले मे जांच अधिकारी अथवा भारसाधक अधिकारी को प्रतीत होता हो कि ये कुछ व्यक्ति किसी साक्ष्य को छिपा रहे है अथवा छिपाने का प्रयास कर रहे है, तो जांच अधिकारी ऐसे व्यक्तियों को समन जारी कर बुला सकते है तथा ऐसे समन किया गया प्रत्येक व्यक्ति हाजिर होने के लिए और उन प्रश्नों के सिवाय, जिनके उत्तरों की प्रवृत्ति उसे आपराधिक आरोप या शास्ति या समपहरण की आशंका में डालने की है, सब प्रश्नों का सही-सही उत्तर देने के लिए आबद्ध होगा। यह धारा 175 ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारी व्दारा अन्वेषण मे किसी दूसरे व्यक्ति को समन करके बुलाये जाने शक्ति की प्रक्रिया को बताता है।

सीआरपीसी की धारा 175 के अनुसार

व्यक्तियों को समन करने की शक्ति–

(1) धारा 174 के अधीन कार्यवाही करने वाला पुलिस अधिकारी यथापूर्वोक्त दो या अधिक व्यक्तियों को उक्त अन्वेषण के प्रयोजन से और किसी अन्य ऐसे व्यक्ति को, जो मामले के तथ्यों से परिचित प्रतीत होता है, लिखित आदेश द्वारा समन कर सकता है तथा ऐसे समन किया गया प्रत्येक व्यक्ति हाजिर होने के लिए और उन प्रश्नों के सिवाय, जिनके उत्तरों की प्रवृत्ति उसे आपराधिक आरोप या शास्ति या समपहरण की आशंका में डालने की है, सब प्रश्नों का सही-सही उत्तर देने के लिए आबद्ध होगा।
(2) यदि तथ्यों से ऐसा कोई संज्ञेय अपराध, जिसे धारा 170 लागू है, प्रकट नहीं होता है तो पुलिस अधिकारी ऐसे व्यक्ति से मजिस्ट्रेट के न्यायालय में हाजिर होने की अपेक्षा न करेगा।

Power to summon persons-
(1) A police officer proceeding under Section 174 may, by order in writing, summon two or more persons as aforesaid for the purpose of the said investigation, and any other person who appears to be acquainted with the facts of the case and every person so summoned shall be bound to attend and to answer truly all questions other than questions the answers to which would have a tendency to expose him to a criminal charge or to a penalty or forfeiture.
(2) If the facts do not disclose a cognizable offence to which Section 170 applies, such persons shall not be required by the police officer to attend a Magistrate’s Court.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 175 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।