Home Blog Page 290

आईपीसी की धारा 308 | आपराधिक मानव-वध करने का प्रयत्न | IPC Section- 308 in in hindi | Attempt to commit culpable homicide.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 308 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 308, साथ ही इस धारा के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 308 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 308 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कोई व्यक्ति इस तरह के इरादे या बोध के साथ ऐसी परिस्थितियों में कोई कार्य करता है, जिससे वह किसी की मृत्यु का कारण बन जाए, तो वह गैर इरादतन हत्या (जो हत्या की श्रेणी मे नही आता) का दोषी होगा, तो वह धारा 308 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 308 के अनुसार

आपराधिक मानव-वध करने का प्रयत्न-

जो कोई किसी कार्य को ऐसे आशय या ज्ञान से और ऐसी परिस्थितियों में करेगा कि यदि उस कार्य से वह मृत्यु कारित कर देता है, तो वह हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानव-वध का दोषी होता, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा; और यदि ऐसे कार्य द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति हो जाए तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Attempt to commit culpable homicide-
Whoever does any act with such intention or knowledge and under such circumstances that, if he by that act caused death, he would be guilty of culpable homicide not amounting to murder, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, or with fine, or with both; and, if hurt is caused to any person by such act, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, or with fine, or with both.

दृष्टान्त
क गम्भीर और अचानक प्रकोपन पर, ऐसी परिस्थितियों में य पर पिस्तौल चलाता है कि यदि तद्द्वारा वह मृत्यु कारित कर देता तो वह हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानव-दध का दोषी होता। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

लागू अपराध

अपराधिक मानव वध करने का प्रयत्न।
सजा-
तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।
यदि ऐसे कार्य द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित हो जाये।
सजा-
सात वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
यह अपराध सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 308 के अंतर्गत जो कोई व्यक्ति अपराधिक मानव वध करने का प्रयत्न करेगा, तो वह तीन वर्ष के लिये कारावास या जुर्माना या दोनों इसी तरह से कोई किसी व्यक्ति को किसी प्रकार से ठेस पहुचाने का प्रयास करता है तो भी वह सात वर्ष के लिये कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 308 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
अपराधिक मानव वध करने का प्रयत्न।तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।संज्ञेय अपराधगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय
यदि ऐसे कार्य द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित हो जाये।सात वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।संज्ञेय अपराधगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 308 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

धारा-305 शिशु या उन्मत्त व्यक्ति की आत्महत्या का दुष्प्रेरण (IPC-305 Abetment of suicide of child or insane person)

यदि कोई नाबालिग (जिसकी आयु अठारह वर्ष से कम हो), उन्मत्त, भ्रांतचित्त, मूर्ख व्यक्ति, या कोई व्यक्ति जो नशे की अवस्था में है, आत्महत्या कर ले तो जो भी कोई ऐसी आत्महत्या के किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, वह मॄत्युदण्ड, या आजीवन कारावास या कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से अधिक की न हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुमाने से भी दण्डनीय होगा ।तो उसे मॄत्युदण्ड या आजीवन कारावास या किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे अधिकतम दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही आर्थिक दण्ड से दण्डित किया जाएगा।

धारा-305 के अंतर्गत सजा का प्रावधान

हम में से बहुत से लोगों ने कही न कही सुना होगा अथवा देखा भी होगा कि कोई व्यक्ति (नाबालिग, उन्मत्त, भ्रांतचित्त, मूर्ख व्यक्ति, या कोई नशे की अवस्था) व्यक्ति जब आत्महत्या करता है, एवम् जो भी कोई व्यक्ति इन
व्यक्तियों को अपने लाभ हेतु इन्हे उकसाते है, इस कदर हावी हो जाते है कि ये स्वय अपनी ही मृत्यु कारित करने की कोशिश करते है, तो ऐसे उकसाने वाले व्यक्ति पर धारा-305 के अंतर्गत सजा का प्रावधान है । जिसमे सत्र न्यायालय द्वारा विवेकानुसार मॄत्युदण्ड या आजीवन कारावास या दस वर्ष तक कारावास और आर्थिक दण्ड या दोनो के उत्तरदायी होंगे । यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

लागू अपराध

ऐसे व्यक्ति जो (नाबालिग, उन्मत्त, भ्रांतचित्त, मूर्ख व्यक्ति, या कोई नशे की अवस्था) वाले व्यक्ति की आत्महत्या का दुष्प्रेरण देते है मॄत्युदण्ड या आजीवन कारावास या दस वर्ष तक कारावास और आर्थिक दण्ड या दोनो के भागीदार होते है । यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।बच्चे या पागल या बेसुध व्यक्ति या एक बेवकूफ, या नशे में व्यक्ति द्वारा आत्महत्या की गई उकसाना मौत या आजीवन कारावास या 10 साल व अर्थदंड भी हो सकता है । यह एक संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

धारा-304 हत्या की श्रेणी में न आने वाली गैर इरादतन हत्या के लिए दण्ड (IPC-304 Punishment for culpable homicide not amounting to murder)

कोई व्यक्ति गैर इरादतन हत्या (जो हत्या की श्रेणी मे नही आता) करता है अथवा ऐसा कोई कार्य करता है जो मृत्यु का कारण हो, जिसे मृत्यु देने के इरादे से किया गया हो, या ऐसी शारीरिक चोट जो संभवतः मृत्यु का कारण हो पहुचाने के लिए किया गया हो, तो उसे आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी, या उस व्यक्ति को किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा होगी जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही वह आर्थिक दंड के लिए भी उत्तरदायी होगा ।या ज्ञान पूर्वक ऐसा कोई कार्य करता है जो संभवतः मृत्यु का कारण हो, लेकिन जिसे मृत्यु देने के इरादे, या ऐसी शारीरिक चोट जो संभवतः मृत्यु का कारण हो पहुचाने के लिए से न किया गया हो, तो उसे आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी, या उस व्यक्ति को किसी एक अवधि के लिए की सजा होगी जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही वह आर्थिक दंड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

धारा- 304 के तहत सजा का प्रावधान

हम में से बहुत से लोगो ने फिल्मों में सुना होगा, जब कोई व्यक्ति किसी की हत्या करता है तो उसके खिलाफ IPC की धारा- 302 लगती है, किंतु फिर आता है क्या उसका आशय इस हत्या को लेकर था या नही अथवा वह किसी और व्यक्ति के कहने के आधार पर ऐसा किया हो । ऐसे में धारा- 304 में सजा का प्रावधान है, इसमें सजा 302 की अपेक्षा थोड़ा कम दंड दिया जाता है । जिसमे आजीवन कारावास की भी सजा दी जा सकती है या उस व्यक्ति को किसी एक अवधि के लिए की सजा होगी जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही वह आर्थिक दंड के लिए भी उत्तरदायी होगा। यह अपराध समझौते योग्य नहीं हैं ।यह एक गैर जमानती अपराध बताया गया है, जिसका मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति व्दारा यह अपराध कारित किया जाता है, तो उसके व्दारा न्यायालय में जमानत याचिका दायर करने पर न्यायालय व्दारा उसकी याचिका को निरस्त कर दिया जाता है।

लागू अपराध

यह एक संज्ञेय गैर जमानतीय अपराध है । जिसमे आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक एवम् अर्थदंड भी या दोनो सत्र न्यायालय के विचारानुसार दिए जा सकते है ।यदि कार्य ज्ञान के साथ किया जाता है कि यह मृत्यु का कारण बनने की संभावना है, लेकिन मृत्यु आदि का कारण बनने के किसी भी इरादे के बिना भी आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक एवम् अर्थदंड भी या दोनो सत्र न्यायालय के विचारानुसार दिए जा सकते है ।

धारा-303 आजीवन कारावास से दण्डित व्यक्ति व्दारा हत्या के लिए दण्ड (IPC-303 Punishment for murder by life-convict)

भारतीय दंड संहिता की धारा 303 के अनुसार, कोई आजीवन कारावास के दण्डादेश के अधीन अपराधी होते हुए, भी हत्या करेगा, तो उसे मॄत्युदण्ड से दण्डित किया जाएगा।

धारा- 303 के तहत सजा का प्रावधान

हम मे से काफी लोगो ने सुना है कि कोई अपराधी जेल मे ही किसी को जान से मार देता है । ऐसे कृत्यो के लिये न्यायालय अपराधी व्यक्ति को पुनः अपराध करने के समबन्ध मे मृत्युदण्ड देती है । इस धारा के अन्तर्गत कोई अपराधी जो पहले ही किसी अपराध के लिये आजीवन कारावास की सजा काट रहा है लेकिन कभी-कभी क्रोधित अथवा किसी कारणवश वह पुनः हत्या जैसा कृत्य को अंजाम देता है, तो उसे मृत्युदण्ड की सजा पाने का हकदार होगा । यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।सम्बन्धित धाराये-

धारा-306 आत्महत्या के लिए उकसाना (IPC-306 Abetment of suicide)

धारा-309 आत्महत्या प्रयत्न के लिये दंड (IPC-309 Attempt to commit suicide)

धारा-302 हत्या के लिये दण्ड (IPC-302 Punishment for Murder)

लागू अपराध

ऐसे आजीवन कारावास से दण्डित अपराधी हत्या करने की सजा मृत्युदण्ड है । यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय व्दारा विचारणीय है।

धारा-306 आत्महत्या के लिए उकसाना (IPC-306 Abetment of suicide)

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 306, साथ ही इस धारा के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 306 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 306 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई व्यक्ति आत्महत्या के लिए उकसाता है, जिससे उसके उकसाने से कोई व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है, तो वह उकसाने वाला व्यक्ति धारा 306 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 306 के अनुसार

आत्महत्या का दुष्प्रेरण-

यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या करे, तो जो कोई ऐसी आत्महत्या का दुष्प्रेरण करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Abetment of suicide-
If any person commits suicide, whoever abets the commission of such suicide, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

आत्महत्या किये जाने का दुष्प्रेरण।
सजा-
दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
यह अपराध सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है, और जो भी इस तरह की आत्महत्या के लिए उकसाता है, तो कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से भी दण्डित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 306 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
आत्महत्या किये जाने का दुष्प्रेरणदस वर्ष के लिये के कारावासऔर जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 306 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

Also Read

धारा-309 आत्महत्या प्रयत्न के लिये दंड (IPC-309 Attempt to commit suicide)

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 309 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 309, साथ ही इस धारा के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 309 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 309 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई आत्महत्या करने का प्रयत्न करेगा और उस अपराध के करने के लिये कोई कार्य करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा, तो वह धारा 309 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 309 के अनुसार

आत्महत्या करने का प्रयत्न-

जो कोई आत्महत्या करने का प्रयत्न करेगा और उस अपराध के करने के लिये कोई कार्य करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Attempt to commit suicide-
Whoever attempts to commit suicide and does any act towards the commission of such offence, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to one year, or with fine, or with both.

किसी व्यक्ति अथवा स्त्री ने आत्महत्या करने का प्रयास किया, किन्तु वह किन्ही कारणो से बच गया, इसे ही हम आत्महत्या करने का प्रयत्न कहते है।

लागू अपराध

आत्महत्या करने का प्रयत्न।
सजा-
एक वर्ष के लिए सादा कारावास या जुर्माना या दोनों।
यह अपराध एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
यह अपराध किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 309 के अंतर्गत जो कोई आत्महत्या करने का प्रयत्न करेगा और उस अपराध के करने के लिये कोई कार्य करेगा, तो वह सादा कारावास से, जिसकी एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनो से दण्डित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 309 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
आत्महत्या करने का प्रयत्नएक वर्ष के लिये सादा कारावास या जुर्माना या दोनों।संज्ञेय अपराधजमानतीयकोई मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 309 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।