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Hindu Marriage Act (हिन्दू विवाह अधिनियम 1955)

हिन्दू विवाह अधिनियम (HMA) 1955 कुल 30 धाराये है, जिन्हे 5 अध्यायों या चरणो मे बांटा गया है ।

प्रस्तावना (Preliminary) 

संक्षिप्त नाम और विस्तार (Short title and extent)

Section-1

अधिनियम का लागू (Application of Act)

Section-2

परिभाषाये (Definitions)

Section-3

अधिनियम का सर्वोपरि प्रभाव (Overriding effect of Act)

Section-4

हिन्दू विवाह (Hindu Marriages)

हिन्दू विवाह के लिये शर्ते (Conditions for a Hindu marriage)

Section-5

विवाह संरक्षकता (Omitted)

Section-6

हिन्दू विवाह के लिये संस्कार (Ceremonies for a Hindu marriage)

Section-7

हिन्दू विवाह का रजिस्ट्रीकरण (Registration of Hindu marriages)

Section-8

दाम्पत्य अधिकारों का प्रत्यास्थापन और न्यायिक पृथक्करण (Restitution of Conjugal Right and Judicial Separation)

दाम्पत्य अधिकारों का प्रत्यास्थापन (Restitution of conjugal right)

Section-9

न्यायिक पृथक्करण (Judicial separation)

Section-10

विवाह की अकृतता और तलाक (Nullity of Marriage and Divorce)

शून्य विवाह (Void marriages)

Section-11

शून्यकरणीय विवाह (Voidable marriages)

Section-12

तलाक (Divorce)

Section-13

विवाह विच्छेद कार्यवाहियों मे प्रत्यर्थी को वैकल्पिक अनुतोष (Alternate relief in divorce proceedings)

Section-13A

पारस्परिक सम्मति से विवाह विच्छेद (Divorce by mutual consent)

Section-13B

विवाह के एक वर्ष के अन्दर तलाक के लिये कोई याचिका प्रस्तुत नही की जायेगी (No petition for divorce to be presented within one year of marriage)

Section-14

कब तलाक प्राप्ति व्यक्ति पुनः विवाह कर सकेंगे (Divorced persons when may marry again)

Section-15

शून्य और शून्य विवाह वाले बच्चों की विरासत (Legitimacy of children of void and voidable marriages)

Section-16

व्दिविवाह लिये दण्ड (Punishment of bigamy)

Section-17

हिन्दू विवाह के लिये कुछ अन्य शर्तो के उलंघन के लिये दण्ड (Punishment for contravention of certain other conditions for a Hindu marriage)

Section-18

क्षेत्राधिकार एवंम् प्रकिया (Jurisdiction and Procedure)

कोर्ट को किस याचिका को प्रस्तुत किया जाएगा (Court to which petition shall be presented)

Section-19

याचिकाओं की सामग्री और सत्यापन (Contents and verification of petitions)

Section-20

1908 के अधिनियम 5 का आवेदन (Application of Act 5 of 1908)

Section-21

कुछ मामलों में याचिकाओं को हस्तांतरित करने की शक्ति (Power to transfer petitions in certain cases)

Section-21A

अधिनियम के तहत याचिकाओं के परीक्षण और निपटान से संबंधित विशेष प्रावधान (Special provision relating to trial and disposal of petitions under the Act)

Section-21B

दस्तावेज़ी प्रमाण (Documentary evidence)

Section-21C

कार्यवाही बन्द कमरे मे होना, उन्हे प्रकाशित या मुद्रित न किया जाना (Proceedings to be in camera and may not be printed or published

Section-22

कार्यवाहियों मे डिक्री (Decree in proceedings)

Section-23

विवाह-विच्छेद और अन्य कार्यवाही में प्रतिवादी के लिए राहत (Relief for respondent in divorce and other proceedings)

Section-23A

वाद लंबित रहते भरण-पोषण और कार्यवाहियों मे व्यय (Maintenance pendente lite and expenses of proceedings)

Section-24

स्थायी निर्वाहिका और भरण-पोषण (Permanent alimony and maintenance)

Section-25

बच्चों की हिरासत और जिम्मेदारी (Custody of children)

Section-26

सम्पत्ति का व्ययन (Disposal of property)

Section-27

डिक्रियों और आदेशो की अपीले (Appeals from decrees and orders)

Section-28

डिक्रियों और आदेशो का प्रवर्तन (Enforcement of decrees and orders)

Section-28A

व्यावृतियॉ और निरसन (Savings and Repeals)

व्यावृतियॉ (Savings)

Section-29

निरसन (Repealed)

Section-30

सांसद मे किसान बिल

किसानो के हित या किसानो के अहित मे, जो सांसद मे विधेयक बिल पास किये गये है, वह क्या बिल है, जिनसे हरियाण और पंजाब के किसान भडक रहे है, कौन भडका रहा है इन्हे, वैसे कहा जा सकता है, भारत मे जो भी सरकार अध्यादेश पास करती है, विपक्ष सरकार हमेशा उनका विरोध करती है, चाहे किसी के हित मे या अहित मे, इन तीनो बिलो मे कहा क्या गया है आइये जानते है –

किसानो व्दारा अपना ही टैक्टर फूकते हुये तस्वीरकिसान और हमारे जवान हमारी रीढ की हड्डी है अगर दोनो मे किसी को भी तकलीफ होती है तो मानव समाज के लिये सबसे बडा अभिषाप होगा । क्योकि किसान भी हमे जीवन देते है और जवान हमारे जीवन की रक्षा करते है ।आइये जानते है वह ऐसे कौन से विधेयक बिल है, जिनसे किसान और कुछ विपक्षी नेता नाखुश है –01- (आवश्यक वस्तु अधिनियम भण्डारण विधेयक)- आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक (Essential Commodities Amendment Bill 2020 यह प्रस्तावित कानून आवश्यक वस्तुऐ जैसे- अनाज, दाल, तिलहन, प्याज और आलू जैसी कृषि उपज को युद्ध, अकाल, असाधारण मूल्य वृद्धि व प्राकृतिक आपदा जैसी असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर सामान्य परिस्थितियों में हटाने का प्रस्ताव करता है तथा इस तरह की वस्तुओं पर लागू भंडारण की सीमा भी समाप्त हो जायेगी । इससे स्पष्ट हो जायेगा कोई भी किसान अथवा भण्डार गृह युद्ध तथा आपदा स्थिति को छोडकर ही भंडारण कर पायेगे । युद्ध तथा आपदा स्थिति मे मनमाने ढंग से भंडारण अथवा मनमाने ढंग से किसी खाद्घ वस्तु को नही बेंच पायेगें ।इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में (FDI) एफडीआई (सरकार का खाद्घ भण्डारण) को आकर्षित करने के साथ-साथ मूल्य स्थिरता लाना है । क्योकि पहले (MSP) न्यूनतम् समर्थन मूल्य किसानो के खाद्घ पदार्थो को न्यूनतम् मूल्य के अनुसार किसानो से FDI मे भण्डारण करती थी, जिसमे केवल 6% ही किसान (FDI) एफडीआई को बेंच पाते थे और 94% किसान भटकते रहते थे क्यू उन्हे मौका ही नही दिया जाता था, लेकिन अब वे (FDI) एफडीआई अथवा CONTACT FARMING और PRICE BEFORE FARMING के तहत भी प्राइवेट कम्पनियों को बेंच पायेगे ।02- (मूल्य आवशासन पर बन्दोबस्त सुरक्षा समझौता)- इस प्रस्तावित कानून के तहत किसानों को उनके होने वाले कृषि उत्पादों को पहले से तय दाम पर बेचने के लिये कृषि व्यवसायी फर्मों, प्राइस बीफोर फार्मिंग प्रोसेसर, थोक विक्रेताओं, निर्यातकों या बड़े खुदरा विक्रेताओं के साथ अनुबंध करने का अधिकार मिलेगा।इससे किसान का अपनी फसल को लेकर जो जोखिम रहता है वह उसके उस खरीदार की तरफ जायेगा जिसके साथ उसने अनुबंध किया है। उन्हें आधुनिक तकनीक और बेहतर इनपुट तक पहुंच देने के अलावा, यह किसान की लागत को कम करके किसान की आय को बढ़ावा देता है ।03- (कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य) – प्रस्तावित कानून का उद्देश्य किसानों को अपने उत्पाद नोटिफाइड ऐग्रिकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी (APMC) यानी तय मंडियों से बाहर बेचने की छूट देना है। इसका लक्ष्य किसानों को उनकी उपज के लिये प्रतिस्पर्धी वैकल्पिक व्यापार माध्यमों से लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना है। इस कानून के तहत किसानों से उनकी उपज की बिक्री पर कोई सेस या फीस नहीं ली जाएगी । यह किसानों के लिये नये विकल्प उपलब्ध करायेगा। उनकी उपज बेचने पर आने वाली लागत को कम करेगा, उन्हें बेहतर मूल्य दिलाने में मदद करेगा। इससे जहां ज्यादा उत्पादन हुआ है उन क्षेत्र के किसान कमी वाले दूसरे प्रदेशों में अपनी कृषि उपज बेचकर बेहतर दाम प्राप्त कर सकेंगे ।

जानिये अपने कानूनी अधिकार (Know Your Legal Rights)

नमस्कार दोस्तो, आज हम आपके लिये 20 महत्वपूर्ण Human Right के बारे मे बतायेंगे। यह कानूनी अधिकार Know your legal rights, वह अधिकार है जिसे हम आम पब्लिक के लिये है, लेकिन इन अधिकारो की जानकारी अधिकांश लोगो को नही है, आज हम उन महत्वपूर्ण अधिकारों को जानेंगे।

जानिये अपने वह कानूनी अधिकार जिससे हम सभी वंचित है, बहुत से लोगो नही पता है कि हमारे लिये ये कानूनी अधिकार भी है, जो भविष्य मे बहुत काम आने वाले है और साथ ही साथ क्या हमारे लिये सही है अथवा गलत है आईये बिन्दुवार जानते है-

01) यदि आपके घर मे एल0पी0जी0 (LPG) गैस सिलेण्डर से खाना बनाते समय, विस्फोट होता है तो आप 40 लाख का क्लेम जान और माल की भारपाई के लिये कर सकते है, यह हर व्यक्ति का अधिकार है।

02) अगर किसी महिला ने अपराध किया है, तो उसे महिला पुलिस ही गिरफ्तार कर सकती है, पुरूष पुलिस उसे गिरफ्तार नही कर सकता है । साथ ही गिरफ्तारी का समय शांम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक महिला पुलिस गिरफ्तार नही कर सकती है, अगर ऐसा करती है तो वह अपराध है, उस पर कार्यवाही भी की जा सकती है। अगर किसी महिला ने गम्भीर अपराध किया है तो ही पुरूष पुलिस, मजिस्ट्रेट से लिखित आदेश के आधार पर ही गिरफ्तार कर सकेंगे।

03) भारत सरकार व्दारा कर वसूली अधिकारी को यह अधिकार दिया गया है कि वह किसी करदाता, को कर चोरी के मामले मे अगर चाहे तो, (TRO) उसे गिरफ्तार भी कर सकती है, लेकिन गिरफ्तार करने से पहले उसे नोटिस भेजना पडेंगा। केवल टैक्स कमिश्नर यह फैसला करता है कि आपको कितने दिन हिरासत मे रखना है।

04) साइकिल चलाने वालो पर मोटर व्यहिकल एक्ट (M. V. Act) के तहत कोई कानून लागू नही होता है।
05) अगर कोई सरकारी कर्मचारी, अथवा गैर-सरकारी कर्मचारी, कार्यालय मे किसी अन्य व्यक्ति से तोहफा लेता है, तो उसे रिस्वत समझा जायेगा और आप पर कानूनी कार्यवाही भी की जा सकती है।

06) भारत सरकार व्दारा महिलाओ को यह अधिकार दिया है कि महिला अगर किसी की शिकायत करना चाहती है तो उसे पुलिस स्टेशन भी जाने के अवश्यकता नही है वह ई-मेल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करा सकती है।

07) कहा जाता है भारत मे (Living Relation Ship) लिविंग रिलेशनशिप को मान्यता नही है, लेकिन ऐसा नही है भारत सरकार व्दारा कानून मे यदि कोई वयस्क लड़का या लड़की अपनी मर्जी से (Living Relation Ship) लिविंग रिलेशनशिप मे रहना चाहते है तो वह गैर-कानूनी नही है । ऐसे मामले मे जन्म लेने वाली संतान माता-पिता की सम्पत्ति का अधिकारी होगा।

08) ड्राइविंग करते समय यदि आपके 100ML ब्लड मे 30MG एल्कोहाल की मात्रा पायी जाती है तो पुलिस आपको बिना वारन्ट के तुरन्त गिरफ्तार कर सकती है ।

09) पुलिस अफसर आपकी FIR लिखने से मना नही कर सकती है। अगर मना करती है तो उसे भी 6 महीने से 1 साल तक की जेल हो सकती है ।

10) भारत मे कोई भी होटल 5 स्टार ही क्यो न हो, किसी व्यक्ति को फ्री मे पानी पीने और वाशरूम का इस्तेमान करने से नही रोक सकता है।

11) कोई भी शादीशुदा पुरूष किसी अविवाहित लडकी या विधवा महिला से, उसकी सहमति से शारीरिक सम्बन्ध बनाता है, तो वह अपराध की श्रेणी मे नही आता है ।

12) पुलिस एक्ट 1861 के अन्तर्गत पुलिस अधिकारी हमेशा ड्यूटी पर होता है, चाहे वह यूनिफार्म मे हो या न हो। वह यह नही कह सकता कि मैं अपराध के समय मै ड्यूटी पर नही था।

13) कोई भी कार्यालय अथवा कम्पनी किसी गर्भवती महिला को नौकरी से नही निकाल सकता है, ऐसा करने से उसे 3 साल तक की सजा हो सकती है ।

14) मोटर वाहन अधिनियम की धारा 129 मे वाहन चालकों को हेलमेट लगाने का प्रवधान है, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 128 के अन्तर्गत बाइक पर 2 व्यक्तियों के बैठने का प्रवधान है। लेकिन ट्रैफिक पुलिस व्दारा बाइक से चाबी निकालना बिल्कुल ही गैर-कानूनी है, इसके लिये आप चाहे तो ट्रैफिक पुलिस की आप कानूनी कार्यवाही भी कर सकते है।

15) हिन्दू मैरिज एक्ट (HMA) के अन्तर्गत निम्न आधारों पर तलाक लिया जा सकता है । कोई भी पति अथवा पत्नी तलाक के लिये इन आधारो पर अर्जी दे सकता है – किसी अन्य के साथ शारिरिक सम्बन्ध बनाना, शारीरिक व मानसिक प्रताडना, नपुंसकता बिना बताये छोडकर जाना, हिन्दू धर्म छोडकर कोई और धर्म अपनाना, पागलपन, लाइलाज बीमारी, सन्यास या सात साल तक अता पता न होने के आधार पर तलाक की अर्जी दाखिल की जा सकती है।

16) यदि आपकी बाइक का चालान (हेलमेट के कारण या किसी अन्य कारण) से काट दिया जाता है तो उसी दिन पुनः उसी अपराध के लिये पुनः आपका चालान नही काटा जा सकता है।

17) किसी वस्तु की बिक्री के लिये वस्तु पर अंकित मूल्य से अधिक बेंचना गैर-कानूनी है, लेकिन अधिकतम् खुदरा मूल्य से कम करके भाव-तौल किया जा सकता है।

18) यदि आपसे कोई व्यक्ति कार्य कराकर अथवा आपकी सैलरी नही देता है तो आप उसके खिलाफ 3 साल के अन्दर कभी भी रिपोर्ट दर्ज करा सकते है, किन्तु यदि आप 3 साल के बाद रिपोर्ट करते है तो कुछ भी हासिल नही होगा ।

19) यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक जगह पर अश्लील गतिविधियां करता पाया जाता है, तो उसे 3 महीने की सजा हो सकती है ।

20) यदि आप हिन्दू है आपके साथ पुत्र या पोता या परपोता है तो आप किसी दूसरे लडके को गोद नही ले सकते है, साथ ही गोद लेने वाले व्यक्ति अथवा गोद लेने वाले बच्चे के बीच कम से कम 21 वर्ष का अन्तर होना जरूरी है ।

वीटो पॉवर क्या है?(What is Veeto Power?)

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए वीटो पॉवर Veto Power के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। वीटो पॉवर क्या है, और इसका क्या उपयोग है, इसके अलावा किन किन देशो के पास वीटो पॉवर है और किस देश ने कितनी बार इसे इस्तेमाल किया है। यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से जानने का प्रयास करेंगे।

संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations Organization- UNO) की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के स्थायी सदस्य देशों को मिला हुआ विशेषाधिकार ही “Veto Power (वीटो पावर)” कहलाता है । वीटो पॉवर संयुक्त राष्ट्र संघ की एक विशेषाधिकार अंग भी कह सकते है क्यो कि यह विशेषाधिकार (United Nations) अमेरिका विश्व के प्रमुख देशो को प्रदान करती है । सुरक्षा परिषद में कुल पन्द्रह सदस्य होते है । जिसमें पाँच स्थायी होते है और दस अस्थायी होते है । स्थायी सदस्य 1) चीन,2) फ्रांस, 3) सोवियत संघ रूस, 4) इंग्लैण्ड (बिट्रेन) 5) संयुक्त राज्य अमेरिका है, जबकि अस्थायी सदस्यों के निर्वाचन में कुछ बातों का ध्यान दिया जाता है । प्रथम अंतराष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा बनाये रखना । संगठन के दूसरे उद्देश्यों को पूरा करने में संयुक्त राष्ट्र के सदस्यो का योगदान रहा । क्या आप जानते है कि हमेशा से भारत देश को (वीटो पॉवर) प्राप्त करने मे लगा रहा है । अस्थायी (वीटो पॉवर) 2 वर्ष के प्रदान किये जाते है । जिन्हे UNO के सुरक्षा परिषद् व्दारा सुनिश्चित किया जाता है कि किस देश को आस्थायी (वीटो पॉवर) प्रदान करना है ।

आइये जानते है किस देश ने कितनी बार वीटो इस्तेमाल किया?

संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 1945 के बाद से 19 मार्च 2003 तक स्थायी सदस्यों व्दारा निम्नानुसार वीटों शक्ति का प्रयोग किया गया है-

  1. रूस व्दारा 120 बार,
  2. अमेरिका व्दारा 76 बार,
  3. बिट्रेन व्दारा 32 बार,
  4. फ्रांस व्दारा 18 बार,
  5. चीन व्दारा 5 बार।

जनसंख्या नियंत्रण कानून-

public Croud
भारत देश आज सबसे घनी आबादी वाला देश माना जाता है क्योकि भारत मे प्रतिदिन लगभग् 60-65 हजार बच्चे पैदा हो रहे है, इसी तरह से चीन मे लगभग् 55-60 हजार प्रतिदिन बच्चे पैदा हो रहे है और जबकि अमेरिका मे 20-25 हजार बच्चे प्रतिदिन बच्चे पैदा हो रहे है । जो आने वाले समय मे भारत मे सबसे बडा अभिषाप है । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त से जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जतायी तो अब भविष्य मे सरकार की ओर से जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने का विचार किया जा रहा था कि जनसंख्या नियंत्रण कानून के लिये दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुके बी0जे0पी0 नेता अश्वनी उपध्याय प्रेजेंटेशन देने के लिये प्रधानमंत्री कार्यालय पहुचंकर लंबा-चौडा प्रेजेंटेशन भी दे दिया । अश्वनी उपध्याय प्रेजेंटेशन मे यह कहा कि अटल बिहारी सरकार की ओर से सन् 2000 मे गठित वेंकटचलैया आयोग ने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की सिफारिश की थी ।

वेंकटचलैया आयोग का सुझाव

बीजेपी नेता अश्वनी उपाध्याय ने पीएमओ में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर प्रजेंटेशन दिया, अश्वनी उपाध्याय ने इस कानून के पीछे कई तर्क दिये, उन्होने कहा कि अटल बिहारी बाजपेयी सरकार मे 11 सदस्यीय संविधान समीक्षा आयोग (वेंकटचलैया आयोग) ने 2 वर्ष की मेहनत के बाद संविधान मे (Article) अनुच्छेद-47A जोडने और जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने का सुझाव दिया था, जिसे आज तक लागू नही किया गया । अब तक 125 बार संविधान संसोधन हो चुका है, कई बार सुप्रीम कोर्ट ने भी फैसला बदल चुकी है। सैकडो नये कानून बन गये, लेकिन देश के लिये सबसे जरूरी जनसंख्या नियंत्रण कानून नही बनाया गया है, जबकि हम दो-हमारे दो कानून से देश की 50%समस्याओं का समाधान हो जायेगा ।

भारत की जनसंख्या वृद्धि स्तर

भारत की जनसंख्या वृद्धि स्तर दिन प्रतिदिन बढता ही जा रहा है, क्योकि भारत मे मौजूदा समय मे 124 करोड भारतीयो के पास आधार कार्ड है, लगभग् 20 प्रतिशत नागरिको के पास (विशेष रूप से बच्चे), जिनके पास आधार कार्ड नही है और लगभग् 5 करोड बाहर आये हुये जैसे- बंगलादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिये जो अवैध रूप से भारत मे रह रहे है, इससे स्पष्ट होता है कि हमारे देश की जनसंख्या 135 करोड नही, ब्लकि 150 करोड हो चुकी है और यदि संसाधनो की बात करे तो हमारे पास कृषि योग्य भूमि दुनिया की लगभग् 2% है और पीने के पानी को देखे तो 4% है, किन्तु जनसंख्या 20% प्रतिशत है । आज को देखते हुये आने वाले कल का अनुमान अगर लगाया जाये तो, जनसंख्या वृद्धि एक दिन सबसे बडी समस्या का रूप लेगा ।

बढती हुयी जनसंख्या से आने वाले विनाश

• भारत मे अत्यधिक तेजी से बढती हुयी जनसंख्या को देखे तो भविष्य मे आने वाली परिस्थिति भी अत्यन्त दुर्लभ होगी, क्योकि सुविधा और संसाधन कभी प्रत्येक नागरिक को नही मिल पायेगे और प्रत्येक नागरिक आने वाले कल को व्यवस्थित भी नही हो पायेगा, क्योकि अगर जनसंख्या विस्फोट पर अंकुश नही लगाया जायेगा तो बढती जनसंख्या बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी जैसी तमाम समस्याए भी साथ लायेगी । • बढती जनसंख्या न केवल हमारा आर्थिक संतुलन बिगड़ रहा है बल्कि पारिस्थितिकीय संतुलन खतरे का निशान पार कर रहा है। यह तेजी से बढ़ती जनसंख्या का ही दुष्परिणाम है कि सीमित प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है जिससे प्राकृतिक एवं मानव जन्य आपदाओं तथा जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियां सिर उठा रही हैं।• जनसंख्या का दबाव निर्धनता, बेरोजगारी, आवास की समस्या, कुपोषण, चिकित्सा सुविधाओं पर दबाव तथा कृषि पर भार के रूप में भी देखा जा सकता है। जनसंख्या वृद्धि के पर्यावरण के विभिन्न घटकों पर गंभीर प्रभाव देखने में आये हैं जिससे कई आर्थिक, सामाजिक समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। आर्थिक विकास में अवरोध, पर्यावरण प्रदूषण तथा अन्य पर्यावरणीय समस्यायें, ऊर्जा संकट, औद्योगिकी-करण एवं नगरीकरण, यातायात की समस्यायें, रोजगार की समस्यायें आदि जनसंख्या के लगातार वृद्धि के ही दुष्परिणाम हैं। • जनसंख्या दबाव के कारण कृषि के लिए भूमि दिन-प्रतिदिन कम होती जा है, क्योंकि उनके आवास, सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने से लगातार कृषि भूमि कम होती जा रही है। इसके स्वाभाविक परिणाम होंगे खाद्यान्न और पेय जल की उपलब्धता में कमी। इससे समाज के बहुत बड़े वर्ग को स्वास्थ्य और शिक्षा से वंचित रहना पड़ सकता है। • जनसंख्या वृद्धि से पर्यावरण के विभिन्न घटकों पर गम्भीर प्रभाव दिख रहे है जिससे कई आर्थिक, सामाजिक समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं। आर्थिक विकास में अवरोध, पर्यावरण प्रदूषण तथा अन्य पर्यावरणीय समस्याएँ, ऊर्जा संकट, औद्योगिकीकरण एवं नगरीकरण, यातायात की समस्याएँ, खाद्यान्न की समस्यायें, मूल-भूत सुविधाओ से वंचित होना, रोज़गार की समस्याएँ आदि जनसंख्या के निरन्तर वृद्धि के ही दुष्परिणाम हैं।जनसंख्या वृद्धि कम करने के लिये सबसे पहले समाज अथवा सरकार को इस पर गम्भीर विचार करना चाहिये, क्योकि दिन-प्रतिदिन अवश्यकतायें बढती जा रही है लेकिन सुविधायें सीमित ही है तो इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि एक दिन जनसंख्या विस्फोट आने वाले कल को विनाश की ओर अग्रसर कर रहा है, इसलिये प्रत्येक मनुष्य इस पर विचार करना चाहिये ।

क्या भारत सरकार चीन के उत्पादों का बहिष्कार कर सकती है ?

भारत, चीन से व्यापार क्यूं कर रहा है, यह प्रश्न प्रत्येक भारतीय के मन मे जरूर आता होगा, कुछ तो कहते है कि भारत सरकार चीन का समान खरीदने के लिये मना करती है लेकिन खुद ही चीन से चीनी समान को मगांती है, हम स्वंय थोडे चीन से समान खरीदने जाते है और अगर बन्द ही करना है तो सबसे पहले सरकार को चीन के समानों पर पाबन्दी लगा देना चाहिये । यह सवाल सभी भारतीयों के मन मे आते है । आइये जानते है ऐसा क्यो ?

क्या आपको पता है कि प्रत्येक देश अपने व्यापार आयात निर्यात के अनुबन्ध के आधार पर ही व्यापार करते है । विश्व व्यापार संगठन (WTO) का मुख्यालय स्विजरलैण्ड के जिनेवा शहर मे है । विश्व व्यापार संगठन (WTO) मे आज लगभग् 164 देश सदस्य है जिसमे अपना भारत शुरू से ही विश्व व्यापार संगठन (WTO) का सदस्य रहा । WTO का मकसद संरक्षणवाद को खत्म कर भेदभावरहित, पारदर्शी और मुक्त व्यापार व्यवस्था बनाना था ताकि सभी देश एक-दूसरे के साथ बिना किसी बाधा (अत्यधिक टैरिफ या प्रतिबंध) के व्यापार कर सकें। साथ ही व्यापारिक विवादों को हल करने में भी इसे भूमिका निभानी थी। इसलिये विश्व व्यापार संगठन (WTO) बनाया गया।

विश्व व्यापार सगठन के प्रत्येक देशो के मध्य एक अनुबन्ध पत्र पर आधारित नियमो के अन्तर्गत ही व्यापार करना आवश्यक है, कोई देश आयात-निर्यात के लिये अनुबन्ध पत्र के आधार पर ही व्यापार कर सकता है । विश्व व्यापार सगठन का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक देश संरक्षणवादी नीतियो के तहत अर्थव्यावस्था को मजबूत बनाने के लिये आपसी देशो के प्रति शान्ति से व्यापार करने की आपसी साझेदारी भी बनी रहे और व्यापारिक मतभेद न हो ।

भारत और चीन के मध्य आयात-

चीन ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक उद्योग की भी कमर तोड़ दी है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण दिवाली के मौके पर घर- घर में इस्तेमाल होने वाली “बिजली की लड़ी” है।इसके अलावा बिजली का लगभग हर सामान भारत के बाजारों में भरा पड़ा है |

कौन-कौन से उत्पाद भारत चीन से आयात करता है (Chinese products imported in India): खिलौने, बिजली उत्पाद, कार और मोटरसाइकिल के कलपुर्जे, दूध उत्पाद, उर्वरक, कम्प्यूटर, एंटीबायोटिक्स दवाई, दूरसंचार और उर्जा क्षेत्र से जुड़े विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादों का आयात भारत करता है

भारत और चीन के मध्य निर्यात-

कौन-कौन से उत्पाद भारत, चीन को निर्यात करता है (Indian Products Exported to China) : कृषि उत्पाद, सूती वस्त्र, हस्तशिल्प उत्पाद, कच्चा लेड, लौह अयस्क,स्टील, कॉपर,टेलीकॉम सामाग्री,तथा अन्य पूंजीगत वस्तुएं इत्यादि .भारत अपने हीरे का 36% चीन को निर्यात करता है।

चीन ने भारत के किस क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है ? (Which industry is most affected by Chinese Import?)
चीन के द्वारा सबसे ज्यादा नुकसान भारत के खिलौना उद्योग को हुआ है | चाइनीज खिलौनों की लागत इतनी कम है कि कोई भी भारतीय कम्पनी चीन की प्रतियोगिता का मुकाबला करने में असमर्थ है | पिछले साल भारतीय खिलौनों के केवल 20% बाजार पर भारतीय कंपनियों का अधिकार था बाकी के 80% बाजार पर चीन और इटली का कब्ज़ा था | ASSOCHAM के एक अध्ययन के अनुसार पिछले 5 साल में 40% भारतीय खिलौना बनाने वाली कम्पनियां बंद हो चुकी है और 20 % बंद होने की कगार पर हैं|

भारत, चीन के उत्पादों को रोकने के लिए क्या कर सकता है ?

विश्व व्यापार सगठन (WTO) नियमों के कारण भारत चीन के सामान पर प्रत्यक्ष नियंत्रण तो नही लगा सकता लेकिन भारत सरकार चीनी सामान पर “Anti-Dumping Duty” जरूर लगा सकती है। एंटी-डंपिंग शुल्क लागू होने की तिथि से 5 वर्ष के लिये वैध होता है। यह अवधि पूर्ण होने पर इसे WTO के डंपिंग रोधी समझौते (Anti-Dumping Agreement) के अनुच्छेद 11.3 के अनुसार सनसेट समीक्षा के पश्चात् पाँच साल के लिये और बढ़ाया जा सकता है। यह एक प्रकार का शुल्क है जिससे चीनी वस्तुओं की कीमतें बढ़ जायेगीं और भारतीय उत्पादक उनका मुकाबला कर सकेंगे | Anti-Dumping Duty को रोकने और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था में समानता स्थापित करने के लिये लगाया जाता है। यदि चीन के उत्पादक इस शुल्क की वजह से भारत में सामान नही भेजते हैं तो भारतीय उत्पादक उन्हें भारत में बनाना शुरू करेंगे जिससे हमारे देश में रोजगारों का सृजन होगा और हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी |

भारतीय बाजार में जितनी बड़ी मात्रा में चाइनीज सामान मिलता है उससे तो सिर्फ यह लगता है कि चीन के उद्योगपतियों ने भारत में मनाये जाने वाले हर त्यौहार, उत्सव, समाज, आयु वर्ग, विभिन्न प्रदेशों में इस्तेमाल होने वालों समानों की लिस्ट बनायी होगी फिर उत्पादन शुरू किया होगा तभी तो हमारे शादी समारोह से लेकर जन्मदिन, होली, दिवाली, रक्षाबंधन सभी अवसरों के लिए ‘मेड इन चाइना’ सामान सस्ते दामों पर हर दुकान और नुक्कड़ पर मिलता है|

अब हालातों को देखते हुए इतना अवश्य कहा जा सकता है कि चीन के उत्पादों को भारत में घुसने से भारत सरकार नही बल्कि भारत के लोग अवश्य ही रोक सकते हैं | हम भारतीयों को “Think Globally and Act Locally” वाली विचारधारा को अपनाना ही होगा और अधिकांशतः हमे अपने ही देश की वस्तुओ का उपयोग करना चाहिये, दूसरे अन्य किसी भी देश का सामान कम से कम उपयोग मे लाना होगा, तभी हमारे देश के हाथ मजबूत होंगे ।