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आखिर क्या है लव जिहाद?

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लव जिहाद

लव जिहाद या जिहाद, कथित रूप से मुस्लिम पुरुषों व्दारा गैर-मुस्लिम समुदायों से जुड़ी महिलाओं को इस्लाम में धर्म परिवर्तन के लिए लक्षित करके प्रेम का ढोंग रचना ही लव जिहाद है । आये दिन लव जिहाद के मामले चर्चो मे चल रहे है जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट व्दारा लव जिहाद पर टिप्पड़ी की, जिसके पश्चात् केन्द्र सरकार एवंम् राज्य सरकार व्दारा लव जिहाद पर कड़े फैसले लेने जा रही है ।
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जीवनसाथी चुनने का अधिकार मूल अधिकारों में निहित

सुप्रीम कोर्ट एवंम् हाईकोर्ट व्दारा फैसला लिया गया था कि किसी महिला अथवा पुरूष, किसी के साथ रहने की स्वतंत्र है, धर्म पर निर्भर नहीं होगी एवंम् हाईकोर्ट ने कहा है कि जीवनसाथी चुनने का अधिकार, चाहे धर्म, जाति या नस्ल कोई हो, भारतीय संविधान के अनुच्छे्द 21 के तहत मूल अधिकारों के तहत जीवन और निजी स्वातंत्रता के अधिकार में निहित है। जजों ने केएस पुतास्वा‍मी बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नजीर बनाया जिसमें कहा गया था कि व्यक्ति की स्वायत्ताी उसके अपने जीवन से जुड़े अहम फैसले करने की योग्यजता है।अदालत ने कहा कि बालिग होने पर अपने आप जीवनसाथी चुनने का अधिकार मिल जाता है। अगर यह अधिकार न दिया जाए तो इससे न सिर्फ अमुक व्यक्ति के मानवाधिकार का उल्लंघन होगा, बल्कि अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और निजी स्वतंत्रता के अधिकार का भी।

बालिग होने पर अपने आप जीवनसाथी चुनने का अधिकार महिला एवंम् पुरूष व्दारा गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है प्रदेश में कानून व्यवस्था सामान्य रखने के लिए और महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा, बीते दिनों में 100 से ज्यादा घटनाएं सामने आई थीं, जिनमें ज़बरन धर्म परिवर्तित किया जा रहा है। इसके अंदर छल-कपट, बल से धर्म परिवर्तित किया जा रहा है। इसपर कानून को लेकर एक आवश्यक नीति बनी, जिसपर कोर्ट के आदेश आए हैं और आज योगी जी की कैबिनेट अध्यादेश लेकर आई है।

सामूहिक धर्म परिवर्तन कराने पर कार्यवाही

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने लव जिहाद को लेकर कानून (Love jihad) बनाने की पूरी तैयारी कर ली है। मंगलवार को गैरकानूनी धर्म परिवर्तन अध्यादेश कैबिनेट मीटिंग (Uttar Pradesh Cabinet) में भी पास हो गया। अध्यादेश के मुताबिक, दूसरे धर्म में शादी करने पर अब डीएम की इजाजत लेनी होगी।

सरकार के अध्यादेश के अन्तर्गत दूसरे धर्म में शादी करने के लिए संबंधित जिले के जिलाधिकारी से इजाजत लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए शादी से पहले 2 माह की नोटिस देना होगा। बिना अनुमति लिए शादी करने या धर्म परिवर्तन करने पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक की सजा के साथ 10 हजार का जुर्माना भी देना पड़ेगा।

इसके अलावा अध्यादेश में नाम छिपाकर शादी करने वाले के लिए 10 साल की सजा का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा गैरकानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन पर एक से 10 साल तक की सजा होगी। साथ ही 15 हजार तक का जुर्माना भी देना पड़ सकता है। इसके अलावा सामूहिक रूप से गैरकानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन करने पर जहां 10 साल तक सजा हो सकती है, वहीं 50 हजार तक जुर्माना भी देना पड़ सकता है।लव-जिहाद के चल रहे मामलो मे प्रशासन व्दारा ऐसे व्यक्तियों पर कठोर कार्यवाही करने के साथ-साथ साक्ष्य प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति पर तथा करने वाले व्यक्ति पर होगी। यूपी के अलावा मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक जैसे राज्यों ने भी ‘लव जिहाद’ को लेकर कानून बनाने की बात कही है। इस बीच, इलाहाबाद उच्चे न्याजयालय ने एक अहम फैसले में कहा कि ‘जीवनसाथी चुनने का अधिकार संवैधानिक है और यह जीवन और निजी स्व‍तंत्रता के अधिकार में निहित है।’ अदालत ने अपने फैसले में क्याि अहम बातें कही हैं ।

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