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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 191 | Indian Contract Act Section 191

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-191) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 191 के अनुसार उपाभिकर्ता वह व्यक्ति है जो अभिकरण के कारबार में मूल अभिकर्ता द्वारा नियोजित हो और उसके नियंत्रण के अधीन कार्य करता हो, जिसे IC Act Section-191 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 191 (Indian Contract Act Section-191) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 191 IC Act Section-191 के अनुसार उपाभिकर्ता वह व्यक्ति है जो अभिकरण के कारबार में मूल अभिकर्ता द्वारा नियोजित हो और उसके नियंत्रण के अधीन कार्य करता हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 191 (IC Act Section-191 in Hindi)

उपाभिकर्ता की परिभाषा-

उपाभिकर्ता वह व्यक्ति है जो अभिकरण के कारबार में मूल अभिकर्ता द्वारा नियोजित हो और उसके नियंत्रण के अधीन कार्य करता हो।

Indian Contract Act Section-191 (IC Act Section-191 in English)

Sub-agent defined-

A “sub-agent” is a person employed by, and acting under the control of, the original agent in the business of the agency.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 191 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 190 | Indian Contract Act Section 190

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-190) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 190 के अनुसार कोई अभिकर्ता उन कार्यों के पालन के लिए, जिनका स्वयं अपने द्वारा पालन किए जाने का भार उसने अभिव्यक्त या विवक्षित रूप से लिया हो, किसी अन्य व्यक्ति का विधिपूर्वक नियोजन तब के सिवाय नहीं कर सकेगा जबकि उपाभिकर्ता का नियोजन व्यापार की मामूली रूढ़ि के अनुसार किया जा सकता हो या अभिकरण की प्रकृति के अनुसार करना आवश्यक हो, जिसे IC Act Section-190 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 190 (Indian Contract Act Section-190) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 190 IC Act Section-190 के अनुसार कोई अभिकर्ता उन कार्यों के पालन के लिए, जिनका स्वयं अपने द्वारा पालन किए जाने का भार उसने अभिव्यक्त या विवक्षित रूप से लिया हो, किसी अन्य व्यक्ति का विधिपूर्वक नियोजन तब के सिवाय नहीं कर सकेगा जबकि उपाभिकर्ता का नियोजन व्यापार की मामूली रूढ़ि के अनुसार किया जा सकता हो या अभिकरण की प्रकृति के अनुसार करना आवश्यक हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 190 (IC Act Section-190 in Hindi)

अभिकर्ता कब प्रत्यायोज नहीं कर सकता-

कोई अभिकर्ता उन कार्यों के पालन के लिए, जिनका स्वयं अपने द्वारा पालन किए जाने का भार उसने अभिव्यक्त या विवक्षित रूप से लिया हो, किसी अन्य व्यक्ति का विधिपूर्वक नियोजन तब के सिवाय नहीं कर सकेगा जबकि उपाभिकर्ता का नियोजन व्यापार की मामूली रूढ़ि के अनुसार किया जा सकता हो या अभिकरण की प्रकृति के अनुसार करना आवश्यक हो।

Indian Contract Act Section-190 (IC Act Section-190 in English)

When agent cannot delegate-

An agent cannot lawfully employ another to perform acts which he has expressly or impliedly undertaken to perform personally, unless by the ordinary custom of trade a sub-agent may, or, from the nature of the agency, a sub-agent must, be employed.

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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 189 | Indian Contract Act Section 189

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-189) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 189 के अनुसार अभिकर्ता को आपात में यह प्राधिकार है कि हानि से अपने मालिक की संरक्षा करने के प्रयोजन से सारे ऐसे कार्य करे जैसे मामूली प्रज्ञावाला व्यक्ति अपने मामले में वैसी ही परिस्थितियों में करता, जिसे IC Act Section-189 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 189 (Indian Contract Act Section-189) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 189 IC Act Section-189 के अनुसार अभिकर्ता को आपात में यह प्राधिकार है कि हानि से अपने मालिक की संरक्षा करने के प्रयोजन से सारे ऐसे कार्य करे जैसे मामूली प्रज्ञावाला व्यक्ति अपने मामले में वैसी ही परिस्थितियों में करता है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 189 (IC Act Section-189 in Hindi)

आपात में अभिकर्ता का प्राधिकार-

अभिकर्ता को आपात में यह प्राधिकार है कि हानि से अपने मालिक की संरक्षा करने के प्रयोजन से सारे ऐसे कार्य करे जैसे मामूली प्रज्ञावाला व्यक्ति अपने मामले में वैसी ही परिस्थितियों में करता।
दृष्टांत
(क) विक्रय-अभिकर्ता माल की मरम्मत करा सकेगा, यदि अवश्यक हो।
(ख) ख को जो कलकत्ते में है, क इस निदेश के साथ रसद परेषित करता है कि वह उसे तुरन्त ही ग के पास कटक भेज दे। यदि वह रसद कटक की यात्रा में खराब होने से नहीं बच सकती तो ख वह रसद कलकत्ते में बेच सकेगा।

Indian Contract Act Section-189 (IC Act Section-189 in English)

Agent’s authority in an emergency-

An agent has authority, in an emergency, to do all such acts for the purpose of protecting his principal from loss as would be done by a person of ordinary prudence, in his own case, under similar circumstances.
Illustrations
(a) An agent for sale may have goods repaired if it be necessary.
(b) A consigns provisions to B at Calcutta, with directions to send them immediately to C, at Cuttack. B may sell the provisions at Calcutta, if they will not bear the journey to Cuttack without spoiling.

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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 188 | Indian Contract Act Section 188

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-188) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 188 के अनुसार किसी कार्य को करने का प्राधिकार रखने वाला अभिकर्ता हर ऐसी विधिपूर्ण बात करने का प्राधिकार रखता है जो ऐसा कार्य करने के लिए आवश्यक हो, जिसे IC Act Section-188 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 188 (Indian Contract Act Section-188) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 188 IC Act Section-188 के अनुसार किसी कार्य को करने का प्राधिकार रखने वाला अभिकर्ता हर ऐसी विधिपूर्ण बात करने का प्राधिकार रखता है जो ऐसा कार्य करने के लिए आवश्यक हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 188 (IC Act Section-188 in Hindi)

अभिकर्ता के प्राधिकार का विस्तार-

किसी कार्य को करने का प्राधिकार रखने वाला अभिकर्ता हर ऐसी विधिपूर्ण बात करने का प्राधिकार रखता है जो ऐसा कार्य करने के लिए आवश्यक हो।
किसी कारबार को चलाने का प्राधिकार रखने वाला अभिकर्ता हर ऐसी विधिपूर्ण बात करने का प्राधिकार रखता है जो ऐसे कारबार के संचालन के प्रयोजन के लिए आवश्यक हो या उसके अनुक्रम में प्रायः की जाती हो।
दृष्टांत
(क) ख, जो लंदन में रहता है, अपने को शोध्य ऋण मुम्बई में वसूल करने के लिए क को नियोजित करता है। क उस ऋण को वसूल करने के प्रयोजनों के लिए आवश्यक कोई भी विधिक प्रक्रिया अपना सकेगा और उसके लिए विधिमान्य उन्मोचन दे सकेगा।
(ख) क अपना पोत-निर्माता का कारबार चलाने के लिए ख को अपना अभिकर्ता बनाता है । ख उस कारबार को चलाने के प्रयोजन के लिए काष्ठ और अन्य सामग्री खरीद सकेगा और कर्मकारों को भाड़े पर रख सकेगा।

Indian Contract Act Section-188 (IC Act Section-188 in English)

Extent of agent’s authority-

An agent, having an authority to do an act, has authority to do every lawful thing which is necessary in order to do such act.
An agent having an authority to carry on a business, has authority to do every lawful thing necessary for the purpose, or usually done in the course, of conducting such business.
Illustrations
(a) A is employed by B, residing in London, to recover at Bombay a debt due to B. A may adopt any legal process necessary for the purpose of recovering the debt, and may give a valid discharge for the same.
(b) A constitutes B his agent to carry on his business of a shipbuilder. B may purchase timber and other materials, and hire workmen, for the purpose of carrying on the business.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 188 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 187 | Indian Contract Act Section 187

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-187) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 187 के अनुसार प्राधिकार अभिव्यक्त कहा जाता है जब कि वह मौखिक या लिखित शब्दों द्वारा दिया जाए । प्राधिकार विवक्षित कहा जाता है जबकि उसका अनुमान मामले की परिस्थितियों में करना हो और मौखिक या लिखित बातों या व्यवहार के मामूली अनुक्रम की मामले की परिस्थितियों में गणना की जा सकेगी, जिसे IC Act Section-187 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 187 (Indian Contract Act Section-187) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 187 IC Act Section-187 के अनुसार प्राधिकार अभिव्यक्त कहा जाता है जब कि वह मौखिक या लिखित शब्दों द्वारा दिया जाए । प्राधिकार विवक्षित कहा जाता है जबकि उसका अनुमान मामले की परिस्थितियों में करना हो और मौखिक या लिखित बातों या व्यवहार के मामूली अनुक्रम की मामले की परिस्थितियों में गणना की जा सकेगी।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 187 (IC Act Section-187 in Hindi)

अभिव्यक्त और विवक्षित प्राधिकार की परिभाषाएं-

प्राधिकार अभिव्यक्त कहा जाता है जब कि वह मौखिक या लिखित शब्दों द्वारा दिया जाए । प्राधिकार विवक्षित कहा जाता है जबकि उसका अनुमान मामले की परिस्थितियों में करना हो और मौखिक या लिखित बातों या व्यवहार के मामूली अनुक्रम की मामले की परिस्थितियों में गणना की जा सकेगी।
दृष्टांत
क, जो स्वयं कलकत्ते में रहता है, सीरामपुर में एक दुकान का स्वामी है और उस दुकान पर वह कभी-कभी जाता है। दुकान का प्रबंध ख द्वारा किया जाता है और क की जानकारी में बह दुकान के प्रयोजनों के लिए क के मामले में ग से माल आदिष्ट करता रहता है और क के कोष में से उसके लिए संदाय करता रहता है। दुकान के प्रयोजनों के लिए क के नाम में ग से माल आदिष्ट करने का क की ओर से ख को विवक्षित प्राधिकार है।

Indian Contract Act Section-187 (IC Act Section-187 in English)

Definitions of express and implied authority-

An authority is said to be express when it is given by words spoken or written. An authority is said to be implied when it is to be inferred from the circumstances of the case; and things spoken or written, or the ordinary course of dealing, may be accounted circumstances of the case.
Illustration
A owns a shop in Serampore, living himself in Calcutta, and visiting the shop occasionally. The shop is managed by B, and he is in the habit of ordering goods from C in the name of A for the purposes of the shop, and of paying for them out of A‟s funds with A‟s knowledge. B has an implied authority from A to order goods from C in the name of A for the purposes of the shop.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 187 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 186 | Indian Contract Act Section 186

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-186) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 186 के अनुसार अभिकर्ता का प्राधिकार अभिव्यक्त या विवक्षित हो सकेगा, जिसे IC Act Section-186 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 186 (Indian Contract Act Section-186) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 186 IC Act Section-186 के अनुसार अभिकर्ता का प्राधिकार अभिव्यक्त या विवक्षित हो सकेगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 186 (IC Act Section-186 in Hindi)

अभिकर्ता का प्राधिकार अभिव्यक्त या विवक्षित हो सकेगा–

अभिकर्ता का प्राधिकार अभिव्यक्त या विवक्षित हो सकेगा।

Indian Contract Act Section-186 (IC Act Section-186 in English)

Agent’s authority may be expressed or implied-

The authority of an agent may be expressed or implied.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 186 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।