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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 162 | Indian Contract Act Section 162

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-162) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 162 के अनुसार आनुग्रहिक उपनिधान उपनिधाता या उपनिहिती की मृत्यु से पर्यवसित हो जाता है, जिसे IC Act Section-162 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 162 (Indian Contract Act Section-162) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 162 IC Act Section-162 के अनुसार आनुग्रहिक उपनिधान उपनिधाता या उपनिहिती की मृत्यु से पर्यवसित हो जाता है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 162 (IC Act Section-162 in Hindi)

आनुग्रहिक उपनिधान का मृत्यु से पर्यवसान-

आनुग्रहिक उपनिधान उपनिधाता या उपनिहिती की मृत्यु से पर्यवसित हो जाता है।

Indian Contract Act Section-162 (IC Act Section-162 in English)

Termination of gratuitous bailment by death-

A gratuitous bailment is terminated by the death either of the bailor or of the bailee.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 162 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 161 | Indian Contract Act Section 161

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-161) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 161 के अनुसार यदि उपनिहिती के दोष से माल उचित समय पर वापस या परिदत्त या निविदत्त न किया जाए तो उस समय से माल की किसी भी हानि, नाश या क्षय के लिए वह उपनिधाता के प्रति उत्तरदायी है, जिसे IC Act Section-161 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 161 (Indian Contract Act Section-161) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 161 IC Act Section-161 के अनुसार यदि उपनिहिती के दोष से माल उचित समय पर वापस या परिदत्त या निविदत्त न किया जाए तो उस समय से माल की किसी भी हानि, नाश या क्षय के लिए वह उपनिधाता के प्रति उत्तरदायी है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 161 (IC Act Section-161 in Hindi)

जबकि माल सम्यक् रूप से वापस न किया जाए तब उपनिहिती का उत्तरदायित्व-

यदि उपनिहिती के दोष से माल उचित समय पर वापस या परिदत्त या निविदत्त न किया जाए तो उस समय से माल की किसी भी हानि, नाश या क्षय के लिए वह उपनिधाता के प्रति उत्तरदायी है।

Indian Contract Act Section-161 (IC Act Section-161 in English)

Bailee’s responsibility when goods are not duly returned-

If, by the default of the bailee, the goods are not returned, delivered or tendered at the proper time, he is responsible to the bailor for any loss, destruction or deterioration of the goods from that time.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 161 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 160 | Indian Contract Act Section 160

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-160) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 160 के अनुसार उपनिहिती का यह कर्तव्य है कि ज्यों ही उस समय का, जिसके लिए माल उपनिहित किया गया था, अवसान हो जाए या वह प्रयोजन, जिसके लिए वह माल उपनिहित किया गया था, पूरा हो जाए, उपनिहित माल को मांग के बिना वापस कर दे या उपनिधाता के निर्देशों के अनुसार परिदत्त कर दे, जिसे IC Act Section-160 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 160 (Indian Contract Act Section-160) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 160 IC Act Section-160 के अनुसार उपनिहिती का यह कर्तव्य है कि ज्यों ही उस समय का, जिसके लिए माल उपनिहित किया गया था, अवसान हो जाए या वह प्रयोजन, जिसके लिए वह माल उपनिहित किया गया था, पूरा हो जाए, उपनिहित माल को मांग के बिना वापस कर दे या उपनिधाता के निर्देशों के अनुसार परिदत्त कर दे।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 160 (IC Act Section-160 in Hindi)

समय के अवसान पर या प्रयोजन पूरा होने पर उपनिहित माल की वापसी-

उपनिहिती का यह कर्तव्य है कि ज्यों ही उस समय का, जिसके लिए माल उपनिहित किया गया था, अवसान हो जाए या वह प्रयोजन, जिसके लिए वह माल उपनिहित किया गया था, पूरा हो जाए, उपनिहित माल को मांग के बिना वापस कर दे या उपनिधाता के निर्देशों के अनुसार परिदत्त कर दे।

Indian Contract Act Section-160 (IC Act Section-160 in English)

Return of goods bailed, on expiration of time or accomplishment of purpose-

It is the duty of the bailee to return, or deliver according to the bailor‟s directions, the goods bailed, without demand, as soon as the time for which they were bailed has expired, or the purpose for which they were bailed has been accomplished.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 160 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 159 | Indian Contract Act Section 159

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-159) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 159 के अनुसार किसी चीज को उपयोगार्थ उधार पर देने वाला, यदि वह उधार आनग्रहिक रूप से दिया गया हो किसी भी समय उसकी वापसी अपेक्षित कर सकेगा यद्यपि उसने उसे एक विनिर्दिष्ट समय या प्रयोजन के लिए उधार दिया हो । किन्तु यदि उधार लेने वाले ने विनिर्दिष्ट समय या प्रयोजन के लिए दिए गए उधार के भरोसे ऐसे प्रकार से कार्य किया है कि उधार दी गई चीज की ठहराए गए समय से पूर्व वापसी से उसे उस फायदे से अधिक हानि होगी जो उसे उधार से वास्तव में व्युत्पन्न हुआ हो तो, यदि उधार दाता उधार लेने वाले को उसे वापस करने के लिए विवश करे तो उसको उधार लेने वाले की उतनी मात्रा में क्षतिपूर्ति करनी होगी जितनी वैसे हुई हानि वैसे व्युत्पन्न फायदे से अधिक है, जिसे IC Act Section-159 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 159 (Indian Contract Act Section-159) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 159 IC Act Section-159 के अनुसार किसी चीज को उपयोगार्थ उधार पर देने वाला, यदि वह उधार आनग्रहिक रूप से दिया गया हो किसी भी समय उसकी वापसी अपेक्षित कर सकेगा यद्यपि उसने उसे एक विनिर्दिष्ट समय या प्रयोजन के लिए उधार दिया हो । किन्तु यदि उधार लेने वाले ने विनिर्दिष्ट समय या प्रयोजन के लिए दिए गए उधार के भरोसे ऐसे प्रकार से कार्य किया है कि उधार दी गई चीज की ठहराए गए समय से पूर्व वापसी से उसे उस फायदे से अधिक हानि होगी जो उसे उधार से वास्तव में व्युत्पन्न हुआ हो तो, यदि उधार दाता उधार लेने वाले को उसे वापस करने के लिए विवश करे तो उसको उधार लेने वाले की उतनी मात्रा में क्षतिपूर्ति करनी होगी जितनी वैसे हुई हानि वैसे व्युत्पन्न फायदे से अधिक है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 159 (IC Act Section-159 in Hindi)

आनुग्रहिक रूप से उधार दिए गए माल का प्रत्यावर्तन-

किसी चीज को उपयोगार्थ उधार पर देने वाला, यदि वह उधार आनग्रहिक रूप से दिया गया हो किसी भी समय उसकी वापसी अपेक्षित कर सकेगा यद्यपि उसने उसे एक विनिर्दिष्ट समय या प्रयोजन के लिए उधार दिया हो । किन्तु यदि उधार लेने वाले ने विनिर्दिष्ट समय या प्रयोजन के लिए दिए गए उधार के भरोसे ऐसे प्रकार से कार्य किया है कि उधार दी गई चीज की ठहराए गए समय से पूर्व वापसी से उसे उस फायदे से अधिक हानि होगी जो उसे उधार से वास्तव में व्युत्पन्न हुआ हो तो, यदि उधार दाता उधार लेने वाले को उसे वापस करने के लिए विवश करे तो उसको उधार लेने वाले की उतनी मात्रा में क्षतिपूर्ति करनी होगी जितनी वैसे हुई हानि वैसे व्युत्पन्न फायदे से अधिक है।

Indian Contract Act Section-159 (IC Act Section-159 in English)

Restoration of goods lent gratuitously-

The lender of a thing for use may at any time require its return, if the loan was gratuitous, even though he lent it for a specified time or purpose. But if, on the faith of such loan made for a specified time or purpose, the borrower has acted in such a manner that the return of the thing lent before the time agreed upon would cause him loss exceeding the benefit actually derived by him from the loan, the lender must, if he compels the return, indemnify the borrower for the amount in which the loss so occasioned exceeds the benefit so derived.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 159 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 158 | Indian Contract Act Section 158

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-158) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 158 के अनुसार जहां कि उपनिधान की शर्तों के अनुसार उपनिहिती द्वारा उपनिधाता के लिए माल रखा जाना या प्रवण किया जाना हो अथवा उस पर काम करवाया जाना हो और उपनिहिती को कोई पारिश्रमिक नहीं मिलता हो वहां उपनिधाता उपनिहिती को उपनिहिती द्वारा उपनिधान के प्रयोजन के लिए उपगत आवश्यक व्ययों का प्रतिसंदाय करेगा, जिसे IC Act Section-158 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 158 (Indian Contract Act Section-158) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 158 IC Act Section-158 के अनुसार जहां कि उपनिधान की शर्तों के अनुसार उपनिहिती द्वारा उपनिधाता के लिए माल रखा जाना या प्रवण किया जाना हो अथवा उस पर काम करवाया जाना हो और उपनिहिती को कोई पारिश्रमिक नहीं मिलता हो वहां उपनिधाता उपनिहिती को उपनिहिती द्वारा उपनिधान के प्रयोजन के लिए उपगत आवश्यक व्ययों का प्रतिसंदाय करेगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 158 (IC Act Section-158 in Hindi)

आवश्यक व्ययों का उपनिधाता द्वारा प्रतिसंदाय-

जहां कि उपनिधान की शर्तों के अनुसार उपनिहिती द्वारा उपनिधाता के लिए माल रखा जाना या प्रवण किया जाना हो अथवा उस पर काम करवाया जाना हो और उपनिहिती को कोई पारिश्रमिक नहीं मिलता हो वहां उपनिधाता उपनिहिती को उपनिहिती द्वारा उपनिधान के प्रयोजन के लिए उपगत आवश्यक व्ययों का प्रतिसंदाय करेगा।

Indian Contract Act Section-158 (IC Act Section-158 in English)

Repayment, by bailor, of necessary expenses-

Where, by the conditions of the bailment, the goods are to be kept or to be carried, or to have work done upon them by the bailee for the bailor, and the bailee is to receive no remuneration, the bailor shall repay to the bailee the necessary expenses incurred by him for the purpose of the bailment.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 158 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 157 | Indian Contract Act Section 157

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-157) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 157 के अनुसार यदि उपनिहिती, उपनिधाता की सम्मति के बिना उपनिधाता के माल को अपने माल के साथ ऐसे प्रकार से मिश्रित कर दे कि निहित माल को अन्य माल से पृथक् करना और उसे वापस परिदत्त करना संभव हो तो उपनिधाता उस माल की हानि के लिए उपनिहिती से प्रतिकर पाने का हकदार है, जिसे IC Act Section-157 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 157 (Indian Contract Act Section-157) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 157 IC Act Section-157 के अनुसार यदि उपनिहिती, उपनिधाता की सम्मति के बिना उपनिधाता के माल को अपने माल के साथ ऐसे प्रकार से मिश्रित कर दे कि निहित माल को अन्य माल से पृथक् करना और उसे वापस परिदत्त करना संभव हो तो उपनिधाता उस माल की हानि के लिए उपनिहिती से प्रतिकर पाने का हकदार है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 157 (IC Act Section-157 in Hindi)

जबकि माल पृथक् न किए जा सकते हों तब उपनिहिती को सम्मति के बिना किए गए मिश्रण का प्रभाव-

यदि उपनिहिती, उपनिधाता की सम्मति के बिना उपनिधाता के माल को अपने माल के साथ ऐसे प्रकार से मिश्रित कर दे कि निहित माल को अन्य माल से पृथक् करना और उसे वापस परिदत्त करना संभव हो तो उपनिधाता उस माल की हानि के लिए उपनिहिती से प्रतिकर पाने का हकदार है।
दृष्टांत
क 45 रुपए कीमत के केप के आटे का बैरल ख के पास उपनिहित करता है। क की सम्मति के बिना ख उस आटे को केवल 25 रुपए प्रति बैरल के अपने देशी आटे के साथ मिश्रित करता है। क को उसके आटे की हानि के लिए ख प्रतिकर देगा।

Indian Contract Act Section-157 (IC Act Section-157 in English)

Effect of mixture, without bailor’s consent, when the goods cannot be separated-

If the bailee, without the consent of the bailor, mixes the goods of the bailor with his own goods, in such a manner that it is impossible to separate the goods bailed from the other goods, and deliver them back, the bailor is entitled to be compensated by the bailee for the loss of the goods.
Illustration
A bails a barrel of Cape flour worth Rs. 45 to B. B, without A‟s consent, mixes the flour with country flour of his own, worth only Rs. 25 a barrel. B must compensate A for the loss of his flour.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 157 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।