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किशोर न्याय अधिनियम की धारा 107 | Juvenile Justice Act Section 107

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-107) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 107 के अनुसार प्रत्येक पुलिस स्टेशन में सहायक उपनिरीक्षक से अन्यून पंक्ति के कम से कम एक अधिकारी को, जिसके पास योग्यता, समुचित प्रशिक्षण और स्थिति ज्ञान हो, पुलिस, स्वैच्छिक और गैर-सरकारी संगठनों के समन्वय से अनन्य रूप से बालकों के साथ या तो पीड़ितों या अपराधियों के रूप में व्यौहार करने के लिए, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी के रूप में अभिहित किया जा सकेगा, जिसे JJ Act Section-107 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 107 (Juvenile Justice Act Section-107) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 107 JJ Act Section-107 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) प्रत्येक पुलिस स्टेशन में सहायक उपनिरीक्षक से अन्यून पंक्ति के कम से कम एक अधिकारी को, जिसके पास योग्यता, समुचित प्रशिक्षण और स्थिति ज्ञान हो, पुलिस, स्वैच्छिक और गैर-सरकारी संगठनों के समन्वय से अनन्य रूप से बालकों के साथ या तो पीड़ितों या अपराधियों के रूप में व्यौहार करने के लिए, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी के रूप में अभिहित किया जा सकेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 107 (JJ Act Section-107 in Hindi)

बाल कल्याण पुलिस अधिकारी और विशेष किशोर पुलिस एकक-

(1) प्रत्येक पुलिस स्टेशन में सहायक उपनिरीक्षक से अन्यून पंक्ति के कम से कम एक अधिकारी को, जिसके पास योग्यता, समुचित प्रशिक्षण और स्थिति ज्ञान हो, पुलिस, स्वैच्छिक और गैर-सरकारी संगठनों के समन्वय से अनन्य रूप से बालकों के साथ या तो पीड़ितों या अपराधियों के रूप में व्यौहार करने के लिए, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी के रूप में अभिहित किया जा सकेगा।
(2) बालकों से संबंधित पुलिस के सभी कृत्यों का समन्वय करने के लिए, राज्य सरकार प्रत्येक जिले और शहर में विशेष किशोर पुलिस एककों का गठन करेगी, जिनका नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक या उससे ऊपर के रैंक का पुलिस अधिकारी करेगा, और जिसमें उपधारा (1) के अधीन अभिहित सभी पुलिस अधिकारी होंगे और बाल कल्याण के क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव रखने वाले दो सामाजिक कार्यकर्ता, जिनमें एक महिला होगी, होंगे ।
(3) विशेष किशोर पुलिस एककों के सभी पुलिस अधिकारियों के , विशेषकर बाल कल्याण पुलिस अधिकारी के रूप में शामिल करने पर, विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा जिससे वे अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन अधिक प्रभावी रूप से कर सकें।
(4) विशेष किशोर पुलिस एकक के अंतर्गत बालकों से संबंधित रेल पुलिस भी है ।

Juvenile Justice Act Section-107 (JJ Act Section-107 in English)

Child Welfare Police Officer and Special Juvenile Police Unit-

(1) In every police station, at least one officer, not below the rank of assistant sub-inspector, with aptitude, appropriate training and orientation may be designated as the child welfare police officer to exclusively deal with children either as victims or perpetrators, in co-ordination with the police, voluntary and non-governmental organisations.
(2) To co-ordinate all functions of police related to children, the State Government shall constitute Special Juvenile Police Units in each district and city, headed by a police officer not below the rank of a Deputy Superintendent of Police or above and consisting of all police officers designated under subsection (1) and two social workers having experience of working in the field of child welfare, of whom one shall be a woman.
(3) All police officers of the Special Juvenile Police Units shall be provided special training, especially at induction as child welfare police officer, to enable them to perform their functions more effectively.
(4) Special Juvenile Police Unit also includes Railway police dealing with children.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 107 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 106 | Juvenile Justice Act Section 106

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-106) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 106 के अनुसार प्रत्येक राज्य सरकार, राज्य के लिए बालक संरक्षण सोसाइटी और प्रत्येक जिले के लिए बालक संरक्षण एकक का गठन करेगी, जो ऐसे अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों से मिलकर बनेगी, जो उस सरकार द्वारा इस अधिनियम के, जिसके अंतर्गत इस अधिनियम के अधीन संस्थाओं की स्थापना और अनुरक्षण भी हैं, बालकों और उनके पुनर्वासन तथा संबंधित विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी अभिकरणों के साथ समन्वय के संबंध में सक्षम प्राधिकारियों की अधिसूचना के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए और ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करने के लिए, जो विहित किए जाएं, नियुक्त किए जाएं, जिसे JJ Act Section-106 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 106 (Juvenile Justice Act Section-106) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 106 JJ Act Section-106 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) प्रत्येक राज्य सरकार, राज्य के लिए बालक संरक्षण सोसाइटी और प्रत्येक जिले के लिए बालक संरक्षण एकक का गठन करेगी, जो ऐसे अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों से मिलकर बनेगी, जो उस सरकार द्वारा इस अधिनियम के, जिसके अंतर्गत इस अधिनियम के अधीन संस्थाओं की स्थापना और अनुरक्षण भी हैं, बालकों और उनके पुनर्वासन तथा संबंधित विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी अभिकरणों के साथ समन्वय के संबंध में सक्षम प्राधिकारियों की अधिसूचना के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए और ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करने के लिए, जो विहित किए जाएं, नियुक्त किए जाएं।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 106 (JJ Act Section-106 in Hindi)

राज्य बालक संरक्षण सोसाइटी और जिला बालक संरक्षण एकक-

प्रत्येक राज्य सरकार, राज्य के लिए बालक संरक्षण सोसाइटी और प्रत्येक जिले के लिए बालक संरक्षण एकक का गठन करेगी, जो ऐसे अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों से मिलकर बनेगी, जो उस सरकार द्वारा इस अधिनियम के, जिसके अंतर्गत इस अधिनियम के अधीन संस्थाओं की स्थापना और अनुरक्षण भी हैं, बालकों और उनके पुनर्वासन तथा संबंधित विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी अभिकरणों के साथ समन्वय के संबंध में सक्षम प्राधिकारियों की अधिसूचना के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए और ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करने के लिए, जो विहित किए जाएं, नियुक्त किए जाएं l

Juvenile Justice Act Section-106 (JJ Act Section-106 in English)

State Child Protection Society and District Child Protection Unit-

Every State Government shall constitute a Child Protection Society for the State and Child Protection Unit for every District, consisting of such officers and other employees as may be appointed by that Government, to take up matters relating to children with a view to ensure the implementation of this Act, including the establishment and maintenance of institutions under this Act, notification of competent authorities in relation to the children and their rehabilitation and co-ordination with various official and non-official agencies concerned and to discharge such other functions as may be prescribed.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 106 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 105 | Juvenile Justice Act Section 105

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-105) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 105 के अनुसार राज्य सरकार, ऐसे नाम में, जो वह उचित समझे, बालकों के जिनके संबंध में इस अधिनियम के अधीन कार्यवाही की जाती है, कल्याण और पुनर्वास के लिए एक निधि का सृजन कर सकती है, जिसे JJ Act Section-105 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 105 (Juvenile Justice Act Section-105) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 105 JJ Act Section-105 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) राज्य सरकार, ऐसे नाम में, जो वह उचित समझे, बालकों के जिनके संबंध में इस अधिनियम के अधीन कार्यवाही की जाती है, कल्याण और पुनर्वास के लिए एक निधि का सृजन कर सकती है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 105 (JJ Act Section-105 in Hindi)

किशोर न्याय निधि-

(1) राज्य सरकार, ऐसे नाम में, जो वह उचित समझे, बालकों के जिनके संबंध में इस अधिनियम के अधीन कार्यवाही की जाती है, कल्याण और पुनर्वास के लिए एक निधि का सृजन कर सकेगी।
(2) निधि में ऐसे स्वैच्छिक संदानों, अभिदायों या अभिदायों का प्रत्यय किया जाएगा, जो किसी व्यष्टि या संगठन द्वारा किए जाएं।
(3) उपधारा (1) के अधीन सृजित निधि का प्रशासन इस अधिनियम को कार्यान्वित करने वाली राज्य सरकार के विभाग द्वारा ऐसी रीति में और ऐसे प्रयोजनों के लिए किया जाएगा, जो विहित किए जाएं।

Juvenile Justice Act Section-105 (JJ Act Section-105 in English)

Juvenile justice fund-

(1) The State Government may create a fund in such name as it thinks fit for the welfare and rehabilitation of the children dealt with under this Act.
(2) There shall be credited to the fund such voluntary donations, contributions or subscriptions as may be made by any individual or organisation.
(3) The fund created under sub-section (1) shall be administered by the Department of the State Government implementing this Act in such manner and for such purposes as may be prescribed.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 105 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 104 | Juvenile Justice Act Section 104

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-104) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 104 के अनुसार इस अधिनियम में अपील और पुनरीक्षण संबंधी उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, समिति या बोर्ड इस निमित्त प्राप्त किसी आवेदन पर अपने द्वारा पारित किन्हीं आदेशों को संशोधित कर सकेगा जो उस संस्था के बारे में हों, जिसमें किसी बालक को भेजा जाना है या उस व्यक्ति के बारे में हों, जिसकी देखरेख या पर्यवेक्षण में किसी बालक को इस अधिनियम के अधीन रखा जाना है, जिसे JJ Act Section-104 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 104 (Juvenile Justice Act Section-104) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 104 JJ Act Section-104 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) इस अधिनियम में अपील और पुनरीक्षण संबंधी उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, समिति या बोर्ड इस निमित्त प्राप्त किसी आवेदन पर अपने द्वारा पारित किन्हीं आदेशों को संशोधित कर सकेगा जो उस संस्था के बारे में हों, जिसमें किसी बालक को भेजा जाना है या उस व्यक्ति के बारे में हों, जिसकी देखरेख या पर्यवेक्षण में किसी बालक को इस अधिनियम के अधीन रखा जाना है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 104 (JJ Act Section-104 in Hindi)

समिति या बोर्ड की अपने आदेशों को संशोधित करने की शक्ति-

1) इस अधिनियम में अपील और पुनरीक्षण संबंधी उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, समिति या बोर्ड इस निमित्त प्राप्त किसी आवेदन पर अपने द्वारा पारित किन्हीं आदेशों को संशोधित कर सकेगा जो उस संस्था के बारे में हों, जिसमें किसी बालक को भेजा जाना है या उस व्यक्ति के बारे में हों, जिसकी देखरेख या पर्यवेक्षण में किसी बालक को इस अधिनियम के अधीन रखा जाना है :
परंतु ऐसे किन्हीं आदेशों का संशोधन करने के लिए सुनवाई के दौरान बोर्ड के कम से कम दो सदस्य, जिनमें से एक प्रधान मजिस्ट्रेट होगा और समिति के कम से कम तीन सदस्य और संबंधित सभी व्यक्ति या उनके प्राधिकृत प्रतिनिधि उपस्थित होंगे, जिनके विचारों को उक्त आदेश का संशोधन करने के पूर्व, यथास्थिति, समिति या बोर्ड द्वारा सुना जाएगा ।
(2) समिति या बोर्ड द्वारा पारित आदेशों में की लिपिकीय भूलों या उनमें किसी आकस्मिक चूक या लोप से होने वाली गलतियां किसी समय, यथास्थिति, समिति या बोर्ड द्वारा या तो स्वप्रेरणा से या इस निमित्त प्राप्त किसी आवेदन पर सुधारी जा सकेंगी।

Juvenile Justice Act Section-104 (JJ Act Section-104 in English)

Power of the Committee or the Board to amend its own orders-

(1) Without prejudice to the provisions for appeal and revision contained in this Act, the Committee or the Board may, on an application received in this behalf, amend any orders passed by itself, as to the institution to which a child is to be sent or as to the person under whose care or supervision a child is to be placed under this Act:
Provided that during the course of hearing for amending any such orders, there shall be at least two members of the Board of which one shall be the Principal Magistrate and at least three members of the Committee and all persons concerned, or their authorised representatives, whose views shall be heard by the Committee or the Board, as the case may be, before the said orders are amended.
(2) Clerical mistakes in orders passed by the Committee or the Board or errors arising therein from any accidental slip or omission may, at any time, be corrected by the Committee or the Board, as the case may be, either on its own motion or on an application received in this behalf.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 104 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 103 | Juvenile Justice Act Section 103

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-103) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 103 के अनुसार इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, समिति या बोर्ड इस अधिनियम के उपबंधों में से किसी के अधीन जांच करते समय ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगा, जो विहित की जाए और उसके अधीन रहते हुए दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में समन मामलों के विचारण के लिए अधिकथित प्रक्रिया का यावतशक्य अनुसरण करेगा, जिसे JJ Act Section-103 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 103 (Juvenile Justice Act Section-103) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 103 JJ Act Section-103 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, समिति या बोर्ड इस अधिनियम के उपबंधों में से किसी के अधीन जांच करते समय ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगा, जो विहित की जाए और उसके अधीन रहते हुए दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में समन मामलों के विचारण के लिए अधिकथित प्रक्रिया का यावतशक्य अनुसरण करेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 103 (JJ Act Section-103 in Hindi)

जांच, अपीलों और पुनरीक्षण कार्यवाहियों में प्रक्रिया-

(1) इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, समिति या बोर्ड इस अधिनियम के उपबंधों में से किसी के अधीन जांच करते समय ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगा, जो विहित की जाए और उसके अधीन रहते हुए दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में समन मामलों के विचारण के लिए अधिकथित प्रक्रिया का यावतशक्य अनुसरण करेगा।
(2) इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन अभिव्यक्त रूप से जैसा अन्यथा उपबंधित है, उसके सिवाय, इस अधिनियम के अधीन अपीलों या पुनरीक्षण कार्यवाहियों में सुनवाई करने में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया, यावतसाध्य, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंधों के अनुसार होगी।

Juvenile Justice Act Section-103 (JJ Act Section-103 in English)

Procedure in inquiries, appeals and revision proceedings-

(1) Save as otherwise expressly provided by this Act, a Committee or a Board while holding any inquiry under any of the provisions of this Act, shall follow such procedure as may be prescribed and subject thereto, shall follow, as far as may be, the procedure laid down in the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974) for trial of summons cases.
(2) Save as otherwise expressly provided by or under this Act, the procedure to be followed in hearing appeals or revision proceedings under this Act shall be, as far as practicable, in accordance with the provisions of the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974).

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 103 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 102 | Juvenile Justice Act Section 102

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-102) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 102 के अनुसार उच्च न्यायालय स्वप्रेरणा से या इस निमित्त प्राप्त किसी आवेदन पर, किसी भी समय, किसी ऐसी कार्यवाही का, जिसमें किसी समिति या बोर्ड या बालक न्यायालय या न्यायालय ने कोई आदेश पारित किया हो, अभिलेख आदेश की वैधता या औचित्य के संबंध में अपना समाधान करने के प्रयोजनार्थ मंगा सकेगा और उसके संबंध में ऐसा आदेश पारित कर सकेगा, जो वह ठीक समझे, जिसे JJ Act Section-102 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 102 (Juvenile Justice Act Section-102) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 100 JJ Act Section-100 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) उच्च न्यायालय स्वप्रेरणा से या इस निमित्त प्राप्त किसी आवेदन पर, किसी भी समय, किसी ऐसी कार्यवाही का, जिसमें किसी समिति या बोर्ड या बालक न्यायालय या न्यायालय ने कोई आदेश पारित किया हो, अभिलेख आदेश की वैधता या औचित्य के संबंध में अपना समाधान करने के प्रयोजनार्थ मंगा सकेगा और उसके संबंध में ऐसा आदेश पारित कर सकेगा, जो वह ठीक समझे।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 100 (JJ Act Section-100 in Hindi)

पुनरीक्षण-

उच्च न्यायालय स्वप्रेरणा से या इस निमित्त प्राप्त किसी आवेदन पर, किसी भी समय, किसी ऐसी कार्यवाही का, जिसमें किसी समिति या बोर्ड या बालक न्यायालय या न्यायालय ने कोई आदेश पारित किया हो, अभिलेख आदेश की वैधता या औचित्य के संबंध में अपना समाधान करने के प्रयोजनार्थ मंगा सकेगा और उसके संबंध में ऐसा आदेश पारित कर सकेगा, जो वह ठीक समझे :
परंतु उच्च न्यायालय इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कोई आदेश उसे सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदान किए बिना पारित नहीं करेगा।

Juvenile Justice Act Section-102 (JJ Act Section-102 in English)

Revision-

The High Court may, at any time, either on its own motion or on an application received in this behalf, call for the record of any proceeding in which any Committee or Board or Children’s Court, or Court has passed an order, for the purpose of satisfying itself as to the legality or propriety of any such order and may pass such order in relation thereto as it thinks fit:
Provided that the High Court shall not pass an order under this section prejudicial to any person without giving him a reasonable opportunity of being heard.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 102 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।