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किशोर न्याय अधिनियम की धारा 101 | Juvenile Justice Act Section 101

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-101) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 101 के अनुसार समिति या बोर्ड द्वारा किए गए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसा आदेश किए जाने की तारीख से तीस दिन के भीतर, पोषण, देखरेख और प्रवर्तकता पश्च देखरेख संबंधी समिति के ऐसे विनिश्चयों के सिवाय, जिनके संबंध में अपील जिला मजिस्ट्रेट को होगी, बालक न्यायालय में अपील कर सकेगा, जिसे JJ Act Section-101 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 101 (Juvenile Justice Act Section-101) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 101 JJ Act Section-101 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) समिति या बोर्ड द्वारा किए गए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसा आदेश किए जाने की तारीख से तीस दिन के भीतर, पोषण, देखरेख और प्रवर्तकता पश्च देखरेख संबंधी समिति के ऐसे विनिश्चयों के सिवाय, जिनके संबंध में अपील जिला मजिस्ट्रेट को होगी, बालक न्यायालय में अपील कर सकेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 101 (JJ Act Section-101 in Hindi)

अपीलें-

(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के अधीन समिति या बोर्ड द्वारा किए गए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसा आदेश किए जाने की तारीख से तीस दिन के भीतर, पोषण, देखरेख और प्रवर्तकता पश्च देखरेख संबंधी समिति के ऐसे विनिश्चयों के सिवाय, जिनके संबंध में अपील जिला मजिस्ट्रेट को होगी, बालक न्यायालय में अपील कर सकेगा:
परंतु, यथास्थिति, बालक न्यायालय या जिला मजिस्ट्रेट, उक्त तीस दिन की उक्त अवधि के अवसान के पश्चात् अपील ग्रहण कर सकेगा, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी को पर्याप्त कारणों से समय पर अपील करने से निवारित किया गया था कि उस अपील का विनिश्चय तीस दिन की अवधि के भीतर किया जाएगा।
(2) अधिनियम की धारा 15 के अधीन किसी जघन्य अपराध में प्रारम्भिक निर्धारण करने के पश्चात् पारित बोर्ड के आदेश के विरुद्ध अपील सत्र न्यायालय के समक्ष होगी तथा अपील को विनिश्चित करते समय न्यायालय अनुभवी मनोवैज्ञानिकों और चिकित्सीय विशेषज्ञों की सहायता ले सकेगा जो उनसे भिन्न हों जिनकी सहायता बोर्ड द्वारा उक्त धारा के अधीन आदेश पारित करने में ली गई हो।
(3) ऐसे किसी बालक के संबंध में, जिसके बारे में अभिकथन है कि उसने ऐसा कोई अपराध किया है, जो ऐसे किसी बालक द्वारा, जिसने 16 वर्ष की आयु पूरी कर ली है या जो 16 वर्ष अधिक आयु का है, किए गए जघन्य अपराध से भिन्न बोर्ड द्वारा किए गए दोष मुक्ति के आदेश के विरुद्ध अपील नहीं होगी ।
(4) इस धारा के अधीन किसी अपील में पारित बालक न्यायालय के किसी आदेश के विरुद्ध कोई द्वितीय अपील नहीं होगी।
(5) बालक न्यायालय के आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया के अनुसार उच्च न्यायालय के समक्ष अपील फाइल कर सकेगा।
(6) कोई व्यक्ति जो जिला मजिस्ट्रेट द्वारा दत्तक ग्रहण के किसी आदेश से व्यथित है वह जिला मजिस्ट्रेट द्वारा ऐसा आदेश पारित किए जाने से तीस दिन की अवधि के भीतर प्रभागीय आयुक्त के समक्ष अपील कर सकेगा।
(7) उपधारा (6) के अधीन फाइल की गई प्रत्येक अपील यथासंभव शीघ्रता से विनिश्चित की जाएगी और उसे अपील फाइल किए जाने की तारीख से चार सप्ताह की अवधि के भीतर निपटाए जाने का प्रयास किया जाएगा :
परन्तु जहां कोई प्रभागीय आयुक्त नहीं है, वहां यथास्थिति, राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन अधिसूचना द्वारा अपील का विनिश्चय करने के लिए प्रभागीय आयुक्त की पंक्ति के समतुल्य अधिकारी को सशक्त कर सकेगी।

Juvenile Justice Act Section-101 (JJ Act Section-101 in English)

Appeals-

(1) Subject to the provisions of this Act, any person aggrieved by an order made by the Committee or the Board under this Act may, within thirty days from the date of such order, prefer an appeal to the Children’s Court, except for decisions by the Committee related to Foster Care and Sponsorship After Care for which the appeal shall lie with the District Magistrate:
Provided that the Court of Sessions, or the District Magistrate, as the case may be, may entertain the appeal after the expiry of the said period of thirty days, if it is satisfied that the appellant was prevented by sufficient cause from filing the appeal in time and such appeal shall be decided within a period of thirty days.
(2) An appeal shall lie against an order of the Board passed after making the preliminary assessment into a heinous offence under section 15 of the Act, before the Court of Sessions and the Court may, while deciding the appeal, take the assistance of experienced psychologists and medical specialists other than those whose assistance has been obtained by the Board in passing the order under the said section.
1[(3) No appeal shall lie from any order of acquittal made by the Board in respect of a child alleged to have committed an offence other than the heinous offence by a child who has completed or is above the age of sixteen years.
(4) No second appeal shall lie from any order of the Court of Session, passed in appeal under this section.
(5) Any person aggrieved by an order of the Children’s Court may file an appeal before the High Court in accordance with the procedure specified in the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974).
2[(6) Any person aggrieved by an adoption order passed by the District Magistrate may, within a period of thirty days from the date of such order passed by the District Magistrate, file an appeal before the Divisional Commissioner.
(7) Every appeal filed under sub-section (6), shall be decided as expeditiously as possible and an endeavour shall be made to dispose it within a period of four weeks from the date of filing of the appeal:
Provided that where there is no Divisional Commissioner, the State Government or Union territory Administration, as the case may be, may, by notification, empower an officer equivalent to the rank of the Divisional Commissioner to decide the appeal.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 101 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 100 | Juvenile Justice Act Section 100

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-100) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 100 के अनुसार इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या विनियमों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या विधिक कार्यवाही केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार या, यथास्थिति, केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार के निर्देशों के अधीन कार्रवाई करने वाले किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी, जिसे JJ Act Section-100 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 100 (Juvenile Justice Act Section-100) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 100 JJ Act Section-100 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या विनियमों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या विधिक कार्यवाही केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार या, यथास्थिति, केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार के निर्देशों के अधीन कार्रवाई करने वाले किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 100 (JJ Act Section-100 in Hindi)

सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-

इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या विनियमों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या विधिक कार्यवाही केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार या, यथास्थिति, केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार के निर्देशों के अ धीन कार्रवाई करने वाले किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी।

Juvenile Justice Act Section-100 (JJ Act Section-100 in English)

Protection of action taken in good faith-

No suit, prosecution or other legal proceeding shall lie against the Central Government, or the State Government or any person acting under the directions of the Central Government or State Government, as the case may be, in respect of anything which is done in good faith or intended to be done in pursuance of this Act or of any rules or regulations made thereunder.

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किशोर न्याय अधिनियम की धारा 99 | Juvenile Justice Act Section 99

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-99) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 99 के अनुसार बालक से संबंधित सभी रिपोर्टें, जिन पर समिति या बोर्ड द्वारा विचार किया गया है, गोपनीय मानी जाएंगी। समिति या बोर्ड यदि वह ऐसा करना ठीक समझता है तो उसका सार किसी अन्य समिति या बोर्ड या बालक या बालक के माता या पिता या संरक्षक को संसूचित कर सकेगा और ऐसी समिति या बोर्ड या बालक या माता या पिता या संरक्षक को ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दे सकेगा जो रिपोर्ट में कथित विषय से सुसंगत हो, जिसे JJ Act Section-99 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 99 (Juvenile Justice Act Section-99) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 99 JJ Act Section-99 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) बालक से संबंधित सभी रिपोर्टें, जिन पर समिति या बोर्ड द्वारा विचार किया गया है, गोपनीय मानी जाएंगी। समिति या बोर्ड यदि वह ऐसा करना ठीक समझता है तो उसका सार किसी अन्य समिति या बोर्ड या बालक या बालक के माता या पिता या संरक्षक को संसूचित कर सकेगा और ऐसी समिति या बोर्ड या बालक या माता या पिता या संरक्षक को ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दे सकेगा जो रिपोर्ट में कथित विषय से सुसंगत हो।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 99 (JJ Act Section-99 in Hindi)

रिपोर्टों का गोपनीय माना जाना-

(1) बालक से संबंधित सभी रिपोर्टें, जिन पर समिति या बोर्ड द्वारा विचार किया गया है, गोपनीय मानी जाएंगी :
परंतु, यथास्थिति, समिति या बोर्ड यदि वह ऐसा करना ठीक समझता है तो उसका सार किसी अन्य समिति या बोर्ड या बालक या बालक के माता या पिता या संरक्षक को संसूचित कर सकेगा और ऐसी समिति या बोर्ड या बालक या माता या पिता या संरक्षक को ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दे सकेगा जो रिपोर्ट में कथित विषय से सुसंगत हो ।
(2) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, पीड़ित को उसके मामले के अभिलेख, आदेशों और सुसंगत कागज पत्रों तक पहुंच से इंकार नहीं किया जाएगा।

Juvenile Justice Act Section-99 (JJ Act Section-99 in English)

Reports to be treated as confidential-

(1) All reports related to the child and considered by the Committee or the Board shall be treated as confidential:
Provided that the Committee or the Board, as the case may be, may, if it so thinks fit, communicate the substance thereof to another Committee or Board or to the child or to the childs parent or guardian, and may give such Committee or the Board or the child or parent or guardian, an opportunity of producing evidence as may be relevant to the matter stated in the report.
(2) Notwithstanding anything contained in this Act, the victim shall not be denied access to their case record, orders and relevant papers.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 99 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 98 | Juvenile Justice Act Section 98

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-98) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 98 के अनुसार बोर्ड या समिति, किसी बालक को अनुपस्थिति की इजाजत दे सकेगा या विशेष अवसरों जैसे परीक्षा, नातेदारों का विवाह, मित्र या परिजन की मृत्यु या दुर्घटना या माता-पिता के गंभीर रोग या ऐसी प्रकृति की आकस्मिकता पर संप्रेक्षण के अधीन साधारणतया एक बार में सात दिन से अनधिक की अवधि के लिए, जिसके अंतर्गत यात्रा में लगने वाला समय नहीं है, बालक की छुट्टी की अनुज्ञा दे सकेगा, जिसे JJ Act Section-98 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 98 (Juvenile Justice Act Section-98) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 98 JJ Act Section-98 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबीबोर्ड या समिति, किसी बालक को अनुपस्थिति की इजाजत दे सकेगा या विशेष अवसरों जैसे परीक्षा, नातेदारों का विवाह, मित्र या परिजन की मृत्यु या दुर्घटना या माता-पिता के गंभीर रोग या ऐसी प्रकृति की आकस्मिकता पर संप्रेक्षण के अधीन साधारणतया एक बार में सात दिन से अनधिक की अवधि के लिए, जिसके अंतर्गत यात्रा में लगने वाला समय नहीं है, बालक की छुट्टी की अनुज्ञा दे सकेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 98 (JJ Act Section-98 in Hindi)

किसी संस्था में रखे गए बालक को अनुपस्थिति की इजाजत-

(1) यथास्थिति, बोर्ड या समिति, किसी बालक को अनुपस्थिति की इजाजत दे सकेगा या विशेष अवसरों जैसे परीक्षा, नातेदारों का विवाह, मित्र या परिजन की मृत्यु या दुर्घटना या माता-पिता के गंभीर रोग या ऐसी प्रकृति की आकस्मिकता पर संप्रेक्षण के अधीन साधारणतया एक बार में सात दिन से अनधिक की अवधि के लिए, जिसके अंतर्गत यात्रा में लगने वाला समय नहीं है, बालक की छुट्टी की अनुज्ञा दे सकेगा। 
(2) उस समय को, जिसके दौरान कोई बालक उस संस्था से, जिसमें उसे रखा गया है, इस धारा के अधीन दी गई अनुज्ञा के अनुसरण में उपस्थित है, उस समय का भाग माना जाएगा जिसके लिए वह बाल गृह या विशेष गृह में रखे जाने का दायी है ।
(3) यदि कोई बालक, छुट्टी की अवधि की समाप्ति पर या अनुज्ञा प्रतिसंहृत किए जाने पर या समपहरण करने पर, यथास्थिति, बालगृह या विशेष गृह में वापस आने से इंकार करता है या आने में असफल रहता है तो बोर्ड या समिति, यदि आवश्यक हो, तो उसे भारसाधन में लाएगी और संबंधित गृह में वापस लाएगी :
परंतु विधि का उल्लंघन करने वाला कोई बालक छुट्टी की अवधि की समाप्ति पर या अनुज्ञा प्रतिसंहृत किए जाने पर या समपहरण करने पर विशेष गृह में वापस आने में असफल रहता है तो उस अवधि का, जिसके लिए वह संस्था में रखे जाने का अभी भी दायी है, बोर्ड द्वारा उस अवधि के बराबर अवधि तक, जो ऐसी असफलता के कारण समाप्त हो गई है, विस्तार कर दिया जाएगा।

Juvenile Justice Act Section-98 (JJ Act Section-98 in English)

Leave of absence to a child placed in an institution-

(1) The Committee or the Board, as the case may be, may permit leave of absence to any child, to allow him, on special occasions like examination, marriage of relatives, death of kith or kin or accident or serious illness of parent or any emergency of like nature, under supervision, for a period generally not exceeding seven days in one instance, excluding the time taken in journey.
(2) The time during which a child is absent from an institution where he is placed, in pursuance of such permission granted under this section, shall be deemed to be part of the time for which he is liable to be kept in the Childrens Home or special home.
(3) If a child refuses, or has failed to return to the Childrens Home or special home, as the case may be, on the leave period being exhausted or permission being revoked or forfeited, the Board or Committee may, if necessary, cause him to be taken charge of and to be taken back to the concerned home:
Provided that when a child in conflict with law has failed to return to the special home on the leave period being exhausted or on permission being revoked or forfeited, the time for which he is still liable to be kept in the institution shall be extended by the Board for a period equivalent to the time which lapses due to such failure.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 98 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 97 | Juvenile Justice Act Section 97

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-97) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 97 के अनुसार जब किसी बालक को किसी बाल गृह या विशेष गृह में रखा जाता है, तो यथास्थिति, किसी परिवीक्षा अधिकारी या सामाजिक कार्यकर्ता या सरकार या स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठन की रिपोर्ट पर समिति या बोर्ड ऐसे बालक को आत्यांतिक रूप से या ऐसी शर्तों पर, जैसी वह अधिरोपित करना ठीक समझे, बालक को माता-पिता या संरक्षक के साथ रहने या आदेश में नामित ऐसे किसी प्राधिकृत व्यक्ति के पर्यवेक्षणाधीन रहने की अनुज्ञा देते हुए, जो उसे प्राप्त करने और भारसाधन में लेने का, बालक को शिक्षित बनाने और किसी उपयोगी व्यापार या आजीविका के लिए प्रशिक्षित करने या पुनर्वास के लिए उसकी देखरेख करने के लिए उसे लेने और भारसाधन में लेने का इच्छुक हो, निर्मुक्त करने पर विचार कर सकेगी, जिसे JJ Act Section-97 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 97 (Juvenile Justice Act Section-97) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 97 JJ Act Section-97 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी)  जब किसी बालक को किसी बाल गृह या विशेष गृह में रखा जाता है, तो यथास्थिति, किसी परिवीक्षा अधिकारी या सामाजिक कार्यकर्ता या सरकार या स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठन की रिपोर्ट पर समिति या बोर्ड ऐसे बालक को आत्यांतिक रूप से या ऐसी शर्तों पर, जैसी वह अधिरोपित करना ठीक समझे, बालक को माता-पिता या संरक्षक के साथ रहने या आदेश में नामित ऐसे किसी प्राधिकृत व्यक्ति के पर्यवेक्षणाधीन रहने की अनुज्ञा देते हुए, जो उसे प्राप्त करने और भारसाधन में लेने का, बालक को शिक्षित बनाने और किसी उपयोगी व्यापार या आजीविका के लिए प्रशिक्षित करने या पुनर्वास के लिए उसकी देखरेख करने के लिए उसे लेने और भारसाधन में लेने का इच्छुक हो, निर्मुक्त करने पर विचार कर सकेगी।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 97 (JJ Act Section-97 in Hindi)

किसी संस्था से बालक को निर्मुक्त करना-

(1) जब किसी बालक को किसी बाल गृह या विशेष गृह में रखा जाता है, तो यथास्थिति, किसी परिवीक्षा अधिकारी या सामाजिक कार्यकर्ता या सरकार या स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठन की रिपोर्ट पर समिति या बोर्ड ऐसे बालक को आत्यांतिक रूप से या ऐसी शर्तों पर, जैसी वह अधिरोपित करना ठीक समझे, बालक को माता-पिता या संरक्षक के साथ रहने या आदेश में नामित ऐसे किसी प्राधिकृत व्यक्ति के पर्यवेक्षणाधीन रहने की अनुज्ञा देते हुए, जो उसे प्राप्त करने और भारसाधन में लेने का, बालक को शिक्षित बनाने और किसी उपयोगी व्यापार या आजीविका के लिए प्रशिक्षित करने या पुनर्वास के लिए उसकी देखरेख करने के लिए उसे लेने और भारसाधन में लेने का इच्छुक हो, निर्मुक्त करने पर विचार कर सकेगी :
परन्तु यदि कोई बालक जिसे इस धारा के अधीन सशर्त निर्मुक्त किया गया है या वह व्यक्ति, जिसके पर्यवेक्षण के अधीन बालक को रखा गया है, ऐसी शर्तों को पूरा करने में असफल रहता है। तो बोर्ड या समिति, यदि आवश्यक हो तो बालक को भारसाधन में ले सकेगी और बालक को संबंधित गृह में वापस रख सकेगी ।
(2) यदि बालक को अस्थायी आधार पर निर्मुक्त किया गया है तो वह समय, जिसके दौरान बालक उपधारा (1) के अधीन प्रदत्त अनुज्ञा के अनुसरण में संबंधित गृह में उपस्थित नहीं है, उस समय का भाग माना जाएगा, जिसके लिए बालक, बाल गृह में रखे जाने का दायी है :
परंतु विधि का उल्लंघन करने वाला बालक उपधारा (1) में यथावर्णित बोर्ड द्वारा अधिकथित शर्तों को पूरा करने में असफल रहता है तो उस समय का, जिसके लिए वह संस्थों में रखे जाने का अभी भी दायी है, बोर्ड द्वारा ऐसी असफलता के कारण समाप्त हुए समय के बराबर समय तक विस्तार किया जाएगा।

Juvenile Justice Act Section-97 (JJ Act Section-97 in English)

Release of a child from an institution-

(1) When a child is kept in a Childrens Home or special home, on a report of a probation officer or social worker or of Government or a voluntary or nongovernmental organisation, as the case may be, the Committee or the Board may consider, the release of such child, either absolutely or on such conditions as it may think fit to impose, permitting the child to live with parents or guardian or under the supervision of any authorised person named in the order, willing to receive and take charge, educate and train the child, for some useful trade or calling or to look after the child for rehabilitation:
Provided that if a child who has been released conditionally under this section, or the person under whose supervision the child has been placed, fails to fulfil such conditions, the Board or Committee may, if necessary, cause the child to be taken charge of and to be placed back in the concerned home.
(2) If the child has been released on a temporary basis, the time during which the child is not present in the concerned home in pursuance of the permission granted under sub-section (1) shall be deemed to be part of the time for which the child is liable to be kept in the children or special home:
Provided that in case of a child in conflict with law fails to fulfil the conditions set by the Board as mentioned in sub-section (1), the time for which he is still liable to be kept in the institution shall be extended by the Board for a period equivalent to the time which lapses due to such failure.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 97 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 96 | Juvenile Justice Act Section 96

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-96) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 96 के अनुसारराज्य सरकार किसी भी समय, यथास्थिति, बोर्ड या समिति की सिफारिश पर, इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी और बालक के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए संबंधित समिति या बोर्ड को पूर्व सूचना के साथ, बालक को किसी बाल गृह या विशेष गृह या उचित सुविधा तंत्र या योग्य व्यक्ति से राज्य के भीतर किसी गृह या सुविधा तंत्र में स्थानांतरण का आदेश दे सकेगी, जिसे JJ Act Section-96 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 96 (Juvenile Justice Act Section-96) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 96 JJ Act Section-96 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) राज्य सरकार किसी भी समय, यथास्थिति, बोर्ड या समिति की सिफारिश पर, इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी और बालक के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए संबंधित समिति या बोर्ड को पूर्व सूचना के साथ, बालक को किसी बाल गृह या विशेष गृह या उचित सुविधा तंत्र या योग्य व्यक्ति से राज्य के भीतर किसी गृह या सुविधा तंत्र में स्थानांतरण का आदेश दे सकेगी।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 96 (JJ Act Section-96 in Hindi)

बालक का भारत के विभिन्न भागों में बाल गृहों या विशेष गृहों या उचित सुविधा तंत्रों या योग्य व्यक्तियों को स्थानांतरण-

(1) राज्य सरकार किसी भी समय, यथास्थिति, बोर्ड या समिति की सिफारिश पर, इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी और बालक के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए संबंधित समिति या बोर्ड को पूर्व सूचना के साथ, बालक को किसी बाल गृह या विशेष गृह या उचित सुविधा तंत्र या योग्य व्यक्ति से राज्य के भीतर किसी गृह या सुविधा तंत्र में स्थानांतरण का आदेश दे सकेगी :
परंतु वैसी ही गृह या सुविधा तंत्र या व्यक्ति के बीच उसी जिले के भीतर बालक के स्थानांतरण के लिए,यथास्थिति, उस जिले की समिति या बोर्ड ऐसा आदेश जारी करने के लिए सक्षम होगा। 
(2) यदि राज्य सरकार द्वारा स्थानांतरण का आदेश राज्य से बाहर की किसी संस्था को किया जाता है तो ऐसा संबंधित राज्य सरकार के परामर्श से ही किया जाएगा।
(3) बालक की ऐसी बाल गृह या विशेष गृह में ठहरने की कुल अवधि को ऐसे स्थानांतरण से बढ़ाया नहीं जाएगा ।
(4) उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन पारित आदेश, यथास्थिति, उस क्षेत्र की समिति था बोर्ड के लिए प्रवर्तित किए गए समझे जाएंगे, जिसमें बालक को भेजा जाता है।

Juvenile Justice Act Section-96 (JJ Act Section-96 in English)

Transfer of child between Children’s Homes, or special homes or fit facility or fit person in different parts of India-

(1) The State Government may at any time, on the recommendation of a Committee or Board, as the case may be, notwithstanding anything contained in this Act, and keeping the best interest of the child in mind, order the childs transfer from any Childrens Home or special home or fit facility or fit person, to a home or facility, within the State with prior intimation to the concerned Committee or the Board:
Provided that for transfer of a child between similar home or facility or person within the same district, the Committee or Board, as the case may be, of the said district shall be competent to issue such an order.
(2) If transfer is being ordered by a State Government to an institution outside the State, this shall be done only in consultation with the concerned State Government.
(3) The total period of stay of the child in a Childrens Home or a special home shall not be increased by such transfer.
(4) Orders passed under sub-sections (1) and (2) shall be deemed to be operative for the Committee or the Board, as the case may be, of the area to which the child is sent.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 96 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।