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किशोर न्याय अधिनियम की धारा 95 | Juvenile Justice Act Section 95

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-95) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 95 के अनुसार यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि बालक अधिकारिता के बाहर के स्थान से है तो, यथास्थिति, बोर्ड या समिति सम्यक् जांच के पश्चात्, यदि यह समाधान हो जाता है कि यह बालक के सर्वोत्तम हित में है और बालक के गृह जिले के समिति या बोर्ड के साथ सम्यक् परामर्श करके उक्त समिति या बोर्ड को सुसंगत दस्तावेजों और ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करते हुए, जैसी विहित की जाए, यथाशीघ्र बालक के स्थानांतरण का आदेश करेगा, जिसे JJ Act Section-95 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 95 (Juvenile Justice Act Section-95) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 95 JJ Act Section-95 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि बालक अधिकारिता के बाहर के स्थान से है तो, यथास्थिति, बोर्ड या समिति सम्यक् जांच के पश्चात्, यदि यह समाधान हो जाता है कि यह बालक के सर्वोत्तम हित में है और बालक के गृह जिले के समिति या बोर्ड के साथ सम्यक् परामर्श करके उक्त समिति या बोर्ड को सुसंगत दस्तावेजों और ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करते हुए, जैसी विहित की जाए, यथाशीघ्र बालक के स्थानांतरण का आदेश करेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 95 (JJ Act Section-95 in Hindi)

बालक का उसके निवास स्थान को स्थानांतरण-

( 1 ) यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि बालक अधिकारिता के बाहर के स्थान से है तो, यथास्थिति, बोर्ड या समिति सम्यक् जांच के पश्चात्, यदि यह समाधान हो जाता है कि यह बालक के सर्वोत्तम हित में है और बालक के गृह जिले के समिति या बोर्ड के साथ सम्यक् परामर्श करके उक्त समिति या बोर्ड को सुसंगत दस्तावेजों और ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करते हुए, जैसी विहित की जाए, यथाशीघ्र बालक के स्थानांतरण का आदेश करेगा : 
परंतु ऐसा स्थानांतरण विधि का उल्लंघन करने वाले बालक की दशा में जांच पूरी होने के पश्चात् और बोर्ड द्वारा अंतिम आदेश पारित करने के बाद ही किया जाएगा :
परंतु यह और कि अंतरराज्यिक स्थानांतरण की दशा में बालक को यदि सुविधाजनक हो तो, यथास्थिति, बालक के गृह जिले की समिति या बोर्ड को या गृह राज्य की राजधानी शहर की समिति या बोर्ड को सौंपा जाएगा।
(2) स्थानांतरण के आदेश को अंतिम रूप से दिए जाने पर, यथास्थिति, समिति या बोर्ड ऐसा आदेश प्राप्त करने के पन्द्रह दिन के भीतर विशेष किशोर पुलिस एकक को बालक की अनुरक्षा के लिए अनुरक्षा आदेश देगा:
परंतु किसी बालिका के साथ महिला पुलिस अधिकारी होगी :
परंतु यह और कि जहां कोई विशेष किशोर पुलिस एकक उपलब्ध नहीं है तो, यथास्थिति, समिति या बोर्ड उस संस्था को, जहां बालक अस्थायी रूप से ठहरा हुआ है या जिला बालक संरक्षण एकक को यात्रा के दौरान बालक की अनुरक्षा के लिए निदेश देगा।
(3) राज्य सरकार बालक की अनुरक्षा के लिए कर्मचारिवृंद को यात्रा भत्ते का उपबंध करने के लिए नियम बनाएगी, जिसका संदाय अग्रिम में किया जाएगा।
(4) स्थानांतरित बालक को प्राप्त करने वाला, यथास्थिति, बोर्ड या समिति प्रत्यावर्तन या पुनर्वास या समाज में पुनः मिलाने की प्रक्रिया को पूरा करेगी, जैसे कि इस अधिनियम में अधिकथित है। 

Juvenile Justice Act Section-95 (JJ Act Section-95 in English)

Transfer of a child to place of residence-

1) If during the inquiry it is found that a child hails from a place outside the jurisdiction, the Board or Committee, as the case may be, shall, if satisfied after due inquiry that it is in the best interest of the child and after due consultation with the Committee or the Board of the childs home district, order the transfer of the child, as soon as possible, to the said Committee or the Board, along with relevant documents and following such procedure as may be prescribed:
Provided that such transfer can be made in case of a child in conflict with law, only after the inquiry has been completed and final order passed by the Board:
Provided further that in case of inter-State transfer, the child shall be, if convenient, handed over to the Committee or the Board, as the case may be, of the home district of the child, or to the Committee or the Board in the capital city of the home State.
(2) Once the decision to transfer is finalised, the Committee or Board, as the case may be, shall give an escort order to the Special Juvenile Police Unit to escort the child, within fifteen days of receiving such order:
Provided that a girl child shall be accompanied by a woman police officer:
Provided further that where a Special Juvenile Police Unit is not available, the Committee or Board, as the case may be, shall direct the institution where the child is temporarily staying or District Child Protection Unit, to provide an escort to accompany the child during travel.
(3) The State Government shall make rules to provide for travelling allowance to the escorting staff for the child, which shall be paid in advance.
(4) The Committee or the Board, as the case may be, receiving the transferred child will process for restoration or rehabilitation or social re-integration, as provided in this Act.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 95 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 | Juvenile Justice Act Section 94

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-94) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 के अनुसार समिति या बोर्ड, जिसके समक्ष बालक, इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन लाया जाता है, जब भी वह ऐसा करना ठीक समझे, बालक का वास्तविक भारसाधन रखने वाले माता-पिता या संरक्षक से अपेक्षा कर सकेगा। कि वह उस बालक के बारे में किसी कार्यवाही में उपस्थित हों, जिसे JJ Act Section-94 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 (Juvenile Justice Act Section-94) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 JJ Act Section-94 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) समिति या बोर्ड, जिसके समक्ष बालक, इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन लाया जाता है, जब भी वह ऐसा करना ठीक समझे, बालक का वास्तविक भारसाधन रखने वाले माता-पिता या संरक्षक से अपेक्षा कर सकेगा। कि वह उस बालक के बारे में किसी कार्यवाही में उपस्थित हों।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 (JJ Act Section-94 in Hindi)

आयु के विषय में उपधारणा और उसका अवधारण-

( 1 ) जहां बोर्ड या समिति को, इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन (साक्ष्य देने के प्रयोजन से भिन्न) उसके समक्ष लाए गए व्यक्ति उपसंजाति के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि उक्त व्यक्ति बालक है तो समिति या बोर्ड बालक की यथासंभव सन्निकट आयु का कथन करते हुए ऐसे संप्रेक्षण को अभिलिखित करेगा और आयु की और अभिपुष्टि की प्रतीक्षा किए बिना, यथास्थिति, धारा 14 या धारा 36 के अधीन जांच करेगा।
(2) यदि समिति या बोर्ड के पास इस संबंध में संदेह होने के युक्तियुक्त आधार हैं कि क्या उसके समक्ष लाया गया व्यक्ति बालक है या नहीं, तो यथास्थिति, समिति या बोर्ड, निम्नलिखित साक्ष्य अभिप्राप्त करके आयु अवधारण की प्रक्रिया का जिम्मा लेगा-
(i) विद्यालय से प्राप्त जन्म तारीख प्रमाण-पत्र या संबंधित परीक्षा बोर्ड से मैट्रिकुलेशन या समतुल्य प्रमाण-पत्र, यदि उपलब्ध हो; और उसके अभाव में,
(ii) निगम या नगरपालिका प्राधिकारी या पंचायत द्वारा दिया गया जन्म प्रमाण-पत्र ;
(iii) उपरोक्त (i) और (ii) के अभाव में, आयु का अवधारण समिति या बोर्ड के आदेश पर की गई अस्थि जांच या कोई अन्य नवीनतम चिकित्सीय आयु अवधारण जांच के आधार पर किया जाएगा:
परंतु समिति या बोर्ड के आदेश पर की गई ऐसी आयु अवधारण जांच ऐसे आदेश की तारीख से पंद्रह दिन के भीतर पूरी की जाएगी।
(3) समिति या बोर्ड द्वारा उसके समक्ष इस प्रकार लाए गए व्यक्ति की अभिलिखित आयु, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए उस व्यक्ति की सही आयु समझी जाएगी।

Juvenile Justice Act Section-94 (JJ Act Section-94 in English)

Presumption and determination of age-

(1) Where, it is obvious to the Committee or the Board, based on the appearance of the person brought before it under any of the provisions of this Act (other than for the purpose of giving evidence) that the said person is a child, the Committee or the Board shall record such observation stating the age of the child as nearly as may be and proceed with the inquiry under section 14 or section 36, as the case may be, without waiting for further confirmation of the age.
(2) In case, the Committee or the Board has reasonable grounds for doubt regarding whether the person brought before it is a child or not, the Committee or the Board, as the case may be, shall undertake the process of age determination, by seeking evidence by obtaining—
(i) the date of birth certificate from the school, or the matriculation or equivalent certificate from the concerned examination Board, if available; and in the absence thereof;
(ii) the birth certificate given by a corporation or a municipal authority or a panchayat;
(iii) and only in the absence of (i) and (ii) above, age shall be determined by an ossification test or any other latest medical age determination test conducted on the orders of the Committee or the Board:
Provided such age determination test conducted on the order of the Committee or the Board shall be completed within fifteen days from the date of such order.
(3) The age recorded by the Committee or the Board to be the age of person so brought before it shall, for the purpose of this Act, be deemed to be the true age of that person.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 94 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 93 | Juvenile Justice Act Section 93

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-93) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 93 के अनुसार समिति या बोर्ड को यह प्रतीत होता है कि इस अधिनियम के अनुसरण में किसी विशेष गृह या किसी संप्रेक्षण गृह या किसी बाल गृह या किसी आश्रय गृह या किसी संस्था में रखा गया कोई बालक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति है या अल्कोहल या ऐसी अन्य औषधियों का आदी है जिससे किसी व्यक्ति में व्यवहारात्मक परिवर्तन हो जाते हैं, वहां समिति या बोर्ड, मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 (1987 का 14 ) या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार, ऐसे बालक को मनोचिकित्सा अस्पताल या मनोचिकित्सा परिचर्या गृह ले जाने का आदेश कर सकेगा, जिसे JJ Act Section-93 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 93 (Juvenile Justice Act Section-93) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 93 JJ Act Section-93 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) समिति या बोर्ड को यह प्रतीत होता है कि इस अधिनियम के अनुसरण में किसी विशेष गृह या किसी संप्रेक्षण गृह या किसी बाल गृह या किसी आश्रय गृह या किसी संस्था में रखा गया कोई बालक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति है या अल्कोहल या ऐसी अन्य औषधियों का आदी है जिससे किसी व्यक्ति में व्यवहारात्मक परिवर्तन हो जाते हैं, वहां समिति या बोर्ड, मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 (1987 का 14 ) या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार, ऐसे बालक को मनोचिकित्सा अस्पताल या मनोचिकित्सा परिचर्या गृह ले जाने का आदेश कर सकेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 93 (JJ Act Section-93 in Hindi)

ऐसे बाक का स्थानांतरण, जो मानसिक रूप से बीमार है या अल्कोहल या अन्य का आदी है-

( 1 ) जहां समिति या बोर्ड को यह प्रतीत होता है कि इस अधिनियम के अनुसरण में किसी विशेष गृह या किसी संप्रेक्षण गृह या किसी बाल गृह या किसी आश्रय गृह या किसी संस्था में रखा गया कोई बालक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति है या अल्कोहल या ऐसी अन्य औषधियों का आदी है जिससे किसी व्यक्ति में व्यवहारात्मक परिवर्तन हो जाते हैं, वहां समिति या बोर्ड, मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 (1987 का 14 ) या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार, ऐसे बालक को मनोचिकित्सा अस्पताल या मनोचिकित्सा परिचर्या गृह ले जाने का आदेश कर सकेगा।
(2) यदि बालक को उपधारा (1) के अधीन किसी मनोचिकित्सा अस्पताल या मनोचिकित्सा परिचर्या गृह में ले जाया गया था तो समिति या बोर्ड मनोचिकित्सा अस्पताल या मनोचिकित्सा परिचर्या गृह के छुट्टी दिए जाने के प्रमाणपत्र में दिए गए परामर्श के आधार पर ऐसे बालक को आदी व्यक्तियों के लिए एकीकृत पुनर्वास केंद्र या राज्य सरकार द्वारा मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों (जिसके अंतर्गत किसी स्वापक औषधि या मनः प्रभावी प्रदार्थ भी हैं) के लिए चलाए जा रहे वैसे ही केंद्रों में से किसी में भेज सकेगा और ऐसे बालक को भेजा जाना केवल अंतः रोगी उपचार के लिए अपेक्षित अवधि के लिए होगा।
स्पष्टीकरण. – इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) “आदी व्यक्तियों के लिए एकीकृत पुनर्वास केंद्र” का वही अर्थ है जो केंद्रीय सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा विरचित “अल्कोहोलिजम और पदार्थ (औषधियां) दुरुपयोग के निवारण के लिए और सामाजिक सुरक्षा सेवाओं के लिए केंद्रीय क्षेत्र की सहायता स्कीम” या तत्समय प्रवृत्त किसी तत्स्थानी स्कीम में उसका है;
(ख) “मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति” का वही अर्थ है जो मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम,1987 (1987 का 14 ) की धारा 2 के खंड (ठ) में उसका है; 
(ग) “मनोचिकित्सा अस्पताल” या “मनोचिकित्सा परिचर्या गृह” का वही अर्थ है, जो मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 (1987 का 14) की धारा 2 के खंड (थ) में उनका है।

Juvenile Justice Act Section-93 (JJ Act Section-93 in English)

Transfer of a child who is mentally ill or addicted to alcohol or other drugs-

(1) Where it appears to the Committee or the Board that any child kept in a special home or an observation home or a Childrens Home or in an institution in pursuance of the provisions of this Act, is a mentally ill person or addicted to alcohol or other drugs which lead to behavioural changes in a person, the Committee or the Board, may order removal of such child to a psychiatric hospital or psychiatric nursing home in accordance with the provisions of the Mental Health Act, 1987 (14 of 1987) or the rules made thereunder.
(2) In case the child had been removed to a psychiatric hospital or psychiatric nursing home under sub-section (1), the Committee or the Board may, on the basis of the advice given in the certificate of discharge of the psychiatric hospital or psychiatric nursing home, order to remove such child to an Integrated Rehabilitation Centre for Addicts or similar centres maintained by the State Government for mentally ill persons (including the persons addicted to any narcotic drug or psychotropic substance) and such removal shall be only for the period required for the inpatient treatment of such child.
Explanation.—For the purposes of this sub-section,—
(a) “Integrated Rehabilitation Centre for Addicts” shall have the meaning assigned to it under the scheme called Central Sector Scheme of Assistance for Prevention of Alcoholism and Substance (Drugs) Abuse and for Social Defence Services framed by the Central Government in the Ministry of Social Justice and Empowerment or any other corresponding scheme for the time being in force;
(b) “mentally ill person” shall have the same meaning assigned to it in clause (l) of section 2 of the Mental Health Act, 1987 (14 of 1987);
(c) “psychiatric hospital” or “psychiatric nursing home” shall have the same meaning assigned to it in clause (q) of section 2 of the Mental Health Act, 1987 (14 of 1987).

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 93 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 92 | Juvenile Justice Act Section 92

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-92) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 92 के अनुसार जब किसी ऐसे बालक के बारे में, जिसे समिति या बोर्ड के समक्ष लाया गया है, यह पाया जाता है कि वह ऐसे रोग से पीड़ित है जिसके लिए लम्बे समय तक चिकित्सीय उपचार की उपेक्षा होगी या उसे कोई शारीरिक या मानसिक व्याधि है, जो उपचार से ठीक हो जाएगी, तब, यथास्थिति, समिति या बोर्ड बालक को ऐसे समय के लिए, जिसे वह अपेक्षित उपचार के लिए आवश्यक समझता है, किसी उपयुक्त सुविधातंत्र के रूप में मान्यताप्राप्त किसी स्थान पर, जो विहित किया जाए, भेज सकेगा, जिसे JJ Act Section-92 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 92 (Juvenile Justice Act Section-92) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 92 JJ Act Section-92 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) जब किसी ऐसे बालक के बारे में, जिसे समिति या बोर्ड के समक्ष लाया गया है, यह पाया जाता है कि वह ऐसे रोग से पीड़ित है जिसके लिए लम्बे समय तक चिकित्सीय उपचार की उपेक्षा होगी या उसे कोई शारीरिक या मानसिक व्याधि है, जो उपचार से ठीक हो जाएगी, तब, यथास्थिति, समिति या बोर्ड बालक को ऐसे समय के लिए, जिसे वह अपेक्षित उपचार के लिए आवश्यक समझता है, किसी उपयुक्त सुविधातंत्र के रूप में मान्यताप्राप्त किसी स्थान पर, जो विहित किया जाए, भेज सकेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 92 (JJ Act Section-92 in Hindi)

किसी अनुमोदित स्थान पर दीर्घकालिक चिकित्सा उपचार वाले रोग से पीड़ित बालक का स्थान-

जब किसी ऐसे बालक के बारे में, जिसे समिति या बोर्ड के समक्ष लाया गया है, यह पाया जाता है कि वह ऐसे रोग से पीड़ित है जिसके लिए लम्बे समय तक चिकित्सीय उपचार की उपेक्षा होगी या उसे कोई शारीरिक या मानसिक व्याधि है, जो उपचार से ठीक हो जाएगी, तब, यथास्थिति, समिति या बोर्ड बालक को ऐसे समय के लिए, जिसे वह अपेक्षित उपचार के लिए आवश्यक समझता है, किसी उपयुक्त सुविधातंत्र के रूप में मान्यताप्राप्त किसी स्थान पर, जो विहित किया जाए, भेज सकेगा।

Juvenile Justice Act Section-92 (JJ Act Section-92 in English)

Placement of a child suffering from disease requiring prolonged medical treatment in an approved place-

When a child, who has been brought before the Committee or the Board, is found to be suffering from a disease requiring prolonged medical treatment or physical or mental complaint that will respond to treatment, the Committee or the Board, as the case may be, may send the child to any place recognised as a fit facility as prescribed for such period as it may think necessary for the required treatment.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 92 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 91 | Juvenile Justice Act Section 91

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-91) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 91 के अनुसार यदि जांच के अनुक्रम में किसी प्रक्रम पर समिति या बोर्ड का समाधान हो जाता है कि बालक की हाजिरी जांच के प्रयोजनार्थ आवश्यक नहीं है तो, यथास्थिति, समिति या बोर्ड बालक को हाजिरी से अभिमुक्ति प्रदान कर सकेगा और उसकी हाजिरी को कथन अभिलिखित करने के प्रयोजन तक सीमित और तत्पश्चात् संबंधित बालक की अनुपस्थिति में भी जांच तब तक जारी रहेगी सिवाय जब तक समिति या बोर्ड द्वारा अन्यथा आदेश न किया जाए, जिसे JJ Act Section-91 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 91 (Juvenile Justice Act Section-91) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 91 JJ Act Section-91 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) यदि जांच के अनुक्रम में किसी प्रक्रम पर समिति या बोर्ड का समाधान हो जाता है कि बालक की हाजिरी जांच के प्रयोजनार्थ आवश्यक नहीं है तो, यथास्थिति, समिति या बोर्ड बालक को हाजिरी से अभिमुक्ति प्रदान कर सकेगा और उसकी हाजिरी को कथन अभिलिखित करने के प्रयोजन तक सीमित और तत्पश्चात् संबंधित बालक की अनुपस्थिति में भी जांच तब तक जारी रहेगी सिवाय जब तक समिति या बोर्ड द्वारा अन्यथा आदेश न किया जाए।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 91 (JJ Act Section-91 in Hindi)

बालक को हाजिरी से अभिमुक्ति प्रदान करना-

(1) यदि जांच के अनुक्रम में किसी प्रक्रम पर समिति या बोर्ड का समाधान हो जाता है कि बालक की हाजिरी जांच के प्रयोजनार्थ आवश्यक नहीं है तो, यथास्थिति, समिति या बोर्ड बालक को हाजिरी से अभिमुक्ति प्रदान कर सकेगा और उसकी हाजिरी को कथन अभिलिखित करने के प्रयोजन तक सीमित और तत्पश्चात् संबंधित बालक की अनुपस्थिति में भी जांच तब तक जारी रहेगी सिवाय जब तक समिति या बोर्ड द्वारा अन्यथा आदेश न किया जाए।
(2) जहां बोर्ड या समिति के समक्ष बालक की हाजरी अपेक्षित है, वहां ऐसा बालक स्वयं और बालक के साथ एक अनुरक्षक, यथास्थिति बोर्ड या समिति या जिला बालक संरक्षण एकक द्वारा वास्तविक उपगत व्ययों के अनुसार यात्रा प्रतिपूर्ति का हकदार होगा।

Juvenile Justice Act Section-91 (JJ Act Section-91 in English)

Dispensing with attendance of child

(1) If, at any stage during the course of an inquiry, the Committee or the Board is satisfied that the attendance of the child is not essential for the purpose of inquiry, the Committee or the Board, as the case may be, shall dispense with the attendance of a child and limit the same for the purpose of recording the statement and subsequently, the inquiry shall continue even in the absence of the child concerned, unless ordered otherwise by the Committee or the Board.
(2) Where the attendance of a child is required before the Board or the Committee, such child shall be entitled to travel reimbursement for self and one escort accompanying the child as per actual expenditure incurred, by the Board, or the Committee or the District Child Protection Unit, as the case may be.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 91 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 90 | Juvenile Justice Act Section 90

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-90) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 90 के अनुसार समिति या बोर्ड, जिसके समक्ष बालक, इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन लाया जाता है, जब भी वह ऐसा करना ठीक समझे, बालक का वास्तविक भारसाधन रखने वाले माता-पिता या संरक्षक से अपेक्षा कर सकेगा। कि वह उस बालक के बारे में किसी कार्यवाही में उपस्थित हों, जिसे JJ Act Section-90 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 90 (Juvenile Justice Act Section-90) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 90 JJ Act Section-90 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) समिति या बोर्ड, जिसके समक्ष बालक, इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन लाया जाता है, जब भी वह ऐसा करना ठीक समझे, बालक का वास्तविक भारसाधन रखने वाले माता-पिता या संरक्षक से अपेक्षा कर सकेगा। कि वह उस बालक के बारे में किसी कार्यवाही में उपस्थित हों।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 90 (JJ Act Section-90 in Hindi)

बालक के माता-पिता या संरक्षक की हाजिरी-

यथास्थिति, समिति या बोर्ड, जिसके समक्ष बालक, इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन लाया जाता है, जब भी वह ऐसा करना ठीक समझे, बालक का वास्तविक भारसाधन रखने वाले माता-पिता या संरक्षक से अपेक्षा कर सकेगा। कि वह उस बालक के बारे में किसी कार्यवाही में उपस्थित हों ।

Juvenile Justice Act Section-90 (JJ Act Section-90 in English)

Attendance of parent or guardian of child-

The Committee or the Board, as the case may be, before which a child is brought under any of the provisions of this Act, may, whenever it so thinks fit, require any parent or guardian having the actual charge of the child to be present at any proceeding in respect of that child.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 90 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।