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किशोर न्याय अधिनियम की धारा 83 | Juvenile Justice Act Section 83

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-83) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 83 के अनुसारकोई गैर- राज्यिक स्वयंभू उग्रवादी समूह या दल, जिसकी केंद्रीय सरकार द्वारा उस रूप में पहचान की गई है, यदि किसी प्रयोजन के लिए किसी बालक की भर्ती करता है या उसका उपयोग करता है, तो वह कठोर कारावास एवंम् जुर्माने भी से दण्डित किय़ा जायेगा, जिसे JJ Act Section-83 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 83 (Juvenile Justice Act Section-83) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 83 JJ Act Section-83 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) गैर- राज्यिक स्वयंभू उग्रवादी समूह या दल, जिसकी केंद्रीय सरकार द्वारा उस रूप में पहचान की गई है, यदि किसी प्रयोजन के लिए किसी बालक की भर्ती करता है या उसका उपयोग करता है, तो वह कठोर कारावास एवंम् जुर्माने भी से दण्डित किय़ा जायेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 83 (JJ Act Section-83 in Hindi)

उग्रवादी समूहों या अन्य वयस्कों द्वारा बालक का उपयोग-

(1) कोई गैर- राज्यिक स्वयंभू उग्रवादी समूह या दल, जिसकी केंद्रीय सरकार द्वारा उस रूप में पहचान की गई है, यदि किसी प्रयोजन के लिए किसी बालक की भर्ती करता है या उसका उपयोग करता है, तो वह कठोर कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और पांच लाख रुपए के जुर्माने से भी, दंडनीय होगा ।
(2) को वयस्क या कोई वयस्क समूह, बालकों का व्यष्टिक रूप से या किसी गैंग के रूप में अवैध कार्यकलापों के लिए उपयोग करता है, वह ऐसी अवधि के कठोर कारावास का, जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दायी होगा और पांच लाख रुपए तक के जुर्माने का भी दायी होगा ।

Juvenile Justice Act Section-83 (JJ Act Section-83 in English)

Use of child by militant groups or other adults-

(1) Any non-State, self-styled militant group or outfit declared as such by the Central Government, if recruits or uses any child for any purpose, shall be liable for rigorous imprisonment for a term which may extend to seven years and shall also be liable to fine of five lakh rupees.
(2) Any adult or an adult group uses children for illegal activities either individually or as a gang shall be liable for rigorous imprisonment for a term which may extend to seven years and shall also be liable to fine of five lakh rupees.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 83 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 82 | Juvenile Justice Act Section 82

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-82) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 82 के अनुसार किसी बालक देखरेख संस्था का भारसाधक या उसमें नियोजित कोई व्यक्ति, जो किसी बालक को अनुशासनबद्ध करने के उद्देश्य से भी जानबूझकर किसी बालक को शारीरिक दंड देगा, वह प्रथम दोषसिद्धि पर दस हजार रुपए के जुर्माने से और प्रत्येक पश्चातवर्ती अपराध के लिए ऐसे कारावास एवंम् जुर्माने से से दण्डित किय़ा जायेगा, जिसे JJ Act Section-82 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 82 (Juvenile Justice Act Section-82) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 82 JJ Act Section-82 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) किसी बालक देखरेख संस्था का भारसाधक या उसमें नियोजित कोई व्यक्ति, जो किसी बालक को अनुशासनबद्ध करने के उद्देश्य से भी जानबूझकर किसी बालक को शारीरिक दंड देगा, वह प्रथम दोषसिद्धि पर दस हजार रुपए के जुर्माने से और प्रत्येक पश्चातवर्ती अपराध के लिए ऐसे कारावास एवंम् जुर्माने से से दण्डित किय़ा जायेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 82 (JJ Act Section-82 in Hindi)

शारीरिक दंड

(1) किसी बालक देखरेख संस्था का भारसाधक या उसमें नियोजित कोई व्यक्ति, जो किसी बालक को अनुशासनबद्ध करने के उद्देश्य से भी जानबूझकर किसी बालक को शारीरिक दंड देगा, वह प्रथम दोषसिद्धि पर दस हजार रुपए के जुर्माने से और प्रत्येक पश्चातवर्ती अपराध के लिए ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से, दंडनीय होगा ।
(2) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट संस्था में नियोजित कोई व्यक्ति, उस उपधारा के अधीन किसी अपराध का दोषसिद्ध होता है तो ऐसा व्यक्ति सेवा से पदच्युति का भी दायी होगा और उसे उसके पश्चात् प्रत्यक्षतः बालकों के साथ कार्य करने से विवर्जित कर दिया जाएगा।
(3) ऐसे मामले में, जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी संस्था में किसी शारीरिक दंड की रिपोर्ट की जाती है और ऐसी संस्था का प्रबंधतंत्र किसी जांच में सहयोग नहीं करता है या समिति या बोर्ड या न्यायालय या राज्य सरकार के आदेशों का अनुपालन नहीं करता है, वहां ऐसी संस्था के प्रबंधतंत्र का भारसाधक व्यक्ति, ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष से कम की नहीं होगी और वह जुर्माने से भी, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

Juvenile Justice Act Section-82 (JJ Act Section-82 in English)

Corporal punishment-

(1) Any person in-charge of or employed in a child care institution, who subjects a child to corporal punishment with the aim of disciplining the child, shall be liable, on the first conviction, to a fine of ten thousand rupees and for every subsequent offence, shall be liable for imprisonment which may extend to three months or fine or with both.
(2) If a person employed in an institution referred to in sub-section (1), is convicted of an offence under that sub-section, such person shall also be liable for dismissal from service, and shall also be debarred from working directly with children thereafter.
(3) In case, where any corporal punishment is reported in an institution referred to in sub-section (1) and the management of such institution does not cooperate with any inquiry or comply with the orders of the Committee or the Board or court or State Government, the person in-charge of the management of the institution shall be liable for punishment with imprisonment for a term not less than three years and shall also be liable to fine which may extend to one lakh rupees.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 82 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 81 | Juvenile Justice Act Section 81

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-81) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 81 के अनुसार ऐसा कोई व्यक्ति, जो किसी बालक का किसी प्रयोजन के लिए विक्रय या क्रय करता है या उसे प्राप्त करता है, तो उसे कठिन कारावास से दण्डित किय़ा जायेगा, जिसे JJ Act Section-81 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 81 (Juvenile Justice Act Section-81) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 81 JJ Act Section-81 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) ऐसा कोई व्यक्ति, जो किसी बालक का किसी प्रयोजन के लिए विक्रय या क्रय करता है या उसे प्राप्त करता है, कठिन कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी और एक लाख रुपए के जुर्माने से भी, दंडनीय होगा

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 81 (JJ Act Section-81 in Hindi)

बालकों का किसी प्रयोजन के लिए विक्रय और उपापन-

ऐसा कोई व्यक्ति, जो किसी बालक का किसी प्रयोजन के लिए विक्रय या क्रय करता है या उसे प्राप्त करता है, कठिन कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी और एक लाख रुपए के जुर्माने से भी, दंडनीय होगा :
परंतु जहां ऐसा अपराध बालक का वास्तविक भारसाधन रखने वाले किसी व्यक्ति द्वारा, जिसके अंतर्गत किसी अस्पताल या परिचर्या गृह या प्रसूति गृह के कर्मचारी भी हैं, किया जाता है, वहां कारावास की अवधि तीन वर्ष से कम की नहीं होगी और सात वर्ष तक की हो सकेगी |

Juvenile Justice Act Section-81 (JJ Act Section-81 in English)

Sale and procurement of children for any purpose-

Any person who sells or buys a child for any purpose shall be punishable with rigorous imprisonment for a term which may extend to five years and shall also be liable to fine of one lakh rupees:
Provided that where such offence is committed by a person having actual charge of the child, including employees of a hospital or nursing home or maternity home, the term of imprisonment shall not be less than three years and may extend up to seven years.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 81 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 80 | Juvenile Justice Act Section 80

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-80) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 80 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति या संगठन किसी अनाथ, परित्यक्त या अभ्यर्पित बालक को इस अधिनियम में यथाउपबंधित उपबंधों या प्रक्रियाओं का अनुसरण किए बिना दत्तकग्रहण करने के प्रयोजन के लिए प्रस्थापना करता है, उसे देता है या प्राप्त करता है, तो ऐसा व्यक्ति या संगठन, दोनों में से किसी भांति के कारावास से दंण्डित किया जायेगा, जिसे JJ Act Section-80 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 80 (Juvenile Justice Act Section-80) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 80 JJ Act Section-80 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) यदि कोई व्यक्ति या संगठन किसी अनाथ, परित्यक्त या अभ्यर्पित बालक को इस अधिनियम में यथाउपबंधित उपबंधों या प्रक्रियाओं का अनुसरण किए बिना दत्तकग्रहण करने के प्रयोजन के लिए प्रस्थापना करता है, उसे देता है या प्राप्त करता है, तो ऐसा व्यक्ति या संगठन, दोनों में से किसी भांति के कारावास से दंण्डित किया जायेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 80 (JJ Act Section-80 in Hindi)

विहित प्रक्रियाओं का अनुसरण किए बिना दत्तकग्रहण करने के लिए दांडिक उपाय-

यदि कोई व्यक्ति या संगठन किसी अनाथ, परित्यक्त या अभ्यर्पित बालक को इस अधिनियम में यथाउपबंधित उपबंधों या प्रक्रियाओं का अनुसरण किए बिना दत्तकग्रहण करने के प्रयोजन के लिए प्रस्थापना करता है, उसे देता है या प्राप्त करता है, तो ऐसा व्यक्ति या संगठन, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या एक लाख रुपए के जुर्माने से या दोनों से, दंडनीय होगा :
परंतु ऐसे मामले में जहां अपराध किसी मान्यताप्राप्त दत्तकग्रहण अभिकरण द्वारा किया जाता है,
दत्तकग्रहण अभिकरण के भारसाधक और दिन-प्रतिदिन कार्यों के संचालन के लिए उत्तरदायी व्यक्तियों पर अधिनिर्णीत उपरोक्त दंड के अतिरिक्त, ऐसे अभिकरण का धारा 41 के अधीन रजिस्ट्रीकरण और धारा 65 के अधीन उसकी मान्यता को भी कम से कम एक वर्ष की अवधि के लिए वापस ले लिया जाएगा।

Juvenile Justice Act Section-80 (JJ Act Section-80 in English)

Punitive measures for adoption without following prescribed procedures-

If any person or organisation offers or gives or receives, any orphan, abandoned or surrendered child, for the purpose of adoption without following the provisions or procedures as provided in this Act, such person or organisation shall be punishable with imprisonment of either description for a term which may extend upto three years, or with fine of one lakh rupees, or with both:
Provided in case where the offence is committed by a recognised adoption agency, in addition to the above punishment awarded to the persons in-charge of, and responsible for the conduct of the day-to-day affairs of the adoption agency, the registration of such agency under section 41 and its recognition under section 65 shall also be withdrawn for a minimum period of one year.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 80 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 79 | Juvenile Justice Act Section 79

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-79) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 79 के अनुसार तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी,जो कोई किसी नियोजन के प्रयोजन के लिए बालक को दृश्यमावतः लगाएगा या उसे बंधुआ रखेगा या उसके उपार्जनों को विधारित करेगा या उसके उपार्जन को अपने स्वयं के प्रयोजन के लिए उपयोग में लाएगा, वह कठिन कारावास से दंण्डित किया जायेगा, जिसे JJ Act Section-79 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 79 (Juvenile Justice Act Section-79) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 79 JJ Act Section-79 के तहत तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी,जो कोई किसी नियोजन के प्रयोजन के लिए बालक को दृश्यमावतः लगाएगा या उसे बंधुआ रखेगा या उसके उपार्जनों को विधारित करेगा या उसके उपार्जन को अपने स्वयं के प्रयोजन के लिए उपयोग में लाएगा, वह कठिन कारावास से दंण्डित किया जायेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 79 (JJ Act Section-79 in Hindi)

किशोर बालक कर्मचारी का शोषण

तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी,जो कोई किसी नियोजन के प्रयोजन के लिए बालक को दृश्यमावतः लगाएगा या उसे बंधुआ रखेगा या उसके उपार्जनों को विधारित करेगा या उसके उपार्जन को अपने स्वयं के प्रयोजन के लिए उपयोग में लाएगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक हो सकेगी और एक लाख रुपए के जुर्माने से भी, दंडनीय होगा।
स्पष्टीकरण – इस धारा के प्रयोजनों के लिए “नियोजन” पद के अंतर्गत माल और सेवाओं का विक्रय और आर्थिक लाभ के लिए लोक स्थानों में मनोरंजन करना भी आएगा।

Juvenile Justice Act Section-79 (JJ Act Section-79 in English)

Exploitation of a child employee-

Notwithstanding anything contained in any law for the time being in force, whoever ostensibly engages a child and keeps him in bondage for the purpose of employment or withholds his earnings or uses such earning for his own purposes shall be punishable with rigorous imprisonment for a term which may extend to five years and shall also be liable to fine of one lakh rupees.
Explanation.--For the purposes of this section, the term “employment” shall also include selling goods and services, and entertainment in public places for economic gain.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 79 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 78 | Juvenile Justice Act Section 78

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-78) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 78 के अनुसार जो कोई किसी बालक का किसी मादक लिकर, स्वापक औषधि, मनः प्रभावी पदार्थ के विक्रय, फुटकर क्रय-विक्रय, साथ रखने, आपूर्ति करने या तस्करी करने के लिए उपयोग करेगा, वह कठिन कारावास से दंण्डित किया जायेगा, जिसे JJ Act Section-78 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 78 (Juvenile Justice Act Section-78) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 78 JJ Act Section-78 के तहत जो कोई किसी बालक का किसी मादक लिकर, स्वापक औषधि, मनः प्रभावी पदार्थ के विक्रय, फुटकर क्रय-विक्रय, साथ रखने, आपूर्ति करने या तस्करी करने के लिए उपयोग करेगा, वह कठिन कारावास से दंण्डित किया जायेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 78 (JJ Act Section-78 in Hindi)

किसी बालक का किसी मादक लिकर, स्वापक औषधि या मनः प्रभावी पदार्थ के विक्रय, फुटकर क्रय-विक्रय, उसे साथ रखने, उसकी आपूर्ति करने या तस्करी करने के लिए उपयोग किया जाना-

जो कोई किसी बालक का किसी मादक लिकर, स्वापक औषधि, मनः प्रभावी पदार्थ के विक्रय, फुटकर क्रय-विक्रय, साथ रखने, आपूर्ति करने या तस्करी करने के लिए उपयोग करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और एक लाख रुपए के जुर्माने से भी, दंडनीय होगा।

Juvenile Justice Act Section-78 (JJ Act Section-78 in English)

Using a child for vending, peddling, carrying, supplying or smuggling any intoxicating liquor, narcotic drug or psychotropic substance-

Whoever uses a child, for vending, peddling, carrying, supplying or smuggling any intoxicating liquor, narcotic drug or psychotropic substance, shall be liable for rigorous imprisonment for a term which may extend to seven years and shall also be liable to a fine up to one lakh rupees.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 78 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।