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किशोर न्याय अधिनियम की धारा 89 | Juvenile Justice Act Section 89

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-89) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 89 के अनुसार कोई बालक जो इस अध्याय के अधीन कोई अपराध करता है वह इस अधिनियम के अधीन विधि का उल्लंघन करने वाला बालक माना जाएगा, जिसे JJ Act Section-89 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 89 (Juvenile Justice Act Section-89) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 89 JJ Act Section-89 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) कोई बालक जो इस अध्याय के अधीन कोई अपराध करता है वह इस अधिनियम के अधीन विधि का उल्लंघन करने वाला बालक माना जाएगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 89 (JJ Act Section-89 in Hindi)

इस अध्याय के अधीन बालक द्वारा किया गया अपराध-

कोई बालक जो इस अध्याय के अधीन कोई अपराध करता है वह इस अधिनियम के अधीन विधि का उल्लंघन करने वाला बालक माना जाएगा ।

Juvenile Justice Act Section-89 (JJ Act Section-89 in English)

Offence committed by child under this Chapter-

Any child who commits any offence under this Chapter shall be considered as a child in conflict with law under this Act.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 89 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 88 | Juvenile Justice Act Section 88

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-88) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 88 के अनुसार जहां कोई कार्य या लोप कोई ऐसा अपराध गठित करता है जो इस अधिनियम और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन भी दंडनीय है, वहां ऐसी किसी विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसे अपराध का दोषी पाया गया अपराधी ऐसी विधि के अधीन ऐसे दंड का भागी होगा, जिसे JJ Act Section-88 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 88 (Juvenile Justice Act Section-88) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 88 JJ Act Section-88 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) जहां कोई कार्य या लोप कोई ऐसा अपराध गठित करता है जो इस अधिनियम और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन भी दंडनीय है, वहां ऐसी किसी विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसे अपराध का दोषी पाया गया अपराधी ऐसी विधि के अधीन ऐसे दंड का भागी होगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 88 (JJ Act Section-88 in Hindi)

वैकल्पिक दंड-

जहां कोई कार्य या लोप कोई ऐसा अपराध गठित करता है जो इस अधिनियम और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन भी दंडनीय है, वहां ऐसी किसी विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसे अपराध का दोषी पाया गया अपराधी ऐसी विधि के अधीन ऐसे दंड का भागी होगा, जो ऐसे दंड का उपबंध करता है जो मात्रा में अधिक है।

Juvenile Justice Act Section-88 (JJ Act Section-88 in English)

Alternative punishment-

Where an act or omission constitutes an offence punishable under this Act and also under any other law for the time being in force, then, notwithstanding anything contained in any such law, the offender found guilty of such offence shall be liable for punishment under such law which provides for punishment which is greater in degree.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 88 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 87 | Juvenile Justice Act Section 87

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-87) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 87 के अनुसार जो कोई व्यक्ति किसी बालक का दुष्प्रेरित करता है, तो कोई इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का दुष्प्रेरण करेगा, यदि दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप दुष्प्रेरित कृत्य कर दिया जाता है वह उस अपराध के लिए उपबंधित दंड से दंडित होगा, जिसे JJ Act Section-87 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 87 (Juvenile Justice Act Section-87) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 87 JJ Act Section-87 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) जो कोई व्यक्ति किसी बालक का दुष्प्रेरित करता है, तो कोई इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का दुष्प्रेरण करेगा, यदि दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप दुष्प्रेरित कृत्य कर दिया जाता है वह उस अपराध के लिए उपबंधित दंड से दंडित होगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 87 (JJ Act Section-87 in Hindi)

दुष्प्रेरण

जो कोई इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का दुष्प्रेरण करेगा, यदि दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप दुष्प्रेरित कृत्य कर दिया जाता है वह उस अपराध के लिए उपबंधित दंड से दंडित होगा ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “दुष्प्रेरण” का वही अर्थ होगा जो उसका भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का 45) की धारा 107 में है।

Juvenile Justice Act Section-87 (JJ Act Section-87 in English)

Abetment-

Whoever abets any offence under this Act, if the act abetted is committed in consequence of the abetment, shall be punished with the punishment provided for that offence.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 87 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 86 | Juvenile Justice Act Section 86

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-86) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 86 के अनुसार जो कोई व्यक्ति किसी बालक पर जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध सात वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय है, वहां ऐसा अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होगा, जिसे JJ Act Section-86 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 86 (Juvenile Justice Act Section-86) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 86 JJ Act Section-86 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) जो कोई व्यक्ति किसी बालक पर जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध सात वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय है, वहां ऐसा अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 86 (JJ Act Section-86 in Hindi)

अपराधों का वर्गीकरण और अभिहित न्यायालय-

( 1 ) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध सात वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय है, वहां ऐसा अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होगा ।
(2) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध ऐसे कारावास से दंडनीय है जिसकी अवधि तीन वर्ष और उससे अधिक किंतु सात वर्ष से कम है, वहां ऐसा अपराध असंज्ञेय और अजमानतीय होगा।
(3) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध तीन वर्ष से कम के कारावास या केवल जुर्माने से दंडनीय है, वहां ऐसा अपराध असंज्ञेय और जमानतीय होगा।
(4) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) या बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 (2006 का 4) अथवा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (2012 का 32) में किसी बात के होते हुए भी इस अधिनियम के अधीन अपराध बालक न्यायालय द्वारा विचारणीय होंगे 

Juvenile Justice Act Section-86 (JJ Act Section-86 in English)

Classification of offences and designated court-

(1) Where an offence under this Act is punishable with imprisonment for a term more than seven years, then, such offence shall be cognizable, non-bailable and triable by a Childrens Court.
(2) Where an offence under this Act is punishable with imprisonment for a term of three years and above, but not more than seven years, then, such offence shall be cognizable, non-bailable and triable by a Magistrate of First Class.
(3) Where an offence, under this Act, is punishable with imprisonment for less than three years or with fine only, then, such offence shall be non-cognizable, bailable and triable by any Magistrate.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 86 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 85 | Juvenile Justice Act Section 85

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-85) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 85 के अनुसार जो कोई व्यक्ति किसी बालक का जो कि निशक्त है अर्थात् चिकित्सक रूप मे कमजोर या मंदबुद्धि है ऐसे बालको पर अपराध करता है, तो इस अध्याय में निर्दिष्ट अपराधों में से किसी अपराध को बालक पर करता है, तो ऐसा व्यक्ति ऐसे अपराध के लिए उपबंधित दोहरी शास्ति का दायी होगा, जिसे JJ Act Section-85 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 85 (Juvenile Justice Act Section-85) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 85 JJ Act Section-85 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) जो कोई व्यक्ति किसी बालक का जो कि निशक्त है अर्थात् चिकित्सक रूप मे कमजोर या मंदबुद्धि है ऐसे बालको पर अपराध करता है, तो इस अध्याय में निर्दिष्ट अपराधों में से किसी अपराध को बालक पर करता है, तो ऐसा व्यक्ति ऐसे अपराध के लिए उपबंधित दोहरी शास्ति का दायी होगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 85 (JJ Act Section-85 in Hindi)

निःशक्त बालकों पर किए गए अपराध-

जो कोई इस अध्याय में निर्दिष्ट अपराधों में से किसी अपराध को, किसी ऐसे बालक पर कारित करता है, जिसे किसी चिकित्सा व्यवसायी द्वारा इस प्रकार निःशक्त रूप में प्रमाणित किया गया है, वहां ऐसा व्यक्ति ऐसे अपराध के लिए उपबंधित दोहरी शास्ति का दायी होगा ।
स्पष्टीकरण- इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए, “निःशक्तता” पद का वही अर्थ होगा जो निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1 ) की धारा 2 के खंड (झ) में उसका है ।

Juvenile Justice Act Section-85 (JJ Act Section-85 in English)

Offences committed on disabled children-

Whoever commits any of the offences referred to in this Chapter on any child who is disabled as so certified by a medical practitioner, then, such person shall be liable to twice the penalty provided for such offence.
Explanation.—For the purposes of this Act, the term disability shall have the same meaning as assigned to it under clause (i) of section 2 of the Persons with Disabilities (Equal Opportunities, Protection of Rights and Full Participation) Act, 1995 (1 of 1996).

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 85 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 84 | Juvenile Justice Act Section 84

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-84) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 84 के अनुसार जो कोई व्यक्ति किसी बालक का अपहरण एवं व्यपहरण करता है, तो इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 359 से धारा 369 के उपबंध यथावश्यक परिवर्तनों सहित किसी ऐसे बालक या अवयस्क का लागू होंगे जो अठारह वर्ष से कम आयु का है लागू होगा, जिसे section 84 jj act in hindi के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 84 (Juvenile Justice Act Section-84) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 84 JJ Act Section-84 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) जो कोई व्यक्ति किसी बालक का अपहरण एवं व्यपहरण करता है, तो इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 359 से धारा 369 के उपबंध यथावश्यक परिवर्तनों सहित किसी ऐसे बालक या अवयस्क का लागू होंगे जो अठारह वर्ष से कम आयु का है लागू होगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 84 (JJ Act Section-84 in Hindi)

बालक का व्यपहरण और अपहरण-

इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 359 से धारा 369 के उपबंध यथावश्यक परिवर्तनों सहित किसी ऐसे बालक या अवयस्क का लागू होंगे जो अठारह वर्ष से कम आयु का है और तदनुसार सभी उपबंधों का अर्थान्वयन किया जाएगा।

Juvenile Justice Act Section-84 (JJ Act Section-84 in English)

Kidnapping and abduction of child-

For the purposes of this Act, the provisions of sections 359 to 369 of the Indian Penal Code (45 of 1860), shall mutatis mutandis apply to a child or a minor who is under the age of eighteen years and all the provisions shall be construed accordingly.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा section 84 jj act in hindi की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।