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किशोर न्याय अधिनियम की धारा 77 | Juvenile Justice Act Section 77

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-77) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 77 के अनुसार जो कोई सम्यक् रूप से अर्हित चिकित्सा व्यवसायी के आदेश से अन्यथा किसी बालक को लोक स्थान में कोई मादक लिकर या कोई स्वापक औषधि या तंबाकू उत्पाद या मनः प्रभावी पदार्थ देगा या दिलवाएगा, जिसे JJ Act Section-77 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 77 (Juvenile Justice Act Section-77) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 77 JJ Act Section-77 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) जो कोई सम्यक् रूप से अर्हित चिकित्सा व्यवसायी के आदेश से अन्यथा किसी बालक को लोक स्थान में कोई मादक लिकर या कोई स्वापक औषधि या तंबाकू उत्पाद या मनः प्रभावी पदार्थ देगा या दिलवाएगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 77 (JJ Act Section-77 in Hindi)

बालक को मादक लिकर या स्वापक औषधि या मनः प्रभावी पदार्थ देने के लिए शास्ति

जो कोई सम्यक् रूप से अर्हित चिकित्सा व्यवसायी के आदेश से अन्यथा किसी बालक को लोक स्थान में कोई मादक लिकर या कोई स्वापक औषधि या तंबाकू उत्पाद या मनः प्रभावी पदार्थ देगा या दिलवाएगा यह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुमनि से भी,जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।

Juvenile Justice Act Section-77 (JJ Act Section-77 in English)

Penalty for giving intoxicating liquor or narcotic drug or psychotropic substance to a child-

Whoever gives, or causes to be given, to any child any intoxicating liquor or any narcotic drug or tobacco products or psychotropic substance, except on the order of a duly qualified medical practitioner, shall be punishable with rigorous imprisonment for a term which may extend to seven years and shall also be liable to a fine which may extend up to one lakh rupees.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 77 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 76 | Juvenile Justice Act Section 76

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-76) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 76 के अनुसार जो कोई भीख मांगने के प्रयोजन के लिए बालक को नियोजित करता है या किसी बालक से भीख मंगवाएगा वह कारावास से दंडित किया जायेगा, जिसे JJ Act Section-76 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 76 (Juvenile Justice Act Section-76) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 76 JJ Act Section-76 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) जो कोई भीख मांगने के प्रयोजन के लिए बालक को नियोजित करता है या किसी बालक से भीख मंगवाएगा वह कारावास से दंडित किया जायेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 76 (JJ Act Section-76 in Hindi)

भीख मांगने के लिए बालक का नियोजन

1) जो कोई भीख मांगने के प्रयोजन के लिए बालक को नियोजित करता है या किसी बालक से भीख मंगवाएगा वह कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी और एक लाख रुपए के जुर्माने से भी दंडनीय होगा:
परंतु यदि भीख मागने के प्रयोजन के लिए व्यक्ति बालक का अंगोच्छेदन करता है या उसे विकलांग बनाता है तो वह कारावास से, जो सात वर्ष से कम का नहीं होगा, किंतु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा और पांच लाख रुपए तक के जुर्माने से भी दंडनीय होगा।
(2) जो कोई बालक का वास्तविक भारसाधन या उस पर नियंत्रण रखते हुए उपधारा (1) के. अधीन किसी अपराध के कारित करने का दुष्प्रेरण करता है, वह उपधारा (1) में यथा उपबंधित शास्ति से, दंडनीय होगा और ऐसा व्यक्ति इस अधिनियम की धारा 2 के खंड (14) के उपखंड (v) के अधीन अयोग्य माना जाएगा :
परंतु ऐसे बालक को किन्हीं परिस्थितियों में विधि का उल्लंघन करने वाला नहीं माना जाएगा और उसे ऐसे संरक्षक या अभिरक्षक के भारसाधन या नियंत्रण से हटा लिया जाएगा और समुचित पुनर्वास के लिए समिति के समक्ष पेश किया जाएगा।

Juvenile Justice Act Section-76 (JJ Act Section-76 in English)

Employment of child for begging-

(1) Whoever employs or uses any child for the purpose of begging or causes any child to beg shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to five years and shall also be liable to fine of one lakh rupees:
Provided that, if for the purpose of begging, the person amputates or maims the child, he shall be punishable with rigorous imprisonment for a term not less than seven years which may extend up to ten years, and shall also be liable to fine of five lakh rupees.
(2) Whoever, having the actual charge of, or control over the child, abets the commission of an offence under sub-section (1), shall be punishable with the same punishment as provided for in subsection (1) and such person shall be considered to be unfit under sub-clause (v) of clause (14) of section 2:
Provided that the said child, shall not be considered a child in conflict with law under any circumstances, and shall be removed from the charge or control of such guardian or custodian and produced before the Committee for appropriate rehabilitation.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 76 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 | Juvenile Justice Act Section 75

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-75) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के अनुसार जो कोई बालक का वास्तविक भारसाधन या उस पर नियंत्रण रखते हुए उस बालक पर ऐसी रीति से, जिससे उस बालक को अनावश्यक मानसिक या शारीरिक कष्ट होना संभाव्य हो, हमला करेगा, उसका परित्याग करेगा, उत्पीड़न करेगा, उसे उच्छन्न करेगा या जानबूझकर उसकी उपेक्षा करेगा या उस पर हमला किया जाना, उसका परित्याग, उत्पीड़न, उच्छन्न या उसकी उपेक्षा किया जाना कारित करेगा, जिसे JJ Act Section-75 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 (Juvenile Justice Act Section-75) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 JJ Act Section-75 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) जो कोई बालक का वास्तविक भारसाधन या उस पर नियंत्रण रखते हुए उस बालक पर ऐसी रीति से, जिससे उस बालक को अनावश्यक मानसिक या शारीरिक कष्ट होना संभाव्य हो, हमला करेगा, उसका परित्याग करेगा, उत्पीड़न करेगा, उसे उच्छन्न करेगा या जानबूझकर उसकी उपेक्षा करेगा या उस पर हमला किया जाना, उसका परित्याग, उत्पीड़न, उच्छन्न या उसकी उपेक्षा किया जाना कारित करेगा या ऐसा किए जाने के लिए उसे उपाप्त करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या एक लाख रुपए तक के जुर्माने से या दोनों से दंडनीय होगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 (JJ Act Section-75 in Hindi)

बालक के प्रति क्रूरता के लिए दंड

जो कोई बालक का वास्तविक भारसाधन या उस पर नियंत्रण रखते हुए उस बालक पर ऐसी रीति से, जिससे उस बालक को अनावश्यक मानसिक या शारीरिक कष्ट होना संभाव्य हो, हमला करेगा, उसका परित्याग करेगा, उत्पीड़न करेगा, उसे उच्छन्न करेगा या जानबूझकर उसकी उपेक्षा करेगा या उस पर हमला किया जाना, उसका परित्याग, उत्पीड़न, उच्छन्न या उसकी उपेक्षा किया जाना कारित करेगा या ऐसा किए जाने के लिए उसे उपाप्त करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या एक लाख रुपए तक के जुर्माने से या दोनों से दंडनीय होगा :
परंतु उस मामले में जहां यह पाया जाता है कि जैविक माता-पिता द्वारा बालक का ऐसा परित्याग, उन परिस्थितियों के कारण है जो उनके नियंत्रण के बाहर हैं, यह माना जाएगा कि ऐसा परित्याग जानबूझकर नहीं है तथा इस धारा के दाण्डिक उपबंध ऐसे मामलों में लागू नहीं होंगे :
परंतु यह और कि यदि ऐसा अपराध किसी ऐसी व्यक्ति द्वारा किया जाता है, जो किसी संगठन द्वारा नियोजित है या उसका प्रबंधन कर रहा है, जिसे बालक की देखरेख और संरक्षण सौंपा गया है, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष की हो सकेगी और जुर्माने से, जो पांच लाख रुपए तक हो सकेगा, दंडनीय होगा :
परंतु वह और भी कि पूर्वोक्त क्रूरता के कारण यदि बालक शारीरिक रूप से अक्षम हो जाता है या उसे मानसिक रोग हो जाता है या वह मानसिक रूप से नियमित कार्यों को करने में अयोग्य हो जाता है या उसके जीवन या अंग को खतरा होता है, ऐसा व्यक्ति कठोर कारावास से, जो तीन वर्ष से कम का नहीं होगा, किंतु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा और पांच लाख के से भी दंडनीय होगा ।

Juvenile Justice Act Section-75 (JJ Act Section-75 in English)

Punishment for cruelty to child-

Whoever, having the actual charge of, or control over, a child, assaults, abandons, abuses, exposes or wilfully neglects the child or causes or procures the child to be assaulted, abandoned, abused, exposed or neglected in a manner likely to cause such child unnecessary mental or physical suffering, shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to three years or with fine of one lakh rupees or with both:
Provided that in case it is found that such abandonment of the child by the biological parents is due to circumstances beyond their control, it shall be presumed that such abandonment is not wilful and the penal provisions of this section shall not apply in such cases:
Provided further that if such offence is committed by any person employed by or managing an organisation, which is entrusted with the care and protection of the child, he shall be punished with rigorous imprisonment which may extend up to five years, and fine which may extend up to five lakhs rupees:
Provided also that on account of the aforesaid cruelty, if the child is physically incapacitated or develops a mental illness or is rendered mentally unfit to perform regular tasks or has risk to life or limb, such person shall be punishable with rigorous imprisonment, not less than three years but which may be extended up to ten years and shall also be liable to fine of five lakhs rupees.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 75 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 | Juvenile Justice Act Section 74

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-74) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 के अनुसार किसी जांच या अन्वेषण या न्यायिक प्रक्रिया के बारे में किसी समाचारपत्र, पत्रिका या समाचार पृष्ठ या दृश्य-श्रव्य माध्यम या संचार के किसी अन्य रूप में की किसी रिपोर्ट में ऐसे नाम, पते या विद्यालय या किसी अन्य विशिष्टि को प्रकट नहीं किया जाएगा, जिससे विधि का उल्लंघन करने वाले बालक या देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बालक या किसी बाल पीड़ित या किसी अपराध के साक्षी की, जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन ऐसे मामले में अंतवलित है, जिसे JJ Act Section-74 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 (Juvenile Justice Act Section-74) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 JJ Act Section-74 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) किसी जांच या अन्वेषण या न्यायिक प्रक्रिया के बारे में किसी समाचारपत्र, पत्रिका या समाचार पृष्ठ या दृश्य-श्रव्य माध्यम या संचार के किसी अन्य रूप में की किसी रिपोर्ट में ऐसे नाम, पते या विद्यालय या किसी अन्य विशिष्टि को प्रकट नहीं किया जाएगा, जिससे विधि का उल्लंघन करने वाले बालक या देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बालक या किसी बाल पीड़ित या किसी अपराध के साक्षी की, जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन ऐसे मामले में अंतवलित है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 (JJ Act Section-74 in Hindi)

बालक की पहचान प्रकटन का प्रतिषेध-

(1) किसी जांच या अन्वेषण या न्यायिक प्रक्रिया के बारे में किसी समाचारपत्र, पत्रिका या समाचार पृष्ठ या दृश्य-श्रव्य माध्यम या संचार के किसी अन्य रूप में की किसी रिपोर्ट में ऐसे नाम, पते या विद्यालय या किसी अन्य विशिष्टि को प्रकट नहीं किया जाएगा, जिससे विधि का उल्लंघन करने वाले बालक या देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बालक या किसी बाल पीड़ित या किसी अपराध के साक्षी की, जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन ऐसे मामले में अंतवलित है, पहचान हो सकती है और न ही ऐसे बालक का चित्र प्रकाशित किया जाएगा :
परंतु, यथास्थिति, जांच करने वाला बोर्ड या समिति, ऐसा प्रकटन, लेखबद्ध किए जाने वाले ऐसे कारणों से
तब अनुज्ञात कर सकेगी, जब उसकी राय में ऐसा प्रकटन बालक के सर्वोत्तम हित में हो।
(2) पुलिस, चरित्र प्रमाणपत्र के प्रयोजन के लिए या अन्यथा बालक के किसी अभिलेख का, लंबित मामलों
में या ऐसे मामलों में प्रकटन नहीं करेगी जिनमें कि मामला बंद किया जा चुका हो या उसका निपटारा किया
जा चुका हो।
(3) उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करने वाला कोई व्यक्ति ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दो लाख रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दंडनीय होगा।

Juvenile Justice Act Section-74 (JJ Act Section-74 in English)

Prohibition on disclosure of identity of children-

(1) No report in any newspaper, magazine, news-sheet or audio-visual media or other forms of communication regarding any inquiry or investigation or judicial procedure, shall disclose the name, address or school or any other particular, which may lead to the identification of a child in conflict with law or a child in need of care and protection or a child victim or witness of a crime, involved in such matter, under any other law for the time being in force, nor shall the picture of any such child be published:
Provided that for reasons to be recorded in writing, the Board or Committee, as the case may be, holding the inquiry may permit such disclosure, if in its opinion such disclosure is in the best interest of the child.
(2) The Police shall not disclose any record of the child for the purpose of character certificate or otherwise in cases where the case has been closed or disposed of.
(3) Any person contravening the provisions of sub-section (1) shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to six months or fine which may extend to two lakh rupees or both.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 74 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 73 | Juvenile Justice Act Section 73

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-73) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 73 के अनुसार प्राधिकरण, समुचित लेखे और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लेखाओं का वार्षिक विवरण ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जो केंद्रीय सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक – महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित किया जाए, जिसे JJ Act Section-73 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 73 (Juvenile Justice Act Section-73) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 73 JJ Act Section-73 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) प्राधिकरण, समुचित लेखे और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लेखाओं का वार्षिक विवरण ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जो केंद्रीय सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक – महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित किया जाए।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 73 (JJ Act Section-73 in Hindi)

प्राधिकरण के लेखे और संपरीक्षा

(1) प्राधिकरण, समुचित लेखे और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लेखाओं का वार्षिक विवरण ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जो केंद्रीय सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक – महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित किया जाए।
(2) प्राधिकरण के लेखाओं की नियंत्रक – महालेखापरीक्षक द्वारा ऐसे अंतरालों पर संपरीक्षा की जाएगी जो उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं और ऐसी संपरीक्षा में कोई भी व्यय नियंत्रक महालेखापरीक्षक को केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा संदेय होगा।
(3) नियंत्रक-महालेखापरीक्षक और उसके द्वारा नियुक्त किसी भी व्यक्ति के इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण के लेखाओं के संबंध में वही अधिकार और विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे जो सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में होते हैं और विशिष्टतया उसे पुस्तकों, लेखाओं, संबंधित वाउचरों और अन्य दस्तावेजों तथा कागजपत्रों को प्रस्तुत करने की मांग करने और प्राधिकरण के किसी भी कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।
(4) नियंत्रक-महालेखापरीक्षक या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणित प्राधिकरण के लेखाओं को उनकी संपरीक्षा रिपोर्ट सहित प्राधिकरण द्वारा प्रतिवर्ष केंद्रीय सरकार को अग्रेषित किया जाएगा।
(5) केंद्रीय सरकार, संपरीक्षा रिपोर्ट के प्राप्त होने के पश्चात्, यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी।

Juvenile Justice Act Section-73 (JJ Act Section-73 in English)

Accounts and audit of Authority

(1) The Authority shall maintain proper accounts and other relevant records and prepare an annual statement of accounts in such form as may be prescribed by the Central Government in consultation with the Comptroller and Auditor-General of India.
(2) The accounts of Authority shall be audited by the Comptroller and Auditor-General at such intervals as may be specified by him and any expenditure incurred in connection with such audit shall be payable by the Authority to the Comptroller and Auditor-General.
(3) The Comptroller and Auditor-General and any person appointed by him in connection with the audit of the accounts of the Authority under this Act shall, have the same rights and privileges and the Authority in connection with the audit of Government accounts and, in particular, shall have the right to demand the production of books, accounts, connected vouchers and other documents and papers and to inspect any of the offices of Authority.
(4) The accounts of the Authority as certified by the Comptroller and Auditor-General or any other person appointed by him in this behalf, together with the audit report thereon shall be forwarded annually to the Central Government by the Authority.
(5) The Central Government shall cause the audit report to be laid, as soon as may be after it is received, before each House of Parliament.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 73 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 72 | Juvenile Justice Act Section 72

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-72) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 72 के अनुसार केंद्रीय सरकार, संसद द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात् प्राधिकरण को अनुदान के रूप में धन की ऐसी राशि का संदाय करेगी जो केंद्रीय सरकार इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण के कृत्यों का पालन करने में उपयोजित किए जाने के लिए उचित समझे, जिसे JJ Act Section-72 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 72 (Juvenile Justice Act Section-72) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 72 JJ Act Section-72 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) केंद्रीय सरकार, संसद द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात् प्राधिकरण को अनुदान के रूप में धन की ऐसी राशि का संदाय करेगी जो केंद्रीय सरकार इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण के कृत्यों का पालन करने में उपयोजित किए जाने के लिए उचित समझे।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 72 (JJ Act Section-72 in Hindi)

केंद्रीय सरकार द्वारा अनुदान

( 1 ) केंद्रीय सरकार, संसद द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात् प्राधिकरण को अनुदान के रूप में धन की ऐसी राशि का संदाय करेगी जो केंद्रीय सरकार इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण के कृत्यों का पालन करने में उपयोजित किए जाने के लिए उचित समझे।
(2) प्राधिकरण, इस अधिनियम के अधीन यथाविहित कृत्यों के पालन के लिए ऐसी धनराशियां व्यय करेगी, जो वह उचित समझे और ऐसी राशियों को उपधारा (1) में निर्दिष्ट अनुदानों में से संदेय व्यय समझा जाएगा ।

Juvenile Justice Act Section-72 (JJ Act Section-72 in English)

Grants by Central Government

(1) The Central Government shall, after due appropriation made by Parliament by law in this behalf, pay to the Authority by way of grants such sums of money as the Central Government may think fit for being utilised for performing the functions of Authority under this Act.
(2) The Authority may spend such sums of money as it thinks fit for performing the functions, as prescribed under this Act, and such sums shall be treated as expenditure payable out of the grants referred to in sub-section (1).

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 72 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।