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किशोर न्याय अधिनियम की धारा 35 | Juvenile Justice Act Section 35

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-35) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 35 के अनुसार कोई माता-पिता या संरक्षक, जो ऐसे शारीरिक, भावात्मक और सामाजिक कारणों से, जो उसके नियंत्रण के परे हैं, बालक का अभ्यर्पण करना चाहता है, बालक को समिति के समक्ष पेश करेगा, जिसे JJ Act Section-35 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 35 (Juvenile Justice Act Section-35) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 35 JJ Act Section-35 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) कोई माता-पिता या संरक्षक, जो ऐसे शारीरिक, भावात्मक और सामाजिक कारणों से, जो उसके नियंत्रण के परे हैं, बालक का अभ्यर्पण करना चाहता है, बालक को समिति के समक्ष पेश करेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 35 (JJ Act Section-35 in Hindi)

 बालकों का अभ्यर्पण

(1) कोई माता-पिता या संरक्षक, जो ऐसे शारीरिक, भावात्मक और सामाजिक कारणों से, जो उसके नियंत्रण के परे हैं, बालक का अभ्यर्पण करना चाहता है, बालक को समिति के समक्ष पेश करेगा ।
(2) यदि, जांच और परामर्श की विहित प्रक्रिया के पश्चात् समिति का समाधान हो जाता है तो, यथास्थिति, माता-पिता या संरक्षक द्वारा समिति के समक्ष अभ्यर्पण विलेख निष्पादित किया जाएगा ।
(3) ऐसे माता-पिता या संरक्षक को, जिसने बालक का अभ्यर्पण किया है, बालक के अभ्यर्पण संबंधी अपने विनिश्चय पर पुनः विचार करने के लिए दो मास का समय दिया जाएगा और अंतरिम अवधि में समिति, सम्यक् जांच के पश्चात् या तो बालक को माता-पिता या संरक्षक के पर्यवेक्षण के अधीन अनुज्ञात करेगी या यदि वह छह वर्ष से कम आयु का या की है तो वह बालक को किसी विशेषज्ञ दत्तक अभिकरण में रखेगी या यदि वह छह वर्ष से अधिक आयु का या की है तो बाल गृह में रखेगी।

Juvenile Justice Act Section-35 (JJ Act Section-35 in English)

Surrender of children

(1) A parent or guardian, who for physical, emotional and social factors beyond their control, wishes to surrender a child, shall produce the child before the Committee.
(2) If, after prescribed process of inquiry and counselling, the Committee is satisfied, a surrender deed shall be executed by the parent or guardian, as the case may be, before the Committee.
(3) The parents or guardian who surrendered the child, shall be given two months time to reconsider their decision and in the intervening period the Committee shall either allow, after due inquiry, the child to be with the parents or guardian under supervision, or place the child in a Specialised Adoption Agency, if he or she is below six years of age, or a childrens home if he is above six years.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 35 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 34 | Juvenile Justice Act Section 34

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-34) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 34 के अनुसार कोई व्यक्ति, जिसने धारा 33 के अधीन कोई अपराध किया है वह ऐसे कारावास के, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या दस हजार रुपए तक के जुर्माने का या दोनों का भागी होगा, जिसे JJ Act Section-34 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 34 (Juvenile Justice Act Section-34) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 34 JJ Act Section-34 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) कोई व्यक्ति, जिसने धारा 33 के अधीन कोई अपराध किया है वह ऐसे कारावास के, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या दस हजार रुपए तक के जुर्माने का या दोनों का भागी होगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 34 (JJ Act Section-34 in Hindi)

रिपोर्ट न करने के लिए शास्ति

कोई व्यक्ति, जिसने धारा 33 के अधीन कोई अपराध किया है वह ऐसे कारावास के, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या दस हजार रुपए तक के जुर्माने का या दोनों का भागी होगा।

Juvenile Justice Act Section-34 (JJ Act Section-34 in English)

Penalty for non-reporting-

Any person who has committed an offence under section 33 shall be liable to imprisonment up to six months or fine of ten thousand rupees or both.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 34 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 33 | Juvenile Justice Act Section 33

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-33) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 33 के अनुसार, यदि धारा 32 के अधीन यथा अपेक्षित किसी बालक के संबंध में कोई सूचना उक्त धारा में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर नहीं दी जाती है तो ऐसे कृत्य को अपराध के रूप में माना जाएगा।, जिसे JJ Act Section-33 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 33 (Juvenile Justice Act Section-33) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 33 JJ Act Section-33 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) यदि धारा 32 के अधीन यथा अपेक्षित किसी बालक के संबंध में कोई सूचना उक्त धारा में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर नहीं दी जाती है तो ऐसे कृत्य को अपराध के रूप में माना जाएगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 33 (JJ Act Section-33 in Hindi)

रिपोर्ट न करने का अपराध

यदि धारा 32 के अधीन यथा अपेक्षित किसी बालक के संबंध में कोई सूचना उक्त धारा में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर नहीं दी जाती है तो ऐसे कृत्य को अपराध के रूप में माना जाएगा।

Juvenile Justice Act Section-33 (JJ Act Section-33 in English)

Offence of non-reporting-

If information regarding a child as required under section 32 is not given within the period specified in the said section, then, such act shall be regarded as an offence.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 33 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 32 | Juvenile Justice Act Section 32

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-32) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 32 के अनुसार, कोई व्यक्ति या कोई पुलिस अधिकारी या किसी संगठन या परिचर्या गृह या अस्पताल या प्रसूति गृह का कोई कृत्यकारी, जिसे किसी ऐसे बालक का पता चलता है या उसका भारसाधन लेता है या जिसे वह सौंपा जाता है जो परित्यक्त या खोया हुआ प्रतीत होता है या जिसके बारे में परित्यक्त या खोए होने का दावा किया जाता है या ऐसा बालक जो बगैर कुटुंब समर्थन के अनाथ प्रतीत होता है या जिसके अनाथ होने का दावा किया जाता है, चौबीस घंटे के भीतर (यात्रा के लिए आवश्यक समय को छोड़कर), यथास्थिति, बालबद्ध सेवाओं, निकटतम पुलिस थाने को या किसी बालक कल्याण समिति को या जिला बालक संरक्षण एकक को इत्तिला देगा, जिसे JJ Act Section-32 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 32 (Juvenile Justice Act Section-32) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 32 JJ Act Section-32 के तहत किशोर न्याय बोर्ड कोई व्यक्ति या कोई पुलिस अधिकारी या किसी संगठन या परिचर्या गृह या अस्पताल या प्रसूति गृह का कोई कृत्यकारी, जिसे किसी ऐसे बालक का पता चलता है या जिसे वह सौंपा जाता है जो परित्यक्त या खोया हुआ प्रतीत होता है या जिसके बारे में परित्यक्त या खोए होने का दावा किया जाता है या ऐसा बालक जो बगैर कुटुंब समर्थन के अनाथ प्रतीत होता है या जिसके अनाथ होने का दावा किया जाता है, चौबीस घंटे के भीतर (यात्रा के लिए आवश्यक समय को छोड़कर), यथास्थिति, बालबद्ध सेवाओं, निकटतम पुलिस थाने को या किसी बालक कल्याण समिति को या जिला बालक संरक्षण एकक को इत्तिला देगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 32 (JJ Act Section-32 in Hindi)

संरक्षक से पृथक् पाए गए बालक के बारे में अनिवार्य रूप से रिपोर्ट करना

(1) कोई व्यक्ति या कोई पुलिस अधिकारी या किसी संगठन या परिचर्या गृह या अस्पताल या प्रसूति गृह का कोई कृत्यकारी, जिसे किसी ऐसे बालक का पता चलता है या उसका भारसाधन लेता है या जिसे वह सौंपा जाता है जो परित्यक्त या खोया हुआ प्रतीत होता है या जिसके बारे में परित्यक्त या खोए होने का दावा किया जाता है या ऐसा बालक जो बगैर कुटुंब समर्थन के अनाथ प्रतीत होता है या जिसके अनाथ होने का दावा किया जाता है, चौबीस घंटे के भीतर (यात्रा के लिए आवश्यक समय को छोड़कर), यथास्थिति, बालबद्ध सेवाओं, निकटतम पुलिस थाने को या किसी बालक कल्याण समिति को या जिला बालक संरक्षण एकक को इत्तिला देगा या बालक को इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत बाल देखभाल संस्था को सौंपेगा ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट बालक से संबंधित सूचना, यथास्थिति, समिति या जिला बालक संरक्षण एकक अथवा बालक देखरेख संस्था द्वारा इस संबंध में केन्द्रीय सरकार द्वारा यथाविनिर्दिष्ट पोर्टल पर अपलोड की जाएगी ।

Juvenile Justice Act Section-32 (JJ Act Section-32 in English)

Compulsory reporting of child found separated from guardian-

(1) Any individual or a police officer or any functionary of any organisation or a nursing home or hospital or maternity home, who or which finds and takes charge, or is handed over a child who appears or claims to be abandoned or lost, or a child who appears or claims to be an orphan without family support, shall within twenty-four hours (excluding the time necessary for the journey), give information to the Childline Services or the nearest police station or to a Child Welfare Committee or to the District Child Protection Unit, or hand over the child to a child care institution registered under this Act, as the case may be.
(2) The information regarding a child referred to in sub-section (1) shall be uploaded by the Committee or the District Child Protection Unit or the child care institution, as the case may be, on a portal as may be specified by the Central Government in this behalf.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 32 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 31 | Juvenile Justice Act Section 31

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-31) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 31 के अनुसार, किसी पुलिस अधिकारी द्वारा या विशेष किशोर पुलिस एकक या पदाभिहीत बालक कल्याण पुलिस के अधिकारी या जिला बालक कल्याण एकक के किसी अधिकारी या तत्समय प्रवृत्त किसी श्रम विधि के अधीन नियुक्त निरीक्षक द्वारा मान्यता दी जाये, जिसे JJ Act Section-31 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 31 (Juvenile Justice Act Section-31) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 31 JJ Act Section-31 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) किसी पुलिस अधिकारी द्वारा या विशेष किशोर पुलिस एकक या पदाभिहीत बालक कल्याण पुलिस के अधिकारी या जिला बालक कल्याण एकक के किसी अधिकारी या तत्समय प्रवृत्त किसी श्रम विधि के अधीन नियुक्त निरीक्षक द्वारा मान्यता दी जाये।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 31 (JJ Act Section-31 in Hindi)

समिति के समक्ष पेश किया जाना

(1) देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद किसी बालक को निम्नलिखित किसी व्यक्ति द्वारा समिति के समक्ष पेश किया जा सकेगा, अर्थात् :-
(i) किसी पुलिस अधिकारी द्वारा या विशेष किशोर पुलिस एकक या पदाभिहीत बालक कल्याण पुलिस के अधिकारी या जिला बालक कल्याण एकक के किसी अधिकारी या तत्समय प्रवृत्त किसी श्रम विधि के अधीन नियुक्त निरीक्षक द्वारा;
(ii) किसी लोक सेवक द्वारा; 
(iii) ऐसी बालबद्ध सेवाओं या किसी स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठन या किसी अभिकरण द्वारा, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा मान्यता दी जाए;
(iv) बालक कल्याण अधिकारी या परिवीक्षा अधिकारी द्वारा;
(v) किसी सामाजिक कार्यकर्ता या लोक भावना से युक्त नागरिक द्वारा;
(vi) स्वयं बालक द्वारा; या
(vii) किसी नर्स, डाक्टर, परिचर्या गृह (नर्सिंग होम), अस्पताल या प्रसूति गृह के प्रबंधक द्वारा:
परन्तु बालक को समय नष्ट किए बिना, किन्तु चौबीस घंटे की अवधि के भीतर यात्रा के लिए आवश्यक समय को छोड़कर समिति के समक्ष पेश किया जाएगा ।
(2) राज्य सरकार, जांच की अवधि के दौरान समिति को रिपोर्ट प्रस्तुत करने की रीति का और बालक को, यथास्थिति, बाल गृह या आश्रय गृह या सुविधा उपयुक्त तंत्र या योग्य व्यक्ति के पास भेजने या सौंपने की रीति का उपबंध करने के लिए इस अधिनियम से संगत नियम बना सकेगी।

Juvenile Justice Act Section-31 (JJ Act Section-31 in English)

Production before Committee-

(1) Any child in need of care and protection may be produced before the Committee by any of the following persons, namely:—
(i) any police officer or special juvenile police unit or a designated Child Welfare Police Officer or any officer of District Child Protection Unit or inspector appointed under any labour law for the time being in force;
(ii) any public servant;
(iii) Childline Services or any voluntary or non-governmental organisation or any agency as may be recognised by the State Government;
(iv) Child Welfare Officer or probation officer;
(v) any social worker or a public spirited citizen;
(vi) by the child himself; or
(vii) any nurse, doctor or management of a nursing home, hospital or maternity home:
Provided that the child shall be produced before the Committee without any loss of time but within a period of twenty-four hours excluding the time necessary for the journey.
(2) The State Government may make rules consistent with this Act, to provide for the manner of submitting the report to the Committee and the manner of sending and entrusting the child to childrens home or fit facility or fit person, as the case may be, during the period of the inquiry.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 31 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 30 | Juvenile Justice Act Section 30

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-30) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 30 के अनुसार, समिति के कृत्यों और उत्तरदायित्वों जैसे बालकों की सुरक्षा और भलाई, पोषण एवंम् देखरेख संबंधित और उसको प्रभावित करने वाले सभी मुद्दों की जांच करना साथ ही ऐसे मामलों का स्वप्रेरणा से संज्ञान लेना और ऐसे देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालकों तक पहुंचाना, जिन्हें समिति के समक्ष पेश नहीं किया गया है, जिसे JJ Act Section-30 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 30 (Juvenile Justice Act Section-30) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 30 JJ Act Section-30 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) समिति का, देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालकों की देखरेख, संरक्षण, उपचार, विकास समिति के कृत्यों और उत्तरदायित्वों और उसको प्रभावित करने वाले सभी मुद्दों की जांच करना।मामलों का स्वप्रेरणा से संज्ञान लेना और ऐसे देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालकों तक पहुंचाना, जिन्हें समिति के समक्ष पेश नहीं किया गया है

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 30 (JJ Act Section-30 in Hindi)

समिति के कृत्य और उत्तरदायित्व

समिति के कृत्यों और उत्तरदायित्वों में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे :-
(i) उसके समक्ष पेश किए गए बालकों का संज्ञान लेना और उन्हें ग्रहण करना; 
(ii) इस अधिनियम के अधीन बालकों की सुरक्षा और भलाई से संबंधित और उसको प्रभावित करने वाले सभी मुद्दों की जांच करना;
(iii) बालक कल्याण अधिकारियों या परिवीक्षा अधिकारियों या जिला बालक संरक्षण एकक या गैर-सरकारी संगठनों को सामाजिक अन्वेषण करने और समिति के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देना;
(iv) देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालकों की देखरेख करने हेतु “योग्य व्यक्ति” की घोषणा करने के लिए जांच करना; 
(v) पोषण देखरेख के लिए किसी बालक के स्थानन का निदेश देना;
(vi) बालक व्यष्टिक देखरेख योजना पर आधारित देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालकों की देखरेख, संरक्षण, समुचित पुनर्वास या प्रत्यावर्तन को सुनिश्चित करना और इस संबंध में माता-पिता या संरक्षक या योग्य व्यक्ति या बाल गृहों या सुविधा उपयुक्त तंत्र के लिए आवश्यक निदेश पारित करना;
(vii) संस्थागत सहायता की अपेक्षा वाले प्रत्येक बालक के स्थानन के लिए, बालक की आयु, लिंग, निर्योग्यता और आवश्यकताओं पर आधारित तथा संस्था की उपलब्ध क्षमता को ध्यान में रखते हुए रजिस्ट्रीकृत संस्था का चयन करना;
(viii) देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालकों के आवासिक सुविधाओं का प्रत्येक मास में कम से कम दो बार निरीक्षण दौरा करना और जिला बालक संरक्षण एकक और राज्य सरकार को सेवाओं की क्वालिटी में सुधार करने के लिए कार्रवाई करने की सिफारिश करना;
(ix) माता-पिता द्वारा अभ्यर्पण विलेख के निष्पादन को प्रमाणित करना और यह सुनिश्चित करना कि उन्हें विनिश्चय पर पुनः विचार करने और कुटुंब को एक साथ रखने हेतु सभी प्रयास करने का समय दिया गया है;
(x) यह सुनिश्चित करना कि ऐसी सम्यक् प्रक्रिया का, जो विहित की जाए, अनुसरण करते हुए परित्यक्त या खोए हुए बालकों का, उनके कुटुंबों को प्रत्यावर्तन करने के लिए सभी प्रयास किए गए हैं;
(xi) ऐसे अनाथ, परित्यक्त और अभ्यर्पित बालक की घोषणा करना जो सम्यक् जांच के पश्चात् दत्तकग्रहण के लिए वैध रूप से मुक्त हैं; 
(xii) मामलों का स्वप्रेरणा से संज्ञान लेना और ऐसे देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालकों तक पहुंचाना, जिन्हें समिति के समक्ष पेश नहीं किया गया है, परंतु ऐसा विनिश्चय कम से कम तीन सदस्यों द्वारा लिया गया हो
(xiii) लैंगिक रूप से दुर्व्यवहार से ग्रस्त ऐसे बालकों के पुनर्वास के लिए कार्रवाई करना जी लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (2012 का 32) के अधीन, यथास्थिति, विशेष किशोर पुलिस एकक या स्थानीय पुलिस द्वारा समिति को देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालकों के रूप में ज्ञापित हैं;
(xiv) धारा 17 की उपधारा (2) के अधीन बोर्ड द्वारा निर्दिष्ट मामलों में कार्रवाई करना;
(xv) जिला बालक संरक्षण एकक या राज्य सरकार के समर्थन से बालकों की देखरेख और संरक्षण में अंतर्वलित पुलिस, श्रम विभाग और अभिकरणों के साथ समन्वय बनाना;
(xvi) समिति, किसी बालक देखरेख संस्था में किसी बालक से दुर्व्यवहार की शिकायत के मामले में जांच करेगी और यथास्थिति, पुलिस या जिला बालक संरक्षण एकक या श्रम विभाग या बालबद्ध सेवाओं को निदेश देगी;
(xvii) बालकों के लिए समुचित विधिक सेवाओं तक पहुंच बनाएगी; और
(xviii) ऐसे अन्य कृत्य और दायित्व, जो विहित किए जाएं।

Juvenile Justice Act Section-30 (JJ Act Section-30 in English)

Functions and responsibilities of Committee-

The functions and responsibilities of the Committee shall include—
(i) taking cognizance of and receiving the children produced before it;
(ii) conducting inquiry on all issues relating to and affecting the safety and well-being of the children under this Act;
(iii) directing the Child Welfare Officers or probation officers or District Child Protection Unit or non-governmental organisations to conduct social investigation and submit a report before the Committee;
(iv) conducting inquiry for declaring fit persons for care of children in need of care and protection;
(v) directing placement of a child in foster care;
(vi) ensuring care, protection, appropriate rehabilitation or restoration of children in need of care and protection, based on the childs individual care plan and passing necessary directions to parents or guardians or fit persons or childrens homes or fit facility in this regard;
(vii) selecting registered institution for placement of each child requiring institutional support, based on the childs age, gender, disability and needs and keeping in mind the available capacity of the institution;
(viii) conducting at least two inspection visits per month of residential facilities for children in need of care and protection and recommending action for improvement in quality of services to the District Child Protection Unit and the State Government;
(ix) certifying the execution of the surrender deed by the parents and ensuring that they are given time to reconsider their decision as well as making all efforts to keep the family together;
(x) ensuring that all efforts are made for restoration of abandoned or lost children to their families following due process, as may be prescribed;
(xi) declaration of orphan, abandoned and surrendered child as legally free for adoption after due inquiry;
(xii) taking suo motu cognizance of cases and reaching out to children in need of care and protection, who are not produced before the Committee, provided that such decision is taken by at least three members;
(xiii) taking action for rehabilitation of sexually abused children who are reported as children in need of care and protection to the Committee by Special Juvenile Police Unit or local police, as the case may be, under the Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 (32 of 2012);
(xiv) dealing with cases referred by the Board under sub-section (2) of section 17;
(xv) co-ordinate with the police, labour department and other agencies involved in the care and protection of children with support of the District Child Protection Unit or the State Government;
(xvi) in case of a complaint of abuse of a child in any child care institution, the Committee shall conduct an inquiry and give directions to the police or the District Child Protection Unit or labour department or childline services, as the case may be;
(xvii) accessing appropriate legal services for children;
(xviii) such other functions and responsibilities, as may be prescribed.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 30 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।