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किशोर न्याय अधिनियम की धारा 29 | Juvenile Justice Act Section 29

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-29) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 29 के अनुसार, समिति का, देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालकों की देखरेख, संरक्षण, उपचार, विकास और पुनर्वास के मामलों का निपटारा करने और उनकी मूलभूत आवश्यकताओं तथा संरक्षण के लिए उपबंध करने का प्राधिकार होगा, जिसे JJ Act Section-29 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 29 (Juvenile Justice Act Section-29) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 29 JJ Act Section-29 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) समिति का, देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालकों की देखरेख, संरक्षण, उपचार, विकास और पुनर्वास के मामलों का निपटारा करने और उनकी मूलभूत आवश्यकताओं तथा संरक्षण के लिए उपबंध करने का प्राधिकार होगा

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 29 (JJ Act Section-29 in Hindi)

समिति की शक्तियां

(1) समिति का, देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालकों की देखरेख, संरक्षण, उपचार, विकास और पुनर्वास के मामलों का निपटारा करने और उनकी मूलभूत आवश्यकताओं तथा संरक्षण के लिए उपबंध करने का प्राधिकार होगा ।
(2) जहाँ किसी क्षेत्र के लिए समिति का गठन किया गया है, वहां तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, किन्तु इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से जैसा उपबंधित है, उसके सिवाय, ऐसी समिति को, देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालकों से संबंधित इस अधिनियम के अधीन सभी कार्यवाहियों के संबंध में अनन्यतः कार्य करने की शक्ति होगी ।

Juvenile Justice Act Section-29 (JJ Act Section-29 in English)

 Powers of Committee-

(1) The Committee shall have the authority to dispose of cases for the care, protection, treatment, development and rehabilitation of children in need of care and protection, as well as to provide for their basic needs and protection.
(2) Where a Committee has been constituted for any area, such Committee shall, notwithstanding anything contained in any other law for the time being in force, but save as otherwise expressly provided in this Act, have the power to deal exclusively with all proceedings under this Act relating to children in need of care and protection.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 29 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 27 | Juvenile Justice Act Section 27

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-27) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 27 के अनुसार, प्रत्येक जिले के लिए इस अधिनियम के अधीन देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालक के संबंध में एक या अधिक बाल कल्याण समितियों का, ऐसी समितियों को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने और कर्त्तव्यों का निर्वहन करने के लिए गठन करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि समिति के सभी सदस्यों के अधिष्ठापन, प्रशिक्षण और अतिसंवेदनशीलता की, अधिसूचना की तारीख से दो मास के भीतर व्यवस्था की जाए, जिसे JJ Act Section-27 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 27 (Juvenile Justice Act Section-27) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 27 JJ Act Section-27 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) प्रत्येक जिले के लिए इस अधिनियम के अधीन देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालक के संबंध में एक या अधिक बाल कल्याण समितियों का, ऐसी समितियों को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने और कर्त्तव्यों का निर्वहन करने के लिए गठन करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि समिति के सभी सदस्यों के अधिष्ठापन, प्रशिक्षण और अतिसंवेदनशीलता की, अधिसूचना की तारीख से दो मास के भीतर व्यवस्था की जाए।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 27 (JJ Act Section-27 in Hindi)

बाल कल्याण समिति

( 1 ) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, प्रत्येक जिले के लिए इस अधिनियम के अधीन देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालक के संबंध में एक या अधिक बाल कल्याण समितियों का, ऐसी समितियों को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने और कर्त्तव्यों का निर्वहन करने के लिए गठन करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि समिति के सभी सदस्यों के अधिष्ठापन, प्रशिक्षण और अतिसंवेदनशीलता की, अधिसूचना की तारीख से दो मास के भीतर व्यवस्था की जाए।
(2) समिति, एक अध्यक्ष और चार ऐसे अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगी, जिन्हें राज्य सरकार नियुक्त करना ठीक समझे और उनमें से कम से कम एक महिला होगी और दूसरा अन्य, बालकों से संबंधित विषयों का विशेषज्ञ होगा ।
(3) जिला बालक संरक्षण एकक को राज्य सरकार द्वारा एक सचिव और उतने अन्य कर्मचारिवृंद उपलब्ध कराए जाएंगे, जितने समिति की उसके प्रभावी कार्यरण हेतु सचिवालयिक सहायता के लिए अपेक्षित हों।
(4) कोई व्यक्ति समिति के सदस्य के रूप में तब तक नियुक्त नहीं किया जाएगा, जब तक कि वह बाल मनोविज्ञान या मनोरोग विज्ञान या विधि या सामाजिक कार्य या सामाजिक विज्ञान या मानव स्वास्थ्य या शिक्षा या मानव विकास अथवा दिव्यांगजन बालकों के लिए विशेष शिक्षा में डिग्री धारण नहीं करता हो और जब तक ऐसा व्यक्ति बालकों से संबंधित स्वास्थ्य, शिक्षा या कल्याण संबंधी कार्यकलापों में सात वर्ष से सक्रिय रूप से अंतर्वलित न हो या बाल मनोविज्ञान या मनोरोग या विधि या सामाजिक कार्य या सामाजिक विज्ञान या मानव स्वास्थ्य या शिक्षा या मानव विकास अथवा दिव्यांगजन बालकों के लिए विशेष शिक्षा में डिग्री के साथ व्यवसायरत वृत्तिक न हो ।
(4क) कोई व्यक्ति समिति के सदस्य के रूप में चयन के लिए पात्र नहीं होगा, यदि 
(i) उसका मानव अधिकारों या बालक अधिकारों के अतिक्रमण का भूतपूर्व रिकार्ड है;
(ii) ऐसे अपराध के लिए, जिसमें नैतिक अधमता अंतर्वलित है, दोषसिद्ध किया गया है और ऐसी दोषसिद्धि को उलटा नहीं गया है या ऐसे अपराध के संबंध में पूर्ण माफी प्रदान नहीं की गई है; 
(iii) भारत सरकार या राज्य सरकार अथवा भारत सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या द्वारा नियंत्रित किसी उपक्रम अथवा निगम की सेवा से हटाया गया या पदच्युत किया गया है;
(iv) बालक दुरुपयोग या बालक श्रम के नियोजन या अनैतिक कृत्य या मानव अधिकारों के किसी अन्य अतिक्रमण अथवा अनैतिक कृत्यों में कभी लिप्त रहा है; या
(v) जिले में बालक देखरेख संस्था के प्रबंधन का भाग है ।
(5) किसी व्यक्ति को सदस्य के रूप में तब तक नियुक्त नहीं किया जाएगा जब तक उसके पास ऐसी अर्हताएं न हों, जो विहित की जाएं ।
(6) किसी व्यक्ति को सदस्य के रूप में तीन वर्ष से अधिक अवधि के लिए नियुक्त नहीं किया जाएगा ।
(7) राज्य सरकार द्वारा समिति के किसी सदस्य की नियुक्ति, जांच किए जाने के पश्चात् समाप्त की जाएगी, यदि-
(i) वह इस अधिनियम के अधीन निहित शक्ति के दुरुपयोग का दोषी पाया गया हो;
(ii) वह किसी ऐसे अपराध का सिद्धदोष ठहराया गया हो जिसमें नैतिक अधमता अंतर्बलित है और ऐसी दोषसिद्धि को उलटा नहीं गया है या ऐसे अपराध की बाबत उसे पूर्ण क्षमा प्रदान नहीं की गई है;
(iii) वह, किसी विधिमान्य कारण के बिना लगातार तीन मास तक समिति की कार्यवाहियों में उपस्थित रहने में असफल रहता है या किसी वर्ष में [न्यूनतम] तीन-चौथाई बैठकों में उपस्थित रहने में असफल रहता है ।
(8) समिति जिला मजिस्ट्रेट को ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी और जिला मजिस्ट्रेट समिति के कार्यकरण का तिमाही पुनर्विलोकन करेगा ।
(9) समिति न्यायपीठ के रूप में कार्य करेगी और उसे दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) द्वारा, यथास्थिति, महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट को प्रदत्त शक्तियां प्राप्त होंगी।(10) जिला मजिस्ट्रेट समिति के कार्यकरण से उदभूत किसी शिकायत को सुनने के लिए शिकायत निवारण प्राधिकारी होगा और प्रभावित बालक या बालक से संबंधित कोई व्यक्ति जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत फाइल कर सकेगा, जो समिति की कार्रवाई का संज्ञान लेगा और पक्षकारों को सुनवाई का अवसर दिए जाने के पश्चात् समुचित आदेश पारित करेगा । 

Juvenile Justice Act Section-27 (JJ Act Section-27 in English)

Child Welfare Committee

(1) The State Government shall by notification in the Official Gazette constitute for every district, one or more Child Welfare Committees for exercising the powers and to discharge the duties conferred on such Committees in relation to children in need of care and protection under this Act and ensure that induction training and sensitisation of all members of the committee is provided within two months from the date of notification.
(2) The Committee shall consist of a Chairperson, and four other members as the State Government may think fit to appoint, of whom at least one shall be a woman and another, an expert on the matters concerning children.
(3) The District Child Protection Unit shall provide a Secretary and other staff that may be required for secretarial support to the Committee for its effective functioning.
(4) No person shall be appointed as a member of the Committee unless he has a degree in child psychology or psychiatry or law or social work or sociology or human health or education or human development or special education for differently abled children and has been actively involved in health, education or welfare activities pertaining to children for seven years or is a practicing professional with a degree in child psychology or psychiatry or law or social work or sociology or human health or education or human development or special education for differently abled children.
(4A) No person shall be eligible for selection as a member of the Committee, if he–
(i) has any past record of violation of human rights or child rights,
(ii) has been convicted of an offence involving moral turpitude, and such conviction has not been reversed or has not been granted full pardon in respect of such offence,
(iii) has been removed or dismissed from service of the Government of India or State Government or an undertaking or corporation owned or controlled by the Government of India or State Government,
(iv) has ever indulged in child abuse or employment of child labour or immoral act or any other violation of human rights or immoral acts, or
(v) is part of management of a child care institution in a District.
(5) No person shall be appointed as a member unless he possesses such other qualifications as may be prescribed.
(6) No person shall be appointed for a period of more than three years as a member of the Committee.
(7) The appointment of any member of the Committee shall be terminated by the State Government after making an inquiry, if–
(i) he has been found guilty of misuse of power vested on him under this Act;
(ii) he has been convicted of an offence involving moral turpitude and such conviction has not been reversed or he has not been granted full pardon in respect of such offence;
(iii) he fails to attend the proceedings of the Committee consecutively for three months without any valid reason or he fails to attend 2[minimum] three-fourths of the sittings in a year.
(8) The Committee shall submit a report to the District Magistrate in such form as may be prescribed and the District Magistrate shall conduct a quarterly review of the functioning of the Committee.
(9) The Committee shall function as a Bench and shall have the powers conferred by the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974) on a Metropolitan Magistrate or, as the case may be, a Judicial Magistrate of First Class.
(10) The District Magistrate shall be the grievance redressal authority to entertain any grievance arising out of the functioning of the Committee and the affected child or anyone connected with the child, as the case may be, may file a complaint before the District Magistrate who shall take cognizance of the action of the Committee and, after giving the parties an opportunity of being heard, pass appropriate order.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 27 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 26 | Juvenile Justice Act Section 26

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-26) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 26 के अनुसार, किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, कोई पुलिस अधिकारी, विधि का उल्लंघन करने वाले ऐसे बालक का प्रभार ले सकेगा जो विशेष गृह या संप्रेक्षण गृह या सुरक्षित स्थान या किसी ऐसे व्यक्ति या संस्था की देखरेख से, जिसके अधीन उस बालक को इस अधिनियम के अधीन रखा गया था, भगोड़ा हो गया है, जिसे JJ Act Section-26 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 26 (Juvenile Justice Act Section-26) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 26 JJ Act Section-26 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, कोई पुलिस अधिकारी, विधि का उल्लंघन करने वाले ऐसे बालक का प्रभार ले सकेगा जो विशेष गृह या संप्रेक्षण गृह या सुरक्षित स्थान या किसी ऐसे व्यक्ति या संस्था की देखरेख से, जिसके अधीन उस बालक को इस अधिनियम के अधीन रखा गया था, भगोड़ा हो गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 26 (JJ Act Section-26 in Hindi)

विधि का उल्लंघन करने वाले भगोड़े बालक की बाबत उपबंध–

(1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, कोई पुलिस अधिकारी, विधि का उल्लंघन करने वाले ऐसे बालक का प्रभार ले सकेगा जो विशेष गृह या संप्रेक्षण गृह या सुरक्षित स्थान या किसी ऐसे व्यक्ति या संस्था की देखरेख से, जिसके अधीन उस बालक को इस अधिनियम के अधीन रखा गया था, भगोड़ा हो गया है ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट बालक को, चौबीस घंटे के भीतर अधिमानतः उस बोर्ड के समक्ष, जिसने उस बालक की बाबत मूल आदेश पारित किया था, यदि संभव हो, या उस निकटतम बोर्ड के समक्ष जहां बालक पाया जाता है पेश किया जाएगा ।
(3) बोर्ड, बालक के निकल भागने के कारणों को सुनिश्चित करेगा और बालक को उस संस्था या उस व्यक्ति को, जिसकी अभिरक्षा से बालक भाग निकला था, या वैसे ही किसी अन्य स्थान या व्यक्ति को, जिसे बोर्ड ठीक समझे वापस भेजे जाने के लिए समुचित आदेश पारित करेगा :
परंतु बोर्ड किन्हीं विशेष उपायों की बाबत, जो बालक के सर्वोत्तम हित में आवश्यक समझे जाएं, अतिरिक्त निर्देश भी दे सकेगा ।
(4) ऐसे बालक के बारे में कोई अतिरिक्त कार्यवाही संस्थित नहीं की जाएगी । 

Juvenile Justice Act Section-26 (JJ Act Section-26 in English)

Provision with respect of run away child in conflict with law

(1) Notwithstanding anything to the contrary contained in any other law for the time being in force, any police officer may take charge of a child in conflict with law who has run away from a special home or an observation home or a place of safety or from the care of a person or institution under whom the child was placed under this Act.
(2) The child referred to in sub-section (1) shall be produced, within twenty-four hours, preferably before the Board which passed the original order in respect of that child, if possible, or to the nearest Board where the child is found.
(3) The Board shall ascertain the reasons for the child having run away and pass appropriate orders for the child to be sent back either to the institution or person from whose custody the child had run away or any other similar place or person, as the Board may deem fit:
Provided that the Board may also give additional directions regarding any special steps that may be deemed necessary, for the best interest of the child.
(4) No additional proceeding shall be instituted in respect of such child.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 26 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 25 | Juvenile Justice Act Section 25

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-25) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 25 के अनुसार, किसी बात के होते हुए भी विधि का उल्लंघन करने वाला अभिकथित या विधि का उल्लंघन करते हुए पाए गए किसी बालक के बारे में इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख को किसी बोर्ड या न्यायालय के समक्ष लंबित सभी कार्यवाहियां उस बोर्ड या न्यायालय में वैसे ही जारी रहेंगी मानो यह अधिनियम अधिनियमित नहीं किया गया है, जिसे JJ Act Section-25 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 25 (Juvenile Justice Act Section-25) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 25 JJ Act Section-25 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) किसी बात के होते हुए भी विधि का उल्लंघन करने वाला अभिकथित या विधि का उल्लंघन करते हुए पाए गए किसी बालक के बारे में इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख को किसी बोर्ड या न्यायालय के समक्ष लंबित सभी कार्यवाहियां उस बोर्ड या न्यायालय में वैसे ही जारी रहेंगी मानो यह अधिनियम अधिनियमित नहीं किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 25 (JJ Act Section-25 in Hindi)

लंबित मामलों के बारे में विशेष उपबंध

इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी विधि का उल्लंघन करने वाला अभिकथित या विधि का उल्लंघन करते हुए पाए गए किसी बालक के बारे में इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख को किसी बोर्ड या न्यायालय के समक्ष लंबित सभी कार्यवाहियां उस बोर्ड या न्यायालय में वैसे ही जारी रहेंगी मानो यह अधिनियम अधिनियमित नहीं किया गया है।

Juvenile Justice Act Section-25 (JJ Act Section-25 in English)

 Special provision in respect of pending cases

Notwithstanding anything contained in this Act, all proceedings in respect of a child alleged or found to be in conflict with law pending before any Board or court on the date of commencement of this Act, shall be continued in that Board or court as if this Act had not been enacted.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 25 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 24 | Juvenile Justice Act Section 24

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-24) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 24 के अनुसार, किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, कोई बालक, जिसने कोई अपराध किया है और जिसके बारे में इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन कार्यवाही की जा चुकी है, किसी ऐसी निरर्हता से, यदि कोई हो, ग्रस्त नहीं होगा  बोर्ड, पुलिस या बालक न्यायालय द्वारा अपनी स्वयं की रजिस्ट्री को यह निदेश देते आदेश देगा कि ऐसी दोषसिद्धि के सुसंगत अभिलेख, यथास्थिति, अपील की अवधि या ऐसी युक्तियुक्त अवधि, जो विहित की जाए, समाप्त होने के पश्चात् नष्ट कर दिए जाएंगे, जिसे JJ Act Section-24 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 24 (Juvenile Justice Act Section-24) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 24 JJ Act Section-24 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, कोई बालक, जिसने कोई अपराध किया है और जिसके बारे में इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन कार्यवाही की जा चुकी है, किसी ऐसी निरर्हता से, यदि कोई हो, ग्रस्त नहीं होगा  बोर्ड, पुलिस या बालक न्यायालय द्वारा अपनी स्वयं की रजिस्ट्री को यह निदेश देते आदेश देगा कि ऐसी दोषसिद्धि के सुसंगत अभिलेख, यथास्थिति, अपील की अवधि या ऐसी युक्तियुक्त अवधि, जो विहित की जाए, समाप्त होने के पश्चात् नष्ट कर दिए जाएंगे।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 24 (JJ Act Section-24 in Hindi)

किसी अपराध के निष्कर्षो के आधार पर निरर्हताओं का हटाया जाना

(1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, कोई बालक, जिसने कोई अपराध किया है और जिसके बारे में इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन कार्यवाही की जा चुकी है, किसी ऐसी निरर्हता से, यदि कोई हो, ग्रस्त नहीं होगा, जो ऐसी विधि के अधीन किसी अपराध की दोषसिद्धि से संलग्न हो :
परंतु उस बालक के मामले में जिसने 16 वर्ष की आयु पूर्ण की है या उससे अधिक है तथा उसे बालक न्यायालय द्वारा धारा 19 की उपधारा (1) के खण्ड (1) के अधीन विधि का उल्लंघन करने वाला पाया जाता है, उपधारा (1) के उपबंध लागू नहीं होंगे ।
(2) बोर्ड, पुलिस या बालक न्यायालय द्वारा अपनी स्वयं की रजिस्ट्री को यह निदेश देते आदेश देगा कि ऐसी दोषसिद्धि के सुसंगत अभिलेख, यथास्थिति, अपील की अवधि या ऐसी युक्तियुक्त अवधि, जो विहित की जाए, समाप्त होने के पश्चात् नष्ट कर दिए जाएंगे :
परंतु जघन्य अपराध के मामले में, जहां बालक धारा 19 की उपधारा (1) के खण्ड (1) के अधीन विधि के उल्लंघन में होना पाया जाता है, ऐसे बालक की दोषसिद्धि के संगत अभिलेखों को बालक न्यायालय द्वारा प्रतिधारित किया जाएगा।

Juvenile Justice Act Section-24 (JJ Act Section-24 in English)

(1) Notwithstanding anything contained in any other law for the time being in force, a child who has committed an offence and has been dealt with under the provisions of this Act shall not suffer disqualification, if any, attached to a conviction of an offence under such law:
Provided that in case of a child who has completed or is above the age of sixteen years and is found to be in conflict with law by the Children’s Court under clause (i) of sub-section (1) of section 19, the provisions of sub-section (1) shall not apply.
(2) The Board shall make an order directing the Police, or by the Childrens Court to its own registry that the relevant records of such conviction shall be destroyed after the expiry of the period of appeal or, as the case may be, a reasonable period as may be prescribed:
Provided that in case of a heinous offence where the child is found to be in conflict with law under clause (i) of sub-section (1) of section 19, the relevant records of conviction of such child shall be retained by the Children’s Court.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 24 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 | Juvenile Justice Act Section 23

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-23) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 के अनुसार, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 223 में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी विधि का उल्लंघन करने वाले अभिकथित किसी बालक के साथ किसी ऐसे व्यक्ति की जो बालक नहीं है, संयुक्त कार्यवाही नहीं की जाएगी।, जिसे JJ Act Section-23 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 (Juvenile Justice Act Section-23) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 JJ Act Section-23 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 223 में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी विधि का उल्लंघन करने वाले अभिकथित किसी बालक के साथ किसी ऐसे व्यक्ति की जो बालक नहीं है, संयुक्त कार्यवाही नहीं की जाएगी।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 (JJ Act Section-23 in Hindi)

विधि का उल्लंघन करने वाले किसी बालक और ऐसे व्यक्ति की जो बालक नहीं है, संयुक्त कार्यवाही का न होना

( 1 ) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 223 में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी विधि का उल्लंघन करने वाले अभिकथित किसी बालक के साथ किसी ऐसे व्यक्ति की जो बालक नहीं है, संयुक्त कार्यवाही नहीं की जाएगी।
(2) यदि बोर्ड द्वारा या बालक न्यायालय द्वारा जांच के दौरान विधि का उल्लंघन करने वाले अभिकथित व्यक्ति के बारे में यह पाया जाता है कि वह बालक नहीं है तो ऐसे व्यक्ति का किसी बालक के साथ विचारण नहीं किया जाएगा।

Juvenile Justice Act Section-23 (JJ Act Section-23 in English)

No joint proceedings of child in conflict with law and person not a child

1) Notwithstanding anything contained in section 223 of the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974) or in any other law for the time being in force, there shall be no joint proceedings of a child alleged to be in conflict with law, with a person who is not a child.
(2) If during the inquiry by the Board or by the Childrens Court, the person alleged to be in conflict with law is found that he is not a child, such person shall not be tried along with a child.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 23 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।