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किशोर न्याय अधिनियम की धारा 22 | Juvenile Justice Act Section 22

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-22) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 22 के अनुसार दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में या तत्समय प्रवृत्त किसी निरोध निवारक विधि में अंतर्विष्ट किसी तत्प्रतिकूल बात के होते हुए भी किसी बालक के विरुद्ध उक्त संहिता के अध्याय 8 के अधीन न कोई कार्यवाही संस्थित की जाएगी और न ही कोई आदेश पारित किया जाएगा।, जिसे JJ Act Section-22 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 22 (Juvenile Justice Act Section-22) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 22 JJ Act Section-22 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में या तत्समय प्रवृत्त किसी निरोध निवारक विधि में अंतर्विष्ट किसी तत्प्रतिकूल बात के होते हुए भी किसी बालक के विरुद्ध उक्त संहिता के अध्याय 8 के अधीन न कोई कार्यवाही संस्थित की जाएगी और न ही कोई आदेश पारित किया जाएगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 22 (JJ Act Section-22 in Hindi)

दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय 8 के अधीन की कार्यवाही का बालक के विरुद्ध लागू न होना

दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में या तत्समय प्रवृत्त किसी निरोध निवारक विधि में अंतर्विष्ट किसी तत्प्रतिकूल बात के होते हुए भी किसी बालक के विरुद्ध उक्त संहिता के अध्याय 8 के अधीन न कोई कार्यवाही संस्थित की जाएगी और न ही कोई आदेश पारित किया जाएगा।

Juvenile Justice Act Section-22 (JJ Act Section-22 in English)

Proceeding under Chapter VIII of the Code of Criminal Procedure not to apply against child

Notwithstanding anything to the contrary contained in the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974), or any preventive detention law for the time being in force, no proceeding shall be instituted and no order shall be passed against any child under Chapter VIII of the said Code.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 22 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 21 | Juvenile Justice Act Section 21

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-21) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 21 के अनुसार, विधि का उल्लंघन करने वाले किसी बालक को इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन या भारतीय दंड संहिता (1860 का 45 ) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अधीन ऐसे किसी अपराध के लिए छोड़े जाने की संभावना के बगैर मृत्यु या आजीवन कारावास का दंडादेश नहीं दिया जायेगा।, जिसे JJ Act Section-21 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 21 (Juvenile Justice Act Section-21) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 21 JJ Act Section-21 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) विधि का उल्लंघन करने वाले किसी बालक को इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन या भारतीय दंड संहिता (1860 का 45 ) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अधीन ऐसे किसी अपराध के लिए छोड़े जाने की संभावना के बगैर मृत्यु या आजीवन कारावास का दंडादेश नहीं दिया जायेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 21 (JJ Act Section-21 in Hindi)

आदेश, जो विधि का उल्लंघन करने वाले बालक के विरुद्ध पारित न किया जा सकेगा

विधि का उल्लंघन करने वाले किसी बालक को इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन या भारतीय दंड संहिता (1860 का 45 ) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अधीन ऐसे किसी अपराध के लिए छोड़े जाने की संभावना के बगैर मृत्यु या आजीवन कारावास का दंडादेश नहीं दिया जायेगा।

Juvenile Justice Act Section-21 (JJ Act Section-21 in English)

Order that may not be passed against a child in conflict with law

No child in conflict with law shall be sentenced to death or for life imprisonment without the possibility of release, for any such offence, either under the provisions of this Act or under the provisions of the Indian Penal Code (45 of 1860) or any other law for the time being in force.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 21 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 20 | Juvenile Justice Act Section 20

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-20) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 20 के अनुसार, जब विधि का उल्लंघन करने वाला बालक इक्कीस वर्ष की आयु पूरी कर लेता है और अभी भी ठहरने की अवधि पूरी करनी है तो बालक न्यायालय, इस बात का मूल्यांकन करने के लिए कि क्या ऐसे बालक में सुधारात्मक परिवर्तन हुए हैं और क्या ऐसा बालक समाज का योगदान करने वाला सदस्य हो सकता है।, जिसे JJ Act Section-20 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 20 (Juvenile Justice Act Section-20) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 20 JJ Act Section-20 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) जहां बोर्ड से प्रारंभिक निर्धारण प्राप्त होने के पश्चात् बालक न्यायालय यह विनिश्चय कर सकेगा कि वयस्क के रूप में बालक के विचारण और इस धारा तथा धारा 21 के उपबंधों के अधीन रहते हुए बालक की विशेष जरूरतों, ऋजु विचारण के सिद्धातों तथा बाल अनुकूल वातावरण बनाए रखने पर विचार करते हुए, विचारण के पश्चात् समुचित आदेश पारित करने की आवश्यकता है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 20 (JJ Act Section-20 in Hindi)

बालक, जिसने इक्कीस वर्ष की आयु पूरी कर ली है और अभी भी सुरक्षित स्थान में ठहरने की विहित अवधि को पूरा करना है

( 1 ) जब विधि का उल्लंघन करने वाला बालक इक्कीस वर्ष की आयु पूरी कर लेता है और अभी भी ठहरने की अवधि पूरी करनी है तो बालक न्यायालय, इस बात का मूल्यांकन करने के लिए कि क्या ऐसे बालक में सुधारात्मक परिवर्तन हुए हैं और क्या ऐसा बालक समाज का योगदान करने वाला सदस्य हो सकता है, परिवीक्षा अधिकारी या जिला बालक संरक्षण एकक या सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा या अपने स्वयं के द्वारा, जैसा अपेक्षित हो, अनुवर्ती कार्रवाई के लिए व्यवस्था करेगा और इस प्रयोजन के लिए धारा 19 की उपधारा (4) के अधीन सुसंगत विशेषज्ञों के मूल्यांकन के साथ बालक के प्रगति अभिलेख को विचार में लिया जाएगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात् बालक न्यायालय ,-
(i) ऐसी शर्तों पर, जो ठीक समझी जाएं, जिनके अंतर्गत ठहरने की विहित अवधि के शेष भाग के लिए मॉनीटरी प्राधिकारी की नियुक्ति भी है, बालक को छोड़े जाने का विनिश्चय कर सकेगा;
(ii) यह विनिश्चय कर सकेगा कि बालक अपनी शेष अवधि जेल में पूरा करेगा परंतु प्रत्येक राज्य सरकार मॉनीटरी प्राधिकारियों और ऐसी मॉनीटरी प्रक्रियाओं की, जो विहित की जाएं, एक सूची रखेगी ।

Juvenile Justice Act Section-20 (JJ Act Section-20 in English)

Child attained age of twenty-one years and yet to complete prescribed term of stay in place of safety

(1) When the child in conflict with the law attains the age of twenty-one years and is yet to complete the term of stay, the Childrens Court shall provide for a follow up by the probation officer or the District Child Protection Unit or a social worker or by itself, as required, to evaluate if such child has undergone reformative changes and if the child can be a contributing member of the society and for this purpose the progress records of the child under sub-section (4) of section 19, along with evaluation of relevant experts are to be taken into consideration.
(2) After the completion of the procedure specified under sub-section (1), the Children’s Court may—
(i) decide to release the child on such conditions as it deems fit which includes appointment of a monitoring authority for the remainder of the prescribed term of stay;
(ii) decide that the child shall complete the remainder of his term in a jail:
Provided that each State Government shall maintain a list of monitoring authorities and monitoring procedures as may be prescribed.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 20 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 28 | Juvenile Justice Act Section 28

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-28) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 28 के अनुसार, समिति एक मास में कम से कम बीस बैठकें करेगी और अपनी’ बैठकों में कारबार के संव्यवहार की बाबत ऐसे नियमों और प्रक्रियाओं का अनुपालन करेगी, जो विहित की जाएं समिति द्वारा, किसी विद्यमान बाल देखरेख संस्था का, उसके कार्यकरण की जांच पड़ताल करने और बालकों की भलाई के लिए किया गया दौरा समिति की बैठक के रूप में माना जाएगा।, जिसे JJ Act Section-28 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 28 (Juvenile Justice Act Section-28) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 28 JJ Act Section-28 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) समिति एक मास में कम से कम बीस बैठकें करेगी और अपनी’ बैठकों में कारबार के संव्यवहार की बाबत ऐसे नियमों और प्रक्रियाओं का अनुपालन करेगी, जो विहित की जाएं समिति द्वारा, किसी विद्यमान बाल देखरेख संस्था का, उसके कार्यकरण की जांच पड़ताल करने और बालकों की भलाई के लिए किया गया दौरा समिति की बैठक के रूप में माना जाएगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 28 (JJ Act Section-28 in Hindi)

समिति के संबंध में प्रक्रिया

(1) समिति, एक मास में कम से कम बीस बैठकें करेगी और अपनी’ बैठकों में कारबार के संव्यवहार की बाबत ऐसे नियमों और प्रक्रियाओं का अनुपालन करेगी, जो विहित की जाएं।
(2) समिति द्वारा, किसी विद्यमान बाल देखरेख संस्था का, उसके कार्यकरण की जांच पड़ताल करने और बालकों की भलाई के लिए किया गया दौरा समिति की बैठक के रूप में माना जाएगा।
(3) देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बालक को बाल गृह में या उपयुक्त व्यक्ति के पास रखे जाने के लिए, जब समिति सत्र में न हो, समिति के व्यष्टिक सदस्य के सामने पेश किया जा सकेगा । 
(4) किसी विनिश्चय के समय समिति के सदस्यों के बीच राय की किसी भिन्नता की दशा में, बहुमत की राय अभिभावी होगी, किंतु जहां ऐसा बहुमत नहीं है वहां अध्यक्ष की राय अभिभावी होगी।
(5) उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन रहते हुए समिति, समिति के किसी सदस्य के अनुपस्थित रहते हुए भी कार्रवाई कर सकेगी और समिति द्वारा किया गया कोई आदेश, कार्यवाही के किसी प्रक्रम के दौरान केवल किसी सदस्य की अनुपस्थिति के आधार पर अविधिमान्य नहीं होगा :
परंतु मामले के अंतिम निपटान के समय कम से कम तीन सदस्य उपस्थित होंगे ।

Juvenile Justice Act Section-28 (JJ Act Section-28 in English)

Procedure in relation to Committee-

(1) The Committee shall meet at least twenty days in a month and shall observe such rules and procedures with regard to the transaction of business at its meetings, as may be prescribed.
(2) A visit to an existing child care institution by the Committee, to check its functioning and well being of children shall be considered as a sitting of the Committee.
(3) A child in need of care and protection may be produced before an individual member of the Committee for being placed in a Childrens Home or fit person when the Committee is not in session.
(4) In the event of any difference of opinion among the members of the Committee at the time of taking any decision, the opinion of the majority shall prevail but where there is no such majority, the opinion of the Chairperson shall prevail.
(5) Subject to the provisions of sub-section (1), the Committee may act, notwithstanding the absence of any member of the Committee, and no order made by the Committee shall be invalid by reason only of the absence of any member during any stage of the proceeding.
Provided that there shall be at least three members present at the time of final disposal of the case.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 28 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 19 | Juvenile Justice Act Section 19

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-19) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 19 के अनुसार, जहां बोर्ड से प्रारंभिक निर्धारण प्राप्त होने के पश्चात् बालक न्यायालय यह विनिश्चय कर सकेगा कि वयस्क के रूप में बालक के विचारण और इस धारा तथा धारा 21 के उपबंधों के अधीन रहते हुए बालक की विशेष जरूरतों, ऋजु विचारण के सिद्धातों तथा बाल अनुकूल वातावरण बनाए रखने पर विचार करते हुए, विचारण के पश्चात् समुचित आदेश पारित करने की आवश्यकता है वयस्क के रूप में बालक के विचारण की कोई आवश्यकता नहीं है और बोर्ड के रूप में जांच की जा सकती है, जिसे JJ Act Section-19 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 19 (Juvenile Justice Act Section-19) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 19 JJ Act Section-19 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) जहां बोर्ड से प्रारंभिक निर्धारण प्राप्त होने के पश्चात् बालक न्यायालय यह विनिश्चय कर सकेगा कि वयस्क के रूप में बालक के विचारण और इस धारा तथा धारा 21 के उपबंधों के अधीन रहते हुए बालक की विशेष जरूरतों, ऋजु विचारण के सिद्धातों तथा बाल अनुकूल वातावरण बनाए रखने पर विचार करते हुए, विचारण के पश्चात् समुचित आदेश पारित करने की आवश्यकता है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 19 (JJ Act Section-19 in Hindi)

बालक न्यायालय की शक्तियां

(1) अधिनियम की धारा 15 के अधीन बोर्ड से प्रारंभिक निर्धारण प्राप्त होने के पश्चात् बालक न्यायालय यह विनिश्चय कर सकेगा कि–
(i) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंधों के अनुसार वयस्क के रूप में बालक के विचारण और इस धारा तथा धारा 21 के उपबंधों के अधीन रहते हुए बालक की विशेष जरूरतों, ऋजु विचारण के सिद्धातों तथा बाल अनुकूल वातावरण बनाए रखने पर विचार करते हुए, विचारण के पश्चात् समुचित आदेश पारित करने की आवश्यकता है; या
(ii) वयस्क के रूप में बालक के विचारण की कोई आवश्यकता नहीं है और बोर्ड के रूप में जांच की जा सकती है तथा धारा 18 के उपबंधों के अनुसार समुचित आदेश पारित किए जा सकते हैं।
(2) बालक न्यायालय यह सुनिश्चित करेगा कि विधि का उल्लंघन करने वाले बालक से संबंधित अंतिम आदेश में बालक के पुनर्वासन के लिए व्यक्तिगत देखभाल योजना को सम्मिलित किया जाएगा जिसके अंतर्गत परिवीक्षा अधिकारी या जिला बाल संरक्षण एकक या किसी सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा की गई अनुवर्ती कार्रवाई भी है।
(3) बालक न्यायालय यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसे बालक को, जो विधि का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, इक्कीस वर्ष की आयु का होने तक सुरक्षित स्थान पर भेजा जाए और तत्पश्चात् उक्त व्यक्ति को जेल में स्थानान्तरित कर दिया जाएगा :
परंतु बालक को, सुरक्षित स्थान पर उसके ठहरने की कालावधि के दौरान, सुधारात्मक सेवाएं जिनके अंतर्गत शैक्षणिक सेवाएं, कौशल विकास, परामर्श देने, आचरण उपांतरण चिकित्सा जैसी वैकल्पिक चिकित्सा और मनश्चिकित्सीय सहायता भी हैं, उपलब्ध करवाई जाएंगी।
(4) बालक न्यायालय यह सुनिश्चित करेगा कि सुरक्षित स्थान पर बालक की प्रगति का मूल्यांकन करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि बालक से वहां किसी प्रकार का दुर्व्यवहार नहीं किया गया है, यथा अपेक्षित परिवीक्षा अधिकारी या जिला बालक संरक्षा एकक या सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा प्रत्येक वर्ष एक आवधिक अनुवर्ती रिपोर्ट हो ।
(5) उपधारा (4) के अधीन दी गई रिपोर्ट अभिलेख और अनुवर्तन के लिए जैसा अपेक्षित हो, बालक न्यायालय को भेजी जाएगी ।

Juvenile Justice Act Section-19 (JJ Act Section-19 in English)

Powers of Children’s Court

(1) After the receipt of preliminary assessment from the Board under section 15, the Childrens Court may decide that-
(i) there is a need for trial of the child as an adult as per the provisions of the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974) and pass appropriate orders after trial subject to the provisions of this section and section 21, considering the special needs of the child, the tenets of fair trial and maintaining a child friendly atmosphere;
(ii) there is no need for trial of the child as an adult and may conduct an inquiry as a Board and pass appropriate orders in accordance with the provisions of section 18.
(2) The Childrens Court shall ensure that the final order, with regard to a child in conflict with law, shall include an individual care plan for the rehabilitation of child, including follow up by the probation officer or the District Child Protection Unit or a social worker.
(3) The Childrens Court shall ensure that the child who is found to be in conflict with law is sent to a place of safety till he attains the age of twenty-one years and thereafter, the person shall be transferred to a jail:
Provided that the reformative services including educational services, skill development, alternative therapy such as counselling, behaviour modification therapy, and psychiatric support shall be provided to the child during the period of his stay in the place of safety.
(4) The Childrens Court shall ensure that there is a periodic follow up report every year by the probation officer or the District Child Protection Unit or a social worker, as required, to evaluate the progress of the child in the place of safety and to ensure that there is no ill-treatment to the child in any form.
(5) The reports under sub-section (4) shall be forwarded to the Childrens Court for record and follow up, as may be required.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 19 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 18 | Juvenile Justice Act Section 18

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-18) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 18 के अनुसार, जहां बोर्ड का जांच करने पर यह समाधान हो जाता है कि बालक ने, आयु को विचार में लाए बिना कोई छोटा अपराध या कोई घोर अपराध किया है; या सोलह वर्ष से कम आयु के बालक ने कोई जघन्य अपराध किया है [या सोलह वर्ष से अधिक आयु के बालक ने कोई जघन्य अपराध किया है और बोर्ड ने धारा 15 के अधीन प्रारंभिक निर्धारण करने के पश्चात् मामले का निपटारा कर दिया है, जिसे JJ Act Section-18 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 18 (Juvenile Justice Act Section-18) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 18 JJ Act Section-18 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) जहां बोर्ड को जांच करने पर यह समाधान हो जाता है कि बालक ने, आयु को विचार में लाए बिना कोई छोटा अपराध या कोई घोर अपराध किया है; या सोलह वर्ष से कम आयु के बालक ने कोई जघन्य अपराध किया है [या सोलह वर्ष से अधिक आयु के बालक ने कोई जघन्य अपराध किया है। बालक को, समुचित जांच करने के पश्चात् और ऐसे बालक, तथा उनके माता-पिता या संरक्षक को परामर्श देने के पश्चात् उपदेश या भर्त्सना के पश्चात् मा जाने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 18 (JJ Act Section-18 in Hindi)

विधि का उल्लंघन करते पाए गए बालक के बारे में आदेश

(1) जहां बोर्ड का जांच करने पर यह समाधान हो जाता है कि बालक ने, आयु को विचार में लाए बिना कोई छोटा अपराध या कोई घोर अपराध किया है; या सोलह वर्ष से कम आयु के बालक ने कोई जघन्य अपराध किया है [या सोलह वर्ष से अधिक आयु के बालक ने कोई जघन्य अपराध किया है और बोर्ड ने धारा 15 के अधीन प्रारंभिक निर्धारण करने के पश्चात् मामले का निपटारा कर दिया है। तो तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी और अपराध की प्रकृति, पर्यवेक्षण या मध्यक्षेप की विशिष्ट आवश्यकता ऐसी परिस्थितियों, जो सामाजिक अन्वेषण रिपोर्ट में बताई गई हैं, और बालक के पूर्व आचरण के आधार पर बोर्ड यदि ऐसा करना ठीक समझता है तो वह,-
(क) बालक को, समुचित जांच करने के पश्चात् और ऐसे बालक, तथा उनके माता-पिता या संरक्षक को परामर्श देने के पश्चात् उपदेश या भर्त्सना के पश्चात् मा जाने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा:
(ख) बालक को सामूहिक परामर्श और ऐसे ही क्रियाकलापों में भाग लेने का निदेश दे सकेगा; 
(ग) बालक को किसी संगठन या संस्थान अथवा बोर्ड द्वारा पहचान किए गए विनिर्दिष्ट व्यक्ति, व्यक्तियों या व्यक्ति समूह के पर्यवेक्षणाधीन सामुदायिक सेवा करने का आदेश दे सकेगा;
(घ) बालक या बालक के माता-पिता या संरक्षक को जुर्माने का संदाय करने का आदेश दे सकेगा :
परंतु यदि बालक कार्यरत है तो वह यह सुनिश्चित कर सकेगा कि तत्समय प्रवृत्त किसी श्रम विधि के उपबंधों का उल्लंघन न हुआ हो;
(ङ) बालक को सदाचरण की परिवीक्षा पर छोड़ने और माता-पिता, संरक्षक या योग्य व्यक्ति की देखरेख में रखने का निदेश, ऐसे माता-पिता, संरक्षक या योग्य व्यक्ति द्वारा बालक के सदाचरण और उसकी भलाई के लिए बोर्ड की अपेक्षानुसार प्रतिभू सहित या रहित तीन वर्ष से अधिक की कालावधि के लिए बंधपत्र निष्पादित किए जाने पर, दे सकेगा;
(च) बालक को सदाचरण की परिवीक्षा पर छोड़ने और बालक के सदाचरण और भलाई को सुनिश्चित करने के लिए किसी सुविधा उपयुक्त तंत्र की देखरेख और पर्यवेक्षण में रखने का निदेश तीन वर्ष से अनधिक की कालावधि के लिए दे सकेगा;
(छ) बालक को तीन वर्ष से अनधिक की ऐसी अवधि के लिए, जो वह ठीक समझे, सुधारात्मक सेवाएं, जिनके अंतर्गत शिक्षा, कौशल विकास, परामर्श देने, आचरण उपांतरण चिकित्सा के लिए और विशेष गृह में ठहरने की कालावधि के दौरान मनश्चिकित्सीय समर्थन देना भी है, विशेष गृह में भेजने का निदेश दे सकेगा :
परंतु यदि बालक का आचरण और व्यवहार ऐसा हो गया है जो बालक के हित में या विशेष गृह में रहने वाले अन्य बालकों के हित में नहीं होगा तो बोर्ड, ऐसे बालक को सुरक्षित स्थान पर भेज सकेगा । 
(2) यदि उपधारा (1) के खंड (क) से खंड (छ) के अधीन कोई आदेश पारित किया जाता है तो बोर्ड
(i) विद्यालय में हाजिर होने;
(ii) किसी व्यवसायिक प्रशिक्षण केन्द्र में हाजिर होने;
(iii) किसी चिकित्सा केंद्र में हाजिर होने;
(iv) किसी विनिर्दिष्ट स्थान पर बारंबार जाने या हाजिर होने से बालक को प्रतिषिद्ध करने; या का
(v). व्यसनमुक्ति कार्यक्रम में भाग लेने, अतिरिक्त आदेश पारित कर सकेगा ।
(3) जहां बोर्ड, धारा 15 के अधीन प्रारंभिक निर्धारण करने के पश्चात् यह आदेश पारित करता है कि उक्त बालक का, वयस्क के रूप में और विचारण करने की आवश्यकता है वहां बोर्ड मामले के विचारण को ऐसे अपराधों के विचारण की अधिकारिता वाले बालक न्यायालय को अंतरित करने का आदेश दे सकेगा।

Juvenile Justice Act Section-18 (JJ Act Section-18 in English)

Orders regarding child found to be in conflict with law

(1) Where a Board is satisfied on inquiry that a child irrespective of age has committed a petty offence, or a serious offence, or a child below the age of sixteen years has committed a heinous offence, [or a child above the age of sixteen years has committed a heinous offence and the Board has, after preliminary assessment under Section 15, disposed of the matter] then, notwithstanding anything contrary contained in any other law for the time being in force, and based on the nature of offence, specific need for supervision or intervention, circumstances as brought out in the social investigation report and past conduct of the child, the Board may, if it so thinks fit,–
(a) allow the child to go home after advice or admonition by following appropriate inquiry and counselling to such child and to his parents or the guardian;
(b) direct the child to participate in group counselling and similar activities;
(c) order the child to perform community service under the supervision of an organisation or institution, or a specified person, persons or group of persons identified by the Board;
(d) order the child or parents or the guardian of the child to pay fine:
Provided that, in case the child is working, it may be ensured that the provisions of any labour law for the time being in force are not violated;
(e) direct the child to be released on probation of good conduct and placed under the care of any parent, guardian or fit person, on such parent, guardian or fit person executing a bond, with or without surety, as the Board may require, for the good behaviour and childs well-being for any period not exceeding three years;
(f) direct the child to be released on probation of good conduct and placed under the care and supervision of any fit facility for ensuring the good behaviour and childs well-being for any period not exceeding three years;
(g) direct the child to be sent to a special home, for such period, not exceeding three years, as it thinks fit, for providing reformative services including education, skill development, counselling, behaviour modification therapy, and psychiatric support during the period of stay in the special home:
Provided that if the conduct and behaviour of the child has been such that, it would not be in the childs interest, or in the interest of other children housed in a special home, the Board may send such child to the place of safety.
(2) If an order is passed under clauses (a) to (g) of sub-section (1), the Board may, in addition pass orders to
(i) attend school; or
(ii) attend a vocational training centre; or
(iii) attend a therapeutic centre; or
(iv) prohibit the child from visiting, frequenting or appearing at a specified place; or (v) undergo a de-addiction programme.
(3) Where the Board after preliminary assessment under section 15 pass an order that there is a need for trial of the said child as an adult, then the Board may order transfer of the trial of the case to the Children’s Court having jurisdiction to try such offences.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 18 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।