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भारत के संविधान का अनुच्छेद-6 (पाकिस्तान से भारत आए हुये कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार) |Article-6 (Rights of citizenship of certain persons who have migrated to India from Pakistan)

आज हम Article-6 (पाकिस्तान से भारत आये हुये नागरिकों के लिये नागरिकता का क्या प्रावधान हमारे भारत के संविधान मे दिया गया है, यह भी जानकारी देंगे। जो कोई नागरिक पहले भारत का निवासी था या उसके पूर्वज भारत के निवासी थे, लेकिन किसी कारणवश भारत-पाकिस्तान बटंवारे के दौरान पाकिस्तान चले गये थे, जो अब भारत के प्रवेश कर रहे है, तो अनुच्छेद-6 मे ऐसे व्यक्तियों के नागरिकता कैसे मिलेगी, यह प्रावधान दिया गया है। (Rights of citizenship of certain persons who have migrated to India from Pakistan) के बारे मे सम्पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम जानेंगें। किसी व्यक्ति जो पाकिस्तान से भारत देश मे प्रवेश कर रहा है, तो उसे नागरिकता किस प्रकार मिलेगी। इसके अलावा किन-किन शर्तो पर ही उस व्यक्ति को नागरिकता मिल सकेगी। अनुच्छेद-6 (Article-6) पाकिस्तान से भारत आए हुये कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार को परिभाषित किया गया है।

भारत के संविधान का अनुच्छेद-6 (Article-6 of the Constitution of India) यह Article-6 भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान, जब कोई नागरिक पाकिस्तान चला गया गया था, लेकिन अब वह पुनः भारत आ रहा है तो क्या उस नागरिक को नागरिकता मिलेगी, साथ ही उसकी नागरिकता किन किन कारणो से मिल सकेगी अथवा नही मिल सकेगी विस्तृत से समझेंगे।

आर्टिकल 6 क्या है ? (What is Article 6)

भारत के संविधान के अनुच्छेद 6 के तहत पाकिस्तान से भारत आए हुये कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार (Rights of citizenship of certain persons who have migrated to India from Pakistan) का प्रावधान किया गया है, किंतु अभियुक्त को नागरिकता का अधिकार निरपेक्ष नहीं है, क्योकि भारत पुनः लौटने पर उसे यह प्रमाणित करना आवश्यक होगा, कि पूर्व मे वह अथवा उसके परिवार जन (पिता-पितामाह) भारत के ही निवासी थे।

कोई वह राज्यक्षेत्र जो, अब पाकिस्तान की सीमा मे लागू हो गया है, किन्तु पूर्व मे वह भारत मे आता था, लेकिन अब वह नागरिक भारत प्रवास करेगा, तो भी ऐसे नागरिको को नागरिकता का प्रावधान आर्टिकल 6 मे किया गया है। इसके अलावा यदि उस नागरिक के माता-पिता अथवा उसके पितामह या पितामही या मातामह या मातामही भारत शाषित अधिनियम 1935 मे परिभाषित भारत मे ही जन्मे थे अथवा 19 जुलाई 1948 से पहले प्रवास किया गया था। भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकेगा।

अनुच्छेद-6 (Indian Constitution Article 6) Hindi or English

पाकिस्तान से भारत में प्रवास करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार-

अनुच्छेद 5 में कुछ भी होने के बावजूद, कोई व्यक्ति जिसने ऐसे राज्यक्षेत्र से जो इस समय पाकिस्तान के अंतर्गत है, भारत के राज्यक्षेत्र को प्रवास किया है, इस संविधान के प्रारंभ पर भारत का नागरिक समझा जाएगा-
(क) यदि वह अथवा उसके माता या पिता में से कोई अथवा उसके पितामह या पितामही या मातामह या मातामही में से कोई (मूल रूप में यथा अधिनियमित) भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिभाषित भारत में जन्मा था और
(ख) (i) जबकि वह व्यक्ति ऐसा है जिसने 19 जुलाई, 1948 से पहले इस प्रकार प्रवास किया है तब यदि वह अपने प्रवास की तारीख से भारत के राज्यक्षेत्र में मामूली तौर से निवासी रहा है या :
(ii) जबकि वह व्यक्ति ऐसा है जिसने 19 जुलाई, 1948 को या उसके पश्चात् इस प्रकार प्रवास किया है तब यदि वह नागरिकता प्राप्ति के लिए भारत डोमिनियन की सरकार द्वारा विहित प्ररूप में और रीति से उसके द्वारा इस संविधान के प्रारंभ से पहले ऐसे अधिकारी को, जिसे उस सरकार ने इस प्रयोजन के लिए नियुक्त किया है, आवेदन किए जाने पर उस अधिकारी द्वारा भारत का नागरिक रजिस्ट्रीकृत कर लिया गया है
परंतु यदि कोई व्यक्ति अपने आवेदन की तारीख से ठीक पहले कम से कम छह मास भारत के राज्यक्षेत्र में निवासी नहीं रहा है तो वह इस प्रकार रजिस्ट्रीकृत नहीं किया जाएगा।

Rights of citizenship of certain persons who have migrated to India from Pakistan-

Notwithstanding anything in article 5, a person who has migrated to the territory of India from the territory now included in Pakistan shall be deemed to be a citizen of India at the commencement of this Constitution if-
(a) he or either of his parents or any of his grand-parents was born in India as defined in the Government of India Act, 1935 (as originally enacted); and
(b) (i) in the case where such person has so migrated before the nineteenth day of July, 1948, he has been ordinarily resident in the territory of India since the date of his migration, or
(ii) in the case where such person has so migrated on or after the nineteenth day of July, 1948, he has been registered as a citizen of India by an officer appointed in that behalf by the Government of the Dominion of India on an application made by him therefor to such officer before the commencement of this Constitution in the form and manner prescribed by that Government:
Provided that no person shall be so registered unless he has been resident in the territory of India for at least six months immediately preceding the date of his application.

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हमारा प्रयास अनुच्छेद-6 (Article-6) पाकिस्तान से भारत आए हुये कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार (ights of citizenship of certain persons who have migrated to India from Pakistan) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारत के संविधान का अनुच्छेद-19 (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) |Article-19 (Freedom of Speech and Expression)

आज हम लिखित अथवा मौखिक रूप से प्रकट की गयी अभियुक्त की स्वतंत्रता के सम्बन्ध मे सम्पूर्ण जानकारी आपके साथ साझा करेंगे। इसके अलावा किसी व्यक्ति को अपनी बात प्रकट करने की क्या स्वतंत्रता हमारे भारत के संविधान मे दिया गया है, यह भी जानकारी देंगे। भाषण एवंम् अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech and Expression) के बारे मे सम्पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम जानेंगें। किसी व्यक्ति को अपनी बात लिखित या मौखिक रूप से समाज के समक्ष रखने के कुछ नियम एवंम् सयंम होते है, जिसके तहत वह अपने कथन को समाज के प्रति रखा जा सकता है, जिसे हमारे संविधान मे अनुच्छेद-19 (Article-19) मे परिभाषित किया गया है।

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संविधान के भाग 3 में  मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है ये अधिकार प्रत्येक नागरिक के विकास के लिए बेहद जरूरी है, Article-19, को भी मौलिक अधिकार की श्रेणी में रखा गया है। आज हम इस लेख में अनुच्छेद 19 में वर्णित विभिन्न प्रकार के मौलिक अधिकार के बारे में भी जानेंगे साथ ही, इनका क्या अर्थ होता है, यह स्पष्ट करेंगे। आखिर आर्टिकल 19 क्या है। What is Article 19 (Freedom of Speech and Expression) in Hindi.

आर्टिकल-19 मे प्रत्येक व्यक्ति अपनी लिखित एवंम् मौखिक बात रखने के लिये भारत के संविधान मे अधिकारों को परिभाषित किया गया है। भाषण एवंम् अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार होता है। यह अधिकार आम नागरिक एवंम् पत्रकारिता/प्रेस के विचारो को प्रकट करने की स्वतंत्रता पर भी आधारित है।

आर्टिकल 19 क्या है ? (What is Article 19)

भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत लिखित और मौखिक रूप से अपना मत प्रकट करने हेतु अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का प्रावधान किया गया है, किंतु अभियक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार निरपेक्ष नहीं है इस पर युक्तियुक्त निर्बंधन हैं। भारत की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता पर खतरे की स्थिति में, वैदेशिक संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव की स्थिति में, न्यायालय की अवमानना की स्थिति में इस अधिकार को बाधित किया जा सकता है। भारत के सभी नागरिकों को विचार करने, भाषण देने और अपने व अन्य व्यक्तियों के विचारों के प्रचार की स्वतंत्रता प्राप्त है। प्रेस/पत्रकारिता भी विचारों के प्रचार का एक साधन ही है इसलिये अनुच्छेद 19 में प्रेस की स्वतंत्रता भी सम्मिलित है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (freedom of expression) या बोलने की स्वतंत्रता (freedom of speech) किसी व्यक्ति या समुदाय द्वारा अपने मत और विचार को बिना प्रतिशोध, अभिवेचन या दंड के डर के प्रकट कर पाने की स्थिति होती है। इस स्वतंत्रता को सरकारें, जनसंचार कम्पनियाँ, और अन्य संस्थाएँ बाधित कर सकती हैं। इसलिये यह अधिकार प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार माना गया है। अनुच्छेद 19 में प्रयुक्त ‘अभिव्यक्ति’ शब्द इसके क्षेत्र को बहुत विस्तृत कर देता है। विचारों के व्यक्त करने के जितने भी माध्यम हैं जैसे लिखित अथवा मौखिक वे अभिव्यक्ति, पदावली के अन्तर्गत आ जाते हैं। इस प्रकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में प्रेस की स्वतन्त्रता भी सम्मिलित है। विचारों का स्वतन्त्र प्रसारण ही इस स्वतन्त्रता का मुख्य उद्देश्य है। यह भाषण द्वारा या समाचार-पत्रों द्वारा किया जा सकता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में किसी व्यक्ति के विचारों को किसी ऐसे माध्यम से अभिव्यक्त करना सम्मिलित है जिससे वह दूसरों तक उन्हे संप्रेषित(Communicate) कर सके। इस प्रकार इनमें संकेतों, अंकों, चिह्नों तथा ऐसी ही अन्य क्रियाओं द्वारा किसी व्यक्ति के विचारों की अभिव्यक्ति सम्मिलित है।

संविधान के अनुच्छेद 19 में 6 तरह की स्वतंत्रताओं का उल्लेख है जो निम्न है – संविधान के अनुच्छेद 19 में 6 तरह की स्वतंत्रताओं के बारे में एक एक करके हम देखने का प्रयास करते हैं।

क्रम सं0अनुच्छेदस्वंत्रतता
119(A)बोलने की आजादी
219(B)सभा की आजादी
319(C)संघ बनाने की आजादी
419(D)पूरे देश मेँ आने जाने की आजादी
519(E)पूरे देश मेँ बसने की/रहने की आजादी
619(G)कोई भी व्यापार एवं जीविका की आजादी

अनुच्छेद-19 (Indian Constitution Article 19) 

“Protection of certain rights regarding freedom of speech, etc”–
All citizens shall have the right-
(a) to freedom of speech and expression;
(b) to assemble peaceably and without arms;
(c) to form associations or unions 2[or co-operative societies];
(d) to move freely throughout the territory of India;
(e) to reside and settle in any part of the territory of India; 3[and]
(g) to practise any profession, or to carry on any occupation, trade or business.

“भाषण की स्वतंत्रता आदि के संबंध में कतिपय अधिकारों का संरक्षण”-
सभी नागरिकों को अधिकार होगा-
(क) भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए;
(ख) शांतिपूर्वक और हथियारों के बिना इकट्ठा होने के लिए;
(ग) संघों या यूनियनों 2 [या सहकारी समितियों] बनाने के लिए;
(घ) भारत के पूरे क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से स्थानांतरित करने के लिए;
(ड़) भारत के क्षेत्र के किसी भी हिस्से में रहने और बसने के लिए; 3 [और]
(छ) कोई व्यवसाय करना, या कोई उपजीविका, व्यापार या व्यापार करना।

अनुच्छेद-19(A) | बोलने की आजादी (freedom of speech)

भारत के संविधान मे आर्टिकल 19(A) में भारत के सभी नागरिकों को विचार करने, भाषण देने और अपने व अन्य व्यक्तियों के विचारों के प्रचार की स्वतंत्रता (freedom of speech and expression) प्राप्त है। प्रेस भी अपने विचारों के प्रचार का एक साधन होने के कारण Article-19(A) में प्रेस की स्वतंत्रता भी शामिल है लेकिन नागरिकों को विचार और अभिव्यक्ति की यह स्वतंत्रता असीमित रूप से प्राप्त नहीं है

भारत के संविधान मे प्रत्येक व्यक्ति को बोलने का अधिकार जन्मजात दिया गया है यदि प्रत्येक व्यक्ति को बोलना बंद कर दिया गया तो हमारी आवाज़ और हमारे विचार सीमित हो जाएंगे। इसलिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(A) के अंदर हमें बोलने की स्वतंत्रता दी गई है और इसे लागू भी किया गया है , यह हमारा मौलिक अधिकार है अतः यदि कोई व्यक्ति किसी के बोलने पर पाबंधी अथवा अपनी बात रखने पर एतराज करता है, तो हम न्यायालय भी जा सकते हैं

अनुच्छेद-19(B) | सभा की आजादी (freedom of assembly)

भारत के संविधान मे आर्टिकल 19(B) में व्यक्तियों के द्वारा अपने विचारों के प्रचार के लिए शांतिपूर्वक और बिना किन्हीं शस्त्रों के सभा या सम्मलेन करने का अधिकार प्रदान किया गया है और व्यक्तियों द्वारा जुलूस या प्रदर्शन का आयोजन भी किया जा सकता है। यहाँ भी यह स्वतंत्रता (assemble peacefully and without arms) असीमित नहीं है और राज्य के द्वारा सार्वजनिक सुरक्षा के हित में व्यक्ति की इस स्वतंत्रता को सीमित किया जा सकता है।

भारत के संविधान मे प्रत्येक व्यक्ति को सभा बनाने/सभा मे उपस्थित होने की आजादी है, प्रत्येक व्यक्ति को शांतिपूर्वक और बिना किन्हीं शस्त्रों के सभा या सम्मलेन बनाने या उपस्थित होने की आजादी दिया गया है। इसलिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(B) के अंदर सभा बनाने या उपस्थित होने की स्वतंत्रता दी गई है और इसे लागू भी किया गया है , यह हमारा मौलिक अधिकार है अतः यदि कोई व्यक्ति किसी को सभा बनाने या उपस्थित होने पर एतराज करता है, तो हम न्यायालय भी जा सकते हैं

अनुच्छेद-19(C) | संघ बनाने की आजादी (freedom of association)

भारत के संविधान मे आर्टिकल 19(C) मे सभी नागरिकों को समुदायों और संघों के निर्माण की स्वतंत्रता प्रदान की गई है परन्तु यह स्वतंत्रता भी उन प्रतिबंधों के अधीन है, जिन्हें राज्य साधारण जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए लगाता है। इस स्वतंत्रता की आड़ में व्यक्ति ऐसे समुदायों का निर्माण नहीं कर सकता जो षड्यंत्र करें अथवा सार्वजनिक शान्ति और व्यवस्था को भंग करें।

भारत के संविधान मे प्रत्येक व्यक्ति को संघ बनाने या उपस्थित होने की आजादी है, प्रत्येक व्यक्ति को सार्वजनिक शांति और बिना किसी षणयंत्र के अथवा किसी आम नागरिक को कोई परेशानी को ध्यान मे रखते हुये ऐसे संघ बनाने या उपस्थित होने की आजादी दी गयी है। इसलिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(C) के अंदर संघ बनाने या उपस्थित होने की स्वतंत्रता दी गई है और इसे लागू भी किया गया है , यह हमारा मौलिक अधिकार है अतः यदि कोई व्यक्ति किसी को संघ बनाने या उपस्थित होने पर एतराज करता है, तो हम न्यायालय भी जा सकते हैं

अनुच्छेद-19(D) | पूरे देश मे आने-जाने की आजादी (freedom of movement throughout the country)

भारत के संविधान मे आर्टिकल 19(D) भारत के सभी नागरिक बिना किसी प्रतिबंध या विशेष अधिकार-पत्र के सम्पूर्ण भारतीय क्षेत्र में कही भी घूम सकते हैं।

भारत के संविधान मे प्रत्येक व्यक्ति को पूरे भारत देश मे आने-जाने की आजादी है, प्रत्येक व्यक्ति को किसी गैर-इरादे (भागने के उद्देश्य निहित न हो) अथवा किसी आम नागरिक को किसी परेशानी को ध्यान मे रखते हुये ऐसे भारत के किसी भी राज्य मे घूमने की आजादी दी गयी है। इसलिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(D) के अंदर पूरे भारत देश मे घूमने की आजादी की स्वतंत्रता दी गई है और इसे लागू भी किया गया है , यह हमारा मौलिक अधिकार है अतः यदि कोई व्यक्ति किसी को भारत के किसी राज्य मे आने-जाने पर एतराज करता है, तो हम न्यायालय भी जा सकते हैं

अनुच्छेद-19(E) | पूरे देश मेँ बसने की/रहने की आजादी (Freedom to settle/reside throughout the country)

भारत के संविधान मे आर्टिकल 19(E) भारत के प्रत्येक नागरिक को भारत में कहीं भी रहने या बस जाने की स्वतंत्रता प्रदान की गई है। भ्रमण और निवास के सम्बन्ध में यह व्यवस्था संविधान द्वारा अपनाई गई इकहरी नागरिकता के अनुरूप है, भ्रमण और निवास की इस स्वतंत्रता पर भी राज्य सामान्य जनता के हित और अनुसूचित जातियों और जनजातियों के हितों में यक्ति-युक्त  प्रतिबंध लगा सकता है।

भारत के संविधान मे प्रत्येक व्यक्ति को पूरे भारत देश मे बसने या रहने की आजादी है, प्रत्येक व्यक्ति को किसी गैर-इरादे (भागने के उद्देश्य निहित न हो) अथवा किसी आम नागरिक को किसी परेशानी को ध्यान मे रखते हुये ऐसे भारत के किसी भी राज्य मे बसने या रहने की आजादी दी गयी है। इसलिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(E) के अंदर पूरे भारत देश मे बसने या रहने की आजादी की स्वतंत्रता दी गई है और इसे लागू भी किया गया है , यह हमारा मौलिक अधिकार है अतः यदि कोई व्यक्ति किसी को भारत के किसी राज्य मे बसने या रहने पर एतराज करता है, तो हम न्यायालय भी जा सकते हैं

अनुच्छेद-19(G) | कोई भी व्यापार एवं जीविका की आजादी (Freedom of any trade and livelihood)

भारत के संविधान मे आर्टिकल 19(G) भारत में सभी नागरिकों को इस बात की स्वतंत्रता है कि वे अपनी आजीविका के लिए कोई भी पेशा, व्यापार या कारोबार कर सकते हैं | राज्य साधारणतया व्यक्ति को न तो कोई विशेष नौकरी, व्यापार या व्यवसाय करने के लिए बाध्य करेगा और न ही उसके इस प्रकार के कार्य में बाधा डालेगा. किन्तु इस सबंध में भी राज्य को यह अधिकार प्राप्त है कि वह कुछ व्यवसायों के सम्बन्ध में आवश्यक योग्यताएं निर्धारित कर सकता है अथवा किसी कारोबार या उद्योग को पूर्ण अथवा आंशिक रूप से अपने हाथ में ले सकता है।

भारत के संविधान मे प्रत्येक व्यक्ति को पूरे भारत देश मे कोई भी नौकरी, व्यापार करके जीविका चलाने की आजादी है, बशर्ते किसी गैर-कानूनी तरीके व्यापार से नही। प्रत्येक व्यक्ति को नौकरी, व्यापार करके जीविका चलाने की आजादी है। इसलिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(G) के अंदर पूरे भारत देश मे कोई भी नौकरी, व्यापार एवं किसी प्रकार से जीविका अर्जित करने की स्वतंत्रता दी गई है और इसे लागू भी किया गया है , यह हमारा मौलिक अधिकार है अतः यदि कोई व्यक्ति किसी को भारत के किसी राज्य मे कोई भी नौकरी, व्यापार एवं अन्य कोई जीविका अर्जित करने पर एतराज करता है, तो हम न्यायालय भी जा सकते हैं

नोट- भारत के संविधान के भाग 3 मे मौलिक अधिकारो मे अनुच्छेद-19 भी, प्रत्येक व्यक्ति का एक जन्मसिद्ध अधिकार है, लेकिन जो कोई व्यक्ति इस अधिकार का अनुचित लाभ उठाता है जैसे- भारत की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता पर खतरा जैसे स्थिति मे, वैदेशिक संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव की स्थिति में, न्यायालय की अवमानना की स्थिति में उपरोक्त अधिकारों को बाधित करता है अथवा अपने शब्दों से किसी को ठेस पहुचाता है, जो गैर-कानूनी होता है, तो ऐसी दशा मे वह व्यक्ति दोषी माना जायेगा।

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अनुच्छेद-21 (Article-21) | निजता का अधिकार | Right to Privacy
भारत के संविधान का अनुच्छेद-22 | Article-22 | गिरफ्तारी के खिलाफ संरक्षण | Protection Against Arrest

हमारा प्रयास अनुच्छेद-19 (Article-19) भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech and Expression) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 1(संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार, प्रारंभ और आवेदन) | Juvenile Justice Act Section 1 (Short title, extent, commencement and application)

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act) की धारा -1 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा-1 मे संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार, प्रारम्भ को बताया गया है और इस अधिनियम को जम्मू एवंम् कश्मीर को छोड़कर सम्पूर्ण भारत पर लागू होता है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा- 1 हिन्दी मे

संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार, प्रारंभ और आवेदन-

(1) इस अधिनियम को किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 कहा जा सकता है।
(2) यह जम्मू और कश्मीर राज्य को छोड़कर पूरे भारत में फैला हुआ है।
(3) यह उस तारीख को लागू होगा, जिसे केंद्र सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे।
(4) कुछ समय के लिए लागू किसी अन्य कानून में कुछ भी शामिल होने के बावजूद, इस अधिनियम के प्रावधान देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों और कानून के उल्लंघन में बच्चों से संबंधित सभी मामलों पर लागू होंगे, जिनमें शामिल हैं –
(i) कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों की गिरफ्तारी, नजरबंदी, अभियोजन, जुर्माना या कारावास, पुनर्वास और सामाजिक पुन: एकीकरण;
(ii) देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के पुनर्वास, दत्तक ग्रहण, पुन: एकीकरण और बहाली से संबंधित प्रक्रियाएं और निर्णय या आदेश।

Juvenile Justice (JJ Act) Section 1 in English

Short title, extent, commencement and application-

(1) This Act may be called the Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015.
(2) It extends to the whole of India except the State of Jammu and Kashmir.
(3) It shall come into force on such date1 as the Central Government may, by notification in the Official Gazette, appoint.
(4) Notwithstanding anything contained in any other law for the time being in force, the provisions of this Act shall apply to all matters concerning children in need of care and protection and children in conflict with law, including-
(i) apprehension, detention, prosecution, penalty or imprisonment, rehabilitation and social re-integration of children in conflict with law;
(ii) procedures and decisions or orders relating to rehabilitation, adoption, re-integration, and restoration of children in need of care and protection.

Bare Act (Hindi or English)-

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 217A | मोटर यान अधिनियम, 1939 के अधीन अनुदत्त परमिट, चालक अनुज्ञप्ति और रजिस्ट्रीकरण का नवीकरण | MV Act, Section- 217A in hindi | Renewal of permits, driving licences and registration granted under the Motor Vehicles Act, 1939.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 217A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 217A, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 217A का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -217A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। राज्य सरकार, इस अधिनियम के आधीन धारा 217 की उपधारा (1) द्वारा उस धारा में निर्दिष्ट अधिनियमितियों के निरसन के होते हुए भी, उक्त अधिनियमितियों के अधीन जारी किए गए या अनुदत्त किसी उपयुक्तता प्रमाण-पत्र या रजिस्ट्रीकरण या अनुज्ञप्ति या परमिट को इस अधिनियम के अधीन नवीकृत किया जा सकेगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 217A के अनुसार

मोटर यान अधिनियम, 1939 के अधीन अनुदत्त परमिट, चालक अनुज्ञप्ति और रजिस्ट्रीकरण का नवीकरण-

धारा 217 की उपधारा (1) द्वारा उस धारा में निर्दिष्ट अधिनियमितियों के निरसन के होते हुए भी, उक्त अधिनियमितियों के अधीन जारी किए गए या अनुदत्त किसी उपयुक्तता प्रमाण-पत्र या रजिस्ट्रीकरण या अनुज्ञप्ति या परमिट को इस अधिनियम के अधीन नवीकृत किया जा सकेगा।

Renewal of permits, driving licences and registration granted under the Motor Vehicles Act, 1939-
Notwithstanding the repeal by sub-section (1) of section 217 of the enactments referred to in that sub-section, any certificate of fitness or registration or licence or permit issued or granted under the said enactments may be renewed under this Act.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 217A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 217 | निरसन और व्यावृत्तियां | MV Act, Section- 217 in hindi | Repeal and savings.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 217 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 217, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 217 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -217 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। राज्य सरकार, इस अधिनियम अधिसूचना, नियम, विनियम, आदेश या सूचना, अथवा की गई कोई नियुक्ति या घोषणा, अथवा दी गई कोई छूट अथवा किया गया कोई अधिहरण या अधिरोपित की गई कोई शास्ति या जुर्माना, कोई समपहरण, रद्दकरण अथवा की गई कोई अन्य बात या कोई अन्य कार्रवाई, जहां तक वह इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 217 के अनुसार

निरसन और व्यावृत्तियां-

(1) मोटर यान अधिनियम, 1939 (1939 का 4) और किसी राज्य में इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व प्रवृत्त, इस अधिनियम की तत्स्थानी कोई विधि (जिन्हें इसके पश्चात् इस धारा में निरसित अधिनियमितियां कहा गया है) इसके द्वारा निरसित की जाती हैं।
(2) उपधारा (1) द्वारा निरसित अधिनियमितियों का निरसन कर दिए जाने पर भी-
(क) निरसित और ऐसे प्रारंभ से ठीक पूर्व प्रवृत्त अधिनियमितियों के अधीन निकाली गई कोई अधिसूचना, नियम, विनियम, आदेश या सूचना, अथवा की गई कोई नियुक्ति या घोषणा, अथवा दी गई कोई छूट अथवा किया गया कोई अधिहरण या अधिरोपित की गई कोई शास्ति या जुर्माना, कोई समपहरण, रद्दकरण अथवा की गई कोई अन्य बात या कोई अन्य कार्रवाई, जहां तक वह इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं है, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंध के अधीन निकाली गई, दी गई, किया गया या की गई समझी जाएगी;
(ख) निरसित अधिनियमितियों के अधीन जारी किए गए या दिए गए ठीक हालत में होने के प्रमाण-पत्र का या रजिस्ट्रीकरण या अनुज्ञप्ति या परमिट का ऐसे प्रारंभ के पश्चात्, उन्हीं शर्तों के अधीन और उसी अवधि के लिए, बराबर प्रभाव बना रहेगा, मानो कि यह अधिनियम पारित ही नहीं है;
(ग) किसी निरसित अधिनियमिति के प्रति या उसके किसी उपबंध के प्रति निर्देश करने वाले किसी दस्तावेज का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह इस अधिनियम के प्रति या इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंध के प्रति निर्देश है;
(घ) निरसित अधिनियमितियों के उपबंध के अनुसार रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी द्वारा सुभिन्न चिन्हों का समनुदेशन और मोटर यानों पर उनके प्रदर्शन की रीति, इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात्, तब तक प्रवृत्त बनी रहेगी जब तक कि धारा 41 की उपधारा (6) के अधीन अधिसूचना नहीं निकाली जाती है;
(ङ) मोटर यान अधिनियम, 1939 (1939 का 4) की धारा 68ग या किसी राज्य में प्रवृत्त तत्समान विधि, यदि कोई है, के अधीन बनाई गई और इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व लंबित कोई स्कीम इस अधिनियम की धारा 100 के उपबंधों के अनुसार निपटाई जाएगी;
(च) मोटर यान अधिनियम, 1939 (1939 का 4) की धारा 68च की उपधारा (1क) के अधीन या किसी राज्य में इस अधिनियम के ठीक पूर्व प्रवृत्त तत्स्थानी उपबंध, यदि कोई है, के अधीन दिए गए परमिट तब तक प्रवृत्त बने रहेंगे जब तक इस अधिनियम के अध्याय 6 के अधीन अनुमोदित स्कीम प्रकाशित नहीं की जाती है ।
(3) किसी निरसित अधिनियमिति के अधीन संदेय कोई शास्ति इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उपबंधित रीति से वसूल की जा सकेगी, किन्तु निरसित अधिनियमितियों के अधीन ऐसी शास्ति की वसूली के लिए पहले ही की गई किसी कार्रवाई पर इससे प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(4) इस धारा में विशिष्ट बातों के उल्लेख से यह नहीं समझा जाएगा कि वह निरसनों के प्रभाव के संबंध में साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 6 के साधारण तौर पर लागू होने पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है या कोई प्रभाव डालती है।

Repeal and savings-
(1) The Motor Vehicles Act, 1939 (4 of 1939) and any law corresponding to that Act in force in any State immediately before the commencement of this Act in that State (hereafter in this section referred to as the repealed enactments) are hereby repealed.
(2) Notwithstanding the repeal by sub-section (1) of the repealed enactments-
(a) any notification, rule, regulation, order or notice issued, or any appointment or declaration made, or exemption granted, or any confiscation made, or any penalty or fine imposed, any forfeiture, cancellation or any other thing done, or any other action taken under the repealed enactments, and in force immediately before such commencement shall, so far as it is not inconsistent with the provisions of this Act, be deemed to have been issued, made, granted, done or taken under the corresponding provision of this Act;
(b) any certificate of fitness or registration or licence or permit issued or granted under the repealed enactments shall continue to have effect after such commencement under the same conditions and for the same period as if this Act had not been passed;
(c) any document referring to any of the repealed enactments or the provisions thereof, shall be construed as referring to this Act or to the corresponding provision of this Act;
(d) the assignment of distinguishing marks by the registering authority and the manner of display on motor vehicles in accordance with the provision of the repealed enactments shall, after the commencement of this Act, continue to remain in force until a notification under sub-section (6) of section 41 of this Act is issued;
(e) any scheme made under section 68C of the Motor Vehicles Act, 1939 (4 of 1939) or under the corresponding law, if any, in force in any State and pending immediately before the commencement of this Act shall be disposed of in accordance with the provisions of section 100 of this Act;
(f) the permits issued under sub-section (1A) of section 68F of the Motor Vehicles Act, 1939 (4 of 1939) or under the corresponding provision, if any, in force in any State immediately before the commencement of this Act shall continue to remain in force until the approved scheme under Chapter VI of this Act is published.
(3) Any penalty payable under any of the repealed enactments may be recovered in the manner provided by or under this Act, but without prejudice to any action already taken for the recovery of such penalty under the repealed enactments.
(4) The mention of particular matters in this section shall not be held to prejudice or affect the general application of section 6 of the General Clauses Act, 1897 (10 of 1897) with regard to the effect of repeals.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 217 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 216 | कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति | MV Act, Section- 216 in hindi | Power to remove difficulties.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 216 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 216, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 216 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -216 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। राज्य सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों से सुसंगत ऐसे उपबंध कर सकेगी जो उसे कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत होते हैं।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 216 के अनुसार

कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-

(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों से सुसंगत ऐसे उपबंध कर सकेगी जो उसे कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत होते हैं:
परन्तु ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, बनाए जाने के पश्चात् यथासंभव शीघ्र, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा।

Power to remove difficulties-
(1) If any difficulty arises in giving effect to the provisions of this Act, the Central Government may, by order published in the Official Gazette, make such provisions, not inconsistent with the provisions of this Act as appear to it to be necessary or expedient for removing the difficulty:
Provided that no such order shall be made after the expiry of a period of three years from the date of commencement of this Act.
(2) Every order made under this section shall, as soon as may be after it is made, be laid before each House of Parliament.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 216 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।