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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 177 | अपराधों के दण्ड के लिए साधारण उपबंध | MV Act, Section- 177 in hindi | General provision for punishment of offences.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 177 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 177, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 177 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -177 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन किसी नियम, विनियम या अधिसूचना के किसी उपबंध का उल्लंघन करेगा वह जब उस अपराध के लिए कोई शास्ति उपबंधित नहीं है, प्रथम अपराध के लिए जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, और किसी द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, जुर्माने से, जो एक हजार पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 177 के अनुसार

अपराधों के दण्ड के लिए साधारण उपबंध-

जो कोई इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम, विनियम या अधिसूचना के किसी उपबंध का उल्लंघन करेगा वह जब उस अपराध के लिए कोई शास्ति उपबंधित नहीं है, प्रथम अपराध के लिए जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, और किसी द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, जुर्माने से, जो एक हजार पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।

General provision for punishment of offences-
Whoever contravenes any provision of this Act or of any rule, regulation or notification made thereunder shall, if no penalty is provided for the offence be punishable for the first offence with fine which may extend to five hundred rupees, and for any second or subsequent offence with fine which may extend to one thousand and five hundred rupees.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 177 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 176 | राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति | MV Act, Section- 176 in hindi | Power of State Government to make rules.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 176 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 176, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 176 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -176 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार धारा 165 से धारा 174 तक के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी और ऐसे नियम विशिष्टतया निम्नलिखित सभी बातों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 176 के अनुसार

राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति-

राज्य सरकार धारा 165 से धारा 174 तक के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी और ऐसे नियम विशिष्टतया निम्नलिखित सभी बातों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :-
(क) प्रतिकर के दावों के लिए आवेदन का प्ररूप तथा वे विशिष्टियां जो उनमें हो सकेंगी और वे फीसें, यदि कोई हों, जो ऐसे आवेदनों की बाबत दी जानी हैं;
(ख) इस अध्याय के अधीन जांच करने में दावा अधिकरण द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;
(ग) सिविल न्यायालय में निहित शक्तियां जिनका प्रयोग दावा अधिकरण कर सकेगा;
(घ) वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे तथा वह फीस (यदि कोई हो) जिसे देने पर दावा अधिकरण के अधिनिर्णय के विरुद्ध अपील की जा सकेगी; और
(ङ) कोई अन्य बात, जो विहित की जानी है या की जाए।

Power of State Government to make rules-
A State Government may make rules for the purpose of carrying into effect the provisions of sections 165 to 174, and in particular, such rules may provide for all or any of the following matters, namely :-
(a) the form of application for claims for compensation and the particulars it may contain, and the fees, if any, to be paid in respect of such applications;
(b) the procedure to be followed by a Claims Tribunal in holding an inquiry under this Chapter;
(c) the powers vested in a Civil Court which may be exercised by a Claims Tribunal;
(d) the form and the manner in which and the fees (if any) on payment of which an appeal may be preferred against an award of a Claims Tribunal; and
(e) any other matter which is to be, or may be, prescribed.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 176 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 175 | सिविल न्यायालयों की अधिकारिता का वर्जन | MV Act, Section- 175 in hindi | Bar on jurisdiction of Civil Courts.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 175 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 175, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 175 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -175 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन किसी क्षेत्र के लिए कोई दावा अधिकरण गठित किया गया है वहां किसी भी सिविल न्यायालय को यह अधिकारिता न होगी कि वह प्रतिकर के किसी दावे से संबंधित किसी ऐसे प्रश्न को ग्रहण करे जिसका न्यायनिर्णयन उस क्षेत्र के लिए दावा अधिकरण द्वारा किया जा सकता है, तथा प्रतिकर के दावे की बाबत दावा अधिकरण द्वारा या उसके समक्ष की गई या की जाने वाली किसी कार्रवाई की बाबत सिविल न्यायालय कोई भी व्यादेश, मंजूर नहीं करेगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 175 के अनुसार

सिविल न्यायालयों की अधिकारिता का वर्जन-

जहां किसी क्षेत्र के लिए कोई दावा अधिकरण गठित किया गया है वहां किसी भी सिविल न्यायालय को यह अधिकारिता न होगी कि वह प्रतिकर के किसी दावे से संबंधित किसी ऐसे प्रश्न को ग्रहण करे जिसका न्यायनिर्णयन उस क्षेत्र के लिए दावा अधिकरण द्वारा किया जा सकता है, तथा प्रतिकर के दावे की बाबत दावा अधिकरण द्वारा या उसके समक्ष की गई या की जाने वाली किसी कार्रवाई की बाबत सिविल न्यायालय कोई भी व्यादेश, मंजूर नहीं करेगा।

Bar on jurisdiction of Civil Courts-
Where any Claims Tribunal has been constituted for any area, no Civil Court shall have jurisdiction to entertain any question relating to any claim for compensation which may be adjudicated upon by the Claims Tribunal for that area, and no injunction in respect of any action taken or to be taken by or before the Claims Tribunal in respect of the claim for compensation shall be granted by the Civil Court.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 175 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 174 | बीमाकर्ता से धनराशि की वसूली भू-राजस्व की बकाया के रूप में करना | MV Act, Section- 174 in hindi | Recovery of money from insurer as arrear of land revenue.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 174 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 174, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 174 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -174 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा कोई रकम देय है वहां दावा अधिकरण उस रकम के हकदार व्यक्ति द्वारा उसे आवेदन किए जाने पर उस रकम का प्रमाण-पत्र कलेक्टर को भेज सकेगा तथा कलेक्टर उसे ऐसी रीति से वसूल करने के लिए अग्रसर होगा मानो वह भू-राजस्व की बकाया हो।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 174 के अनुसार

बीमाकर्ता से धनराशि की वसूली भू-राजस्व की बकाया के रूप में करना-

जहां किसी अधिनिर्णय के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा कोई रकम देय है वहां दावा अधिकरण उस रकम के हकदार व्यक्ति द्वारा उसे आवेदन किए जाने पर उस रकम का प्रमाण-पत्र कलेक्टर को भेज सकेगा तथा कलेक्टर उसे ऐसी रीति से वसूल करने के लिए अग्रसर होगा मानो वह भू-राजस्व की बकाया हो।

Recovery of money from insurer as arrear of land revenue-
Where any amount is due from any person under an award, the Claims Tribunal may, on an application made to it by the person entitled to the amount, issue a certificate for the amount to the Collector and the Collector shall proceed to recover the same in the same manner as an arrear of land revenue.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 174 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 173 | अपीलें | MV Act, Section- 173 in hindi | Appeals.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 173 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 173, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 173 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -173 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन दावा अधिकरण के अधिनिर्णय से व्यथित है, उस अधिनिर्णय की तारीख से नब्बे दिन के भीतर उच्च न्यायालय को अपील कर सकेगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 173 के अनुसार

अपीलें-

(1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई भी व्यक्ति, जो दावा अधिकरण के अधिनिर्णय से व्यथित है, उस अधिनिर्णय की तारीख से नब्बे दिन के भीतर उच्च न्यायालय को अपील कर सकेगा:
परन्तु ऐसे व्यक्ति की अपील उच्च न्यायालय द्वारा ग्रहण नहीं की जाएगी जिससे ऐसे अधिनिर्णय के निबंधनों के अनुसार किसी रकम का संदाय करने की अपेक्षा की गई है, यदि वह ऐसे उच्च न्यायालय में पच्चीस हजार रुपए या इस प्रकार अधिनिर्णीत रकम का पचास प्रतिशत, इनमें से जो भी कम हो, ऐसे उच्च न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट रीति से जमा नहीं कर देता:
परन्तु यह और कि यदि उच्च न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि समय पर अपील करने से अपराधी पर्याप्त कारण से निवारित रहा था तो वह उक्त नब्बे दिन की अवधि की समाप्ति के पश्चात् भी अपील ग्रहण कर सकेगा।
(2) दावा अधिकरण के अधिनिर्णय के विरुद्ध कोई अपील उस दशा में न होगी जिसमें अपील में विवादग्रस्त रकम एक लाख रुपए से कम है।

Appeals-
(1) Subject to the provisions of sub-section (2), any person aggrieved by an award of a Claims Tribunal may, within ninety days from the date. of the award, prefer an appeal to the High Court:
Provided that no appeal by the person who is required to pay any amount in terms of such award shall be entertained by the High Court unless he has deposited with it twenty-five thousand rupees or fifty percent of the amount so awarded, whichever is less, in the manner directed by the High Court:
Provided further that the High Court may entertain the appeal after the expiry of the said period of ninety days, if it is satisfied that the appellant was prevented by sufficient cause from preferring the appeal in time.
(2) No appeal shall lie against any award of a Claims Tribunal if the amount in dispute in the appeal is less than one lakh rupees.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 173 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 172 | कतिपय मामलों में प्रतिकरात्मक खर्चे दिलाना | MV Act, Section- 172 in hindi | Award of compensatory costs in certain cases.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 172 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 172, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 172 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -172 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन प्रतिकर के किसी दावे का न्यायनिर्णयन करने वाले दावा अधिकरण का जहां किसी मामले में ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे। इस धारा के अन्तर्गत कतिपय मामलों में प्रतिकरात्मक खर्चे दिलाना परिभाषित करता है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 172 के अनुसार

कतिपय मामलों में प्रतिकरात्मक खर्चे दिलाना-

(1) इस अधिनियम के अधीन प्रतिकर के किसी दावे का न्यायनिर्णयन करने वाले दावा अधिकरण का जहां किसी मामले में ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, यह समाधान हो जाता है कि-
(क) बीमा पॉलिसी इस आधार पर शून्य है कि वह ऐसे तथ्य के व्यपदेशन से अभिप्राप्त की गई थी जिसकी कोई महत्वपूर्ण विशिष्टि मिथ्या थी; या
(ख) किसी पक्षकार या बीमाकर्ता ने कोई मिथ्या या तंग करने वाला दावा या प्रतिवाद पेश किया है,
वहां अधिकरण आदेश दे सकेगा कि जो पक्षकार दुर्व्यपदेशन का दोषी रहा है या जिसने ऐसा दावा या प्रतिवाद पेश किया है वह, यथास्थिति, बीमाकर्ता अथवा उस पक्षकार को, जिसके विरुद्ध ऐसा दावा या प्रतिवाद पेश किया गया है, प्रतिकर के रूप में विशेष खर्चा दे।
(2) कोई भी दावा अधिकरण, उपधारा (1) के अधीन विशेष खर्चों के बारे में एक हजार रुपए से अधिक की किसी रकम का आदेश न देगा।
(3) कोई भी व्यक्ति या बीमाकर्ता जिसके विरुद्ध इस धारा के अधीन आदेश दिया गया है, मात्र इस कारण ऐसे दुर्व्यपदेशन, दावे या प्रतिवाद के संबंध में, जैसा उपधारा (1) में निर्दिष्ट है किसी आपराधिक दायित्व से छूट नहीं पाएगा।
(4) किसी दुर्व्यपदेशन, दावे या प्रतिवाद की बाबत इस धारा के अधीन प्रतिकर के रूप में अधिनिर्णीत कोई रकम ऐसे दुर्व्यपदेशन, दावे या प्रतिवाद की बाबत प्रतिकर के संबंध में नुकसानी के लिए किसी पश्चात्वर्ती वाद में गणना में ली जाएगी।

Award of compensatory costs in certain cases-
(1) Any Claims Tribunal adjudicating upon any claim for compensation under this Act, may in any case where it is satisfied for reasons to be recorded by it in writing that-
(a) the policy of insurance is void on the ground that it was obtained by the representation of fact which was false in any material particular, or
(b) any party or insurer has put forward a false or vexatious claim or defence, such Tribunal may make an order for the payment, by the party who is guilty of misrepresentation or by whom such claim or defence has been put forward of special costs by way of compensation to the insurer or, as the case may be, to the party against whom such claim or defence has been put forward.
(2) No Claims Tribunal shall pass an order for special costs under sub-section (1) for any amount exceeding one thousand rupees.
(3) No person or insurer against whom an order has been made under this section shall, by reason thereof be exempted from any criminal liability in respect of such misrepresentation, claim or defence as is referred to in sub-section (1).
(4) Any amount awarded by way of compensation under this section in respect of any misrepresentation, claim or defence, shall be taken into account in any subsequent suit for damages for compensation in respect of such misrepresentation, claim or defence.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 172 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।