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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 145 | परिभाषाएं | MV Act, Section- 145 in hindi | Definitions.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 145 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 145, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 145 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -145 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के आधीन कोई मोटर यान चालन सम्बन्धी किसी दुर्घटना जैसे परिस्थिति मे बीमाकर्ता किसी वाहन पर किस तरह से किस रूप से उपयोग मे लाता है, इस अधिनियम मे परिभाषित किया गया है ।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 145 के अनुसार

परिभाषाएं-

इस अध्याय में-
(क) “प्राधिकृत बीमाकर्ता” से ऐसा बीमाकर्ता अभिप्रेत है, जो भारत में तत्समय साधारण बीमा कारबार कर रहा है और जिसे बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 3 के अधीन स्थापित भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण और साधारण बीमा कारबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) के अधीन साधारण बीमा कारबार करने के लिए प्राधिकृत किसी सरकारी बीमा निधि द्वारा रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र मंजूर किया गया है;
(ख) “बीमा प्रमाणपत्र” से धारा 147 के अनुसरण में किसी प्राधिकृत बीमाकर्ता द्वारा जारी कोई प्रमाणपत्र अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत ऐसी अपेक्षाओं का, जो विहित की जाएं, अनुपालन करने वाला कवर नोट भी है, और जहां किसी पालिसी के संबंध में एक से अधिक प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं या जहां किसी प्रमाणपत्र की प्रति जारी की गई है, वहां यथास्थिति, ऐसे सभी प्रमाणपत्र या वह प्रति भी है;
(ग) “घोर उपहति” का वही अर्थ होगा, जो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 320 में उसका है।
(घ) “हिट एंड रन मोटर दुर्घटना” से ऐसी कोई दुर्घटना अभिप्रेत है, जो ऐसे किसी मोटर यान या मोटर यानों के उपयोग से कारित हुई है, जिनकी पहचान इस प्रयोजन हेतु का युक्तियुक्त प्रयास करने के बावजूद भी अभिनिश्चित नहीं की जा सकती:
(ङ) “बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण” से बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 3 के अधीन स्थापित बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अभिप्रेत है;
(च) “बीमा पालिसी” के अंतर्गत बीमा प्रमाणपत्र भी है;
(छ) “संपत्ति” के अंतर्गत सड़कें, पुल, पुलिया, सेतुक, स्तंभ, पेड़, मील के पत्थर और किसी मोटर यान में वहन किए जाने वाले यात्रियों का सामान तथा माल भी हैं;
(ज) “व्यतिकारी देश” से ऐसा कोई देश अभिप्रेत है, जो व्यतिकारिता के आधार पर केंद्रीय सरकार, किसी परिवहन यान का चालक और कोई अन्य सहकर्मी द्वारा राजपत्र म, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए व्यतिकारी देश के रूप में अधिसूचित किया जाए।
(झ) “पर-पक्षकार” के अंतर्गत सरकार, किसी परिवहन यान का चालक और उसका कोई अन्य सहकर्मी भी है।

Definitions-
In this Chapter :-
(a) “authorized insurer” means an insurer for the time being carrying on general insurance business in India and granted a certificate of registration by the Insurance Regulatory and Development Authority of India established under section 3 of the Insurance Regulatory and Development Authority Act, 1999 (41 of 1999) and any Government insurance fund authorized to do general insurance business. under the General Insurance Business (Nationalisation) Act, 1972 (57 of 1972);
(b) “certificate of insurance” means a certificate issued by an authorized insurer in pursuance of section 147 and includes a cover note complying with such requirements as may be prescribed, and where more than one certificate has been issued in connection with a policy, or where a copy of a certificate has been issued, all those certificates or that copy, as the case may be;
(c) “grievous hurt” shall have the same meaning as assigned to it in section 320 of the Indian Penal Code (45 of 1860);
(d) “hit and run motor accident” means an accident arising out of the use of a motor vehicle or motor vehicles the identity whereof cannot be ascertained in spite of reasonable efforts for the purpose;
(e) “Insurance Regulatory and Development Authority” means the Insurance Regulatory and Development Authority established under section 3 of the Insurance Regulatory and Development Authority Act, 1999 (41 of 1999);
(f) “policy of insurance” includes a certificate of insurance;
(g) “property” includes roads, bridges, culverts, causeways, trees, posts, milestones, and baggage of passengers and goods carried in any motor vehicle;
(h) “reciprocating country” means any such country as may on the basis of reciprocity be notified by the Central Government in the Official Gazette to be a reciprocating country for the purposes of this Act;
(i) “third party” includes the Government, the driver and any other co-worker on a transport vehicle.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 145 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 144 | अध्यारोही प्रभाव | MV Act, Section- 144 in hindi | Overriding effect.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 144 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 144, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 144 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -144 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के उपबंध इस अधिनियम के या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 144 के अनुसार

अध्यारोही प्रभाव-

इस अध्याय के उपबंध इस अधिनियम के या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे।

Overriding effect-
The provisions of this Chapter shall have effect notwithstanding anything contained in any other provision of this Act or of any other law for the time being in force..

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 144 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 143 | 1923 के अधिनियम 8 के अधीन कतिपय दावों को इस अध्याय का लागू होना | MV Act, Section- 143 in hindi | Applicability of Chapter to certain claims under Act 8 of 1923.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 143 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 143, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 143 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -143 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के उपबंध धारा 140 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रकृति की किसी दुर्घटना के परिणामस्वरूप हुई, कर्मकार प्रतिकर अधिनियम, 1923 (1923 का 8) के अधीन किसी व्यक्ति की मृत्यु या स्थाई निःशक्तता के बारे में प्रतिकर के लिए किसी दावे के संबंध में भी लागू होंगे और इस प्रयोजन के लिए उक्त उपबंध आवश्यक उपांतरणों के साथ उस अधिनियम के भाग माने जाएंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 143 के अनुसार

1923 के अधिनियम 8 के अधीन कतिपय दावों को इस अध्याय का लागू होना-

इस अध्याय के उपबंध धारा 140 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रकृति की किसी दुर्घटना के परिणामस्वरूप हुई, कर्मकार प्रतिकर अधिनियम, 1923 (1923 का 8) के अधीन किसी व्यक्ति की मृत्यु या स्थाई निःशक्तता के बारे में प्रतिकर के लिए किसी दावे के संबंध में भी लागू होंगे और इस प्रयोजन के लिए उक्त उपबंध आवश्यक उपांतरणों के साथ उस अधिनियम के भाग माने जाएंगे।

Applicability of Chapter to certain claims under Act 8 of 1923-
The provisions of this Chapter shall also apply in relation to any claim for compensation in respect of death or permanent disablement of any person under the Workmen’s Compensation Act, 1923 resulting from an accident of the nature referred to in sub-section (1) of section 140 and for this purpose, the said provisions shall, with necessary modifications, be deemed to form part of that Act.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 143 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 142 | स्थाई निःशक्तता | MV Act, Section- 142 in hindi | Permanent disablement.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 142 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 142, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 142 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -142 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए किसी व्यक्ति की स्थाई निःशक्तता धारा 142 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रकृति की दुर्घटना से हुई तब मानी जाएगी जब ऐसे व्यक्ति को दुर्घटना के कारण ऐसी क्षति या क्षतियां हुई है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 142 के अनुसार

स्थाई निःशक्तता-

इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए किसी व्यक्ति की स्थाई निःशक्तता धारा 140 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रकृति की दुर्घटना से हुई तब मानी जाएगी जब ऐसे व्यक्ति को दुर्घटना के कारण ऐसी क्षति या क्षतियां हुई है जिससे :-
(क) किसी भी नेत्र की दृष्टि का या किसी भी कान की श्रवण शक्ति का स्थाई विच्छेद या किसी अंग या जोड़ का विच्छेद हुआ है;
(ख) किसी अंग या जोड़ की शक्ति का विनाश या उसमें स्थाई कमी आई है, या
(ग) सिर या चेहरे का स्थाई विद्रुपण हुआ है।

Permanent disablement-
For the purposes of this Chapter, permanent disablement of a person shall be deemed to have resulted from an accident of the nature referred to in sub-section (1) of section 140 if such person has suffered by reason of the accident, any injury or injuries involving:-
(a) permanent privation of the sight of either eye or the hearing of either ear, or privation of any member or joint; or
(b) destruction or permanent impairing of the powers of any member or joint; or
(c) permanent disfiguration of the head or face.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 142 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 141 | मृत्यु या स्थाई निःशक्तता के लिए प्रतिकर का दावा करने के अन्य अधिकार के बारे में उपबंध | MV Act, Section- 141 in hindi | Provisions as to other right to claim compensation for death or permanent disablement.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 141 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 141, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 141 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -141 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन किसी व्यक्ति की मृत्यु या स्थाई निःशक्तता के बारे में धारा 140 के अधीन प्रतिकर का दावा करने का अधिकार इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंध के अधीन उसके बारे में प्रतिकर का दावा करने के लिए धारा 163क में निर्दिष्ट स्कीम के अधीन दावा करने के अधिकार के सिवाय किसी अन्य अधिकार (ऐसे अन्य अधिकार को, इस धारा में इसके पश्चात् त्रुटि के सिद्धांत पर अधिकार कहा गया है), के अतिरिक्त होगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 141 के अनुसार

मृत्यु या स्थाई निःशक्तता के लिए प्रतिकर का दावा करने के अन्य अधिकार के बारे में उपबंध-

(1) किसी व्यक्ति की मृत्यु या स्थाई निःशक्तता के बारे में धारा 140 के अधीन प्रतिकर का दावा करने का अधिकार इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंध के अधीन उसके बारे में प्रतिकर का दावा करने के लिए धारा 163क में निर्दिष्ट स्कीम के अधीन दावा करने के अधिकार के सिवाय किसी अन्य अधिकार (ऐसे अन्य अधिकार को, इस धारा में इसके पश्चात् त्रुटि के सिद्धांत पर अधिकार कहा गया है), के अतिरिक्त होगा।
(2) किसी व्यक्ति की मृत्यु या स्थाई निःशक्तता के बारे में धारा 140 के अधीन प्रतिकर के लिए कोई दावा यथासंभव शीघ्रता से निपटाया जाएगा और जहां ऐसी मृत्यु या स्थाई निःशक्तता के बारे में किसी प्रतिकर का दावा धारा 140 के अधीन और त्रुटि के सिद्धांत पर किसी अधिकार के अनुसरण में भी किया गया है वहां धारा 140 के अधीन प्रतिकर के लिए दावा उपरोक्त रूप में पहले निपटाया जाएगा ।
(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी व्यक्ति की मृत्यु या स्थाई निःशक्तता के बारे में धारा 140 के अधीन प्रतिकर का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति त्रुटि के सिद्धांत पर अधिकार के अनुसरण में प्रतिकर का संदाय करने के लिए भी दायी है, वहां इस प्रकार दायी व्यक्ति प्रथम वर्णित प्रतिकर का संदाय करेगा और-
(क) जहां प्रथम वर्णित प्रतिकर की रकम द्वितीय वर्णित प्रतिकर की रकम से कम है वहां वह (प्रथम वर्णित प्रतिकर के अतिरिक्त) द्वितीय वर्णित प्रतिकर का केवल उतना संदाय करने के लिए दायी होगा जो उस रकम के बराबर है जो प्रथम वर्णित प्रतिकर से अधिक हो;
(ख) जहां प्रथम वर्णित प्रतिकर की रकम द्वितीय वर्णित प्रतिकर की रकम के बराबर या उससे अधिक है वहां वह द्वितीय वर्णित प्रतिकर का संदाय करने के लिए दायी नहीं होगा।

Provisions as to other right to claim compensation for death or permanent disablement-
(1) The right to claim compensation under section 140 in respect of death or permanent disablement of any person shall be in addition to any other right, except the right to claim under the scheme referred to section 163A (such other right hereafter in this section referred to as the right on the principle of fault) to claim compensation in respect thereof under any other provision of this Act or of any other law for the time being in force.
(2) A claim for compensation under section 140 in respect of death or permanent disablement of any person shall be disposed of as expeditiously as possible and where compensation is claimed in respect of such death or permanent disablement under section 140 and also in pursuance of any right on the principle of fault, the claim for compensation under section 140 shall be disposed of as aforesaid in the first place.
(3) Notwithstanding anything contained in sub-section (1), where in respect of the death or permanent disablement of any person, the person liable to pay compensation under section 140 is also liable to pay compensation in accordance with the right on the principle of fault, the person so liable shall pay the first-mentioned compensation and–
(a) if the amount of the first-mentioned compensation is less than the amount of the second-mentioned compensation, he shall be liable to pay in addition to the first-mentioned compensation) only so much of the second-mentioned compensation as is equal to the amount by which it exceeds the first-mentioned compensation;
(b) if the amount of the first-mentioned compensation is equal to or more than the amount of the second-mentioned compensation, he shall not be liable to pay the second-mentioned compensation.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 141 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 140 | त्रुटि न होने के सिद्धान्त पर कतिपय मामलों में प्रतिकर का संदाय करने का दायित्व | MV Act, Section- 140 in hindi | Liability to pay compensation in certain cases on the principle of no-fault.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 140 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 140, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 140 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -140 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन जहां मोटर यान या मोटर यानों के उपयोग में हुई दुर्घटना के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति की मृत्यु या स्थाई निःशक्तता हुई है वहां, यथास्थिति, यान का स्वामी या यानों के स्वामी ऐसी मृत्यु या निःशक्तता के बारे में प्रतिकर का संदाय इस धारा के उपबंधों के अनुसार संयुक्ततः और पृथकतः करने के लिए दायी होंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 140 के अनुसार

त्रुटि न होने के सिद्धान्त पर कतिपय मामलों में प्रतिकर का संदाय करने का दायित्व-

(1) जहां मोटर यान या मोटर यानों के उपयोग में हुई दुर्घटना के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति की मृत्यु या स्थाई निःशक्तता हुई है वहां, यथास्थिति, यान का स्वामी या यानों के स्वामी ऐसी मृत्यु या निःशक्तता के बारे में प्रतिकर का संदाय इस धारा के उपबंधों के अनुसार संयुक्ततः और पृथकतः करने के लिए दायी होंगे।
(2) ऐसे प्रतिकर की रकम, जो किसी व्यक्ति की मृत्यु के बारे में उपधारा (1) के अधीन संदेय होगी, पचास हजार रुपए की नियत राशि होगी और किसी व्यक्ति की स्थाई निःशक्तता के बारे में उस उपधारा के अधीन संदेय प्रतिकर की रकम, पच्चीस हजार रुपए की नियत राशि होगी।
(3) उपधारा (1) के अधीन प्रतिकर के लिए किसी दावे में दावेदार से यह अपेक्षा नहीं की जाएगी कि वह यह अभिवाक् दे और यह सिद्ध करे कि वह मृत्यु या स्थाई निःशक्तता जिसके बारे में प्रतिकर का दावा किया गया है संबंधित यान या यानों के स्वामी या स्वामियों के या किसी अन्य व्यक्ति के किसी दोषपूर्ण कार्य, उपेक्षा या व्यतिक्रम के कारण हुई थी।
(4) उपधारा (1) के अधीन प्रतिकर के लिए दावा, यथास्थिति, ऐसे व्यक्ति के जिसकी मृत्यु या स्थाई निःशक्तता के बारे में दावा किया गया है, किसी दोषपूर्ण कार्य, उपेक्षा या व्यतिक्रम के कारण विफल नहीं होगा और ऐसी मृत्यु या स्थाई निःशक्तता के बारे में वसूलीय प्रतिकर की मात्रा ऐसी मृत्यु या स्थाई निःशक्तता के उत्तरदायित्व में ऐसे व्यक्ति के अंश के आधार पर कम नहीं की जाएगी ।
(5) किसी व्यक्ति की मृत्यु या शारीरिक क्षति के संबंध में उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, जिसके लिए यान का स्वामी अनुतोष के रूप में प्रतिकर देने का दायी है, वह तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन प्रतिकर का संदाय करने का भी दायी होगा :
परन्तु किसी अन्य विधि के अधीन किए जाने वाले प्रतिकर की ऐसी रकम को इस धारा या धारा 163क के अधीन संदेय प्रतिकर की रकम में से घटा दिया जाएगा ।

Liability to pay compensation in certain cases on the principle of no-fault-
(1) Where death or permanent disablement of any person has resulted from an accident arising out of the use of a motor vehicle or motor vehicles, the owner of the vehicle shall, or, as the case may be, the owners of the vehicles shall, jointly and severally, be liable to pay compensation in respect of such death or disablement in accordance with the provisions of this section.
(2) The amount of compensation which shall be payable under sub-section (1) in respect of the death of any person shall be a fixed sum of fifty thousand rupees and the amount of compensation payable under that sub-section in respect of the permanent disablement of any person shall be a fixed sum of twenty-five thousand rupees.
(3) In any claim for compensation under sub-section (1), the claimant shall not be required to plead and establish that the death or permanent disablement in respect of which the claim has been made was due to any wrongful act, neglect or default of the owner or owners of the vehicle or vehicles concerned or of any other person.
(4) A claim for compensation under sub-section (1) shall not be defeated by reason of any wrongful act, neglect or default of the person in respect of whose death or permanent disablement the claim has been made nor shall the quantum of compensation recoverable in respect of such death or permanent disablement be reduced on the basis of the share of such person in the responsibility for such death or permanent disablement.
(5) Notwithstanding anything contained in sub-section (2) regarding death or bodily injury to any person, for which the owner of the vehicle is liable to give compensation for relief, he is also liable to pay compensation under any other law for the time being in force :
Provided that the amount of such compensation to be given under any other law shall be reduced from the amount of compensation payable under this section or under section 163A.

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