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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134A | नेक व्यक्ति की संरक्षा | MV Act, Section- 134A in hindi | Protection of Good Samaritans.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 134A, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 134A का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -134A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन कोई नेक व्यक्ति उस समय किसी मोटर यान को संलिप्त करने वाले किसी दुर्घटना के पीड़ित व्यक्ति को किसी क्षति या उसकी मृत्यु के लिए किसी सिविल या दांडिक कार्रवाई के लिए दायी नहीं होगा, जहां ऐसी क्षति या मृत्यु नेक व्यक्ति की आपातकाल चिकित्सीय या गैर चिकित्सीय देखरेख या सहायता करते समय कोई कार्रवाई करने या कारवाई करने में असफल रहने संबंधी अनवधानता के परिणामस्वरूप हुई है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 134A के अनुसार

नेक व्यक्ति की संरक्षा-

(1) कोई नेक व्यक्ति उस समय किसी मोटर यान को संलिप्त करने वाले किसी दुर्घटना के पीड़ित व्यक्ति को किसी क्षति या उसकी मृत्यु के लिए किसी सिविल या दांडिक कार्रवाई के लिए दायी नहीं होगा, जहां ऐसी क्षति या मृत्यु नेक व्यक्ति की आपातकाल चिकित्सीय या गैर चिकित्सीय देखरेख या सहायता करते समय कोई कार्रवाई करने या कारवाई करने में असफल रहने संबंधी अनवधानता के परिणामस्वरूप हुई है।
(2) केन्द्रीय सरकार, नियमों द्वारा, नेक व्यक्ति से पूछताछ या उसकी परीक्षा करने, नेक व्यक्ति से संबंधित निजी जानकारी के प्रकटन और ऐसे अन्य संबंधित विषयों हेतु प्रक्रिया के लिए उपबंध कर सकेगी।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “नेक व्यक्ति” से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है, जो सद्भावपूर्वक, स्वैच्छिक रूप से और बिना किसी परितोष या अनुतोष की आशा के दुर्घटना स्थल पर किसी पीड़ित व्यक्ति को आपातकाल चिकित्सीय या गैर चिकित्सीय देखरेख या सहायता उपलब्ध कराता है या ऐसे पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल तक पहुंचाता है।

Protection of Good Samaritans-
(1) A Good Samaritan shall not be liable for any civil or criminal action for any injury to or death of the victim of an accident involving a motor vehicle, where such injury or death resulted from the Good Samaritan’s negligence in acting or failing to act while rendering emergency medical or non-medical care or assistance.
(2) The Central Government may by rules provide for the procedure for questioning or examination of the Good Samaritan, disclosure of personal information of the Good Samaritan and such other related matters.
Explanation- For the purposes of this section, “Good Samaritan” means a person, who in good faith, voluntarily and without expectation of any reward or compensation renders emergency medical or non-medical care or assistance at the scene of an accident to the victim or transports such victim to the hospital.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 134A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134 | दुर्घटना और किसी व्यक्ति को हुई क्षति की दशा में ड्राइवर का कर्तव्य | MV Act, Section- 134 in hindi | Duty of driver in case of accident and injury to a person.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 134, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 134 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -134 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन जब किसी मोटर यान के कारण हुई किसी दुर्घटना के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति को क्षति होती है या पर-व्यक्ति की किसी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तब यान का ड्राइवर या यान का भारसाधक अन्य व्यक्ति जो भी उस वाहन पर मवजूद है उसे दुर्घटना एवंम् किसी व्यक्ति को हुयी क्षति की दशा मे उसके कर्तव्य है, इस धारा मे बताये गये है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 134 के अनुसार

दुर्घटना और किसी व्यक्ति को हुई क्षति की दशा में ड्राइवर का कर्तव्य-

जब किसी मोटर यान के कारण हुई किसी दुर्घटना के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति को क्षति होती है या पर-व्यक्ति की किसी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तब यान का ड्राइवर या यान का भारसाधक अन्य व्यक्ति-
(क) जब तक कि भीड़ के क्रोध के कारण या उसके नियंत्रण के परे किसी अन्य कारण से ऐसा करना व्यवहार्य न हो, आहत व्यक्ति के लिए चिकित्सीय ध्यान प्राप्त करने के लिए सब समुचित कदम उठाएगा और, यदि आवश्यक हो तो उसे निकटतम चिकित्सा व्यवसायी या अस्पताल में ले जाया जावेगा और ऐसे प्रत्येक पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी या चिकित्सालय में सेवारत चिकित्सक क्षतिग्रस्त व्यक्ति को तुरंत चिकित्सा प्रदान करेंगे तथा उसे चिकित्सा सहायता किसी भी औपचारिक प्रक्रिया के बगैर प्रदान करेगा;
(ख) किसी पुलिस अधिकारी द्वारा अपेक्षित कोई जानकारी उसके लिए मांग किए जाने पर देगा अथवा उस दशा में, जब कोई पुलिस अधिकारी उपस्थित नहीं है, घटना की परिस्थितियों की, जिसके अंतर्गत वे परिस्थितियां, यदि कोई हैं, भी है जिनके कारण खंड (क) में यथा अपेक्षित चिकित्सीय ध्यान प्राप्त करने के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए हैं, रिपोर्ट निकटतम पुलिस थाने को यथासंभव शीघ्र तथा हर दशा में घटना के चौबीस घंटे के अंदर देगा।
(ग) उस बीमाकर्ता को, जिसने बीमा प्रमाण-पत्र जारी किया है, दुर्घटना होने के बारे में निम्नलिखित सूचना लिखित रूप में देगा अर्थात :-
(i) बीमा पालिसी संख्यांक और उसकी विधिमान्यता की अवधि;
(ii) दुर्घटना की तारीख, समय और स्थान;
(iii) दुर्घटना में आहत या मृत व्यक्तियों की विशिष्टियां; और
(iv) ड्राइवर का नाम और उसकी चालन अनुज्ञप्ति की विशिष्टियां ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “ड्राइवर” पद के अंतर्गत यान का स्वामी भी है ।

Duty of driver in case of accident and injury to a person-
When any person is injured or any property of a third party is damaged, as a result of an accident in which a motor vehicle is involved, the driver of the vehicle or other person in charge of the vehicle shall-
(a) unless it is not practicable to do so on account of mob fury or any other reason beyond his control, take all reasonable steps to secure medical attention for the injured person, by conveying him to the nearest medical practitioner or hospital, and it shall be the duty of every registered medical practitioner or the doctor on duty in the hospital immediately to attend to the injured person and render medical aid or treatment without waiting for any procedural formalities, unless the injured person or his guardian, in case he is a minor, desires otherwise;
(b) give on demand by a police officer any information required by him, or, if no police officer is present, report the circumstances of the occurrence, including the circumstances, if any, for not taking reasonable steps to secure medical attention as required under clause (a), at the nearest police station as soon as possible, and in any case within twenty-four hours of the occurrence.
(c) give the following information in writing to the insurer, who has issued the certificates of insurance, about the occurrence of the accident, namely:-
(i) insurance policy number and period of its validity;
(ii) date, time, and place of accident;
(iii) particulars of the persons injured or killed in the accident; and
(iv) name of the driver and the particulars of his driving license.
Explanation- For the purposes of this section, the expression “driver” includes the owner of the vehicle.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 134 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 133 | मोटर यान के स्वामी का जानकारी देने का कर्तव्य | MV Act, Section- 133 in hindi | Duty of owner of motor vehicle to give information.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 133 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 133, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 133 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -133 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन मोटर यान का स्वामी, जिसके ड्राइवर या कंडक्टर इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध में अभियुक्त है, राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी पुलिस अधिकारी द्वारा मांग की जाने पर ड्राइवर या कंडक्टर के नाम और पते से तथा उसके द्वारा धारित अनुज्ञप्ति से संबंधित ऐसी सब जानकारी देगा जो उसके पास है या जिसे वह समुचित तत्परता से अभिनिश्चित कर सकता है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 133 के अनुसार

मोटर यान के स्वामी का जानकारी देने का कर्तव्य-

ऐसे मोटर यान का स्वामी, जिसके ड्राइवर या कंडक्टर इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध में अभियुक्त है, राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी पुलिस अधिकारी द्वारा मांग की जाने पर ड्राइवर या कंडक्टर के नाम और पते से तथा उसके द्वारा धारित अनुज्ञप्ति से संबंधित ऐसी सब जानकारी देगा जो उसके पास है या जिसे वह समुचित तत्परता से अभिनिश्चित कर सकता है।

Duty of owner of motor vehicle to give information-
The owner of a motor vehicle, the driver or conductor of which is accused of any offense under this Act shall, on the demand of any police officer authorized on this behalf by the State Government, give all information regarding the name and address of, and the license held by, the driver or conductor which is in his possession or could by reasonable diligence be ascertained by him.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 133 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 132 | कुछ दशाओं में ड्राइवर का रोकने का कर्तव्य | MV Act, Section- 132 in hindi | Duty of driver to stop in certain cases.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 132 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 132, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 132 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -132 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन किसी मोटर यान का ड्राइवर उस यान को निम्नलिखित दशाओं में रोकेगा और उसे ऐसे युक्तियुक्त समय तक, जो आवश्यक हो और जो चौबीस घंटे से अधिक न हो, खड़ा रखेगा, किसी वाहन को ड्राइवर किन-किन दशाओ मे अपने वाहन को राजमार्ग पर रोकने का कर्तव्य है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 132 के अनुसार

कुछ दशाओं में ड्राइवर का रोकने का कर्तव्य-

(1) किसी मोटर यान का ड्राइवर उस यान को निम्नलिखित दशाओं में रोकेगा और उसे ऐसे युक्तियुक्त समय तक, जो आवश्यक हो और जो चौबीस घंटे से अधिक न हो, खड़ा रखेगा अर्थात् :
(क) वर्दी पहने हुए ऐसे पुलिस अधिकारी द्वारा, जो उपनिरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो, ऐसा करने की अपेक्षा की जाने पर, यान के किसी व्यक्ति, पशु या अन्य यान के साथ दुर्घटना हो जाने अथवा किसी संपत्ति को कोई नुकसान पहुंचाने की दशा में, या
(ख) किसी ऐसे पशु के भारसाधक व्यक्ति द्वारा ऐसे करने की अपेक्षा की जाने पर जबकि ऐसे व्यक्ति को आशंका है कि वह पशु नियंत्रण के बाहर हो गया है या यान से डर कर अनियंत्रित हो जाएगा, या
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और वह अपना नाम और पता तथा यान के स्वामी का नाम और पता ऐसी किसी दुर्घटना या नुकसान से प्रभावित किसी व्यक्ति को बताएगा जो उसकी मांग करे परन्तु यह तब जबकि ऐसा व्यक्ति भी अपना नाम और पता दे ।
(2) मोटर यान का ड्राइवर ऐसे व्यक्ति द्वारा मांग की जाने पर जिसने अपना नाम और पता दिया है और यह अभिकथन किया है कि ड्राइवर ने धारा 184 के अधीन दंडनीय अपराध किया है, उस व्यक्ति को अपना नाम और पता देगा ।
(3) इस धारा में “पशु” शब्द से कोई घोड़ा, ढोर, हाथी, ऊंट, गधा, खच्चर, भेड़ या बकरी अभिप्रेत है।

Duty of driver to stop in certain cases-
(1) The driver of a motor vehicle shall cause the vehicle to stop and remain stationary so long as may for such reasonable time as may be necessary, but not exceeding twenty-four hours –
(a) when required to do so by any police officer not below the rank of a Sub Inspector in uniform, in the event of the vehicle being involved in the occurrence of an accident to a person, animal or vehicle or of damage to property, or
(b) when required to do so by any person in charge of an animal if such person apprehends that the animal is, or being alarmed by the vehicle will become, unmanageable; or
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and he shall give his name and address and the name and address of the owner of the vehicle to any person affected by any such accident or damage who demands it provided such person also furnishes his name and address.
(2) The driver of a motor vehicle shall, on demand by a person giving his own name and address and alleging that the driver has committed an offense punishable under section 184 give his name and address to that person.
(3) In this section the expression “animal” means any horse, cattle, elephant, camel, ass, mule, sheep or goat.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 132 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 131 | रक्षक रहित रेल समतल क्रासिंग पर कतिपय पूर्वावधानियां बरतने का ड्राइवर का कर्तव्य | MV Act, Section- 131 in hindi | Duty of the driver to take certain precautions at unguarded railway level crossings.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 131 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 131, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 131 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -131 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन मोटर यान का प्रत्येक ड्राइवर किसी रक्षक रहित रेल समतल क्रासिंग पर पहुंचने पर यान को रोक देगा और यान का ड्राइवर उस यान के कंडक्टर या क्लीनर या परिचर या किसी अन्य व्यक्ति को समतल क्रासिंग तक चलवाएगा और यह सुनिश्चित कराएगा कि किसी, भी दिशा से कोई गाड़ी या ट्राली आ तो नहीं रही है, यह किसी वाहन चालक या कंडक्टर का कर्तव्य होता है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 131 के अनुसार

रक्षक रहित रेल समतल क्रासिंग पर कतिपय पूर्वावधानियां बरतने का ड्राइवर का कर्तव्य-

मोटर यान का प्रत्येक ड्राइवर किसी रक्षक रहित रेल समतल क्रासिंग पर पहुंचने पर यान को रोक देगा और यान का ड्राइवर उस यान के कंडक्टर या क्लीनर या परिचर या किसी अन्य व्यक्ति को समतल क्रासिंग तक चलवाएगा और यह सुनिश्चित कराएगा कि किसी, भी दिशा से कोई गाड़ी या ट्राली आ तो नहीं रही है और तब मोटर यान को ऐसे समतल क्रासिंग से पार कराएगा, तथा जहां यान में कंडक्टर या क्लीनर या परिचर या कोई अन्य व्यक्ति उपलब्ध नहीं हो वहां यान का ड्राइवर रेल लाइन को पार करने से पूर्व यह सुनिश्चित करने के लिए यान से स्वयं उतरेगा कि किसी भी दिशा से कोई गाड़ी या ट्राली आ तो नहीं रही है।

Duty of the driver to take certain precautions at unguarded railway level crossings-
Every driver of a motor vehicle at the approach of any unguarded railway level crossing shall cause the vehicle to stop and the driver of the vehicle shall cause the conductor or cleaner or attendant or any other person in the vehicle to walk up to the level crossing, and ensure that no train or trolley is approaching from either side and then pilot the motor vehicle across such level crossing, and where no conductor or cleaner or attendant or any other person is available in the vehicle, the driver of the vehicle shall get down from the vehicle himself to ensure that no train or trolley is approaching from either side before the railway track is crossed.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 131 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 130 | अनुज्ञप्ति और रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र पेश करने का कर्त्तव्य | MV Act, Section- 130 in hindi | Duty to produce licence and certificate of registration.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 130 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 130, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 130 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -130 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन किसी सार्वजनिक स्थान में मोटर यान का ड्राइवर वर्दी पहने हुए किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा मांग की जाने पर अपनी अनुज्ञप्ति जांच के लिए पेश करना उस वाहन के वाहन स्वामी का कर्तव्य होता है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 130 के अनुसार

अनुज्ञप्ति और रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र पेश करने का कर्त्तव्य-

(1) किसी सार्वजनिक स्थान में मोटर यान का ड्राइवर वर्दी पहने हुए किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा मांग की जाने पर अपनी अनुज्ञप्ति जांच के लिए पेश करेगा:
परन्तु ड्राइवर, जहां उसकी अनुज्ञप्ति इस अधिनियम या किसी अन्य अधिनियम के अधीन किसी अधिकारी या प्राधिकारी को प्रस्तुत की गई है या उसके द्वारा अभिगृहीत की गई है, अनुज्ञप्ति के स्थान पर उसके बारे में ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा जारी की गई रसीद या अन्य अभिस्वीकृति पेश कर सकेगा और तत्पश्चात् ऐसी अवधि के भीतर अनुज्ञप्ति, ऐसी रीति से जो केन्द्रीय सरकार विहित करे, मांग करने वाले पुलिस अधिकारी को पेश कर सकेगा।
(2) किसी सार्वजनिक स्थान पर मोटर यान का कंडक्टर, यदि कोई हो, इस निमित्त प्राधिकृत मोटर यान विभाग के अधिकारी द्वारा मांग किए जाने पर अनुज्ञप्ति जांच के लिए पेश करेगा।
(3) (धारा 60 के अधीन रजिस्ट्रीकृत यान से भिन्न) मोटर यान का स्वामी अथवा उसकी अनुपस्थिति में यान का ड्राइवर या अन्य भारसाधक व्यक्ति, रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी या मोटर यान विभाग के इस निमित्त सम्यक् रूप से प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी द्वारा मांग किए जाने पर, यान का बीमा प्रमाण-पत्र पेश करेगा और जहां यान कोई परिवहन यान है वहां, धारा 56 में निर्दिष्ट ठीक हालत में होने का प्रमाण-पत्र और परमिट भी पेश करेगा; और यदि कोई या सभी प्रमाण-पत्र अथवा परमिट उसके कब्जे में नहीं है तो वह मांग किए जाने की तारीख से पंद्रह दिन के भीतर उसकी सम्यक् रूप से अनुप्रमाणित फोटो प्रति, स्वयं प्रस्तुत करेगा या उस अधिकारी को जिसने उसकी मांग की है रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा भेजेगा।
स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए “बीमा प्रमाण-पत्र” से धारा 147 की उपधारा (3) के अधीन जारी किया गया प्रमाण पत्र अभिप्रेत है।
(4) यदि, यथास्थिति, उपधारा (2) में निर्दिष्ट अनुज्ञप्ति या उपधारा (3) में निर्दिष्ट प्रमाणपत्र या परमिट उस समय उस व्यक्ति के पास नहीं है जिससे उसकी मांग की गई है तो उस दशा में इस धारा का पर्याप्त अनुपालन हो जाएगा जब ऐसा व्यक्ति ऐसी अनुज्ञप्ति या प्रमाण-पत्र या परमिट को ऐसी अवधि के भीतर ऐसी रीति से जो केन्द्रीय सरकार विहित करे, पुलिस अधिकारी या मांग करने वाले प्राधिकारी को पेश करता है:
परन्तु इस उपधारा के उपबंध, किसी ऐसे व्यक्ति को, जिससे यह अपेक्षा की गई है कि वह परिवहन यान का रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र या उसके ठीक हालत में होने का प्रमाण-पत्र पेश करे, उस विस्तार तक और ऐसे उपांतरण के सहित ही लागू होंगे जो विहित किए जाएं।

Duty to produce licence and certificate of registration-
(1) The driver of a motor vehicle in any public place shall, on demand by any police officer in uniform, produce his license for examination:
Provided that the driver may, if his license has been submitted to, or has been seized by, any officer or authority under this or any other Act, produce in lieu of the license a receipt or other acknowledgment issued by such officer or authority in respect thereof and thereafter produce the license within such period, in such manner as the Central Government may prescribe to the police officer making the demand.
(2) The conductor, if any, of a motor vehicle in any public place shall on demand by any officer of the Motor Vehicles Department authorized on this behalf, produce the license for examination.
(3) The owner of a motor vehicle (other than a vehicle registered under section 60) or in his absence the driver or other person in charge of the vehicle, shall, on demand by a registering authority or any other officer of the Motor Vehicles Department duly authorized in this behalf, produce the certificate of insurance of the vehicle and, where the vehicle is a transport vehicle, also the certificate of fitness referred to in section 56 and the permit; and if any or all of the certificates or the permit are not in his possession, he shall, within fifteen days from the date of demand, submit photocopies of the same, duly attested in person or send the same by registered post to the officer who demanded it.
Explanation- For the purposes of this subsection, “certificate of insurance means the certificate issued under sub-section (3) of section 147.
(4) If the license referred to in subsection (2) or the certificates or permit referred to in subsection (3), as the case may be, are not at the time in the possession of the person to whom the demand is made, it shall be sufficient compliance with this section if such person produces the license or certificates or permit within such period in such manner as the Central Government may prescribe, to the police officer or authority making the demand:
Provided that except to such extent and with such modifications as may be prescribed, the provisions of this subsection shall not apply to any person required to produce the certificate of registration or the certificate of fitness of a transport vehicle.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 130 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।