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सीआरपीसी की धारा 137 | जहां लोक अधिकार के अस्तित्व से इंकार किया जाता है वहां प्रक्रिया | CrPC Section- 137 in hindi| Procedure where existence of public right is denied.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 137 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 137 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 137 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 137 के अन्तर्गत जब मजिस्ट्रेट द्वारा ऐसा आदेश पारित किया गया हो, जिससे नागरिक किसी मार्ग, नदी, जलसरणी या स्थान के उपयोग बाधित हो रहा हो, मजिस्ट्रेट द्वारा उस व्यक्ति जिसके विरुद्ध वह आदेश किया गया है अपने समक्ष हाजिर होने पर, उससे प्रश्न करेगा कि क्या वह उस मार्ग, नदी, जलसरणी या स्थान के बारे में किसी लोक अधिकार के अस्तित्व से इंकार करता है तो मजिस्ट्रेट धारा 138 के अधीन कार्यवाही करने के पहले उस बात की जांच करेगा।यदि ऐसी जांच में मजिस्ट्रेट इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि ऐसे इंकार के समर्थन में कोई विश्वसनीय साक्ष्य है तो वह कार्यवाही को तब तक के लिए रोक देगा।

सीआरपीसी की धारा 137 के अनुसार

जहां लोक अधिकार के अस्तित्व से इंकार किया जाता है वहां प्रक्रिया-

(1) जहां किसी मार्ग, नदी, जलसरणी या स्थान के उपयोग में जनता को होने वाली बाधा, न्यूसेन्स या खतरे का निवारण करने के प्रयोजन के लिए कोई आदेश धारा 133 के अधीन किया जाता है वहां मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति के जिसके विरुद्ध वह आदेश किया गया है अपने समक्ष हाजिर होने पर, उससे प्रश्न करेगा कि क्या वह उस मार्ग, नदी, जलसरणी या स्थान के बारे में किसी लोक अधिकार के अस्तित्व से इंकार करता है और यदि वह ऐसा करता है तो मजिस्ट्रेट धारा 138 के अधीन कार्यवाही करने के पहले उस बात की जांच करेगा।
(2) यदि ऐसी जांच में मजिस्ट्रेट इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि ऐसे इंकार के समर्थन में कोई विश्वसनीय साक्ष्य है तो वह कार्यवाही को तब तक के लिए रोक देगा जब तक ऐसे अधिकार के अस्तित्व का मामला सक्षम न्यायालय द्वारा विनिश्चित नहीं कर दिया जाता है; और यदि वह इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है तो वह धारा 138 के अनुसार कार्यवाही करेगा।
(3) मजिस्ट्रेट द्वारा उपधारा (1) के अधीन प्रश्न किए जाने पर, जो व्यक्ति उसमें निर्दिष्ट प्रकार के लोक अधिकार के अस्तित्व से इंकार नहीं करता है या ऐसा इंकार करने पर उसके समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य देने में असफल रहता है उसे पश्चात्वर्ती कार्यवाहियों में ऐसा कोई इन्कार नहीं करने दिया जाएगा।

Procedure where existence of public right is denied-
(1) Where an order is made under Section 133 for the purpose of preventing obstruction, nuisance or danger to the public in the use of any way, river, channel or place, the Magistrate shall, on the appearance before him of the person against whom the order was made, question him as to whether he denies the existence of any public right in respect of the way, river, channel or place, and if he does so, the Magistrate shall, before proceeding under Section 138, inquire into the matter.
(2) If in such inquiry the Magistrate finds that there is any reliable evidence in support of such denial, he shall stay the proceedings until the matter of the existence of such right has been decided by a competent Court; and, if he finds that there is no such evidence, he shall proceed as laid down in Section 138.
(3) A person who has, on being questioned by the Magistrate under sub-section (1), failed to deny the existence of a public right of the nature therein referred to, or who, having made such denial, has failed to adduce reliable evidence in support thereof, shall not in the subsequent proceedings be permitted to make any such denial.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 137 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 136 | उसके ऐसा करने में असफल रहने का परिणाम | CrPC Section- 136 in hindi| Consequences of his failing to do so.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 136 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 136 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 136 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 136 के अन्तर्गत यदि ऐसा व्यक्ति ऐसे कार्य को नहीं करता है या हाजिर होकर कारण दर्शित नहीं करता है, तो वह भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 188 में उस निमित्त विहित शास्ति का दायी होगा और आदेश अंतिम कर दिया जाएगा।

सीआरपीसी की धारा 136 के अनुसार

उसके ऐसा करने में असफल रहने का परिणाम-

यदि ऐसा व्यक्ति ऐसे कार्य को नहीं करता है या हाजिर होकर कारण दर्शित नहीं करता है, तो वह भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 188 में उस निमित्त विहित शास्ति का दायी होगा और आदेश अंतिम कर दिया जाएगा।

Consequences of his failing to do so-
If such person does not perform such act or appear and show cause, he shall be liable to the penalty prescribed in that behalf in Section 188 of the Indian Penal Code (45 of 1860), and the order shall be made absolute.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 136 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

RTI Application Format in Hindi (आरटीआई प्रार्थना पत्र प्रारूप हिन्दी मे) कैसे मांगे और क्या क्या सावधानियां रखनी चाहिए।

RTI Act 2005 (आरटीआई एक्ट 2005)

RTI Act 2005, जो दिनांक 13 अक्टूबर 2005 को लागू हुआ था। यह हमें वह तंत्र प्रदान करता है, जिसे हम सूचना का अधिकार कहते है यह अधिनियम हमें कोई नया अधिकार नहीं देता, यह केवल उस प्रक्रिया का उल्लेख करता है कि हम कैसे सूचना मांगें, कहाँ से मांगे, कितना शुल्क दें आदि।

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अन्तर्गत यदि कोई व्यक्ति, कम्पनी अथवा कोई सांस्था किसी अन्य सांस्था या किसी सरकारी कार्यालय से कोई प्रश्न अथवा जानकारी लेना चाहते है अथवा किसी मामले में जानकारी लेने के उद्देश्य से प्रश्नों के उत्तर जानना चाहते है, तो हम आरटीआई RTI के माध्यम से अपने प्रश्नों के उत्तर मांग सकते है।

इसके अलावा जिस भी सरकारी विभाग या जिस भी कार्यालय से आरटीआई के माध्यम से प्रश्नों के उत्तर मांगते है तो उन सभी सरकारी विभागों में प्रश्नो के उत्तर देने के लिए एक अधिकारी नियुक्त होता है, जिसे हम जन सूचना अधिकारी कहते है। जिसका कार्य केवल उन पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देना होता है। उन सभी प्रश्नों के उत्तर जानना हमारा अधिकार है, जिसे हम सूचना का अधिकार कहते है।

आरटीआई RTI कैसे मांगे?

वैसे तो आरटीआई RTI जब हम किसी विभाग से मांगते हैं, तो हमे प्रार्थना पत्र पर अपना पूर्ण नाम, पता स्पष्ट रूप से लिखना होता है, क्योंकि वह उत्तर भी आपके दिए गए पते पर ही भेजेंगे। इसके अलावा उन प्रश्नों को भी बिंदुवार ठीक तरह से स्पष्ट रूप से लिखना आवश्यक है, क्योंकि जन सूचना अधिकारी ही प्रश्नों को समझ ही नहीं सका, कि व्यक्ति क्या पूछना चाह रहा है तो प्रश्नों के उत्तर कैसे देंगा, इसलिए स्पष्ट और साधारण भाषा में अपने प्रश्नों को बिंदुवार लिखे।

आरटीआई मांगने के लिये आपको 10रू0 का शुल्क के रूप से बैंक ड्राफ्ट अथवा 10 रू0 का पोस्टल आर्डर देना होगा। इसके बाद ही पूछे गये प्रश्नों के उत्तर बताये जायेगें। 

आरटीआई मांगने के लिए सरकार द्वारा दो माध्यम बनाए गए हैं- पहला ऑफलाइन और दूसरा ऑनलाइन माध्यम।
दोनो ही माध्यम से हम किसी भी विभाग या कार्यालय से प्रश्नों के उत्तर जान सकेंगे, दोनो माध्यम में से किसी एक माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

आरटीआई RTI ऑफलाइन कैसे तैयार करे।

ऑफलाइन माध्यम से RTI मांगने के लिए किसी साधारण व्यक्ति को वकील के पास जाना होता है। इसके लिए आपको लगभग् 400 से 500 रुपए देने पड़ते है, साथ ही आरटीआई फीस डीडी अथवा पोस्टल आर्डर फीस के रूप में लगाना पड़ता है। इसके बाद ही आपकी आरटीआई प्रार्थना पत्र को तैयार किया जाता है। ऑफलाइन आरटीआई में मुख्य प्रश्नों और जरूरी बातों का विशेष ध्यान रखना होगा, क्योंकि यदि आप इन बातों को ध्यान मे नही रखेंगे, तो भी आपको सही उत्तर नहीं मिलेगा।

इसके अलावा यदि जनसूचना अधिकारी व्दारा दिये गये उत्तर या जानकारी से संतुष्ट नही है तो आप अपील भी कर सकेंगे। जिसका उत्तर अपीलीय अधिकारी व्दारा 120 दिन के भीतर देंगे।

आरटीआई RTI मांगते समय क्या क्या सावधानियां रखनी चाहिए।

1. ऑफलाइन आरटीआई प्रार्थना पत्र तैयार करते समय जिस भी विभाग से आप जानकारी लेना चाहते हैं उसका पूरा नाम, पता मालूम होना आवश्यक है, अन्यथा आपको वह आरटीआई प्रार्थना पत्र वापस आ जायेगा।
2. प्रार्थना पत्र तैयार करते समय यह भी ध्यान रखना है, कि जो भी हम जिस विभाग से जानकारी लेना चाहते हैं पूछे जाने वाले प्रश्न पूर्ण रूप से स्पष्ट है कि नही यदि जन सूचना अधिकारी ही आपके प्रश्नों को नही समझ पाया, तो प्रश्नों के उत्तर नही दे पाएगा।
3. यदि आप जिस भी सरकारी विभाग से जानकारी लेना चाहते हैं, उसका पूरा नाम और पता मालूम नहीं है, तो आप इंटरनेट की मदद् से संबंधित अधिकारी को खोज करके ही सही अधिकारी/विभाग को लिखे।
4. ऑफलाइन आरटीआई प्रार्थना पत्र पर यह जरूर अंकित कर दे, कि यदि यह जानकारी या प्रश्न आपके विभाग से संबंधित नही है, तो संबंधित विभाग को प्रेषित करने की कृपा करें। ऑफलाइन आरटीआई में यह अंकित करना न भूलें, नही तो गतल पता बताकर प्रार्थना पत्र वापस लौट सकता है।

आरटीआई RTI ऑनलाइन कैसे तैयार करे।

आरटीआई RTI Online लेने के लिये ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है। RTI ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किसी भी सांस्था से असानी से कोई भी जानकरी ले सकते है।
RTI ऑनलाइन लेने के लिये सबसे पहले मोबाइल नं एवंम् ई-मेल आई के माध्यम से रजिस्टर्ड करना पडेंगा। इसके बाद ही RTI login करके, जिस विभाग से जानकारी प्राप्त करनी है वह विभाग सेलेक्ट करने के पश्चात् ही प्रश्न अथवा जानकारी RTI Online Application पूर्ण भरने के पश्चात् ही शुल्क ऑनलाइन देना पडेंगा, इसके बाद ही सब्मिट कर पायेगे और आगे का स्टेट्स देख पायेगे कि मेरी आरटीआई मे क्या हुआ है ।

इसके अलावा यदि पूछे गये प्रश्नो के उत्तर से संतुष्ट नही होते है तो अपील भी इसी ऑनलाइन पोर्टल से कर सकेंगे। जिसके लिये आपको कोई भी फीस नही देनी होगी। जनसूचना अधिकारी यदि अपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराता है, तो अपील कर सकेंगे। जिसे हम RTI First Appeal कहते है जिसे अपीलीय अधिकारी आपको 120 दिन के भीतर उत्तर देगा।

सूचना का अधिकार आवेदन पत्र हिन्दी मे (RTI Application Format in Hindi)

सूचना का अधिकार आवेदन पत्र हिन्दी मे 

सेवा में,

श्रीमान जनसूचना अधिकारी 

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पिन कोड——————– 

विषयRTI Act 2005 के अन्तर्गत सूचना प्राप्ति के लिये आवेदन

महोदय,

             सूचना का अधिकार  कानून- 2005 के अंतर्गत नीचे लिखे प्रश्नों का लिखित उतर देने की कृपा करें-

  1. प्रश्न- ………………………………………………………………..।
  2. प्रश्न- ………………………………………………………………..।
  3. प्रश्न- ………………………………………………………………..।
  4. प्रश्न- ………………………………………………………………..।
  5. प्रश्न- ………………………………………………………………..।
  6. प्रश्न- ………………………………………………………………..।

यदि मेरे व्दारा पूछे गये प्रश्न आपके विभाग से संबंधित नही है, तो संबंधित विभाग को प्रेषित करने की कृपा करें।

मेरे द्वारा मांगी गई जानकारी के लिए शुल्क के रूप में पोस्टल ऑर्डर/ बॅंक ड्राफ्ट का नंबर……….. जारी करने की तारीख………राशि………….संलग्न है।

OR

मैं गरीबी रेखा के अंतर्गत आता हूँ। इसलिए मुझे सूचना का अधिकार लेने के लिए कोई शुल्क नही देना है। इसके लिए अपने गरीबी रेखा का सत्यापित दस्तावेज़ साथ संलग्न कर रहा हूँ। (Note-दोनों में से जो लागू नहीं उसको न लिखें)

प्रार्थी:

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( हस्ताक्षर करें )

फिर अपना पूरा नाम और पता लिखें

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Pin Code————————-
Mobile No ——————–

सीआरपीसी की धारा 135 | जिस व्यक्ति को आदेश सम्बोधित है वह उसका पालन करेगा या कारण दर्शित करेगा | CrPC Section- 135 in hindi| Person to whom order is addressed to obey or show cause.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 135 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 135 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 135 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 135 के अन्तर्गत जब किसी व्यक्ति जिसके विरुद्ध ऐसा आदेश दिया गया है, उस आदेश के द्वारा निर्दिष्ट कार्य उस समय के अन्दर और उस रीति से करेगा जो आदेश में विनिर्दिष्ट है, अथवा उस आदेश के अनुसार हाजिर होगा और उसके विरुद्ध कारण दर्शित करेगा। यह धारा 135 जिस व्यक्ति को आदेश सम्बोधित है वह उसका पालन करेगा या कारण दर्शित कराती अथवा परिभाषित करती है।

सीआरपीसी की धारा 135 के अनुसार

जिस व्यक्ति को आदेश सम्बोधित है वह उसका पालन करेगा या कारण दर्शित करेगा–

वह व्यक्ति जिसके विरुद्ध ऐसा आदेश दिया गया है-
(क) उस आदेश द्वारा निर्दिष्ट कार्य उस समय के अन्दर और उस रीति से करेगा जो आदेश में विनिर्दिष्ट है, अथवा
(ख) उस आदेश के अनुसार हाजिर होगा और उसके विरुद्ध कारण दर्शित करेगा।

Person to whom order is addressed to obey or show cause-
The person against whom such order is made shall-
(a) perform, within the time and in the manner specified in the order, the act directed thereby; or
(b) appear in accordance with such order and show cause against the same.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 135 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 134 | आदेश की तामील या अधिसूचना | CrPC Section- 134 in hindi| Service or notification of order.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 134 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 134 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 134 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 134 के अन्तर्गत आदेश की तामील उस व्यक्ति पर, जिसके विरुद्ध वह किया गया है, यदि साध्य हो तो उस रीति से की जाएगी जो समन की तामील के लिए इसमें उपबन्धित है साथ ही अधिसूचना ऐसी रीति से प्रकाशित उद्घोषणा द्वारा की जाएगी जैसी राज्य सरकार नियम द्वारा निर्दिष्ट करे और उसकी एक प्रति ऐसे स्थान या स्थानों पर चिपका दी जाएगी। यह धारा 134 आदेश की तामीली एवंम् अधिसूचना की क्रिया को बतलाता है।

सीआरपीसी की धारा 134 के अनुसार

आदेश की तामील या अधिसूचना-

(1) आदेश की तामील उस व्यक्ति पर, जिसके विरुद्ध वह किया गया है, यदि साध्य हो तो उस रीति से की जाएगी जो समन की तामील के लिए इसमें उपबन्धित है।
(2) यदि ऐसे आदेश की तामील इस प्रकार नहीं की जा सकती है तो उसकी अधिसूचना ऐसी रीति से प्रकाशित उद्घोषणा द्वारा की जाएगी जैसी राज्य सरकार नियम द्वारा निर्दिष्ट करे और उसकी एक प्रति ऐसे स्थान या स्थानों पर चिपका दी जाएगी जो उस व्यक्ति को इत्तिला पहुंचाने के लिए सबसे अधिक उपयुक्त है।

Service or notification of order-
(1) The order shall, if practicable, be served on the person against whom it is made, in the manner herein provided for service of a summons.
(2) If such order cannot be so served, it shall be notified by proclamation, published in such manner as the State Government may, by rules, direct, and a copy thereof shall be stuck up at such place or places as may be fittest for conveying the information to such person.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 134 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 131 | जमाव को तितर-बितर करने की सशस्त्र बल के कुछ अधिकारियों की शक्ति | CrPC Section- 131 in hindi| Power of certain armed force officers to disperse assembly.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 131 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 131 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 131 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 131 के अन्तर्गत जब कोई ऐसा जमाव लोक सुरक्षा को स्पष्टतया संकटापन्न कर देता है और किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट से संपर्क नहीं किया जा सकता है तब सशस्त्र बल का कोई आयुक्त या राजपत्रित अधिकारी ऐसे जमाव को अपने समादेशाधीन सशस्त्र बल की मदद से तितर-बितर कर सकता है और ऐसे किन्हीं व्यक्तियों को, जो उसमें सम्मिलित हों, ऐसे जमाव को तितर-बितर करने के लिए या इसलिए कि उन्हें विधि के अनुसार दण्ड दिया जा सके, गिरफ्तार और परिरुद्ध कर सकता है तो यह धारा 131 के अंतर्गत कार्यपालक मजिस्ट्रेट को यह शक्ति होती है कि जमाव को तितर-बितर करने की सशस्त्र बल के कुछ अधिकारियों की शक्ति बतलाता है।

जब कोई कार्यपालक मजिस्ट्रेट किसी जमाव मे जिससे लोक सुरक्षा को स्पष्टतया संकटापन्न कर देता है तब सशस्त्र बल का कोई आयुक्त या राजपत्रित अधिकारी ऐसे जमाव को अपने समादेशाधीन सशस्त्र बल की मदद से तितर-बितर कर सकता है, वह जमाव को तितर-बितर करने की सशस्त्र बल के कुछ अधिकारियों की शक्ति के लिये किया गया है । CrPC की धारा 131 कार्यपालक मजिस्ट्रेट को सशस्त्र बल के कुछ अधिकारियों की शक्ति मजिस्ट्रेट के अनुदेशों का पालन करेगा।

सीआरपीसी की धारा 131 के अनुसार

जमाव को तितर-बितर करने की सशस्त्र बल के कुछ अधिकारियों की शक्ति-

जब कोई ऐसा जमाव लोक सुरक्षा को स्पष्टतया संकटापन्न कर देता है और किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट से संपर्क नहीं किया जा सकता है तब सशस्त्र बल का कोई आयुक्त या राजपत्रित अधिकारी ऐसे जमाव को अपने समादेशाधीन सशस्त्र बल की मदद से तितर-बितर कर सकता है और ऐसे किन्हीं व्यक्तियों को, जो उसमें सम्मिलित हों, ऐसे जमाव को तितर-बितर करने के लिए या इसलिए कि उन्हें विधि के अनुसार दण्ड दिया जा सके, गिरफ्तार और परिरुद्ध कर सकता है, किन्तु यदि उस समय, जब वह इस धारा के अधीन कार्य कर रहा है, कार्यपालक मजिस्ट्रेट से सम्पर्क करना उसके लिए साध्य हो जाता है तो वह ऐसा करेगा और तदनन्तर इस बारे में कि वह ऐसी कार्यवाही चालू रखे या न रखे, मजिस्ट्रेट के अनुदेशों का पालन करेगा।

Power of certain armed force officers to disperse assembly-
When the public security is manifestly endangered by any such assembly and no Executive Magistrate can be communicated with, any commissioned or gazetted officer of the armed forces may disperse such assembly with the help of the armed forces under his command and may arrest and confine any persons forming part of it, in order to disperse such assembly or that they may be punished according to law; but if, while he is acting under this section, it becomes practicable for him to communicate with an Executive Magistrate, he shall do so, and shall thenceforward obey the instructions of the Magistrate, as to whether he shall or shall not continue such action.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 131 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।