Home Blog Page 37

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 209 | Indian Contract Act Section 209

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-209) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 209 के अनुसार जबकि मालिक की मृत्यु हो जाने या उसके विकृतचित्त हो जाने से अभिकरण का पर्यवसान हो जाए तब अभिकर्ता अपने को न्यस्त हितों के संरक्षण और परिरक्षण के लिए अपने अभूतपूर्व मालिक के प्रतिनिधियों की ओर से सभी युक्तियुक्त कदम उठाने के लिए आबद्ध है, जिसे IC Act Section-209 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 209 (Indian Contract Act Section-209) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 209 IC Act Section-209 के अनुसार जबकि मालिक की मृत्यु हो जाने या उसके विकृतचित्त हो जाने से अभिकरण का पर्यवसान हो जाए तब अभिकर्ता अपने को न्यस्त हितों के संरक्षण और परिरक्षण के लिए अपने अभूतपूर्व मालिक के प्रतिनिधियों की ओर से सभी युक्तियुक्त कदम उठाने के लिए आबद्ध है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 209 (IC Act Section-209 in Hindi)

मालिक की मृत्यु या उन्मत्तता के द्वारा अभिकरण के पर्यवसान पर अभिकर्ता का कर्तव्य-

जबकि मालिक की मृत्यु हो जाने या उसके विकृतचित्त हो जाने से अभिकरण का पर्यवसान हो जाए तब अभिकर्ता अपने को न्यस्त हितों के संरक्षण और परिरक्षण के लिए अपने अभूतपूर्व मालिक के प्रतिनिधियों की ओर से सभी युक्तियुक्त कदम उठाने के लिए आबद्ध है।

Indian Contract Act Section-209 (IC Act Section-209 in English)

Agent’s duty on termination of agency by principal’s death or insanity-

When an agency is terminated by the principal dying or becoming of unsound mind, the agent is bound to take, on behalf of the representatives of his late principal, all reasonable steps for the protection and preservation of the interests entrusted to him.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 209 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 208 | Indian Contract Act Section 208

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-208) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 208 के अनुसार जहां कि यह अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा हो कि अभिकरण को किसी कालावधि के लिए चालू रहना है वहां पर्याप्त कारण के बिना अभिकरण के किसी पूर्वतन प्रतिसंहरण या त्यजन का प्रतिकर, यथास्थिति, अभिकर्ता को मालिक या मलिक को अभिकर्ता देगा, जिसे IC Act Section-208 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 208 (Indian Contract Act Section-208) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 208 IC Act Section-208 के अनुसार जहां कि यह अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा हो कि अभिकरण को किसी कालावधि के लिए चालू रहना है वहां पर्याप्त कारण के बिना अभिकरण के किसी पूर्वतन प्रतिसंहरण या त्यजन का प्रतिकर, यथास्थिति, अभिकर्ता को मालिक या मलिक को अभिकर्ता देगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 208 (IC Act Section-208 in Hindi)

अभिकर्ता के प्राधिकार का पर्यवसान कब अभिकर्ता के सम्बन्ध में और कब पर-व्यक्तियों के सम्बन्ध में प्रभावी होता है-

अभिकर्ता के प्राधिकार का पर्यवसान, जहाँ तक अभिकर्ता से सम्बन्ध है, उसे उसका ज्ञान होने से पूर्व, अथवा जहां तक पर-व्यक्तियों से सम्बन्ध है उन्हें उसका ज्ञान होने से पूर्व, प्रभावी नहीं होता।
दृष्टांत
(क) ख को क अपनी ओर से माल बेचने का निदेश देता है और माल की जो कीमत मिले उस पर ख को पांच प्रतिशत कमीशन देने का करार करता है । तत्पश्चात् क पत्र द्वारा ख के प्राधिकार का प्रतिसंहरण करता है । ख उस पत्र के भेजे जाने के पश्चात् किन्तु उसकी प्राप्ति से पूर्व माल को 100 रुपए में बेच देता है। क इस विक्रय से आबद्ध है और ख पांच रुपए कमीशन का हकदार है।
(ख) क जो मद्रास में है, पत्र द्वारा अपनी ओर से ख को मुम्बई में एक भाण्डागार में रखी हुई कुछ रुई बेचने का निदेश देता है और तत्पश्चात् पत्र द्वारा उसके विक्रय प्राधिकार का प्रतिसंहरण करता है और ख को उस रुई को मद्रास भेजने का निदेश देता है। ख, दूसरा पत्र पाने के पश्चात् ग के साथ, जिसे पहले पत्र का तो ज्ञान है किन्तु दूसरे नहीं, उस रुई को उसे बेचने की संविदा करता है । ख को ग उसकी कीमत संदत्त कर देता है और ख उसे लेकर फरार हो जाता है। क के विरुद्ध ग का संदाय प्रभावी है।
(ग) क अपने अभिकर्ता ख को अनुक धनराशिग को देने का निदेश देता है। क मर जाता है और घ उसकी बिल का प्रोबेट लेता है। क की मृत्यु के पश्चात् किन्तु मृत्यु की खबर सुनने से पूर्व ग को ख रुपए संदत्त कर देता है। निष्पादक घ के विरुद्ध यह संदाय प्रभावी है।

Indian Contract Act Section-208 (IC Act Section-208 in English)

When termination of agent’s authority takes effect as to agent, and as to third persons-

The termination of the authority of an agent does not, so far as regards the agent, take effect before it becomes known to him, or, so far as regards third persons, before it becomes known to them.
Illustrations
(a) A directs B to sell goods for him, and agrees to give B five per cent. commission on the price fetched by the goods. A afterwards, by letter, revoke B‟s authority. B, after the letter is sent, but before he receives it, sells the goods for 100 rupees. The sale is binding on A, and B is entitled to five rupees as his commission.
(b) A, at Madras, by letter, directs B to sell for him some cotton lying in a warehouse in Bombay, and afterwards, by letter, revokes his authority to sell, and directs B to send the cotton to Madras. B, after receiving the second letter, enters into a contract with C, who knows of the first letter, but not of the second, for the sale to him of the cotton. C pays B the money, with which B absconds. C‟s payment is good as against A.
(c) A directs B, his agent, to pay certain money to C. A dies, and D takes out probate to his will. B, after A‟s death, but before hearing of it, pays the money to C. The payment is good as against D, the executor.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 208 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 207 | Indian Contract Act Section 207

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-207) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 207 के अनुसार जहां कि यह अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा हो कि अभिकरण को किसी कालावधि के लिए चालू रहना है वहां पर्याप्त कारण के बिना अभिकरण के किसी पूर्वतन प्रतिसंहरण या त्यजन का प्रतिकर, यथास्थिति, अभिकर्ता को मालिक या मलिक को अभिकर्ता देगा, जिसे IC Act Section-207 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 207 (Indian Contract Act Section-207) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 207 IC Act Section-207 के अनुसार जहां कि यह अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा हो कि अभिकरण को किसी कालावधि के लिए चालू रहना है वहां पर्याप्त कारण के बिना अभिकरण के किसी पूर्वतन प्रतिसंहरण या त्यजन का प्रतिकर, यथास्थिति, अभिकर्ता को मालिक या मलिक को अभिकर्ता देगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 207 (IC Act Section-207 in Hindi)

प्रतिसंहरण और त्यजन अभिव्यक्त या विवक्षित हो सकेगा–

प्रतिसंहरण और त्यजन अभिव्यक्त हो सकेगा अथवा मालिक या अभिकर्ता के अपने-अपने आचरण द्वारा विविक्षत हो सकेगा।
दृष्टांत
क अपना गृह भाड़े पर देने के लिए ख को सशक्त करता है। तत्पश्चात् क स्वयं उसे भाड़े पर दे देता है। यह ख के प्राधिकार का विवक्षित प्रतिसंहरण है।

Indian Contract Act Section-207 (IC Act Section-207 in English)

Revocation and renunciation may be expressed or implied-

Revocation and renunciation may be expressed or may be implied in the conduct of the principal or agent respectively.
Illustration
A empowers B to let A‟s house. Afterwards A lets it himself. This is an implied revocation of B‟s authority.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 207 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 206 | Indian Contract Act Section 206

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-206) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 206 के अनुसार जहां कि यह अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा हो कि अभिकरण को किसी कालावधि के लिए चालू रहना है वहां पर्याप्त कारण के बिना अभिकरण के किसी पूर्वतन प्रतिसंहरण या त्यजन का प्रतिकर, यथास्थिति, अभिकर्ता को मालिक या मलिक को अभिकर्ता देगा, जिसे IC Act Section-206 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 206 (Indian Contract Act Section-206) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 206 IC Act Section-206 के अनुसार जहां कि यह अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा हो कि अभिकरण को किसी कालावधि के लिए चालू रहना है वहां पर्याप्त कारण के बिना अभिकरण के किसी पूर्वतन प्रतिसंहरण या त्यजन का प्रतिकर, यथास्थिति, अभिकर्ता को मालिक या मलिक को अभिकर्ता देगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 206 (IC Act Section-206 in Hindi)

प्रतिसंहरण या त्यजन की सूचना-

ऐसे प्रतिसंहरण या त्यजन की युक्तियुक्त सूचना देनी होगी, अन्यथा, यथास्थिति, मालिक को या अभिकर्ता को तद्द्वारा होने वाले नुकसान की प्रतिपूर्ति एक को दूसरा करेगा।

Indian Contract Act Section-206 (IC Act Section-206 in English)

Notice of revocation or renunciation-

Reasonable notice must be given of such revocation or renunciation, otherwise the damage thereby resulting to the principal or the agent, as the case may be, must be made good to the one by the other.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 206 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 205 | Indian Contract Act Section 205

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-205) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 205 के अनुसार जहां कि यह अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा हो कि अभिकरण को किसी कालावधि के लिए चालू रहना है वहां पर्याप्त कारण के बिना अभिकरण के किसी पूर्वतन प्रतिसंहरण या त्यजन का प्रतिकर, यथास्थिति, अभिकर्ता को मालिक या मलिक को अभिकर्ता देगा, जिसे IC Act Section-205 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 205 (Indian Contract Act Section-205) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 205 IC Act Section-205 के अनुसार जहां कि यह अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा हो कि अभिकरण को किसी कालावधि के लिए चालू रहना है वहां पर्याप्त कारण के बिना अभिकरण के किसी पूर्वतन प्रतिसंहरण या त्यजन का प्रतिकर, यथास्थिति, अभिकर्ता को मालिक या मलिक को अभिकर्ता देगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 205 (IC Act Section-205 in Hindi)

मालिक द्वारा प्रतिसंहरण या अभिकर्ता द्वारा त्यजन के लिए प्रतिकर-

जहां कि यह अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा हो कि अभिकरण को किसी कालावधि के लिए चालू रहना है वहां पर्याप्त कारण के बिना अभिकरण के किसी पूर्वतन प्रतिसंहरण या त्यजन का प्रतिकर, यथास्थिति, अभिकर्ता को मालिक या मलिक को अभिकर्ता देगा।

Indian Contract Act Section-205 (IC Act Section-205 in English)

Compensation for revocation by principal, or renunciation by agent-

Where there is an express or implied contract that the agency should be continued for any period of time, the principal must make compensation to the agent, or the agent to the principal, as the case may be, for any previous revocation or renunciation of the agency without sufficient cause.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 205 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 204 | Indian Contract Act Section 204

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-204) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 204 के अनुसार मालिक अपने अभिकर्ता को दिए गए प्राधिकार का प्रतिसंहरण उस प्राधिकार के भागतः प्रयोग के पश्चात् नहीं कर सकता जहाँ तक कि उस अभिकरण में पहले ही किए गए कार्यों से उद्भूत कार्यों और बाध्याताओं का संबंध हो, जिसे IC Act Section-204 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 204 (Indian Contract Act Section-204) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 204 IC Act Section-204 के अनुसार मालिक अपने अभिकर्ता को दिए गए प्राधिकार का प्रतिसंहरण उस प्राधिकार के भागतः प्रयोग के पश्चात् नहीं कर सकता जहाँ तक कि उस अभिकरण में पहले ही किए गए कार्यों से उद्भूत कार्यों और बाध्याताओं का संबंध हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 204 (IC Act Section-204 in Hindi)

प्रतिसंहरण जहां कि प्राधिकार का भागतः प्रयोग कर लिया गया है-

मालिक अपने अभिकर्ता को दिए गए प्राधिकार का प्रतिसंहरण उस प्राधिकार के भागतः प्रयोग के पश्चात् नहीं कर सकता जहाँ तक कि उस अभिकरण में पहले ही किए गए कार्यों से उद्भूत कार्यों और बाध्याताओं का संबंध हो।
दृष्टांत
(क) ख को क प्राधिकृत करता है कि वह क के लेखे रुई की 1,000 गांठे खरीद ले और क का जो धन ख के पास बचा हुआ है उसमें से उनके लिए संदाय कर दे । ख रुई की 1,000 गांठे अपने नाम में इस प्रकार खरीद लेता है कि उनकी कीमत के लिए वह स्वयं वैयक्तिक तौर पर दायी हो जाता है। जहां तक कि उस रुई के लिए संदाय करने का सम्बन्ध है ख के प्राधिकार का प्रतिसंहरण क नहीं कर सकता।
(ख) ख को क प्राधिकृत करता है कि वह क के लेखे रुई की 1,000 गांठें खरीद ले और क का जो धन ख को पास बचा हुआ है उसमें से उनके लिए संदाय कर दे । ख रुई की 1,000 गांठे क के नाम में इस प्रकार खरीद लेता है कि उनकी कीमत के लिए वह स्वयं वैयक्तिक तौर पर दायी नहीं होता। क उस रुई के संदाय के लिए ख के प्राधिकार का प्रतिसंहरण कर सकता है।

Indian Contract Act Section-204 (IC Act Section-204 in English)

Revocation where authority has been partly exercised-

The principal cannot revoke the authority given to his agent after the authority has been partly exercised, so far as regards such acts and obligations as arise from acts already done in the agency.
Illustrations
(a) A authorizes B to buy 1,000 bales of cotton on account of A, and to pay for it out of A‟s moneys remaining in B‟s hands. B buys 1,000 bales of cotton in his own name, so as to make himself personally liable for the price. A cannot revoke B‟s authority so far as regards payment for the cotton.
(b) A authorizes B to buy 1,000 bales of cotton on account of A, and to pay for it out of A‟s moneys remaining in B‟s hands. B buys 1,000 bales of cotton in A‟s name, and so as not to render himself personally liable for the price. A can revoke B‟s authority to pay for the cotton.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 204 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।