Home Blog Page 136

दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4A | विज्ञापन पर पाबंदी | Dowry Prohibition Act, Section- 4A in in hindi | Ban on advertisement.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दहेज प्रतिषेध की धारा- 4A, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है और क्या सजा एवंम् अर्थदण्ड का प्रावधान है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा- 4A का विवरण

दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act) की धारा -4A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस धारा के अन्तर्गत यदि कोई व्यक्ति, यथास्थिति, वधू या वर के माता-पिता या अन्य नातेदार या संरक्षक से किसी दहेज की प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से मांग करेगा, तो वह कारावास से छह मास से कम की नहीं होगी, किन्तु दो वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जायेगा।

दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा- 4A के अनुसार

विज्ञापन पर पाबंदी-

यदि कोई व्यक्ति-
(क) अपने पुत्र या पुत्री या किसी अन्य नातेदार के विवाह के प्रतिफलस्वरूप किसी समाचारपत्र, नियतकालिक पत्रिका, जरनल या किसी अन्य माध्यम से, अपनी संपत्ति या किसी धन के अंश या दोनों के किसी कारबार या अन्य हित में किसी अंश की प्रस्थापना करेगा;
(ख) खण्ड (क) में निर्दिष्ट कोई विज्ञापन मुद्रित करेगा या प्रकाशित करेगा या परिचालित करेगा,
तो वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी, किन्तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पन्द्रह हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा :
परन्तु न्यायालय, ऐसे पर्याप्त और विशेष कारणों से, जो निर्णय में लेखबद्ध किए जाएंगे, छह मास से कम की किसी अवधि के कारावास का दंडादेश अधिरोपित कर सकेगा।

Ban on advertisement—
If any person—
(a) offers, through any advertisement in any newspaper, periodical, journal or through any other media, any share in his property or of any money or both as a share in any business or other interest as consideration for the marriage of his son or daughter or any other relative,
(b) prints or publishes or circulates any advertisement referred to in clause (a),
he shall be punishable with imprisonment for a term which shall not be less than six months, but which may extend to five years, or with fine which may extend to fifteen thousand rupees:
Provided that the Court may, for adequate and special reasons to be recorded in the judgment, impose a sentence of imprisonment for a term of less than six months.

सजा एवंम् अर्थदण्ड (Punishment and Penalty)

यदि कोई व्यक्ति, अपने पुत्र या पुत्री या किसी अन्य नातेदार के विवाह के प्रतिफलस्वरूप किसी समाचारपत्र, नियतकालिक पत्रिका, जरनल या किसी अन्य माध्यम से, अपनी संपत्ति या किसी धन के अंश या दोनों के किसी कारबार या अन्य हित में किसी अंश की प्रस्थापना करेगा, तो वह कारावास सेजिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी, किन्तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पन्द्रह हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा।

हमारा प्रयास दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act) की धारा 4A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 | दहेज मांगने के लिए शास्ति | Dowry Prohibition Act, Section- 4 in in hindi | Penalty for demanding dowry.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दहेज प्रतिषेध की धारा- 4, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है और क्या सजा एवंम् अर्थदण्ड का प्रावधान है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा- 4 का विवरण

दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act) की धारा -4 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस धारा के अन्तर्गत यदि कोई व्यक्ति, यथास्थिति, वधू या वर के माता-पिता या अन्य नातेदार या संरक्षक से किसी दहेज की प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से मांग करेगा, तो वह कारावास से छह मास से कम की नहीं होगी, किन्तु दो वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जायेगा।

दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा- 4 के अनुसार

दहेज मांगने के लिए शास्ति-

यदि कोई व्यक्ति, यथास्थिति, वधू या वर के माता-पिता या अन्य नातेदार या संरक्षक से किसी दहेज की प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से मांग करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी, किन्तु दो वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा :
परन्तु न्यायालय ऐसे पर्याप्त और विशेष कारणों से, जो निर्णय में उल्लिखित किए जाएंगे, छह मास से कम की किसी अवधि के कारावास का दण्डादेश अधिरोपित कर सकेगा।

Penalty for demanding dowry—
If any person demands, directly or indirectly, from the parents
or other relatives or guardian of a bride or bridegroom, as the case may be, any dowry, he shall be punishable with imprisonment for a term which shall not be less than six months, but which may extend to two years and with fine which may extend to ten thousand rupees:
Provided that the Court may, for adequate and special reasons to be mentioned in the judgment, impose a sentence of imprisonment for a term of less than six months.

सजा एवंम् अर्थदण्ड (Punishment and Penalty)

यदि कोई व्यक्ति वधू या वर के माता-पिता या अन्य नातेदार या संरक्षक से किसी दहेज की प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से मांग करेगा, तो वह कारावास से जिसकी अवधि छह माह से कम नही होगा, किन्तु दो वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से जो दस हजार रूपये तक का हो सकेगा।

हमारा प्रयास दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act) की धारा 4 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 | दहेज देने या दहेज लेने के लिए शास्ति | Dowry Prohibition Act, Section- 3 in in hindi | Penalty for giving or taking dowry.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दहेज प्रतिषेध की धारा- 3, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है और इस धारा के अन्तर्गत क्या सजा एवंम् अर्थदण्ड का प्रावधान रखा गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा- 3 का विवरण

दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act) की धारा -3 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस धारा के अन्तर्गत अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात्‌, दहेज देगा या लेगा अथवा दहेज देना या लेना दुष्प्रेरित करेगा, तो वह कारावास से जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम की नही होगी, और जुर्माने से जो पंद्रह हजार रूपये या दहेज के मूल्य की रकम तक का अधिक भी हो सकता है, दण्डित किया जायेगा।

दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा- 3 के अनुसार

दहेज देने या दहेज लेने के लिए शास्ति –

(1) यदि कोई व्यक्ति, इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात्‌, दहेज देगा या लेगा अथवा दहेज देना या लेना दुष्प्रेरित करेगा [तो वह कारावास से, जिसकी अवधि [पांच वर्ष से कम की नहीं होगी, और जुर्माने से, जो पन्द्रह हजार रुपए से या ऐसे दहेज के मूल्य की रकम तक का, इनमें से जो भी अधिक हो, कम नहीं होगा] दण्डनीय होगा :
परन्तु न्यायालय, ऐसे पर्याप्त और विशेष कारणों से जो निर्णय में लेखबद्ध किए जाएंगे, [पांच वर्ष] से कम की किसी अवधि के कारावास का दण्डादेश अधिरोपित कर सकेगा।
(2) उपधारा (1) की कोई बात, –
(क) ऐसी भेंटों को, जो वधू को विवाह के समय (उस निमित्त कोई मांग किए बिना) दी जाती है या उनके संबंध में लागू नहीं होंगी :
परन्तु यह तब जब कि ऐसी भेंटें इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार रखी गई सूची में दर्ज की जाती हैं ;
(ख) ऐसी भेंटों को जो वर को विवाह के समय (उस निमित्त कोई मांग किए बिना) दी जाती हैं या उनके संबंध में लागू नहीं होगी :
परन्तु यह तब जब कि ऐसी भेंटें, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार रखी गई सूची में दर्ज की जाती है :
परन्तु यह और जहां ऐसी भेंटें जो वधू द्वारा या उसकी ओर से या किसी व्यक्ति द्वारा जो वधू का नातेदार है दी जाती है वहां ऐसी भेंटें रूढ़िगत प्रकृति की हैं और उनका मूल्य, ऐसे व्यक्ति की वित्तीय प्रास्थिति को ध्यान में रखते हुए, जिसके द्वारा या जिसकी ओर से ऐसी भेंटें दी गई हैं अधिक नहीं हैं।

Penalty for giving or taking dowry—
(1) If any person, after the commencement of this Act, gives or takes or abets the giving or taking of dowry, he shall be punishable [with imprisonment for a term which shall not be less than [five years, and with fine which shall not be less than fifteen thousand rupees or the amount of the value of such dowry, whichever is more]:
Provided that the Court may, for adequate and special reasons to be recorded in the judgment, impose a sentence of imprisonment for a term of less than [five years].
(2) Nothing in sub-section (1) shall apply to, or in relation to,—
(a) presents which are given at the time of a marriage to the bride (without any demand having been made in that behalf):
Provided that such presents are entered in a list maintained in accordance with the rules made under this Act;
(b) presents which are given at the time of a marriage to the bridegroom (without any demand having been made in that behalf):
Provided that such presents are entered in a list maintained in accordance with the rules made under this Act:
Provided further that where such presents are made by or on behalf of the bride or any person related to the bride, such presents are of a customary nature and the value thereof is not excessive having regard to the financial status of the person by whom, or on whose behalf, such presents are
given.

नोट- यह धारा कोई ऐसी भेंटों को, जो वधू को विवाह के समय (उस निमित्त कोई मांग किए बिना) दी जाती है या उनके संबंध में लागू नहीं होगा।

सजा एवंम् अर्थदण्ड (Punishment and Penalty)

यदि कोई व्यक्ति, इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात्‌, दहेज देगा या लेगा अथवा दहेज देना या लेना दुष्प्रेरित करेगा, तो वह कारावास से जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम की नही होगी, और जुर्माने से जो पंद्रह हजार रूपये या दहेज के मूल्य की रकम तक का अधिक भी हो सकता है, दण्डित किया जायेगा।

हमारा प्रयास दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act) की धारा 3 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 2 | दहेज की परिभाषा | Dowry Prohibition Act, Section- 2 in in hindi | Definition of dowry.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 2 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दहेज प्रतिषेध की धारा- 2, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है और कोई बहुमूल्य वस्तु कब दहेज कहलाती है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा- 2 का विवरण

दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act) की धारा -2 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस धारा के अन्तर्गत दहेज को परिभाषित किया गया है, दहेज एक तरह से संपत्ति और मूल्यवान प्रतिभूति है, अर्थात् कोई मूल्यवान वस्तु अथवा सम्पत्ति जिसे जब कोई वधू पक्ष किसी वर पक्ष के परिवार को देता है, दहेज कहलाती है।
कभी-कभी कुछ मामलों मे यदि वधू पक्ष को सक्षम् है और वह अपनी पुत्री अथवा अपने दमाद को कोई संपत्ति या मूल्यवान वस्तु अपनी पूर्ण स्वेच्छा से बिना मांगे देता है, तो वह गिफ्ट की श्रेणी मे आता है, जिसे हम दहेज नही कहेंगे।

दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा- 2 के अनुसार

दहेज” की परिभाषा-

इस अधिनियम में, दहेज” से कोई ऐसी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति अभिप्रेत है जो विवाह के समय या उसके पूर्व [या पश्चात्‌ किसी समय] –
(क) विवाह के एक पक्षकार द्वारा विवाह के दूसरे पक्षकार को ; या
(ख) विवाह के किसी भी पक्षकार के माता-पिता द्वारा या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा विवाह के किसी भी पक्षकार को या किसी अन्य व्यक्ति को,
[उक्त पक्षकारों के विवाह के संबंध में] या तो प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः दी गई है या दी जाने के लिए करार की गई है, किन्तु उन व्यक्तियों के संबंध में जिन्हें मुस्लिम स्वीय विधि (शरीयत) लागू होती है, मेहर इसके अंतर्गत नहीं है।

Definition of “dowry”—
In this Act, “dowry” means any property or valuable security given or
agreed to be given either directly or indirectly—
(a) by one party to a marriage to the other party to the marriage; or
(b) by the parents of either party to a marriage or by any other person, to either party to the marriage or to any other person;
at or before [or any time after the marriage] [in connection with the marriage of the said parties, but does not include] dower or mahr in the case of persons to whom the Muslim Personal Law (Shariat) applies.

स्पष्टीकरण 2 – मूल्यवान प्रतिभूति” पद का वही अर्थ है जो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 30 में है ।

हमारा प्रयास दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act) की धारा 2 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 1 | संक्षित्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ | Dowry Prohibition Act, Section- 1 in in hindi | Short title, extent and commencement.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 1 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दहेज प्रतिषेध की धारा- 1, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है और कब यह धारा कहा लागू होती है और कहा नही लागू होती है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा- 1 का विवरण

दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act) की धारा- 1 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस कानून को संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ को यह धारा परिभाषित करती है। यह धारा जम्मू-कश्मीर को छोड़कर समस्त भारत पर लागू होती है, लेकिन आज के समय यहां भी भारतीय संविधान लागू होता है।

दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा- 1 के अनुसार

संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-

(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 है ।
(2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख1 को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे।

Short title, extent and commencement—
(1) This Act may be called the Dowry Prohibition Act, 1961.
(2) It extends to the whole of India except the State of Jammu and Kashmir.
(3) It shall come into force on such date as the Central Government may, by notification in the Official Gazette, appoint.

हमारा प्रयास दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act) की धारा 1 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की सम्पूर्ण जानकारी (Dowry Prohibition Act, 1961 Full Information)

समाज से दहेज जैसी कुप्रथाओ को खत्म करने के उद्देश्य के लिये दहेज अधिनियम 1961 कानून बनाया गया था, जिसके अनुसार दहेज लेना ही नहीं, दहेज देना भी अपराध की श्रेणी मे आता है। वैसे हमारे समाज मे दहेज देना और लेना दोनो सबसे बडी समस्या है क्योकि समाज मे रहने व दिखावे के लिये बड़े-बड़े लोगो के लिये सिम्बल और सम्मान की तरह है कि क्या क्या गिफ्ट दिना या क्या मिला और किसने क्या गिफ्ट दिया। पहले यह सभी गिफ्ट हमारे सम्मान को दर्शाते है, लेकिन जब रिश्तेदारी मे किसी भी प्रकार से दरार आ जाती है तब इसी के चलते दहेज का रूप दे दिया जाता है।

दहेज जैसे कुप्रथाये हमारे ही नही अपितु प्रत्येक देश मे शादी-ब्याह जैसे कार्यक्रमो मे लकड़ी पक्ष के परिवार व्दारा नक़द या वस्तुओं के रूप में यह वर पक्ष के परिवार को वधू के साथ दिया जाता है। आज के आधुनिक समय में भी दहेज प्रथा नाम की बुराई हर जगह फैली हुई है। भारतीय समाज में दहेज़ प्रथा अभी भी विकराल रूप में है। इसके अलावा यह प्रथा हमारे ही समाज मे नही ब्लकि विश्व के अन्य देशो मे भी दहेज प्रथा जैसे कुरीतीयां विकराल रूप मे है।

इसके अलावा बहुत से मामलो मे हमारे भारत देश मे दहेज लेने के लिये वधू पक्ष को काफी दबाव डाला जाता है, जिसके चलते इस दबाव के कारण कभी कभी वधू इस दहेज के कारण अपना दम तोड़ देती है, ऐसी कुरीतियों के चलते उन सभी लोगो को मानसिक वेदना का शिकार भी होना पड़ रहा है। इसलिये यह दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 (Dowry Prohibition Act, 1961) कानून को 25 मई 1961 को लाया गया। जिससे समाज मे हो रही दहेज कुरीतियों को रोका जा सके। इसके पश्चात् भी हमारे भारत देश मे औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कुरीतियो के कारण ही मौत का शिकार हो रही है और वर्ष 2007 से 2011 के बीच इस प्रकार के मामलों में काफी वृद्धि देखी गई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि विभिन्न राज्यों से वर्ष 2012 में दहेज हत्या के 8,233 मामले सामने आए। आंकड़ों का औसत बताता है कि प्रत्येक घंटे में एक महिला दहेज प्रथा के कारण ही मृत्यु को गले लगा रही है।

दहेज प्रथा

दहेज प्रथा से हमारे समाज मे बहुत समय पहले से लागू है, जिसका मूलभूत सिद्धान्त यह है कि जब कोई युवती अपने मायके से विदा होकर अपने ससुराल जाती है, तो युवती के परिवार वाले एक तरह से उपहार देते है जिसे दहेज नहीं, उपहार माना जाता था, लेकिन आज के समय एकदम अलग था क्योकिं आज के समय ससुराल पक्ष (वर पक्ष वाले) एक तरह से शादी-विवाह मे एक तरह से एक-एक वस्तु इस तरह से डिमाण्ड के रूप मे भी मांगते है, जिसे वधू पक्ष वालों को पूरा करना पड़ता है इसके अलावा अधिकांशतः व्यक्ति समाज मे दिखावा करने या सम्मान बचाने के लिये भी दहेज मांगते एवंम् देते है।

इन प्रथाओ के चलते कभी-कभी ससुराल पक्ष वाले इस प्रथा का गलत फायदा भी उठाते है, इसलिये इस कानून को ऐसी प्रथाओ का रोकने के उद्देश्य से बनाया गया, जिसके चलते वह सभी दहेज देने वाले एवंम् लेने वाले दोनों ही दंड एवंम् अर्थदण्ड के अपराधी होंगे।

कब दहेज कानून लागू नही होता है?

जब किसी शादी-विवाह मे जब दोनो पक्षो के मध्य लेन देन की बाते होती है, तो कुछ बिन्दु जैसे वधु पक्ष वाले अपनी इच्छा से ही अपनी पुत्री अथवा दमाद को कुछ अपनी तरफ से गिफ्ट करते है, जिसे हम दहेज नही कहते है क्योकि यह सम्पत्ति मांगी नही गयी है, इसलिये स्वेच्छया से दी गयी सम्पत्ति को दहेज प्रतिषेध कानून मे नही आता है। लेकिन कुछ मामलो मे वधु पक्ष वाले भी इस कानून का गलत उपयोग करते है क्योकि जब वर-वधु के सम्बन्धो मे वाद-विवाद उत्पन्न होता है, तो उन सभी वस्तुओ को भी बढा चढाकर बताया जाता है और उस वस्तु को भी दहेज की संज्ञा दे दी जाती जबकि वह स्वेच्छया से दी हुयी है।

दहेज मामलों मे सजा/जुर्माना

दहेज जैसे मामलों मे हम समझ सकते है, कि जब कोई व्यक्ति दहेज देता अथवा दहेज लेता है, तो वह दोनो सूरतों वह दंड का अपराधी होता है। जो कोई व्यक्ति दहेज लेता है या देता है, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि (पांच वर्ष से कम नही हो सकेंगी) और वह व्यक्ति जुर्माने से भी , जो पन्द्रह हजार रूपये अथवा दहेज के मूल्य के बराबर भी हो सकती है, दण्डित किया जायेगा।

जब कोई व्यक्ति दहेज के लिये अप्रत्यक्ष रूप से डिमांड करता है, तो भी वह व्यक्ति कम से कम 6 मास का कारावास (2 वर्ष तक बढांया जा सकता है) और जुर्माने से जो दस हजार रूपये तक का हो सकेगा।

हम जानेंगें दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों को रोकने के लिये हमारे संविधान मे क्या बनाया गया जिसके चलते इसे रोकने का प्रयास किया जा रहा है। आज हम दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की सम्पूर्ण धारा जानेंगे, कि किस धारा मे क्या कहा गया है और यह कब किस पर लागू होगी।

धारा- 1 संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ (Short title, extent and commencement)

धारा-2 दहेज की परिभाषा (Definition of “dowry”)

धारा- 3 दहेज देने या दहेज लेने के लिये शास्ति (Penalty for giving or taking dowry)

धारा- 4 दहेज मांगने के लिये शास्ति (Penalty for demanding dowry)

धारा- 4A विज्ञापन पर पाबंदी (Ban on advertisement)

धारा- 5 दहेज देने या लेने के लिये करार का शून्य होना (Agreement for giving or taking dowry to be void)

धारा- 6 दहेज का पत्नी या उसके वारिसों के फायदे के लिये होना (Dowry to be for the benefit of the wife or her heirs)

धारा- 7 अपराधों का संज्ञान (Cognizance of offences)

धारा- 8 अपराधों का कुछ प्रयोजनों के लिये संज्ञेय होना तथा जमानतीय और अशमनीय होना (Offences to be cognizable for certain purposes and to be bailable and non-compoundable)

धारा- 8A कुछ मामलों मे सबूत का भार (Burden of proof in certain cases)

धारा-8B दहेज प्रतिषेध अधिकारी (Dowry Prohibition Officers)

धारा- 9 नियम बनाने की शक्ति (Power to make rules)

धारा- 10 राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति (Power of the State Government to make rules)