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पॉक्सो एक्ट की धारा 5 | गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमला | Pocso Act Section- 5 in hindi | Aggravated penetrative sexual assault.

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 5 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 5? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 5 के अंतर्गत क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 5 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 5 के अंतर्गत कोई लोक सेवक होते हुए अथवा किसी अस्पताल, या किसी शैक्षणिक संस्था या धार्मिक संस्था का प्रबंध या कर्मचारी “प्रवेशन लैंगिक हमला” करता है, या बालिका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का लाभ उठाकर या किसी पोषण देखभाल करने वाला नातेदार या बालक के माता-पिता के साथ घरेलू संबंध रखते हुए या जो बालक के साथ साझी गृहस्थी में रहता है, ऐसे बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है तो वह इस कृत्य के लिए पॉक्सो एक्ट की धारा 5 के अंतर्गत दंड का भागीदार होगा और इसे हम “गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमला” कहेंगे। यह पॉक्सो की धारा 5 गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमले को परिभाषित करती है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 5 के अनुसार-

गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमला

(क) जो कोई, पुलिस अधिकारी होते हुए किसी बालक पर- (i) पुलिस थाने या ऐसे परिसरों की सीमाओं के भीतर जहां उसकी नियुक्ति की गई है; या
(ii) किसी थाने के परिसरों में, चाहे उस पुलिस थाने में अवस्थित हैं या नहीं जिसमें उसकी नियुक्ति की गई है; या
(iii) अपने कर्तव्यों के अनुक्रम में या अन्यथा; या
(iv) जब वह, पुलिस अधिकारी के रूप में ज्ञात हो या उसकी पहचान की गई हो,
प्रवेशन लैंगिक हमला करता है; या
(ख) जो कोई सशस्त्र बल या सुरक्षा बल का सदस्य होते हुए बालक पर,-
(i) ऐसे क्षेत्र की सीमाओं के भीतर जिसमें वह व्यक्ति तैनात है; या
(ii) बलों या सशस्त्र बलों की कमान के अधीन किन्हीं क्षेत्रों में; या
(iii) अपने कर्तव्यों के अनुक्रम में या अन्यथा, या
(iv) जहां उक्त व्यक्ति सुरक्षा या सशस्त्र बलों के सदस्य के रूप में ज्ञात हो या उसकी पहचान की गई हो,
प्रवेशन लैंगिक हमला करता है; या
(ग) जो कोई लोक सेवक होते हुए, किसी बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है; या
(घ) जो कोई किसी जेल, प्रतिप्रेषण गृह, संरक्षण गृह, संप्रेक्षण गृह या अन्य या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित अभिरक्षा या देखरेख और संरक्षण के किसी अन्य स्थान का प्रबंध या कर्मचारिवृंद ऐसे जेल, प्रतिप्रेषण गृह, संप्रेक्षण गृह या अभिरक्षा या देखरेख और संरक्षण के अन्य स्थान पर रह रहे किसी बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है; या
(ङ) जो कोई, किसी अस्पताल, चाहे सरकारी या प्राइवेट हो, का प्रबंध या कर्मचारिवृंद होते हुए उस अस्पताल में किसी बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है; या
(च) जो कोई, किसी शैक्षणिक संस्था या धार्मिक संस्था का प्रबंध या कर्मचारिवृंद होते हुए उस संस्था में किसी बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है; या(छ) जो कोई किसी बालक पर सामूहिक प्रवेशन लैंगिक हमला करता है।
स्पष्टीकरण– जहां किसी बालक पर, किसी समूह के एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा उनके सामान्य आशय को अग्रसर करने में लैंगिक हमला किया गया है वहां ऐसे प्रत्येक व्यक्ति द्वारा इस खंड के अर्थातर्गत सामूहिक प्रवेशन लैंगिक हमला किया जाना समझा जाएगा और ऐसा प्रत्येक व्यक्ति उस कृत्य के लिए वैसी ही रीति में दायी होगा मानो वह उसके द्वारा अकेले किया गया था; या
(ज) जो कोई, किसी बालक पर घातक आयुध, अग्न्यायुध, गर्म पदार्थ या संक्षारक पदार्थ का प्रयोग करते हुए प्रवेशन लैंगिक हमला करता है; या
(झ) जो कोई, किसी बालक को घोर उपहति कारित करते हुए या शारीरिक रूप से नुकसान और क्षति करते हुए, या उसके/उसकी जननेंद्रियों को क्षति करते हुए प्रवेशन लैंगिक हमला करता है; या
(ञ) जो कोई, किसी बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है जिससे,-
(i) बालक शारीरिक रूप से अशक्त हो जाता है या बालक मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 (1987 का 14) की धारा 2 के खंड (ख) के अधीन यथापरिभाषित मानसिक रूप से रोगी हो जाता है या किसी प्रकार का ऐसा ह्रास कारित करता है जिससे बालक अस्थायी या स्थायी रूप से नियमित कार्य करने में अयोग्य हो जाता है;।
(ii) बालिका की दशा में, वह लैंगिक हमले के परिणामस्वरूप, गर्भवती हो जाती है;
(iii) बालक मानव प्रतिरक्षाहास विषाणु या किसी ऐसे अन्य प्राणघातक रोग या संक्रमण से हैं जो बालक को शारीरिक रूप से अयोग्य, या नियमित कार्य करने में मानसिक रूप से अयोग्य करके अस्थाई या स्थाई रूप से हास कर सकेगा;
(iv) बालक की मृत्यु हो जाती है; या
(ट) जो कोई, बालक की मानसिक और शारीरिक अशक्तता का लाभ उठाते हुए बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है;
(ठ) जो कोई, उसी बालक पर एक से अधिक बार या बार-बार प्रवेशन लैंगिक हमला करता है; या
(ड) जो कोई, बारह वर्ष से कम आयु के किसी बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है; या
(ढ) जो कोई, बालक का रक्त या दत्तक या विवाह या संरक्षकता द्वारा या पोषण देखभाल करने वाला नातेदार या बालक के माता-पिता के साथ घरेलू संबंध रखते हुए या जो बालक के साथ साझी गृहस्थी में रहता है, ऐसे बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है; या
(ण) जो कोई, बालक को सेवा प्रदान करने वाली किसी संस्था का स्वामी या प्रबंध या कर्मचारिवृंद होते हुए बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है; या
(त) जो कोई, किसी बालक के न्यासी या प्राधिकारी के पद पर होते हुए बालक की किसी संस्था या गृह या कहीं और बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है; या
(थ) जो कोई, यह जानते हुए कि बालक गर्भ से है, बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है; या
(द) जो कोई, बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है और बालक की हत्या करने का प्रयत्न करता है; या
(ध) जो कोई, [हिंसा के दौरान या प्राकृतिक विपत्ति की स्थिति या उस प्रकार को किन्हीं भी स्थितियों के दौरान] बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है; या
(न) जो कोई, बालक पर कोई प्रवेशन लैंगिक हमला करता है और वह पूर्व में इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध करने के लिए या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन दंडनीय किसी लैंगिक अपराध किए जाने के लिए दोषसिद्ध किया गया है; या
(प) जो कोई, बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है और बालक को सार्वजनिक रूप से विवस्त्र करता है या नग्न करके प्रदर्शन करता है,
वह गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमला करता है, यह कहा जाता है।

Aggravated penetrative sexual assault-
(a) Whoever, being a police officer, commits penetrative sexual assault on a child-
(i) within the limits of the police station or premises at which he is appointed; or in
(ii) in the premises of any station house, whether or not situated in the police station, to which he is appointed; or
(iii) in the course of his duties or otherwise; or
(iv) where he is known as, or identified as, a police officer; or
(b) Whoever being a member of the armed forces or security forces commits penetrative sexual assault on a child-
(i) within the limits of the area to which the person is deployed; or
(ii) in any areas under the command of the forces or armed forces; or
(iii) in the course of his duties or otherwise; or
(iv) where the said person is known or identified as a member of the security or armed forces; or
(c) Whoever being a public servant commits penetrative sexual assault on a child; or
(d) Whoever being on the management or on the staff of a jail, remand home, protection home, observation home, or other place of custody or care and protection established by or under any law for the time being in force, commits penetrative sexual assault on a child, being inmate of such jail, remand home, protection home, observation home, or other place of custody or care and protection: or
(e) Whoever being on the management or staff of a hospital, whether Government or private, commits penetrative sexual assault on a child in that hospital; or
(f) Whoever being on the management or staff of an educational institution or religious institution, commits penetrative sexual assault on a child in that institution; or
(g) Whoever commits gang penetrative sexual assault on a child.
Explanation- When a child is subjected to sexual assault by one or more persons of a group in furtherance of their common intention, each of such persons shall be deemed to have committed gang penetrative sexual assault within the meaning of this clause and each of such person shall be liable for that act in the same manner as if it were done by him alone; or
(h) Whoever commits penetrative sexual assault on a child using deadly weapons, fire, heated substance or corrosive substance; or
(i) Whoever commits penetrative sexual assault causing grievous hurt or causing bodily harm and injury or injury to the sexual organs of the child; or
(j) Whoever commits penetrative sexual assault on a child, which-
(i) physically incapacitates the child or causes the child to become mentally ill as defined under clause (b) of Section 2 of the Mental Health Act, 1987 (14 of 1987) or causes impairment of any kind so as to vender the child unable to perform regular tasks, temporarily or permanently;
(ii) in the case of female child, makes the child pregnant as a consequence of sexual assault;
(iii) inflicts the child with Human Immunodeficiency Virus or any other life threatening disease or infection which may either temporarily or permanently impair the child by rendering him physically incapacitated, or mentally ill to perform regular tasks;
(iv) causes death of the child; or
(k) Whoever, taking advantage of a child’s mental or physical disability, commits penetrative sexual assault on the child; or
(l) Whoever commits penetrative sexual assault on the child more than once or repeatedly; or
(m) Whoever commits penetrative sexual assault on a child below twelve years; or
(n) Whoever being a relative of the child through blood or adoption or marriage or guardianship or in foster care or having a domestic relationship with a parent of the child or who is living in the same or shared household with the child, commits penetrative sexual assault on such child; or
(o) Whoever being, in the ownership, or management, or staff, of any institution providing services to the child, commits penetrative sexual assault on the child; or
(p) Whoever being in a position of trust or authority of a child commits penetrative sexual assault on the child in an institution or home of the child or any where else; or
(q) Whoever commits penetrative sexual assault on a child knowing the child is pregnant; or
(r) Whoever commits penetrative sexual assault on a child and attempts to murder the child; or
(s) Whoever commits penetrative sexual assault on a child in the course of violence or during any natural calamity or in similar situations; or
(t) Whoever commits penetrative sexual assault on a child and who has been previously convicted of having committed any offence under this Act or any sexual offence punishable under any other law for the time being in force; or
(u) Whoever commits penetrative sexual assault on a child and makes the child to strip or parade naked in public.is said to commit aggravated penetrative sexual assault.

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 5 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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पॉक्सो एक्ट की धारा 4 | प्रवेशन लैंगिक हमले के लिए दंड | Pocso Act Section- 4 in hindi | Punishment for penetrative sexual assault.

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 4? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 4 के अंतर्गत प्रवेशन लैंगिक हमले के लिए दंड को किस प्रकार परिभाषित करती हैं, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 4 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के अंतर्गत कोई व्यक्ति, “प्रवेशन लैंगिक हमला” करता है, तो वह इस कृत्य के लिए पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के अंतर्गत दंड का भागीदार होगा। यह पॉक्सो की धारा 4 प्रवेशन लैंगिक हमले के लिए दंड का प्रावधान को परिभाषित करती है

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 4 के अनुसार-

प्रवेशन लैंगिक हमले के लिए दंड –

(1) जो कोई प्रवेशन लैंगिक हमला करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष से, कम की नहीं होगी किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।
(2) जो कोई सोलह वर्ष से कम आयु के किसी बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिसका अभिप्राय उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास होगा, तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।(3) उपधारा (1) के अधीन अधिरोपित जुर्माना न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा और उसका संदाय, ऐसे पीड़ित के चिकित्सा व्ययों और पुनर्वास की पूर्ति के लिए ऐसे पीड़ित को किया जाएगा।

Punishment for penetrative sexual assault-
(1) Whoever commits penetrative sexual assault shall be punished with imprisonment of either description for a term which shall not be less than ten years but which may extend to imprisonment for life, and shall also be liable to fine.
(2) Whoever commits penetrative sexual assault on a child below sixteen years of age shall be punished with imprisonment for a term which shall not be less than twenty years, but which may extend to imprisonment for life, which shall mean imprisonment for the remainder of natural life of that person, and shall also be liable to fine.
(3) The fine imposed under sub-section (1) shall be just and reasonable and paid to the victim to meet the medical expenses and rehabilitation of sach victim.

सजा (Punishment)

जो कोई व्यक्ति प्रवेशन लैंगिक हमला करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष से, कम की नहीं होगी किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा। साथ ही यदि कोई सोलह वर्ष से कम आयु के किसी बालक पर प्रवेशन लैंगिक हमला करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिसका अभिप्राय उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास होगा, तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 4 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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पॉक्सो एक्ट की धारा 3 | प्रवेशन लैंगिक हमला | Pocso Act Section- 3 in hindi | Penetrative sexual assault.

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 3 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 3? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 3 के अंतर्गत क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 3 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 3 के अंतर्गत कोई व्यक्ति, “प्रवेशन लैंगिक हमला” करता है, यह कहा जाता है। यह पॉक्सो की धारा 3 प्रवेशन लैंगिक हमले को परिभाषित करती है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 3 के अनुसार-

प्रवेशन लैंगिक हमला-

कोई व्यक्ति, “प्रवेशन लैंगिक हमला” करता है, यह कहा जाता है यदि वह –
(क) अपना लिंग, किसी भी सीमा तक किसी बालक की योनि, मुंह, मूत्रमार्ग या गुदा में प्रवेश करता है या बालक से उसके साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करवाता है; या
(ख) किसी वस्तु या शरीर के किसी ऐसे भाग को, जो लिंग नहीं है, किसी सीमा तक बालक की योनि, मूत्रमार्ग या गुदा में घुसेड़ता है या बालक से उसके साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करवाता है; या
(ग) बालक के शरीर के किसी भाग के साथ ऐसा अभिचालन करता है जिससे वह बालक की योनि, मूत्रमार्ग या गुदा या बालक के शरीर के किसी भाग में प्रवेश कर सके या बालक से उसके साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करवाता है; या
(घ) बालक के लिंग, योनि, गुदा या मूत्रमार्ग पर अपना मुंह लगाता है या ऐसे व्यक्ति या किसी अन्य व्यक्ति के साथ बालक से ऐसा करवाता है।

Penetrative sexual assault-
A person is said to commit “penetrative sexual assault” if-
(a) he penetrates his penis, to any extent, into the vagina, mouth, urethra or anus of a child or makes the child to do so with him or any other person; or
(b) he inserts, to any extent, any object or a part of the body, not being the penis, into the vagina, the urethra or anus of the child or makes the child to do so with him or any other person; or
(c) he manipulates any part of the body of the child so as to cause penetration into the vagina, urethra, anus or any part of body of the child or makes the child to do so with him or any other person; or
(d) he applies his mouth to the penis, vagina, anus, urethra of the child or makes the child to do so to such person or any other person.

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 3 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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पॉक्सो एक्ट की धारा 2 | परिभाषाएं | Pocso Act Section- 2 in hindi | Definitions.

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 2 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 2? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 2 के अंतर्गत क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 2 का विवरण

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) में धारा 2 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अलग अलग विस्तृत वर्णन के आधार पर परिभाषित करती है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 2 के अनुसार-

परिभाषाएं-

(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो-
(क) “गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमला” का वहाँ अर्थ है जो धारा 5 में है;
(ख)  “गुरुतर लैंगिक हमला” का वही अर्थ है जो धारा 9 में है;
(ग) “सशस्त्र बल या सुरक्षा बल” से संघ के सशस्त्र बल या अनुसूची में यथाविनिर्दिष्ट सुरक्षा बल या पुलिस बल अभिप्रेत है;
(घ) “बालक” से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जिसकी आयु अठारह वर्ष से कम है;
(घक) “बालक सम्बन्धी अश्लील साहित्य” से किसी बालक को सम्मिलित करते हुए लैंगिक सम्बन्ध बनाने के आचरण का कोई भी दृश्य चित्रण अभिप्रेत है, जिसके अंतर्गत फोटो, वीडियो, डिजिटल या कम्प्यूटर जनित ऐसी आकृति, जो वास्तविक बालक होने जैसी लगे और सृजित, रूपांतरित या परिवर्तित किन्तु बालक का चित्र प्रतीत होने वाली आकृति भी है;
(ङ) “घरेलू संबंध” का वहीं अर्थ है जो घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 (2005 का 43) की धारा 2 के खंड (च) में है;
(च) “प्रवेशन लैंगिक हमला” का वही अर्थ है जो धारा 3 में है;
(छ) “विहित” से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ज) “धार्मिक संस्था” का यह अर्थ होगा जो धार्मिक संस्था (दुरुपयोग निवारण) अधिनियम, 1988 (1988 का 41) में है;(झ) “लैंगिक हमला” का वही अर्थ है जो धारा 7 में है;
(ञ) “लैंगिक उत्पीड़न” का वही अर्थ है जो धारा 11 में है;
(ट) “साझो गृहस्थी” से ऐसी गृहस्थी, जहां अपराध से आरोपित व्यक्ति, बालक के साथ घरेलू नातेदारी में रहता है या किसी समय पर रह चुका है;
(ठ) “विशेष न्यायालय से धारा 28 के अधीन उस रूप में अभिहित कोई न्यायालय अभिप्रेत है;
(ड) “विशेष लोक अभियोजक” से धारा 32 के अधीन नियुक्त कोई अभियोजक अभिप्रेत है।
(2) उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का 45), दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2), [किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (2016 का 2)] और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उक्त संहिताओं या अधिनियमों में हैं।

Definitions-
(1) In this Act, unless the context otherwise requires-
(a) “aggravated penetrative sexual assault” has the same meaning as assigned to it in Section 5;(b) “aggravated sexual assault” has the same meaning as assigned to it in Section 9;
(c) “armed forces or security forces” means armed forces of the Union or security forces or police forces, as specified in the Schedule;
(d) “child” means any person below the age of eighteen years;
(da) “child pornography” means any visual depiction of sexually video, digital or computer generated image indistinguishable from an actual child, and image created, adapted, or modified, but appear to depict a child;
(e) “domestic relationship” shall have the same meaning as assigned to it in clause (f) of Section 2 of the Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 (43 of 2005);
(f) “penetrative sexual assault” has the same meaning as assigned to it in Section 3;
(g) “prescribed” means prescribed by rules made under this Act;
(h) “religious institution” shall have the same meaning as assigned to it in the Religious Institutions (Prevention of Misuse) Act, 1988 (41 of 1988);
(i) “sexual assault” has the same meaning as assigned to it in Section 7;
(j) “sexual harassment” has the same meaning as assigned to it in Section 11;
(k) “shared household” means a household where the person charged with the offence lives or has lived at any time in a domestic
relationship with the child;
(l) “Special Court” means a court designated as such under Section 28;
(m) “Special Public Prosecutor” means a Public Prosecutor appointed under Section 32;
(2) The words and expressions used herein and not defined but defined in the Indian Penal Code (45 of 1860), the Code of Criminal Procedure. 1973 (2 of 1974), [the Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 (2 of 2016)] and the Information Technology Act, 2000 (21 of 2000) shall have the meanings respectively assigned to them in the said Codes or the Acts.

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 2 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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पॉक्सो एक्ट की धारा 1 | संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ | Pocso Act Section- 1 in hindi | Short title, extend and commencement.

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट 2012 को शुरुआत से समझेंगे। वैसे शुरुआत करने से पहले जान लेते है इसे कब लागू किया गया और क्यों? यह कानून लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO ACT) 19 जून 2012 को राष्ट्रपति की स्वीकृति के पश्चात् लागू किया गया। इसके बाद हम आपके लिए पोक्सो एक्ट की धारा 1 के बारे को पूर्ण जानकारी, क्या कहती है पोक्सो एक्ट की धारा 1? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 1 के अंतर्गत क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

हमारे भारत में तेजी से बढ़ रहे बाल लैंगिक अपराध व बाल लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण करने और अपराधों का विचरण करने के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना की गई, जिससे हो रहे बालकों के प्रति अन्याय को जल्द से जल्द रोका जा सके।

POCSO ACT की धारा 1 का विवरण

पॉक्सो एक्ट(POCSO) में धारा 1 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। पॉक्सो (POCSO) की धारा 01 संक्षिप्त नाम और इसका कहा कहा विस्तार और प्रारम्भ होगा यह परिभाषित करती है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 1 के अनुसार-

संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ

(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 है।
(2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर है।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे।

“Short title extent and commencement”–
(1) This Act may be called the Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012.
(2) It extends to the whole of India, except the State of Jammu and Kashmir.
(3) It shall come into force on such date as the Central Government may, by notification in the Official Gazette, appoint.

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 1 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
धन्यवाद

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) 2012 सजा, जमानत व बदलाव इत्यादि संपूर्ण जानकारी (Punishment, Bail and Amendment full Information)

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की सम्पूर्ण जानकारी देंगे। हम सभी आये दिन बाल यौन शोषण के बारे में देख व सुन रहे हैं। आज हमारे देश में बच्चों का यौन शोषण एक सामुदायिक चिंता का विषय बन है।

आज हम इस लेख के माध्यम से (POCSO ACT 2012)  की सम्पूर्ण जानकारी देने का प्रयास करेगें, साथ ही इसका अर्थ सजा और जमानत, और समय के साथ क्या क्या  बदलाव किए गए हैं इन सभी विषयों पर चर्चा करेंगे।
बाल यौन शोषण, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण हेतु (POCSO) अधिनियम एक ऐतिहासिक कानून बनाया गया है। जो दिनांक 19 जून 2012 कांग्रेस सरकार द्वारा राष्ट्रपति की स्वीकृति के पश्चात् लागू किया गया।

पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) क्या है?

बाल यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने के लिए पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) लागू किया गया। जिसका पूरा नाम है The Protection Of Children From Sexual Offences Act (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट) अधिनियम बनाया गया है।  इस अधिनियम (कानून) को महिला और बाल विकास मंत्रालय ने साल 2012 पॉक्सो एक्ट-2012 के नाम से बनाया था। इस कानून के जरिए नाबालिग बच्चों के प्रति यौन उत्पीड़न, यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है। इस कानून के अंतर्गत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा निर्धारित की गई है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) अधिनियम कहाँ पर लागू होता है और ट्रायल कैसे होता है?

यह अधिनियम पूरे भारत पर लागू होता है, सिवाय जम्मू और कश्मीर के। पॉक्सो कनून के तहत सभी अपराधों की सुनवाई, एक विशेष न्यायालय द्वारा कैमरे के सामने बच्चे के माता पिता या जिन लोगों पर बच्चा भरोसा करता है, उनकी उपस्थिति में होती है, साथ ही महिला पुलिस द्वारा सादी वर्दी में किसी अन्य स्थान पर न कि थाने में जांच की कार्यवाही होती है। इसके साथ ही पीड़िता का नाम और पहचान ट्रायल पूर्ण होने तक छिपाई जाती है, जिससे पीड़िता और उसके परिजन को किसी प्रकार की धमकी अथवा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रताड़ना न सहना पड़े।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार पॉक्सो एक्ट के मामले-

NCRB द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पॉक्सो के तहत दर्ज मामले 2017 में 32,608 से बढ़कर 2019 में 47,325 हो गए, जो कि केवल दो वर्षों में लगभग 45% की वृद्धि है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) में Amendment के पश्चात् कानून मे बदलाव-

मोदी सरकार आने के पश्चात् इस कानून में बहुत से महत्वपूर्ण बदलाव हुए है, पहले अधिकतम् सजा 7 से 10 वर्ष तक सजा का प्रावधान है, लेकिन अब 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के बलात्कार के दोषी को मौत की सजा पर कैबिनेट के मुहर लगाने का प्रस्‍ताव रखा गया। साथ 16 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के बलात्कार के दोषी को न्यूनतम् 20 वर्ष और अधिकतम् उम्रकैद की सजा पर कैबिनेट के मुहर लगाने का प्रस्‍ताव रखा गया।

अर्थात् पहले पॉक्सो एक्ट में अधिकतम् सजा का प्रावधान 7 से 10 वर्ष, साथ ही अग्रिम जमानत भी मिल सकती थी, लेकिन केंद्र सरकार बदलाव के पश्चात् यह कानून और भी सख्त हो गया है, अब न्यूनतम् सजा का प्रावधान 20 वर्ष और अधिकतम् उम्रकैद और उन मामलों में जिसमें पीड़ित की उम्र 12 वर्ष से कम है, वहां मृत्यु दंड का भी प्रावधान है।

पॉक्सो एक्ट के मामले में कम से कम 2 माह और अधिकतम् 6 माह के भीतर मामले की जांच के उपरांत निस्तारित करना आवश्यक होगा।

पहले ऐसे मामलो मे न्यायायिक कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत का प्रावधान था, लेकिन नए बदलाव के तहत अग्रिम जमानत नही मिलेगी।

ऐसे मामलो के निस्तारण करने के 1023 नए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) बनाए जायेंगे, साथ ही जिन प्रदेशो में 100 से अधिक ऐसे मामले पेंडिंग पड़े हुए है, उन मामलो की अतिशीघ्र सुनवाई हेतु स्पेशल कोर्ट बनाए जायेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) के तहत आसाराम को नाबालिग से रेप का दोषी करार दिया जाता है आसाराम को आजीवन कारावास की सजा वर्ष 2018 को सुनाई गई थी।

पॉक्सो एक्ट में अब होगी सजा व फांसी-

केंद्र सरकार द्वारा इस कानून में संशोधन के पश्चात् पुनः इस कानून को सख्त बनाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया कि दोषियों को मौत की सजा दी जाएगी। बैठक में प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस POCSO (पॉक्सो) में बदलाव की बात कही गई और इसके अंतर्गत 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के बलात्कार के दोषी को मौत की सजा पर कैबिनेट के मुहर लगाने का प्रस्‍ताव रखा गया, जिसको बाद में कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सरकार द्वारा बच्चों के यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पॉक्‍सो एक्‍ट) में बदलाव लाया गया और आरोपी को फांसी की सजा पर एक अध्यादेश जारी किया। इसके साथ ही यदि किसी 16 वर्ष की उम्र की लड़कियों के बलात्कार के दोषी को न्यूनतम् 20 वर्ष के लिए कारावास और अधिकतम् उम्रकैद की सजा का प्रावधान है।

अब कानून में बदलाव होने के पश्चात् जो कोई 12 साल तक की बच्ची के साथ दुष्कर्म के दोषी को मौत की सजा का प्रावधान किया गया  है। पॉक्सो (POCSO) के पहले के प्रावधानों की बात की जाये तो इसके मुताबिक दोषियों के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद और न्‍यूनतम सजा 7 साल जेल थी। इस कानून के दायरे में 18 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का यौन व्यवहार शामिल है।

लड़की-लड़के दोनों संशोधित कानून के दायरे में शामिल

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने लड़की-लड़कों दोनों यानी बच्चों को यौन उत्पीड़न से बचाने के बाल यौन अपराध संरक्षण कानून (पॉक्सो) 2012 में संशोधन को मंजूरी दी है। इस संशोधित कानून में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ दुष्कर्म करने पर मौत की सजा तक का प्रावधान है।इसके अलावा बाल यौन उत्पीड़न के अन्य अपराधों की भी सजा कड़ी करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

पोक्सो एक्ट के अन्तर्गत मीडिया के लिए विशेष दिशा निर्देश (प्रावधान)

धारा 20 के अनुसार मीडिया किसी बालक के लैंगिक शोषण संबंधी किसी भी प्रकार की सामग्री जो उसके पास उपलब्ध हो, वह स्थानीय पुलिस को उपलब्ध करायएगा। ऐसा ना करने पर यह कृत्य अपराध की श्रेणी में माना जाएगा।
कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार के मीडिया या स्टूडियों या फोटोग्राफी सुविधाओं से पूर्ण और अधिप्रमाणित सूचना के बिना किसी बालक के सम्बन्ध में कोई रिपोर्ट या उस पर कोई टिप्पणी नहीं करेगा, जिससे उसकी प्रतिष्ठा हनन या उसकी गोपनीयता का उल्लंघन होता हों।
किसी मीडिया से कोई रिपोर्ट बालक की पहचान जिसके अन्तर्गत उसका नाम, पता, फोटोचित्र परिवार के विवरणों, विधालय, पड़ोसी या किन्हीं अन्य विवरण को प्रकट नहीं किया जायेगा।
परन्तु ऐसे कारणों से जो अभिलिखित किये जाने के पश्चात सक्षम विशेष न्यायालय की अनुमति प्राप्त कर किया जा सकेगा यदि उसकी राय में ऐसा प्रकरण बालक के हित में है।
मीडिया स्टूडियों का प्रकाशक या मालिक संयुक्त रूप से और व्यक्तिगत रूप से अपने कर्मचारी के कार्यों के किसी कार्य के लिए उत्तरदायी होगा। इन प्रावधानों का उल्लंघन करने पर 6 माह से 1 वर्ष के कारावास या जुर्माने या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) में मेडिकल जाँच

यहाँ आपको बता दें की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस की यह जवाबदेही हैं कि पीड़ित का मामला 24 घंटो के अन्दर बाल कल्याण समिति के सामने लाया जाए, जिससे पीड़ित की सुरक्षा के लिए जरुरी कदम उठाये जा सके, इसके साथ ही बच्चे की मेडिकल जाँच करवाना भी अनिवार्य हैं | ये मेडिकल परीक्षण बच्चे के माता-पिता या किसी अन्य व्यक्ति की उपस्थिति में किया जायेगा जिस पर बच्चे का विश्वास हो, और पीड़ित अगर लड़की है तो उसकी मेडिकल जांच महिला चिकित्सक द्वारा ही की जानी चाहिए |

पास्को (POCSO Act) एक्ट से बचाव?

पास्को एक्ट से बचने के लिए कोई उपाय अब नहीं है, क्योंकि बदलाव से पहले इस कानून में अग्रिम जमानत का प्रावधान था, लेकिन अब अग्रिम जमानत नही मिल सकेगी। हालाँकि अगर ये साबित होता है कि उम्र सीमा 18 से ज्यादा है तब ही केवल इस धारा को हटाया जायेगा अन्यथा किसी भी सूरत में पास्को एक्ट से नहीं बचा जा सकता।

POCSO अधिनियम की प्रमुख विशेषताएं:-

इस अधिनियम में बच्चों को 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों के रूप में परिभाषित किया गया है।
यह अधिनियम लिंग तटस्थ है, इसका अर्थ यह है कि अपराध और अपराधियों के शिकार पुरुष, महिला या तीसरे लिंग हो सकते हैं।
यह एक नाबालिग के साथ सभी यौन गतिविधि को अपराध बनाकर यौन सहमति की उम्र को 16 साल से 18 साल तक बढ़ा देता है।
अधिनियम में यह भी बताया गया है कि यौन शोषण में शारीरिक संपर्क शामिल हो सकता है या शामिल नहीं भी हो सकता है।
अधिनियम बच्चे के बयान को दर्ज करते समय और विशेष अदालत द्वारा बच्चे के बयान के दौरान जांच एजेंसी द्वारा विशेष प्रक्रियाओं का पालन करता है।
सभी के लिए अधिनियम के तहत यौन अपराध के बारे में पुलिस को रिपोर्ट करना अनिवार्य है, और कानून में गैर-रिपोर्टिंग के लिए दंड का प्रावधान शामिल किया गया है।
इस अधिनियम में यह सुनिश्चित करने के प्रावधान हैं कि एक बच्चे की पहचान जिसके खिलाफ यौन अपराध किया जाता है, मीडिया द्वारा खुलासा नहीं किया जायेगा ।
बच्चों को पूर्व-परीक्षण चरण और परीक्षण चरण के दौरान अनुवादकों, दुभाषियों, विशेष शिक्षकों, विशेषज्ञों, समर्थन व्यक्तियों और गैर-सरकारी संगठनों के रूप में अन्य विशेष सहायता प्रदान की जानी है।
बच्चे अपनी पसंद या मुफ्त कानूनी सहायता के वकील द्वारा कानूनी प्रतिनिधित्व के हकदार हैं।
इस अधिनियम में पुनर्वास उपाय भी शामिल हैं, जैसे कि बच्चे के लिए मुआवजे और बाल कल्याण समिति की भागीदारी शामिल है ।
क्या वकीलों को अपने कार्यों का विज्ञापन देने की अनुमति है

POCSO (पॉक्सो एक्ट) Act का Full Form पूरा नाम

आइये जानते हैं  POCSO Act की फुल फॉर्म क्या होती है इसे यानि POCSO Act  को The Protection Of Children From Sexual Offences Act (प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट) कहते हैं इस अधिनियम (कानून) को महिला और बाल विकास मंत्रालय ने साल 2012 पोक्सो एक्ट-2012 के नाम से बनाया था। ये POCSO Act भारत के सभी नागरिकों पर लागू है।  पोक्सो एक्ट-2012 में कुल 46 धाराएं  हैं।

1-संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ

2-परिभाषाएं

3-प्रवेशन लैंगिक हमला

4-प्रवेशन लैंगिक हमला के लिए दंड

5-गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमला

6-गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमला का दंड

7-लैंगिक हमला

8-लैंगिक हमला का दंड

9-गुरुतर लैंगिक हमला

10-गुरुतर लैंगिक हमला का दंड

11-लैंगिक उत्पीड़न

12-लैंगिक उत्पीड़न का दंड

13-अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग

14-अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग का दंड

15-बालक को सम्मिलित करने वाली अश्लील सामग्री के भंडारकरण के लिए दंड

16-किसी अपराध का दुष्प्रेरण

17-दुष्प्रेरण के लिए दंड

18-किसी अपराध को करने के प्रयत्न के लिए दंड

19-अपराधों की रिपोर्ट करना

20-मामले को रिपोर्ट करने के लिए मिडिया , स्टूडियो और फोटो चित्रण सुविधाओं की बाध्यता

21-मामले को रिपोर्ट करने या अभिलिखित करने में विफल रहने के लिए दंड

22-मिथ्या परिवाद या मिथ्या सूचना के लिए दंड

23-मीडिया के लिए प्रक्रिया

24-बालक के कथनों को अभिलिखित किया जाना

25-मजिस्ट्रेट द्वारा बालक के कथन का अभिलेखन

26-अभिलिखित किए जाने वाले कथन के संबंध में अतिरिक्त उपबंध

27-बालक की चिकित्सीय परीक्षा

28-विशेष न्यायालयों को अभिहित किया जाना

29-कतिपय अपराधों के बारे में उपधारणा

30-आपराधिक मानसिक दशा की उपधारणा

31-विशेष न्यायालय के समक्ष कार्यवाहियों को दंड प्रक्रिया संहिता 1973 का लागू होना

32- विशेष लोक अभियोजक

33-विशेष न्यायालयों की प्रक्रिया और शक्तियां

34-बालक द्वारा अपराध किये जाने और विशेष न्यायालय द्वारा आयु का अवधारण करने के मामले में प्रक्रिया

35-बालक के साक्ष्य को अभिलिखित और मामले का निपटारा करने के लिए अवधि

36-साक्ष्य देते समय बालक का अभियुक्त को न दिखना

37-विचारण का बंद कमरे में संचालन

38-बालक का साक्ष्य अभिलिखित करते समय किसी दुभाषिया या विशेषज्ञ की सहायता लेना

39-विशेषज्ञ आदि की सहायता लेने के लिए बालक के लिए मार्गनिर्देश

40-विधिक काउंसेल की सहायता लेने का बालक का अधिकार

41-कतिपय मामलो में धारा 3 से धारा 13 तक के उपबंध का लागू न होना

42-अनुकल्पिक दंड

42A-अधिनियम का किसी अन्य विधि के अल्पीकरण में न होना

43-अधिनियम के बारे में लोक जागरूकता

44-अधिनियम के क्रियान्वयन की मानीटरी

45-नियम बनाने की शक्ति

46-कठिनाइयां दूर करने की शक्ति

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
धन्यवाद