पेटेंट अधिनियम 1970 (Patents Act, 1970) पेटेंट अधिनियम भारत मे होने वाले अविष्कारों को सुरक्षा प्रदान करने वाला कानून है, यह कानून नई खोज को बढावा देता है और खोजकर्ताओ के हक एवंम् अधिकारो के लिये सुरक्षा प्रदान करता है। यह कानून पेटेंट अधिनियम 1970 दिनांक 20 अप्रैल 1972 से लागू हुआ। यह नई खोज को प्रोत्साहित करता है साथ ही उनके सार्वजनिक हितो की रक्षा करता है। इस अधिनियम के तहत 23 अध्याय और 163 धाराएँ हैं, जिनमें हाल ही मे संशोधन 2025 ड्राफ्ट नियमों के माध्यम से डिजिटल सुधार किया गया हैं।
Important Highlights
पेटेंट क्या होते हैं? (What is Patents?)
पेटेंट एक कानूनी अधिकार है जो सरकार आविष्कारक या खोजकर्ता को प्रदान करती है, जिससे उसे नया उत्पाद या प्रक्रिया बनाने, उपयोग करने, बेचने या आयात करने का 20 वर्ष तक का एक विशेष अधिकार मिलता है, जिसके तहत सच्चे पात्रता और प्रथम आविष्कारक, उसके उत्तराधिकारी या मृतक खोजकर्ता के कानूनी प्रतिनिधि को प्राप्त होता है। यह कानून आविष्कारक को रॉयल्टी, लाइसेंसिंग और कानूनी सुरक्षा मिलती है, जो आर्थिक लाभ प्रदान करती है।
पेटेंट वह बौद्धिक संपदा अधिकार है, जो किसी व्यक्ति या संस्था को उनके अनोखे और नए आविष्कार पर प्रदान किया जाता है। यह अधिकार सरकार द्वारा दिया जाता है, जिससे आविष्कारक अपने आविष्कार पर विशेष नियंत्रण रख सके। पेटेंट की अवधि के दौरान कोई अन्य व्यक्ति उस तकनीक की नकल, उपयोग या बिक्री नहीं कर सकता। भारत में पेटेंट की वैधता सामान्यतः 20 वर्ष होती है। पेटेंट का मुख्य उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना और शोध व विकास के लिए आविष्कारकों को प्रोत्साहित करना है। इससे उद्योग और तकनीकी प्रगति को भी गति मिलती है।
पेटेंट के प्रकार (Types of patents)
भारतीय पेटेंट अधिनियम, 1970 के तहत मुख्यतः भारत मे 3 प्रकार के होते है, जो किसी नई मशीनरी, डिजाइन या प्लांट पर भी पेटेंट खोजकर्ता ले सकते है, जो एक निश्चित अवधि के लिये सरकार व्दारा सुरक्षा देगा, जिसके तहत यदि कोई अन्य आविष्कार को व्यावसायिक उपयोग मे लाता है, तो वह आविष्कारक को रॉयल्टी, लाइसेंसिंग और कानूनी संरक्षण मिलता है, जो आर्थिक लाभ प्रदान करता है। यह कानून बिना अनुमति के नकल को भी रोकता है।
यूटिलिटी पेटेंट (Utility Patent)
उपयोगिता पेटेंट (Utility Patent) किसी नए आविष्कार, मशीन, उपकरण, प्रक्रिया या तकनीकी सुधार के लिए दिया जाता है। यह पेटेंट आविष्कार की कार्यप्रणाली और उपयोगिता की कानूनी सुरक्षा करता है। इसके अंतर्गत बिना अनुमति कोई भी व्यक्ति उस आविष्कार का निर्माण, उपयोग या बिक्री नहीं कर सकता।
डिज़ाइन पेटेंट (Design Patent)
डिज़ाइन पेटेंट (Design Patent) किसी उत्पाद के बाहरी स्वरूप, आकार, पैटर्न या सजावटी डिज़ाइन की कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें उत्पाद की कार्यप्रणाली शामिल नहीं होती। इसका उद्देश्य उत्पाद की विशिष्ट और आकर्षक बनावट को नकल से बचाना होता है।
प्लांट पेटेंट (Plant Patent)
प्लांट पेटेंट (Plant Patent) वह अधिकार है जो किसी नए, विशिष्ट और मानव द्वारा विकसित या खोजे गए पौधे की किस्म के लिए प्रदान किया जाता है। यह पेटेंट उन पौधों पर लागू होता है जिन्हें बीज के अलावा अन्य तरीकों जैसे ग्राफ्टिंग, कटिंग या टिशू कल्चर द्वारा उगाया गया हो। इसका उद्देश्य पौधों की नई किस्में विकसित करने वाले किसानों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना है। प्लांट पेटेंट से पौधा विकसित करने वाले को उसके व्यावसायिक उपयोग का विशेष अधिकार मिलता है। इससे कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलता है और नई किस्मों के विकास को प्रोत्साहन मिलता है।
पेटेंट के लिये योग्यता (Eligibility for a Patent)
भारत में पेटेंट बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) का प्रमुख हिस्सा है, जो पेटेंट अधिनियम, 1970 द्वारा शासित होता है। यह आविष्कारक को 20 वर्ष के लिए विशेष अधिकार प्रदान करता है, जिसमें उत्पादन, उपयोग, बिक्री और आयात पर एकाधिकार शामिल है। पेटेंट केवल नए, उपयोगी और औद्योगिक रूप से लागू आविष्कार के लिए ही दिया जाता है, जो निम्नप्रकार है-
- आविष्कारक (Inventor): जो व्यक्ति स्वयं नया आविष्कार करता है, वह पेटेंट के लिए पात्र होता है।
- आविष्कारक का उत्तराधिकारी (Legal Heir / Assignee): यदि आविष्कारक पेटेंट अधिकार किसी अन्य को सौंप दे या उसकी मृत्यु हो जाए, तो उसका कानूनी उत्तराधिकारी पात्र होता है।
- व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह (individual or group of individuals): दो या अधिक लोग मिलकर यदि कोई आविष्कार करते हैं, तो वे संयुक्त रूप से पेटेंट के लिए आवेदन कर सकते हैं।
- कंपनी या संस्था (Company / Organization): कोई कंपनी, स्टार्टअप, MSME, या संस्था अपने कर्मचारी द्वारा किए गए आविष्कार पर पेटेंट के लिए आवेदन कर सकती है (यदि अधिकार कंपनी के पास हों)।
- विदेशी नागरिक या विदेशी कंपनी (Foreign citizen or foreign company):भारत में भी पेटेंट के लिए आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते वे भारतीय पेटेंट कानून का पालन करें।
पेटेंटधारक के अधिकार (Rights of Patentee)
पेटेंटधारक के अधिकार (Rights of Patentee) निम्नलिखित होते हैं:
- एकाधिकार का अधिकार: पेटेंटधारक को अपने आविष्कार को बनाने, उपयोग करने, बेचने और वितरित करने का विशेष अधिकार होता है।
लाइसेंस देने का अधिकार: पेटेंटधारक किसी व्यक्ति या कंपनी को लाइसेंस देकर रॉयल्टी प्राप्त कर सकता है। - अधिकार हस्तांतरण (Assignment): पेटेंटधारक अपने पेटेंट अधिकार किसी अन्य को बेच या ट्रांसफर कर सकता है।
- उल्लंघन पर कानूनी कार्यवाही: पेटेंट का उल्लंघन होने पर पेटेंटधारक न्यायालय में मुकदमा दायर कर सकता है।
- आयात रोकने का अधिकार: बिना अनुमति पेटेंटेड उत्पाद के आयात को रोकने का अधिकार होता है।
- आर्थिक लाभ का अधिकार: पेटेंटधारक अपने आविष्कार से व्यावसायिक लाभ कमा सकता है।
पेटेंट आवेदन की प्रक्रिया क्या है? (What is the patent application process?)
भारत में पेटेंट आवेदन प्रक्रिया पेटेंट अधिनियम, 1970 के तहत चरणबद्ध रूप से संचालित होती है, जो ipindia.gov.in पोर्टल पर ई-फाइलिंग द्वारा की जाती है। पूरी प्रक्रिया आवेदन से अनुदान तक औसतन 2-4 वर्ष लेती है, जिसमें स्टार्टअप्स और एमएसएमई MSME को तेजी का लाभ मिलता है।
प्रक्रिया के मुख्य चरण
- आविष्कार की पहचान: सबसे पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि आविष्कार नया, उपयोगी और औद्योगिक रूप से लागू हो।
- पेटेंट खोज: जांच के लिए USPTO/ESPACENET/InPASS पर prior art search करें और जांच करे यह आविष्कार कही पहले से तो ही पेटेंट नही है।
- अस्थायी या पूर्ण आवेदन दाखिल करना: आविष्कारक अस्थायी (Provisional) या पूर्ण (Complete Specification) पेटेंट आवेदन दायर करता है, जहां फीस अलग-अलग खोज/कला के अनुसार हो सकती है।
- प्रकाशन (Publication): आवेदन दाखिल होने के 18 महीने बाद पेटेंट जर्नल में प्रकाशित होता है (शीघ्र प्रकाशन भी संभव है)।
- जाँच हेतु अनुरोध (Request for Examination): पेटेंट की जाँच शुरू कराने के लिए अलग से आवेदन किया जाता है।
- परीक्षण रिपोर्ट (Examination Report): पेटेंट कार्यालय आपत्तियाँ जारी करता है, जिनका उत्तर देना होता है। (यदि सुनवाई आवश्यक है, तो)
- आपत्तियों का निपटान: आविष्कारक आवश्यक संशोधन और स्पष्टीकरण देता है।
- पेटेंट स्वीकृति (Grant of Patent): सभी शर्तें पूरी होने पर पेटेंट प्रदान कर दिया जाता है।
आवश्यक फॉर्म और शुल्क सारणी (Required forms and fee schedule)
| फार्म नाम | उद्देश्य |
|---|---|
| फार्म-1 | आवेदन (Application) |
| फार्म-2 | अनंतिम या पूर्ण विनिर्देश (Provisional Or Complete Specification) |
| फार्म-18 | परीक्षा अनुरोध (Request for Examination) |
| फार्म-26 | पॉवर ऑफ अटौनी (Power of Attorney) |
इसे भी पढे-
- Copyright क्या होता है?| Copyright का रजिस्ट्रेशन कौन लेता है और इससे क्या लाभ है?
- Trademark क्या होता है?|Trademark का रजिस्ट्रेशन कैसे करे और क्या महत्व है?
पेटेंट उल्लंघन पर सज़ा या हर्जाने का प्रावधान
भारत के पेटेंट अधिनियम, 1970 के अनुसार पेटेंट उल्लंघन पर मुख्य रूप से हर्जाने (Civil Remedies) का प्रावधान है, न कि आपराधिक सज़ा का।
हर्जाने / दंड के प्रावधान
- निषेधाज्ञा (Injunction): न्यायालय उल्लंघनकर्ता को पेटेंटेड उत्पाद बनाने, बेचने, उपयोग करने या आयात करने से रोक सकता है।
- क्षतिपूर्ति / हर्जाना (Damages): पेटेंटधारक को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई उल्लंघनकर्ता से कराई जाती है। हर्जाने की राशि कोर्ट तय करती है।
- लाभ की वसूली (Account of Profits): उल्लंघनकर्ता द्वारा पेटेंट के गलत उपयोग से कमाया गया लाभ पेटेंटधारक को दिलाया जा सकता है।
- उत्पाद की जब्ती व नष्ट करना: उल्लंघन से जुड़े उत्पाद, सामग्री या मशीनरी जब्त कर नष्ट की जा सकती है।
- कानूनी खर्च (Legal Costs): मुकदमे का खर्च और वकील फीस उल्लंघनकर्ता से वसूल की जा सकती है।
महत्वपूर्ण बिंदु: पेटेंट उल्लंघन पर जेल या आपराधिक सज़ा का प्रावधान नहीं है। यह मामला सिविल कोर्ट में दायर होता है। जानबूझकर और व्यावसायिक उल्लंघन पर भारी हर्जाना लगाया जा सकता है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. पेटेंट क्या है?
पेटेंट सरकार द्वारा दिया गया कानूनी अधिकार है, जो आविष्कारक को अपने आविष्कार पर विशेष अधिकार देता है।
Q2. पेटेंट कितने साल के लिए मिलता है?
भारत में पेटेंट की वैधता 20 वर्ष होती है।
Q3. कौन पेटेंट के लिए आवेदन कर सकता है?
आविष्कारक, संयुक्त आविष्कारक, कंपनी, संस्था या कानूनी उत्तराधिकारी आवेदन कर सकते हैं।
Q4. पेटेंट कराने में कितना समय लगता है?
सामान्यतः 2 से 4 वर्ष लग सकते हैं, प्रक्रिया और आपत्तियों पर निर्भर करता है।
Q5. पेटेंट रद्द (Revocation) कब हो सकता है?
यदि आविष्कार नया न हो, गलत जानकारी दी गई हो या कानून का उल्लंघन हो, तो पेटेंट रद्द किया जा सकता है।
Q6. क्या सॉफ्टवेयर पर पेटेंट मिलता है?
केवल सॉफ्टवेयर पर नहीं, लेकिन यदि वह किसी तकनीकी आविष्कार से जुड़ा हो तो संभव है।
Q7. पेटेंट और ट्रेडमार्क में क्या अंतर है?
पेटेंट आविष्कार के लिए होता है, जबकि ट्रेडमार्क ब्रांड नाम या लोगो के लिए।
Q8. पेटेंट मिलने के क्या लाभ हैं?
एकाधिकार अधिकार, लाइसेंस से आय, कानूनी सुरक्षा और व्यावसायिक लाभ।
Q9. क्या आइडिया पर पेटेंट मिल सकता है?
नहीं, केवल आइडिया पर पेटेंट नहीं मिलता। आविष्कार नया, उपयोगी और औद्योगिक रूप से लागू होना चाहिए।
Q10. क्या विदेश में किया गया आविष्कार भारत में पेटेंट हो सकता है?
हाँ, विदेशी नागरिक या कंपनी भारतीय पेटेंट कानून के तहत भारत में आवेदन कर सकते हैं।
Q11. पेटेंट और कॉपीराइट में क्या अंतर है?
पेटेंट आविष्कार के लिए होता है, जबकि कॉपीराइट साहित्य, संगीत और सॉफ्टवेयर जैसे कार्यों के लिए होता है।
Q12. पेटेंट आवेदन की फीस कितनी होती है?
पेटेंट फीस आवेदक की श्रेणी (Individual, Startup, MSME, Company) पर निर्भर करती है। स्टार्टअप और MSME को सरकारी फीस में छूट मिलती है।
Q13. क्या एक ही आविष्कार पर दो पेटेंट हो सकते हैं?
नहीं, एक आविष्कार पर केवल एक ही पेटेंट दिया जाता है।
Q14. क्या पेटेंट बेचा जा सकता है?
हाँ, पेटेंटधारक अपने अधिकार किसी अन्य व्यक्ति या कंपनी को बेच (Assignment) सकता है।
Q15. पेटेंट उल्लंघन की सजा क्या है?
अदालत जुर्माना, हर्जाना या उत्पाद की बिक्री पर रोक लगा सकती है।