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BNS की धारा 66 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 66 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 66 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 66? साथ ही हम आपको BNS की धारा 66 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 66 में यदि कोई व्यक्ति किसी महिला से दुष्कर्म (Rape) करता है और ऐसे अपराध के दौरान ऐसी कोई क्षति होती है, जिससे उस महिला की मृत्यु कारित हो जाती है या वह स्थायी शारीरिक/मानसिक विकलांगता (Persistent Vegetative State सहित) की स्थिति में पहुँच जाती है, तो वह दंड/जुर्माने दोनो से या आजीवन कारावास या मृत्युदंड से दंडित किया जायेगा, तो वह BNS की धारा 66 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जा सकता है। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-376A के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 66 का विवरण (Section 65 BNS)

BNS की धारा 66 के अनुसार, यदि कोई महिला के साथ बलात्संग (Rape) जैसे घृणित अपराध करता है ऐसे अपराध के दौरान ऐसी कोई क्षति होती है, जिससे उस महिला की मृत्यु कारित हो जाती है या वह स्थायी शारीरिक/मानसिक विकलांगता (Persistent Vegetative State सहित) की स्थिति में पहुँच जाती है, तो यह धारा 66 कम से कम 20 वर्ष का कठोर कारावास, जो आजीवन कारावास तक बढ़ सकता है, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जा सकेगा, इसके अलावा आजीवन कारावास तक जुर्माने या मृत्युदंड तक हो सकती है।

बीएनएस की धारा 66 के अनुसार (BNS Section 66 in Hindi)

66. पीड़िता की मृत्यु या सतत् विकृतशील दशा कारित करने के लिए दण्ड जो कोई, धारा 64 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन दण्डनीय कोई अपराध करता है और ऐसे अपराध के दौरान ऐसी कोई क्षति पहुँचाता है, जिससे उस महिला की मृत्यु कारित हो जाती है या जिसके कारण उस स्त्री की दशा सतत् विकृतशील हो जाती है, तो वह ऐसी अवधि के कठोर कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, तक की हो सकेगी या मृत्युदण्ड से दंडित किया जाएगा।

(BNS) बीएनएस की धारा 66 के अनुसार (BNS Section 66 in English)

66. Punishment for causing death or resulting in persistent vegetative state of victim. Whoever, commits an offence punishable under sub-section (1) or sub-section (2) of Section 64 and in the course of such commission inflicts an injury which causes the death of the woman or causes the woman to be in a persistent vegetative state, shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than twenty years, but which may extend to imprisonment for life, which shall mean imprisonment for the remainder of that person's natural life, or with death.

बीएनएस की धारा 66 एवंम् आईपीसी की धारा 376A मे अंतर

बीएनएस की धारा 66 दुष्कर्म (बलात्कार) के परिणामस्वरूप पीड़िता की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी शारीरिक/मानसिक विकलांगता (Persistent Vegetative State सहित) की स्थिति में पहुँच जाती है। IPC की धारा 376(A) के स्थान पर वर्तमान मे बीएनएस की धारा 66 लागू होती है। इसमे मुख्यतः मुआवजा अनिवार्य कर दिया गया है, पहले भी मुआवजा था, लेकिन सीमित।

IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 376(A)BNS Section 66मुआवजा अनिवार्य

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • आजीवन कारावास (पूरे जीवनकाल तक), या
  • मृत्युदंड (Death Penalty)
  • जुर्माना (Fine):
  • अदालत द्वारा अनिवार्य रूप से जुर्माना लगाया जा सकता है
  • जुर्माने की राशि का उपयोग:पीड़िता के इलाज (Medical Treatment)
  • पुनर्वास (Rehabilitation)
  • मृत्यु की स्थिति में आश्रितों को मुआवज़ा देने हेतु किया जाता है

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
बलात्संग का अपराध करने और ऐसी क्षति पहुचाने वाले वाला व्यक्ति, जिससे महिला की मृत्यु या विकृतशील दशा हो जाती हैकम से कम 20 वर्ष के लिये कठोर कारावास, किन्तु जो आजीवन कारावास और जुर्माना या मृत्युदंडसंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 66 (BNS 66) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. धारा 66 कब लागू होती है?

जब दुष्कर्म के कारण पीड़िता की मृत्यु हो जाए या स्थायी विकलांगता हो जाए।

Q2. इस धारा के अंतर्गत न्यूनतम सजा क्या है?

आजीवन कारावास, जिसका अर्थ है पूरे जीवनकाल तक कारावास।

Q3. अधिकतम सजा क्या दी जा सकती है?

मृत्युदंड (Death Penalty), जो अदालत अपराध की गंभीरता के आधार पर दे सकती है।

Q4. क्या जुर्माना लगाना अनिवार्य है?

हाँ। बीएनएस की धारा 66 में जुर्माना अनिवार्य रूप से लगाया जा सकता है, और इसका स्पष्ट उद्देश्य निर्धारित है।

Q5. क्या पीड़िता की सहमति से सजा कम हो सकती है?

नहीं। ऐसे मामलों में सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं होता।

Rahul Pal (Prasenjit)
Rahul Pal (Prasenjit)https://mylegallaw.com
मै पिछसे 8 वर्षो से टैक्स सलाहकार के रूप मे कार्यरत् हूं, इसके अलावा मेरा शौक टैक्स सम्बन्धी आर्टिकल एवंम् कानून से सम्बन्धित जानकारियां आपके साथ साझा करने का है। पेशे से मै एक वकील एवंम् कर सलाहकार हूं।
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