नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 67 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 67? साथ ही हम आपको BNS की धारा 67 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 67 में यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से अलग रहने के दौरान उसकी सहमति के बिना दुष्कर्म (Rape) करता है और अपनी पत्नी से अलग रह रहा हो (चाहे अदालत के आदेश से या किसी और कारण से) तो वह दंड/जुर्माने दोनो से कम से कम 2 वर्ष या अधिक से अधिक 7 वर्ष वर्ष के लिये दंडित किया जायेगा, तो वह BNS की धारा 67 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जा सकता है। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-376B) के स्थान पर लागू किया गया है।
Important Highlights
बीएनएस की धारा 67 का विवरण (Section 67 BNS)
BNS की धारा 67 के अनुसार, यदि अगर कोई पति, अपनी पत्नी से अलग रह रहा हो (चाहे अदालत के आदेश से या किसी और कारण से), और वह पत्नी की मर्ज़ी (सम्मति) के बिना उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता है तो यह धारा 67 के अन्तर्गत कम से कम 2 वर्ष का कारावास, जो 7 वर्ष तक बढ़ सकता है, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जा सकेगा। यह कानून अलग रह रही पत्नी की सुरक्षा के लिए बनाया गया है।
बीएनएस की धारा 67 के अनुसार (BNS Section 67 in Hindi)
67. पृथक्करण के दौरान पति द्वारा अपनी पली के साथ मैथुन जो कोई, अपनी पत्नी के साथ, उसकी सम्मति के बिना मैथुन करेगा, जो पृथक्करण की किसी डिक्री के अधीन या अन्यथा, उससे पृथक रह रही है, यह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की ही सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
स्पष्टीकरण- इस भारा में, "मैथुन" से धारा 63 के खण्ड (क) से खण्ड (घ) में वर्णित कोई भी कृत्य अभिप्रेत है।
BNS की धारा 67 के अनुसार (BNS Section 67 in English)
67. Sexual intercourse by husband upon his wife during separation.-Whoever has sexual intercourse with his own wife, who is living separately, whether under a decree of separation or otherwise, without her consent, shall be punished with imprisonment of either description for a term which shall not be less than two years but which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.
Explanation- In this section, "sexual intercourse" shall mean any of the acts mentioned in clauses (a) to (d) of Section 63.
बीएनएस की धारा 67 एवंम् आईपीसी की धारा 376B मे अंतर
बीएनएस की धारा 67 IPC की धारा 376B के स्थान पर वर्तमान मे बीएनएस की धारा 67 लागू होती है। इसमे मुख्यतः मुआवजा अनिवार्य कर दिया गया है, पहले भी मुआवजा था, लेकिन सीमित और यह कानून पति-पत्नी अलग रह रहे पत्नी को अधिक सुरक्षा प्रदान करता है। पति–पत्नी का अलग-अलग रहना ज़रूरी शर्त है।
| IPC के तहत धारा | BNS के तहत धारा | प्रमुख बदलाव (Major Changement) |
|---|---|---|
| IPC 376B | BNS Section 67 | मुआवजा अनिवार्य (यह कानून अलग रह रही पत्नी की अधिक सुरक्षा प्रदान करता है। |
जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान
- कम से कम 2 साल की जेल,
- ज़्यादा से ज़्यादा 7 साल तक की जेल,
- और इसके साथ जुर्माना भी लग सकता है।
जमानत (Bail) का प्रावधान
| अपराध | सजा | अपराध श्रेणी | जमानत | विचारणीय |
|---|---|---|---|---|
| पति व्दारा अपनी पत्नी के साथ पृथक्करण के दौरान मैथुन | कम से कम 2 वर्ष के लिये कारावास, किन्तु जो 7 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना | संज्ञेय | जमानतीय | सेशन न्यायालय |
हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 67 (BNS 67) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. धारा 67 किस बारे में है?
यह धारा उस स्थिति से संबंधित है जब पति और पत्नी अलग-अलग रह रहे हों और पति पत्नी की बिना सहमति उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
Q2. “पृथक्करण” का क्या मतलब है?
पृथक्करण का मतलब है पति-पत्नी का अलग रहना।
यह अलगाव:कोर्ट की डिक्री (Judicial Separation) से, या आपसी विवाद, घरेलू कारणों से भी हो सकता है।
Q3. क्या हर पति-पत्नी के बीच बिना सहमति संबंध इस धारा में आएगा?
नहीं। यह धारा तभी लागू होगी, जब पति-पत्नी अलग रह रहे हों, और पत्नी की सहमति न हो।
Q4. क्या पत्नी की सहमति होने पर अपराध बनेगा?
नहीं। अगर पत्नी स्वेच्छा से सहमत है, तो यह अपराध नहीं माना जाएगा।
Q5. क्या यह धारा पत्नी की सुरक्षा के लिए बनाई गई है?
हाँ। इसका उद्देश्य अलग रह रही पत्नी की शारीरिक स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा करना है।