नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 68 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 68? साथ ही हम आपको BNS की धारा 68 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 68 में यदि कोई व्यक्ति अपने पद पर होते हुये, अधिकार या भरोसे के रिश्ते का गलत फायदा उठाकर किसी महिला से शारीरिक संबंध बनाने के लिए उसे मजबूर करता है, बहकाता है या दबाव डालता है, और यह कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता, तो वह दंड/जुर्माने दोनो से कम से कम 5 वर्ष या अधिक से अधिक 10 वर्ष तक के लिये कठोर कारावास से दंडित किया जायेगा, तो वह BNS की धारा 68 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने दोनो से दण्डित किया जा सकता है। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-376C) के स्थान पर लागू किया गया है।
Important Highlights
बीएनएस की धारा 68 का विवरण (Section 68 BNS)
BNS की धारा 68 के अनुसार, यदि अगर कोई लोक सेवक (जेल, रिमांड होम, संरक्षण गृह, महिला या बाल संस्था) अपने पद मे होते हुये, अधिकार या भरोसे के रिश्ते (जैसे शिक्षक, कोच, धार्मिक गुरु, अभिभावक जैसी स्थिति वाला व्यक्ति) या अस्पताल का स्टाफ या प्रबंधन (डॉक्टर, नर्स, वार्ड बॉय, मैनेजमेंट आदि) गलत फायदा उठाकर किसी महिला से शारीरिक संबंध बनाने के लिए उसे मजबूर करता है, बहकाता है या दबाव डालता है, और यह कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता तो वह धारा 68 के अन्तर्गत कम से कम 5 वर्ष का कठोर कारावास, जो 10 वर्ष तक बढ़ सकता है, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जा सकेगा।
बीएनएस की धारा 68 के अनुसार (BNS Section 68 in Hindi)
68. प्राधिकार में किसी व्यक्ति द्वारा मैथुन जो कोई-
(क) प्राधिकार की किसी स्थिति या वैश्वासिक सम्बन्ध रखते हुए। या
(ख) लोक सेवक होते हुए, या
(ग) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी कारागार, प्रतिप्रेषण-गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान का या महिलाओं या शिशुओं की किसी संस्था का अधीक्षक या प्रबन्धक होते हुए या
(घ) अस्पताल के प्रबन्धतन्त्र या किसी अस्पताल का कर्मचारिवृंद होते हुए,
ऐसी किसी महिला की, जो उसकी अभिरक्षा में है या उसके भारसाधन के अधीन है या परिसर में उपस्थित है, अपने साथ मैथुन करने हेतु, जो बलात्संग के अपराध की कोटि में नहीं आता है, उत्प्रेरित या विसुब्ध करने के लिए ऐसी स्थिति या वैश्वासिक सम्बन्ध का दुरुपयोग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कठिन कारावास में, जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
स्पष्टीकरण 1- इस धारा में "मैथुन" से धारा 63 के खण्ड (क) से खण्ड (घ) में वर्णित कोई भी कृत्य अभिप्रेत होगा।
स्पष्टीकरण 2- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, धारा 63 का स्पष्टीकरण 1 भी लागू होगा।
स्पष्टीकरण 3- किसी कारागार, प्रतिप्रेषण-गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान या महिलाओं या शिशुओं की किसी संस्था के सम्बन्ध में "अधीक्षक" के अन्तर्गत कोई ऐसा व्यक्ति है, जो ऐसे कारागार, प्रतिप्रेषण-गृह, स्थान या संस्था में ऐसा कोई पद धारण करता है, जिसके आधार पर वह उसके अंतःवासियों पर किसी प्राधिकार या नियन्त्रण का प्रयोग कर सकता है।
स्पष्टीकरण 4- "अस्पताल" और "महिलाओं या शिशुओं की संस्था" पदों का क्रमशः वही अर्थ होगा, जो धारा 64 की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण के खंड (ख) और खंड (घ) में उनका है।
BNS की धारा 68 के अनुसार (BNS Section 68 in English)
68. Sexual intercourse by a person in authority.- Whoever, being-
(a) in a position of authority or in a fiduciary relationship; or
(b) a public servant; or
(c) superintendent or manager of a jail, remand home or other place of custody established by or under any law for the time being in force, or a women's or children's institution; or
(d) on the management of a hospital or being on the staff of a hospital, abuses such position or fiduciary relationship to induce or seduce any woman either in his custody or under his charge or present in the premises to have sexual intercourse with him, such sexual intercourse not amounting to the offence of rape, shall be punished with rigorous imprisonment of either description for a term which shall not be less than five years, but which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
Explanation 1.- In this section, "sexual intercourse" shall mean any of the acts mentioned in clauses (a) to (d) of Section 63.
Explanation 2.- For the purposes of this section, Explanation 1 to Section shall also be applicable.
Explanation 3.- "Superintendent", in relation to a jail, remand home of other place of custody or a women's or children's institution, includes a pen virtue of which such person can exercise any authority or control over holding any other office in such jail, remand home, place or institutionby inmates.
Explanation 4.- The expressions "hospital" and "women's or child institution" shall respectively have the same meaning as in Clauses (b) and (d) of the Explanation to sub-section (2) of Section 64.
किन-किन पर यह धारा लागू होती है?
यह धारा उन लोगों पर लागू होती है जो अपनी पावर या जिम्मेदारी का दुरुपयोग करते हैं, जैसे—
1.अधिकार या भरोसे की स्थिति में व्यक्ति –
- (जैसे शिक्षक, कोच, धार्मिक गुरु, अभिभावक जैसी स्थिति वाला व्यक्ति)
2. लोक सेवक
- (सरकारी अधिकारी/कर्मचारी)
3. जेल, रिमांड होम, संरक्षण गृह, महिला या बाल संस्था के
- अधीक्षक
- प्रबंधक
- या ऐसा कोई व्यक्ति जिसके पास वहां रहने वालों पर नियंत्रण हो
4. अस्पताल का स्टाफ या प्रबंधन
- (डॉक्टर, नर्स, वार्ड बॉय, मैनेजमेंट आदि)
अपराध कब माना जाएगा?
जब ऊपर बताए गए व्यक्ति—
- अपनी पद-शक्ति या भरोसे का गलत इस्तेमाल करें, और
- उस महिला से, जो उनकी निगरानी, देखरेख, नियंत्रण या परिसर में मौजूद हो,
- शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डालें, बहकाएँ या मजबूर करें।
बीएनएस की धारा 68 एवंम् आईपीसी की धारा 376C मे अंतर
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376C और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 68 दोनों धाराओं का उद्देश्य उन मामलों को दंडित करना है, जहाँ कोई व्यक्ति अपने पद, अधिकार या विश्वास के संबंध का दुरुपयोग कर किसी महिला से शारीरिक संबंध बनाता है, और यह कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता। अब मुआवजा अनिवार्य है, और नये बीएनएस 68 में न केवल लोक सेवक, बल्कि कोई भी व्यक्ति जो अधिकार, प्रभुत्व या भरोसे की स्थिति में हो।
| IPC के तहत धारा | BNS के तहत धारा | प्रमुख बदलाव (Major Changement) |
|---|---|---|
| IPC 376C | BNS Section 68 | मुआवजा अनिवार्य |
जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान
- कम से कम 5 साल का कठोर कारावास,
- ज़्यादा से ज़्यादा 10 साल तक की कठोर कारावास,
- और इसके साथ जुर्माना भी लग सकता है।
जमानत (Bail) का प्रावधान
| अपराध | सजा | अपराध श्रेणी | जमानत | विचारणीय |
|---|---|---|---|---|
| प्राधिकार, आदि मे किसी व्यक्ति व्दारा मैथुन | कम से कम 5 वर्ष के लिये कठोर कारावास, किन्तु जो 10 वर्ष तक का कारावास हो सकेगा और जुर्माना | संज्ञेय | गैर-जमानतीय | सेशन न्यायालय |
हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 68 (BNS 68) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. यह धारा किन लोगों पर लागू होती है?
यह धारा निम्न पर लागू होती है:लोक सेवक, शिक्षक, कोच, धार्मिक/संस्थागत पदाधिकारी, जेल, रिमांड होम, संरक्षण गृह के अधिकारी, महिला या बाल संस्था के अधीक्षक/प्रबंधक, अस्पताल के डॉक्टर, नर्स, स्टाफ या प्रबंधन कोई भी व्यक्ति जो अधिकार या भरोसे की स्थिति में हो।
Q2. महिला की कौन-सी स्थिति में यह धारा लागू होगी?
जब महिला:आरोपी की अभिरक्षा या देखरेख में हो, या आरोपी के नियंत्रण/भारसाधन में हो, या ऐसे परिसर में उपस्थित हो जहाँ आरोपी का अधिकार या नियंत्रण हो।
Q3. क्या यह अपराध बलात्कार माना जाता है?
नहीं। यह धारा उन मामलों के लिए है जो बलात्कार की कानूनी परिभाषा में नहीं आते, लेकिन फिर भी गंभीर यौन शोषण होते हैं।
Q4. क्या यह अपराध समझौते (Compromise) से समाप्त किया जा सकता है?
नहीं। धारा 68 एक गंभीर, संज्ञेय और गैर-समझौतायोग्य अपराध है। समझौते से मामला समाप्त नहीं होता।
Q5. क्या इस धारा में सजा के साथ मुआवज़ा भी मिल सकता है?
हाँ। न्यायालय जुर्माने के अतिरिक्त पीड़िता को मुआवज़ा देने का आदेश भी दे सकता है।