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BNS की धारा 71 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 71 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 71 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 71? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 71 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 71 में यदि कोई व्यक्ति पूर्व मे भी बलात्कार या उससे जुड़े गंभीर अपराधों (धारा 64, 65, 66 या 70) में दोषी ठहराया जा चुका है, फिर उन्ही धाराओ पर अपराध दोहराता है, तो वह धारा 71 के आजीवन कारावास या मृत्युदंड साथ ही जुर्माना (Fine) से भी से दंडित किया जायेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-376E) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 71 का विवरण (Section 71 BNS)

BNS की धारा 71 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पहले से ही बलात्कार या उससे जुड़े गंभीर अपराधों (धारा 64, 65, 66 या 70) में दोषी ठहराया जा चुका है, और बाद में वह फिर से इन्हीं धाराओं में से कोई अपराध को अंजाम देता है, तो वह धारा 71 के अन्तर्गत आजीवन कारावास या मृत्युदंड साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जायेगा।

बीएनएस की धारा 71 के अनुसार (BNS Section 71 in Hindi)

71. पुनरावृत्तिकर्ता अपराधियों के लिए दण्ड- जो कोई, धारा 64 या धारा 65 या धारा 66 या धारा 70 के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए पूर्व में दोषसिद्ध किया गया है और तत्पश्चात् उक्त धाराओं में से किसी के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया जाता है, तो वह आजीवन कारावास से, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, या मृत्युदण्ड से, दंडित किया जाएगा।

BNS की धारा 71 के अनुसार (BNS Section 71 in English)

71. Punishment for repeat offenders.- Whoever has been previously convicted of an offence punishable under Section 64 or Section 65 or Section 77 or Section 70 and is subsequently convicted of an offence punishable under any of the said sections shall be punished with imprisonment for life which shall mean imprisonment for the remainder of that person's natural life, or with death.

बीएनएस की धारा 71 एवंम् आईपीसी की धारा 376E मे अंतर

आईपीसी की धारा 376E केवल बार-बार बलात्कार करने वालों पर लागू थी, जबकि बीएनएस की धारा 71 का दायरा व्यापक है और इसमें कई गंभीर यौन अपराध से सम्बन्धित कई अपराध और भी शामिल हैं।

IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 376EBNS Section 71मुआवजा अनिवार्य

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • आजीवन कारावास
  • या मृत्यु दंड

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
पुनरावृत्तिकर्ता अपराधीआजीवन कारावास या मृत्युदंडसंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 71 (BNS 71) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. दोनों धाराओं में मुख्य अंतर क्या है?

बीएनएस धारा 71 का दायरा अधिक व्यापक है, जबकि आईपीसी 376E केवल बलात्कार तक सीमित थी।

Q2. बीएनएस धारा 71 किन अपराधों पर लागू होती है?

यह धारा 64, 65, 66 और 70 के अंतर्गत आने वाले अपराधों की पुनरावृत्ति पर लागू होती है।

Q3. क्या पहली बार अपराध करने पर धारा 71 लगेगी?

नहीं। यह धारा केवल दूसरी बार या पुनरावृत्ति होने पर लागू होती है।

Q4. क्या यह अपराध जमानती है?

नहीं। यह एक अत्यंत गंभीर, गैर-जमानती अपराध है।

Q5. आईपीसी की धारा 376E किसके लिए थी?

यह धारा केवल बार-बार बलात्कार करने वाले अपराधियों के लिए थी, जिन्हें पहले बलात्कार में दोषी ठहराया जा चुका हो।

Rahul Pal (Prasenjit)
Rahul Pal (Prasenjit)https://mylegallaw.com
मै पिछसे 8 वर्षो से टैक्स सलाहकार के रूप मे कार्यरत् हूं, इसके अलावा मेरा शौक टैक्स सम्बन्धी आर्टिकल एवंम् कानून से सम्बन्धित जानकारियां आपके साथ साझा करने का है। पेशे से मै एक वकील एवंम् कर सलाहकार हूं।
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