नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 78 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 78? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 78 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 78 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी महिला के साथ जबरदस्ती संपर्क बढ़ाने के इरादे से, उसके मना करने के बावजूद बार-बार उसका पीछा करता है, उसे छूता है या छूने की कोशिश करता है अथवा कोई पुरुष किसी महिला की ऑनलाइन गतिविधियों—जैसे इंटरनेट, ई-मेल, सोशल मीडिया या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों—पर नज़र रखता है या निगरानी करता है, तो वह धारा 78 के अन्तर्गत कम से कम से 3 वर्ष से 5 वर्ष तक का कारावास, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी से दंडित किया जायेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-354D) के स्थान पर लागू किया गया है।
Important Highlights
बीएनएस की धारा 78 का विवरण (Section 78 BNS)
BNS की धारा 78 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी महिला के मना करने के बाद भी उसका पीछा करना, जबरदस्ती संपर्क बनाने की कोशिश करना या उसकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना कानूनन अपराध है, तो वह धारा 78 के अन्तर्गत प्रथम बार दोषी होने पर 3 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना, दूसरी बार या अपराध दोहराने का दोषी होने पर 5 वर्ष का कारावास और जुर्माना (Fine) से दंडित किया जा सकेगा।
बीएनएस की धारा 78 के अनुसार (BNS Section 78 in Hindi)
78. पीछा करना- (1) ऐसा कोई पुरुष, जो-
(i) किसी महिला का, उससे व्यक्तिगत अन्योन्यक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए, उस महिला द्वारा स्पष्ट रूप से अनिच्छा उपदर्शित किए जाने के बावजूद, बारंबार पीछा करता है और स्पर्श करता है या स्पर्श करने का प्रयत्न करता है; या
(ii) किसी महिला द्वारा इंटरनेट, ई-मेल या किसी अन्य प्ररूप की इलेक्ट्रानिक संसूचना का प्रयोग किए जाने को मानीटर करता है,
पीछा करने का अपराध करता है :
परन्तु ऐसा आचरण पीछा करने की कोटि में नहीं आएगा, यदि वह पुरुष, जो ऐसा करता है, यह साबित कर देता है कि-
(i) ऐसा कार्य अपराध के निवारण या पता लगाने के प्रयोजन के लिए किया गया था और पीछा करने वाले अभियुक्त पुरुष को राज्य द्वारा उस अपराध के निवारण और पता लगाने का उत्तरदायित्व सौंपा गया था; या
(ii) ऐसा कार्य किसी विधि के अधीन किया गया था या किसी विधि के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा अधिरोपित किसी शर्त या अपेक्षा का पालन करने के लिए किया गया था; या
(iii) विशिष्ट परिस्थितियों में ऐसा आचरण युक्तियुक्त और न्यायोचित था।
(2) जो कोई, पीछा करने का अपराध कारित करता है, तो वह प्रथम दोषसिद्धि पर, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा; और द्वितीय एवं पश्चातवर्ती किसी दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि पाँच वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
BNS की धारा 78 के अनुसार (BNS Section 78 in English)
78. Stalking.-(1) Any man who-
(i) follows a woman and contacts, or attempts to contact such woman to foster personal interaction repeatedly despite a clear indication of disinterest by such woman; or
(ii) monitors the use by a woman of the internet, e-mail or any other form of electronic communication,
commits the offence of stalking:
Provided that such conduct shall not amount to stalking if the man who pursued it proves that-
(i) it was pursued for the purpose of preventing or detecting crime and the man accused of stalking had been entrusted with the responsibility of prevention and detection of crime by the State; or
(ii) it was pursued under any law or to comply with any condition or requirement imposed by any person under any law; or
(iii) in the particular circumstances such conduct was reasonable and justified.
(2) Whoever commits the offence of stalking shall be punished on first conviction with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, and shall also be liable to fine; and be punished on a second or subsequent conviction, with imprisonment of either description for a term which may extend to five years, and shall also be liable to fine.
बीएनएस की धारा 78 एवंम् आईपीसी की धारा 354D मे अंतर
- दोनों धाराओं में अपराध और सजा लगभग समान हैं।
- बीएनएस की धारा 78, आईपीसी की धारा 354D का आधुनिक और स्पष्ट रूप है।
- बीएनएस में स्पर्श/स्पर्श के प्रयास को अधिक स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
| IPC के तहत धारा | BNS के तहत धारा | प्रमुख बदलाव (Major Changement) |
|---|---|---|
| IPC 354D | BNS Section 78 | बीएनएस में स्पर्श/स्पर्श के प्रयास को अधिक स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है |
जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान
पहली बार दोषी होने पर:
- 3 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना
दूसरी या उसके बाद की बार दोषी होने पर:
- 5 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना
जमानत (Bail) का प्रावधान
| अपराध | सजा | अपराध श्रेणी | जमानत | विचारणीय |
|---|---|---|---|---|
| पीछा करना | 3 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना | संज्ञेय | जमानतीय | कोई भी मजिस्ट्रेट |
| व्दितीय या पश्ताच्वर्ती दोषसिद्ध | 5 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना | संज्ञेय | गैर-जमानतीय | कोई भी मजिस्ट्रेट |
हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 78 (BNS 78) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. बीएनएस अधिनियम की धारा 78 क्या है?
बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता), 2023 की धारा 78 पीछा करने (Stalking) से संबंधित है। जब कोई पुरुष किसी महिला के मना करने के बावजूद बार-बार उसका पीछा करता है, संपर्क बढ़ाने की कोशिश करता है या उसकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखता है, तो यह अपराध माना जाता है।
Q2. क्या ऑनलाइन निगरानी भी अपराध है?
हां, बिना सहमति महिला की ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखना धारा 78 के अंतर्गत अपराध है।
Q3. धारा 78 के अंतर्गत सजा क्या है?
प्रथम दोषसिद्धि पर: अधिकतम 3 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना
द्वितीय या बाद की दोषसिद्धि पर: अधिकतम 5 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना
Q4. क्या महिला की स्पष्ट असहमति आवश्यक है?
हां, महिला द्वारा स्पष्ट रूप से अनिच्छा व्यक्त किए जाने के बाद भी यदि पीछा किया जाता है, तभी यह अपराध बनता है।
Q5. धारा 78 का व्यावहारिक महत्व क्या है?
यह धारा महिला उत्पीड़न, साइबर स्टॉकिंग और मानसिक प्रताड़ना को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Q6. धारा 78 के अंतर्गत कौन-कौन से कृत्य अपराध हैं?
महिला के मना करने के बावजूद बार-बार उसका पीछा करना
उसे छूना या छूने का प्रयास करना
जबरदस्ती व्यक्तिगत संपर्क बनाने की कोशिश करना
महिला की इंटरनेट, ई-मेल, सोशल मीडिया या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों की निगरानी करना